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भाजपा अध्यक्ष पद के लिए चुनाव का ऐलान, कौन बन सकता है पार्टी का अगला अध्यक्ष?

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भारतीय जनता पार्टी के कार्यकारी अध्यक्ष जेपी नड्डा ने गुरुवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस कर पार्टी के नए अध्यक्ष के लिए चुनाव का ऐलान किया है। नड्डा के मुताबिक इस साल दिसंबर तक भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष का चुनाव किया जाएगा। इसके साथ यह सवाल एक बार फिर सबके सामने आने लगा है कि पार्टी का अगला अध्यक्ष कौन होगा।

भाजपा के संविधान के अनुसार नए पार्टी अध्यक्ष का चुनाव या नियुक्ति देशभर के सभी राज्यों के पचास प्रतिशत में सगंठन के चुनाव होने के बाद ही हो सकता है। 2019 के लोकसभा चुनाव के चलते सितंबर 2018 में पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी ने बैठक में तय किया था कि लोकसभा चुनाव तक नए अध्यक्ष की नियुक्ति को स्थगित किया जाए।

लोकसभा चुनाव के बाद अमित शाह ने केंद्रीय गृहमंत्री के रुप में शपथ लिया तो जेपी नड्डा को पार्टी का कार्यकारी अध्यक्ष बनाया गया। अभी गृहमंत्री होने के साथ साथ अमित शाह भाजपा के अध्यक्ष भी हैं। गुरुवार को नए अध्यक्ष के चुनाव के ऐलान के बाद नए नामों पर आशंकाओं का दौर जारी है।

भाजपा के नए अध्यक्ष के चुनाव में खुद जेपी नड्डा हो सकते हैं। नड्डा हिमाचल के ब्राह्मण समुदाय से आते हैं। उनपर भाजपा शीर्ष नेतृत्व को काफी विश्वास है और शाह के करीबी भी हैं। इसके अलावा उनका जुड़ा राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से भी रहा है और उनकी छवि साफ-सुधरी मानी जाती है। मोदी सरकार-1 में उन्होंने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री रहे, इसके अलावा भाजपा की संसदीय बोर्ड के सदस्य भी रहे।

भाजपा अध्यक्ष को लेकर एक और नाम जो बार बार सामने आता रहा है वह हैं भूपेंद्र यादव। भूपेंद्र यादव भाजपा के संगठन में कई अहम जिम्मेदारियों को निभा चुके हैं। वह अभी राजस्थान से राज्यसभा सांसद हैं। यादव संगठन में राष्ट्रीय महासचिव के पद की जिम्मेदारी भी निभा चुके हैं। भूपेंद्र यादव गुजरात में भी अहम जिम्मेदारी संभाल चुके हैं। इसके अलावा वह राजस्थान की पू्र्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के नजदीकी के तौर पर भी देखा जाता है।

इसके अलावा केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी के नाम पर भी कई बार चर्चा होती रही है। गडकरी अभी मोदी सरकार केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री के रुप में जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। उनके पास भी पार्टी की कई जिम्मेदारियों को संभालने का अनुभव है। इसके अलावा उनका आरएसएस से भी जुड़ाव रहा है।

जाड़-फूंक ने नहीं हुआ फायदा, तो तांत्रिक की बेटी को ही किया अगवा, महिला छत्तीसगढ़ में गिरफ्तार

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महिला ने तांत्रिक की झाड़-फूंक की मदद से काफी दिनों तक बेटे और बहू की तलाश करने की कोशिश की, लेकिन जब सफलता नहीं मिली तो तांत्रिक की ही बेटी को अगवा कर लिया। यह दिलचस्प मामला इंदिरापुरम का है, जहां तांत्रिक की झाड़-फूंक से फायदा न होने से गुस्साई एक महिला ने उसकी 2 साल की बेटी को अगवा कर लिया।

एसपी सिटी ने बताया कि इसी बदले की भावना में दुखिया ने 22 अगस्त को घर के बाहर खेल रही तांत्रिक सतेंद्र की 2 साल की बेटी का अपहरण कर लिया। पूछताछ में महिला ने बताया कि वह बच्ची को अपने साथ रखना चाहती थी।

बदले की भावना से किया अपहरण

आरोपी महिला दुखिया के मुताबिक, उसका बेटा और बहू कुछ समय से लापता हैं। उनकी तलाश में वह फोन नंबर के जरिए तांत्रिक सतेंद्र के पास पहुंची थी। सतेंद्र ने बेटे-बहू को वापस लाने का दावा कर उससे हजारों रुपये ठग लिए। इसके बाद भी उनका पता नहीं चला। काफी रुपये देने के बाद भी उनका पता नहीं चला तो महिला बदले की नीयत से तांत्रिक की बेटी को अगवाकर अपने घर छत्तीसगढ़ ले गई।

दिल्ली में घरों का काम करती है महिला

एसपी सिटी श्लोक कुमार ने बताया कि इंदिरापुरम पुलिस ने फोन की लोकेशन के आधार पर मंगलवार को महिला को पकड़ लिया। बच्ची भी सुरक्षित मिल गई है। दिल्ली के पांडव नगर में रहने वाली महिला दुखिया को गिरफ्तार किया गया है। वह मूलरूप से छत्तीसगढ़ की रहने वाली है और दिल्ली में रहकर घरों में साफ-सफाई का काम करती है।

फोन के जरिए ही पकड़ी गई

इस मामले में तांत्रिक सतेंद्र ने इंदिरापुरम थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। उन्होंने महिला का नंबर भी पुलिस को दिया था। इंदिरापुरम थाना प्रभारी दीपक शर्मा ने बताया कि महिला के मोबाइल को सर्विलांस पर डाला गया था। इसी के जरिए 27 अगस्त को उसे छत्तीसगढ़ से पकड़ लिया गया। बच्ची भी मिल गई है।

छत्तीसगढ़ के पूर्व CM अजीत जोगी पर गैरजमानती धाराओं में केस दर्ज

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छत्तीसगढ़ (Chhattisgarh) के पूर्व मुख्यमंत्री (Former Chief Minister) व छत्तीसगढ़ जनता कांग्रेस (Chhattisgarh Janta Congress) के सुप्रीमो अजीत जोगी (Ajit Jogi) पर बिलासपुर (Bilaspur) में गैरजमानती धाराओं (Non-bailable act) में केस दर्ज किया गया है. जाति छानबीन समिति की रिपोर्ट और दिशा-निर्देश पर अजीत जोगी के खिलाफ यह एफआईआर (First Information Report) की गई है. छानबीन समिति (Scrutiny committee) ने बीते 23 अगस्त 2019 को जोगी के जाति के दावे (Caste) को निरस्त कर दिया था. समिति ने अजीत जोगी को आदिवासी (tribal) मानने इनकार कर दिया है.

कार्रवाई के लिए बिलासपुर कलेक्टर को किया गया था अधिकृत

इसमें समिति ने बिलासपुर कलेक्टर (Bilaspur Collector) को कार्रवाई के लिए निर्देश दिया था. इसी के आधार पर गुरुवार को कलेक्टर कार्यालय से तहसीलदार टीआर भारद्वाज सिविल लाइन थाने पहुंचे, जिन्होंने कलेक्टर का लिखित ज्ञापन थाने में प्रस्तुत किया. इसके बाद थाना सिविल लाइन ने अजीत जोगी के खिलाफ छत्तीसगढ़ अनुसूचित जाति जनजाति पिछड़ा वर्ग (सामाजिक प्रास्थिति के प्रमाणीकरण विनियमन) अधिनियम 2013 की धारा 10-1 के तहत एफआईआर दर्ज की है.

एफआईआर (FIR) गुरुवार रात 9.40 बजे दर्ज की गई. इन धाराओं के तहत अजीत जोगी को अधिकतम 2 साल की सजा (2 year jail imprisionment) और 2 हजार से 20 हजार रुपए तक का जुर्माना (Penalty) देने पड़ सकता है. मामले में टीआई कलीम खान ने बताया है कि वे केस की जांच कर आगे की कार्रवाई करेंगे.

अजीत जोगी ने छानबीन समिति की रिपोर्ट आने के बाद कहा था कि वे मामले को हाईकोर्ट और सुप्रीम में कोर्ट लेकर जाएंगे. इसी क्रम में गुरुवार को अजीत जोगी की ओर से हाईकोर्ट में रिट प्रस्तुत की गई है. इसमें 12 से अधिक बिंदुओं का जिक्र करते हुए छानबीन समिति की रिपोर्ट को उन्होंने गलत बताया है.

MP : जबलपुर में आवारा मवेशियों का आतंक, धारा 144 के तहत होगी कार्रवाई

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मध्य प्रदेश के जबलपुर जिले में आवारा मवेशियों का आतंक इस कदर बढ़ गया है कि स्थानीय प्रशासन को अब धारा 144 लगानी पड़ी है. जी हां, जबलपुर कलेक्टर भरत यादव ने गुरुवार देर शाम आदेश जारी करते हुए कहा है कि मवेशी मालिक अब सार्वजनिक जगहों पर या सड़कों पर अपने मवेशियों को खुला नहीं छोड़ सकेंगे. मवेशियों को खुला छोड़ने पर प्रतिबंध लगाते हुए कलेक्टर भरत यादव ने निर्देश जारी किए हैं कि ऐसे मवेशी मालिकों पर धारा 144 के तहत कार्रवाई की जाएगी.

इस आदेश के साथ ही अब पशु मालिकों द्वारा मवेशियों को खुला छोड़ना प्रतिबंधित हो गया है. जबलपुर कलेक्टर एवं जिला दंडाधिकारी भरत यादव ने नगर पालिक निगम कमिश्नर से प्राप्त प्रतिवेदन के आधार पर जिले में खुले घूमते मवेशियों की वजह से लोक संपत्ति व मानव जीवन की सुरक्षा के खतरे को दृष्टिगत रखते हुए दंड प्रक्रिया संहिता 1973 की धारा 144(1) के तहत प्रदत्त शक्तियों को प्रयोग करते हुए प्रतिबंधात्मक आदेश जारी किए हैं.

प्रतिबंध का आदेश जारी करते हुए कहा गया है कि कोई भी व्यक्ति, संस्था अथवा पशु मालिक अपने पशुओं को खुले तौर पर सड़कों पर न छोड़े और ना ही सड़कों पर आने दें. आदेश का उल्लंघन भारतीय दंड संहिता की धारा 188 के अंतर्गत दंडनीय होगा. यह आदेश तत्काल प्रभाव से प्रभावशील होगा.

बारिश में बढ़ जाता है मवेशियों का आतंक

दरअसल, बारिश के दिनों के दौरान पूरे मध्य प्रदेश में मवेशी गीली धरती को छोड़ सड़कों पर आ बैठते हैं. इनसे ना केवल मवेशियों की जान को खतरा होता है, बल्कि दुर्घटना होने की संभावनाएं भी कई गुना बढ़ जाती हैं. बारिश के दौरान मध्य प्रदेश का कोई भी स्टेट या नेशनल हाईवे ऐसा नहीं होता जहां मवेशियों के झुंड के झुंड आकर ना बैठते हो. सड़कों पर मवेशियों का झुंड दुर्घटनाओं को निमंत्रण देता है और कई बार इनकी वजह से गंभीर दुर्घटनाएं होती हैं जिसमें लोगों की जान तक चली जाती है.

बता दें कि विधानसभा चुनाव के वक्त कांग्रेस ने वादा किया था कि वह मध्य प्रदेश में गौशालाओं का ऐसा जाल बिछाएगी कि आवारा मवेशी सड़कों पर नहीं आएंगे, लेकिन सत्ता मिलने के 9 महीने बीत जाने के बावजूद कमलनाथ सरकार मवेशियों के आतंक को रोक पाने में असफल रही है. यही वजह है कि मध्य प्रदेश के ज्यादातर हाईवे और सड़कों पर आवारा मवेशियों का कब्जा पहले की तरह बरकरार है.

बुढ़ापा क्या होता है पता ही नही है इन 5 सुपरस्टार्स को, नंबर 2 अपने बेटे के छोटे भाई लगते

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आज हम कुछ बॉलीवुड सुपरस्टार के बारे में बात कर रहे हैं जो 90 के दशक से काम कर रहे हैं, उन्होंने भारत में एक अलग पहचान बनाई है। उनकी फिल्में लोगों को बहुत पसंद आती हैं। इन सितारों ने अभी भी कई फिल्मों में काम किया है। वे अभी भी इतने युवा दिखते हैं कि उनके बेटे उनके सामने बड़े लगते हैं।

1. अनिल कपूर –

दोस्तों बॉलीवुड सुपरस्टार अनिल कपूर के बारे में सबसे पहले बात करते हैं, दोस्तों अनिल कपूर का कोई भी ऐसा व्यक्ति नहीं है जो इन्हे नहीं जानता हो। उन्होंने बॉलीवुड में बहुत सारी फिल्में की हैं। उनकी फिल्म नायक को हर कोई पसंद करता है। उन्होंने अपने शरीर को बहुत फिट रखा है। उनका जन्म 24 दिसंबर 1956 को हुआ था और अब उनकी उम्र 62 वर्ष है। लेकिन उन्हें देखकर कोई नहीं कहेगा कि वे इतने बूढ़े हैं।

2. नागार्जुन अक्किनेनी –

दोस्तों अब बात करते हैं साउथ के सुपरस्टार नागार्जुन अक्किनेनी की, दोस्तों नागार्जुन ने साउथ में काफी ब्लॉकबस्टर फिल्में की हैं। उनकी फिल्म मेरी जंग शुद्ध भारत को पसंद की जाती है। उनकी फिल्में पूरे भारत में होती हैं। उनका जन्म 29 अगस्त 1959 को हुआ था और अब उनकी उम्र 59 वर्ष है। उनके बेटे नागा चैतन्य और अखिल भी साउथ के सुपरस्टार हैं। दोस्तों नागार्जुन ने अपने शरीर को इतना बनाए रखा है कि वह अपने बेटे से छोटे दिखते है।

3.सलमान खान –

दोस्तों अब बात करते हैं बॉलीवुड के सुल्तान खान की, दोस्तों 90 के दशक का वो सुपरस्टार है जो बॉलीवुड में कदम रखता है। उन्होंने बॉलीवुड में कई ब्लॉकबस्टर फिल्में की हैं। वह भारत के ऐसे सुपरस्टार हैं जिनकी फिल्म उनके नाम से ही हिट हो जाती है। उनका जन्म 27 दिसंबर 1965 को हुआ था और अब उनकी उम्र 53 वर्ष है।

4. चिरंजीवी –

दोस्तों अब साउथ के सुपरस्टार और मेगास्टार चिरंजीवी के बारे में बात करते हैं कि कैसे कोई दोस्त चिरंजीवी को भूल सकता है। उन्होंने साउथ में कई ब्लॉकबस्टर फिल्में भी की हैं। उनकी फिल्म इंद्र – द टाइगर एक पूर्ण भारत दीवाना है। चिरंजीवी के बेटे राम चरण भी आज साउथ के बहुत बड़े सुपरस्टार हैं। उनका जन्म 22 अगस्त 1955 को हुआ था और अब उनकी उम्र 64 साल है।

5. अक्षय कुमार –

दोस्तों अब बात करते हैं बॉलीवुड के सुपरस्टार और खिलाड़ी कुमार अक्षय कुमार की, दोस्तों अक्षय कुमार बॉलीवुड के सबसे पसंदीदा अभिनेताओं में से एक हैं। उन्होंने बॉलीवुड में कई ब्लॉकबस्टर फिल्में की हैं। उनकी ज्यादातर फिल्में सामाजिक जागरूकता के बारे में हैं। दोस्तों अक्षय कुमार का जन्म 9 सितंबर 1967 को हुआ था और वे अब 51 साल के हो गए हैं।

छत्तीसगढ़ : ‘भ्रष्ट प्रेत आत्मा’ के चक्कार में फंसा ये मुक्तिधाम, अंतिम संस्कार में होती है परेशानी

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(Chhattisgarh) के धमतरी (Dhamtari) के नगर पंचायत क्षेत्र नगरी में मुक्तिधाम (Muktidham) में भ्रष्ट प्रेत आत्मा का साया होने की बात कही जा रही है. बताया जा रहा है कि इसके चलते ही मुक्तिधाम का काम राजनीति, विवाद और खींचतान के झंझट से मुक्त नहीं हो पा रहा है. चार साल से लटके इस काम के लिये प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) से भी सीधी मदद मिल चुकी थी, लेकिन काम नहीं हो पाने के कारण अब वो भी वापास ले ली गई. इस समस्या का खामियाजा आज पूरा नगरी नगर पंचायत भुगत रहा है. मुक्तिधाम को लेकर आंदोलन कर रहे सनी छाजेड़ का कहना है कि धमतरी (Dhamtari) के नगरी का मुक्तिधाम का निर्माण कार्य राजनीति की भ्रष्ट प्रेतात्मा के चंगुल में फंसा हुआ है. मुक्तिधाम के निर्माण का जिम्मा नगर पंचायत के जिम्मे है. इसके लिये एक बार राशि स्वीकृत भी हुई. भूमिपूजन भी हुआ और निर्माण भी हुआ, लेकिन घटिया निर्माण के कारण पूरी दीवार ही ढह गई. मुख्य गेट दरकने लगा. फिर इस पर सियासत भी शुरू हो गई. बस यही सियासत नगरी नगर पंचायत के पक्ष विपक्ष के खींचतान का मुद्दा बना हुआ है.

पीएमओ से मिली थी मदद
बीजेपी नेता कुमार नायर का कहना है कि लोगों के पत्र लिखने पर देश के प्रधानमंत्री कार्यालय की ओर से साल 2017 में 28 लाख रुपये की आर्थिक मदद भी भेजी गई थी, लेकिन यहां के जनप्रतिनिधियों के आपसी खींचतान के कारण काम शुरू नहीं हो सका और राशि वापस ले ली गई. 
स्थानीय लोगों का कहना है कि जनप्रतिनिधि और प्रशासन की लापरवाही के कारण जनता को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. मुक्तिधाम में अंतिम संस्कार करने में परेशानी होती है. नगर पंचायत अध्यक्ष नंद यादव का कहना है कि मुक्तिधाम के संधारण कराने की व्यवस्था की जाएगी. इसके लिए उचित कार्यवाही की जाएगी.

5 अगस्त के बाद कश्मीर घाटी में पैलेट से 36 लोग घायल हुए…

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कश्मीर घाटी में 5 अगस्त के बाद 36 लोग पैलेट गन से घायल हुए हैं. द हिंदू को एक वरिष्ठ अधिकारी ने यह जानकारी दी है. अधिकारी का कहना है कि यह आंकड़ा श्रीनगर के अस्पताल प्रशासन द्वारा दिए गए रिकार्ड्स पर आधारित है.

घाटी के बाकी जिलों का कोई डेटा उपलब्ध नहीं है. जम्मू कश्मीर का विशेष दर्जा हटाए जाने के बाद लगातार घाटी में प्रदर्शन और जवाब में सुरक्षा बलों द्वारा कार्रवाई की की ख़बरें आयी थीं, लेकिन प्रशासन द्वारा इन्हें नकारते हुए स्थितियां ‘सामान्य’ होने की बात कही गई थी.

बुधवार को इस फैसले के लागू होने के बाद राज्यपाल सत्यपाल मालिक ने संवाददाताओं से बात करते हुए यह स्वीकार किया था कि कश्मीर घाटी में प्रदर्शनों के दौरान सुरक्षाकर्मियों ने पैलेट गन का इस्तेमाल किया था. उन्होंने कहा था कि इस बात का ध्यान रखा गया था कि लोगों को चोट न पहुंचे, इसके लिए अत्यंत सावधानी बरती गई.

मलिक ने कहा, ‘यह हमारी उपलब्धि है कि राज्य में हुई पुलिस कार्रवाई में अब तक एक भी व्यक्ति की मौत नहीं हुई है. ऐसे आरोप थे कि हम यहां हुई मौतों की संख्या छिपा रहे हैं, लेकिन इसके उलट हम पैलेट से घायल हुए लोगों की संख्या बता रहे हैं. एक मामले को छोड़कर पैलेट से लगी चोटें कमर के नीचे थी. केवल एक व्यक्ति को गर्दन में चोट आई थी, लेकिन अब वो ठीक हैं और खतरे से बाहर हैं.’

राज्य से अनुच्छेद 370 के अधिकतर प्रावधानों को हटाने और दो केंद्र शासित प्रदेशों में बंटने के बाद के बाद से राज्य में बंद है. अधिकारी ने बताया कि पैलेट से घायल 36 लोगों में से 8 बंद के पहले हफ्ते में घायल हुए थे. इस दौरान पत्थरबाजी की 200 घटनाएं हुई थीं.

अधिकारी ने आगे जोड़ा, ‘किसी की भी आंख को कोई नुकसान नहीं पहुंचा है. चार के अलावा पैलेट से लगी सभी चोटें कमर के नीचे की हैं.

इससे पहले द वायर ने अपनी एक रिपोर्ट में बताया था कि जम्मू कश्मीर का विशेष दर्जा घटाए जाने के बाद के तीन दिनों में श्रीनगर के प्रमुख अस्पताल श्री महाराजा हरि सिंह अस्पताल में कम से कम 21 युवा लड़कों को पैलेट गन से घायल होने के बाद इलाज के लिए लाया गया था.

हालांकि अस्पताल प्रशासन द्वारा आधिकारिक रूप से कोई जानकारी देने से मना कर दिया गया, लेकिन शहर के श्री महाराजा हरि सिंह अस्पताल के डॉक्टरों और नर्स ने बताया कि 6 अगस्त को तेरह और 7 अगस्त को आठ ऐसे घायलों को इलाज के लिए लाया गया, जिनकी आंखों या शरीर के अन्य हिस्सों में पैलेट गन से लगी चोटें थीं. इनमें से कइयों की एक आंख की दृष्टि चली गई है; कुछ की दोनों आंखों की रोशनी जाने का खतरा बना हुआ है.

डेबिट कार्ड नहीं बस OTP से ही ATM कैश निकाल पाएंगे एसबीआई ग्राहक…

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देश के बड़े बैंक ग्राहकों को धोखाधड़ी से बचाने के लिए नई सर्विस की शुरुआत कर रहे हैं। ग्राहकों को डेबिट कार्ड फ्रॉड से बचाने के लिए केनरा बैंक ने पिछले दिनों 10000 रुपये से ज्यादा की निकासी के लिए ओटीपी जरूरी कर दिया है। हाल ही में एटीएम से कैश निकालते समय होने वाली धोखाधड़ी से बचने के लिए एसबीआई ने योनो सर्विस (Yono Service) की शुरुआत करने की घोषणा की है।

इस सर्विस में आप अपने स्मार्टफोन में योनो होने पर एटीएम से पैसा निकाल सकते हैं। कैश निकालने के लिए बैंक की तरफ से आपके फोन पर वन टाइम पासवर्ड (OTP) भेजा जाता है, जो कि 30 मिनट के लिए वेलिड होता है। यानी हर बार पैसा निकालने के लिए आपकों बैंक की तरफ से नया पासवर्ड दिया जाएगा। हाल ही में केनरा बैंक ने एटीएम से पैसा निकालने के लिए ओटीपी की सुविधा शुरू की है। आने वाले दिनों में इसे और भी बैंकों की तरफ से लागू किया जाएगा। इस सर्विस के जरिये बिना कार्ड का इस्तेमाल किए ATM से पैसे निकाल सकते हैं।

40 हजार का सौदा ऐसे पड़ा महंगा, रेलवे का एग्जाम क्लीयर करने बिलासपुर के शख्स ने अपनाया शॉर्टकट…

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छत्तीसगढ़ (Chhattisgarh) के बिलासपुर (Bilaspur) जिले में रेलवे सुरक्षा बल की आरक्षक भर्ती परीक्षा (Railway Exam) में मुन्ना भाई पकड़ा गया. लिखित (Written) और फिजिकल (Physical) पास उम्मीदवार की जगह मेडिकल टेस्ट (Medical Test) और कागजात वेरिफिकेशन (Paper Verification) के लिए कोई दूसरा युवक पहुंचा था. रेलवे जांच अधिकारियों ने इस मुन्ना भाई को पकड़कर तोरवा पुलिस के हवाले कर दिया. जब पुलिस ने सख्ती से पूछताछ की तो पूरे मामले का खुलासा हुआ. कहा जा रहा है कि 40 हजार रुपये में मेडिकल टेस्ट देने के लिए सौदा किया गया था. तोरवा थाना प्रभारी एस रात्रे का कहना है कि पुलिस (Police) ने मामला दर्ज कर लिया है और आगे की कार्रवाई कर रही है.

लालच में आकर किया ये काम:

दरअसल, रेलवे सुरक्षा बल में रिक्त पदों की भर्ती के लिए अखिल भारतीय स्तर पर लिखित परीक्षा का आयोजन 2019 के शुरुआती में किया गया था. इस परीक्षा में सभी जोन और डिवीजन के साथ दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे जोन के बिलासपुर, और नागपुर में आरपीएफ के रिक्त पदों पर भर्ती होनी थी. लिखित परीक्षा का आयोजन मध्यप्रदेश के ग्वालियर में किया गया था. इस परीक्षा में देश के सभी उम्मीदवारों के साथ इटावा उत्तरप्रदेश निवासी लवकुश ने भी लिखित परीक्षा दी थी.

लवकुश यादव ने लिखित परीक्षा पास करने के बाद फिजिकल टेस्ट भी पास कर लिया था जिसके बाद पास हुए उम्मीदवारों को मेडिकल टेस्ट के लिए बिलासपुर जोनल मुख्यालय बुलाया गया था. आंखों में परेशानी के चलते सलेक्शन नहीं होने का भय लवकुश को सता रहा था. इस कारण लवकुश ने अपने एक साथी विनय यादव से संपर्क कर 40 हजार रुपए में मेडिकल टेस्ट देने के लिए सौदा किया. लालच में आकर दोस्त ने लवकुश के कागजात में लगी फोटो और अन्य सारी डिटेल चेंज कर दी और बिलासपुर जोनल मुख्यालय पहुंच गया. 

मेडिकल टेस्ट के बाद रेलवे सुरक्षा बल डिवीजन कार्यालय में उम्मीदवारों का चयन किया जा रहा था. इस दौरान जांच अधिकारियों ने लवकुश और विनय यादव की फोटो, हस्ताक्षर और हैंडराइटिंग पर शक हुआ. सख्ती से पूछताछ पर मामले का खुलासा हुआ. फिलहाल आरपीएफ ने दोनों युवकों को पकड़ कर अग्रिम कार्रवाई के लिए तोरवा पुलिस के हवाले कर दिया जहां पुलिस ने अपराध दर्ज कर विवेचना शुरू कर दी है.

सिंगिंग सेंसेशन रानू का ये असली नाम चर्चा में है , बेटी ने लुक्स की वजह से छोड़ा था उनका साथ…

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रेलवे प्लेटफॉर्म पर गाने से लेकर हिमेश रेशमिया के स्टूडियो तक का सफर करने वाली रानू मंडल लगातार चर्चा में हैं। यही नहीं अब उनका असली नाम रानू रे बताया जा रहा है। सोशल मीडिया ने उन्हें रातोंरात फेमस कर दिया। उनके टैलेंट को पहचान मिली। सिंगिंग सेंसेशन बनते ही रानू की जिंदगी बदल गई है।

ऐसे में 10 साल पहले उनका साथ छोड़ चुकी उनकी बेटी को भी अपनी मां की याद आ गई। हालांकि रानू बेटी से मिलकर खुश नजर आ रही हैं, लेकिन वह यह बात भी जानती हैं कि कभी उनकी बेटी ने सहारा नहीं दिया था। बेटी ने उन्हें उनके लुक्स के चलते छोड़ दिया था। बेटी से मिलकर रानू खुश हैं। वे कहती हैंयह मेरी दूसरी जिंदगी है और मैं इसे बेहतर बनाने की कोशिश करूंगी।

जिंदगी के उतार- चढ़ाव

शादी के बाद रानू का जीवन मुंबई ठीक ठाक चल रहा था, लेकिन उनके पति की मृत्यु हो गई।गरीबी से जूझती रानू स्टेशन पर गाना गाकर भीख मांगने लगी। रानू की बेटी को मां की भीख मांगना अच्छा नहीं लगता था। और वह उन्हें इसी कारण से छोड़कर चली गई।रानू ने 10 साल ऐसे ही गुजारे जब अतींद्र चक्रवर्ती नाम के एक शख्स ने उनका वीडियो बनाकर अपलोड किया उनकी किस्मत चमकी और वह हिमेश के स्टूडियो तक पहुंच पाई।