ज्यादात्तर लोगों को पापड़ बेहद भाता है, इसलिए दिनभर खाते ही रहते है। लेकिन ये शौक कहीं पर महंगा नहीं पड़ जाएं, जी हां पापड़ खाना सेहत के लिए नुकसानदायी होता है। क्या आप जानते है कि ये हमारी सेहत के लिए कितना हानिकारक होता है?
पापड़ को खाने से हमारे शरीर को बहुत नुकसान पहुंचता है। चलिए जानते है किस तरह पापड़ हमारी सेहत को प्रभावित करता है।
– सेहत से जुड़ी कई समस्याएं : पापड़ बनाते वक्त इसमें प्रिजर्वेटिव का प्रयोग किया जाता है। इस प्रिजर्वेटिव में सोडियम मिलाया जाता है। इससे पापड़ का स्वाद बढ़ता है लेकिन इससे सेहत से जुड़ी कई समस्याएं पैदा करता है।
-किडनी और हार्ट से जुड़ी बीमारियां : पापड़ में यूज किए गए प्रिजर्वेटिव से किडनी तथा हार्ट से जुड़ी बीमारियां होने का खतरा बढ़ जाता है।
-बढ़ाता हैं मोटापा : पापड़ खाने से मोटापा बढ़ता है क्योंकि इसमें दो रोटी जितनी कैलोरी होती है। अगर आप अपना वजन कम करना चाहते है तो इसका सेवन न कीजिए।
– एसिडिटी तथा गैस की समस्या : इसे बनाते वक्त इसमें अधिक मसाला तथा आर्टिफिशियल फ्लेवर मिलाया जाता है। इससे एसिडिटी और गैस की परेशानी होती है।
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ज्वाला गुट्टा
ज्वाला गुट्टा ने 6 साल की उम्र से बैडमिंटन खेलना शुरू कर दिया था.
बैडमिंटन स्टार ज्वाला गुट्टा आज अपना 36वां जन्मदिन मना रही हैं. बाएं हाथ की इंटरनेशनल बैडमिंटन खिलाड़ी गुट्टा ने अपने करियर में कई उपलब्धियां हासिल की हैं. भारत की सबसे बेहतरीन डबल्स प्लेयर रहने के साथ-साथ रिकॉर्ड 13 बार नेशनल बैडमिंटन चैंपियनशिप की विजेता बनीं. 2010 और 2014 के कॉमनवेल्थ गेम्स में गोल्ड मेडल जीता. साल 2011 में भारत सरकार ने उन्हें खेल जगत में विशेष योगदान के लिए ‘अर्जुन पुरस्कार’ से सम्मानित किया.
ज्वाला गुट्टा का जन्म आज ही के दिन साल 1983 को महाराष्ट्र में हुआ था. हैदराबाद से अपनी प्रारंभिक पढ़ाई के दौरान ही ज्वाला ने बैडमिंटन खेलना भी शुरू कर दिया था. 10 साल की उम्र से बैडमिंटन की प्रोफेशनल ट्रेनिंग लेने लगी. 13 साल की उम्र में पहली बार मिनी नेशनल बैडमिंटन चैंपियनशिप जीती. 17 साल की उम्र में उन्होंने जूनियर नेशनल बैडमिंटन चैंपियनशिप का खिताब जीता.
मामूट्टी (Mammootty)
मामूट्टी मलयालम फिल्मों के मेगा स्टार हैं.
साउथ फिल्मों के मेगा स्टार मामूट्टी आज अपना 68वां जन्मदिन मना रहे हैं. मामूट्टी मुख्य रूप से मलयालम फिल्मों के लिए जाने जाते हैं. करीब 48 साल के अपने फिल्मी करियर में वह 300 से ज्यादा फिल्मों में काम कर चुके हैं. इनमें से कई फिल्मों के लिए वह नेशनल फिल्म अवॉर्ड, स्टेट फिल्म अवॉर्ड और फिल्मफेयर अवॉर्ड हासिल कर चुके हैं. साल 1998 में भारत सरकार ने उन्हें ‘पद्म श्री’ से सम्मानित किया था.
मामूट्टी ने अपने फिल्मी सफर की शुरुआत साल 1971 में मलयालम फिल्म से की थी. इनकी हिट लिस्ट में द ग्रेट फादर, कसबा, थाप्पना, रोडरम, इंस्पेक्टर बलराम, अमराम, द किंग, ध्रुव, बिग बी जैसी फिल्मों के नाम शामिल है.
आज हम आपको दुनिया के सबसे बडे शिवलिंग के बारे में बताने जा रहे हैं इस शिवलिंग के बारे में ऐसा कहा जाता है कि इस शिवलिंग के जो भी दर्शन करता है वो कभी भी गरीब नहीं रहता है । आपकी जानकारी के लिए बता दें कि, ये शिवलिंग छत्तीसगढ में मौजूद है और इस जगह को भूतेश्वरनाथ का मंदिर कहा जाता हैं । बताया जा रहा है कि, ये प्राकृतिक रूप से निर्मित दुनिया का सबसे बड़ा शिवलिंग है । ये जमीन से लगभग 18 फीट ऊंचा और 20 फीट गोलाकार है। राजस्व विभाग द्वारा हर साल इसकी उचांई नापी जाती है, जिसमें हर साल यह 6 से 8 इंच तक का इजाफा होता है । 12 ज्योतिर्लिंगों की तरह इसे भी अर्धनारीश्वर शिवलिंग की मान्यता प्राप्त है ।
यहां के बारे में ऐसा कहा जाता है कि, कई साल पहले पारागांव निवासी जमींदार शोभा सिंह की यहां पर खेती-बाड़ी थी । शोभा सिंह शाम को जब अपने खेत मे घूमने जाते थे तो उन्हें एक टीले से सांड़ के हुंकारने और शेर के दहाड़ने की आवाज सुनाई पड़ती थी । शुरू में उन्हें लगा कि ये उनका वहम है, लेकिन कई बार इस आवाज को सुनने के बाद शोभा सिंह ने ग्रामवासियों को इस बारे में बताया। ग्रामवासियों ने भी टीले के पास कई बार आवाज सुनी थी। इसके बाद सभी ने आसपास सांड़ अथवा शेर की तलाश की, मगर उनको वहां पर कोई भी नहीं मिला । पहले ये टीला छोटे रूप में था पर धीरे-धीरे इसकी उंचाई और गोलाई बढ़ती गई। इस शिवलिंग में प्रकृति प्रदत्त जलहरी भी दिखाई देती है, जो धीरे-धीरे जमीन के ऊपर आती जा रही है।
जानकर हैरानी होगी कि उत्तर कोरिया में सड़को पर ट्रेफिक संभालने वाली ट्रेफिक लेडीज को भर्ती करने से पहले उनका लुक्स देखा जाता है । बता दें कि इन लड़कियों को 26 साल की उम्र ही नौकरी से हटा दिया जाता है । जब तक लड़कियां पुलिस में है तो उनको शादी करने की इजाजत नहीं दी जाती है । कोई ट्रेफिक संभालने वाली लड़की अगर शादी कर लेती है तो उसको नौकरी से हटा दिया जाता है । इन्हें आधिकारिक तौर पर ट्रैफिक सुरक्षा अधिकारी कहा जाता है । इसका अहम कारण है कि क्योंकि परमाणु शक्ति का देश विपरीत कोरिया की अलग तस्वीर पेश करता है ।
प्रशासन का खास ध्यान होता है कि ट्रैफिक संभालने वाली लड़कियां सुंदर और फोटोजेनिक चेहरे वाली युवा होनी चाहीए क्योंकि यहां आने वाले पर्यटक और पत्रकारों की इन पर विशेष नजर रहती है।
‘चंद्रयान-2’ के लैंडर ‘विक्रम’ का बीती रात चांद पर उतरते समय जमीनी स्टेशन से संपर्क टूट गया। सपंर्क तब टूटा जब लैंडर चांद की सतह से 2.1 किलोमीटर की ऊंचाई पर था। इस खबर के बारे में सुनते ही देश-दुनिया में इस मिशन पर नजर रख रहे लोगों को एक झटका लगा। हालांकि मिशन पूरी तरह फेल नहीं हुआ और ऑर्बिटर अभी भी सुरक्षित है और सही से काम कर रहा है। इस मौके पर पड़ोसी देश भूटान की तरफ से भी हौसला बढ़ाने वाला बयान दिया गया है।
भूटान के PM ने कहा, मोदी और ISRO पर पूरा भरोसा
भूटान के प्रधानमंत्री लोते शेरिंग ने इस मौके पर ट्वीट किया, ‘हमें भारत और इसके वैज्ञानिकों पर गर्व है। चंद्रयान-2 को आखिरी लम्हों में कुछ चुनौतियों का सामना करना पड़ा लेकिन आपने जो हिम्मत और मेहनत दिखाई है वह ऐतिहासिक है। मैं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को जितना जानता हूं, उसके आधार पर कह सकता हूं कि मुझे कोई शक नहीं है कि वह और उनकी ISRO की टीम एक दिन इस मिशन को पूरा करके दिखाएगी।’
PM मोदी ने भी बढ़ाया था वैज्ञानिकों का हौसला इससे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी ISRO के वैज्ञानिकों का हौसला बढ़ाते हुए कहा था कि आप वो लोग हैं जो मां भारती की जय के लिए जीते हैं। उन्होंने कहा था, ‘आप वो लोग हैं जो मां भारती की जय के लिए जूझते हैं। मां भारती की जय के लिए जज्बा रखते हैं। मां भारती का सिर ऊंचा हो इसके लिए पूरा जीवन खपा देते हैं। मां भारती के लिए आप अपने सपनों को समाहित कर देते हैं। आज मैं और पूरा देश आपके साथ है।’
विशाखापट्टनम रेलवे स्टेशन पर इंतजार करना भी होगा मजेदार।
रेलवे ने यहां एक ‘फन जोन’ बनाया है।
बच्चों के साथ-साथ व्यस्कों के लिए भी कई तरह के गोम्स की सुविधा।
यहां लंबे समय तक प्लेटफॉर्म पर इंतजार करते हुए कोई नहीं होगा बोर।
अब आंध्रप्रदेश के विशाखापट्टनम रेलवे स्टेशन पर इंतजार करना भी लोगों को मजेदार अनुभव देगा। ऐसा इसलिए क्योंकि रेलवे ने यहां एक ‘फन जोन’ बनाया है। खासतौर पर बच्चों के लिए। जहां बच्चों के साथ-साथ व्यस्कों के लिए भी कई तरह के गोम्स की सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है। यहां लंबे समय तक प्लेटफॉर्म पर इंतजार करते हुए बच्चे बोर ना हों इसलिए ये पहल शुरू की गई है। यहां वीडियो शूटिंग गेम्स के अलावा कई इंडोर गेम्स हैं। इसके अलावा फन जोन में कई अन्य हाईटेक गेमिंग एक्टिविटीज भी हैं। ट्विटर पर फन जोन की तस्वीरें वायरल हो रही हैं और हर कोई इन्हें पसंद कर रहा है।
साउथ कोस्ट रेलवे जोन के अनुसार फन जोन देश में इस तरह की पहली पहल है। वहीं रेलवे स्टेशन के प्लेटफॉर्म नंबर एक पर व्यस्कों के लिए भी गेमिंग एरिया में क्रिएटिव गतिविधियां हैं।
डीआरएम वाल्टेयर डिवीजन के चेतन कुमार ने बताया, “हमारा उद्देश्य यात्रियों और बच्चों के लिए खुशियां लाना है। प्रतिक्षा अवधि के दौरान वो खेलों का मजा ले सकते हैं। हमारा उद्देश्य महज पैसा इकट्ठा करना नहीं है बल्कि बच्चों को खुश करना है। यात्री रेल का इंतजार करते हुए यहां अपना समय व्यतीत कर सकते हैं, बच्चे और माता-पिता दोनों यहां खेल सकता हैं।”
लगातार तीसरे दिन पेट्रोल-डीजल की कीमत में गिरावट दर्ज की गई है. पेट्रोल 9 पैसे प्रति लीटर और डीजल 5 पैसे प्रति लीटर तक सस्ता हुआ है. पिछले तीन दिनों में पेट्रोल करीब 25 पैसे प्रति लीटर और डीजल करीब 16 पैसे प्रति लीटर तक सस्ता हुआ है. पेट्रोल की कीमत में 30 अगस्त से और डीजल की कीमत में 31 अगस्त से कोई बदलाव नहीं हो रहा था. 6 दिनों के बाद 5 सितंबर को पेट्रोल 6 पैसे प्रति लीटर और 5 दिनों बाद 5 सितंबर को डीजल भी 5 पैसे प्रति लीटर सस्ता हुआ था.
राजधानी दिल्ली में शनिवार को एक लीटर पेट्रोल की कीमत 71.77 रुपये और डीजल की कीमत 65.09 रुपये है. वहीं, मुंबई में पेट्रोल 77.46 रुपये और डीजल 68.26 रुपये, कोलकाता में पेट्रोल 74.50 रुपये और डीजल 67.50 रुपये, चेन्नई में पेट्रोल 74.57 रुपये और डीजल 68.79 रुपये, नोएडा में पेट्रोल 73.75 रुपये और डीजल 65.40 रुपये और गुरुग्राम में पेट्रोल 71.96 रुपये और डीजल 64.54 रुपये प्रति लीटर है.
जानकारों को उम्मीद है कि आने वाले दिनों में पेट्रोल-डीजल के रेट में और भी गिरावट आ सकती है. इंटरनेशनल लेवल पर WTI क्रूड 56.39 डॉलर प्रति बैरल और ब्रेंट क्रूड 60.99 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर चल रहा है.
– उस्मान लोन (पहचान छिपाने के लिए बदला हुआ नाम)”सभी अनुभवी पत्थरबाज अब रिटायर हो चुके हैं. अब यह एक नई फसल है. और मैं आपको बता दूं, उनमें से ज्यादातर ड्रग एडिक्ट हैं. इन 12-13 साल के लड़कों में अचानक ताकत आ गई है. आखिर ऐसा कहां और कब देखने को मिलता है कि आप अपने ही शिक्षक को बीच सड़क पर रोककर उनसे ‘उठक-बैठक’ लगवाते हैं, सिर्फ इसलिए क्योंकि उनके खिलाफ शिकायतें हैं?”
ये कहते हुए उस्मान का दर्द छलक आता है.
उम्र के चौथे दशक में चल रहे उस्मान एक सफल कारोबारी हैं. श्रीनगर और अनंतनाग में उनके आउटलेट हैं. उनका का भाई जम्मू-कश्मीर पुलिस में अधिकारी है. वो बताते हैं, “भाई की नौकरी के कारण पारिवारिक समारोहों में हमें गद्दार कहा जाता था. हमारे परिवार ने ऐसे अपमानों को बर्दाश्त किया. आज हम नहीं जानते कि उन रिश्तेदारों से क्या कहा जाए.”उस्मान का कारोबार कश्मीर में वेडिंग सीजन (गर्मी) के दौरान हर साल अच्छा चलता है, लेकिन 5 अगस्त के बाद से लगाए गए कर्फ्यू ने उनकी वित्तीय स्थिति पर काफी असर डाला है. वे मुस्कुराते हुए कहते हैं, “मेरे पास शिकायत करने की सुख-सुविधाएं नहीं है.”
कई सारे उस्मान
कश्मीर घाटी में कई उस्मान हैं, जो आर्टिकल 370 और 35A को रद्द करने और जम्मू-कश्मीर को दो केंद्र शासित प्रदेशों में विभाजित करने के भारत सरकार के एकतरफा फैसले से निराशा महसूस करते हैं. उन्हें अपनी सुरक्षा का भी डर है.
राशिद (बदला हुआ नाम) एक सरकारी अधिकारी हैं और उनका एक पोस्ट-ग्रेजुएट बेटा है. वो बताते हैं, “मैं ऑफिस आने से डरता हूं. इन युवा लड़कों ने बड़ों के लिए सभी तरह के सम्मान खो दिए हैं.”
उनके साथ काम करने वाले मुनीर (बदला हुआ नाम) ने कहा, “पिछले हफ्ते मुझे खनियार में छह लड़कों के एक ग्रुप ने रोक लिए था. वे हड़ताल को सही साबित करने के लिए मेरी स्कूटी में आग लगाना चाहते थे. गनीमत से, उनमें से एक ने मुझे पहचान लिया और दूसरों से कहा कि मुझे जाने दें. जैसे मैंने मुश्किल से 200 मीटर पार किया, मुझे एक सीआरपीएफ चेकपोस्ट पर रोक दिया गया. मैंने अपनी चाबियां उन्हें सौंप दीं और कहा, लड़के मेरी स्कूटी में आग नहीं लगा सके, तो आप ऐसा क्यों नहीं करते? वे हंसे और मुझे जाने दिया.”
जम्मू कश्मीर पुलिस में एसपीओ के पद पर तैनात वहीद (बदला हुआ नाम) ने बताया, “जिस तरीके से यह फैसला लिया गया और लागू किया गया, उससे हमें दुख पहुंचा है. जरा सोचिए, 4 अगस्त को हमने रात का खाना खाया और बिस्तर पर सोने चले गए और अगली सुबह हम टीवी पर देखते हैं कि हमारा राज्य दो संघ शासित प्रदेशों में बंट गया है और हम अपना विशेष दर्जा खो चुके हैं! क्या हमें इसमें हिस्सा लेने या यहां तक
कि यह जानने का अधिकार नहीं था कि हमारे राज्य में क्या किया जा रहा है?”
1 सितंबर को श्रीनगर में प्रतिबंध के दौरान एक साइकिल चालक एक सुनसान सड़क पर सवारी करते हुए. प्रतीकात्मक तस्वीर
फ्रंटलाइन पर SPO
जम्मू और कश्मीर पुलिस के एसपीओ अक्सर आतंकी मुठभेड़ों की अग्रिम मोर्चे पर होते हैं और अपने समुदाय के भीतर उनकी ज्यादा नेकनामी नहीं होती है. उन्हें अक्सर ‘गद्दार’ और ‘दुश्मन का सहयोगी’ करार दिया जाता है. आतंकी संगठनों ने कई बार उन्हें और उनके परिवारों को निशाना बनाया. जम्मू-कश्मीर पुलिस के जवानों को हिजबुल मुजाहिदीन और लश्कर-ए-तैयबा की ओर से पोस्टरों के जरिए ड्यूटी करने के खिलाफ चेतावनी दी गई है.
लश्कर के पोस्टर में कहा गया है कि भारत जम्मू-कश्मीर पुलिस के जवानों का गलत इस्तेमाल करता है.”जब भी भारत घाटी में कोई बड़ी कार्रवाई करना चाहता है, तो आपके हथियार छीन लिए जाते हैं.”
वहीद ने इस तरह की अफवाहों को खारिज किया, “नहीं, हमारे हथियार नहीं छीने गए. हम हमेशा आतंकियों की तरह अपनी बंदूकों के साथ नहीं घूमते. हमारे हथियारों को पुलिस स्टेशन में रखा जाता है. जब हम ऑपरेशन के लिए जाते हैं, तो हमें हथियार जारी किए जाते हैं.”श्रीनगर से शोपियां तक, विभिन्न रैंकों के 14 जम्मू-कश्मीर पुलिस के जवान, वाहिद की बात की पुष्टि करते हैं.
शोपियां में एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी का कहना है, “2016 के दमल हंजीपोरा की घटना के बाद, हमारे हथियारों की सुरक्षा के लिए कई सावधानियां बरती गई हैं. सीआरपीएफ और सेना पुलिस थानों की सुरक्षा के लिए वहां मौजूद हैं.” 2016 में, एक भीड़ ने दक्षिण कश्मीर के दमल हंजिपोरा में पुलिस स्टेशन पर धावा बोल दिया था और पुलिस के हथियार लूट लिए थे.
कपड़ों से पहचान की समस्या
तबरेज (बदला हुआ नाम) श्रीनगर के जिला कलेक्ट्रेट से बाहर निकलने के लिए तैयार हो रहे हैं. अजान ने पहले ही संकेत दे दिया है कि शुक्रवार की नमाज अदा करने का समय आ गया है. तबरेज ने अपने सहयोगी को नमाज के लिए बाहर जाते हुए बताया कि वह अपने नियमित डाउनटाउन वाले मस्जिद के बजाय पास की छोटी मस्जिद में जाना चाहता है.
तबरेज ने कहा, “आज थोड़ा डर है. शर्ट और ट्राउजर पहनने से लोगों को शक होता है कि ये सरकरी आदमी है. उसका सहयोगी आरिफ (बदला हुआ नाम), एक आसमानी नीले रंग का पठानी सूट पहने हुए है. वह कहते हैं, “मैंने पिछले एक महीने से ट्राउजर नहीं पहनी”
जब जम्मू-कश्मीर पुलिस के जवानों के परिवारों की सुरक्षा के बारे में सवाल किया गया, तो दक्षिण कश्मीर के एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी कहते हैं, “मैंने अपने जूनियर साथियों से कहा है कि जब उनके गांवों में सामूहिक विरोध प्रदर्शन की स्थिति हो, तो उनके परिवार के सदस्यों को घर के अंदर रहने के बजाय प्रदर्शन में शामिल होना चाहिए.
अपनी आदिम सभ्यता एवं नक्सलवाद के लिए देश भर में जाने जाने वाले बस्तर में अब कैंसर से छुटकारा दिलाने वाले फल और सब्जियों की खेती प्रारंभ हो गई है.
जिले के बस्तर ब्लॉक के पंडानार ग्राम में अजगर फल यह ड्रैगन वेजिटेबल के नाम से फल और सब्जियों की खेती शुरू हुई है. पश्चिमी देशों में ऐसे फलों और सब्जियों की खेती काफी पहले से हो रही है. प्रशासनिक सूत्रों का कहना है कि बाजार में शीघ्र ही 250 से लेकर 500 रुपए प्रति किलो की दर से ड्रैगन फ्रूट और वेजिटेबल उपलब्ध होगा. इन फलों या सब्जियों के सेवन से व्यक्ति को कैंसर और शुगर जैसी बीमारियों से छुटकारा मिल जाती है. ज्ञात हो कि पहले इस ब्लॉक में किसानों ने करेले और मिर्च की खेती बहुतायत मात्रा में प्रारंभ की थी.
सूत्रों का कहना है कि ड्रैगन फ्रूट और वेजिटेबल में 60 प्रतिशत कैलोरी होती है और इसे कम से कम वर्षा में उगाया जा सकता है. वर्तमान में बाजार में इसकी मांग भी बढऩे लगी है. थाईलैंड में भी वहां के किसानों द्वारा इसकी खेती शुरू की गई है. अमेरिका में बहुत पहले से किसान ड्रैगन फ्रूट्स की पैदावार उगा रहे हैं.