एक्ट्रेस पूजा बेदी ने उम्मीद जताई है कि सरकार जल्द उनके ‘दोस्त’ उमर अब्दुल्ला को रिहा कर देगी. जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री करीब एक माह से प्रिवेंटिव कस्टडी में हैं. आर्टिकल 370 में संशोधन से ठीक पहले अब्दुल्ला को नजरबंद किया गया था.
पूजा बेदी ने ट्विटर पर प्रधानमंत्री कार्यालय, केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह और कुछ पत्रकारों को टैग कर लिखा, “उमर अब्दुल्ला को हिरासत में लिए हुए एक महीने हो गया है. वह मेरे बैचमेट हैं और पारिवारिक दोस्त भी (तीन पीढ़ियों से).”
कोई हल तो निकले : पूजा बेदी
एक्ट्रेस ने आगे लिखा, “मुझे उम्मीद है कि सरकार उनकी रिहाई को लेकर कोई योजना बनाएगी. ऐसे तो हमेशा नहीं चल पाएगा. कोई हल तो निकलना ही चाहिए.”
उमर अब्दुल्ला के अलावा उनके पिता और तीन बार जम्मू-कश्मीर सीएम रहे फारूक अब्दुल्ला और पूर्व सीएम महबूबा मुफ्ती को भी हिरासत में रखा गया है. सूत्रों के मुताबिक, उमर अब्दुल्ला और महबूबा मुफ्ती को परिवार के लोगों से मिलने की अनुमति मिल गई है.
हिरासत में लिए गए अलगाववादी खेमे के किसी भी नेता को रिहा नहीं किया जा रहा है. सरकार यह भी तय करेगी कि रिहाई बाद यह नेता किसी तरह से कानून व्यवस्था की स्थिति का संकट पैदा न करें.
भारत के प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों में से एक दिल्ली के जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय ने प्रोफ़ेसर इमेरिटा प्रतिष्ठित इतिहासकार रोमिला थापर से उनका सीवी मांगा है ताकि उनका ये मानद दर्जा बनाए रखने की समीक्षा की जा सके.
प्रोफ़ेसर रोमिला 1993 से जेएनयू में प्रोफ़ेसर इमेरिटा हैं और अब सीवी मांगे जाने से वो ख़ासी नाराज़ हैं. बीबीसी को भेजे अपने बयान में उन्होंने कहा कि ऐसा उन्हें ख़ामोश करने के लिए किया जा रहा है.
ये पहली बार है जब प्रोफ़ेसर रोमिला से सीवी मांगा गया है. प्रोफ़ेसर रोमिला ने ईमेल के ज़रिए कहा, “जेएनयू में मैंने अपना सीवी सिर्फ़ एक बार तब दिया था जब 1970 में प्राचीन भारतीय इतिहास पीठ के लिए मेरे नाम पर विचार किया जा रहा था.”
वहीं जेएनयू प्रशासन का कहना है कि प्रोफ़ेसर रोमिला के अलावा 11 अन्य वरिष्ठ शिक्षाविदों से भी सीवी मांगा गया है.प्रशासन का तर्क है कि उन सभी प्रोफ़ेसर इमेरिटस से सीवी मांगा गया है जिनकी उम्र 75 वर्ष के पार है.
यूनिवर्सिटी प्रशासन ने एक बयान जारी कर कहा है कि ऐसा इसलिए किया जा रहा है ताकि संबंधित शिक्षाविदों की उपलब्धता और यूनिवर्सिटी से जुड़े रहने की उनकी इच्छा की समीक्षा की जा सके.
वहीं प्रोफ़ेसर रोमिला थापर का कहना है, “एमिरेटस का दर्जे की सिफ़ारिश संबंधित केंद्र करता है और इसके लिए सीवी की ज़रूरत नहीं होती. परंपरा यह है कि इमेरिटस का दर्जा आजीवन होता है और कभी भी इसकी समीक्षा नहीं की जाती है.”
बीबीसी को भेजे अपने बयान में प्रोफ़ेसर रोमिला थापर ने कहा है कि मौजूदा प्रशासन उनसे संबंध तोड़ना चाहता है क्योंकि वो जेएनयू को तोड़ने के उनके प्रयासों का विरोध करती हैं.
उन्होंने कहा, “मेरा सीवी मांगे जाने की वजह आंशिक तौर पर व्यक्तिगत है- उन लोगों से संबंध तोड़ लिया जाए जो मौजूदा प्रशासन के जेएनयू को तोड़ने के प्रयासों के आलोचक हैं. और अन्य लोगों की ओर से भी इस तरह की आलोचना को शांत कर दिया जाए.”
उन्होंने कहा, “इसका और गहरा कारण ये है कि आज हमें ऐसा समाज बनाया जा रहा है जो स्वतंत्र विचारों के ख़िलाफ़ हो, जिस दुनिया में हम रह रहे हैं उस पर सवाल उठाने का विरोध करता हो. हमें बौद्धिक और शैक्षणिक जीवन को नीचा देखने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है.”
वहीं ब्रिटेन और अमरीका की कई यूनिवर्सिटी में पढ़ाने वाले और जेएनयू में प्रोफ़ेसर इमेरिटस दीपक अय्यर जेएनयू के इस क़दम को बेतुका मानते हैं.
उत्तर प्रदेश के बागपत जिले से एक शर्मसार करने वाली घटना सामने आई है। यहां कक्षा तीन की छात्रा से प्राइमरी पाठशाला के बाथरूम में तीन छात्रों ने सामूहिक दुष्कर्म किया। पीड़ित छात्रा ने जब स्कूल की एक शिक्षिका से मामले की शिकायत की तो शिक्षिका ने उसे चुप रहने के लिए कहा। फिलहाल पुलिस ने मामले में तीनों छात्रों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, मामला बागपत जिले के एक गांव का है। गांव निवासी व्यक्ति ने बताया कि उसकी आठ साल की बेटी गांव के ही प्राइमरी पाठशाला में कक्षा तीन की छात्रा है। 16 अगस्त को बेटी स्कूल में खेल रही थी। इसी समय कक्षा पांच के तीन छात्र उसे बहला फुसला कर बाथरूम में ले गए और उसके साथ तीनों ने सामूहिक दुष्कर्म किया।छात्रा ने स्कूल की एक शिक्षिका से मामले की शिकायत की तो आरोप है कि शिक्षिका ने उसे चुप रहने के लिए कहा। परिजन छात्रा को लेकर थाने पहुंचे और शिकायत की।
पीड़िता के परिजनों आरोप है कि पुलिस ने भी कोई कार्रवाई नहीं की। छात्रा व उसके पिता को डरा धमका कर समझौते के कागजों पर अंगूठा लगवा लिया और छात्रा के बयान की वीडियो भी बनाई। छात्रा की धीरे-धीरे हालत बिगड़ने लगी। परिजनों ने उसे गंभीर हालत में जिला अस्पताल में भर्ती कराया। 15 दिन बाद सामूहिक दुष्कर्म पीड़ित छात्रा की हालत बिगड़ने पर पुलिस हरकत में आई। एसपी प्रताप गोपेंद्र यादव के निर्देश पर रमाला थाना पुलिस ने तीनों आरोपी छात्रों के खिलाफ सामूहिक दुष्कर्म की धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया। फिलहाल पीड़िता को अस्पताल में मेडिकल परीक्षण कराया जा रहा है। मेडिकल रिपोर्ट के आधार पर आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को सी.आर.पी.एफ. का ‘जैड प्लस’ वी.आई.पी. सुरक्षा कवर दिया गया है। अधिकारियों ने सोमवार को यह जानकारी दी। सरकार ने हाल में सिंह को दी जा रही विशेष सुरक्षा समूह (एस.पी.जी.) की सुरक्षा वापस ले ले थी। अधिकारियों ने बताया कि सिंह और उनकी पत्नी की सुरक्षा में लगभग 45 सशस्त्र कमांडो तैनात रहेंगे जो यहां 3, मोतीलाल नेहरू रोड पर स्थित उनके आवास और देशभर में उनकी यात्रा के दौरान 24 घंटे निगरानी रखेंगे।
पूर्व प्रधानमंत्री को अग्रिम सुरक्षा संपर्क (ए.एस.एल.) प्रोटोकॉल भी मिलेगा जिसमें सुरक्षा कर्मी उस स्थल का पहले ही मुआयना करने पहुंच जाएंगे जहां की ये दोनों वी.वी.आई.पी. यात्रा करेंगे। उन्होंने बताया कि केन्द्रीय रिजर्व पुलिस बल (सी.आर.पी.एफ.) एस.पी.जी., दिल्ली पुलिस और केन्द्रीय खुफिया एजैंसियों से विचार-विमर्श करने के बाद जल्द ही कार्यभार संभालेगी।
भारतीय सेना (Indian Army) अगले 17 वर्षों तक हरेक साल 100 महिला जवानों को सैन्य पुलिस में भर्ती करेगी। सेना के सूत्रों के मुताबिक 100 महिला जवानों के पहले जत्थे की बहाली की प्रक्रिया जारी है तथा इनका प्रशिक्षण इस वर्ष दिसंबर में शुरू होने की संभावना है। उन्होंने कहा कि महिला जवानों के प्रशिक्षण की अवधि भी पुरुष जवानों की ही तरह 61 हफ्तों की होगी।
सूत्रों के मुताबिक अब तक महिलाएं विभिन्न प्रतिष्ठानों का हिस्सा थीं, लेकिन केवल अधिकारियों के रूप में। पहली बार सैनिकों के रूप में महिलाओं को सेना में शामिल किया जाएगा।
वर्तमान में महिलाओं को चिकित्सा, शिक्षा, कानूनी, सिग्नल और इंजीनियरिंग विंग में चयनित भूमिका के लिए भर्ती किया जाता है और वह भी केवल अधिकारियों के रूप में। सैनिकों द्वारा नियमों और कायदों के उल्लंघन को रोकने के लिए सैन्य पुलिस छावनी और सेना के प्रतिष्ठानों पर निगरानी रखता है।
INX मीडिया केस में पूर्व वित्त एवंं गृहमंत्री पी चिदंबरम की सीबीआई हिरासत आज खत्म हो रही है. सीबीआई की विशेष अदालत आज अपना फैसला सुनाएगी कि उन्हें जेल भेजा जाए या जमानत दी जाए. चिदंबरम को 21 अगस्त की रात CBI ने गिरफ्तार किया था. विशेष न्यायाधीश अजय कुमार कुहाड़ उनकी अंतरिम जमानत याचिका पर आज सुनवाई करेंगे.
सोमवार को चिदंबरम पर सुप्रीम कोर्ट में जबरदस्त जिरह हुई थी. चिदंबरम के वकील कपिल सिब्बल ने अपील किया था कि वो जमानत के लिए निचली अदालत जा सकते हैं. उन्होंने कहा था कि अदालत अगर चाहे तो उन्हें हाउस अरेस्ट में भेज सकती है.
वहीं दूसरी तरफ सीबीआई ने चिदंबरम को किसी भी तरह की राहत देने का विरोध किया था. सीबीआई ने चिदंबरम की हिरासत अवधि एक दिन के लिए बढ़ाए जाने की मांग की थी.
बता दें कि साल 2007 में पीटर मुखर्जी और इंद्राणी मुखर्जी ने INX मीडिया नामक कंपनी बनाई थी. फॉरेन इन्वेस्टमेंट प्रमोशन बोर्ड (FIPB) ने इस कंपनी को 4.62 करोड़ रुपये के विदेशी निवेश की मंजूरी दी थी, लेकिन कंपनी ने 305.36 करोड़ रुपये के विदेशी निवेश हासिल किए थे.
इस रकम में से कंपनी ने गलत तरीके से 26% हिस्सा आईएनएक्स न्यूज में लगा दिया था. इसमें FIPB की मंजूरी नहीं ली गई. सीबीआई का कहना है कि वित्त मंत्रालय की फाइनेंशियल इंटेलिजेंस यूनिट ने पाया कि आईएनएक्स मीडिया के पास मॉरिशस स्थित तीन कंपनियों से गलत तरीके पैसे आ रहे हैं.
नीम एक औषधि है जिसका प्रयोग कई वर्षों से किया जा रहा है। नीम खाने में बहुत कड़वा होता है लेकिन इसमें कई गुण पाए जाते हैं। इसमें एंटीबैक्टीरियल, एंटी फंगल और एंटी पैरासिटिक गुण होते है। नीम का प्रयोग करके बालों की परेशानियों से छुटकारा पाया जा सकता है।
चलिए हम आपको बताते है कि कैसे आप नीम का प्रयोग करके बालों की समस्याओं से छुटकारा पा सकते है – नीम का प्रयोग करके बालों को घना बनाया जा सकता है। नीम युक्त शैम्पू का प्रयोग करने से बाल घने होते है।
– नीम के तेल का नियमित प्रयोग करने से बालों की ग्रोथ बढ़ती है।
– आप बालों में चमक लाना चाहती है तो शैम्पू में थोड़ा नीम तेल मिलाकर बाल धोए। ऐसा करने से बाल सॉफ्ट हो जाएगे।
– बालों में जुएं होने पर नीम का तेल बालों में लगाए और बाद में कंघी कीजिए। इससे जुएं खत्म हो जाएगी।
-नीम के तेल से मालिश करने से बाल कम झड़ते है। अगर आप डैड्रफ से परेशान है तो नीम का तेल गर्म करके बालों पर लगाए तथा रात भर ऐसे ही छोड़ दीजिए।
खीरा सेहत के लिए बहुत लाभदायक होता है। लेकिन क्या आपको पता इसका छिलका भी किसी से कम नहीं होता है। इसमें फाइबर भरपूर होता है, जो पाचन क्रिया के लिए बहुत ही लाभदायक होता है तथा कब्ज की समस्या दूर होती है।
एक हैल्दी आहार के रूप में महिला को हर रोज 25 ग्राम फाइबर और पुरूषों को 38 ग्राम फाइबर की जरूरत होती है। इसलिए खीरा खाने के साथ-साथ इसके छिलके का भी सेवन कीजिए।
-विटामिन मौजूद : खीरे के छिलके में विटामिन के मौजूद होता है, जो शरीर की हड्डियों को मजबूत , सेल के विकास तथा रक्त के थक्कों को बनने से रोकने में सहायक होता है।
-त्वचा में ताजगी : खीरे का छिलका त्वचा को निखारने में मदद करता है। खीरे के छिलके को निकालकर सुखा लीजिए। फिर उसे अच्छे से पीसकर उसमें नींबू की कुछ बूदें मिला लीजिए। अब एक कटोरे में इस पेस्ट को डाल दीजिए और उसमें एलोवेरा जेल मिलाकर अपनी त्वचा पर लगाए।
-त्वचा को हाइड्रेट : खीरा त्वचा को कई तरह की समस्याओं से राहत दिलाने में मदद करता है जैसे टैनिंग, सनबर्न, रैशेज आदि। रोजाना छिलके समेत खीरा खाएं।
-कम कैलोरी : खाने के साथ रोजाना खीरा खाने से वजन कम होता है क्योंकि इसमें कैलोरी की मात्रा प्राकृतिक रूप से बहुत कम होती है। छिलके सहित खीरा खाना तो और भी फायदेमंद होता है।
-आंखों की रोशनी तेज : छिलके सहित खीरा खाने से आंखों की रोशनी तेज रहती है क्योंकि खीरे के छिलके में बीटा कैरोटीन विटामिन ए का स्रोत होता है। बीटा कैरोटीन आंखों के स्वास्थ्य तथा दृष्टि के लिए बहुत अच्छा होता है।
नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे-4 के अनुसान बिहार में 48.3 फीसदी बच्चे कुपोषित
कुपोषण के मामले में भारत पड़ोसी देश पाकिस्तान और बांग्लादेश से भी पीछे
हर साल 1 से 7 सितंबर तक नेशनल न्यूट्रिशन वीक मनाया जाता है. जिसका मुख्य उद्देश्य कुपोषण को लेकर लोगों को जागरूक करना है. दरअसल, कुपोषण किसी भी देश या समाज के लिए मौजूदा समय में सबसे बड़ी समस्या है. अगर भारत के संदर्भ में देखें तो तमाम कोशिशों के बावजूद आंकड़े सोचने के लिए मजबूर करते हैं.
कुपोषण बड़ी समस्या
केंद्र सरकार भारत को कुपोषण मुक्त करने के लिए तमाम कोशिशें कर रही हैं. सरकार ने राष्ट्रीय पोषण मिशन का नाम बदलकर ‘पोषण अभियान’ कर दिया है. महिला एवं बाल विकास मंत्री स्मृति ईरानी ने कुपोषण मुक्त भारत का लक्ष्य 2022 तक हासिल करने का नारा दिया है. लेकिन भारत में कुपोषण की इतनी बड़ी समस्या है कि इससे निपटना आसान नहीं है. आज लगभग हर तीसरा बच्चा कुपोषित है. क्योंकि स्टंटिंग और कुपोषण की शुरुआत बच्चे से नहीं बल्कि गर्भवती माता से होती है.
पश्चिम बंगाल में बढ़े कुपोषण के मामले
भारत में 5 साल से कम उम्र के कुपोषित बच्चे 35 प्रतिशत हैं. इनमें भी बिहार और उत्तर प्रदेश सबसे आगे हैं. उसके बाद झारखंड, मेघालय और मध्य प्रदेश का नंबर है. मध्य प्रदेश में 5 साल से छोटी उम्र के 42 फीसद बच्चे कुपोषित हैं तो बिहार में यह फीसद 48.3 है. पश्चिम बंगाल में कुपोषण के मामले तेजी से बढ़े हैं. 2005 के मुकाबले NFHS-4 सर्वे में करीब 4.5 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई, जो कि एक चिंता का विषय है.
बिहार में सबसे ज्य़ादा कुपोषण के मामले
नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे-4 (2015-16) के मुताबिक कुपोषण के सबसे ज्यादा मामले बिहार में पाए गए. बिहार में 5 साल से कम उम्र के करीब 48.3 फीसदी बच्चे शरीरिक रूप से अविकसित (Stunted) थे, इसकी बड़ी वजह उचित पोषण आहार का नहीं मिलना है. WHO के मुताबिक बिहार के मुजफ्फरपुर में सबसे ज्यादा कुपोषित बच्चे हैं.
कुपोषण के सबसे ज्यादा मामले बिहार, उत्तर प्रदेश, झारखंड, मेघालय और मध्य प्रदेश में पाए जाते हैं. नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे-4 के अनुसान बिहार में 48.3 फीसदी, उत्तर प्रदेश में 46.3 फीसदी, झारखंड में 45.3 फीसदी, मेघालय में 43.8 और मध्य प्रदेश में 42 फीसदी कुपोषित बच्चे हैं. जबकि में भारत में यह आंकड़ा 35.7 फीसद का है.
छत्तीसगढ़ में भी कुपोषण बड़ी समस्या
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक छत्तीसगढ़ में 5 साल तक के 37 फीसदी से ज्यादा बच्चे कुपोषित हैं, आंकड़ों में यह संख्या करीब 5 लाख है. बिलासपुर जैसे शहरी क्षेत्र वाले जिले में सबसे ज्यादा करीब 35 हजार बच्चे कुपोषित हैं. दूसरे नंबर पर राजनांदगांव है, जहां करीब 33 हजार बच्चे कुपोषित हैं.
कुपोषण से लड़ने में पाक-बांग्लादेश से भारत पीछे
ग्लोबल न्यूट्रिशन रिपोर्ट 2018 के अनुसार दुनिया के सबसे ज्यादा कुपोषित बच्चे भारत में रहते हैं. कुपोषण के मामले में हम अपने पड़ोसी पाकिस्तान और बांग्लादेश से भी पीछे हैं. ऐसा नहीं है कि कुपोषण के मामले में भारत में कोई प्रगति नहीं हुई है. 2005-06 में कुपोषण के शिकार लोगों (स्टंटेड) का 48 फीसद था, जो 2015-16 में घटकर 38.4 फीसद और 2018 में 31 फीसद रह गया है.
कुपोषण के कारण
पोषण की कमी और बीमारियां कुपोषण के सबसे प्रमुख कारण हैं. अशिक्षा और गरीबी के चलते भारतीयों के भोजन में आवश्यक पोषक तत्त्वों की कमी हो जाती है जिसके कारण कई प्रकार के रोग जैसे एनीमिया, घेंघा व बच्चों की हड्डियां कमजोर होना है.
बचाव के तरीके
6 महीने तक केवल मां का दूध उसके बाद से शिशुओं को पूरक आहार (दाल का पानी, डिब्बाबंद प्रोटीन) दिया जाना चाहिए.
10 साल में बदली है कुछ तस्वीर
गंभीर कुपोषण के शिकार बच्चों का अनुपात वर्ष 2005-06 के 48 प्रतिशत से घटकर वर्ष 2015-16 में 38.4 प्रतिशत हो गया. इस अवधि में अल्प वजन के शिकार बच्चों का प्रतिशत 42.5 प्रतिशत से घटकर 35.7 प्रतिशत हो गया. साथ ही शिशुओं में रक्ताल्पता (एनीमिया) की स्थिति 69.5 प्रतिशत से घटकर 58.5 प्रतिशत रह गई. लेकिन इसे बड़ा बदलाव नहीं कहा जा सकता है.
गौरतलब है कि दिसंबर, 2017 में देश को कुपोषण से मुक्त करने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई थी. कैबिनेट की बैठक में राष्ट्रीय पोषण मिशन की स्थापना को मंजूरी दी गई थी. इसका लक्ष्य कुपोषण को 2015-16 के 38.4 फीसदी से घटाकर 2022 में 25 फीसदी पर लाना है.
कई मोबाइल वॉलेट कंपनियां अपने ग्राहकों से लगातार केवाईसी पूरा करने के लिए कह रही है, ऐसे नहीं करने पर कंपनियों की तरफ से ट्रांजेक्शन की सुविधा बंद करने के लिए कहा जा रहा है. दरअसल आरबीआई की तरफ से विभिन्न मोबाइल वॉलेट कंपनियों को नोटिस भेजा गया है, इस नोटिस में ग्राहकों के केवाईसी पूरा कराने के लिए कहा गया है. इस बीच एक प्रमुख ई-वॉलेट कंपनी ने अपनी सर्विस बंद करने का ऐलान किया है. अगर आप भी वोडाफोन का एम पैसा M-Pesa मोबाइल वॉलेट यूज करते हैं तो एक बार यह खबर जरूर पढ़ लीजिए. M-Pesa ने अपनी वेबसाइट पर सूचना दी है कि 30 सितंबर से एम पैसा का ऑपरेशन एक्सपायर हो जाएगा.
30 सितंबर को एक्सपायर हो रहा सर्टिफिकेट यानी अगर आपने भी M-Pesa में कुछ पैसा रखा है तो उसे 29 सितंबर तक अपने खाते में ट्रांसफर कर लें या फिर खर्च कर लें. कंपनी की तरफ से कहा गया कि आप रकम खर्च करने के अलावा अकाउंट बंद करने या सेटलमेंट के लिए आवेदन भी कर सकते हैं. कंपनी की तरफ से वेबसाइट पर जारी की गई सूचना में कहा गया है कि आरबीआई की तरफ से इस सर्विस के लिए जारी किया गए सर्टिफिकेट 30 सितंबर को एक्सपायर हो रहे हैं.
ऐसे निकालें अपना पैसा कंपनी के अनुसार अगर आपके वॉलेट में अमाउंट जीरो है तो आपकी तरफ से बिना कोई प्रोसेस किए अकाउंट बंद कर दिया जाएगा. कंपनी का कहना है जब ग्राहक क्लोजर या सेटलमेंट के लिए रिक्वेस्ट डालेगा तो उसे अपनी बैंक खाते की पूरी जानकारी देनी होगी, ताकि बकाया राशि को उसके अकाउंट में ट्रांसफर किया जा सके.
यहां करें संपर्क इस बारे में किसी भी प्रकार की जानकारी के लिए वोडाफोन ग्राहक 55400 नंबर पर जानकारी कर सकते हैं. अन्य ग्राहक 180012355400 पर कॉल कर इस बारे में विस्तृत जानकारी हासिल कर सकते हैं. आप ई-मेल एड्रेस customercare.vmpl@vodafoneidea.com पर भी मेल करने के अलावा mpesa.in पर भी विजिट कर सकते हैं. इसके अलावा आप नजदीकी वोडाफोन स्टोर पर भी सर्विस रिक्वेस्ट दे सकते हैं. कंपनी के अनुसार पूरा प्रोसेस में करीब 7 दिन का समय लगेगा.
आरबीआई ने सभी मोबाइल वॉलेट कंपनियों को 31 अगस्त 2019 तक ग्राहकों का केवाईसी पूरा कराने के लिए कहा है. आरबाआई की तरफ से फुल केवाईसी की अवधि छह महीने के लिए बढ़ा दी गई है. अगर आप भी किसी कारणवश केवाईसी प्रोसेस नहीं कर पाए तो आपको परेशानी हो सकती है. ईकेवाईसी, पार्शियल केवाईसी या मिनिमम केवाईसी एक्सपायर होने पर वॉलेट आपको ब्लॉक कर सकता है. ऐसे में आप वॉलेट से ट्रांजेक्शन मसलन पैसे एड करना या मनी ट्रांसफर नहीं कर पाएंगे.