Home Blog Page 2768

कई ट्रेनों का किराया 25 प्रतिशत कम करने की तैयारी में रेलवे

0

सड़क परिवहन और विमानन क्षेत्र से भारी प्रतिस्पर्धा का सामना कर रहा रेलवे यात्रियों को लुभाने के लिए अब छूट का सहारा लेगा। एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि शताब्दी, तेजस और गतिमान एक्सप्रेस जैसी ट्रेनों के किराये में 25 फीसदी तक की छूट देने की तैयारी है। टिकटों की बिक्री बढ़ाने के लिए यह फैसला किया गया है।
अधिकारी ने कहा कि यह छूट एसी चेयरकार और एक्जीक्यूटिव चेयरकार के साथ सभी ऐसी ट्रेनों पर लागू होगा। इसमें चेन्नई सेंट्रल-मैसूर शताब्दी एक्सप्रेस, अहमदाबाद-मुंबई शताब्दी एक्सप्रेस और न्यू जलपाईगुड़ी-हावड़ा शताब्दी एक्सप्रेस शामिल नहीं हैं। इनमें मौजूदा डिस्काउंट स्कीम लागू होगी। वंदे भारत एक्सप्रेस पर भी छूट लागू होगी। इसमें भी एसी चेयरकार और ईसी सीटिंग व्यवस्था है। शर्त है कि ऑक्यूपेंसी 50 फीसदी से कम होने पर ही यह छूट मिलेगी। अधिकारी ने बताया कि बेस किराए पर छूट दी जाएगी। जीएसटी, रिजर्वेशन शुल्क, सुपरफास्ट किराया व अन्य शुल्क अलग से लगेंगे।
अधिकारी ने कहा कि पिछले साल जिन रेलगाडिय़ों में हर महीने औसतन आधे से कम सीट भर पाईं, उन्हीं ट्रेनों में यह छूट दी जाएगी। रेल मंत्रालय ने पहचानी गई ट्रेनों में छूट वाली योजना लागू करने का अधिकार जोन के प्रिंसिपल कमर्शियल मैनेजरों को देने का फैसला किया है। वैसे, मंत्रालय ने इसके लिए कुछ दिशानिर्देश तैयार किए हैं। अधिकारी के मुताबिक, मंत्रालय ने कहा है कि प्रतिस्पर्धा के आधार पर छूट वाला किराया तय होना चाहिए। यह छूट सफर के सभी चरणों में देने की मंजूरी दी है। अधिकारी की मानें तो मंत्रालय ने सालाना, अर्ध वार्षिक, मौसमी या साप्ताहांत आधार पर छूट देने की बात कही है। योजना लागू होने के बाद ट्रेन में ग्रेड डिस्काउंट या फ्लेक्सी फेयर जैसी कोई अन्य छूट लागू नहीं होगी।
रेलवे के जोनों को 30 सितंबर तक लो ऑक्यूपेंसी ट्रेनों की पहचान करने के लिए कहा गया है। मंत्रालय ने जोनों से ट्रेन की सीटों की बुकिंग बढ़ाने की कोशिश करने को कहा है। योजना लागू होने के चार महीने बाद जोनों को इसके कार्यान्वयन पर रिपोर्ट जमा करनी है।

​बैंडएड चुराकर गोली के घाव पर चिपकाने जैसा है RBI का पैकेज: राहुल

0

केंद्र सरकार को 1.76 लाख करोड़ रुपये देने की बिमल जालान समिति की सिफारिश पर आरबीआई बोर्ड की मुहर लगने के बाद से कांग्रेस पार्टी हमलावर है।

पार्टी इसका हवाला दे देश की अर्थव्यवस्था के खस्ताहाल होने का दावा कर रही है। इसी सिलसिले में पार्टी के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने ट्वीट कर आरबीआई से रकम लेने को ‘चोरी’ तक कह दिया।

उन्होंने कहा कि देश की मौजूदा आर्थिक स्थिति खुद प्रधानमंत्री और वित्त मंत्री द्वारा पैदा की गई है। उन्होंने कहा कि अब उनका दिमाग काम नहीं कर रहा है कि मौजूदा आर्थिक समस्या का क्या समाधान करें।

राहुल ने ट्वीट कर कहा, ‘प्रधानमंत्री और वित्त मंत्री को समझ नहीं आ रही है कि वे खुद से पैदा की गई आर्थिक आपदा से कैसे निपटें।’ राहुल आरबीआई से (पैसे की) चोरी काम नहीं आने वाली। यह डिस्पेंसरी से बैंड एड चुराकर गोली लगे घाव पर चिपकाने जैसा है।’

मुख्यमंत्री से ’गिव वे टू एम्बुलेंस’ अभियान से जुड़े विद्यार्थियों ने मुलाकात की…

0

मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल से आज सवेरे यहां उनके निवास में आंध्रप्रदेश के विशाखापट्टनम स्थित एक निजी स्कूल में अध्ययन कर रहे छत्तीसगढ़ के विद्यार्थियों ने सौजन्य मुलाकात की। विद्यार्थियों ने मुख्यमंत्री को बताया कि वे लोग एम्बुलेंस को रास्ता देने के लिए चलाए जा रहे जन जागरूकता अभियान ’गिव वे टू एम्बुलेंस’ से जुड़े हैं। जागरूकता अभियान के सिलसिले में वे लोग छत्तीसगढ़ के भ्रमण पर आए हैं। यहां भी वे लोगों से मिलकर एम्बुलेंस को रास्ता देने की अपील करेंगे। मुख्यमंत्री ने बच्चों को इस अभियान की सफलता के लिए शुभकामनाएं देते हुए उनकी सराहना की।

    विद्यार्थियों ने मुख्यमंत्री को बताया कि इससे पहले उन लोगों ने आंध्रप्रदेश और ओड़िशा में भी इस अभियान के अंतर्गत लोगों से मुलाकात की थी। अब तक वे लोग लगभग 12 हजार लोगों से मिल चुके हैं। बच्चों ने मुख्यमंत्री को उनका एक चित्र स्मृति चिन्ह के रूप में भेंट किया। इस अवसर पर स्कूल के डायरेक्टर श्री नलीनकांत श्रीवास्तव भी उपस्थित थे। छत्तीसगढ़ के ये बच्चे विशाखापट्टनम के ओकरिज इंटरनेशनल स्कूल में अध्ययनरत हैं।

भारत के इस गांव में रहते हैं पांडवों और कौरवों के वंशज, इतनी दिलचस्प जगह जाने से रोक नहीं पाएंगे

0

साल में खुद के लिए एक ट्रिप तो बनती है। व्यस्त जिंदगी में अगर आपको इतना समय भी नहीं मिला कि आप कुछ तय कर सकें तो कोई बात नहीं। आज हम आपको एक ऐसी जगह के विषय में बताने जा रहे हैं जहां पहाड़ हैं, मस्त मौसम है और मन शांत करने के लिए प्रकृति की खूबसूरती भी है। सबसे बड़ी बात कि ये यहां भागमभाग नहीं बल्कि शांति है क्योंकि ये खूबसूरत गांव है। तीन दिन का प्लान बनाकर आराम से मूड फ्रेश कर आ सकते हैं। दिल्ली से लगभग 450 किमी की दूरी पर है।

शहर की चहल-पहल से दूर ये जगह इतनी मनोरम है कि यहां बस जाने का दिल करेगा। उत्तराखंड की में बसे इस गांव का नाम कलाप है, जो गढ़वाल क्षेत्र में स्थित है। ये गांव रूपिन नदी के किनारे 7800 फीट की ऊचाई पर स्थित है। देवदार लंबे और घने पेड़ गांव के आकर्षण में चार चांद लगा देते हैं।

यहां पहुंचकर बंदरपूंछ पीक (6316 मीटर) कुछ अद्भुत नजारे देख सकते हैं। जबकि गांव में प्राथमिक व्यवसाय कृषि है और ये स्थान आधुनिक धारणाओं से दूर रहता है, ये काफी रोमांचित है कि सामुदायिक पर्यटन भी होता है। इसी नाम का एक एनजीओ कलाप में स्थानीय समुदाय को स्थायी पर्यटन अनुभव प्रदान करने में मदद करता है, जिसमें होम स्टे, ट्रेक और बहुत कुछ शामिल है।

माना जाता है कि कलाप के लोग महाभारत के पांडवों और कौरव भाइयों के वंशज हैं। वास्तव में, कलाप में मुख्य मंदिर पांडव भाइयों में से एक कर्ण को समर्पित है।गांव के स्थानीय लोगों से बात करेंगे तो आपको महाभारत से जुड़े आकर्षक किस्से और सुनने को मिलेंगे। कर्ण महाराजा उत्सव नाम का एक त्यौहार भी इस क्षेत्र में मनाया जाता है। जनवरी में, आमतौर पर कलाप में पांडव नृत्य उत्सव देख सकते हैं और आप निश्चित रूप से अपनी यात्रा की योजना बनाने की सोच रहे होंगे।

कलाप दिल्ली से लगभग 450 किमी और देहरादून से 210 किमी की दूरी पर है। देहरादून से आप गांव के निकटतम रेल स्टेशन सांखरी तक पहुच सकते हैं। फिर, आपको कलाप को दो अलग-अलग मार्गों से ट्रेक करने की आवश्यकता है जिसमें छह औरचार घंटे लगते हैं। दोनों मार्गों के लिए आपको किराए पर कूली मिल जाएंगे, बशर्ते आप कल्प एनजीओ के साथ पहले ही बात कर लें।

दही खाने के शौकीन हो जाएं सतर्क, वरना हो सकती है ये जानलेवा बीमारी, इन लोगों के लिए है जहर

0

दही एक ऐसा डेयरी प्रोडक्ट है, जो दूध के फर्मेटेशन प्रक्रिया से तैयार होता है. स्वाद में खट्टा और क्रीमी दही ज्यादातर लोगों को काफी पसंद होता है. खासतौर पर गर्मियों में दही खाना लोग काफी पसंद करते हैं. वहीं, जिन लोगों को पाचन की समस्या होती है, वे दही खाना ज्यादा पसंद करते हैं. इसके साथ-साथ दही हमारी दांतों और हड्डियों के लिए भी काफी अच्छा होता है.

भारत में दही का इस्तेमाल कई तरह के भोजन को तैयार करने के दौरान किया जाता है. दही से सेहत के साथ-साथ खाने का स्वाद भी अच्छा बनता है. सेहत और खाने के अलावा दही का इस्तेमाल स्किन को निखारने के लिए किया जाता है, लेकिन इन सभी गुणों के कारण भी दही कुछ लोगों के लिए काफी नुकसानदायक होता है. किसी भी चीज की अति हमारे शरीर के लिए नुकसानदायी होती है. 

दही के नुकसान

  • अगर हम किसी भी चीज का अति से ज्यादा इस्तेमाल करते हैं, तो यह हमारे शरीर को नुकसान ही पहुंचाता है. दही भी उन्हीं चीजों में आता है. अगर हम दही का अति से ज्यादा सेवन करते हैं, तो ये हमारे स्वास्थ्य के लिए हानिकारक होता है.
  • दही का ज्यादा सेवन करने से यह हमारे शरीर को फूड्स से मिलने वाले आयरन और जिंक को सोखने से रोकती है. ऐसी स्थिति में दही का ज्यादा सेवन नहीं करना चाहिए.
  • इसके अलावा जोड़ों के दर्द और अर्थराइटिस की समस्या से पीड़ित लोगों के लिए ये जहर के समान होता है. ऐसे लोगों को अगर दही का सेवन करना होता है, तो डॉक्टर इन्हें कमरे के तापमान पर दही खाने की सलाह देते हैं.
  • इसे लेकर फिजिशियन कमिटी फॉर रेसपॉन्सिबल मेडिसिन का कहना है कि “दही में गैलैक्टोज नामक शुगर पाई जाती है. जो लैक्टोज से बनती है. इससे ओवेरियन कैंसर का खतरा हो सकता है.”
  • द अमेरिकन जरनल ऑफ क्लीनिकल न्यूट्रीशन में छपे एक आर्टिकल के मुताबिक, “दही के साथ अप्राकृतिक मिठास जैसे कॉर्न सिरप मिलाने से वजन बढ़ने का खतरा बढ़ सकता है.”

औरत बनकर रहता है ये मर्द जाने क्या है रहस्य

0

महिलाओं और पुरुषों के कपड़े हमेशा से ही उनकी पहचान रहे हैं। पेंट-शर्ट पहनने वाला आदमी और साडी़ पहनने वाली औरत। लेकिन दिल्ली मे एक ऐसा आदमी भी है, जो 12 सालों से सिर्फ साड़ी ही पहनता है। इन आदमी के साड़ी पहनने का कारण जानकर आप चौंक जाएंगे।

ये हैं दिल्ली में रहने वाले हिमांशु वर्मा। सारी दिल्ली इन्हें साड़ी-मैन नाम से जानती हैं। ऐसा इसलिए क्योंकि 12 साल से लोग हिमांशु को साड़ी में ही देख रहे हैं। हिमांशु को साड़ी पहनने का बेहद शौक है।

हिमांशु के अनुसार ” साड़ी हमारी संस्कृति का हिस्सा है और इसे पुरुष भी पहन सकते हैं”।

यही नही साड़ी पहनने के पीछे हिमांशु का मकसद दुनिया भर में भारतीय परिधान की खूबसूरती को पहुंचाना है। हर साल हिमांशु लोगों के जागरुक करने के लिए साड़ी फेस्टिवल का भी आयोजन करते हैं। साड़ी पहनने वाले हिमांशु लोगों कि इस मानसिकता को बदलना चाहते हैं कि साड़िया सिर्फ महिलाओं के लिए ही होती है।

ईरा खान ने बॉयफ्रेंड संग 2 साल पूरे होने का जश्न मनाया

0

सुपरस्टार आमिर खान की बेटी ईरा खान ने अपने बॉयफ्रेंड मिशाल कृपलानी संग अपने रिलेशन के दो साल पूरे कर लिए हैं और इस मौके पर उन्होंने इंस्टाग्राम पर मिशाल के साथ वाली अपनी एक पुरानी तस्वीर साझा की है। दोनों इस तस्वीर में मुस्कुराते नजर आ रहे हैं।

दोनों पिछले दो सालों से एक-दूसरे को डेट कर रहे हैं, लेकिन ईरा ने कुछ महीने पहले ही इसकी पुष्टि की। इंस्टाग्राम में ‘आस्क मी एनीथिंग’ सेशन के दौरान उनसे जब इस बारे में पूछा गया तो उन्होंने इसका जवाब दिया।

ग्रेटर नोएडा में पहला व्हीकल चार्जिंग स्टेशन शुरू, इतने रुपये देना होगा चार्ज

0

गौतमबुद्ध नगर जिले के ग्रेटर नोएडा में पहला इलेक्ट्रिक व्हीकल चार्जिंग स्टेशन शुरू हो गया है. यह चार्जिंग स्टेशन हबीबपुर के नजदीक लगे इंडियन ऑयल के पंप पर शुक्रवार से शुरू हुआ है.

नई दिल्ली : गौतमबुद्ध नगर जिले के ग्रेटर नोएडा में पहला इलेक्ट्रिक व्हीकल चार्जिंग स्टेशन शुरू हो गया है. यह चार्जिंग स्टेशन हबीबपुर के नजदीक लगे इंडियन ऑयल के पंप पर शुक्रवार से शुरू हुआ है. इस चार्जिंग स्टेशन को इंडियन ऑयल और एनटीपीसी ने मिलकर शुरू किया है. यहां पर एक वाहन को चार्ज करने में 70 मिनट का समय लगेगा. आपको बता दें प्रदूषण को कम करने की मुहिम के तहत सरकार की तरफ से लगातार इलेक्ट्रिक वाहनों पर जोर दिया जा रहा है.

एक साथ चार वाहन हो सकेंगे चार्ज 
इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए चार्जिंग स्टेशन बनाने की शुरुआत देश में हो गई है. पंप में बिजली मुहैया कराने के लिए एनटीपीसी सहयोग करेगी. ग्रेटर नोएडा के हबीबपुर के पास शुरू किए गए चार्जिंग स्टेशन में एक साथ चार वाहन चार्ज किए जा सकेंगे. एक चार पहिया वाहन को चार्ज करने में करीब 70 मिनट का समय लगेगा. मांग बढ़ने के साथ ही यहां पर चार्जिंग प्वाइंट बढ़ाए जाएंगे ताकि लोगों को सहूलियत मिल सके.

आठ रुपये प्रति यूनिट शुल्क होगा 
इलेक्ट्रिक व्हीकल चार्जिंग स्टेशन में 8 रुपये प्रति यूनिट के हिसाब से पैसा लिया जाएगा. हालांकि, यह कीमत शुरुआती एक महीने के लिए है. इसके बाद इसकी दर तय की जाएगी. बहुत संभव है कि इसकी दरों में इजाफा कर दिया जाए. फिलहाल इस चार्जिंग स्टेशन पर इसके ट्रायल को देखते हुए कोई शुल्क नहीं लगाया जा रहा है.

देश में सबसे ज्यादा बिकने वाला साबुन हुआ सस्ता, इस वजह से HUL ने घटाए दाम

0

देश में सबसे ज्यादा बिकने वाला साबुन लाइफबॉय सस्ता हो गया है. लाइफबॉय के अलावा लक्स और डव की कीमतों में भी गिरावट आई है. दरअसल फ़ास्ट मूविंग कंज्यूमर गुड्स बनाने वाली दिग्गज कंपनी हिंदुस्तान यूनिलीवर (HUL) ने अपने कुछ साबुनों की कीमतें 30 फीसदी तक कम कर दी है. अग्रेज़ी वेबसाइट लाइव मिंट खबर के मुताबिक हिंदुस्तान यूनिलीवर (HUL) ने अपने कुछ साबुनों की कीमतों में 30 प्रतिशत तक की कर दी है.

क्यों घटाई कंपनी ने कीमतें? खबर के मुताबिक जुलाई में, HUL ने कमजोर मांग और कड़ी प्रतिस्पर्धा का सामना करने के लिए लाइफबॉय, लक्स और डव साबुन की कीमतों को कम कर दिया था. लक्स और लाइफबॉय, बिक्री के मामले में देश में सबसे ज्यादा बिकने वाले साबुन ब्रांड्स में से हैं. रिसर्च फर्म यूरोमॉनिटर के अनुसार भारत में टॉयलेट सोप का मार्केट 20,960 करोड़ रुपये का है. रिसर्च कंपनी कंतार के अनुसार, लाइफबॉय भारत में सबसे ज्यादा बिकने वाला साबुन ब्रांड है.

दूसरी ओर, कंपनी ने फेयर एंड लवली, पॉन्ड्स, पीयर्स और डव जैसे ब्रांडों के फेस-वॉश की कीमतों में 4-14 प्रतिशत की बढ़ोतरी की है. आईटीसी, विप्रो कंज्यूमर केयर और गोदरेज कंज्यूमर प्रोडक्ट्स जैसी कंपनियों ने HUL को कड़ी टक्कर दी है.

तुर्की के लोगों को भा रही हिंदी धारावाहिक ‘इस प्यार को क्या नाम दूं’

0

हिंदी धारावाहिक ‘इस प्यार को क्या नाम दूं’ तुर्की में प्राइम टाइम के दौरान देखा जाने वाला एक पसंदीदा धारावाहिक है और पिछले चार वर्षों से इसकी अप्रूवल रेटिंग्स में कोई गिरावट नहीं आई है। दरअसल, तुर्की के दर्शकों को इसकी प्रेम कहानी के ट्विस्ट और टर्न काफी भा रहे हैं। शो को तुर्की में डब किया गया और ‘बीर गारिप आस्क’ के नाम से दिखाया जाता है, जो कि चैनल कनाल 17 पर प्रसारित होता है। चैनल के उप-प्रबंधक यसिम के मुताबिक यह शो तुर्की के दर्शकों को काफी खुश कर रहा है।

यसिम ने आईएएनएस को बताया कि सिर्फ ‘इस प्यार को क्या नाम दूं’ ही नहीं, बल्कि अन्य धारावाहिक ‘एक बार फिर’, ‘उतरन’, ‘बालिका वधु’, ‘सरस्वतीचंद्र’ जैसे धारावाहिकों को भी लोग काफी पसंद कर रहे हैं।

यसिम तुर्की मीडियाकर्मियों की एक बड़ी टीम का हिस्सा हैं।

हैरानी की बात है कि बॉलीवुड फिल्मों की तुलना में तुर्की में हिंदी धारावाहिक ज्यादा लोकप्रिय हैं। आमिर खान अभिनीत फिल्म ‘दंगल’, सलमान खान की ‘बजरंगी भाईजान’, शाहरुख खान की ‘चेन्नई एक्सप्रेस’ और यहां तक कि ऋतिक रोशन-ऐश्वर्या अभिनीत फिल्म ‘जोधा अकबर’ की फिल्में भी लोकप्रिय हैं।

कनाल 17 पर प्रसारित अन्य शो में ‘थपकी प्यार की’, ‘साथ निभाना साथिया’ भी शामिल है।

‘इस प्यार को क्या नाम दूं’ को पहली बार नवंबर 2015 में प्रसारित किया गया था। तब इसे नॉन-प्राइम टाइम की श्रेणी में रखा गया था, लेकिन इसके प्रति लोगों की उत्सुकता और टीआरपी देख इसे मार्च 2016 में प्राइम टाइम श्रेणी में 9 बजे से प्रसारित किया जाने लगा।

यसिम ने कहा, “पिछले चार वर्षों से इस धारावाहिक की अप्रूवल रेटिंग्स में कोई गिरावट नहीं आई है।”

एक बार जब लोग किसी धारावाहिक को देखना बंद कर देते हैं, तो चैनल इसे अपने प्रसारण सूची से बाहर कर देता है।