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1 अक्टूबर से सभी लोन पर ब्याज को रेपो रेट से जोड़ें बैंक, RBI ने जारी किया निर्देश

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 देश की गिरती अर्थव्यवस्था को संभालने की दिशा में RBI (रिजर्व बैंक ऑफ़ इंडिया) ने एक नया क़दम उठाया है. RBI ने बैंकों से सभी तरह के लोन को रेपो रेट से जोड़ने का आदेश दिया है. केंद्रीय बैंक को उम्मीद है कि इस फ़ैसले से आम लोगों को ईएमआई में राहत मिलेगी.

RBI ने सभी बैंकों को होम लोन, पर्सनल लोन और एमएसएमई सेक्टर को सभी नए फ्लोटिंग रेट वाले लोन को रेपो दर सहित बाहरी मानकों से जोड़ने का निर्देश दिया है.

रिजर्व बैंक ने गुरुवार को बयान में कहा ‘ऐसा देखने को मिला है कि मौजूदा कोष की सीमांत लागत आधारित ऋण दर (एमसीएलआर) व्यवस्था में नीतिगत दरों में बदलाव को बैंकों की ऋण दरों तक पहुंचाना कई कारणों से संतोषजनक नहीं है. इसी के मद्देनजर रिजर्व बैंक ने सर्कुलर जारी कर बैंकों के लिए सभी नए फ्लोटिंग दर वाले पर्सनल या खुदरा ऋण और एमएसएमई को फ्लोटिंग दर वाले कर्ज को 1 अक्टूबर, 2019 से बाहरी मानक से जोड़ने को अनिवार्य कर दिया है.’

केंद्रीय बैंक ने कहा है कि बाहरी मानक आधारित ब्याज दर को तीन महीने में कम से कम एक बार नए सिरे से तय किया जाना जरूरी होगा. करीब एक दर्जन बैंक पहले ही अपनी ऋण दर को रिजर्व बैंक की रेपो दर से जोड़ चुके हैं.

रेपो रेट कम होने के बावजूद बैंक कम नहीं कर रहा ब्याज़ दर

रिजर्व बैंक इस बात से काफी नाराज है कि बैंक रेपो रेट में काफी कटौती किए जाने के बाद भी ब्याज दर कम नहीं कर रहे हैं.

रिजर्व बैंक 2019 में चार बार रेपो रेट में कुल मिलाकर 1.10 प्रतिशत की कटौती कर चुका है. इस वित्त वर्ष में अप्रैल के बाद से अब तक केंद्रीय बैंक 0.85 प्रतिाश्त तक की कटौती कर चुका है.

रिजर्व बैंक का कहना है कि उसकी रेपो दर में 0.85 प्रतिशत कटौती के बाद बैंक अगस्त तक केवल 0.30 प्रतिशत तक ही कटौती कर पाए हैं. बैंकों का कहना है कि उसकी देनदारियों की लागत कम होने में समय लगता है जिसकी वजह से रिजर्व बैंक की कटौती का लाभ तुरंत ग्राहकों को देने में समय लगता है.

माना जा रहा है कि इस फ़ैसले से नीतिगत ब्याज़ दरों में कटौती का लाभ कर्ज़ लेने वाले उपभोक्ताओं तक जल्दी मिलने की उम्मीद है.

अभी ऐसे तय होता है ब्याज़ दर

मौजूदा वक्‍त में लोन की ब्‍याज दरें बेंचमार्क प्राइम लेंडिंग रेट (BPLR) और मार्जिनल कॉस्ट ऑफ फंड्स बेस्ड लेंडिंग रेट (MCLR) जैसे इंटरनल बेंचमार्क के आधार पर तय होती हैं. इस बेंचमार्क पर भी बैंकों की ब्‍याज दरें रेपो रेट पर ही आधारित होती हैं. लेकिन यह अनिवार्य प्रक्रिया नहीं होती.

मरीज को दिया डॉक्टर ने ऐसा जवाब, मरीज इलाज से पहले ही हॉस्पिटल से भग गया

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ऑपरेशन टेबल पर लेटा हुआ मरीज़

डॉक्टर साहब, हॉस्पिटल में कब तक रुकना पड़ेगा ??

डॉक्टर : ऑपरेशन ठीक हुआ तो एक सप्ताह.

नहीं तो आधा घण्टा !

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गोलू डिनर करने बैठा, तभी उसकी रोटी के ऊपर से चूहा गुजर गया..

गोल : मुझे नहीं खानी चूहे के पैर से रौंदी हुई यह रोटी..

मोनू: खाले यार… कौन सा चूहे ने चप्पले पहन रखीं थीं..

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पत्नी: जब तुम शराब पीकर आते हो तो बहुत काम आते है…
पति: वो कैसे?
पत्नी: कल जब तुम नशे में आए तो तुमने घर के सारे बर्तन धो दिए और मेरे पैर भी दबाएं.

18 साल पहले पुतिन के पीछे खड़े थे मोदी, फोटो शेयर कर PM ने याद किया पुराना दौर

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दो दिवसीय रूस दौरे के दौरान बुधवार को वर्ष 2001 में की पहली रूस यात्रा को याद किया. उन्होंने ट्वीट करते हुए उस दौरे की फोटो शेयर की.

आपको बता दें कि तब PM मोदी तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के दल में बतौर गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में मौजूद थे. उन्होंने बीते सालों में रूस और राष्ट्रपति पुतिन के साथ मजबूत हुए संबंधों का जिक्र भी किया.

PM मोदी ने ट्वीट करते हुए लिखा, ‘आज 20वें भारत-रूस शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने के दौरान, मेरा मन नवंबर 2001 के भारत-रूस शिखर सम्मेलन में भी गया, जब अटल जी प्रधानमंत्री थे. उस समय, मुझे गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में उनके प्रतिनिधिमंडल का हिस्सा बनने के लिए सम्मानित किया गया.’

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इनमें दो फोटो 2001 के दौरे की हैं और दो मौजूदा रूस दौरे की हैं. इसमें एक फोटो में वह वाजपेयी व पुतिन के पीछे खड़े हैं जबकि एक अन्य फोटो में मोदी द्विपक्षीय सहयोग के समझौते पर हस्ताक्षर कर रहे हैं. PM मोदी और राष्ट्रपति पुतिन वर्ष 2014 से ही लगातार द्विपक्षीय और बहुपक्षीय बैठकों में मिल रहे हैं.

रूस यात्रा का आज दूसरा दिन

वहीं आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की रूस यात्रा का आज दूसरा दिन है. व्लादिवोस्तोक में उन्‍होंने जापान, मलेशिया के प्रधानमंत्री समेत दुनिया के शीर्ष नेताओं से मुलाकात की. ईस्टर्न इकॉनोमिक फोरम के लिए प्रधानमंत्री मोदी को न्‍योता मिला है. उन्‍हें रूस के सर्वोच्च नागरिक सम्मान से भी नवाजा जाएगा.

आज की बैठक में कई विषयों पर चर्चा

प्रधानमंत्री कार्यालय के आधिकारिक ट्विटर हैंडल से ट्वीट किया गया, “मजबूत द्विपक्षीय संबंधों के लिए निरंतर बातचीत जरूरी है. प्रधानमंत्री शिंजो आबे और प्रधानमंत्री मोदी ने व्लादिवोस्तोक में मुलाकात की. यह बैठक ओसाका में जी -20 शिखर सम्मेलन और बिअरिट्ज़ में जी-7 में बातचीत के बाद हुई. आज की बैठक में कई विषयों पर चर्चा की जा रही है.”

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विश्वभर के नेताओं के साथ बैठक

अपनी रूस यात्रा के दूसरे दिन, प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने आज जापानी पीएम शिंजो आबे से मुलाकात की और द्विपक्षीय वार्ता की. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपनी रूस यात्रा के दूसरे दिन आज विश्वभर के नेताओं के साथ एक बैठक करेंगे. पीएम मोदी आज रूसी शहर व्लादिवोस्तोक में आयोजित होने वाले पूर्वी आर्थिक मंच के मुख्य अतिथि होंगे.

टीचर बने रोबोट, बच्चों को पढ़ातें हैं बायोलॉजी और हिस्ट्री जैसे सब्जेक्ट्स

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आज हम आपको एक ऐसे स्कूल के बारे में बताने जा रहे हैं जहां पर रोबोट बच्चों को पढाते हैं । बताया जा रहा है कि, बेंगलुरु के एक प्रायवेट स्कूल में एआई तकनीक पर बेस्ड रोबोट्स बच्चों को पढ़ा रहे हैं। रोबोट्स इंसानों की तरह दिखते हैं, जो न सिर्फ बच्चों को पढ़ाते हैं, बल्कि उनके डाउट्स भी क्लीयर करते हैं । इन रोबोट्स के डेवलपर्स ने बताया है कि, इनकी मौजूदगी से टीचर बच्चों की पढ़ाई पर ज्यादा ध्यान दे सकते हैं । मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार इसके चीफ डिजाइन ऑफिसर विग्नेश राव का कहना है कि यह रोबोट सातवीं से नौवीं क्लास के 300 से ज्यादा बच्चों को पांच अलग अलग विषय पढ़ाते हैं ।

यह उनसे बात करते हैं साथ ही उनके द्वारा पूछे गए संबंधित विषय के सवालों का सही जवाब भी देते हैं । इनके एक रोबोट की कीमत करीब 8 लाख रूपए है । राव ने बताया कि इन रोबोट्स को इस तरह डिजाइन किया गया है कि वे बच्चों से बात करते हैं और विषय से जुड़ें सवालों के जवाब दें । इसके आगे राव ने बताया कि हमने तीन रोबोट को तैयार किए हैं । हमारी टीम में 17 लोग है। इन्हें हल्के थ्री-डी प्रिंटेड मटेरियल और स्मार्ट सर्वो मोटर से बनाया गया है ।

TikTok स्टार ‘शाहरुख खान’ हुआ गिरफ्तार, गलियों में लूटता था मोबाइल

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ग्रेटर नोएडा पुलिस ने टिक टॉक स्टार को मोबाइल चोरी करने के आरोप में गिरफ्तार किया है। उसके साथ तीन और आरोपियों को पुलिस ने पकड़ा है। पकड़े गए शख्स का नाम शाहरुख खान है। गिरफ्तारी के बाद पता चला कि शाहरुख खान टिक टॉक पर काफी लोकप्रिय है और लोग इसके वीडियो बेहद पसंद करते थे। बता दें कि इस आरोपी के टिक टॉक पर 42 हजार से ज्यादा फॉलोवर्स थे।पुलिस ने किया गिरफ्तार

एसपी रणविजय की मानें तो ग्रेटर नोएडा में पिछले कुछ दिनों से बाइक सवार लुटरों का आतंक बढ़ गया था जो हथियार के दम पर राह चलते लोगों का मोबाइल और कैश छीन लेते थे। ग्रेटर नोएडा के बीटा-2 थाना की पुलिस को कुछ लुटेरों की खबर मिली जिसके बाद पुलिस ने मुखबिरों को अलर्ट किया और पेट्रोलिंग बढ़ाई। पुलिस को जल्द ही इसमें सफलता मिली और 4 लुटेरों को ग्रेटर नोएडा के अल्फा-2 इलाके से गिरफ्तार किया गया।

सभी आरोपी बुलंदशहर के रहने वाले

एसपी ने बताया कि शाहरुख तीन महीने पहले सऊदी अरब में ड्राइविंग का काम करता था। वहां से वापस आने पर उसने कुछ लड़कों के साथ गैंग बना लिया और मोबाइल लूट की वारदात को अंजाम देने लगा। पुलिस की गिरफ्त में आए शाहरुख खान के अलावा प्रमोद, अजय और साहिल हैं। ये सभी बुलंदशहर जिले के रहने वाले हैं। पूछताछ में चारों आरोपियों ने कुबूला की वो गौतम बुद्ध नगर में अब तक 6 वारदातों को अंजाम दे चुके हैं, पुलिस ने इनके पास से लूट के 5 मोबाइल फोन, एक बाइक और कुछ कैश भी बरामद किया है।

ज्यादातर वीडियो सऊदी में बने

शाहरुख खान टिकटॉक पर अपनी सैकड़ो वीडियो बनाकर लोगों को अपना प्रशंसक बना चुका है। ज्यादातर वीडियो सऊदी अरब में शूट हुए हैं। जिन्हें तमाम लोगों ने लाइक, शेयर किया है। पुलिस ने इन पर केस दर्ज कर उससे जुड़ी अन्य घटनाओं की छानबीन शुरू कर दी है।

इस्पात नगरी टाटा में क्यों छीन रहीं नौकरियां

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52 साल के मुकेश राय साल 1989 में बिहार में अपना पैतृक घर छोड़कर टाटा (जमशेदपुर) आ गए थे. यहां उन्होंने लेथ (लोहा काटने की मशीन) का काम सीखा और दैनिक मज़दूरी करते-करते वाई-6 कर्मचारी बन गए.

वाई-6 कैटेगरी दरअसल, उन ठेका कर्मचारियों की होती है, जो स्थायी नहीं हैं लेकिन उन्हें रोज़ काम मिलता है. उन्हें पीएफ़ और इएसआई जैसी सुविधाएं भी मिलती हैं. मुकेश राय को भी ये सारी सुविधाएं मिलती थीं.

लेकिन, पिछले दो महीने से वो बेरोज़गार हैं. उनकी कंपनी ‘माल मैटेलिक’ में उत्पादन बंद है. इस कारण उन्हें काम नहीं मिल पा रहा.

आठ जुलाई को वो आख़िरी बार काम पर गए थे. जुलाई के आठ दिन का मेहनताना (करीब 3500 रुपये) भी उन्हें नहीं मिला है. अब वे गंभीर आर्थिक संकट में हैं. उनकी पत्नी रिंकू देवी ने कुछ पैसे बचाकर रखे थे. वे पैसे भी अब ख़त्म हो गए, तो उन्हें अपने गहने गिरवी रखकर उधार लेना पड़ा.

उन्होंने बताया कि आर्थिक संकट और बेरोज़गारी की ऐसी स्थिति पहले कभी नहीं आई थी.

मुकेश राय ने बीबीसी से कहा, “ठेकेदार का कहना है कि टाटा स्टील के उत्पादन में कटौती की जा रही है. इस कारण उससे जुड़ी कंपनियों में काम बंद हो गए हैं.”

जुलाई बीता, अगस्त भी बीता. अब सितंबर-अक्टूबर में भी काम मिलेगा या नहीं, यह बताने वाला कोई नहीं है.

हज़ारों लोग बेरोज़गार

दरअसल, स्टील उद्योग में इन दिनों सुस्ती है. टाटा स्टील, जेएसडब्लू और आर्सेलर मित्तल जैसी बड़ी कंपनियों ने अपने उत्पादन में कटौती की है.

इस कारण सैकड़ों छोटी कंपनियां या तो बंद हो गई हैं, या फिर उनके यहां उत्पादन ठप पड़ा है.

आदित्यपुर स्मॉल इंडस्ट्रीज एसोसिएशन के अध्यक्ष इंदर अग्रवाल ने बताया कि अकेले आदित्यपुर इंडस्ट्रियल एरिया में कम से कम 30 वैसी कंपनियों में ताला लटक गया है, जो इंडक्शन फर्नेस के काम में लगी थीं.

इसका एक कारण झारखंड सरकार की ओर से बिजली के दर में अचानक की गई 38 फ़ीसदी की बढ़ोतरी भी है.

रांची और रामगढ़ की भी कई कंपनियों में उत्पादन ठप है. लघु उद्योग भारती के अध्यक्ष रुपेश कटियार के मुताबिक़, सिर्फ़ झारखंड में 70 हजार से अधिक लोग प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष तौर पर बेरोज़गार हो गए हैं. मुकेश राय भी इनमें से एक हैं.

यही हालत देश के दूसरे राज्यों की भी है. स्टील के उत्पादन में लगी तमाम कंपनियां इस स्लोडाउन से उबरने का रास्ता तलाश रही हैं.

झारखंड पर बड़ा असर

झारखंड इंडस्ट्रियल एरिया डेवलपमेंट अथॉरिटी (जियाडा) के उद्योग प्रसार पदाधिकारी अनिल कुमार ने बताया कि टाटा समूह की कंपनियों में उत्पादन कम होने के कारण यह हालत हुई है. उनकी डिमांड घट गई है.

उन्होंने बताया, “आदित्यपुर इंडस्ट्रियल एरिया में क़रीब 50 हज़ार लोगों को बेरोज़गारी का सामना करना पड़ रहा है. इनमें ज्यादातर लोग दिहाड़ी पर काम करने वाले मज़दूर या छोटे कर्मचारी हैं. ऐसे में क़रीब 90 फ़ीसदी लोग बेरोज़गार हो गए हैं.”

आदित्यपुर इंडस्ट्रियल एरिया स्मॉल इंडस्ट्री एसोसिएशन (एसिया) के सचिव दीपक डोकानिया ने कहा कि ताजा स्लोडाउन की मुख्य वजह नक़दी की कमी है.

उन्होंने बीबीसी से कहा, “बाज़ार में पैसा नहीं है. जब पूंजी ही नहीं रहेगी, तब उत्पादन कैसे होगा. प्रोडक्शन में कटौती के कारण मुझे भी अपनी कंपनी बीएमसी मेटलकास्ट लिमिटेड के कुल 400 कर्मचारियों में से 50-60 को बैठाना पड़ा है. यह ग़लत है, लेकिन हमारे पास कोई ऑप्शन भी नहीं है.”

क्यों घटा स्टील उत्पादन

टाटा स्टील के सीईओ टीवी नरेंद्रन ने वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण से पिछले दिनों हुई मुलाकात के बाद एक इंटरव्यू में कहा कि स्टील उद्योग में स्लोडाउन दरअसल, ऑटो सेक्टर से जुड़ा है. इस वजह से टाटा स्टील ने वित्तीय वर्ष 2019-20 के लिए तय लक्ष्य में कटौती की है.

23 अगस्त को सुस्त अर्थव्यवस्था और अलग-अलग सेक्टर में लोगों की नौकरी जाने की ख़बरों के बीच वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने एक प्रेस वार्ता की.

ऑटो सेक्टर की समस्याओं को निवारण के लिए उन्होंने एलान किया कि 31 मार्च 2020 तक ख़रीदे गए बीएस-IV वाहन अपने रजिस्ट्रेशन पीरियड तक बने रहेंगे और उनके वन टाइम रजिस्ट्रेशन फ़ीस को जून 2020 तक के लिए बढ़ा दिया गया.

साथ ही ऑटोमोबिल सेक्टर में स्क्रैपेज पॉलिसी (पुरानी गाड़ियां का सरेंडर) लाने की घोषणा की, सरकार ने कहा कि गाड़ियों की ख़रीद बढ़ाने के लिए सरकार कई दूसरी योजनाओं पर काम कर रही है.

टीवी नरेंद्रन ने मीडिया से कहा, “ऑटो सेक्टर के उत्पादन में क़रीब 12 फ़ीसदी की गिरावट आई है. इससे ऑटोमोटिव स्टील मार्केट प्रभावित हुआ है. क्योंकि, भारत में कुल स्टील उत्पादन का 20 फ़ीसदी हिस्सा ऑटो इंडस्ट्री में उपयोग में लाया जाता है.”

“हालांकि, स्टील के अंतरराष्ट्रीय बाज़ार पर इसका असर नहीं है. स्लोडाउन का ज़्यादा असर डोमेस्टिक यानी घरेलू मार्केट पर पड़ रहा है.”

कब तक रहेगा स्लोडाउन

सिंहभूम चेंबर आफ कॉमर्स के वाइस प्रेजिडेंट (इंडस्ट्री) नीतेश शूट और उद्योगपति राहत हुसैन मानते हैं कि बाज़ार को इस स्लोडाउन से उबरने में पांच-छह महीने लग सकते हैं.

इन्होंने कहा कि स्टील सेक्टर की मुख्य डिमांड ऑटो इंडस्ट्री और कंस्ट्रक्शन सेक्टर (रियल एस्टेट) से आती है.

अब कंस्ट्रक्शन को लेकर न तो सरकार की तरफ़ से कोई बड़ा प्रोजेक्ट लाया जा रहा है, न प्राइवेट सेक्टर से. ऐसे में स्टील का उत्पादन घटना स्वाभाविक बात है.

राहत हुसैन ने बीबीसी से कहा, “हम धीरे-धीरे औद्योगिक आपातकाल की तरफ़ बढ़ रहे हैं. सरकार को इस स्लोडाउन से उबरने की तरकीब खोजनी होगी. वरना, स्थितियां और प्रतिकूल हो सकती हैं.”

झारखंड सरकार की पहल

इस बीच झारखंड के मुख्य सचिव डी के तिवारी ने कहा है कि स्टील इंडस्ट्री से जुड़ी इंडक्शन फर्नेस की कंपनियों को बिजली के बिल में सब्सिडी दी जा रही है.

यह अगले चार महीने तक दी जाती रहेगी. इससे इन कंपनियों के खर्च में कमी आएगी और वे अपना उत्पादन फिर से शुरू कर सकेंगी.

सरकारी कंपनियों पर भी असर

स्टील उद्योग में स्लोडाउन का असर सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी स्टील आथिरिटी आफ इंडिया लिमिटेड (सेल) पर भी पड़ा है. इसके शुद्ध मुनाफे में भारी गिरावट आई है.

सेल के चेयरमैन अनिल कुमार चौधरी ने पत्रकारों को बताया कि कंपनी की कुल बिक्री पिछले वित्त वर्ष की पहली तिमाही के 15,473 करोड़ रुपए की तुलना में इस साल के 30 जून तक सिर्फ़ 14,645 करोड़ रुपए रह गई है.

उल्लेखनीय है कि झारखंड के बोकारो में सेल का स्टील प्लांट हैं. यहां के कुछ कर्मचारियों ने भी काम नहीं मिलने की शिकायत की है.

मोदी सरकार में कद्दावर मंत्री ‘मेट्रो’ में कर रहे थे सफ़र, किसी को भनक तक नहीं

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ऊंची कुर्सी और सरकारी रुतबेदारी की सहूलियतें आसानी से हजम नहीं होती हैं। मगर मोदी के विश्वासपात्र, खास और एक उच्च-शिक्षित कद्दावर मंत्री ने इस कहावत को बेमानी साबित किया है। जमाने की नजर में इस मंत्री का पद भले ही ‘हाईप्रोफाइल’ है, मगर एक दिन पहले दिल्ली ‘मेट्रो’ रेल में आम आदमी के बीच सफर किया और किसी को इसकी भनक तक नहीं लगी।

तीन सितंबर, 2019 की रात करीब 9 से साढ़े नौ बजे के बीच एक शख्स दिल्ली से मेट्रो ट्रेन की भीड़ में सवार हुआ। यात्रियों की बेतहाशा भीड़ तो नहीं थी। मगर जिस मेट्रो में यह शख्स सवार हुआ, उसमें यात्रियों की संख्या कम भी नहीं थी। सीधे से कहें तो मेट्रो के उस डिब्बे में बैठने की सीट खाली नहीं थी। उन्हें दिल्ली से फरीदाबाद और फिर वापसी में इंदिरा गांधी हवाईअड्डे तक का सफर खड़े-खड़े ही तय करना पड़ा।

जब उनसे पूछा गया कि केंद्रीय मंत्री होकर भी मेट्रो में खड़े-खड़े यात्रा? जवाब देने के बदले उन्होंने पलट कर सवाल दागा, ‘क्यों क्या हुआ? इसमें हैरत की क्या बात? मैं मंत्री हूं तो क्या मेट्रो में यात्रा नहीं कर सकता? मेट्रो में यात्रा करने का अपना अलग ही लुत्फ है।’

मगर इस मेट्रो यात्रा का विचार कहां से आया? वह भी देर रात? उन्होंने कहा, ‘दरअसल मुझे फरीदाबाद में एक निजी समारोह में शामिल होना था। मन किया तो दिल्ली से मेट्रो पकड़ ली। रात 10 बजे के करीब फरीदाबाद में आयोजित समारोह में हिस्सा लिया। उसके बाद मेट्रो पकड़ कर दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डे चला गया। मुझे दिल्ली से बाहर जाना था।’

तस्वीरों में साफ दिखाई दे रहा है कि मंत्री महोदय आम इंसान की तरह एक से मेट्रो की स्टील रॉड (डंडा) पकड़े खड़े-खड़े मोबाइल पर बात कर रहे हैं। उन्होंने आधी बाजू की सफेद शर्ट, गले में लाल मोटा धागा और खाकी पैंट पहन रखी थी। बाएं हाथ में घड़ी बांध रखी थी, हाथ में काले रंग का कोई मोबाइल था और पावों में बिना फीते के काले जूते पहने थे। कोई भी तामझाम नहीं। साथ में एक और आम-सा शख्स मंत्री के पास खड़ा है। शायद उनका कोई परिचित या स्टाफ होगा। जी हां, यहां बात जल शक्ति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत की हो रही है। मोदी सरकार के पहले कार्यकाल में केंद्रीय कृषि राज्य मंत्री रह चुके शेखावत ने 2014 के लोकसभा चुनाव में चार लाख से ज्यादा वोटों से जीत दर्ज की थी। राजस्थान के सीकर के महरौली गांव में तीन अक्टूबर, 1967 को जन्मे शेखावत ने ऑक्सफर्ड यूनिवर्सिटी में पढ़ाई की है।

New Motor Vehicles Act: दिल्ली में अगर पुलिसवालों ने तोड़े ट्रैफिक नियम तो लगेगा डबल जुर्माना

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1 सितंबर 2019 से ट्रैफिक के नियमों में बदलाव किया गया है. नया मोटर व्हीकल एक्ट लागू हो चुका है. इसके तहत ट्रैफिक नियमों के उल्लंघन पर जुर्माने की दर में इजाफा किया गया है. नए मोटर व्हीकल एक्ट के लागू होने के बाद से ट्रैफिक पुलिस पूरी तरह अलर्ट है और लगातार भारी भरकम चालान काट रही है.

इस एक्ट को लागू होने करने के बाद अब दिल्ली पुलिस ने अपने कर्मचारियों को अडवाइजरी जारी करके बताया है कि अगर नए मोटर वीइकल ऐक्ट के तहत अगर कोई पुलिसवाला ही ट्रैफिक नियमों का उल्लंघन करता पाया गया तो उसे चालान का दोगुना जुर्माना देना होगा. 

बता दें कि पिछले साल ट्रैफिक नियमों के उल्लंघन को लेकर 200 से ज्यादा पुलिसवालों का चालान कटा था. इस अडवाइजरी में कहा गया है कि पुलिसवालों का भी चालान किया जाए चाहे वे अपने वाहन पर हों या सरकारी वाहन पर.

ऐसे भरें ऑनलाइन चालान ट्रैफिक पुलिस के चालान काटने पर आपको ऑनस्पॉट चालान भरने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता है. अब आप ऑनलाइन चालान का भुगतान कर सकते हैं इसके लिए आपको https://echallan.parivahan.gov.in/index/accused-challan पर जाना होगा.

>> दिल्ली की तीस हजारी कोर्ट में पायलट प्रॉजेक्ट के तौर पर वर्चुअल कोर्ट पोर्टल यानी vcourts.gov.in का उद्‌घाटन किया गया. लिहाजा यहां ट्रैफिक चालान का ऑनलाइन भुगतान आसानी से किया जा सकता है. यह देश का ऐसा पहला लीगल पोर्टल है.

सरकारी स्कूल की टीचर ने किया कुछ ऐसा, अब किताबों में पढ़ाया जाएगा इनका प्लान

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पांचवीं क्लास के बच्चे दो का पहाड़ा नहीं सुना सकते. टीचर को ब्यूटीफुल की स्पेलिंग नहीं आती. स्कूल में गांव वाले अपनी भैंसे बांधते हैं. मिड डे मील के नाम पर करोड़ों रुपये ठिकाने लगाए जा रहे हैं. और तो और सोशल मीडिया पर तो टीचर के स्कूल में पढ़ाई के तरीके को लेकर जाते हैं. अगर अब भी आप न समझे हों तो आपको बता दें कि सरकारी बेसिक स्‍कूलों की आजकल यही तस्वीर पेश की जाती है. लेकिन, आगरा में प्राथमिक विद्यालय (नौफरी) सरकारी स्कूल की एक अलग ही तस्वीर पेश कर रहा है. स्कूल में बच्चे टीचर के साथ भी अंग्रेजी में बात करते हैं. टीचर सुबह की प्रार्थना अंग्रेजी में कराते हैं. स्कूल को बेहतर तरीके से सजाया गया है और साफ-सुथरे बर्तनों में बच्चे गरमा-गरम मिड डे मील खाते हैं.

अंग्रेजी हो या मैथ बच्चे सभी सवालों के जवाब फटाफट देते हैं. बच्चे तो बच्चे टीचर भी हर वक्त किसी भी विषय का टेस्ट देने के लिए तैयार रहते हैं. नौफरी के सरकारी स्कूल की यह तस्वीर बदली है स्कूल की हेडमास्टर कामिनी शर्मा ने. कामिनी को इसके लिए दो पुरस्कार भी मिले चुके हैं. वहीं, कामिनी के इस प्लान को किताबों में भी पढ़ाया जाएगा.

हेडमास्टर कामिनी शर्मा कहती हैं, ‘मैंने अप्रैल 2018 में इस स्कूल में ज्वाइन किया था. उस वक्त यहां 82 बच्चे पढ़ते थे. आज 130 बच्चे पढ़ रहे हैं. इत्तेफाक से वर्ष 2018 में ही इस स्कूल को इंग्लिश मीडियम बनाने के आदेश आ गए. हर एक विषय की किताब भी अंग्रेजी में आ गई, फिर मैंने और दूसरे स्टाफ ने पूरी मेहनत के साथ सिर्फ वही किया जो हमने बीएड-बीटीसी में पढ़ा था.’

‘बेस्ट टीचिंग प्रैक्टिसेज’ में पढ़ाया जाएगा कामिनी का प्लान यूपी सरकार टाटा ट्रस्ट के साथ मिलकर सरकारी टीचरों का उत्साहवर्धन का काम कर रही है. सरकार जनता को बताना चाहती है कि हमारे सरकारी टीचर भी किसी से कम नहीं हैं. इसी के चलते सरकार बेस्ट टीचिंग प्रैक्टिसेज किताब का प्रकाशन करने जा रही है. इस किताब में प्रदेशभर के 25 ज़िलों के 36 ऐसे टीचरों को शामिल किया गया है, जिन्होंने अपने स्कूल में कुछ अलग हटकर कर दिखाया है. ऐसे ही 36 टीचरों में कामिनी शर्मा का प्लान भी शामिल है. कामिनी शर्मा के लिए गर्व की बात यह है कि उनके प्लान को भी इस किताब में शामिल किया गया है.

ब्रिटेन की संसद में छाए तनमनजीत सिंह

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ब्रिटेन में लेबर पार्टी सांसद तनमनजीत सिंह ढेसी ने बुधवार को संसद में प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन को इस क़दर घेरा कि उनके समर्थन में बाक़ी सांसदों ने ख़ूब तालियां बजाईं. तब पीएम जॉनसन संसद में ही मौजूद थे.

तनमनजीत सिंह ढेसी ने प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन को पीएम बनने से पहले मुस्लिम महिलाओं पर की गई उनकी ‘नस्लवादी’ टिप्पणी के लिए माफ़ी मांगने को कहा.

दरअसल, साल 2018 में बोरिस जॉनसन ने द टेलीग्राफ़ के एक लेख में लिखा था कि जो महिलाएं बुर्क़ा पहनती हैं वो किसी लेटरबॉक्स या बैंक लूटने वाले की तरह दिखाई देती हैं. उनकी इसी टिप्पणी पर तनमनजीत सिंह ने उनसे माफ़ी की मांग की.

तनमनजीत सिंह हाउस ऑफ़ कॉमन्स के पहले ऐसे सांसद हैं जो पगड़ी पहनते हैं.

संसद में प्रधानमंत्री को संबोधित करते हुए तनमनजीत सिंह ने कहा कि हममें से बहुत से ऐसे लोग हैं जिनके पहनावे को लेकर टिप्पणी की गई. हमें छोटी उम्र से ही उन्हें सुनना पड़ा की सिर पर तौलिया लेकर चलते हैं, तालिबान कहा गया, हमें कहा गया कि हम तीसरी दुनिया से आते हैं.

उन्होंने कहा कि हम उन मुस्लिम महिलाओं का दर्द बहुत आसानी से समझ सकते हैं जो पहले से ही चोट खाई हुई होती हैं और अब उन्हें लेटर बॉक्स और बैंक लूटने वाला बताया जा रहा है.

तनमनजीत सिंह ने कहा, “दिखावे के पीछे छिपने के बजाय प्रधानमंत्री आख़िरकार अपनी अपमानजनक और नस्लवादी टिप्पणियों के लिए माफ़ी कब मांगेंगे?”

उन्होंने जॉनसन से पूछा कि आख़िर वो कब तक अपनी ही पार्टी के भीतर इस्लामोफ़ोबिया की जांच के आदेश देंगे.

“मैं पूछना चाहता हूं कि प्रधानमंत्री और उनके सहयोगियों ने राष्ट्रीय टेलीविजन पर जो वादा किया था, आख़िर वो उसे पूरा कब करेंगे?”

सिंह के इस संबोधन के बाद काफी देर तक संसद के निचले सदन में तालियां गूंजती रहीं.

इसके बाद प्रधानमंत्री जॉनसन जब जवाब देने के लिए खड़े हुए तो उन्होंने सबसे पहले सिंह के उस सवाल को लिया जिसमें उन्होंने पूछा था कि वे पार्टी के भीतर इस्लामोफ़ोबिया को लेकर जांच कब शुरू करेंगे?

हालांकि जॉनसन के आलोचकों का मानना है कि वो इस तरह की किसी भी जांच से बचना चाहते हैं.

लेकिन लेबर पार्टी के सांसदों से मुख़ातिब होते हुए प्रधानमंत्री जॉनसन ने अपने जवाब में कहा कि पार्टी के भीतर पूर्वाग्रह के लिए माफी मांगी जानी चाहिए.

जॉनसन ने कहा “अगर वह (सिंह) उस लेख को दोबारा पढ़ने का कष्ट उठाते हैं तो उन्हें महसूस होगा कि सवाल में एक बेहद उदारवादी रुख़ रखा गया है, जैसा की सवाल के शुरू में ही कहा जा रहा है कि इस देश में हर किसी को यह अधिकार है कि वो जो चाहे वो पहने.”

जॉनसन ने कहा “मैं एक ऐसे व्यक्ति के रूप में बोल रहा हूं जिसे न केवल मुस्लिम पूर्वजों के होने पर गर्व है… बल्कि सिखों से संबंधित होने के नाते लिए भी है. मुझे यह कहते हुए गर्व हो रहा है कि इस देश के इतिहास में मौजूदा सरकार एक ऐसी सरकार है जिसकी कैबिनेट के सदस्यों में सबसे अधिक विविधता है. हम वास्तव में आधुनिक ब्रिटेन का प्रतिनिधित्व करते हैं.”

विपक्ष के नेता, लेबर सांसद जर्मी कोर्बिन ने तनमनजीत सिंह के इस संबोधन को अपने फ़ेसबुक पेज पर शेयर करते हुए लिखा है कि हर किसी को यह वीडियो देखना चाहिए.

तनमनजीत सिंह के संबोधन का वीडियो वायरल हो रहा है.

राजनेताओं से लेकर समाजिक कार्यकर्ता और ब्रिटेन में रहने वाले एशियाई मूल के लोग इस पर अपनी प्रतिक्रिया दे रहे हैं.

असद शान ने अपने ट्विटर हैंडल से लिखा है “मैंने आज तनमनजीत को सुना. उन्होंने संसद में क्या जबरदस्त तरीक़े से अपनी बात रखी. मुझे गर्व की अनुभूति हो रही है.”

अभिनेता, लेखक, निर्देशक डेविड श्नाइडर ने भी इस वीडियो को ट्वीट किया है.

बहुत से लोगों की तरह लंदन के मेयर सादिक ख़ान ने ट्वीट किया है कि इस वीडियो को ज़रूर देखें.

इससे पहले ब्रिटेन की पूर्व प्रधानमंत्री टेरीज़ा मे ने कहा था कि बोरिस जॉनसन का बयान महिलाओं के लिए अपमानजनक है और उन्हें इसके लिए माफ़ी मांगनी चाहिए.

इस सप्ताह की शुरुआत में टेल मामा नाम की मॉनिटरिंग संस्था ने कुछ आँकड़े प्रकाशित किए थे. ये आँकड़े जॉनसन के बुर्के़ वाले बयान के बाद के थे जिसमें पाया गया कि मुसलमानों के ख़िलाफ़ होने वाली हिंसा 375 फ़ीसदी तक बढ़ी है.

इस रिपोर्ट पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए संस्था के सचिव रॉबर्ट जेनरिक ने कहा था कि मुसलमानों और तमाम दूसरे धर्मों के लोगों को ब्रिटेन में रहते हुए सुरक्षित महसूस होना चाहिए.