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बसंतपुर में निगम आयुक्त ने लिया सफाई और पानी की व्यवस्था का जायजा

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राजनांदगांव। शहर में साफ-सफाई और पानी की बेहतर व्यवस्था सुनिश्चित करने निगम आयुक्त अतुल विश्वकर्मा ने बसंतपुर क्षेत्र का सुबह निरीक्षण किया। उन्होंने स्वास्थ्य सेवाओं में गुणात्मक सुधार लाने के साथ ही अतिक्रमण हटाने और मलमा साफ करने के निर्देश अधिकारियों को दिए।

निरीक्षण के दौरान आयुक्त ने चैक चौराहे और डिवाइडर के आसपास जमा कचरा हटाने तथा नालियों और सड़कों पर अतिक्रमण हटाने की कार्यवाही करने के आदेश दिए। कोढीखाना जाने वाले रोड में पाइपलाइन लीक की शिकायत पर तुरंत मरम्मत कराने के निर्देश भी दिए गए।

आयुक्त ने कहा कि सफाई आवश्यक सेवा है और इसे ईमानदारी व नियमितता के साथ करना आवश्यक है। गली-मोहल्लों में सफाई निरीक्षण के दौरान सफाई कर्मियों से चर्चा कर उन्होंने कार्य में और सुधार करने की आवश्यकता जताई। साथ ही होटल और ठेले वालों को डस्टबिन का उपयोग करने और आसपास साफ-सफाई बनाए रखने की समझाईश दी।

बसंतपुर में डिवाइडर और चौराहों पर झाड़ू लगाकर कचरा उठाने तथा मलमा मंडप के तहत सामग्री रखने पर कार्रवाई करने के निर्देश भी दिए गए।

धीरी, अर्जुनी, कोटरासरार, भोथली रेत खदान की नीलामी संपन्न

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राजनांदगांव। छत्तीसगढ़ गौण खनिज साधारण रेत (उत्खनन एवं व्यवसाय) नियम के 2025 के तहत जिले के 4 रेत खदान धीरी, अर्जुनी, कोटरासरार, भोथली का नीलामी कार्यक्रम संपन्न हो गया है। रेत खदानों में पर्यावरण स्वीकृति प्राप्ति के बाद कार्य शुरू होगा। जिससे जिले में रेत की आपूर्ति आसानी से हो जाएगी।
सहायक खनि अधिकारी ने बताया कि जिले में वित्तीय वर्ष 2025-26 अंतर्गत खनिजों के अवैध उत्खनन, परिवहन, भंडारण पर प्रभावी नियंत्रण-रोकथाम की कार्रवाई करते हुए कुल 137 प्रकरण दर्ज किए गए है। जिससे कुल अर्थदण्ड 56 लाख 76 हजार 467 रूपए राजस्व प्राप्त हुई है। राज्य शासन द्वारा जिले को प्राप्त खनिज राजस्व आय लक्ष्य 517 लाख रूपए के विरूद्ध अब तक 338 लाख रूपए खनिज राजस्व प्राप्त हुआ है।

प्रेरणा जो बनी मिसाल : प्राकृतिक खेती से बनीं लखपति किसान महिलाएं

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राजनांदगांव। विकासखंड के ग्राम मोखला और भर्रेगांव की कृषि सखियों ने प्राकृतिक खेती को अपनाकर न केवल अपने गांव को रसायन मुक्त बनाने की पहल की है, बल्कि आर्थिक समृद्धि की नई राह भी बनाई है। प्रयास एवं उन्नति स्वसहायता समूह की महिलाओं ने जीवामृत, धनामृत, आग्नेयास्त्र, ब्रहास्त्र, निमास्त्र, दशपर्णी अर्क जैसे जैव उत्पाद तैयार कर किसानों को उपलब्ध कराए।
कृषि विभाग के माध्यम से प्रशिक्षित इन महिलाओं ने गांव में जैव आदान विक्रय केंद्र (बीआरसी) स्थापित कियाए जहां उच्च गुणवत्ता की जैविक सामग्री किसानों को न्यूनतम दर पर उपलब्ध कराई जा रही है। इससे किसान खेतों में कीट और बीमारियों की रोकथाम के लिए रसायनों की जगह जैव उत्पादों का उपयोग कर रहे हैं।
महिला समूह की नवाचारी पहल को देखते हुए कृषि विभाग ने उन्हें राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन योजना से जोड़ा और 375 एकड़ क्षेत्र में क्लस्टर तैयार कर जैव आदान सामग्री उपलब्ध कराने का जिम्मा सौंपा। समूह की महिलाएं ग्राम धामनसरा, ढोडिया, भोडिया, मोखला, भर्रेगांव, बांकल और पनेका में किसानों को बोवाई से लेकर कटाई तक जैविक सामग्री वितरण कर रही हैं।
इस खरीफ सीजन में प्रत्येक समूह ने लगभग 1 लाख रुपये की आमदनी अर्जित की है। समूह की अध्यक्ष श्रीमती नीतू चंद्राकर ने बताया कि प्राकृतिक खेती के लिए जैव सामग्री तैयार करना उनके लिए गर्व और संतोष का विषय है। उन्होंने कहा कि वह अन्य महिलाओं को भी जोड़कर बायो इनपुट रिसोर्स सेंटर को और बड़ा करना चाहती हैं, ताकि अधिक से अधिक किसान इसका लाभ उठा सकें।
यह पहल साबित करती है कि ग्रामीण महिलाएं नवाचार और मेहनत के दम पर आर्थिक समृद्धि और स्वस्थ खेती दोनों संभव बना सकती हैं।

धान खरीदी अभियान से किसानों में हर्ष, अब तक 1918140 क्विंटल धान खरीदी

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राजनांदगांव। जिले में धान खरीदी महाभियान से किसानों में हर्ष का माहौल है। खरीफ विपणन वर्ष 2025.26 के अंतर्गत शासन द्वारा समर्थन मूल्य और कृषक उन्नति योजना के तहत 3100 रुपये प्रति क्विंटल की दर और प्रति एकड़ 21 मि्ंटल तक के मान से धान खरीदी की जा रही है।
कलेक्टर जितेन्द्र यादव के निर्देशन में धान खरीदी को सुचारू संचालन हेतु सभी आवश्यक व्यवस्थाएँ की गई हैं। इलेक्ट्रॉनिक तौल मशीन, पेयजल, छांव, बायोमैट्रिक डिवाइस, श्रमिक व्यवस्था और आर्द्रता मापी यंत्र से धान का परीक्षण सुनिश्चित किया जा रहा है। जिले के सभी 96 धान खरीदी केन्द्रों में खरीदी दर और सूची के साथ फ्लेक्स लगाकर किसानों की सुविधा सुनिश्चित की गई है।
कलेक्टर ने धान खरीदी केन्द्रों की सतत निगरानी और कोचियों-बिचौलियों द्वारा अवैध खरीदी पर सख्त कार्रवाई के निर्देश भी दिए हैं। किसान तुंहर हाथ मोबाइल एप के माध्यम से टोकन प्राप्त कर धान बिक्री कर समय और सुविधा दोनों पाकर खुश हैं।
अब तक जिले में 37824 पंजीकृत किसानों से 1918140 मि्ंटल धान खरीदा जा चुका है, जिसका मूल्य 455 करोड़ 57 लाख रुपये है। धान का उठाव भी लगातार जारी है और अब तक 89860 मि्ंटल धान उपार्जन केन्द्रों से उठाया जा चुका है।

कलेक्टर से युवोदय स्वयंसेवियों ने की सौजन्य भेंट

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राजनांदगांव। कलेक्टर जितेन्द्र यादव से युवोदय स्वयंसेवियों ने कलेक्टोरेट में सौजन्य भेंट की। कलेक्टर को युवोदय स्वयंसेवियों द्वारा किए जा रहे कार्यों की जानकारी दी गई। कलेक्टर ने युवोदय वालंटियर द्वारा किए जा रहे कार्यों की सराहना की एवं उन्हें शुभकामनाएं दी।

प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना बनी गर्भवती और शिशुवती माताओं के लिए वरदान

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राजनांदगांव। भारत सरकार की प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना ने जिले की गर्भवती और शिशुवती माताओं के स्वास्थ्य और पोषण स्तर में सुधार के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। योजना के तहत गर्भवती महिलाओं को प्रसव के दौरान और शिशुवती माताओं को आर्थिक सहायता प्रदान की जाती है, ताकि वे अपने और अपने शिशु के स्वास्थ्य पर बेहतर ध्यान दे सकें।
जिले में योजना के दो वर्षों में लगभग 12,100 महिलाएं लाभान्वित हुई हैं। योजना के तहत प्रथम जीवित संतान के लिए पहली किस्त के रूप में 3,000 रुपये और बच्चे के जन्म का पंजीकरण एवं आवश्यक टीकाकरण पूरा होने पर 2,000 रुपये की दूसरी किस्त दी जाती है। वहीं दूसरी संतान के रूप में बालिका जन्म होने पर 6,000 रुपये की एकमुश्त राशि प्रदान की जाती है।
प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना का लाभ उन महिलाओं को मिलता है जो 19 वर्ष या उससे अधिक आयु की हैं और केंद्र या राज्य सरकार के अधीन शासकीय नौकरी में नहीं हैं। इच्छुक महिलाएं अपना पंजीकरण निकटस्थ आंगनवाड़ी केंद्र या मोबाइल एप के माध्यम से कर सकती हैं।
विस्तृत जानकारी के लिए महिला एवं बाल विकास विभाग के दूरभाष नंबर 9406136904 और 7804905439 तथा नेशनल हेल्पलाइन 1515 पर संपर्क किया जा सकता है।

नन्हें कदमों की बड़ी उड़ान, बाल प्रतिभाओं ने दिखाई शानदार खेल क्षमता

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छुरिया। ग्रामीण अंचल की मिट्टी में खेल का जोश और नन्हें कदमों की चमक से भंडारपुर दो दिनों तक उत्साह और उमंग से सराबोर रहा। दो दिवसीय संकुल स्तरीय बालक्रीड़ा प्रतियोगिता का समापन गुरूवार को मुख्य अतिथि जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती किरण रविन्द्र वैष्णव की उपस्थिति में हुआ। इस अवसर पर जिला पंचायत सभापति श्रीमती बिरम मंडावी, जनपद पंचायत छुरिया सभापति श्रीमती उत्तरा निषाद और ग्राम के सरपंच श्रीमती सीमा चंद्रवंशी सहित अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।
समापन समारोह में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले नन्हें खिलाड़ियों को मुख्य अतिथि द्वारा पुरस्कार प्रदान किए गए। बच्चों की आँखों में चमक, चेहरे पर मासूम मुस्कान और सपनों की फुहार ने सभी का मन जीत लिया। प्रतियोगिता में दौड़, कबड्डी, खो-खो, लंबी कूद, रस्साकस सहित अन्य खेलों में बाल प्रतिभाओं ने बेहतरीन प्रदर्शन किया।
मुख्य अतिथि श्रीमती किरण रविन्द्र वैष्णव ने अपने उद्बोधन में कहा, इन बच्चों की प्रतिभा और मेहनत भविष्य में बड़ी उड़ान का आधार बनेगी। गाँव की यही नई पीढ़ी कल के मजबूत समाज और उज्ज्वल भारत का स्वरूप गढ़ेगी। भंडारपुर ने इस आयोजन में बच्चों की देखभाल, भोजन और व्यवस्थाओं को आत्मीयता, अनुशासन और समर्पण के साथ संभाला, जो अत्यंत प्रशंसनीय है।
उन्होंने यह भी कहा कि शिक्षक और शिक्षकाएं बच्चों के सपनों को दिशा देते हैं और उनकी मेहनत इस आयोजन की असली पूँजी है। संकुल क्षेत्र के शिक्षक-शिक्षिकाओं ने प्रशिक्षण से लेकर आयोजन की व्यवस्थाओं तक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
इस अवसर पर ग्राम पंचायत प्रतिनिधि, पूर्व सरपंच, उपसरपंच और शाला प्रबंधन समिति के सदस्य भी उपस्थित रहे। प्रतियोगिता ने बच्चों को केवल खेल का मंच ही नहीं दिया, बल्कि उनमें आत्मविश्वास, टीम भावना, अनुशासन और नेतृत्व क्षमता जैसे गुण भी विकसित किए।

नवनिर्मित कन्या छात्रावास जर्जर, छात्राओं की सुरक्षा पर उठे सवाल

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मानपुर। नवागांव औंधी में 152.97 लाख रुपए की लागत से बने प्री-मैट्रिक अनुसूचित जनजाति कन्या छात्रावास की स्थिति गंभीर रूप से चिंताजनक है। भवन में दरारें पड़ गई हैं, प्लास्टर उखड़ रहा है और छत से पानी का सीपेज हो रहा है। इस वजह से छात्राओं की सुरक्षा पर ग्रामवासी और अभिभावक सवाल उठा रहे हैं।
जानकारी के अनुसार, दूरस्थ अंचल में छात्रावास के नाम पर भारी भ्रष्टाचार की आशंका जताई जा रही है। निर्माण एजेंसी के भ्रष्टाचार का परिणाम यह है कि नए बने भवन में ही कई कमियाँ दिख रही हैं। पहले यह छात्रावास उधारी के पुराने भवन में संचालित हो रहा था, जहां सीमित संसाधनों में छात्राएं मुश्किल से रहती थीं। अब लाखों की लागत से सर्व सुविधायुक्त भवन तो मिल गया है, लेकिन निर्माण की खराब गुणवत्ता और सीपेज से बच्चों की सुरक्षा को खतरा है।
स्थानीय लोग और ग्रामवासी आरोप लगा रहे हैं कि उच्च अधिकारियों और शासन ने अब तक भ्रष्टाचार रोकने और व्यवस्था सुधारने में कोई सार्थक कदम नहीं उठाया, यही वजह है कि निर्माण एजेंसियां बेलगाम हो गई हैं और विकास कार्य भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ रहे हैं।

इंदिरा कला संगीत विश्वविद्यालय को केंद्रीय विश्वविद्यालय बनाने की मांग, सांसद संतोष पांडे ने संसद में उठाया मुद्दा

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खैरागढ़। संसद सत्र में गुरुवार को खैरागढ़ के इंदिरा कला संगीत विश्वविद्यालय को केंद्रीय विश्वविद्यालय का दर्जा देने की जोरदार मांग उठी। राजनांदगांव के सांसद संतोष पांडे ने इसे लेकर संसद में आवाज बुलंद की। उन्होंने कहा कि यह विश्वविद्यालय न सिर्फ छत्तीसगढ़ बल्कि पूरे देश और विश्व की सांस्कृतिक धरोहर का प्रतीक है, जिसे उचित मान-सम्मान मिलना चाहिए।

सांसद पांडे ने बताया कि खैरागढ़ स्थित यह विश्वविद्यालय शास्त्रीय संगीत को समर्पित एशिया का पहला विश्वविद्यालय है। यहाँ कथक, भरतनाट्यम, लोक संगीत समेत अनेक विधाओं की शिक्षा दी जाती है और विदेशों से भी छात्र-छात्राएँ अध्ययन के लिए आते हैं। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय की वैश्विक स्तर पर बड़ी प्रतिष्ठा है, लेकिन अब तक इसे वह मान-सम्मान नहीं मिला, जिसका यह हकदार है।

सांसद ने आगे कहा कि यह विश्वविद्यालय 14 अक्टूबर 1956 को स्थापित हुआ था और तब से भारतीय कला-संगीत की विरासत को आगे बढ़ाने का कार्य कर रहा है। उन्होंने पीठासीन अध्यक्ष के माध्यम से केंद्र सरकार से आग्रह किया कि इसे केंद्रीय विश्वविद्यालय का दर्जा दिया जाए, ताकि इसकी अंतरराष्ट्रीय पहचान और अधिक मजबूत हो सके।

संतोष पांडे ने स्पष्ट किया, “मैं यही निवेदन करने के लिए खड़ा हुआ हूँ कि इंदिरा कला संगीत विश्वविद्यालय को केंद्रीय विश्वविद्यालय घोषित किया जाए। यह हमारे देश की सांस्कृतिक समृद्धि और गौरव का केंद्र है।”

सांसद की इस मांग के बाद छत्तीसगढ़ के सांस्कृतिक और शैक्षणिक जगत में भी चर्चा तेज हो गई है। विशेषज्ञ मानते हैं कि अगर यह दर्जा मिलता है तो खैरागढ़ का कला-संगीत शिक्षा में महत्व और भी बढ़ जाएगा।

एग्जाम फॉर्म की गड़बड़ी पर एबीवीपी का हस्तक्षेप, छात्रों के भविष्य की लड़ाई तेज

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राजनांदगांव। विश्वविद्यालय की ऑनलाइन परीक्षा प्रक्रिया में आई गंभीर तकनीकी बाधाओं के चलते शासकीय शिवनाथ साइंस महाविद्यालय एवं कमला देवी राठी कन्या महाविद्यालय के अनेक विद्यार्थी इस वर्ष परीक्षा फॉर्म भरने से वंचित हो रहे हैं। मध्य सेमेस्टर में महाविद्यालय बदलने वाले इन विद्यार्थियों के नाम अभी भी विश्वविद्यालय पोर्टल पर उनके पुराने महाविद्यालय के साथ दर्ज हैं, जिसके चलते नया महाविद्यालय उन्हें परीक्षा फॉर्म भराने में सक्षम नहीं हो पा रहा है। स्थिति छात्रों के शैक्षणिक भविष्य पर सीधा असर डाल रही है।
समस्या को गंभीर मानते हुए अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) ने शुक्रवार को कुलपति, उच्च शिक्षा अधिकारी एवं उच्च शिक्षा मंत्री को ज्ञापन सौंपा। परिषद ने विश्वविद्यालय की तकनीकी व प्रशासनिक लापरवाही को जिम्मेदार ठहराते हुए तत्काल सुधारात्मक कदम उठाने की मांग की।
परिषद ने ज्ञापन में स्पष्ट कहा है कि विश्वविद्यालय पोर्टल पर महाविद्यालय परिवर्तन (मिग्रेसन/ट्रांसफर) को प्राथमिकता देते हुए विद्यार्थियों के कॉलेज नाम का अद्यतन तत्काल किया जाए। साथ ही मांग की गई कि त्रुटि दूर होने तक प्रभावित विद्यार्थियों को अस्थायी रूप से परीक्षा फॉर्म भरने की अनुमति प्रदान की जाए, ताकि कोई भी छात्र परीक्षा से वंचित न हो।
एबीवीपी ने अतिरिक्त सुझाव देते हुए विश्वविद्यालय में विशेष तकनीकी सेल की स्थापना, पोर्टल पर रीयल-टाइम डेटा अपडेट, पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता तथा प्रत्येक महाविद्यालय के लिए नोडल अधिकारी नियुक्त करने की आवश्यकता पर जोर दिया।
नगर मंत्री अक्षत श्रीवास्तव ने कहा, परीक्षा के दौर में विद्यार्थियों को तकनीकी परेशानियों से गुजरना पड़े, यह अत्यंत चिंताजनक है। छात्रों का भविष्य सर्वोपरि है। यदि समय पर समाधान नहीं हुआ, तो परिषद आंदोलन के लिए भी तैयार है।
नगर सहमंत्री भूपेंद्र पाल ने कहा, तकनीकी त्रुटि होने के बावजूद इसका असर विद्यार्थियों के पूरे वर्ष पर पड़ रहा है। विश्वविद्यालय को तत्काल दुरुस्ती करनी चाहिए।
ज्ञापन सौंपने के दौरान नगर एसएफडी प्रमुख कुलदीप पाल, नगर कार्यकारिणी सदस्य त्रिलोक, विकास, राहुल, रोहन सहित दोनों महाविद्यालयों के विद्यार्थी उपस्थित रहे। सभी ने समस्या को गंभीर बताते हुए शीघ्र समाधान की मांग की।
अंत में एबीवीपी ने विश्वविद्यालय प्रशासन से आग्रह किया है कि वह विद्यार्थियों के हित में त्वरित, प्रभावी और स्थायी समाधान सुनिश्चित करें।