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इन लोगों को काला नमक से रहना चाहिए दूर, वरना हो सकता है भारी नुकसान

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काला नमक के बिना रायता, सलाद और छाछ का स्वाद अधूरा रहता है. इसके साथ ही ये सेहत के लिए काफी अच्छा माना जाता है. इन नमक का एक अपना अलग स्वाद है. इसके साथ ही इसमें औषधीय गुण पाया जाता है.

बहुत से लोगों को काला नमक काफी पसंद आता है. वहीं, कुछ लोगों को इसका स्वाद बिलकुल भी पसंद नहीं आता है. सादे नमक की तुलना में काला नमक सेहत के लिए काफी अच्छा माना जाता है. लेकिन कुछ लोगों के लिए काला नमक नुकसानदायी होता है. चलिए जानते हैं आखिर किन लोंगों को काले नमक से दूर रहना चाहिए-

काला नमक के नुकसान- 

हाई बीपी के रोगियों को काले नमक से दूर रहना चाहिए. अगर आपको काला नमक पसंद है, तो एक बार काला नमक खाने से पहले डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें. 
जरूरत से ज्यादा काला नमक खाने से शरीर में सोडियम की मात्रा बढ़ जाती है. इस वजह से किडनी के फंक्शन पर काफी बुरा असर पड़ता है. 
काला नमक खाने से ह्रदय रोग का खतरा बढ़ता है. क्योंकि ज्यादा काला नमक खाने से बीपी बढ़ता है, जिससे ह्दय की समस्या हो सकती है.
इसके साथ ही पथरी की समस्या भी काला नमक खाने से बढ़ती है. क्योंकि काला नमक में सोडियम की मात्रा अधिक होती है, जो शरीर में क्रिस्टल बढ़ता है.

भारत के 70 से 90 फीसदी लोगों में विटामिन डी की कमी, रिसर्च में खुलासा

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भारत में 70 से 90 प्रतिशत लोगों में विटामिन डी की कमी पाई गई है। ये आंकड़े चौंकाने वाले हैं। क्योंकि भारत जैसे देश में लोगों को बारहों महीने धूप नसीब होती है। ऐसे में लोगों में विटामिन डी की कमी निराशाजनक है। विटामिन डी की कमी से ग्रसित लोगों की स्थिति काफी हद तक टाइप 2 मधुमेह व उच्च रक्तचाप से जुड़ी हुई है।

मुंबई स्थित शुश्रुशा हॉस्पिटल में डायबिटोलॉजिस्ट पी.जी तलवलकर ने इस अध्ययन की खोज करते हुए बताया है कि विटामिन डी की कमी वाले लोगों में खतरनाक बीमारियों के होने का खतरा रहता है। जानकारी है कि भारत में 84 प्रतिशत गर्भवती महिलाओं में विटामिन डी की कमी देखी गई है। इसके बाद उनके नवजात शिशुओं में भी यही कमी पाई गई है।

एडल्ट लोगों में विटामिन डी की कमी और लो बोन मास और मासपेशियों की कमजोरी से जुड़ी होती है। जिस कारण हड्डियों के विकार की समस्या देखने को मिलती है। दरअसल 1508 लोगों पर किए गए रिसर्च के अनुसार मुंबई में 88% व्यस्क लोगों में विटामिन डी की कमी देखी गई है। रिसचर्स ने यह भी बताया कि टाइप 2 डायबिटीज रोगियों में 84.2 प्रतिशत लोगों में विटामिन डी की कमी थी। जबकि विटामिन डी की कमी वाले हाई ब्लडप्रेशर के 82.6 प्रतिशत मरीज थे। गौरतलब है कि भारत में विटामिन डी की कमी के कई कारण हैं। इसमें से एक है कि अधिकतर लोगों को सूरत की रौशनी से पर्याप्त संपर्क नहीं होता।

अब मनाली घूमने जाएं तो जरूर उठाएं स्काई साइकिलिंग का लुत्फ, देखें Video

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दुनिया भर में लोगों को आपने सड़क या पहाड़ पर साइकिलिंग करते देखा होगा लेकिन आज हम आपको हवा में स्काई साइकिलिंग करते हुए दिखा रहे हैं. आपको बता दें कि हिमाचल के खूबसूरत पर्यटक स्थल मनाली से महज 24 किलोमीटर दूर गुलाबा में हिमाचल वन विभाग एक एडवेंचर पार्क बना रहा है. समुद्र तल से 9000 फीट की ऊंचाई पर 350 मीटर लंबा यह देश का पहला स्काई साइकिल पार्क होगा. पूरी तरह से इस इको फ्रेंडली पार्क में स्काई साइकिलिंग मुख्य आकर्षण का केंद्र होगी.

अब तक स्काई साइकिलिंग के लिए करना पड़ता था विदेश का रुख 
आपको बता दें कि अब तक भारत में लोगों को इस साहसिक खेल का लुत्फ लेने के लिए अमूमन विदेशों का रुख करना पड़ता था. लेकिन, अब ऐसा नहीं होगा. मनाली में यह साहसिक खेल स्काई साइकिलिंग के शुरू होने से देश-विदेश के सैलानी अब साल भर इस खेल का मजा ले सकेंगे. स्काई साइकिलिंग करने के लिए पुख्ता सुरक्षा के सामान उपयोग में लाए गए हैं ताकि यहां सुरक्षित स्काई साइकिलिंग की जा सके.

स्थानीय लोगों को रोजगार भी मिलेगा 
गौरतलब है कि मनाली से रोहतांग पास की ओर साल भर लाखों सैलानियों की चहलकदमी रहती है. खासकर सीजन के दौरान रोहतांग सैलानियों के बोझ से सराबोर रहता है. इसका यह बोझ कम करने के लिए ही हिमाचल सरकार मनाली से रोहतांग के मध्य इको पार्क बनाने पर जोर दे रही है. इसके साथ ही पार्क के माध्यम से स्थानीय लोगों को रोजगार भी दिया जा रहा है.

मिसाइल ताकत में भारत के सामने नौसिखिया पाकिस्तान, 5500 किलोमीटर है हमारी क्षमता

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कश्मीर मुद्दे पर अंतरराष्ट्रीय बेइज्जती करवा चुका पाक अब जंग के ढोल पीट रहा है। गुरुवार को पाक सेना ने बैलिस्टिक मिसाइल गजनवी का परीक्षण किया। लेकिन क्या आप जानते हैं कि मिसाइल के मामले में पाकिस्तान आज भी भारत के सामने बच्चा है। भारत के पास खुद की अंतर महाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइल मौजूद है जबकि पाकिस्तान के लिए यह अब भी सपना है। भारत ने अपनी सुरक्षा के लिए भारत ने विश्व स्तर के कई मिसाइलों का निर्माण किया है। जानिए इनकी खासियत-

अग्नि 5यह अग्नि सीरीज का इंटर-कॉन्टिनेन्टल बैलिस्टिक मिसाइल है। इसकी रेंज 5500 किलोमीटर होने के साथ ही यह कई मामलों में विश्वस्तरीय है। इसकी विशेषता ये है कि समय आने पर इसके रेंज में बढ़ोत्तरी भी की जा सकती है।

अग्नि 4अपने पुराने वर्जनों के मुकाबले अग्नि-4 मिसाइल काफी हल्की है और इसमें बहुत सी नई तकनीक इस्तेमाल की गई है। भारतीय सेना में शामिल यह मिसाइल 4000 किलोमीटर से अधिक दूरी तक जमीन से जमीन पर मार कर सकती है।

अग्नि 3अग्नि-3 मिसाइल की लंबाई 17 मीटर और दो मीटर व्यास की है। इसकी खासियत ये है कि जमीन से जमीन पर मार करने की क्षमता रखने वाली यह मिसाइल 3500 किलोमीटर दूर वार कर सकती है। यह डेढ़ टन तक पेलोड ले जाने की क्षमता रखती है। इसमें एडवांस कम्प्यूटर और नेवीगेशन सिस्टम लगा है।

अग्नि 2अग्नि-2 मिसाइल की खासियत है कि यह एक टन का पेलोड ले जाने के साथ ही दो हजार किलोमीटर तक मार कर सकती है। अग्नि-2 अत्याधुनिक नेवीगेशन सिस्टम और तकनीक से लैस है। भारतीय सेना में सम्मिलित किया जा चुका है।

अग्नि 1अग्नि-1 मिसाइल का निर्माण भारत में 1999 में ही शुरू हो गया था जबकि इसका पहला परीक्षण 2002 में किया गया था। अग्नि-1 700 किलोमीटर तक मार करने में सक्षम है। अग्नि-1 भारतीय सेना में शामिल हो चुकी है। इसे कम मारक क्षमता वाली मिसाइल के तौर पर विकसित किया गया है।

निर्भययह भारत की सबसोनिक क्रूज मिसाइल है। निर्भय मिसाइल में ठोस रॉकेट मोटर बूस्टर के साथ टर्बोफैन इंजन लगा होता है। इसी वजह से इसकी रेंज 800 से 1000 किलोमीटर है। सतह से सतह पर मार करने वाली इस मिसाइल को हर मौसम में दागा जा सकता है। सोमवार को इस मिसाइल का सफल परीक्षण किया गया।

प्रहार मिसाइलप्रहार शार्ट रेंज बैलेस्टिक मिसाइल है जिसमें 150 किलोमीटर की दूरी तक की मारक क्षमता है। इसके अगले कुछ साल में सेना में शामिल होने की उम्मीद है।

नाग4 किलोमीटर रेंज के साथ 42 किलो के वजन वाली यह मिसाइल अपने साथ 8 किलोग्राम विस्फोटक ले जा सकती है। यह मिसाइल फायर और फारगेट के आधार पर काम करती है। इससे जमीन से जमीन और हवा से जमीन पर दागा जा सकता है।

ब्रह्मोस मिसाइलइस मिसाइल को भारत और रूस मिलकर बनाया था। यह दुनिया की सबसे अच्छी क्रूज मिसाइल मानी जाती है। इसकी रेंज 290 किलोमीटर और गति 4.5 मैक है। इसका नाम भारत के ब्रह्मपुत्र और रूस के मस्कन्वा नदी पर रखा गया है।

आकाश मिसाइल700 किलोग्राम वजन वाली यह मिसाइल जमीन से हवा में मार कर सकने में सक्षम है। इसकी गति 2.5 मैक है और इसकी सबसे खास बात ये है कि यह 25 किलोमीटर के रेंज में किसी भी उड़ती चीज को भेदने में सक्षम है। इस मिसाइल को भारत का पैट्रियॉट कहा जाता है।

ग्रीन एनर्जी – 6 सिलेंडर का इंजन रिप्लेसकर बनाया ई-डंपर, खुद पैदा की बिजली से चलता है…

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स्विट्जरलैंड की पहाड़ियों पर माइनिंग के काम में तैनात कोमात्सु एचबी 605-7 डंपर सबसे बड़ा ई व्हीकल है। यह 65 टन का भार लेकर चल सकता है। कोमात्सु के 6 सिलेंडर इंजन को रिप्लेसकर इसे ई व्हीकल में बदला गया है। यह आकार में 30 फीट लंबा, 14 फीट चौड़ा और 14 फीट लंबा है। 

इस डंपर का इस्तेमाल यह स्विस पहाड़ियों से चूना पत्थर लाने में किया जाता है। जब यह खाली होता है, तो पहाड़ी पर ऊपर जाता है और वहां से 65 टन अयस्क लेकर लौटता है। इसमें 600 किलोवॉट पर आर का स्टोरेज एंड रीजनरेटिव ब्रेकिंग सिस्टम लगा हुआ है, जिससे पहाड़ से उतरते समय यह जो भी ऊर्जा उत्पन्न करता है वह स्टोर हो जाती है। इस ऊर्जा से यह पहाड़ी पर चढ़ने के लिए आवश्यक चार्जिंग हासिल कर लेता है। इस तरह उसे ऊर्जा मिलती रहती है। 

20 चक्कर में 200 यूनिट बिजली बनती है
कंपनी के प्रवक्ता ने बताया कि यह ई-डंपर अगर रोजाना 20 चक्कर भी लगाता है, तो इससे 200 किलोवाट घंटा यानी 200 यूनिट बिजली पैदा होती है। यह ई-डंपर अप्रैल से काम कर रहा है। इस आधार पर अगर गणना की जाए तो यह अब तक 76000 लीटर डीजल की बचत कर चुका है। साथ ही कम से कम 200 टन कार्बन डाई ऑक्साइड को भी वातावरण में घुलने से रोक चुका है। 

यह जादू की तरह: लुकास डी ग्रासी
फॉर्मूला ई-ड्राइवर लुकास डी ग्रासी ने कहा कि यह पूरी तरह से जादू है कि एक ट्रक खुद बिजली पैदा करके अपने लिए ऊर्जा जुटाता है। वह कहते हैं कि वास्तविक जीवन में यही इलेक्ट्रिक वाहनों का वास्तविक इस्तेमाल है। ये न केवल सस्ते हों, बल्कि अधिक उपयोगी और इको फ्रेंडली हों।

सिंधु के ट्रेनिंग वीडियो पर आनंद महिंद्रा ने कहा- मैं इसे सिर्फ देखकर ही थका महसूस कर रहा..

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 भारत के बड़े उद्योगपतियों में शुमार महिंद्रा ग्रुप के चेयरमैन आनंद महिंद्रा ने वर्ल्ड चैम्पियन सिंधु के ट्रेनिंग सेशन का एक वीडियो ट्विटर पर पोस्ट किया। इसमें उन्होंने सिंधु की तैयारियों पर आश्चर्य जताया है। आनंद ने वीडियो पर कहा, “निष्ठुर। मैं सिर्फ इसे देखकर ही थका महसूस कर रहा हूं। लेकिन वीडियो देखने के बाद कोई रहस्य नहीं रह गया कि वे क्यों वर्ल्ड चैम्पियन हैं। भारतीय खिलाड़ियों की आने वाली पूरी एक पीढ़ी उन्हें फॉलो करेगी और सबसे ऊपर पहुंचने की प्रतिबद्धता से पीछे नहीं हटेगी।”

वर्ल्ड चैम्पियनशिप के लिए सिंधु ने अलग से की थी ट्रेनिंग

सिंधु का जो वीडियो आनंद महिंद्रा ने ट्वीट किया वो हैदराबाद स्थित सुचित्रा बैडमिंटन एकेडमी में उनकी ट्रेनिंग का है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, सिंधु ने वर्ल्ड चैम्पियनशिप की तैयारी के लिए इस एकेडमी में टूर्नामेंट से 45 दिन पहले तैयारी शुरू कर दी थी। बताया गया है कि गोपीचंद एकेडमी में बैडमिंटन प्रैक्टिस के बाद सिंधु रोज हैदराबाद के ट्रैफिक में 60 किमी. सफर कर के सुचित्रा बैडमिंटन एकेडमी जाती थीं और यहां स्ट्रेंथ ट्रेनर श्रीकांत वर्मा मदपल्ली के साथ घंटों तक ट्रेनिंग करती थीं। 

सिंधु की उपलब्धि पर प्रधानमंत्री मोदी जता चुके हैं गर्व

इससे पहले वर्ल्ड चैम्पियनशिप जीतने के बाद देश लौटने पर सिंधु ने कहा था कि मुझे अपने भारतीय होने पर बेहद गर्व महसूस हो रहा है। सिंधु ने रविवार को जापान की नोजोमी ओकुहारा को हरा दिया था। वे इस टूर्नामेंट के 42 साल के इतिहास में चैम्पियन बनने वाली पहली भारतीय बन गईं। सिंधु 2018, 2017 में रजत और 2013, 2014 में कांस्य पदक जीती थीं। प्रधानमंत्री मोदी ने रविवार को फाइनल के तुरंत बाद भी ट्वीट कर सिंधु को बधाई दी थी। उन्होंने कहा था- आश्चर्यजनक रूप से प्रतिभाशाली पीवी सिंधु ने गोल्ड जीत कर फिर भारत को गर्व महसूस कराया।

85 साल की उम्र में संन्यास लिया 60 साल खेलने के बाद गेंदबाज ने , 7 हजार विकेट लिए…

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वेस्टइंडीज के तेज गेंदबाज सेसिल राइट 85 साल की उम्र में क्रिकेट को अलविदा कह रहे हैं। उन्होंने मंगलवार को बताया कि वे 7 सितंबर को अपना आखिरी मुकाबला खेलेंगे। राइट ने जमैका के लिए गैरी सोबर्स और वेस हॉल जैसे दिग्गजों के खिलाफ प्रथम श्रेणी मैच खेला था। इसके बाद 1959 में इंग्लैंड चले गए। तीन साल बाद सेंट्रल लंकाशायर लीग में क्रोमप्टॉन के लिए पेशेवर क्रिकेटर के तौर पर अपना करियर शुरू किया। इसके बाद उन्होंने यहीं बसने का फैसला किया।

पांच सेशन में 538 विकेट लिए

  1. राइट ने अपने 60 साल के पेशेवर करियर में 7000 विकेट लिए। एक वक्त ऐसा आया जब उन्होंने पांच सेशन में 538 विकेट लिए थे। उस वक्त उन्होंने औसतन एक विकेट प्रत्येक 27 बॉल पर लिया था।
  2. राइट ने कहा, “मुझे नहीं पता मेरा करियर इतना लंबा कैसे चला। मैं इस बारे में कुछ नहीं कह सकता। पर इतना कह सकता हूं कि मैं कुछ भी खा लेता था, लेकिन कभी ज्यादा शराब नहीं पीता। हां कभी-कभी बीयर जरूर पीता था। इसके अलावा, मुझे लंकाशायर का खाना बहुत पसंद है। इस उम्र में भी मैं इसलिए फिट हूं, क्योंकि मैं रोज एक्सरसाइज करता हूं।”
  3. “मैं अपनी फिटनेस इसलिए भी बरकरार रख पाया, क्योंकि मैंने कभी भी अपनी उम्र का बहाना नहीं बनाया। मैंने महसूस किया है कि खुद को सक्रिय रखने से दर्द से राहत मिलती हैं। मुझे टीवी देखना पसंद नहीं है।मैं पैदल घूमना पसंद करता हूं।” वे 7 सितंबर को अपने आखिरी मुकाबले में पेन्निने लीग में अपरमिल के लिए स्प्रिंगहेड के खिलाफ मैदान में उतरेंगे।

पीवी सिंधु ‘सुसाइड प्रिवेंशन मिशन’ की ब्रांड एंबेसडर होंगी, हेल्पलाइन नंबर की शुरुआत करेंगी…

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 वर्ल्ड चैम्पियनशिप में गोल्ड मेडल जीतने वाली भारत की पहली बैडमिंटन खिलाड़ी और यूथ आइकॉन पुसरला वेंकट सिंधु अब गुजरात सुसाइड प्रिवेंशन की ब्रांड एंबेसडर होंगी। उन्होंने ब्रांड एंबेसडर के प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया है।

आगामी 10 सितंबर को वर्ल्ड सुसाइड प्रिवेंशन दिवस पर जीवीके 108 और गुजरात सरकार के संयुक्त उपक्रम में सुसाइड प्रिवेंशन प्रोग्राम के तहत 104 हेल्पलाइन नंबर शुरू होगा। कठवाडा स्थित जीवीके 108 मुख्य केंद्र में होने वाले कार्यक्रम में पीवी सिंधु और सीएम विजय रूपाणी उपस्थित रहेंगे। देश में हर एक लाख व्यक्तियों में 10 आत्महत्या कर लेते हैं।

वैज्ञानिकों ने बनाया 80% पानी वाला बटर स्प्रैड, मलाई के कारण मक्खन जैसा स्वाद…

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अमेरिका की कार्नेल यूनिवर्सिटी के खाद्य वैज्ञानिकों ने कम कैलोरी वाला एक ऐसा बटर स्प्रैड तैयार किया है, जो लगभग पानी से बना है। इस लो-कैलोरी स्प्रैड के एक टेबल स्पून में सिर्फ 2.8 ग्राम फैट और 25.2 कैलोरी है, जबकि मक्खन में 84 फीसदी फैट और 16 फीसदी पानी होता है। एक चम्मच मक्खन में 11 ग्राम फैट और 100 कैलोरी होती है।

इस स्प्रैड को बनाने के लिए बहुत अधिक पानी, कुछ बूंदें वनस्पति तेल और मलाई को एक नई तकनीक से काफी समय तक फेंटा जाता है। लगातार फेंटने से यह गाढ़ा हो जाता है और मलाई की वजह से इसमें मक्खन का स्वाद भी पैदा हो जाता है। क्योंकि इसमें अधिकांश हिस्सा पानी ही होता है इसलिए इसमें मक्खन की तुलना में एक चौथाई कैलोरीज ही होती है।
 

बटर, मक्खन की तरह दिखता ही नहीं, स्वाद भी देता है

  1. इस बटर में कृत्रिम रूप से भी कुछ नहीं मिलाना पड़ता। कार्नेल यूनिवर्सिटी के फूड साइंस के प्रोफेसर और इस स्प्रैड पर शोधपत्र के लेखक अलीरेजा अब्बासपौराड कहते हैं कि यह एक चौंकाने वाला उत्पाद है। क्या आप एक ऐसी चीज के बारे में कल्पना भी कर सकते हैं, जिसमें 80 फीसदी पानी व सिर्फ 20 फीसदी तेल हो, फिर भी वह न केवल मक्खन की तरह दिखता हो बल्कि उसको मुंह में रखने पर वह मक्खन का स्वाद भी देता हो।
  2. पानी और तेल को फेंटना कोई नई बात नहीं है। अलीरेजा कहते हैं कि हमने जिस तकनीक का इस्तेमाल कर इसे फेंटा है वह नया है। हमने इस प्रक्रिया में तेल में पानी को धीरे-धीरे मिलाते हुए तब तक फेंटा, जब तक कि इसमें 80 फीसदी पानी नहीं हो गया। लोगों में सेहत के प्रति बढ़ती जागरुकता की वजह से लगातार लो-कैलोरी, कम फैट वाले और हाइजनिक खाने की मांग बढ़ रही है।
  3. यह उत्पाद फिटनेस को लेकर सचेत रहने वाले लोगों के लिए एक आदर्श है। इस स्प्रैड के बाद अब अन्य चीजों पर भी इस तरह के शोध हो सकते हैं। इतना ही नहीं इस स्प्रैड को भी आगे अलग-अलग चीजें मिलाकर नए उत्पाद बनाए जा सकते हैं। अली रेजा कहते हैं कि हम इसमें मिल्क प्रोटीन या पौधों से मिलने वाला प्रोटीन भी मिला सकते हैं। इसमें विटामिन या फ्लेवर भी मिला सकते हैं।

7 साल से अटकी है फिल्म, बॉलीवुड को नहीं मेजर ध्यानचंद की बायोपिक की परवाह…

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 बॉलीवुड में इन दिनों बायोपिक का दौर चल रहा है। हर दिन किसी न किसी शख्सियत की लाइफ पर फिल्म अनाउंस हो रही है। लेकिन अभी तक हॉकी के जादूगर कहे जाने वाले मेजर ध्यानचंद की बायोपिक पर कोई प्रोड्यूसर-डायरेक्टर ध्यान नहीं दे रहा है। सात साल से यह बायोपिक अटकी पड़ी है। खेल दिवस यानी ध्यानचंद के जन्मदिन पर भास्कर यही मुद्दा उठा रहा है…

बड़े प्रोड्यूसर्स के पास थे राइट्स

  1. ध्यानचंद पर बायोपिक बनाने के राइट्स धर्मा प्रोडक्शन के करन जौहर, एडलैब्स प्रमुख पूजा शेट्‌टी और आरती शेट्‌टी के पास थे। दोनों ही बड़े प्रोड्यूसर हैं। इनके पास भारी भरकम बजट भी होता है। इसके बावजूद अभी तक फिल्म बनाने को लेकर कुछ भी प्रोग्रेस नहीं हुई। 
  2. ध्यानचंद के बेटे अशोक सिंह कहते हैं, “राइट्स अशोक ठकेरिया के पास हैं। उनको पूजा शेट्टी और करन ने राइट्स बेच दिए हैं। फिलहाल कहानी पर काम किया जा रहा है। सब कुछ बोर्ड पर आने ही वाला है। हालांकि डायरेक्टर कौन होगा? स्टारकास्ट क्या होगी? यह सब फाइनल नहीं हुआ है। हमने प्राइमरी तौर पर 2012 में पूजा शेट्टी को राइट्स दिए थे। उन्होंने आगे शायद करन जौहर को दिए। अब सुन रहा हूं कि अशोक ठकेरिया के पास हैं।”
  3. अशोक सिंह आगे बताते हैं, “फिल्म रिसर्च लेवल पर पूरी हो चुकी है। पूजा शेट्टी की टीम ने राइट्स लेने के बाद झांसी, दिल्ली, पंजाब में उस समय के लोगों से बातें की थी। अब वे स्क्रिप्ट को कैसे प्रस्तुत करती हैं, वह देखने वाली बात होगी। वे ओलिम्पिक में करिश्माई प्रदर्शन पर ही फोकस करते हैं  या फिर पूरी जीवन यात्रा दिखाएंगे।” पूजा शेट्टी कहती, “फिलहाल इस टॉपिक पर बात नहीं कर सकती। कुछ चीजें सुलझने की स्थिति में हैं। उसके बाद मैं फिल्म के बारे में अनाउंसमेंट करूंगी।”
  4. ध्यानचंद के किरदार के लिए चुनौतियां
    • हॉकी के खेल को सीखना तुलनात्मक तौर पर क्रिकेट, बॉक्सिंग और बैडमिंटन के मुकाबले जरा मुश्किल होता है।
    • हॉकी स्टिक और गेंद के साथ तालमेल बिठाना सीखना कठिन काम है। 
    • हॉकी प्लेयर का रोल निभाने के लिए किसी भी एक्टर का बिल्कुल फिट होना जरूरी है।
    • जो भी एक्टर इस किरदार को निभाएगा, उसकी रनिंग स्किल्स भी ठीक होनी चाहिए।
  5. क्या कहती है राइटर बिरादरीराइटर बिरादरी का कहना है, ‘ध्यानचंद का किरदार लार्जर दैन लाइफ और करिश्माई है। उसमें स्टार वैल्यू वाले लोग ही फिट बैठ सकते हैं। उनकी कद-काठी लीन थी। ऐसे में सलमान और आमिर को उसके लिए खासा वजन घटाना पड़ेगा। बाकी बड़े स्टार्स में रणबीर कपूर भी हैं, जो फुटबॉल प्रेमी हैं। अगर वे यह किरदार निभाते हैं तो उन्हें काफी तैयारी करनी पड़ेगी। 
  6. ट्रेड पंडितों का कहना है कि ‘न जानें क्यों हॉकी के जादूगर ध्यानचंद की बायोपिक इतने वर्षों से फ्लोर पर क्यों नहीं जा रही है? उनकी जिंदगी में इतने करिश्मे हैं कि दो तीन पार्ट वाली फिल्म बन सकती है।’