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ईरान-इजराइल जंग से भारत को कितना होगा नुकसान, किसे मिलेगा फायदा?

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ईरान-इजराइल के बीच 8 महीने बाद फिर जंग छिड़ गई है. अमेरिका ने इजराइल के साथ मिलकर ईरान पर हमला किया. जवाब में ईरान ने भी इजराइल समेत अमेरिका के 7 सहयोगी देशों पर हमले किए हैं. ईरान होर्मुज स्ट्रेट को बंद करने की धमकी भी दे चुका है.

वह हूती विद्रोहियों के जरिए लाल सागर में जहाजों पर हमले भी तेज करा सकता है. इन दोनों जलडमरूमध्यों की नाकाबंदी से भारत समेत पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर भारी असर पड़ सकता है. होर्मुज स्ट्रेट दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्ग है. यह ओमान और ईरान के बीच स्थित संकरा जलमार्ग है, जो फारस की खाड़ी को ओमान की खाड़ी और अरब सागर से जोड़ता है.

यह स्ट्रेट 161 किमी लंबा और अपने सबसे संकरे बिंदु पर सिर्फ 33 किमी चौड़ा है. वैश्विक समुद्री तेल व्यापार का 27% होर्मुज स्ट्रेट से होता है. वैश्विक तेल उत्पादन का 20.5 फीसदी यहां से गुजरता है. हर दिन 20 मिलियन बैरल तेल इस रूट से गुजरता है. इसके साथ ही ग्लोबल LNG व्यापार का 22% यहां से गुजरता है. सऊदी अरब, ईरान, UAE, कुवैत और इराक अपना ज्यादातर तेल इसी मार्ग से निर्यात करते हैं. फरवरी 2026 में ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट में लाइव-फायर सैन्य अभ्यास किया और अस्थायी रूप से कुछ घंटों के लिए स्ट्रेट के हिस्सों को बंद कर दिया था.

भारत पर सीधा प्रभाव

भारत होर्मुज स्ट्रेट के बंद होने से सबसे ज्यादा प्रभावित होने वाले देशों में से एक है. भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल उपभोक्ता है और अपनी जरूरतों का 88% से अधिक तेल आयात करता है. भारत के कच्चे तेल आयात का 40-50% होर्मुज स्ट्रेट से होता है. भारत की LNG सप्लाई का 40-60% इस मार्ग से आता है. 2024 में कतर ने अकेले लगभग 10 मिलियन टन LNG भारत को दिया. भारत सालाना लगभग 2 बिलियन बैरल तेल आयात करता है. तेल की कीमत में हर 1 डॉलर के इजाफे से भारत के वार्षिक आयात खर्च में लगभग 2 बिलियन डॉलर की बढ़ोतरी होती है.

एक्सपर्ट्स का अनुमान है कि होर्मुज स्ट्रेट बंद होने से तेल की कीमतें 90 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर जा सकती हैं. सबसे खराब स्थिति में 130 डॉलर प्रति बैरल भी पार कर सकती हैं. फरवरी 2026 में ब्रेंट क्रूड पहले ही 71 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच गया है, जो एक महीने में 12% से अधिक की बढ़ोतरी है. बढ़ते आयात खर्च से चालू खाता घाटा बढ़ेगा और रुपया कमजोर होगा.

लाल सागर में हूती हमलों का दोहरा खतरा

यमन में हूती विद्रोही नवंबर 2023 से लाल सागर और बाब अल-मंदब स्ट्रेट में कॉमर्शियल जहाजों पर हमले कर रहे हैं. यह क्षेत्र एशिया और यूरोप के बीच व्यापार का एक और अहम मार्ग है. ग्लोबल ऑयल शिपमेंट का 12% और ग्लोबल सी रूट का 10% स्वेज नहर के माध्यम से होता है. बाब अल-मंदब स्ट्रेट कंटेनर शिपिंग के लिए होर्मुज स्ट्रेट की तरह महत्वपूर्ण है. वैश्विक कंटेनर शिपिंग का 25-30% स्वेज नहर से गुजरता है. हूतियों ने कहा है कि वे तब तक हमले जारी रखेंगे, जब तक इजराइल गाजा युद्ध बंद नहीं करता. अब ईरान-इजराइल युद्ध के साथ हूती हमले और तेज हो सकते हैं.

किसे मिलेगा फायदा?

अगर ईरान होर्मुज स्ट्रेट को बंद करता है और हूती लाल सागर में हमले तेज करते हैं, तो अंतरराष्ट्रीय व्यापार के लिए जोखिम को कई गुना बढ़ा देगी. ईरान-इजराइल युद्ध से भारत को सबसे ज्यादा नुकसान होने की संभावना है. होर्मुज स्ट्रेट और लाल सागर में व्यवधान से तेल की कीमतें आसमान छू सकती हैं, मुद्रास्फीति बढ़ सकती है.

अमेरिका तेल के मामले में आत्मनिर्भर है और तेल निर्यात भी करता है. इसके अलावा, ट्रंप प्रशासन ने वेनेजुएला को अपने नियंत्रण में ले लिया है. यदि होर्मुज स्ट्रेट बंद होता है तो तेल की कीमतें दोगुनी हो सकती हैं. एशिया (चीन, भारत, जापान, दक्षिण कोरिया) और यूरोप सबसे ज्यादा प्रभावित होंगे. इसका फायदा अमेरिका की तेल कंपनियां उठाएंगी.

भारत और ईरान के बीच किन चीजों का होता है व्यापार? ये रही पूरी लिस्ट…

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ईरान और इजरायल के बीच एक बार फिर तनाव बढ़ गया है. अमेरिका और इजरायल की ओर से ईरान के सैन्य ठिकानों पर हालिया हमलों के बाद मध्य पूर्व में हालात काफी गंभीर हो गए हैं. ईरान ने भी साफ कहा है कि इस लड़ाई का अंजाम वह खुद तय करेगा.

ऐसे माहौल में एक बड़ा सवाल उठ रहा है कि इस टकराव का भारत पर क्या असर पड़ेगा और दोनों देशों के बीच होने वाले व्यापार पर इसका कितना प्रभाव पड़ सकता है.

दरअसल, भारत और ईरान के रिश्ते केवल कुछ दशकों पुराने नहीं हैं, बल्कि दोनों के बीच सदियों पुराना व्यापारिक और सांस्कृतिक जुड़ाव रहा है. भले ही दुनिया की नजरें इस समय राजनीतिक तनाव पर टिकी हों, लेकिन हकीकत यह है कि ईरान अपनी कई जरूरी जरूरतों के लिए सीधे या परोक्ष रूप से भारत पर निर्भर करता है. दोनों देशों के संबंध सिर्फ कूटनीति तक सीमित नहीं हैं, बल्कि आम लोगों की जिंदगी, खाने-पीने, पहनावे और रहन-सहन तक में इसकी झलक साफ दिखाई देती है.

भारत ईरान को क्या-क्या भेजता है

ईरान लंबे समय से भारत की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए कच्चा तेल मुहैया कराता रहा है. अमेरिकी प्रतिबंधों के बावजूद भारत ने व्यापारिक रिश्ते खत्म नहीं किए. ईरान की आम जनता के लिए भारत से निर्यात होने वाली दवाइयां, चावल, गेहूं, चीनी और सूती कपड़े बेहद जरूरी हैं. बासमती चावल का ईरान बड़ा खरीदार रहा है. इसके अलावा चाय, चीनी, दवाइयां, ऑटो पार्ट्स और कुछ इंजीनियरिंग के सामान भी भारत से ईरान जाते हैं.

भारत ईरान से क्या-क्या मंगवाता है

ईरान से भारत का सबसे बड़ा आयात कच्चा तेल रहा है. इसके अलावा भारत ईरान से सूखे मेवे जैसे पिस्ता और खजूर, कुछ खास केमिकल्स, पेट्रोकेमिकल उत्पाद और कांच से बने बर्तन भी मंगवाता है. साल 1947 में हुए बंटवारे से पहले भारत और ईरान भौगोलिक रूप से एक-दूसरे के काफी करीब थे. पाकिस्तान के बनने के बाद सीधा जमीनी रास्ता कट गया, लेकिन 1950 में दोनों ने औपचारिक राजनयिक रिश्ते कायम किए. साल 1974 में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के ईरान दौरे के बाद द्विपक्षीय व्यापार ने एक नई और मजबूत रफ्तार पकड़ी.

दोनों देश रुपया-रियाल में व्यापार करते हैं

जब भारत-अमेरिका परमाणु समझौते पर बात शुरू हुई और अमेरिका ने ईरान पर प्रतिबंध लगाए, तब दोनों के बीच थोड़ी दूरियां जरूर आईं. इसके बावजूद आपसी संपर्क कभी बंद नहीं हुआ. डॉलर की जगह दोनों देश रुपया-रियाल में भी व्यापार करते हैं. आज ऊर्जा सुरक्षा, फार्मास्यूटिकल्स, सूचना प्रौद्योगिकी और खनन जैसे कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों में दोनों मुल्कों का सहयोग लगातार बढ़ता जा रहा है.

चाबहार पोर्ट का मास्टरस्ट्रोक

व्यापार को सुगम बनाने के लिए भारत, ईरान के चाबहार बंदरगाह में भारी निवेश कर रहा है. यह प्रोजेक्ट मध्य एशिया और अफगानिस्तान तक माल पहुंचाने के लिए एक अहम कूटनीतिक रास्ता है. दोनों देशों के बीच भले ही कोई औपचारिक सैन्य गठबंधन नहीं है, लेकिन आतंकवाद के खात्मे को लेकर दोनों का रुख बिल्कुल साफ है और वे नियमित तौर पर खुफिया जानकारियां साझा करते हैं.

दोनों देशों का ऐतिहासिक जुड़ाव

अंतरराष्ट्रीय कूटनीति के दांव-पेंच से इतर इन दोनों देशों की असली ताकत उनका ऐतिहासिक जुड़ाव है. भारत के प्राचीन साहित्य और पुराने प्रशासनिक कामकाज पर फारसी भाषा की गहरी छाप रही है. भारतीय उपमहाद्वीप में सूफीवाद के विस्तार का बड़ा श्रेय ईरान को जाता है. इतिहास गवाह है कि कई महान सूफी संतों ने ईरान की धरती से ही चलकर भारत का रुख किया था.

Holi Vastu Tips For Home: होलिका दहन के तारीख का कंफ्यूजन खत्म, लेकिन होली से पहले घर से हटा लें ये चीजें…

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होली के त्योहार को लेकर उत्साह बढ़ने लग गया है. ये होली सिर्फ रंगों का त्योहार नहीं है, बल्कि यह जीवन में नई ऊर्जा का संचार करने वाला एक महत्वपूर्ण परिवर्तन का समय भी है.

हालांकि इस बार सबसे बड़ा कन्फ्यूजन यह है कि होलिका दहन 2 मार्च को किया जाए या 3 मार्च को. पारंपरिक पंचांगों में आमतौर पर 3 मार्च को ऑफिशियल तारीख बताया जाता है. ऋषिकेश पंचांग के अनुसार, पूर्णिमा तिथि 2 मार्च 5 बजकर 18 मिनट से शुरू हो रही है और 3 मार्च को शाम 5 बजकर 56 मिनट पर समाप्त होगी.

पंचांग के अनुसार, इस बार होलिका दहन का शुभ मुहूर्त 2 मार्च की रात 12 बजकर 15 मिनट से 2 बजकर 2 मिनट तक किया जा सकता है. यह समय एक घंटा 12 मिनट का है. होली के कंफ्यूजन को दूर करने के साथ ही लोगों को इस बात का भी ध्यान रखना है कि त्योहार से पहले उन्हें किस तरह की तैयारियां करनी हैं. दरअसल, वास्तु शास्त्र के अनुसार, इस पवित्र त्योहार के दौरान घर को बाहर से साफ करने के साथ-साथ घर के अंदर छिपी नकारात्मक ऊर्जा को दूर करना भी जरूरी है.

घर में जमा अनावश्यक चीजें हमारी एकाग्रता को कम कर सकती हैं और आर्थिक प्रगति में बाधा डाल सकती हैं. उदाहरण के लिए, घर में सूखे या मुरझाए पौधे रखना उदासी और विकास में रुकावट का संकेत माना जाता है. इसके बजाय, तुलसी या मनी प्लांट जैसे हरे-भरे पौधे लगाने से सकारात्मक ऊर्जा बढ़ती है. इसी तरह, पुराने और बेकार जूते जीवन की कठिनाइयों और संघर्षों को दर्शाते हैं इसलिए उन्हें घर से बाहर फेंक देना ही बेहतर है.

टूटे हुए शीशे घर से हटाएं

वास्तु के मुताबिक, घर में ऊर्जा का सुचारू प्रवाह सुनिश्चित करने के लिए टूटे हुए दर्पण या कांच की वस्तुओं को तुरंत हटा देना चाहिए क्योंकि ये अशुभ संकेत होते हैं. यदि पूजा कक्ष या घर के किसी कोने में देवी-देवताओं की मूर्तियां हों, तो ऐसी टूटी हुई मूर्तियों को कूड़ेदान में नहीं फेंकना चाहिए बल्कि आदरपूर्वक बहते पानी में विसर्जित कर देना चाहिए या किसी पुष्पवृंत वृक्ष की शाखा में रख देना चाहिए.

इसके अलावा, टूटे हुए मोबाइल फोन या टीवी जैसे इलेक्ट्रॉनिक सामान राहु ग्रह पर बुरा प्रभाव डाल सकते हैं और आर्थिक कठिनाइयों का कारण बन सकते हैं इसलिए इस बार होली से पहले घर से ऐसी प्रमुख अशुभ वस्तुओं को हटा दें और खुले मन से सौभाग्य और धन का स्वागत करें.

“PM Kisan: क्या होली से पहले खाते में आएंगे 2000 रुपये? ये है अपडेट”

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देश के नौ करोड़ से अधिक अन्नदाताओं की निगाहें एक बार फिर सरकार की तरफ टिक गई हैं. पिछली बार 19 नवंबर 2025 को किसानों के बैंक खातों में पीएम किसान सम्मान निधि की राशि पहुंची थी.

तब से लेकर आज तक, किसान अगली आर्थिक मदद की राह देख रहे हैं. फरवरी का महीना खत्म होने को है, लेकिन 22वीं किस्त का पैसा अब तक नहीं मिला है.

कब मिल सकती है खुशखबरी?

आज 28 फरवरी है और महीने का आखिरी दिन भी. कई किसानों को उम्मीद थी कि शायद आज यह राहत राशि मिल जाए. मगर आज महीने का चौथा शनिवार है. इस कारण देशभर के सभी बैंक बंद हैं. पीएम किसान योजना का पैसा डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर यानी डीबीटी के माध्यम से सीधे किसानों के खातों में भेजा जाता है.

चूंकि बैंकिंग प्रणाली आज अवकाश पर है, इसलिए खातों में आज पैसे आने की गुंजाइश न के बराबर है. छुट्टी के दिन सरकारी स्तर पर इतनी बड़ी रकम के ट्रांसफर की प्रक्रिया आमतौर पर नहीं अपनाई जाती है. ऐसे में आज शनिवार को किसानों के बैंक खातों में 22वीं किस्त के दो-दो हजार रुपये क्रेडिट होने की कोई संभावना नजर नहीं आ रही है.

होली से पहले किस्त आने की कितनी है उम्मीद?

आज की निराशा के बाद अगला सवाल यह उठता है कि क्या होली के त्योहार से पहले यह पैसा किसानों को मिल पाएगा. अगर हम आने वाले दिनों के कैलेंडर पर नजर डालें, तो स्थिति स्पष्ट होने लगती है. एक मार्च को रविवार होने के कारण बैंकों में फिर से अवकाश रहेगा. इसके तुरंत बाद दो मार्च को उत्तर प्रदेश में बैंक बंद रहने वाले हैं.

तीन मार्च को भी देश के कई अन्य राज्यों में बैंकिंग कामकाज ठप रहेगा. इसके बाद चार मार्च को होली का बड़ा त्योहार है, जिस दिन देशभर में सार्वजनिक अवकाश होता है. लगातार पड़ रही इन बैंक छुट्टियों को देखते हुए यह साफ है कि होली से पहले किसानों को यह आर्थिक मदद मिलने के आसार बहुत ही कम दिखाई दे रहे हैं.

सरकार की चुप्पी से बढ़ रही चिंता

केवल लगातार छुट्टियां ही इसका एकमात्र कारण नहीं हैं. सबसे बड़ी बात यह है कि केंद्र सरकार की तरफ से अभी तक 22वीं किस्त जारी करने को लेकर कोई भी आधिकारिक तारीख घोषित नहीं की गई है. बिना किसी पूर्व सूचना और बैंकिंग सिस्टम के लगातार अवकाश पर होने के कारण, होली से पहले इस पैसे के आने की उम्मीद लगभग समाप्त हो चुकी है.

CG: सीएम हेल्पलाईन एकीकृत शिकायत निवारण प्रणाली से जनसामान्य की शिकायतों का होगा निराकरण…

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छत्तीसगढ़ शासन के सुशासन एवं अभिसरण विभाग की सीएम हेल्पलाईन के माध्यम से जनसामान्य की समस्याओं का निराकरण किया जाएगा। लोगों द्वारा विभिन्न माध्यमों से शिकायत दर्ज करायी जा सकेगी। इसमें दूरभाष, व्हाट्सएप, पोर्टल पर ऑनलाईन शिकायत दर्ज करायी जा सकेगी।

मुख्यमंत्री के जनदर्शन में प्राप्त शिकायतों के आवेदनों निराकरण भी सीएम हेल्पलाईन से किया जा सकेगा एवं जिलों में कलेक्टर द्वारा जनदर्शन में प्राप्त शिकायतों को भी सीएम हेल्पलाईन में दर्ज किया जाएगा।

आज यहां मंत्रालय महानदी भवन में सुशासन एवं अभिसरण विभाग के सचिव श्री राहूल भगत की अध्यक्षता में सीएम हेल्पलाईन योजना हेतु नामांकित विभिन्न विभागों के नोडल अधिकारियों एवं सहायक नोडल अधिकारियों का प्रशिक्षण सह बैठक का आयोजन किया गया। प्रशिक्षण में तकनीकी सपोर्ट टीम द्वारा अधिकारियों को सीएम हेल्पलाईन के तहत कार्य करने का प्रेजेंटेशन के जरिये तकनीकी प्रशिक्षण दिया गया।

सुशासन एवं अभिसरण विभाग के सचिव श्री राहूल भगत ने बताया कि मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के मंशानुसार छत्तीसगढ़ राज्य में जनसामान्य की शिकायतों का निराकरण शीघ्रता से हो, इसके लिए सीएम हेल्पलाईन एकीकृत शिकायत निवारण प्रणाली के माध्यम से शिकायतों को पंजीकृत कर निर्धारित समय-सीमा मंे समस्याओं का निराकरण होगा।

इसके लिए अधिकारियों की जिम्मेदारी तय की जाएगी कि वे प्राप्त शिकायतों का समयबद्ध निराकरण करें। राज्य शासन के विभागों के अंतर्गत प्राप्त शिकायतों को पंजीकृत किया जाएगा। इसकी जानकारी विभाग के सचिव को होगी।

विभागीय सचिव को यह जानकारी होगी की दर्ज शिकायत का निराकरण किस स्तर के अधिकारी द्वारा कर दिया गया है। यदि यह कार्य निर्धारित समय-सीमा में शिकायत का निवारण नहीं करते है तो उनकों उस शिकायत के निराकरण के संबंध में स्पष्ट हेल्पलाईन पर करना होगा।

सीएम हेल्पलाईन के माध्यम से एक प्लेटफार्म पर राज्य के विभिन्न क्षेत्रों से लोग अपनी शिकायत कर सकेंगे। शिकायत पंजीकृत कर संबंधित शिकायतकर्ता को एक यूनिक आईडी प्रदान किया जाएगा। जिसके माध्यम से वह अपनी समस्या के बारे में जानकारी प्राप्त कर सकेगा। बैठक सह प्रशिक्षण के इस कार्यक्रम में विभिन्न विभागों के अधिकारी-कर्मचारी शामिल हुए।

छत्तीसगढ़ का ‘संकल्प’ बजट विकसित राज्य का रोडमैप: वित्त मंत्री श्री ओपी चौधरी…

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वित्त मंत्री श्री ओपी चौधरी ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के बजट पर विधानसभा में सामान्य चर्चा का जवाब देते हुए कहा कि साय सरकार का तीसरा बजट ‘ज्ञान’ और ‘गति’ के बाद ‘संकल्प’ की रणनीति पर आधारित है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री के नेतृत्व में 2047 तक विकसित छत्तीसगढ़ का स्पष्ट रोडमैप तैयार किया गया है।

वित्त मंत्री श्री चौधरी ने कहा कि छत्तीसगढ़ की 3 करोड़ जनता से जुड़े मुद्दों को ध्यान में रखते हुए सरकार ने अपने पहले बजट को ‘ज्ञान’ को समर्पित किया था। दूसरे बजट में ‘गति’ की रणनीति अपनाई गई, जिसमें गुड गवर्नेंस, एक्सीलरेटिंग इंफ्रास्ट्रक्चर, टेक्नोलॉजी और इंडस्ट्रियल ग्रोथ के माध्यम से तीव्र आर्थिक विकास दर हासिल करने का लक्ष्य रखा गया। अब तीसरा बजट ‘संकल्प’ के माध्यम से समावेशी और समग्र विकास की दिशा तय करता है। उन्होंने कहा कि आर्थिक विकास का अंतिम लक्ष्य समाज के अंतिम छोर पर खड़े व्यक्ति, गरीब, युवा, अन्नदाता और नारी का उत्थान है। यही ‘ज्ञान के उत्थान’ की मूल भावना है।

2047 का विजन और दीर्घकालिक रणनीति

वित्त मंत्री ने कहा कि यशस्वी प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश ‘अमृतकाल’ में विकसित भारत की ओर अग्रसर है। इसी दिशा में छत्तीसगढ़ ने भी 2047 तक विकसित राज्य बनने का लक्ष्य निर्धारित किया है। लोगों की सहभागिता से ‘छत्तीसगढ़ 2047 विजन डॉक्यूमेंट’ तैयार किया गया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार अल्पकालिक, मध्यकालिक और दीर्घकालिक लक्ष्यों की समन्वित रणनीति के साथ कार्य कर रही है। वर्तमान बजट एक वर्षीय लक्ष्य के साथ 2047 के दीर्घकालिक लक्ष्य की कड़ी है।

विकसित भारत जी रामजी योजना: 4000 करोड़ का प्रावधान

वित्त मंत्री ने बताया कि विकसित भारत जी रामजी योजना के लिए 4000 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है, जो मनरेगा की तुलना में ऐतिहासिक वृद्धि है। उन्होंने कहा कि रोजगार के साथ-साथ ठोस परिसंपत्तियों के निर्माण पर विशेष ध्यान दिया जाएगा, ताकि योजनाओं का दीर्घकालिक प्रभाव सुनिश्चित हो।

कृषि और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती

कृषक उन्नति योजना के लिए 10,000 करोड़ रुपये, किसानों और भूमिहीन कृषि मजदूरों के लिए 600 करोड़ रुपये तथा विद्युत पंपों पर बिजली बिल सब्सिडी हेतु 5,500 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।

अधोसंरचना और औद्योगिक विकास

राज्य में 23 नए औद्योगिक पार्कों की स्थापना के लिए 250 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। मुख्यमंत्री नगर उत्थान योजना के लिए 450 करोड़ रुपये तथा मुख्यमंत्री आदर्श शहर समृद्धि योजना के लिए 200 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। राज्य की 36 सड़कों को मुख्यमंत्री सड़क संपर्क योजना से जोड़ा जाएगा, जिनमें न्यूनतम दो लेन सड़क का प्रावधान रहेगा। सीजी वायु योजना के माध्यम से बिलासपुर, अंबिकापुर और जगदलपुर सहित अन्य क्षेत्रों में हवाई कनेक्टिविटी को बढ़ावा दिया जाएगा। वित्त मंत्री ने कहा कि 1947 से 2014 तक जितने एयरपोर्ट बने, उससे अधिक एयरपोर्ट पिछले दशक में बने हैं और राज्य सरकार भी इस दिशा में सहयोग कर रही है।

शिक्षा, युवा और प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए पहल

छत्तीसगढ़ असिस्टेंस फॉर कॉम्पिटेटिव एग्जाम योजना के तहत ‘उड़ान’, ‘शिखर’ और ‘मंजिल’ घटकों के माध्यम से केंद्रीय और राज्य स्तरीय प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे युवाओं को आर्थिक सहायता दी जाएगी। अबूझमाड़ और जगरगुंडा में दो नई एजुकेशन सिटी स्थापित की जाएंगी। नए औद्योगिक पार्कों की स्थापना तथा लैंड बैंक के लिए भी बजट में प्रावधान किया गया है। मुख्यमंत्री स्टार्टअप एवं ‘निपुण’ योजना के माध्यम से नई पीढ़ी को औद्योगिक और तकनीकी रूप से सक्षम बनाने की दिशा में कदम उठाए गए हैं।

नक्सलवाद उन्मूलन और डबल इंजन सरकार

वित्त मंत्री श्री चौधरी ने कहा कि डबल इंजन सरकार का सबसे बड़ा प्रमाण नक्सलवाद के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई है। उन्होंने कहा कि पहले हर सप्ताह शहादत की खबरें आती थीं, लेकिन अब स्थिति में उल्लेखनीय सुधार हुआ है और लोकतांत्रिक प्रक्रिया में पूर्व नक्सली सदस्य भी शामिल हो रहे हैं।

सुदृढ़ वित्तीय प्रबंधन

वित्त मंत्री ने कहा कि राज्य ने जीएसटी संग्रह में देश में सर्वाधिक वृद्धि दर्ज की है। उन्होंने स्पष्ट किया कि उधारी एफआरबीएम अधिनियम के प्रावधानों के तहत जीएसडीपी के 3 प्रतिशत की सीमा में ही ली जाएगी और कुल ऋण जीएसडीपी के 25 प्रतिशत से नीचे रखा जाएगा। राज्य सरकार ने बेहतर वित्तीय प्रबंधन के तहत पूर्व में दी गई 30 हजार करोड़ रुपये से अधिक की शासकीय गारंटी को घटाकर लगभग 18 हजार करोड़ रुपये तक लाया है। कंसोलिडेटेड सिंकिंग फंड और गारंटी रिडेम्प्शन फंड में भी प्रावधान सुनिश्चित किया गया है, जिससे वित्तीय स्थिरता मजबूत होगी।

बस्तर और सरगुजा के लिए विशेष प्रावधान

बस्तर एवं सरगुजा अंचल के विकास के लिए अनेक महत्वपूर्ण घोषणाएं की गई हैं। बस्तर एवं सरगुजा विकास प्राधिकरण के लिए 75-75 करोड़ रुपये, बस्तर ओलंपिक्स के लिए 22 करोड़ रुपये तथा सरगुजा ओलंपिक्स के लिए 5 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। इंद्रावती नदी पर मटनार एवं देउरगांव बैराज निर्माण के लिए 2,024 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं। बस्तर नेट परियोजना हेतु 5 करोड़ रुपये तथा पशुपालन गतिविधियों के लिए 15 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। साथ ही 1,500 बस्तर फाइटर्स के पद सृजित किए जाएंगे।

शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं में वृद्धि

कुनकुरी, मनेंद्रगढ़ एवं दंतेवाड़ा में मेडिकल कॉलेज के संचालन के लिए 50 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। अबूझमाड़ और जगरगुंडा में एजुकेशन सिटी के निर्माण हेतु 100 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं। युवाओं के लिए दुर्ग, जशपुर, रायपुर, बलौदाबाजार और रायगढ़ के 5 शासकीय महाविद्यालयों में उत्कृष्टता केंद्र स्थापना हेतु 15 करोड़ रुपये तथा 25 महाविद्यालय भवनों के निर्माण हेतु 25 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। आईटीआई एवं पॉलिटेक्निक संस्थानों के अधोसंरचना उन्नयन के लिए 50 करोड़ रुपये तथा प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी हेतु विभिन्न योजनाओं के लिए 33 करोड़ रुपये रखे गए हैं।

शासकीय कर्मचारियों को कैशलेस चिकित्सा सुविधा

सरकारी कर्मचारियों के लिए कैशलेस चिकित्सा सुविधा प्रारंभ की जाएगी, जिससे उन्हें अस्पताल में तत्काल भुगतान की परेशानी और प्रतिपूर्ति की जटिल प्रक्रिया से राहत मिलेगी।

वित्त मंत्री ओपी चौधरी ने कहा कि ‘संकल्प’ बजट केवल आंकड़ों का दस्तावेज नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के भविष्य की चिंता और 2047 तक विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण का ठोस रोडमैप है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि यह बजट राज्य को नई विकास ऊंचाइयों तक ले जाएगा।

CG: होली से पहले अन्नदाताओं के चेहरे पर मुस्कान -कृषक उन्नति योजना के तहत 28 फ़रवरी को खातों में अंतर की राशि होगी अंतरित…

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कोरबा जिले के हजारों अन्नदाताओं के लिए 28 फ़रवरी का दिन विशेष महत्व’

खेतों में कड़ी मेहनत कर धान उत्पादन करने वाले किसानों को उनकी उपज का समुचित लाभ सुनिश्चित करते हुए छत्तीसगढ़ शासन द्वारा कृषक उन्नति योजना के अंतर्गत अंतर की राशि  सीधे उनके बैंक खातों में अंतरित की जा रही है।

होली पर्व से पूर्व यह आर्थिक संबल किसानों और उनके परिवारों के लिए खुशियों का संदेश लेकर आया है,  मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में प्रदेश सरकार किसानों की आय में वृद्धि और उन्हें आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। इसी कड़ी में धान  उपार्जन करने वाले किसानों को घोषित समर्थन मूल्य के अतिरिक्त अंतर की राशि प्रदान कर उनके परिश्रम का सम्मान किया जा रहा है।

कोरबा जिले के कुल 43 हजार 681 किसानों ने अब तक योजना का लाभ उठाया है। योजना के सफल क्रियान्वयन के फलस्वरूप, जिले में कुल 27 लाख 47 हजार 101.20 क्विंटल धान का उपार्जन किया गया है, जिसके एवज में किसानों के खातों में 20 हजार 081.31 लाख रुपये (लगभग 200.81 करोड़ रुपये) की बड़ी राशि हस्तांतरित की जाएगी।

विकासखंडवार आंकड़ों के अनुसार करतला विकासखंड इस योजना का लाभ लेने में सबसे आगे रहा है, जहाँ 13 हजार 358 किसानों ने 09 लाख 82 हजार 873.20 क्विंटल धान बेचकर 07 हजार 184.80 लाख रुपये की राशि, पाली विकासखंड में 10 हजार 157 किसानों को 05 लाख 53 हजार 834.80 क्विंटल धान के बदले 04 हजार 048.54 लाख रुपये का भुगतान, पोड़ीउपरोड़ा विकासखंड में 07 हजार 649 किसानों को 04 लाख 53 हजार 565.20 क्विंटल धान के एवज में 03 हजार 315.54 लाख रुपये का तथा कोरबा विकासखंड के 07 हजार 068 किसानों को 04 लाख 74 हजार 294 क्विंटल धान हेतु 03 हजार 467.10 लाख रुपये और कटघोरा विकासखंड के 05 हजार 449 किसानों को 02 लाख 82 हजार 534 क्विंटल धान के लिए 02 हजार 065.33 लाख रुपये की राशि प्रदान की जाएगी।

कृषक उन्नति योजना के माध्यम से न केवल किसानों को उनकी उपज का बेहतर मूल्य मिल रहा है, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी नई मजबूती मिल रही है।

CG: होली पर्व से पहले बस्तर जिले के किसानों को 205.95 करोड़ रुपए होंगे जारी…

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उप मुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा जगदलपुर में वृहद किसान सम्मेलन में होंगे शामिल’

अन्नदाताओं के लिए इस वर्ष की होली बेहद खास और खुशियों भरी होने जा रही है। आगामी 4 मार्च को मनाए जाने वाले होली के पावन पर्व से ठीक पहले प्रदेश सरकार कृषक उन्नति योजना के माध्यम से बस्तर जिले के किसानों की झोली खुशियों से भरने जा रही है।

शनिवार 28 फरवरी को जगदलपुर के वीर सावरकर भवन में आयोजित होने वाले वृहद किसान सम्मेलन में छत्तीसगढ़ के उपमुख्यमंत्री एवं बस्तर के प्रभारी मंत्री श्री विजय शर्मा की उपस्थिति में बस्तर जिले के 40,667 किसानों को 205.95 करोड़ रुपये की आदान सहायता राशि का वितरण किया जाएगा। त्यौहार से ठीक पहले मिल रही इस बड़ी राशि से बस्तर के ग्रामीण अंचलों में होली का उत्साह अभी से दोगुना हो गया है।

इस कार्यक्रम के माध्यम से किसानों के बैंक खातों में समृद्धि की गुलाल बिखेरी जाएगी। कार्यक्रम में वन मंत्री श्री केदार कश्यप, जगदलपुर विधायक श्री किरण देव, चित्रकोट विधायक श्री विनायक गोयल सहित अन्य जनप्रतिनिधिगण उपस्थित रहेंगे।

जिला सहकारी केंद्रीय बैंक मर्यादित जगदलपुर से मिली जानकारी के अनुसार शनिवार को मोटा धान पर 731 रुपए प्रति क्विंटल की दर से प्रोत्साहन राशि सीधे किसानों तक पहुँचाई जा रही है। त्यौहार के ठीक पहले मिलने वाली इस आर्थिक मजबूती से न केवल बाजारों में रौनक बढ़ेगी, बल्कि किसान अपने परिवार के साथ 4 मार्च की होली का जश्न पूरे उत्साह और उमंग के साथ मना सकेंगे।

CG: मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने किया ‘गुलाल’ होली विशेषांक का विमोचन…

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मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने आज छत्तीसगढ़ विधानसभा स्थित मुख्यमंत्री कार्यालय  में  ‘गुलाल’ होली विशेषांक का विमोचन किया। वरिष्ठ पत्रकार श्री जगजीत सिंह द्वारा प्रकाशित इस विशेषांक में होली पर्व के सांस्कृतिक, सामाजिक और साहित्यिक पक्षों को समाहित किया गया है।

मुख्यमंत्री श्री साय ने इस अवसर पर कहा कि होली केवल रंगों का त्योहार नहीं, बल्कि सामाजिक समरसता, भाईचारे और भारतीय परंपराओं की जीवंत अभिव्यक्ति का पर्व है। उन्होंने कहा कि ऐसे प्रकाशन हमारी लोकसंस्कृति और परंपराओं को नई पीढ़ी तक पहुँचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। मुख्यमंत्री ने इस रचनात्मक पहल के लिए प्रकाशक और उनकी टीम को बधाई दी।

इस अवसर पर स्वास्थ्य मंत्री श्री श्यामबिहारी जायसवाल, श्री दीपक विश्वकर्मा, श्री नदीम मेमन तथा श्रमजीवी गिल्ड फाउंडेशन के अध्यक्ष श्री आर.के. गांधी उपस्थित थे।

CG: स्वच्छ ऊर्जा, पर्यावरण संरक्षण और आधुनिक अधोसंरचना की दिशा में प्रदेश का सशक्त संकल्प है सिटी गैस परियोजना : मुख्यमंत्री श्री साय…

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मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने सिटी गैस अवसंरचना का किया शुभारंभ’

हरित छत्तीसगढ़, स्मार्ट छत्तीसगढ़ की दिशा में बड़ा कदम’

मेट्रो शहरों की तरह डोमेस्टिक पाइप्ड नेचुरल गैस  माध्यम से घरों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को मिलेगी गैस’

मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने आज राजधानी रायपुर के एक निजी होटल में सिटी गैस अवसंरचना परियोजना का शुभारंभ किया। इस अवसर पर उन्होंने सीएनजी युक्त वाहनों को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया और रायपुर नगर निगम की पहली पाइपलाइन गैस उपभोक्ता श्रीमती पूनम चौबे से संवाद कर घरेलू उपयोग में पाइपलाइन गैस की सुविधा के बारे में जानकारी ली।

मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ अपने गठन के 25 वर्ष पूरे कर रजत जयंती वर्ष मना रहा है और इन वर्षों में प्रदेश ने विकास के अनेक आयाम स्थापित किए हैं। सिटी गैस अवसंरचना परियोजना इस विकास यात्रा में एक नई उपलब्धि है। उन्होंने कहा कि यह पहल केवल नई सुविधा नहीं, बल्कि स्वच्छ ऊर्जा, पर्यावरण संरक्षण और आधुनिक अधोसंरचना की दिशा में प्रदेश का सशक्त संकल्प है।

मुख्यमंत्री ने बताया कि अब मेट्रो शहरों की तर्ज पर डीपीएनजी (डोमेस्टिक पाइप्ड नेचुरल गैस) के माध्यम से घरों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को पाइपलाइन से गैस उपलब्ध होगी। इससे घरेलू उपभोक्ताओं को रिफिलिंग की झंझट से मुक्ति मिलेगी और सुरक्षा भी बढ़ेगी। उन्होंने कहा कि सस्ती और सुलभ ऊर्जा मिलने से उद्योग क्षेत्र को भी गति मिलेगी तथा प्रदेश में निवेश की संभावनाएं सशक्त होंगी।

मुख्यमंत्री ने एचसीजी समूह को बधाई देते हुए अपेक्षा व्यक्त की कि वे रायपुर सहित बलौदाबाजार और गरियाबंद जिले में शीघ्र ही सीएनजी स्टेशनों का व्यापक नेटवर्क विकसित करेंगे। उन्होंने कहा कि वाहनों में सीएनजी के उपयोग से प्रदूषण में कमी आएगी और आम नागरिकों के ईंधन खर्च में भी राहत मिलेगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि हाल ही में प्रस्तुत राज्य बजट में अधोसंरचना विकास के लिए महत्वपूर्ण प्रावधान किए गए हैं। सरकार का लक्ष्य है कि शहरों से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों तक विश्वस्तरीय सुविधाएं उपलब्ध हों और प्रदेशवासियों को मेट्रो शहरों जैसी सुविधाओं का अनुभव हो। उन्होंने कहा कि विकास और पर्यावरण संरक्षण साथ-साथ चलें, इस दिशा में सरकार ग्रीन एनर्जी को प्राथमिकता दे रही है। उन्होंने प्रदेशवासियों से अपील की कि वे स्वच्छ ईंधन अपनाकर पर्यावरण संरक्षण में सहभागी बनें और हरित, विकसित एवं आत्मनिर्भर छत्तीसगढ़ के निर्माण में योगदान दें।

उल्लेखनीय है कि सिटी गैस अवसंरचना परियोजना रायपुर, बलौदाबाजार और गरियाबंद जिलों में प्रारंभ की गई है। इसके माध्यम से घरेलू उपयोग तथा व्यावसायिक प्रतिष्ठानों हेतु पाइपलाइन द्वारा पीएनजी की आपूर्ति की जाएगी तथा वाहनों के लिए सीएनजी भी उपलब्ध होगा। कार्यक्रम में एचसीजी समूह के प्रबंध निदेशक श्री राहुल चोपड़ा, निदेशक श्री राजीव माथुर, अध्यक्ष श्री दीपक सावंत, श्री राकेश रंजन, गैल इंडिया के प्रतिनिधि एवं उद्योग जगत के लोग उपस्थित रहे।