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क्रिकेट पत्रकार की एक गलती और 500 रुपये की बीयर के लिए चुकाने पड़े 49 लाख रुपये

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मैनचेस्‍टर: एशेज टेस्‍ट सीरीज (Ashes Test Series) कवर करने के लिए इंग्‍लैंड (England) गए एक ऑस्‍ट्रेलियन पत्रकार को होटल में बीयर की कीमत लाखों रुपये में चुकानी पड़े. ऑस्‍ट्रेलिया के क्रिकेट राइटर पीटर लेलोर (Peter Lalorको मैनचेस्‍टर में बीयर की एक बोतल के लिए 99,983.64 ऑस्‍ट्रेलियन डॉलर यानी तकरीबन 49 लाख रुपये का बिल मिला. इसे देखकर वे दंग रह गए. साथ ही जब तक उन्‍होंने कीमत देखी तब तक वे इसका भुगतान कर चुके थे. बाद में उन्‍होंने सोशल मीडिया के जरिए इस घटना के बारे में बताया.

पीटर लेलोर मैनचेस्‍टर टेस्‍ट को कवर करने के लिए मॉलमेसन होटल में ठहरे हुए हैं. यहीं पर उन्‍होंने अपने लिए बीयर मंगवाई थी. उन्‍होंने टि्वटर पर लिखा, ‘आपने यह बीयर देखी? यह इतिहास की सबसे महंगी बीयर है. मैंने इसके लिए मैनचेस्‍टर की मॉलमेसन होटल में 99,983.64 ऑस्‍ट्रेलियन डॉलर चुकाए हैं. सच कह रहा हूं.’ इसके साथ उन्‍होंने ग्‍लास और बोतल की तस्‍वीर भी पोस्‍ट की.

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रिपोर्ट के अनुसार, इस बीयर की वास्‍तविक कीमत 5.50 पाउंड यानी 9.91 ऑस्‍ट्रेलियन डॉलर थी. भारतीय रुपये में इसकी कीमत 486 रुपये है.

पीटर ने बताया कि जब उन्‍हें बिल दिया गया तो चश्‍मा नहीं पहन रखा था. उन्‍होंने इस बारे में लिखा, ‘मुझे पूछना पड़ा, ‘उस बीयर के लिए मैंने कितने रुपये चुकाए.’ उसने (बारटेंडर) देखा और अपना मुंह हाथ से ढक लिया और वह हंसने लगी लेकिन उसने मुझे कीमत नहीं बताई. उसने कहा कि कुछ गलती हो गई है और वह इसे ठीक कर देगी.’

उन्‍होंने आगे लिखा, ‘इससे यह सबक मिलता है कि जब भी बिल आए तो अपना चश्‍मा जरूर पहनें.’ बीबीसी के अनुसार होटल इस मामले की जांच कर रहा है.

चप्पल या सैंडिल पहनकर चलाई बाइक तो लगेगा भारी जुर्माना, दोबारा पकड़े गए तो जाएंगे जेल

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भारत में 1 सितंबर से नया मोटर वाहन अधिनियम 2019 प्रभावी होने के बाद ट्रैफिक नियमों का उल्लंघन करने पर वाहन चालकों पर भारी-भरकम जुर्माना लगाया जा रहा है. आप जानकर हैरान रह जाएंगे कि व्हीकल ऐक्ट के तहत चप्‍पल या सैंडल पहनकर बाइक चलाने पर भी जुर्माना लगता है. एक्ट के अनुसार, हवाई चप्पल पहनकर गियर वाला दोपहिया वाहन चलाना ट्रैफिक रूल के खिलाफ है.

चप्‍पल या सैंडल पहनकर दोपहिया वाहन चलाने पर जुर्माना काफी पहले से है. हालांकि अभी तक यह सख्‍ती से लागू नहीं होता था, लेकिन अब चप्पल या सैंडल पहनकर बाइक चलाने पर भी चालान किया जाएगा. ट्रैफिक अधिकारियों ने बताया कि यातायात के नियमों के मुताबिक हवाई चप्पल पहनकर गियर वाला दोपहिया वाहन चलाना ट्रैफिक रूल के विरुद्ध है.

अब जबकि मोटर वाहन अधिनियम 2019 लागू हो चुका है और ट्रैफिक नियम तोड़ने पर सख्ती से कार्रवाई की जा रही है तो अब चप्पल या सैंडल पहनकर दोपहिया वाहन चलाने वालों का जुर्माना काटा जाएगा.

नया मोटर वाहन संशोधन विधेयक 2019 लोकसभा और राज्यसभा में पास हुआ है. देशभर में इसे एक सितंबर से सरकार ने प्रभावी कर दिया है. केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने कहा कि मोटर व्हीकल एक्ट में नई पेनाल्टी से नियमों का उल्लंघन करने वालों में डर पैदा होगा. उन्होंने यह भी कहा कि नियमों में सख्ती पैसा कमाने के लिए नहीं है.

जानिए कितना है चालान?

ड्राइविंग लाइसेंस नहीं – 5 हज़ार रुपये

गाड़ी की आरसी नहीं – 5 हज़ार रुपये

गाड़ी का इंश्योरेंस नहीं – 2 हज़ार रुपये

प्रदूषण सर्टिफिकेट नहीं – 10 हज़ार रुपये

हेलमेट नहीं या उतारकर रखे हैं – 1 हज़ार रुपये

आखिर क्या गुज़रती होगी कश्मीरियों पर, जब पंजाब से होने वाली रसद की सप्लाई ही अटकी पड़ी है रास्ते में

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कश्मीर घाटी से जो भी खबरें आ रही हैं, वे छन-छन कर आ रही हैं। अगर हम सरकार की बात ही मान लें कि अनुच्छेद 370 हटाए जाने के बाद भी सब कुछ सामान्य है, फिर भी यह बात तो दिमाग में आती ही है कि आखिर, जब सब कुछ बाजार, दुकानें, सड़कें, बंद हैं, तो लोग वहां खा-पी कैसे रहे हैं। इसी सवाल के जवाब की खोज में हमने पंजाब के उन व्यापारियों से बात की जो कश्मीर घाटी में सामान की सप्लाई करते हैं। उनसे बातचीत से पता चलता है कि न तो इधर से कोई सामान जा रहा है, न उधर से कुछ आ रहा है। ऐसे में, घाटी के लोगों के हाल का अंदाजा तो लगाया ही जा सकता है। हाल यही रहा, तो आशंका यह भी है कि आने वाले पूजा के दिनों में शेष भारत में भी कई जरूरी सामान की किल्लत रहेगी।

पठानकोट तक तो माल सप्लाई की जा रही है लेकिन उससे आगे काफी परेशानी है। अनुच्छेद 370 हटाए जाने की घोषणा 5 अगस्त को की गई थी। उससे अगले लगभग तीन सप्ताह तक तो जम्मू में भी सप्लाई नियमित नहीं थी। चौथे सप्ताह में जरूर कुछ सामान जम्मू तक जाने लगा। लेकिन एक माह बीतने के बाद भी अभी कश्मीर घाटी तक सामान भेजना मुश्किल है। ट्रांसपोर्टर जगतार सिंह संधू का तो कहना है कि एक माह पहले गए बेशुमार ट्रक और दूसरे मालवाहक वाहन कश्मीर घाटी के रास्ते में फंसे पड़े हैं। उनके ड्राइवरों-हेल्परों से भी संपर्क नहीं हो पा रहा क्योंकि मोबाइल सेवाएं ठप हैं। सरकार ने उन पर रोक लगाई हुई है। इस वजह से उन लोगों के घर वाले भी परेशान हैं। ज्यादातर माल के खराब हो जाने की आशंका तो छोटी बात है। दोआबा के बड़े चावल व्यापारी संतोष कुमार बंसल के मुताबिक, चावल की सप्लाई बिल्कुल ठप है। अभी हाल में उन्होंने माल से लदे छह ट्रक भेजे लेकिन वे जम्मू से आगे नहीं जा पा रहे जबकि उन्हें तय सौदे के मुताबिक घाटी जाना है।

पंजाब से मुख्य तौर पर चावल, चिकन, अंडे, दूध, सब्जियों और कुछ अन्य खाद्य पदार्थों को थोक में बहुत बड़ी तादाद में जम्मू-कश्मीर भेजा जाता है। घाटी के कश्मीरी आमतौर पर दाल में भी चिकन या अंडा डालकर खाते हैं। चिकन-अंडे लगभग पूरे का पूरा पंजाब से ही वहां जाता है। जालंधर के मदान फूड एंड सीड्स एसोसिएशन का पोल्ट्री से संबंधित सामान बड़ी मात्रा में कश्मीर जाता है। यह घाटी में माल सप्लाई करने वाली सबसे बड़ी फर्म है। इसके मालिक अशोक मदान ने कहा कि पूरे अगस्त में बामुश्किल 20 फीसदी माल ही जा पाया है- मतलब, 5 अगस्त के बाद शायद ही कहीं से कोई सप्लाई हुई है।

पोल्ट्री के बड़े कारोबारी लुधियाना के सतबीर निर्झर कहते हैं कि जाड़े के दिनों से पहले कश्मीर घाटी के लोग खाने-पीने का काफी सारा सामान इकट्ठा कर लेते हैं। इसके मद्देनजर ज्यादातर कारोबारियों ने अगस्त के आखिरी दिनों में भारी स्टाॅक कश्मीर भेजने की तैयारी कर रखी थी। वह सब अब लगभग बेकार हो गया है। व्यापारियों के पैसे फंसे हुए हैं, माल की बिक्री नहीं होगी, ये चिंताएं अपनी जगह हैं, यह सवाल भी बड़ा है कि घाटी में जाड़े के दिनों में आमलोग क्या करेंगे। सतबीर कहते हैं कि कोई नहीं जानता कि हालात कब सामान्य होंगे।

कश्मीर घाटी को होजरी से जुड़े छोटे-बड़े सभी सामान सबसे ज्यादा लुधियाना से भेजे जाते रहे हैं। अगस्त से पुराने ऑर्डर की सप्लाई बड़े पैमाने पर शुरू हो जाती है। पर इस बार सब कुछ ठंडा है। लुधियाना के होजरी कारोबारी करण मेहरा कहते हैं कि जम्मू-कश्मीर के लिए माल गर्मियों में बुक होना और बनना शुरू हो जाता है। माल तो बनकर तैयार है, लेकिन उधर से ऑर्डर लगभग शून्य है। यह हालत बनी रही, तो यहां के छोटे-बड़े हजारों होजरी व्यापारी बर्बादी के कगार पर आ जाएंगे।

यहां के व्यापारियों की एक दिक्कत और भी है। किसी भी तरह के व्यापार में पेमेंट का एक चेन बन जाता है- माल जाता रहता है और पेमेंट आता रहता है। सबके पैसे फंस गए हैं। करोड़ों के माल की पंजाब के व्यापारी सप्लाई कर चुके हैं जबकि पेमेंट बिल्कुल नहीं आ रहा है। किसी से कोई संपर्क भी नहीं है कि तकादा किया जा सके। अंडा-मुर्गी व्यापारी एसपी सिंह के मुताबिक, पहले कश्मीरी व्यापारी जालंधर आकर माल का भुगतान नगद करते थे। पर अब यह सिलसिला फौरी तौर पर बंद है और पैसा फंस गया है।

मदान फूड एंड सीड्स एसोसिएशन के मालिक अशोक मदान के अनुसार, कश्मीरियों से लेनदेन बैंकिंग व्यवस्था के जरिये होता रहा है लेकिन अनुच्छेद-370 निरस्त होने के बाद उधर से एक भी ट्रांजैक्शन नहीं हुआ है। कुछ अन्य व्यापारियों ने कहा कि जो व्यापारी कच्चा काम करते रहते हैं, मतलब, जो नगद लेन-देन करते रहे हैं, वे तो लगभग बर्बाद ही हो गए हैं क्योंकि उनके पैसे वापस आएंगे, इसकी आशा भी कम ही है। बरसों से असामान्य हालात के हवाले रहे कश्मीर में इस तरह की हालत पहली बार हुई है। पंजाब इंडस्ट्रियल काॅरपोरेशन के एक अधिकारी ने भी कहा कि आतंकवाद, बाढ़ और पाकिस्तान के साथ युद्ध की आशंकाओं के बीच हालात पहले भी बिगड़ते रहे हैं, लेकिन इतनी बदतर स्थिति पहली बार हो रही है।

यह तो हुई कश्मीर घाटी को सप्लाई किए जाने वाले सामानों की बात। अब उधर से आने वाले सामान की बातें भी जाननी चाहिए क्योंकि इसका असर हमारे-आपके बजट पर भी पड़ना है। कश्मीर के लोग अपने यहां पैदा होने वाले चावल का कम इस्तेमाल करते हैं क्योंकि इसकी क्वालिटी अच्छी होती है और इसलिए वह काफी महंगा होता है। इस चावल के मुख्य खरीददार शेष भारत के बड़े होटल हैं। इसकी सप्लाई भी एक माह से बंद है। उत्तर भारत में शुरू होने वाले त्योहारों के दौरान कश्मीर से फल, ड्राई फ्रूट्स और हस्तशिल्प के सामान आते और खूब बिकते रहे हैं। ये नहीं आ रहे, तो अक्टूबर से शुरू होने वाले फेस्टिव सीजन में क्या हाल होगा, इसका अंदाजा हम-आप खुद ही लगा सकते हैं।

जालंधर में एशिया का सबसे बड़ा माने जाने वाला खेल उद्योग का बाजार है। यहां क्रिकेट बैट का बनना-बिकना लगभग बंद होने को है। इसकी वजह यह है कि क्रिकेट बैट के हैंडल से नीचे लगने वाली लकड़ी- कश्मीरी विलो की सप्लाई बंद है। कश्मीर विलो को आमतौर पर फायरवुड कहते हैं। यह लकड़ी इतनी उम्दा होती है कि अधिकतर क्रिकेटर इससे बने बैट का ही उपयोग करते हैं। हिमाचल में भी इस तरह की लकड़ी मिलती है लेकिन उनकी क्वालिटी अपेक्षाकृत कम है और इसलिए कश्मीर विलो की डिमांड ज्यादा है। इस व्यापार से जुड़े दो लोगों ने नाम नहीं छापने की शर्त पर बताया कि इस वजह से देश-विदेश से लिए कई ऑर्डर कैंसिल भी हो रहे हैं।

यह शोर तो बहुत है कि अनुच्छेद-370 हटाए जाने के बाद पंजाब के धनी-मनी व्यापारी कश्मीर जाकर जमीन खरीद लेंगे और सरकार के अनुसार, वहां भारी निवेश होगा। लेकिन फिलहाल तो इस बारे में कोई भी बड़ा व्यापारी कुछ नहीं बोल रहा है।

दिलचस्प है कि कश्मीर को पंजाब से सामान की आपूर्ति करने वाले बड़े व्यापारियों का एक प्रभावी तबका बीजेपी-अकाली गठबंधन समर्थक है और खुलकर केंद्र की अपनी सरकार के खिलाफ कुछ कहने को तैयार नहीं है, लेकिन भीतर ही भीतर उबल रहा है। यह भी बता दें कि शिरोमणि अकाली दल के सरपरस्त और प्रधानमंत्री मोदी के लिए आदरणीय माने जाने वाले पूर्व मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल अनुच्छेद-370 को निरस्त करने के खिलाफ रहे हैं और राज्यों को ज्यादा अधिकार अथवा विकेंद्रीकरण के प्रबल पैरोकार हैं।

लेकिन मोदी से नजदीकियों, बहू हरसिमरत कौर बादल के मंत्री होने के चलते और गठबंधन की सियासी मजबूरियों की वजह से वह मुखर नहीं हैं। वैसे, उनका पहला बयान यही आया था कि वह अनुच्छेद-370 निरस्त करने के खिलाफ हैं। पर बाद में उन्होंने एकदम से चुप्पी साध ली।

शर्मनाक : 12 साल की बच्ची के साथ बाप ने किया रेप, पत्नी ने धुनाई कर पहुंचाया थाने…

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 रिश्तों को शर्मसार करने वाली खबर उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) के जनपद अमरोहा (Amroha) से आई है, जहां कलयुगी पिता ने अपनी नाबालिग बेटी को हवस का शिकार बना कर रिश्ते को कलंकित कर दिया. नाबालिग बच्ची की चीख-पुकार सुनकर पड़ोसियों ने कलयुगी पिता को पकड़कर पुलिस (UP Police) के हवाले कर दिया.

मामला अमरोहा के थाना धनोरा का है, जहां एक 12 साल की बच्ची ने अपने ही पिता पर दुष्कर्म का आरोप लगाया है. पीड़िता ने पुलिस को बताया कि उसका पिता बीते दो महीने से चाकू से डरा-धमकाकर उसके साथ दुष्कर्म कर रहा है. पड़ोसियों से जब इसकी जानकारी आरोपी की दूसरी पत्नी को हुई तो उसने पति की जमकर पिटाई कर दी. इसके बाद वह पड़ोसियों के साथ बच्ची को लेकर थाने पहुंची और पुलिस से कार्रवाई की गुहार लगाई. पुलिस ने मामले पर तुरंत एफआईआर दर्ज की और आरोपी पिता को गिरफ्तार किया.

बताया जा रहा है कि अमरोहा के थाना मंडी धनोरा के एक मोहल्ले के रहने वाले कलयुगी पिता ने दो शादी की थी. दोनों पत्नियों से उसके दो-दो बच्चे हैं. पहली पत्नी नौगांवा सादात में रहती है और दूसरी पत्नी उसके घर मंडी धनोरा के मोहल्ले में रहती है.

गुरुवार को शहर के मोहल्ले में रहने वाली पत्नी कहीं बाहर गई हुई थी और बेटी घर पर अकेली थी, जिसके बाद कलयुगी बाप ने अपनी हवस का शिकार अपनी नाबालिक बेटी को बना लिया और उसके साथ दुष्कर्म किया. इस मामले में युवती की शिकायत पर पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर लिया है और आरोपी को गिरफ्तार कर जेल भेजा जा रहा है.

तीन कुर्ते और एक साइकिल : पूर्व आरबीआई गर्वनर रघुराम राजन का गुरु रहा है यह प्रोफेसर, अब आदिवासियों के लिए कर रहा है काम जानिए…

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 लंबी दाढ़ी, उलझे हुए बाल, चेहरे पर झुर्रियां और तन पर कपड़े के नाम पर एक लुंगी…इनके इस हुलिए से धोखा मत खाइए, दिखने में ये सामान्य गरीब व्यक्ति कोई और नहीं बल्कि आरबीआई के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन के गुरु है। हम बात कर रहे हैं। बैतूल जिले के भौरा तहसील के कोचामाऊ आदिवासी गांव में रहने वाले आलोक सागर की। आलोक सागर, जिन्‍होंने आईआईटी दिल्‍ली से इंजीनियरिंग करने के बाद अमेरिका की मशहूर ह्यूसटन यूनिवर्सिटी से पीएचडी की पढ़ाई की, लेकिन आज वे मध्‍य प्रदेश के छोटे से गांव में आदिवासी बच्‍चों को पढ़ा रहे हैं। यही नहीं वे जंगलों को हराभरा करने के अभियान में भी लगे हुए हैं। बीते 34 सालों में उन्होंने लाखों पौधे लगा दिए हैं। ये पौधे अब घने और छायादार वृक्ष बन चुके हैं। आलोक सागर ने आदिवासियों के बीच उन्हीं की तरह जीवनयापन कर उन्हें जागरूक किया। नतीजा यह रहा कि कोचामाऊ गांव में आज कोई आदिवासी कुल्हाड़ी नहीं रखता है। नि:स्वार्थ भाव से आलोक सागर द्वारा की जा रही यह सेवा निरंतर जारी है।

सामान्य जीवन जीने के लिए सामान्य लोगों के बीच रहना जरूरी

पिछले 34 साल से आलोक सागर ने अपना जीवन आदिवासियों के बीच रहकर प्रकृति और आदिवासियों की सेवा कर रहे हैं। आलोक सागर का मानना है कि प्रकृति के नजदीक एक सामान्य जीवन जीने के लिये सामान्य लोगों के बीच रहना जरूरी है और आदिवासियों से बेहतर सामान्य जीवन कोई नहीं जी सकता। जितना हम प्रकृति से लेते हैं, उतना ही हमें वापस लौटाना भी पड़ता है। सिर्फ उच्च शिक्षा के आधार पर वे आदिवासियों से अलग न दिखे इसलिए वे उन्हीं की तरह रहते हैं और प्रकृति को कोई नुकसान न पहुंचे इसलिए साइकिल से चलते हैं।

इस तरह चर्चा में आए सामने

करीब 30 साल तक आलोक सागर ने कभी किसी को उनकी असली पहचान जाहिर नहीं होने दी। 2016 में घोड़ाडोंगरी विधानसभा चुनाव में पुलिस ने इन्हें वेरिफिकेशन के लिए थाने बुलाया। पूछताछ में जब इनकी असलियत सामने आई तो इंटेलिजेंस के अधिकारी भी चौंक गए। जानकारी के अनुसार आलोक सागर के छोटे भाई आज भी आईआईटी में प्रोफेसर हैं। उनकी मां मिरंडा हाउस में फिजिक्स की प्रोफेसर थीं और पिता इंडियन रेवेन्यू सर्विस में अधिकारी थे।

करोड़ों की संपत्ति के मालिक के पास है तीन कुर्ते और एक साइकिल की जागीर

यदि आलोक सागर के निजी जीवन की बात की जाए तो वो दिल्ली में करोड़ों की संपत्ति के मालिक हैं, लेकिन इसका असर उनकी जिंदगी पर कभी नहीं पड़ा। उनके पास पहनने के लिए बस तीन कुर्ते हैं और एक साइकिल। आलोक सागर आईआईटी दिल्ली से पढ़ने के बाद अमेरिका की टेक्सास यूनिवर्सिटी में भी पढ़ाई करने गए। इसके बाद हेलिफेक्स कनाडा की डेलहोसी यूनिवर्सिटी से मनोविज्ञान की पढ़ाई के 1980 में भारत वापस आए और फिर आईआईटी दिल्ली में ही बतौर प्रोफेसर एक साल तक नौकरी की।

मेट्रो में महिलाओं को मुफ्त यात्रा पर उठे सवाल, सुप्रीम कोर्ट ने दी केजरीवाल सरकार को नसीहत…

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दिल्ली में प्रदूषण को लेकर सुप्रीम कोर्ट में चल रहे एक केस में आज दिल्ली मेट्रो के चौथे चरण और मेट्रो में मुफ्त यात्रा का मुद्दा उठा। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने ऐसा फैसला सुनाया है, जिससे केजरीवाल सरकार को फटकार लगी वहीं काफी राहत भी मिली है। सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली सरकार द्वारा महिलाओं को मेट्रो में मुफ्त सफर की सुविधा देने की योजना पर सवाल उठाते हुए कहा सरकार यह सुनिश्चित करने के लिए बाध्य है कि डीएमआरसी की वित्तीय हालत का उचित ध्यान रखा जाए और ऐसा कोई कदम न उठाया जाए जिससे इसे नुकसान हो।

कोर्ट ने कहा कि मुफ्त यात्रा की सुविधा देने के बजाय सरकार को डीएमआरसी की आर्थिक सेहत के बारे में सोचना चाहिए। दिल्ली सरकार को फटकार लगाते हुए जस्टिस दीपक गुप्ता ने कहा कि अगर आप लोगों को मुफ्त यात्रा कराएंगे तो यह परेशानी खड़ी करेगा। अगर कुछ फ्री में मिलता है तो ये समस्या पैदा करता है।

सुप्रीम कोर्ट ने यह बातें दिल्ली सरकार के उस आपत्ति के बाद कहीं, जिसमें सरकार ने कहा कि वह मेट्रो के नुकसान में हिस्सेदार नहीं बनेगी। अदालत ने कहा, राज्य परिवहन के लिए जिम्मेदार है। हमें इसमें कुछ भी आपत्तिजनक नहीं लगता क्योंकि मेट्रो को नुकसान होता है तो उसे राज्य द्वारा वहन किया जाना चाहिए क्योंकि दिल्ली मेट्रो राज्य के अंदर ही संचालित होता है।

सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा है कि दिल्ली मेट्रो के चौथे चरण के लिए भूमि की लागत का खर्च केंद्र एवं दिल्ली सरकार 50:50 के अनुपात में वहन करेंगे। उच्चतम न्यायलय ने ये भी कहा कि अगर दिल्ली मेट्रो रेल के चौथे चरण में कोई परिचालन घाटा होता है तो उसे दिल्ली सरकार वहन करेगी।

अब महज 59 मिनट में आप हो जाएंगे मालामाल, जानिए कैसे…

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भारतीय स्टेट बैंक समेत देश के 19 सरकारी बैंकों ने ‘PSB Loans in 59 Minutes’ की शुरुआत की है। इसके जरिए होम लोन और पर्सनल लोन के लिए आवेदन करने वाले ग्राहकों को महज 59 मिनट में सैद्धांतिक मंजूरी मिल जाएगी।

इसकी जानकारी देते हुए भारतीय स्टेट बैंक के एमडी पी के गुप्ता ने कहा, हम लोन चाहने वालों को होम और पर्सनल लोन ‘PSB Loans in 59 Minutes’ के जरिये उपलब्ध करा रहे हैं। हमें इस बात की खुशी है कि अभी तक इसका लाभ सिर्फ एमएसएमई को मिल रहा था, लेकिन अब यह सभी को उपलब्ध होगा।आने वाले दिनों में ऑटो लोन के लिए भी यह सर्विस लॉन्च होने वाली है।

बहरहाल, जिन बैंकों ने इसकी शुरुआत की है उनमें भारतीय स्टेट बैंक, पंजाब नेशनल बैंक, बैंक ऑफ बड़ौदा और यूनियन बैंक सहित अन्य बैंक शामिल हैं। वर्तमान में एमएसएमई सेक्‍टर में इस लोन को मंजूरी मिल रही है। इस प्लेटफॉर्म पर लोन लेने वाले व्‍यक्ति को सारी जरूरी जानकारियां अपलोड करनी होती है। इसके बाद ऑटेमैटिक सिबिल आंकड़ों के विश्लेषण के आधार पर लोन की रकम तय हो जाती है।इस लोन की राशि को मंजूरी मिलने के बाद आवेदक बैंक ब्रांच में कनेक्ट हो जाता है। यह सभी प्रक्रिया महज 59 मिनट में पूरी हो जाती है।

इसरो रचेगा नया इतिहास जब चांद पर उतरेगा चंद्रयान-2

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ऐसे पल जीने का मौका सबको नहीं मिलता। सबको इतिहास बनते देखने का मौका नहीं मिलता। इसलिए हम खुशनसीब हैं जो उस लम्हे को जी पाएंगे जब अपना भारत चांद पर कामयाबी का मजबूत कदम, ‘चुपचाप’ रख देगा। आज देर रात ‘विक्रम’ पर सवार सवा अरब ख्वाब चंद्रमा की पथरीली धरती पर सपनीले रास्तों की बुनियाद रखेंगे। छह चक्कों वाला ‘प्रज्ञान’ जब ‘विक्रम’ से विदा लेकर अपना रास्ता तय करने चांद की धरती छू लेगा तो समझिए कि हम उस कतार में आ गए जहां दुनिया में चुनिंदा देश शामिल हैं।

आपकी पसंदीदा वेबसाइट पर ‘चंद्रविजय’ की खास कवरेज लगातार जारी है। चंद्रयान-2 लॉन्च से लेकर अब तक का सफर हो या प्रज्ञान और विक्रम के नामकरण का किस्सा या आगे मिशन चंद्रयान में क्या होने वाला….हर जानकारी आपको हमारी साइट पर पढ़ने को मिलेगी।

पाक पीएम इमरान खान के बाद सेना प्रमुख बाजवा ने दी युद्ध की धमकी, कहा- आखिरी गोली तक लड़ेंगे…

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जम्मू-कश्मीर पर पाकिस्तान की बौखलाहट जारी है। पाकिस्तान के पीएम इमरान खान और उनके मंत्रियों की गीदड़ भभकी के बाद अब पाकिस्तानी सेन प्रमुख जनरल कमर जावेद बाजवा ने भारत से युद्ध की धमकी दी है। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान आखिरी गोली तक जंग लड़ेगा।

पाकिस्तानी सेना प्रमुख ने कहा कि कश्मीर आज जल रहा है और हम आखिरी गोली, आखिरी सांस तक लड़ेंगे। पाकिस्तानी सेना इसके लिए किसी भी हद तक जाने को तैयार है। उन्होंने कहा कि युद्ध के बादल मंडरा रहे हैं लेकिन हमें अमन की उम्मीद है।

उन्होंने कहा, ”कश्मीरी जनता भारत की हिंदूवादी सरकार और वहां की सेना के जुल्मों का शिकार हो रही है। घाटी में भारत समर्थित आतंकवाद है। कश्मीर पाकिस्तान के पूरा होने का एक अधूरा एजेंडा है और यह तब ऐसा तक रहेगा, जब तक संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्तावों और कश्मीरी लोगों की आकांक्षाओं के अनुरूप विवाद हल नहीं हो जाता।”

बता दें कि पाक पीएम इमरान खान की कैबिनेट में रेल मंत्री शेख रशीद ने एक सेमिनार में कहा था, “मैं अक्टूबर-नवंबर में भारत-पाकिस्तान के बीच युद्ध होता देख रहा हूं, और आज यहां पर कौम को तैयार करने के लिए आया हूं।” शेख रशीद ने कहा कि पाकिस्तान आखिरी दम तक कश्मीर के लिए लड़ता रहेगा।

इससे पहले पाकिस्तान के पीएम इमरान खान की बौखलाहट खुलकर सामने आई थी। इमरान खान ने राष्ट्र को संबोधित करते हुए कहा था कि दोनों देशों के पास न्यूक्लियर हथियार हैं और कश्मीर के लिए वे किसी भी हद तक जाएंगे।

नरम पड़ी हरियाणा पुलिस, भारी-भरकम चालान काट चुके ट्रैफिक वाले ही अब बताएंगे बचने का भी तरीका…

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 गुरुग्राम (Gurugram) के बाद अब फरीदाबाद (Faridabad) पुलिस में भी थोड़ी नरमी आई है. अब कुछ दिनों तक यहां की पुलिस ट्रैफिक चालान (Traffic Challan) के साथ-साथ जागरूकता पर भी जोर देगी. गुरुग्राम के बाद दूसरे नंबर पर जो भारी-भरकम चलान कटा वो फरीदाबाद के नाम है. यहां एक बुलेट (Bullet) चालक का 41000 रुपये का चालान कटा और दूसरे का 35 हजार रुपये का. अब फरीदाबाद पुलिस वाहन चालकों को बताएगी कि वो कैसे कागजात साथ रखने के चक्कर से छुटकारा पाकर चालान से बच सकते हैं. फरीदाबाद पुलिस के पीआरओ सूबे सिंह के मुताबिक चालान रोकने का कोई ऑफिशियल ऑर्डर तो नहीं आया है, लेकिन हम लोग पहले जागरूकता पर बल देंगे. अब वाहन चालकों को डीजी लॉकर (DigiLocker) और एम परिवहन एप (mparivahan mobile app) के बारे में बताएंगे. यदि कोई अपने मोबाइल में इनमें से कोई एक एप भी डाउनलोड करके उसमें अपने वाहन से संबंधित सभी कागजात रखता है तो उसे ओरीजिनल डॉक्यूमेंट रखने की कोई जरूरत नहीं. मतलब यह है कि ट्रैफिक पुलिस (Traffic Police) के भारी-भरकम चालान से आपको ये दो सरकारी एप बचा सकते हैं.

पिछले दिनों कुछ ऐसे चालान भी हुए हैं जिसमें वाहन चालक ने कहा कि उसके कागज घर छूट गए हैं. ऐसे में यह दोनों एप लोगों के लिए काफी मददगार साबित हो सकते हैं.

रोड सेफ्टी आर्गेनाइजेशन के वाइस प्रेसीडेंट एसके शर्मा ने बताया कि लोगों को जागरूक करने के लिए पुलिस ने हमारे संगठन का भी सहारा लिया है. पुलिस और हमारे संगठन के लोग मिलकर जनता को बताएंगे कि नियम तो बदला नहीं जा सकता इसलिए उसका पालन करिए. उसके लिए एप में अपने डॉक्यूमेंट रखिए, हेलमेट-सीट बेल्ट लगाईए, शराब पीकर गाड़ी न चलाईए, यह सब आप और आपके परिवार के लिए अच्छा है. काफी लोग इन एप के बारे में नहीं जानते.

>> बिना लाइसेंस ड्राइविंग पर 5,000 रुपये देने होंगे, जो अब तक सिर्फ 500 ही था.
>> हेलमेट न पहनने पर 1,000 रुपये का जुर्माना होगा, साथ ही तीन माह तक लाइसेंस सस्पेंड रहेगा. पहले सिर्फ 100 रुपये लगता था.
>> सीट बेल्ट न लगाने पर 1,000 रुपये देने होंगे. पहले सिर्फ 100 रुपये का जुर्माना था.
>> प्रदूषण सर्टिफिकेट न होने पर 10 हजार रुपये का फाइन लगेगा, जो पहले सिर्फ 1000 रुपये था.
ड्राइविंग के दौरान फोन पर बात करते हुए पकड़े जाने पर अब 5 हजार रुपये देने होंगे. पहले सिर्फ 1 हजार रुपये लगते थे.
शराब पीकर गाड़ी चलाने पर 10,000 रुपये तक फाइन लगेगा. साथ ही 6 महीने की जेल भी हो सकती है. दूसरी बार गलती पर 2 साल तक जेल और/या 15 हजार रुपये का जुर्माना. पहले सिर्फ 2 हजार रुपये लगते थे.
नाबालिग के गाड़ी चलाने पर अब बच्चे के अभिभावक/वाहन मालिक को दोषी माना जाएगा. 25 हजार रुपये जुर्माना लगेगा और तीन साल की जेल होगी. वाहन का रजिस्ट्रेशन एक साल तक रद्द रहेगा. नाबालिग को 25 वर्ष की उम्र पूरा होने से पहले ड्राइविंग लाइसेंस नहीं दिया जाएगा.