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Reliance Jio देगी प्रत्‍येक ब्रॉडबैंड कनेक्‍शन के साथ फ्री सेट-टॉप बॉक्‍स, आज से शुरू होगी सर्विस

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टेलीकॉम ऑपरेटर रिलायंस जियो डायरेक्ट-टू-होम डीटीएच) और केबल ग्राहकों को आकर्षित करने के लिए प्रत्येक ब्रॉडबैंड कनेक्शन के साथ सेट-टॉप बॉक्स मुफ्त दे सकती है। सूत्रों ने यह जानकारी दी।

अरबपति उद्योगपति मुकेश अंबानी की कंपनी ऑप्टिकल फाइबर आधारित जियोफाइबर ब्रॉडबैंड सेवा पांच सितंबर यानी गुरुवार से शुरू करने जा रही है। सूत्रों ने कहा कि जियोफाइबर के सभी ग्राहकों को सेट-टॉप बॉक्स नि:शुल्क दिया जाएगा। रिलायंस इंडस्ट्रीज के चेयरमैन एवं प्रबंध निदेशक मुकेश अंबानी ने घोषणा की है कि जियोफाइबर के ग्राहकों को जीवनभर के लिए लैंडलाइन से मुफ्त वॉयस कॉल, 700 रुपए से शुरू होने वाले प्लान पर 100 मेगाबिट एमबीपीएस) से एक गीगाबिट प्रति सेकेंड की ब्रॉडबैंड स्पीड और वार्षिक प्लान के लिए प्रतिबद्धता पर मुफ्त एचडी टीवी सेट देने की घोषणा की है।

सूत्र ने कहा कि जियोफाइबर के ग्राहकों को प्रमुख मनोरंजक मोबाइल एप्स के जरिये फिल्मों और अन्य वीडियो सामग्री तक पहुंच मिलेगी। इनका शुल्क मासिक ब्रॉडबैंड कनेक्शन में ही शामिल होगा और उपभोक्ताओं को इसके लिए अलग से शुल्क नहीं देना होगा। सूत्र ने बताया कि सेट-टॉप बॉक्स टीवी सेटों पर वीडियो कॉलिंग की सेवा भी उपलब्ध कराएगा। इस सेवा के लिए उपभोक्ता को सेट-टॉप बॉक्स से कैमरा को जोड़ना होगा।

इस बारे में रिलायंस जियो को भेजे ई-मेल का जवाब नहीं मिला था। विशेषज्ञों का कहना है कि जियोफाइबर से डीटीएच कंपनियों के कारोबार को चोट पहुंचेगी। इससे पहले भारती एयरटेल ने इसी सप्ताह अपने एक्सट्रीम मंच पर 3,999 रुपए में नया सेट-टॉप बॉक्स देने की घोषणा की है। इस पर कंपनी वीडियो स्ट्रीमिंग मोबाइल एप की सामग्री उपलब्ध कराएगी। हालांकि, कुछ प्रमुख ओवर द टॉप खिलाड़ियों मसलन नेटफ्लिक्स, अमेजन प्राइम वीडियो और हॉटस्टार की सुविधा नहीं मिलेगी।

एनआरसी को लेकर शशि थरूर ने केंद्र सरकार पर बोला बड़ा हमला

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असम में एनआरआसी की लिस्ट जारी होने के बाद 19 लाख लोगों के नाम इस लिस्ट से लापता हैं। जिसकी वजह से तमाम विपक्षी दल केंद्र सरकार पर लगातार हमलावर हैं। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता शशि थरूर ने एनआरसी को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि आपने ऐसे लोगों का नाम इस लिस्ट में शामिल नहीं किया है जिनका भारत के अलावा कोई दूसरा घर नहीं है, जो यहीं रह रहे हैं। इसमे कई ऐसे लोग हैं जो 1971 से भारत में रह रहे हैं। शशि थरूर ने कहा कि कई लोगों की जमीन, परिवार, करियर, संपत्ति सबकुछ हमारे देश में है और अब एकदम से आप उन्हें कह रहे हैं कि वह विदेशी हैं।

इससे पहले सरकार की ओर से इन लोगों को 120 दिन का समय दिया गया है कि वह अपना पक्ष रख सकते हैं। यही नहीं सरकार ने फैसला लिया है कि जिन लोगों के नाम एनआरसी में नहीं है उन्हें सरकार कानूनी मदद भी मुहैया कराएगी। केंद्रीय गृह मंत्रालय की ओर से कहा गया है कि नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटिजेंस में जिन लोगों के नाम नहीं हैं और उन्हें कानूनी मदद की जरूरत है तो सरकार की ओर से यह मदद मुहैया कराई जाएगी।

गृह मंत्रालय की ओर से ट्वीट करके कहा गया है कि राज्य सरकार ने भी इस बाबत उचित व्यवस्था की है, जिन लोगों का नाम एनआरसी की फाइनल लिस्ट में नहीं है उनकी कानूनी मदद के लिए राज्य सरकार ने भी इंतजाम किए हैं। उन्हें डिस्ट्रिक्ट लीगल सर्विसेज अथॉरिटीज की ओर से हर तरह की मदद मुहैया कराई जाएगी। इसके अलावा सरकार की ओर से साफ किया गया है कि जिन लोगों के नाम एनआरसी में नहीं है, उन्हें गिरफ्तार नहीं किया जाएगा और ना ही बंधक बनाया जाएगा। ये लोग एनआरसी में उनका नाम शामिल नहीं किए जाने को लेकर अपने सभी विकल्पों का इस्तेमाल कर सकते हैं।

चलती बस के अंदर लड़के की पिटाई, निर्वस्त्र कर बस से बाहर फेंका, वीडियो वायरल

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दिल्ली में डीटीसी की एक चलती बस के अंदर कुछ यात्रियों ने चोर होने के संदेह पर एक लड़के की पिटाई कर दी और उसे अपने कपड़े उतारने के लिए मजबूर किया. इस घटना का एक वीडियो सोशल मीडिया पर आया, जिसके बाद पुलिस ने मामले की जांच शुरू की है.

एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने कहा कि हम वीडियो की जांच कर रहे हैं और उस स्थान की पहचान करने की कोशिश कर रहे हैं, जहां घटना हुई थी. हम उन बस चालकों और संवाहकों से बात करेंगे जो उस मार्ग पर चलने वाली बसों में काम करते हैं, जिसके बाद दोषियों के खिलाफ उचित कार्रवाई की जाएगी.

यह घटना संभवत: पिछले गुरुवार को हुई थी. एक यात्री द्वारा रिकॉर्ड की गई वीडियो क्लिप में, लड़के को बस के अंदर बिना कमीज पहने खड़े देखा जा सकता है और लोग उसके साथ बहस कर रहे हैं. नाबालिग को अपनी पैंट उतारने के लिए कहने पर भीड़ से गुहार लगाते हुए देखा गया और बाद में उसे नग्न स्थिति में बस से बाहर फेंक दिया गया.

फरीदाबाद : एक साल में 4 बार प्रेग्नेंट हो गईं महिलाएं! CBI कर रही जांच

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दिल्ली (Delhi) से सटे फरीदाबाद (Faridabad) में एक अजूबा हुआ है. यहां कुछ महिलाएं एक ही साल में चार-चार बार प्रेग्नेंट (गर्भवती) हो गईं. विज्ञान इसे भले ही नहीं मानेगा लेकिन हुआ ऐसा ही है. यह कारनामा ईएसआई कारपोरेशन (ESI Corporation) के अधिकारियों के सहयोग से हुआ. सूत्र बता रहे हैं कि निजी कंपनियों (Private Companies) में काम करने वाली कुछ महिलाओं ने साल में चार बार तो कुछ ने आठ-दस बार तक मैटर्निटी का लाभ लिया. पूरे सिस्टम को ध्वस्त करके सरकार को करोड़ों का चूना लगाया गया. मामला इतना बड़ा है कि जांच सीबीआई (CBI) को देनी पड़ी. सीबीआई की एंटी करप्शन ब्रांच-चंडीगढ़ की टीम ने इसे लेकर ईएसआई की सेक्टर-23 ब्रांच और सेक्टर-16 स्थित रीजनल आफिस के कागजात खंगाले हैं.

बताया जा रहा है कि ऐसी एक हजार से अधिक महिलाएं हैं जिनके नाम पर एक ही साल में कई-कई बार मैटर्निटी लीव सैलरी (Esi Maternity leave salary) का फायदा दिया गया है. सूत्रों का तो यहां तक कहना है कि असल में ऐसी कोई महिला थी ही नहीं. लाभार्थी महिलाएं भी सिर्फ कागजों में गढ़ी गईं. कागजों में वो किसी कंपनी में कार्यरत थीं. इसीलिए कागजों में ही उन्हें एक ही साल में कई बार प्रेगनेंट दिखाकर फरीदाबाद में ईएसआई कारपारेशन से मैटर्निटी का लाभ ले लिया गया. इसमें मैनपावर सप्लाई करने वाले ठेकेदारों से लेकर ईएसआई के उच्चाधिकारी तक शामिल बताए जा रहे हैं.

मैटर्निटी में कौन देता है वेतन? निजी कंपनियों में कार्यरत उन महिलाओं का ईएसआई कारपोरेशन में अंशदान कटता है जो जिनकी सैलरी 21 हजार रुपये प्रतिमाह से अधिक नहीं है. कारपोरेशन ऐसी महिलाओं को डिलीवरी के दौरान छह माह की मैटर्निटी लीव और पूरा वेतन देता है. इसे मैटर्निटी बेनिफिट (Esi Maternity Benefit) कहते हैं. गर्भपात के केस में 42 दिन की लीव दी जाती है. इस लीव का पैसा कारपोरेशन खुद महिला के बैंक खाते में भेजता है. इसी सुविधा का का गलत लाभ उठाया गया. किसी महिला ने कागजों में खुद को साल में चार-चार बार तो किसी ने दस-दस बार प्रेगनेंट दिखाकर ईएसआई कारपोरेशन से पैसा लिया. पूरा सिस्टम इतना सड़ गया था कि कहीं पर ऐसा करने वालों को फर्जी बिल पास करवाने में परेशानी नहीं आई.

सूत्रों ने बताया कि ईएसआई कारपोरेशन की एक विजिलेंस रिपोर्ट में दो-तीन मामलों में गड़बड़ी दिखी थी. बताया जाता है कि ऑनलाइन आए अप्लीकेशन के जब मूल कागजातों से मिलान किया गया तो वह अलग-अलग मिले. महिला एक ही होती थी, उसका बैंक अकाउंट एक ही होता था लेकिन वो अलग-अलग नाम से लाभ ले लेती थी. उसके कागजात फर्जी होते थे. कुछ ठेकेदारों ने फर्जी मेडिकल सर्टिफकेट बनवाया. उस पर डॉक्टर की मुहर लगवाई लोकल व रीजनल ऑफिस में मिलकर मैटर्निटी लीव का पैसा निकाल लिया. स्पेशल ऑडिट टीम से जुड़े सूत्रों के मुताबिक कई लाभार्थियों के बैंक खाते ऐसे पाए गए हैं जिनमें मैटर्निटी लीव के नाम पर एक साल में कई बार पैसा गया था. मामला बड़ा दिखा तब इसकी जांच सीबीआई को सौंपी गई. इस मामले में 10 अधिकारी और कर्मचारी सस्पेंड किए गए हैं.

सुप्रीम कोर्ट के एडवोकेट पद्मश्री ब्रह्मदत्त कहते हैं कि ईएसआई कारपोरेशन का पूरा सिस्टम सड़ गया था इसलिए एक-एक महिला को एक ही साल में कई-बई बार मैटर्निटी लाभ मिल गया. अभी तक इस मामले में कार्रवाई के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति हो रही है. इसमें नीचे से ऊपर तक जितने कर्मचारी-अधिकारी शामिल हैं सभी पर एक्शन होना चाहिए. यदि कोई लाभार्थी महिला है तो उसे भी मुजरिम बनाकर उनसे पूरी रकम वसूल की जानी चाहिए. इस मामले में भ्रष्टाचार की पूरी चेन तोड़नी चाहिए.

बात करने से कतरा रहे अधिकारी

इस बारे में हमने ईएसआई कारपोरेशन के अपर आयुक्त डीके मिश्रा से बातचीत करने के लिए उन्हें फोन लगाया. मिश्रा ने मैटर्निटी घोटाले का नाम सुनते ही फोन काट दिया. इसके बाद हमने फोन किया लेकिन उन्होंने बात नहीं की. हालांकि, कारपोरेशन के गैर सरकारी सदस्य बेचू गिरी ने कहा, करोड़ों का घपला हुआ है. जब से जांच सीबीआई को गई है तब से अधिकारियों ने मुंह बंद कर लिया है. गिरी का कहना है कि फैक्ट्रियों में ठेकेदारी पर काम करवाने वालों ने कागजों में ही औरतें गढ़ीं. फर्जी सर्टिफकेट से उन्हें प्रेगनेंट दिखाया और अधिकारियों की मिलीभगत से उनके नाम पर सरकार के खाते से पैसा निकाल लिया.

बीपी, स्ट्रोक के खतरा को बढ़ाता है अचार

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 सेहत के लिए अचार नुकसानदायी हो सकता हैं। इसलिए इसका ज्यादा सेवन नहीं किया जाना चाहिए। वैसे तो कई लोगों को अचार खाना बेहद पसंद होता हैं।

वहीं कुछ लोग ऐसे है जो जरूरत से अधिक अचार का सेवन करते है, जिसका स्वाद तो आता है लेकिन साथ ही वे लोग शरीर की कुछ रोगों को बुलावा देते है। अचार में काफी मात्रा में नमक होता है, जिससे शरीर में सोडियम की मात्रा बढ़ जाती है तथा हाई बीपी, कैंसर, स्ट्रोक जैसी कई रोगों का खतरा बढ़ जाता हैं।

-अचार का सेवन करने से शरीर में आयरन की मात्रा कम होने लगती है और फैट की परेशानी हो जाती है।
-अधिक मात्रा में अचार खाने से ब्लड सर्कुलेशन बिगड़ने लगता है, जिसका दिमाग पर असर पड़ता है। साथ ही स्ट्रोक की आशंका बड़ जाती है।

-अचार में सोडियम की काफी मात्रा होती है, जो शरीर में कैल्शियम की मात्रा को कम कर देता है। इस कारण से हड्डियां कमजोर होने लगती है।

-अचार के अधिक मात्रा में सेवन करने से शरीर में सोडियम की मात्रा बढ़ जाती है तथा बीपी की बीमारी हो जाती है।
-अचार में मौजूज सोडियम ब्लड सर्कुलेशन को बढाता है , जिस वजह से हार्ट से जुड़ी कई परेशानी होने लगती है।

दुनिया का सबसे महंगा आलू चिप्स, 4 हजार रुपए में सिर्फ 5 PIECES

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जयपुर, आज के समय में छोटे बच्चों को आलु के चिप्स काफी पसंद होते है। माता पिता भी उनको दिला देते है। क्योंकि ये पांच या दस रूपये के आते है। लेकिन कभी आपने सुना है कि सिर्फ पांच आलु की चिप्स ही चार हजार रूपये की हो। इस बात को शायद मजाक मान रहे है। लेकिन ये बिलकुल सच है।

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि स्वीडन की सेंट एरिक्स ब्रुवरी नामक कंपनी है । दुनिया के सबसे महंगे आलू चिप्स बनाने के तौर पर इस कंपनी का नाम आता है। खास बात यह है कि इसके एक पैक में पांच सिर्फ चिप्स रहते हैं। चौंका देने वाली बात है कि इस एक पैकेट की कीमत करीब 3,993.64 रुपए है।

अगर एक चिप्स का हिसाब लगाए तो हर एक चिप्स की कीमत हुई 784.11 रुपए। अब आप सोच रहे होंगे कि साधारण से दिखने वाले इस चिप्स में ऐसा है क्या कि इसकी कीमत हजारों में है, तो आइए इसके बारे में बात करते है। मिली जानकारी के अनुसार ये खास किस्म के आलू से चिप्स बनाया गया है।

इसमें जिस सामग्री का इस्तेमाल किया गया है, वो काफी दुर्लभ हैं। चिप्स में जिस प्याज का इस्तेमाल किया गया है, वो एक खास प्रजाति का है, जो सिर्फ लेकसैंड शहर में ही पैदा होती है।

बताया जा रहा है कि ये चिप्स मैत्स्कुट मशरूम, ट्रफल्ड सीवीड, इंडिया पेल एले वोर्ट, क्राउन डिल, लेक्सैंड प्याज, जैसे पांच फ्लेवर्स में उपलब्ध है। सेंट एरिक की आधिकारिक वेबसाइट के अनुसार इन चिप्स केर जरिए कमाए गए पैसों की चैरिटी की जाती है।

सेहत के लिए लाभकारी है अनार का रायता

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वैसे तो अनार हमारी सेहत के लिए बहुत उपयोगी हैं, क्या आप कच्चे अनार खाकर परेशान हो गए हैं, तो हम आपको अनार रायता बनाने की विधि के बारे में बताते हैं, जिसके सेवन करने से सेहत को कई लाभ मिलेंगे।

आवश्यक सामग्री

  • एक कप दही
  • एक बड़ी चम्मच बारीक कटा हुआ प्याज
  • एक तिहाई कप बारीक कटा हुआ खीरा या ककड़ी (छिलका निकाला हुआ)
    एक तिहाई अनार के दाने
  • एक छोटी चम्मच हरी मिर्च बारीक कटी हुई
  • एक छोटी चम्मच चाट मसाला
  • चुटकीभर काली मिर्च पाउडर
  • आधी छोटी चम्मच भुना जीरा पाउडर
  • स्वादानुसार नमक

ऐसे बनाएं अनार रायता 
सबसे पहले एक बाउल में दही लेकर उसे अच्छे से फेंट लीजिए ताकि वो चिकना हो जाए। अब इसमें अनार के दाने, कटे प्याज, खीरा कटा हुआ, हरी मिर्च तथा धनिया डालिए। आखिर में सजाने के लिए कुछ अनार के दाने तथा धनिया बचा कर रखें। अब सभी सामग्री को अच्छे से मिक्स कर लीजिए।

अब इसके उपर चाट मसाला, काली मिर्च पाउडर, भुना जीरा पाउडर तथा नमक भी मिक्स कर लीजिए। सभी को एक साथ मिलाकर अच्छे से मिक्स कर लीजिए। अब इन्हें सर्विंग बाउल में निकाल कर इसे अनार के दाने और हरी धनिया से सजाएं। फिर सर्व कीजिए आनंद आ जाएगा, साथ ही सेहत ठीक रहेगी।

कितने लोगों के लिए : 2

शरीर में जमा फालतू चर्बी को कम करने में बहुत कारगर है सौंफ

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सेहत के लिए सौंफ बडे काम की चीज हैं, इसलिए हर रोज सौंफ का सेवन करना चाहिए। इसमें कैल्शियम,आयरन,पोटाशियम,मैग्निशियम के अलावा और भी बेहद से पोषक तत्व पाए जाते हैं। सौंफ खाने के बहुत से लाभ हैं। इससे स्वास्थ्य से जुड़ी बहुत-सी समस्याओं से बचा जा सकता है। चलिए जानते हैं सौंफ के लाभ के बारे में.

-शरीर में जमा फालतू चर्बी को कम करने में सौंफ बहुत कारगर है। ये बॉडी में मैटाबॉलिजम को बढ़ा कर वजन घटाने में मदद करती है। वडन कम करने के लिए सौंफ के साथ काली मिर्च का सेवन कीजिए।

-नींद न आने की परेशानी हो तो दूध में सौंफ को उबाल कर इसमें शहद मिलाकर पाने से लाभ होता है। -खांसी को दूर करने के लिए एक चम्मच सौंफ, दो चम्मच अजवाइन और आधा लीटर पानी को उबाल लीजिए। गुनगुना होने पर इस पानी में थोड़ा-सा शहद मिलाकर दिन में 2-3 बार पीना चाहिए।

-सौफ खाने से पाचन क्रिया दुरूस्त होती है। भोजन के बाद सौंफ के साथ मिश्री का सेवन करने से लाभ मिलता है। इससे पेट से जुड़ी परेशानियां भी दूर हो जाती हैं। रात को गुनगुने पानी के साथ सौंफ के चूर्ण का सेवन करने से पेट की गैस ठीक हो जाती है।

-सौंफ,मिश्री तथा बादाम को बराबर मात्रा में मिलाकर पीस लीजिए। हर रोज रात को इस मिश्रण का एक चम्मच खाना खाने के बाद दूध के साथ सेवन कीजिए। इसके लगातार सेवन से आंखों की रोशनी बढती हैं।

-सौंफ में पोटाशियम की भरपूर मात्रा होती है। इसके सेवन से ब्लडप्रैशर को नियंत्रित करने में मदद मिलती है।
-पेट में गैस,भूख न लगना तथा पेट फूलने से परेशान हैं तो हर रोज दिन में 3 बार भूनी हुई सौफ का सेवन जरूर करना चाहिए।

मुंबई: 7 घंटे तक रनवे पर खड़ा रहा इंडिगो विमान, लोगों को पीने का पानी तक नहीं मिला

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मुंबई से दिल्ली जाने वाली इंडिगो विमान में बुधवार को कई यात्रियों को काफी मुश्किल का सामना करना पड़ा। दरअसल इंडिया का विमान रनवे पर तकरीबन सात घंटे तक खड़ा रहा, जिसकी वजह से विमान में यात्रियों को काफी परेशानी हुई। कई यात्रियों ने ट्विटर के जरिए अपनी परेशाने को साझा किया। पूजा राठी नाम की यात्री ने ट्वीट करके लिखा कि इंडिगो की मुंबई-दिल्ली फ्लाइट पिछले छह घंटे से मुंबई एयरपोर्ट के रनवे पर खड़ी है, आखिर ये क्या हो रहा है।

विमान में फंसे यात्रियों ने आरोप लगाया कि उन्हें ना तो विमान से उतरने दिया जा रहा है और ना ही विमान टेक ऑफ कर रहा है। यात्रियों को विमान के भीतर पीने के लिए पानी या खाने के लिए भी कुछ नहीं दिया जा रहा है। विमान संख्या 6E-6097 को बुधवार को दोपहर 3.15 बजे उड़ान भरनी थी और 5.30 बजे दिल्ली पहुंचना था। लेकिन फ्लाइटअवेयर वेबसाइट के अनुसार यह विमान रात 9.55 पर दिल्ली एयरपोर्ट पहुंचा। बता दें कि बुधवार को मुंबई में काफी तेज बारिश हुई थी, जिसकी वजह से कई विमान की उड़ाने पर असर पड़ा था।

रविंद्र शर्मा नाम के यात्री ने ट्विटर पर ट्वीट करके लिखा कि लोगों के पास विमान में पीने का पानी तक नहीं है, कुछ लोग विमान में बेहोश हो गए हैं। जबक एक अन्य यूजर ने लिखा कि डीजीसीए को इस रद्दी विमान कंपनी को बैन कर देना चाहिए। लोगों ने ट्वीट में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, उड्डयन मंत्री हरदीप पुरी, मुंबई पुलिस और डीजीसीए को टैग किया। बता दें कि डीजीसीए की नीति के तहत अगर विमान 24 घंटे से कम विलंब से है तो यात्रियों को खाने के लिए कुछ मुहैया कराना अनिवार्य है, अगर विमान 24 घंटे से अधिक विलंब है तो यात्रियों को ठहरने के लिए जगह देना अनिवार्य है।

DL-RC नहीं दिखाने पर तत्काल चालान नहीं काट सकती पुलिस, ये है कानून

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नया मोटर व्हीकल एक्ट लागू होने के बाद से वाहन का रजिस्ट्रेशन सर्टीफिकेट (आरसी), इंश्योरेंस सर्टीफिकेट, पॉल्यूशन अंडर कंट्रोल सर्टिफिकेट, ड्राइविंग लाइसेंस और परमिट सर्टिफिकेट तत्काल नहीं दिखाने पर ताबड़तोड़ चालान करने की खबरें आ रही हैं. हालांकि सेंट्रल मोटर व्हीकल रूल्स के मुताबिक अगर आप ट्रैफिक पुलिस को मांगने पर फौरन रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट (आरसी), इंश्योरेंस सर्टिफिकेट, पॉल्यूशन अंडर कंट्रोल सर्टिफिकेट, ड्राइविंग लाइसेंस (डीएल) और परमिट सर्टिफिकेट नहीं दिखाते हैं, तो यह जुर्म नहीं है.

सुप्रीम कोर्ट के सीनियर एडवोकेट विनय कुमार गर्ग और एडवोकेट रोहित श्रीवास्तव ने बताया कि सेंट्रल मोटर व्हीकल रूल्स के नियम 139 में प्रावधान किया गया है कि वाहन चालक को दस्तावेजों को पेश करने के लिए 15 दिन का समय दिया जाएगा. ट्रैफिक पुलिस तत्काल उसका चालान नहीं काट सकती है. इसका मतलब यह हुआ कि अगर चालक 15 दिन के अंदर इन दस्तावेजों को दिखाने का दावा करता है, तो ट्रैफिक पुलिस या आरटीओ अधिकारी वाहन का चालान नहीं काटेंगे. इसके बाद चालक को 15 दिन के अंदर इन दस्तावेजों को संबंधित ट्रैफिक पुलिस या अधिकारी को दिखाना होगा.

एडवोकेट श्रीवास्तव ने यह भी बताया कि मोटर व्हीकल एक्ट 2019 की धारा 158 के तहत एक्सीडेंट होने या किसी विशेष मामलों में इन दस्तावेजों को दिखाने का समय 7 दिन का होता है. इसके अलावा ट्रैफिक कानून के जानकार लॉ प्रोफेसर डॉ राजेश दुबे का कहना है कि अगर ट्रैफिक पुलिस आरसी, डीएल, इंश्योरेंस सर्टीफिकेट, पॉल्यूशन अंडर कंट्रोल सर्टिफिकेट, ड्राइविंग लाइसेंस और परमिट सर्टिफिकेट तत्काल नहीं दिखाने पर चालान काटती है, तो चालक के पास कोर्ट में इसको खारिज कराने का विकल्प रहता है.

सीनियर एडवोकेट गर्ग का कहना है कि अगर ट्रैफिक पुलिस गैर कानूनी तरीके चालान काटती है, तो इसका मतलब यह कतई नहीं होता है कि चालक को चालान भरना ही पड़ेगा. ट्रैफिक पुलिस का चालान कोई कोर्ट का आदेश नहीं हैं. इसको कोर्ट में चुनौती दी जा सकती है. अगर कोर्ट को लगता है कि चालक के पास सभी दस्तावेज हैं और उसको इन दस्तावेजों को पेश करने के लिए 15 दिन का समय नहीं दिया गया, तो वह जुर्माना माफ कर सकता है.

एडवोकेट रोहित श्रीवास्तव ने बताया कि चालान में एक विटनेस के साइन होना भी जरूरी है. कोर्ट में मामले के समरी ट्रायल के दौरान ट्रैफिक पुलिस को विटनेस पेश करना होता है. अगर पुलिस विटनेस पेश नहीं कर पाती है, तो कोर्ट चालान माफ कर सकती है. उन्होंने बताया कि ज्यादातर मामलों में पुलिस विटनेस पेश नहीं कर पाती है और इसका फायदा चालक को मिलता है.