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यूपी: बच्चा चोरी की अफवाह व हिंसा फैलाने वाले 82 लोग गिरफ्तार, डीजीपी ने दिए रासुका लगाने के निर्देश

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उत्तर प्रदेश के अंदर पिछले एक महीने में 22 से ज्यादा जिलों में बच्चा चोरी की अफवाह पर निर्दोषों की पिटाई के अब तक 53 मामले सामने आए हैं। बता दें कि बच्चा चोरी की अफवाह और भीड़ की हिंसा पर सूबे के पुलिस मुखिया ओपी सिंह ने सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि अब तक बच्चा चोरी की अफवाह फैलाने और हिंसा भड़काने वाले 82 लोगों को गिरफ्तार किया है। साथ ही ऐसे लोगों के खिलाफ राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (रासुका) के तहत कार्रवाई की जाएगी। वहीं, उन्होंने जनता से अपील करते हुए कहा कि ऐसी अफवाहों पर ध्यान नहीं दें।
डीजीपी ओपी सिंह ने एक वीडियो जारी करते हुए लोगों से अपील की है कि वे अफवाहों पर ध्यान न दें। उन्होंने कहा कि जहां ऐसे मामले सामने आए हैं। वहां सघन ग्रुप पेट्रोलिंग कराई जा रही है।

ऐसे मामलों में पुलिस रिस्पांस व्हीकल (पीवीआर) की सक्रियता को बढ़ाया जा रहा है ताकि वे न्यूनतम समय में मौके पर पहुंच सकें। ऐसे संवेदनशील स्थलों को चिह्नित किया जा रहा है जहां बच्चे अधिक रहते हैं और इस तरह की घटना हो सकती है। ऐसी जगहों पर पुलिस खास निगरानी रखेगी। पुलिस सोशल मीडिया समेत अन्य प्लेटफॉर्म पर आमजन से ऐसी अफवाहों पर ध्यान न देने की अपील कर रही है। मोहल्ला पीस कमेटियों व विभिन्न संगठनों को भी इस काम से जोड़ा जा रहा है ताकि अफवाहों को लेकर लोगों को जागरूक किया जा सके। बच्चा चोरी की अफवाह और भीड़ का तांडव बुधवार को भी जारी रहा। उधर मंगलवार को संभल जिले के चंदौसी में अपने बीमार भतीजे को अस्पताल ले जा रहे दो भाइयों पर भीड़ ने बच्चा चोर के शक में हमला बोल दिया।

इस हमले में एक की मौत हो गई जबकि दूसरा अस्पताल में भाई जिंदगी और मौत से जूझ रहा है। उधर बुधवार को फ़तेहपुर में बच्चा चोरी के शक में सैकड़ों ग्रामीणों ने एक मेडिकल टीम पर हमला बोल दिया। उन्हें बचाने पहुंची पुलिस पर भी ग्रामीणों ने हमला बोल दिया। इस हमले में एक दरोगा समेत तीन लोग घायल हैं। अब तक प्रदेश में भीड़ की हिंसा से एक की मौत हो चुकी है जबकि 35 लोग घायल हैं। बच्चा चोरी की सबसे ज्यादा अफवाह मेरठ मंडल से सामने आई है। यहां 19 मामले सामने आए हैं, जहां लोग भीड़ का शिकार हुए। इसके अलावा 12 केस आगरा, कानपुर में सात, बरेली में चार, लखनऊ व गोरखपुर में दो-दो, संभल, रायबरेली, फतेहपुर, मुजफ्फरनगर व शामली, गाजियाबाद, बुलंदशहर में एक-एक मामले सामने आए हैं।

12 लाख है इस चायवाले की मंथली इनकम…

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पुणे में एक चाय बेचने वाले ने ऐसा बेंचमार्क सेट कर दिया है, जिसे हासिल कर पाना अच्छे-अच्छों के बस की बात नहीं है। इस चायवाले की हर महीने की कमाई जानकर आप भी हैरान रह जाएंगे।

नवनाथ येवले नाम का यह शख़्स चाय बेचकर हर महीने 12 लाख रुपये की कमाई करता है। पुणे में येवले टी हाउस हर उम्र के लोगों के चाय पीने के लिए पसंदीदी स्पॉट बन गया है। इसकी गिनती शहर के फेमस टी-स्टॉल्स में की जाती है। नवनाथ येवले कहते हैं कि बहुत जल्द वह इस अंतराष्ट्रीय ब्रांड बनाने वाले हैं।

नववाथ ने कहा कि पकौड़ा बिजनस से उलट चाय बेजने का बिजनेस भी कई भारतीयों को रोजगार दे रहा है। यह तेजी से बढ़ रहा है, मैं बेहद खूश हूं। उन्होंने आगे बताया कि फिलहाल पुणे में टी स्टॉल के तीन सेंटर हैं और हर सेंटर पर करीब 12 लोग काम करते हैं।

गौरतलब है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कई बार खुद को चाय वाले के रूप में संबोधित कर चुके हैं। कुछ दिन पहले उन्होंने पकौड़े बेचने को रोजगार बताया था, जिससे देश की राजनीति काफी गर्मा गई थी। वहीं पुणे के इस चाय वाले ने कमाई का एक नया रिकॉर्ड बना डाला है।

बॉलीवुड के इस खान के घर प्लेटफार्म सिंगर रानू मंडल ने किया है झाड़ु-पोछा…

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रेलवे स्टेशन के कोने में गूंजती वो जादुई आवाज आप सभी ने अब सुन ही ली होगी. इस आवाज को सोशल मीडिया ने ऐसी पहचान दिलाई कि आज इस आवाज की मालकिन स्टार बन चुकी हैं. उसके चर्चे चारों तरफ हैं और अब तो वो बॉलीवुड में बतौर प्लेबैक सिंगर के तौर पर डेब्यू भी कर चुकी हैं. ये आवाज रानू मंडल (Ranu Mondal) की है. रानू ने यूं तो ढेरों इंटरव्यूज दिए हैं लेकिन हाल ही में एक इंटरव्यू के दौरान अपने बॉलीवुड कनेक्शन के बारे में बताया है. इस कनेक्शन को जानने के बाद आप भी हैरान रह जाएंगे. उस वक्त को शायद रानू को भी अंदाजा नहीं था कि वो इतनी बड़ी स्टार बन जाएंगी.

रानू ने अपनी लगभग 1 दशक की जिंदगी गरीबी के हालातों में गुजारी है लेकिन वो कहते हैं ना कि हुनर कभी छुपता नहीं है. आखिरकार आज लोग उनकी आवाज को पहचान चुके हैं. रानू ने नवभारत टाइम्स को दिए इंटरव्यू में बताया कि वो बॉलीवुड के एक सुपरस्टार के घर काम किया करती थीं.

इस बॉलीवुड परिवार की केयर टेकर थीं रानू रानू ने इस इंटरव्यू में बताया कि जाने-माने अभिनात फिरोज खान के घर में रहा करती थीं. वो उनके घर पर खाना बनाती थीं, छाडू-पोछा करती थीं. रानू ने बताया कि इन सभी कामों के अलावा वो फिरोज खान, उनके बेटे फरदीन खान और भाई संजय खान का भी ध्यान रखती थीं. उनकी जरूरत की चीजों, खाने और सोने जैसे कामों पर वो लगातार लगी रहती थीं. वाकई रानू मंडल का ये बॉलीवुड कनेक्शन वाकई दिलचस्प था और उस वक्त किसी को अंदाजा भी नहीं था कि वो इतनी बड़ी स्टार बन जाएंगी.

रानू ने अपने संगीत के सफर के बारे में भी बात की थी. रानू के अनुसार, ‘मैं जब छह सात-साल की थी तभी से गाने सुनती आ रही हूं. तब दर्शकों के सामने गाने की हिम्मत नहीं होती थी. लेकिन मैं जमकर गाने सुनती थी’. रानू ने आगे बताया, ‘मैंने गाना टेप-रिकॉर्डर और रेडियो से सीखा है. मैं गायकों को रेडियो या टेप-रिकॉर्डर पर गाते हुए सुनते ही मेरा पूरा ध्यान उसी ओर चला जाता था.’

रानू को सबसे बड़ा गिफ्ट अपनी बेटी से मुलाकात के रूप में मिला. रानू को 10 साल पहले बिछड़ी अपनी बेटी इस वीडियो के वायरल होने के बाद मिली थी. रानू अपनी बेटी को गले लगाकर इमोशनल होती देखी गई थीं. रानू ने कहा कि ये उनकी दूसरी जिंदगी है और इसे वह बेहतर बनाने की कोशिश करेंगी. वाकई रानू का रेलवे स्टेशन के कोने से लेकर बॉलीवुड डेब्यू तक का सफर तय करना किसी फिल्म की कहानी जैसा ही मालूम होता है.

जानें क्यों हर साल 29 अगस्त को मनाया जाता है यह दिन ‘राष्ट्रीय खेल दिवस’

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देश हर साल 29 अगस्त को राष्ट्रीय खेल दिवस मनाता है. यह दिन हॉकी के जादूगर मेजर ध्यानचंद के जन्मदिन के रूप में मनाया जाता है. इस दिन देश के राष्ट्रपति, राजीव गांधी खेल रत्न, अर्जुन और द्रोणाचार्य पुरस्कार जैसे अवार्ड नामित लोगों को देते हैं. ऐसे में आइए जानते हैं कौन थे मेजर ध्यानचंद जिनकी याद में आज का दिन राष्ट्रीय खेल दिवस के रूप में मनाया जाता है.

कौन थे ध्यानचंद

मेजर ध्यानचंद को हॉकी का जादूगर कहा जाता है. उनका जन्म 29 अगस्त 1905 को उत्तर प्रदेश के इलाहाबाद जिले में एक राजपूत परिवार में हुआ था. उन्हें हॉकी के सबसे महान खिलाड़ी के तौर पर याद किया जाता है. उनको हॉकी का जादूगर कहने के पीछे का कारण उनका मैदान पर प्रदर्शन है. उन्होंने साल 1928, 1932 और 1936 में तीन ओलंपिक स्वर्ण पदक जीते. इस खिलाड़ी के कामयाबी का किस्सा यहीं नहीं खत्म होता. ध्यानचंद ने अपने करियर में 400 से अधिक गोल किए. भारत सरकार ने ध्यानचंद को 1956 में देश के तीसरे सर्वोच्च नागरिक सम्मान पद्म भूषण से सम्मानित किया. इसलिए उनके जन्मदिन यानी 29 अगस्त को भारत में राष्ट्रीय खेल दिवस के रूप में मनाया जाता है.

साल 1928: 
1928 में पहली बार ओलंपिक खेलने गए ध्यानचंद ने इस पूरे टूर्नामेंट में अपनी हॉकी का ऐसा जादू दिखाया कि मानो विरोधी टीमें उन्हें मैदान पर देखकर ही डरने लगीं. 1928 में नीदरलैंड्स में खेले गए ओलंपिक में ध्यानचंद ने 5 मैच में सबसे ज्यादा 14 गोल किए और भारत को गोल्ड मेडल जिताया. इस जीत के बाद बॉम्बे हार्बर में हज़ारों लोगों ने टीम का ज़ोरदार स्वागत किया.

साल 1932: 
1928 के करिश्मे को दोहराने में ध्यानचंद को कोई भी परेशानी नहीं हुई. 1932 में लोस एंजलिस में खेले गए ओलंपिक में जापान के खिलाफ अपने पहले ही मुकाबले को भारत ने 11-1 से जीत लिया. इतना ही नहीं इस टूर्नामेंट के फाइनल में भारत ने यूएसए को 24-1 से हराकर एक ऐसा वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाया जो बाद में साल 2003 में जाकर टूटा. इस ओलंपिक में एक बार फिर भारत गोल्ड मेडलिस्ट बना.

साल 1936: 
अलिगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी में पढ़े ध्यानचंद के लिए ये ओलम्पिक सबसे ज्यादा यादगार रहने वाला था. ध्यानचंद की कप्तानी में बर्लिन पहुंची भारतीय टीम से एक बार फिर गोल्ड की उम्मीद थी. भारतीय टीम इस टूर्नामेंट में भी उम्मीदों पर खरी उतरी और विरोधी टीमों को पस्त करते हुए फाइनल तक पहुंची. फाइनल में भारत की भिड़ंत जर्मन चांसर एडोल्फ हिटलर की टीम जर्मनी से होनी थी.

इस मैच को देखने के लिए खुद हिटलर भी पहुंचे थे. लेकिन हिटलर की मौजूदगी या गैर-मौजूदगी से भारतीय टीम या ध्यानचंद के प्रदर्शन पर कोई असर नहीं पड़ने वाला था. हालांकि इस मैच से पहले भारतीय टीम तनाव में थी क्योंकि इससे पहले वाले मुकाबले में भारतीय टीम को जर्मनी से हार का सामना करना पड़ा था. लेकिन मैदान पर उतरने के बाद वो तनाव खुद बा खुद दूर हो गया.
मैच के पहले हाफ में जर्मनी ने भारत को एक भी गोल नहीं करने दिया. इसके बाद दूसरे हाफ में भारतीय टीम ने एक के बाद एक गोल दागने शुरु किए और जर्मनी को चारो खाने चित कर दिया. हालांकि दूसरे हाफ में जर्मनी भी एक गोल दागने में सफल रही जो कि इस ओलंपिक में भारत के खिलाफ लगा एकमात्र गोल था.

इस मैच के खत्म होने से पहले ही हिटलर ने स्टेडियम छोड़ दिया था क्योंकि वो अपनी टीम को हारते हुए नहीं देखना चाहता था. इतना ही नहीं इस मैच के दौरान हिटलर ने मेजर ध्यानचंद की हॉकी स्टिक भी चैक करने के लिए मंगवाई.

हिटलर ध्यानचंद को डिनर पर आमंत्रित किया था

बर्लिन में 1936 में हुए ओलंपिक खेलों के बाद उनके प्रदर्शन से प्रभावित होकर हिटलर ने उन्हें डिनर पर आमंत्रित किया था. हिटलर ने उन्हें जर्मनी की तरफ से हॉकी खेलने का प्रस्ताव भी दिया था लेकिन मेजर ध्यानचंद ने इसे ठुकरा दिया और कहा कि उनका देश भारत है तथा वे इसके लिए ही खेलेंगे.

साल 1948: 
मेजर ध्यानचंद ने साल 1948 में अपना आखिरी मैच खेला और अपने पूरे कार्यकाल में कुल 400 से अधिक गोल भी किए. जो कि एक रिकॉर्ड है.

सम्मान: 
मेजर ध्यानचंद को भारत के तीसरे सर्वोच्च नागरिक सम्मान से नवाजा गया. उन्हें साल 1956 में पद्म भूषण से सम्मानित किया गया. ध्यानचंद ने हॉकी में एक के बाद एक कीर्तिमान जो बनाए उन तक आज भी कोई खिलाड़ी नहीं पहुंच सका है. इस महान खिलाड़ी की याद में आज का दिन राष्ट्रीय खेल दिवस के रूप में मनाया जाता है.

99% लोग नहीं जानते कि ‘गुड़’ को अंग्रेजी में क्या कहते हैं…

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ये गुड़ का नाम तो आपने सुना ही होगा यहाँ ऐसे बहुत से लोग होंगे जिनको गुड़ बहुत ही पसंद होगा और गुड़ को बहुत ही चाव से खाते होंगे और खाये भी क्यों नहीं गुड़ खाने में होता ही इतना लाजवाब है की खाये बिना इंसान रुके ही नहीं यकीं कीजिये गुड़ खाने का शौक़ीन तो मैं भी हूँ मुझे खुद गुड़ बहुत पसंद है। गुड़ गन्ने या ताड के रस को उबालकर फिर उसको सूखा कर प्राप्त किया जाता है।

अगर हम गुड़ के रंग की बात करे तो इसका रंग हलके पीले से लेकर गहरे भूरे रंग में मिलता है आपको देखने में कई बार ये काले रंग का लगे लेकिन होता ये गहरे भूरे रंग का ही है। गुड़ खाने में मीठा होता है आपको इसके बारे में पता ही होगा इसकी मिठास प्रकृति में मिलने वाली दूसरी चीज़ो में सबसे ज्यादा होती है इसकी मिठास को अन्य चीज़ो के साथ तुलना की जाती है।
गुड़ का उपयोग तो दुनिया में में किया जाता है लेकिन मूलतः इसका उपयोग दक्षिण एशिया में सबसे जयदा किया जाता है भारत के कई हिस्सों में शहर और गांव में गुड़ का उपयोग शक्कर के रूप में किया जाता है गुड़ के अंदर लोहत्व की मात्रा अच्छी होती है और रक्ताल्पता (एनीमिया) से पीड़ित इंसान को शक्कर ना खाने की बजाय गुड़ खाने के लिए कहा जाता है।

गुड़ के अंदर चीज़ी की मात्रा अच्छी होती है कभी-कभी तो इसके अंदर चीनी की मात्रा ९०% तक पहुंच जाती है इसके अतिरिक्त इसके अंदर ग्लूकोज, फ्रक्टोज, खनिज (चूना, पोटाश, फास्फोरस आदि) भी कम मात्रा में प्राप्त होते है साथ ही इसमें पानी की भी कुछ मात्रा होती है जो मौसम के अनुसार काम या ज्यादा होता रहता है।
क्या कहते है अंग्रेजी भाषा में

इतना कुछ आपने जान लिया गुड़ के बारे में लेकिन आप यहाँ जिस सवाल के जवाब को जानने के लिए आये थे उसके बारे में भूल गए ना क्या करे गुड़ चीज़ ही ऐसी है लेकिन आप बेफिक्र रहिये हमने आपको कहाँ था की हम आपको बताएंगे की गुड को इंग्लिश में क्या कहा जाता है। गुड़ को अंग्रेजी भाषा में Jaggery कहते है।

इससे जुडी एक कहानी बताना चाहते है एक बार सिविल इंटरव्यू में पूछ लिया गया था की गुड़ को इंग्लिश में क्या कहते है इंटरव्यू देने वाले के तोते उड़ गए थे इसीलिए आप से भी कही भी ऐसी चीज़ो के बारे में पुछा जा सकता है तो हमेशा सतर्क रहे और हमारे यहाँ से जानकारियां प्राप्त करते रहे।

धोनी की मृतक प्रेमिका प्रियंका झा की तस्वीर आई सामने, जाने पूरी खबर…

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महेंद्र सिंह धोनी अथवा मानद लेफ्टिनेंट कर्नल महेंद्र सिंह धोनी (एम एस धोनी भी) झारखंड, रांची के एक खस परिवार में जन्मे पद्म भूषण, पद्म श्री और राजीव गाँधी खेल रत्न पुरस्कार से सम्मानित भारतीय क्रिकेटर हैं। धोनी भारतीय क्रिकेटर तथा भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान हैं और भारत के सबसे सफल एक दिवसीय अंतरराष्ट्रीय कप्तान हैं। शुरुआत में एक असाधारण उज्जवल व आक्रामक बल्लेबाज़ के नाम पर जाने गए।

महेंद्र सिंह धोनी पर निर्देशक नीरज पांडे ने एम् एस धोनी – द अनटोल्ड स्टोरी नामक फिल्म बनाई थी। जिसमें आपको बता दे कि धोनी की निजी जिंदगी के कई पहलु पता चले है इसमें एक पहलु था पूर्व बेहतरीन कप्तान धोनी की प्रेमिका प्रियंका झा का जिसके बारे में अधिकतर लोगों को फेस फिल्म के जरिए से यह पता चल पाया, आपको बता दें कि इससे पहले यह कोई नहीं जानता था कि भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान धोनी की एक प्रेमिका प्रियंका झा भी थी।

बेहतरीन फिल्म एम एस धोनी में उनकी प्रेमिका का रोल लोकप्रिय अभिनेत्री दिशा पटानी ने किया था।इस फिल्म में दिशा पटानी की ख़ूबसूरती देख लोगों के मन में धोनी प्रेमिका प्रियंका झा को देखने की ललक जाग उठी।आपको बता दे कि भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान धोनी की मृतक प्रेमिका प्रियंका झा तस्वीर फिल्म के बाद सामने आई।
आपको बता दे कि महेंद्र सिंह धोनी की बेहतरीन फिल्म एम एस धोनी-द अनटोल्ड स्टोरी एक बेहतरीन फिल्म साबित हुई थी औऱ आपको बता दे कि इस फिल्म ने 100 करोड़ से भी अधिक रुपये की कमाई की थी।इस फिल्म में भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान धोनी की पत्नी साक्षी का किरदार कियारा आडवाणी ने निभाया था इसके अतिरिक्त धोनी के साथ रिलेशनशिप में रह चुकी लक्ष्मी राय भी धोनी की जिंदगी पर एक फिल्म बनाने वाली हैं।जिसमें उनके और भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान धोनी के रियल लाइफ रोमांस को लोगों को दिखाया जाएगा।

महानायक ने फोन किया तो एक निर्माता ने कहा- हां, बोल अमिताभ…उसके बाद हुआ ऐसा

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अमिताभ बच्चन बॉलीवुड के महानायक हैं। उनका कद इतना ऊंचा है कि कोई उनसे तू-तड़ाक में बात करने की सोच भी नहीं सकता। फिर भी एक निर्माता ने उनसे ऐसे अंदाज मेंं बात कर ली, जिसके बारे में कल्पना भी नहीं की जा सकती। वह भी तब, जब अमिताभ बच्चन कोई मामूली एक्टर नहीं, बल्कि महानायक बन चुके थे। फिर क्या हुआ, आइए जानते हैं इस बारे में…

यह किस्सा जुड़ा है फिल्म निर्माता हंसल मेहता से। हंसल मेहता ने ट्विटर पर इसे शेयर किया है। यह किस्सा वास्तव में हैरान कर देने वाला है।
जिन दिनों की यह बात है, उन दिनों हंसल मेहता के करियर की शुरुआत हो रही थी। दरअसल, एक दिन उनके घर एक फोन आया। हंसल मेहता की मम्मी ने आकर उन्हें बताया कि तुम्हारे लिए अमिताभ का फोन है।
हंसल मेहता ने समझा कि उनके सहायक निर्देशक अमिताभ वर्मा का फोन आया है। लिहाजा, उन्होंने फोन उठाते ही कह दिया कि बोल अमिताभ। उनका इतना कहना था कि दूसरी ओर से आवाज आई-मैं अमिताभ बच्चन बोल रहा हूं।
जब अमिताभ बच्चन ने यह कहा होगा, तब हंसल मेहता पर क्या बीती होगी, इस बारे में हंसल मेहता ने तो कुछ शेयर नहीं किया है लेकिन अंदाजा लगाया जा सकता है।
दरअसल, हंसल मेहता से पूछा गया था कि उनका यादगार किस्सा क्या है, इस बारे में बताएं। इसके जवाब मेंं हंसल मेहता ने यह किस्सा शेयर किया है।
हंसल मेहता ने बताया है कि उस समय मेरा करियर शुरू ही हुआ था। तब वह एक पत्र अमिताभ बच्चन के बंगले पर देकर आए थे। उसी के रेस्पांस में अमिताभ बच्चन ने उन्हें फोन किया।

यहां मुस्लिमों ने पाकिस्तान पीएम इमरान खान के पुतले को मारे जूते, जानें क्यों?

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पाकिस्तान (Pakistan) के प्रधानमंत्री इमरान खान (Imran Khan) के साथ पाकिस्तान सरकार की नीति के खिलाफ छत्तीसगढ़ (Chhattisgarh) की राजधानी रायपुर (Raipur) में मुस्लिम समाज के लोगों ने प्रदर्शन किया. यहां पाक पीएम इमरान खान के पुतले को जूतों से पीटा गया. इसके साथ ही पाकिस्तान के खिलाफ जमकर नारेबाजी भी की गई. इतना ही नहीं पाक पीएम इमरान खान के पुतले को जूतों से पीटने के बाद उसमें आग लगा दी गई. पाकिस्तान के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे मुस्लिम (Muslim) समाज के लोगों में आक्रोश देखने को मिला. रायपुर (Raipur) के मुस्लिम समाज के लोगों का कहना है कि पाकिस्तान (Pakistan) के पीएम इमरान खान की भारत पर परमाणु हमले की धमकी से हर वर्ग आक्रोशित है. रायपुर में राष्ट्रीय मुस्लिम मंच द्वारा इमरान खान की धमकी के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया गया. यहां जय स्तंभ चौक में पाकिस्तानी प्रधानमंत्री का जनाज़ा निकालकर पुतला फूंका गया. इस विरोध प्रदर्शन में बड़ी संख्या में मुस्लिम समाज के लोग मौजूद रहे और पाकिस्तान के खिलाफ जमकर नारेबाजी की.

बौखला गया है पाकिस्तान राष्ट्रीय मुस्लिम मंच के नेताओं का कहना है कि धारा 370 और 35 ए हटने के बाद पाकिस्तान बौखलाया हुआ है और उनके प्रधानमंत्री द्वारा ऐसी अनर्गल बयानबाजी की जा रही है. मंच के नेता सलीम राज का कहना है कि भारत के मुसलमान अपने देश से प्यार करने वाले हैं और किसी के भी बहकावे में नहीं आयेंगे. जम्मू-कश्मीर में धारा 370 हटने के बाद अब बारी पीओके की है. पाकिस्तान को उसकी करतूत का सबक भारत सरकार देगी. पाकिस्तान को दुनियाभर में जिल्लत झेलनी पड़ रही है, जिसके चलते वो बौखला गया है.

पिता के कातिलों की पहचान 10 साल के बच्चे ने की थी , हाईकोर्ट ने खारिज की दोषियों की अपील…

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आरोपियों (Convicts) ने सजा के खिलाफ हाईकोर्ट (High Court) में अपील (Appeal) की थी. हाईकोर्ट के डिवीजन बैंच ( Division bench) ने आरोपियों की अपील खारिज (Dismiss) कर सजा (Punishment) बरकरार रखी है.

10 साल का बच्चा (Kid) अपने पिता महेश्वर के साथ स्कूल से घर जा रहा होता है. स्कूल (School) से कुछ ही दूर पर कुछ बदमाश उनका रास्ता रोक लेते है और बच्चे के पिता से एक खत पढ़ने को कहते है. महेश्वर बदमाशों की बात नहीं मानते और उन्हे जाने को कहते हैं. अचानक बदमाश महेश्वर से सिर पर पिस्टल अड़ा देते है और ‘यू आर अंडर अरेस्ट’ बोलकर फायर कर देते है. गोली लगने से महेश्वर की मौके पर ही दर्दनाक मौत हो जाती है. ये पूरी घटना महेश्वर के 10 से बेटे के सामने होती है. मामला जब पुलिस तब पहुंचा तो बच्चे से आरोपी की शिनाख्त कराई गई. मासूम ने अपने पिता का हत्यारों को पहचान लिया. बच्चे की गवाही पर कोर्ट ने सभी आरोपी को सजा भी सुनाई. आरोपियों (Convicts) ने सजा के खिलाफ हाईकोर्ट (High Court) में अपील (Appeal) की थी. हाईकोर्ट के डिवीजन बैंच ( Division bench) ने आरोपियों की अपील खारिज (Dismiss) कर सजा (Punishment) बरकरार रखी है.

10 साल के बच्चे ने पहचाना था अपने पिता के कातिलों को:

दरअसल, के पास एक गांव में रहने वाला 10 वर्षीय कमलनाथ सिंह अंबिकापुर के एक निजी स्कूल में पढ़ता था. वो बस से स्कूल तक आना-जाना करते था. मुख्य सड़क पर एक बस स्टॉप से उसके पिता उसे लाना- छोड़ना किया करते थे. 5 जुलाई 2008 की दोपहर करीब 3.40 बजे वो स्कूल की छुट्‌टी होने के बाद छिरगा मोड़ के पास पिता महेश्वर सिंह का इंतजार कर रहा था. उसके पिता आए तो वे दोनों बाइक से गांव के लिए निकले.

कुछ दूर जाने के बाद नाले के पास पहुंचे ही थे कि उन्हें पप्पू उर्फ विवेक उर्फ लोहा सिंह उर्फ आजाद उर्फ अमरनाथ ने रोका. रुकने पर एक पत्र पढ़ने के लिए दिया. मना करने पर महेश्वर के सिर पर गन अड़ा दी और ‘यू आर अंडर अरेस्ट’ बोलकर फायर कर दिया. महेश्वर की मौके पर ही मौत हो गई, इसके बाद वे बाइक लेकर फरार हो गए. पास ही रहने वाले देवकुमार ने भी गोली चलने की आवाज सुनी थी.

सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची, यहां से पत्र जब्त करने के साथ शव को पोस्टमॉर्टम के लिए भेजा. 10 साल के बच्चे ने शिनाख्त परेड के दौरान दोनों आरोपियों को पहचाना था. ट्रायल कोर्ट ने बच्चे की गवाही के आधार पर मामले में आईपीसी की धारा 302 के तहत उम्र कैद, 394/34 के तहत 10 वर्ष और पप्पू उर्फ विवेक को आर्म्स एक्ट की धारा 25 व 27 के तहत तीन वर्ष कैद की सजा सुनाई थी. आरोपियों पप्पू उर्फ विवेक और अरविंद कुमार तिग्गा ने ट्रायल कोर्ट के फैसले के खिलाफ अपील की थी. मामले पर सुनवाई के बाद जस्टिस प्रशांत मिश्रा और जस्टिस रजनी दुबे की बेंच ने अपील यह कहते हुए खारिज कर दी है कि बच्चा तथ्यों के संबंध में सबूूत देने के लिए सक्षम और विश्वसनीय पाया जाता है. तो ऐसा एकमात्र सबूत दोषसिद्धि का आधार हो सकता है.

छत्तीसगढ़ : एक शराबी बेटे ने अपनी ही मां की कर दी हत्या, आरोपी फरार

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छत्तीसगढ़ के रायगढ़ में सनसनीखेज अपराध की एक घटना को अंजाम देने का मामला सामने आया है। एक शराबी बेटे ने अपनी ही मां की हत्या कर दी। आरोपी बेटे ने न सिर्फ अपनी मां की हत्या की। बल्कि हत्या के बाद उसके सिर से भेजा निकालकर कढ़ाई में भूनने लगा। इतने में परिवार की एक अन्य सदस्य ने उसे देख लिया। इसके बाद आरोपी मौके से फरार हो गया। मामले की शिकायत पुलिस में पहुंची। इसके बाद पुलिस सक्रिय हुई और आरोपी को गिरफ्तार कर लिया।
रायगढ़ पुलिस से मिली जानकारी के मुताबिक घटना खरसिया थाना क्षेत्र की है। बीते मंगलवार की दोपहर खरसिया के बोतल्दा कुधरीपारा में इस सनसनीखेज वारदात का अंजाम दिया गया है। आरोपी सीताराम उरांव (32) अपनी मां फूलोबाई उरांव (50) के साथ ही रहता था। आरोपी शराबी प्रवृत्ति का था। उसे रोजाना शराब पीने की आदत थी। वारदात से पहले उसने अपनी मां से शराब के लिए पैसे मांगे, लेकिन फूलोबाई ने उसे पैसे देने से इनकार कर दिया। इसके बाद आरोपी ने इस वारदात को अंजाम दिया।

पुलिस से मिली जानकारी के मुताबिक आरोपी युवक ने टांगी मारकर अपनी मां की हत्या कर दी। इसके बाद सिर को फोड़कर भेजा निकाला और उसने कढ़ाई में डालकर भूनने लगा। इसी बीच छोटे भाई जयराम की पत्नी मौके पर पहुंच गई। इसके बाद आरोपी सीताराम वहां से भाग गया। फिर बहू ने अपने पति जयराम को पूरी घटना बताई। इसके बाद पुलिस को सूचना दी गई। पुलिस ने आरोपी की तलाश की तो खून से सने कपड़े में वो गांव में ही छिपा मिला। आरोपी को गिरफ्तार कर उसके विरुद्ध आईपीसी की धारा 302 के तहत अपराध दर्ज किया गया। पुलिस के मुताबिक शराब के लत के कारण आरोपी की शादी भी नहीं हुई थी। इसलिए वो अपनी मां के साथ अलग रहता था।