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बीजेपी में फिर छाया शोक, जेटली के बाद अब भाजपा के बड़े मुस्लिम नेता की मौत…

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भारतीय जनता पार्टी के दिन इन दिनों अच्छे नहीं चल रहे हैं। बीजेपी में नेताओं के निधन का सिलसिला रुकने का नाम नहीं ले रहा है। अभी हाल ही में पूर्व विदेश मंत्री सुषमा स्वराज का निधन हो गया था। इस गम से पार्टी उबर भी नहीं पाई थी कि पूर्व विदेश मंत्री अरुण जेटली ने भी दम तोड़ दिया। अब एक बार फिर पार्टी में शोक की लहर दौड़ गई है। यूपी के बड़े भाजपा नेता की मौत हो गई है।

अरुण जेटली और सुषमा के गम से ही नहीं उबरी थी भाजपा

भारतीय जनता पार्टी ने हाल ही में अपने दो दिग्गज नेताओं को खोया। इनमें सुषमा स्वराज और अरुण जेटली थे। दोनों ही नेताओं की खराब सेहत की वजह से उनकी मौत हो गई। सुषमा स्वराज को तो अचानक हार्ट अटैक पड़ गया था जबकि अरुण जेटली कई दिनों से अस्पताल में भर्ती थे और हाल ही में उन्होंने भी एम्स में दम तोड़ दिया था। दोनों के निधन से पहले ही भाजपा शोक में डूबी थी।

जानें यूपी के कौन से बड़े नेता की हो गई मौत

भारतीय जनता पार्टी के बड़े मुस्लिम नेता रहे डॉ मोहम्मद मुस्लिम की गुरुवार को मौत हो गई। वो यूपी के बड़े नेता थे और अमेठी जिले से दो बार विधायक भी रह चुके थे। लंबे समय से बीमार चल रहे डॉ मुस्लिम का लखनऊ में इलाज चल रहा था। डॉ मुस्लिम भाजपा ही नहीं बल्कि सपा और बसपा में भी रह चुके थे और मायावती और मुलायम सिंह के भी करीबी नेताओं में माने जाते थे।

छत्तीसगढ़ : PDS घोटाले में EOW करेगी तीन IAS से पूछताछ

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छत्तीसगढ़ में भाजपा शासनकाल में हुए बहुचर्चित 36 सौ करोड़ के नागरिक आपूर्ति निगम(नान) घोटाले में अब आइएएस अधिकारियों से पूछताछ होगी। नान में पदस्थ वर्ष 2011 से 2015 के बीच के तीन आइएएस और एक आइएफएस से ईओडब्ल्यू पूछताछ करेगी।

ईओडब्ल्यू के उच्च पदस्थ सूत्रों की मानें तो नान के उपलेखापाल चिंतामणि चंद्राकर के लैपटाप में कई अफसरों को पैसा देने का खुलासा हुआ है। ब्यूरो ने इस लैपटॉप की प्रारंभिक जांच की है। बताया जा रहा है कि इसमें करीब 80 अधिकारियों, नेताओं और कारोबारियों के नाम सामने आए हैं।

चौंकाने वाली बात यह है कि चिंतामणि के लैपटाप में चार साल में करीब 100 करोड़ रुपये के लेन-देन की जानकारी सामने आई है।अब ईओडब्ल्यू उन लिंक की भी तलाश करने जा रही है, जिसके पास से पैसे आए हैं। ईओडब्ल्यू अधिकारियों से चितांमणि चंद्राकर के ठिकानों पर छापामारी के बाद मिले दस्तावेज के आधार पर पूछताछ होगी।

इसके लिए एक-एक करके नोटिस जारी किया जा रहा है। इससे पहले आइएफएस कौशलेंद्र सिंह से भी पूछताछ की गई है। बताया जा रहा है कि उनको एक बार फिर तलब किया जाएगा। इससे पहले नान मुख्यालय से भी ईओडब्ल्यू ने फाइल जब्त की थी। उसकी जांच भी अंतिम दौर में पहुंच गई है।

अफसरों ने संकेत दिए हैं कि जांच में पर्याप्त सबूत मिलने पर उस समय पदस्थ अफसरों के खिलाफ भी कार्रवाई की जा सकती है। वर्ष 2015 में नान दफ्तर में छापे के दौरान डायरी मिली थी। उसके पन्नों को कोर्ट में पेश किया गया था। यह जांच तब सिर्फ एक साल की थी लेकिन अब छह साल की गड़बड़ी पर फोकस किया जा रहा है।

नान के अधिकारियों ने पूछताछ में बताया था कि वर्ष 2011 से ही डायरी में नान के पैसे के लेनदेन की एंट्री की जा रही थी। ईओडब्लू जांच कर रही है कि 2011 से नान में चल रही डायरी कहां है और उसे जांच में शामिल क्यों नहीं किया गया।

Bilaspur : मरवाही की लाख की चूड़ियां सजेंगी मुख्यमंत्री निवास में

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 जिले के विकासखण्ड मरवाही की आदिवासी महिलाओं द्वारा निर्मित लाख की चूड़ियां अब मुख्यमंत्री निवास में भी सजेंगी और यहां आने जाने वाले लोगों को आकर्षित करेंगी। इन चूड़ियों की बिक्री से उनकी आय भी होगी। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने डीएफओ मरवाही वनमंडल को निर्देश दिया है कि उनके निवास स्थल पर इन लाख की चूड़ियों का स्टाल लगाया जाये।

मरवाही की देवसेना समूह की महिलाओं द्वारा लाख की चूड़ियों का निर्माण किया जा रहा है। इसके लिये समूह की महिलाओं ने मरवाही वनमंडल के ईएसआईपी परियोजना अंतर्गत बकायदा प्रशिक्षण भी लिया है।

ग्राम बरगवां की रेणु, सियावती, जयकुमारी, दानीकुंडी की नीता बाई कोरवा, केशकली श्याम, कृष्णकुमारी पाव, सियावती आदि महिलायें लाख चूड़ी निर्माण में निपुण हैं। हरेली त्यौहार के अवसर पर मुख्यमंत्री जब ग्राम नेवरा के गौठान लोकार्पण कार्यक्रम में आये थे। तब उन्होंने इन महिलाओं की कला देखी और उसकी सराहना भी की। बिलासपुर कलेक्टर डाॅ.संजय अलंग के पहल पर स्थानीय मैग्नेटो माॅल में समूह को स्टाॅल उपलब्ध कराया गया है। जहां वे अपनी चूड़ियों की बिक्री कर सकेगी।

उल्लेखनीय है कि मरवाही क्षेत्र में रंगीन लाख बहुतायत से होता है। व्यापारियों द्वारा इसे सस्ते में खरीदकर मंहगे दामों में बाहर बेचा जाता है। क्षेत्र में पहली बार लाख का मूल्य वर्धित कर इसे लघु व्यवसाय के रूप में देवसेना समूह की महिलाओं ने स्थापित किया है।

महिलाएं 10 मिनट में बिना नग वाले लाख की चूड़ी सेट और डेढ़ घंटे में नग वाली चूड़ी सेट तैयार कर लेती हैं। चूड़ी बनाने के लिये लाख अभी व्यापारी से खरीदना पड़ता है। लेकिन इनकी योजना है कि वे खुद ही गांव के लोगों से लाख खरीदेंगी और उसकी प्रोसेसिंग भी करेंगी। जिससे उन्हें ज्यादा फायदा मिलेगा और बिचौलियों से भी मुक्ति मिलेगी।

Raipur : फ्लाइट की कमी से और बढ़ा ट्रैफिक, मुंबई का हवाई किराया 15000 पार

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भले ही दिल्ली, हैदराबाद, भोपाल, इलाहाबाद समेत कई शहरों का हवाई किराया सामान्य है, लेकिन मुंबई का हवाई फेयर आसमान पर है। ट्रैवल्स संचालकों का कहना है कि अगर हफ्ते भर बाद भी मुंबई की फ्लाइट टिकट चाहिए तो इन दिनों 15 हजार से अधिक का फेयर मिल रहा है। मुंबई के अलावा दिल्ली, हैदराबाद,भोपाल, इंदौर, इलाहाबाद, कोलकाता आदि का हवाई फेयर 4500 रुपये से लेकर 7000 रुपये तक ही आ रहा है।

बताया जा रहा है कि मुंबई का हवाई फेयर महंगा होने का सबसे बड़ा कारण फ्लाइट की कमी है। जेट एयरवेज की फ्लाइट बंद होने के बाद केवल इंडिगो और एयर इंडिया की फ्लाइट ही मुंबई उड़ान भर रही है, जबकि व्यापार आदि के सिलसिले में मुंबई जाने वालों का ट्रैफिक काफी बढ़ गया है। इसके कारण ही मुंबई का फेयर काफी महंगा है। मुंबई के अलावा बाकी क्षेत्रों के हवाई फेयर में किसी तरह से बढ़ोतरी नहीं हुई है। हालांकि फ्लाइट फुल जा रही है।

मुंबई के खाली स्लाट पर बनाए जा रहे नए शेड्यूल-

विमानन कंपनियों से मिली जानकारी के अनुसार जेट एयरवेज के बंद होने के बाद से मुंबई फ्लाइट का शेड्यूल खाली है। इसे देखते हुए दूसरी विमानन कंपनियां खाली स्लाट में अपना मुंबई के लिए शेड्यूल बना रही हैं। बताया जा रहा है कि त्योहारी दिनों में मुंबई और अहमदाबाद के लिए नई उड़ान भी शुरू हो सकती है। इन क्षेत्रों के लिए उड़ान शुरू करने ट्रैवल्स संचालकों द्वारा प्रस्ताव भेजा गया है।

सस्ती हवाई सेवा चाहिए तो कीजिए दो-तीन माह पहले की प्लानिंग

अगर आप सस्ती हवाई यात्रा करना चाहते हैं तो आपको अपनी यात्रा की प्लानिंग कम से कम तीन माह पहले ही कर लेनी चाहिए। हवाई यात्रा की प्लानिंग पहले से करने से आपको टिकट में कम से कम 30 से 40 फीसद सस्ती टिकट मिल जाती है। उदाहरण के लिए मान लीजिए 29 अगस्त की तारीख में दिल्ली का हवाई फेयर 5000 रुपये है तो इसे पहले से बुक कराने पर आपको सीधे-सीधे 3000 रुपये से भी कम में यात्रा कर सकते है।

ट्रैवल्स संचालकों के अनुसार अभी त्योहारी सीजन आने को है और ऐसे में टिकटों की बुकिंग अभी से शुरू हो गई है।ट्रैवल्स संचालकों के साथ ही ऑनलाइन टिकटों की मारामारी बनी हुई है। इसके चलते त्योहारी दिनों में टिकट बुक होने लगे है।

आज की तारीख में भोपाल, इंदौर, हैदराबाद, दिल्ली, कोलकाता का हवाई फेयर 4000 रुपये 7000 रुपये के बीच है। ट्रैवल्स कारोबारी कीर्ति व्यास ने बताया कि इन क्षेत्रों की बुकिंग अगर तीन माह पहले से कराई जाए तो आप सस्ती हवाई टिकट पा सकते है।

छत्तीसगढ़ : मंदी की मार, बाजार बेहाल

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अगर आप घर बनाने की सोच रहे हैं तो यह समय आपके लिए काफी अनुकूल कहा जा सकता है। मार्केट में डिमांड की सुस्ती का असर बिल्डिंग मटेरियल की कीमतों में देखने को मिल रहा है। सरिया, सीमेंट के बाद अब रेत की कीमतों में भी गिरावट आ गई है। क्षेत्र से जुड़े कारोबारियों का कहना है कि आने वाले दिनों में भी इनमें गिरावट के ही संकेत हैं। इन दिनों पूरा भवन निर्माण सामग्री की कीमतों में गिरावट है।

बाजार की सुस्ती के चलते इन दिनों लोहा बाजार में तो मंदी ही छाई है। इसके चलते फैक्टरियों में सरिया 36000 रुपये प्रति टन और रिटेल में 39000 रुपये प्रति टन बिक रहा है। इसके साथ ही सीमेंट 220 रुपये प्रति बैग बिक रही है। क्षेत्र से जुड़े कारोबारियों का कहना है कि ऑफ सीजन के चलते इनकी डिमांड कमजोर है। साथ ही शासकीय कार्यो के साथ ही निजी काम भी इन दिनों बंद पड़े हुए है। इनका असर ही कीमतों में देखने को मिल रहा है। अब त्योहारी सीजन आने को है और ऐसे में डिमांड और घट जाती है। भवन निर्माण सामग्री के दाम सस्ते होने के साथ ही इन दिनों रियल इस्टेट सेक्टर में भी मंदी छाई हुई है। इसके चलते प्रॉपर्टी की कीमतों में भी स्थिरता है।

11 हजार से घटकर 9000 हुई रेत

पखवाड़े भर पहले ही रेत 500 फीट(प्रति हाइवा) 11000 रुपये में बिक रही,जो अब घटकर 9000 रुपये में पहुंच गई है। बताया जा रहा है कि इसके साथ ही इसकी सप्लाई भी प्रभावित हो गई थी, लेकिन अब रेत की सप्लाई सामान्य होती जा रही है। रेत की सप्लाई प्रभावित होने के कारण बीते कुछ महीनों से रेत की कीमतों में लगातार तेजी बनी हुई थी और इसके बाद 13000 रुपये तक पहुंच गए थे।

हरियाली बढ़ाने के लिए छत्तीसगढ़ को मिलेंगे 5751 करोड़ रुपए

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 हरियाली बढ़ाने के लिए केंद्र सरकार ने खजाना खोल दिया है। राज्यों को इसके लिए 47 हजार करोड़ का विशेष पैकेज जारी किया है, जो राज्यों को वनों के संरक्षण के लिए दिए जाने वाले बजट के अतिरिक्त होगा। सबसे ज्यादा छह हजार करोड़ की राशि अकेले ओडिशा को दी गई है, जबकि छत्तीसगढ़ को करीब 57 सौ करोड़ और मध्यप्रदेश को करीब 5200 करोड़ रुपए दिए गए।

केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्री प्रकाश जावडेकर ने गुरुवार को राज्यों के वन एवं पर्यावरण मंत्रियों और अधिकारियों के साथ बैठक के बाद इस पैकेज का एलान किया। साथ ही सभी 27 राज्यों को यह राशि जारी भी कर दी गई है।फिलहाल राज्यों को यह राशि कॉम्पेंसेटरी अफॉरेस्टेशन फंड मैनेजमेंट एंड प्लानिंग अथॉरिटी (कैंपा) के तहत दी गई है।

यह राशि विकास योजनाओं में नष्ट होने वाले जंगलों की भरपाई के लिए संबंधित एजेंसियों की ओर से जमा कराई जाती है। यह पैसा बाद में केंद्र से राज्यों को वन क्षेत्र को बढ़ाने सहित पर्यावरण से जुड़ी गतिविधियों को संचालित करने के लिए दिया जाता है।

कैंपा के तहत राज्यों की दी गई राशि का इस्तेमाल सिर्फ वनीकरण पर ही खर्च किया जा सकता है। वेतन भुगतान, यात्रा भत्ते, चिकित्सा व्यय आदि जरूरतों के लिए इसके इस्तेमाल पर पूरी तरह से रोक है।

छत्तीसगढ़ में पहली बार CM हाउस में मनाया गया पोला तीजा, देखें VIDEO

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 छत्तीसगढ़ में पहली बार आज पोला तीज का त्योहार मुख्यमंत्री निवास में उत्साह के साथ मनाया गया। इस दौरान मुख्यमंत्री भूपेश बघेल भी उत्साह में दिखे और बच्चों को चाकलेट बांटी। यहां कई महिलाएं भी पारंपरिक परिशान में पोला तीज त्योहार मनाने पहुंची। गौरतलब है कि प्रदेश में कांग्रेस सरकार आने के बाद पहली बार ऐसा हो रहा है कि छत्तीसगढ़ी त्योहारों को तवज्जो दी जा रही है।

पोला तीज त्योहार मनाने के लिए छत्तीसगढ़ की परंपरा और रीति-रिवाज के अनुसार मुख्यमंत्री निवास में साज-सज्जा की गई थी। शुक्रवार सुबह नौ से 10 बजे तक पोला का कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस मौके पर नंदी-बैल की पूजा की गई, वहीं 11 बजे से शाम 4 बजे तक तीजा महोत्सव का आयोजन किया जाएगा। तीजा महोत्सव के लिए प्रदेश के विभिन्न् स्थानों से बहनों को आमंत्रित किया गया है। इस अवसर पर बहनों द्वारा करूभात खाने की रस्म पूरी की जाएगी। साथ ही छत्तीसगढ़ के पारम्परिक खेलों का भी आयोजन रखा गया है।

खेती-किसानी से जुड़ा तिहार है पोरा

छत्तीसगढ़ का पोरा तिहार मूल रूप से खेती-किसानी से जुड़ा पर्व है। खेती किसानी में बैल और गौवंशीय पशुओं के महत्व को देखते हुए इस दिन उनके प्रति आभार प्रकट करने की परम्परा है। छत्तीसगढ़ के गांवों में बैलों को विशेष रूप से सजाया जाता है। उनकी पूजा-अर्चना की जाती है। घरों में बच्चे मिट्टी से बने नंदीबैल और बर्तनों के खिलौनों से खेलते हैं। घरों में विभिन्न पकवान तैयार किए जाते हैं और उत्सव मनाया जाता है। बैलों की दौड़ भी इस अवसर पर आयोजित की जाती है।

तीज को खास बनाने मायके आती हैं बेटियां

छत्तीसगढ़ में तीजा (हरतालिका तीज) की विशिष्ट परम्परा है, महिलाएं तीजा मनाने मायके आती हैं। छत्तीसगढ़ में तीजा पर्व की इतना अधिक महत्व है कि बुजुर्ग महिलाएं भी इस खास मौके पर मायके आने के लिए उत्सुक रहती हैं। महिलाएं पति की दीर्घायु के लिए तीजा पर्व के एक दिन पहले करू भात ग्रहण कर निर्जला व्रत रखती हैं।

पोला सेलिब्रेशन: सीएम भूपेश बघेल ने चढ़ी गेड़ी, इस विधायक ने महिलाओं के साथ लगाए ठुमके

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छत्तीसगढ़ सरकार (Chhattisgarh Government) ने हरेली (Hareli) के बाद अब सूबे के पारम्परिक त्यौहार पोरा-तीजा (Pola- Teej Festival)को बड़े ही व्यापक स्तर पर मना. मुख्यमंत्री भूपेश बघेल (CM Bhupesh Baghel) के रायपुर (Raipur) स्थित सीएम निवास (CM House) पर पोला पर्व मनाया जा गया. इसके लिए मुख्यमंत्री निवास में विशेष इंतजाम (Special Arrangements) भी किया गया है. छत्तीसगढ़ की परंपरा (Tradition)और रीति-रिवाज (Customs and Traditions) के अनुसार सीएम हाउस में साज-सज्जा की गई है. सूबे के पापंरिक व्यंजन (Traditional Food) तैयार किए गए. नंदी बैलों को भी सजाया गया.

बता दें कि सुबह से आस-पास के लोगों को भी पोला मनाने सीएम हाउस में न्योता दिया गया था. इस दौरान स्थानिय कलाकारों में बेहद मनमोहक प्रस्तुति भी दी. पारंपरिक वाद्य यंत्रों नृत्य के साथ कलाकारों ने सीएम हाउस में अपनी प्रस्तुति दी. तीजा महोत्सव के लिए प्रदेश के कई इलाकों से महिलाओं को आमंत्रित किया गया है. इस दौरान महिलाओं द्वारा करूभात खाने की रस्म भी पूरी की गई. इसके साथ ही छत्तीसगढ़ के पारम्परिक खेलों का भी सीएम हाउस में आयोजन किया जाएगा. सीएम भूपेश बघेल ने नंदी बैल की पूजा कर पोल पर्व की शुरुआत भी की.

सीएम हाउस में पोला बड़े ही धूमधाम के साथ मनाया गया. ये पहला मौका था जब इतने बड़े स्तर पर छत्तीसगढ़ के पारंपरिक पर्व को सीएम हाउस में मनाया गया. इस दौरान महिलाओं के लिए कई कार्यक्रमों का आयोजन किया गया. गीत संगीन के कार्यक्रम में उस वक्त तालियां बजने लगी जब विधायक कुंवर सिंह निषाद महिलाओं के साथ स्टेज पर ठुमके लगाने लगे. बता दें कि तोर बिन कैसे लागे राजा, इस छत्तीसगढ़ी गाने पर महिलाओं के साथ गुंडरदेही विधायक कुवंर सिंह निषाद (Kunwar Singh Nishad) जमकर नाचे. तीज के इस कार्यक्रम में कसडोल विधायक शंकुतला साहू और तखतपुर की विद्यायक रश्मि सिंह भी हुई शामिल. इस दौरान सीएम भूपेश बघेल ने गेड़ी का मजा लिया और महिलाओं के साथ झूला भी झूला. 

बिहार में शराबबंदी के बाद अब पान मसाला की बिक्री पर लगा प्रतिबंध, रिपोर्ट आने पर अन्य पान मसाला पर होगी कार्रवाई

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 बिहार में पान मसाला के उत्पादन, बिक्री, भंडारण और वितरण पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी गयी है. राज्य के खाद्य संरक्षा आयुक्त ने जन स्वास्थ्य के हित में जिन पान मसालों पर प्रतिबंध लगाया है, उनमें रजनीगंधा, राज निवास, सुप्रीम पान पराग, पान पराग, बहार, बाहुबली, राजश्री, रौनक, सिग्नेचर, पैसन, कमला पसंद और मधु पान मसाला शामिल हैं. प्रतिबंध लगाये जाने की सूचना सूबे के सभी जिलाधिकारी, आरक्षी अधीक्षक, प्रमंडलीय आयुक्त और सिविल सर्जनों को दिये जाने के साथ इसे प्रभावी तरीके से लागू करने का निर्देश दिया गया है.

खाद्य संरक्षा आयुक्त सह स्वास्थ्य विभाग के प्रधान सचिव संजय कुमार द्वारा लोगों के स्वास्थ्य पर पड़नेवाले दुष्प्रभावों के कारण पान मसाला की खरीद-बिक्री, भंडारण, परिवहन और प्रदर्शन करने पर रोक लगाने का आदेश जारी किया है. शुक्रवार को जारी आदेश में बताया गया है कि राज्य में विभिन्न ब्रांड के पान मसालों के 20 सैंपल की जांच करायी गयी है. इसका विश्लेषण करने पर पाया गया कि इन मसालों में मैग्नेशियम कार्बोंनेट के तत्व पाये गये है. इन तत्वों के सेवन से हाइपरमैगनेसिया और हृदयाघात की आशंका होती है. इसे देखते हुए इन सभी पान मसालों पर तत्काल प्रभाव से एक साल के लिए प्रतिबंध लगाया गया है. कुछ अन्य ब्रांडों का नमूना जांच के लिए भेजा गया है, जिसकी रिपोर्ट आने पर उस पर भी कार्रवाई की जायेगी.

नेशनल थर्मल पावर कॉरपोरेशन ने कोयला खनन के लिए एनटीपीसी माइनिंग कंपनी बनायी

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 सार्वजनिक क्षेत्र की बिजली कंपनी एनटीपीसी ने शुक्रवार को कोयला खनन के लिए अलग कंपनी एनटीपीसी माइनिंग लिमिटेड के गठन की घोषणा की है. इससे एनटीपीसी का वाणिज्यिक कोयला खनन में कदम रखने का मार्ग प्रशस्त होगा. एनटीपीसी की कोयला अनुषंगी कंपनी को शेयर बाजार में सूचीबद्ध कराने की भी योजना है. कंपनी ने बंबई शेयर बाजार को बताया कि एनटीपीसी ने ‘एनटीपीसी माइनिंग लिमिटेड’ के नाम से 29 अगस्त, 2019 को कंपनी रजिस्ट्रार, दिल्ली के पास अपनी पूर्ण स्वामित्व वाली अनुषंगी का गठन किया है. एनटीपीसी ने खनन कारोबार करने के लिए यह इकाई बनायी है.

एक अधिकारी ने नाम सार्वजनिक नहीं करने की शर्त पर बताया कि एनटीपीसी की योजना एक कोयला अनुषंगी स्थापित करने की है.यह इकाई एनटीपीसी की सभी कोयला खदानों का परिचालन करेगी और एक कोयला कंपनी के रूप में काम करेगी. एनटीपीसी को अपनी ईंधन की जरूरतों को पूरा करने के लिए 10 कोयला खदान आवंटित किये गये हैं. पांच खदानों में परिचालन शुरू हो चुका है.

नीति आयोग ने पिछले साल कोयला खनन कारोबार के लिए अलग अनुषंगी स्थापित करने की मंजूरी दी थी. हालांकि, कोयला मंत्रालय की ओर से अनुमति का इंतजार किया जा रहा था. अधिकारी ने कहा कि कोयला मंत्रालय के प्रस्ताव को मंजूरी देने के बाद से ही एनटीपीसी ने कोयला खनन कारोबार के लिए अलग इकाई स्थापित करने का काम शुरू कर दिया था. हालांकि, अधिकारी ने एनटीपीसी की कोयला खनन इकाई के शेयर बाजार पर सूचीबद्ध होने के संबंध में कोई जानकारी नहीं दी है.