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प्रेग्‍नेंसी में इस डाइट को लेने से बच्चे को मिलेगा बेहतर स्वास्थ्य

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प्रेग्‍नेंसी हर महिला के जीवन का एक सबसे अविस्मरणीय दौर होता है. इस दौरान एक ओर जहां शरीर रोज नई चुनौती देता है वहीं दूसरी और मन में कई तरह की शंकाएं भी उत्पन्न होती हैं कुछ भी खाने से पहले सौ बार सोचा और कई लोगों से पूछा जाता है कि इसे खाया जाए या नहीं आईए हम आपको बताते हैं कि प्रेग्‍नेंसी में आपकी डाइट कैसी होनी चाहिए.

मल्‍टी ग्रेन: मल्‍टी ग्रेन आहार उन महिलाओं के लिए बहुत जरूरी हो जाता है, जो मांसाहर नहीं करतीं ऐसे में उनके पास यह प्रो‍टीन का सबसे अच्‍छा सोर्स होता है|

ड्राई फ्रूट्स: गर्भावस्‍था के दौरान प्रो‍टीन और डीएचए के लिए आप रात को मेवे भिगो कर उन्‍हें सुबह खा सकती हैं|अखरोट में काफी मात्रा में डीएचए पाया जाता है जोकि बच्‍चे के दिमाग के विकास में बहुत जरूरी होता है|

डेयरी उत्पाद: प्रेग्‍नेंसी में स्किम्ड दूध, पनीर, दही, छाछ या दूध से बने उत्‍पादों को भरपूर मात्रा में खाना चाहिए इनसे प्रेग्‍नेंट महिला को जरूरत के अनुसार कैल्शियम, प्रोटीन और विटामिन बी -12 मिल जाते हैं अगर आपको दूध या दूध से बने उत्‍पादों से किसी तरह की परेशानी होती है, तो अपनी डॉक्‍टर से इसका विकल्‍प जरूर पता करें|

सब्जियां: प्रेग्‍नेंसी में आम दिनों से कहीं अधिक आयरन की जरूरत पड़ती है और और यह जरूरत पूरी होती है हरी पत्तेदार सब्जियों से इसलिए गर्भावस्‍था में जितनी ज्‍यादा हो सके हरी सब्जियां खानी चाहिए| 
मांसाहार: मीट, अंडे, चिकन और मछली प्रेग्‍नेंसी में आपकी बहुत सी जरूरतों को पूरा करती हैं इनमें जहां प्रोटीन भारी मात्रा में होता है वहीं फॉलिक एसिड भी खूब मिलता है|

लिक्विड: गर्भावस्‍था में पेय पदार्थों का अहम रोल होता है इस दौरान शरीर को पूरी तरह से हाइड्रेट रखन जरूरी है ताजा फलों का जूस, नारियल पानी अपनी दिनचर्या में शामिल करें कोशिश करें कि जूस घर पर ही निकाल कर पीएं डिब्‍बा बंद जूस या ड्रिंक्‍स से परहेज ही करें|

ध्‍यान रखें: अगर आप उन महिलाओं में से हैं, जो अपने वजन को लेकर बेहद सजग रहती हैं, तो आपको इस बात का खास ध्‍यान रखना चाहिए कि आपको आहार में कैसे पदार्थों को शामिल करना है अपने आहार में ज्‍याद कार्बोहाइड्रेट वाले पदार्थों को शामिल न करें कार्बस सिर्फ आपका वजन बढ़ाएंगे और पेट भरेंगे अगर आप चाहती हैं कि ज्‍यादा मोटा हुए बिना आप एक स्‍वस्‍थ बच्‍चे को जन्‍म दें, तो ऐसा आहार खाएं जिसमें फॉलिक एसिड, प्रो‍टीन और आयरन जो यही वो चीजें हैं, जिनकी आपके बच्‍चे को जरूरत है|

RBI से सरकार का पैसा लेना, कितना सही-कितना गलत

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जब अर्थव्यवस्था की रफ़्तार सुस्त हो रही है, नौकरियां जा रही हैं, लोग कम खर्च कर रहे हैं, रियल स्टेट और ऑटो सेक्टर की हालत खस्ता है ऐसे में सरकार के लिए आरबीआई का ये फ़ैसला काफ़ी राहत देने वाला होगा.

ये फ़ैसला 2018 में पूर्व आरबीआई गवर्नर विमल जालान की अध्यक्षता में बनाई गई एक समिति के सिफ़ारिशों के आधार पर किया गया है.

इस समिति में विमल जालान के अलावा पूर्व उप गवर्नर डॉक्टर राकेश मोहन, आरबीआई सेंट्रल बोर्ड डायरेक्टर भरत दोशी, आरबीआई सेंट्रल बोर्ड डायरेक्टर सुधीर मानकड, सुभाष चंद्र गर्ग और आरबीआई उप गवर्नर एनएस विश्वनाथन शामिल थे.

मोटे तौर पर समझें कि रिज़र्व बैंक अपने दो रिज़र्व से एक बड़ी रक़म केंद्र सरकार को देगी.

क्या आरबीआई कमज़ोर होगा?

इस 1.76 लाख करोड़ में से लाभांश 1.2 लाख करोड़ का होगा जबकि क़रीब 52 हज़ार करोड़ कंटिंजेंसी रिज़र्व में से आएंगे. कंटिंजेंसी रिज़र्व मतलब इमर्जेंसी के दौरान इस्तेमाल होने वाली धनराशि के लिए फंड.

कई बार मनी मार्केट में एक बड़े पेमेंट के रुकने से असर कई जगहों पर पड़ता है और इससे भुगतान के रुकने का एक सिलसिला यानी एक चेन सी बन जाती है. ऐसी स्थितियों के लिए कंटिंजेंसी रिज़र्व होना ज़रूरी होता है.

दरअसल, हर साल रिज़र्व बैंक सरकार को लाभांश देती है और अर्थशास्त्रियों के मुताबिक़ इसमें कोई हर्ज़ नहीं क्योंकि आरबीआई सरकार की एजेंसी है.

कई सालों से सरकार में ये बात चल रही थी कि आरबीआई के पास ज़रूरत से ज़्यादा पैसे इकट्ठा हो रहे हैं और हर साल आरबीआई सरकार को जो डिविडेंड या लाभांश देती है उसे बढ़ाना चाहिए.

पूर्व चीफ़ इकोनॉमिक एडवाइज़र अरविंद सुब्रमण्यम भी इसका समर्थन करते थे. उनका मानना था कि आरबीआई के 4.5 से 7 लाख करोड़ रुपए एक्स्ट्रा कैपिटल है जिसका इस्तेमाल बैंकों को रीकैपिटलाइज़ करने या उन्हें आर्थिक तौर पर बेहतर स्थिति में लाने के लिए करना चाहिए.

इस बारे में अर्थशास्त्रियों, बैंक अधिकारियों की राय बँटी थी. कुछ का मानना था कि इससे केंद्रीय बैंक की स्थिति कमज़ोर होगी.

क्या इस पैसे का इस्तेमाल वेतन देने में होगा?

इस बार लाभांश क़रीब 1.2 लाख करोड़ का है, यानी पिछली बार के सबसे ज़्यादा लाभांश का दोगुना.

साल 2017-18 में ये आंकड़ा 40,659 रुपए करोड़ था, साल 2016-17 में 30,659 करोड़ रुपए और साल 2015-16 में 65,876 करोड़ रुपए.

इसलिए चिंता ये है कि क्या सरकार रिज़र्व बैंक से बहुत ज़्यादा पैसा निकाल रही है.

कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने ट्वीट कर कहा, “ख़ुद पैदा की गई आर्थिक तबाही का क्या उपाय निकाला जाए, इस बारे में प्रधानमंत्री और वित्त मंत्री को कुछ नहीं पता. आरबीआई से चोरी करके कुछ हासिल नहीं होगा. ये कुछ ऐसा है कि गोली की चोट के लिए डिस्पेंसरी से बैंड एड चोरी करना.”

सवाल ये है कि सरकार इतनी बड़ी धनराशि का कैसे इस्तेमाल करेगी? क्या इसका एक हिस्सा बैंकों की आर्थिक तौर पर मज़बूत बनाने के लिए किया जाएगा?

अर्थशास्त्री पूजा मेहरा के हिसाब से अच्छा होता कि इस पैसे का इस्तेमाल मूलभूत सुविधाओं के सुधार के लिए होता.

वो कहती हैं, “मेरे हिसाब से इस पैसे का सबसे अच्छा इस्तेमाल होगा अगर ये कैपिटल एक्पेंडीचर में हो, यानी इससे मूलभूत सुविधाओं में सुधार हो, सड़कें बनें, हाइवेज़, रेलवेज़ बनें. इसका खर्च इंटरेस्ट पेमेंट में न हो, तन्ख्वाहें देने में न हो. ऐसा करने से इससे अर्थव्यवस्था को फ़ायदा पहुंचेगा और हमारे स्लोडाउन से उबरने से आसार बेहतर होंगे.”

लेकिन ऐसा शायद ही हो क्योंकि सरकार के पास ये धनराशि ऐसे वक़्त आई है जब अर्थव्यवस्था की रफ्तार धीमी हो रही है, लोगों की नौकरियां जा रही हैं और ऑटो में हालात चुनौतीपूर्ण हैं.

अगले साल क्या होगा?

अर्थशास्त्री विवेक कौल कहते हैं कि इस बार बजट ने जितनी आमदनी आने का आकलन किया था, वो तो आने वाले है नहीं, “इसलिए सरकार के लिए ज़रूरी हो गया था कि कहीं से पैसा आए.”

वो कहते हैं, “सरकार किस्मतवाली है कि उनके पास आरबीआई से इतना ज़्यादा पैसा आ रहा है, नहीं तो उसे दिक्कत होती. या तो उन्हें खर्च घटाना पड़ता, या तो और कर्ज़ लेना पड़ता जिससे ब्याज़ दर और बढ़ती.”

लेकिन महत्वपूर्ण सवाल ये है कि इस साल तो आरबीआई से पैसा आ गया है लेकिन अगले साल क्या होगा, क्योंकि शायद ही कोई सरकार हो जिसका खर्च कभी कम नहीं होता है.

विवेक कौल के मुताबिक, “जिस किस्म के स्लोडाउन में अभी हम हैं, मुझे तो नहीं लगता कि ये स्लोडाउन जल्दी ख़त्म होने नहीं वाला है. अगले साल अगर ऐसी ही कुछ हालत रही और टैक्स कलेक्शन धीमा ही रहे, तो फिर पैसा कहां से आएगा. उस हिसाब से ये (आरबीआई से इतनी बड़ी धनराशि लेना) ग़लत उदाहरण है.”

वो कहते हैं, “अभी तक सरकार के पैसे नहीं होते थे तो कभी एलआईसी से जुगाड़ करके, ओएनजीसी ने एचपीसीएल को ख़रीदा जैसी तिकड़मबाज़ी करके काम चलता था. अब आप आरबीआई के आगे कहां जाएंगे.”

आरबीआई की स्वायत्तता पर सवाल

अर्थशास्त्री पूजा मेहरा के मुताबिक़, सरकार की कोशिश होनी चाहिए थी कि अर्थव्यवस्था को ठीक किया जाए.

वो कहती हैं, “हर चीज़ में एक बैलेंस होना चाहिए. सरकार इतनी ज़्यादा आक्रामक तरीक़े से (पब्लिक सेक्टर कंपनियों आदि से) पैसे निकाल रही है वो शायद ठीक नहीं है, क्योंकि अगर उन कंपनियों में पैसा रहता तो अर्थव्यवस्था के लिए अच्छा होता. ये कंपनियां प्रोजेक्ट्स लगातीं, निवेश करतीं, और जीडीपी को फ़ायदा होता. ओएनजीसी जैसी कंपनियों को कमज़ोर करना अच्छी रणनीति नहीं है.”

विमल जालान समिति ने ये भी सिफ़ारिश की थी कि ख़तरों से निपटने के लिए आरबीआई के पास अपनी बैलेंसशीट के 5.5 से 6.5 फ़ीसदी रक़म होनी चाहिए, यानी चुनौतियों से निपटने के लिए आरबीआई के पास कम धनराशि होगी.

पूर्व चीफ़ स्टैटिशियन ऑफ़ इंडिया प्रोनब सेन के मुताबिक, अगर ये रेंज 6 से 6.5 होती तो उन्हें “ज्यादा ख़ुशी होती.”

पूर्व आरबीआई गवनर रघुराम राजन और उर्जित पटेल के जाने के बाद सवाल उठते रहे हैं कि आरबीआई अपने फ़ैसले लेने में कितनी स्वायत्त है.

कहीं ये सेल्फ़ गोल तो नहीं?

आरबीआई के पूर्व उप गवर्नर विरल आचार्य ने पिछले अक्टूबर में कहा था कि केंद्रीय बैंक की स्वायत्तता को कमज़ोर करना सेल्फ़ गोल जैसा है.

हाल ही में पूर्व आरबीआई गवर्नर डी सुब्बाराव ने कहा था कि आरबीआई के रिज़र्व पर “धावा बोलना” सरकार के “दुस्साहस” को दर्शाता है.

सरकार की मदद करने वाले आरबीआई के इस फ़ैसले को भी उसी चश्मे से देखा जा रहा है.

लेकिन पूर्व चीफ़ स्टैटिशियन ऑफ़ इंडिया प्रोनब सेन को नहीं लगता कि ‘इस फैसले का आरबीआई का खुद फ़ैसले लेने के अधिकार पर असर पड़ता है.’

वो कहते हैं, “आरबीआई की स्वायत्तता की बात तब उठती है जब मुद्रा नीति पर बात हो रही होती या फिर बैंक और एनबीएफ़सी पर निरक्षण संबंधी कंट्रोल की बात हो रही है. आरबीआई ख़ुद कितना मुनाफ़ा अपने पास रखे और कितना सरकार को दे, इसे आरबीआई की स्वायत्तता के चश्मे से देखना ठीक नहीं.”

प्रोनब सेन कहते हैं कि अगर सरकार को आरबीआई के हाथ मरोड़ने होते तो सरकार ने ये बहुत पहले कर दिया होता.

वो कहते हैं कि विमल जालान समिति की सिफ़ारिशों के बाद कुछ बातें साफ़ हो गई हैं कि आरबीआई अपने पास कितना रिज़र्व रख सकती है उसे कितनी धनराशि सरकार को देनी होगी लेकिन इसके लिए ज़रूरी है कि इस दस्तूर की भावना का पालन जारी रहे.

उधर विवेक कौल के अनुसार, ‘आरबीआई गवर्नर के सरकार से बहुत अच्छे संबंध नहीं होने चाहिए’ और ‘ऐसा लगता है कि आरबीआई गवर्नर शक्तिकांत दास अभी वित्त सचिव की ही भूमिका में ही हैं.’

मुख्यमंत्री ने दी सहमति : अगले बजट में शामिल होंगे सभी भवन विहीन छात्रावासों-आश्रमों के भवन निर्माण के कार्य…

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मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल की अध्यक्षता में आज यहां उनके निवास पर आयोजित छत्तीसगढ़ जनजाति सलाहकार परिषद की बैठक में अनेक महत्वपूर्ण फैसले लिए गए। मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल ने अगले बजट में भवन विहीन अनुसूचित जनजाति छात्रावासों-आश्रमों के भवन निर्माण के कार्य प्राथमिकता के आधार पर शामिल करने की सहमति दी है। बैठक में परिषद के सदस्यों ने जिला और विकासखण्ड मुख्यालयों में स्थित छात्रावास आश्रमों की सीट बढ़ाने का आग्रह करते हुए कहा था कि इन छात्रावास आश्रमों में निर्धारित संख्या से अधिक संख्या में विद्यार्थी अध्ययनरत हैं। सीटें उपलब्ध होने से विशेष रूप से छात्राओं को आवासीय सुविधा उपलब्ध हो सकेगी।

    मुख्यमंत्री ने निजी मेडिकल कॉलेज सहित निजी क्षेत्र के व्यावसायिक शिक्षण संस्थानों में आदिवासी विद्यार्थियों की फीस की व्यवस्था के लिए डीएमएफ फंड से प्रस्ताव करने का सुझाव सदस्यों को दिया। परिषद के सदस्यों ने बैठक में बताया कि निजी व्यावसायिक शिक्षण संस्थानों में कमजोर आर्थिक स्थिति के कारण आदिवासी विद्यार्थी प्रवेश नहीं ले पा रहे हैं।

    विशेष पिछड़ी जनजातियों के सभी शिक्षित युवाओं को पात्रतानुसार सरकारी नौकरी देने का निर्णय भी परिषद की बैठक में लिया गया। मुख्यमंत्री ने बैठक में कहा कि सभी जिलों में कलेक्टरों के माध्यम से विशेष पिछड़ी जनजातियों के सभी शिक्षित युवाओं की सूची तैयार कर ली जाए ताकि इन शिक्षित युवाओं को पात्रतानुसार नियुक्ति देने की कार्रवाई की जा सके।

    मुख्यमंत्री ने बैठक में कहा कि परिषद के सदस्यों सहित सभी जनप्रतिनिधि जब भी अपने क्षेत्र के दौरे पर जाएं तो वहां जन्म से ही जाति प्रमाण पत्र वितरित करने के राज्य सरकार द्वारा लागू किए गए प्रावधानों के तहत पात्र लोगों के बच्चों के जाति प्रमाण पत्र भी वितरित करें। उन्होंने कहा कि जनप्रतिनिधि हाटबाजारों में मुख्यमंत्री हाटबाजार क्लिनिक योजना के तहत लगाए जा रहे चिकित्सा शिविरों का दौरा कर वहां व्यवस्थाओं को भी देखें। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस योजना के माध्यम से दूरस्थ अंचलों में बड़ी संख्या में वनवासी लाभान्वित हो रहे हैं। इन शिविरों में इलाज कराने वालों की संख्या काफी अधिक है। यहां स्वास्थ्य परीक्षण के साथ निःशुल्क दवाईयां वितरित की जा रही हैं। मुख्यमंत्री ने जनप्रतिनिधियों को अपने भ्रमण के दौरान सुपोषण योजना के क्रियान्वयन और स्कूलों, छात्रावास, आश्रमों का दौरा करने का सुझाव भी दिया। श्री बघेल ने कहा कि आदिवासी समाज के उत्थान के लिए बेहतर शिक्षा और स्वास्थ्य की सुविधाएं और कुपोषण दूर करने की आवश्यकता है।

    मुख्यमंत्री ने बैठक में कहा कि ऐसे मसाहती गांव और वनग्रामों से राजस्व ग्रामों का दर्जा प्राप्त गांव जिनके नक्शे तैयार नहीं हैं या जीर्णशीर्ण हालत में हैं, उनके नक्शे तैयार करने के लिए संबंधित जिलों में अपर कलेक्टर स्तर के एक अधिकारी को नियुक्त किया जाए, जो नियमित रूप से इस कार्य की प्रगति की समीक्षा कर आगामी छह माह में नक्शे तैयार कराने का प्रयास करेें। बैठक में बताया गया कि प्रदेश में ऐसे 1088 गांव है, जिनमें से प्रथम चरण में 637 गांवों के नक्शों तथा द्वितीय चरण में 231 गांवों के नक्शों का सत्यापन किया जा चुका है। बैठक में छत्तीसगढ़ राज्य जनजाति संस्कृति एवं भाषा अकादमी के गठन हेतु ड्राफ्ट कमेटी गठित करने और कमेटी में विषय विशेषज्ञों को शामिल करने का निर्णय लिया गया।  

    बैठक में आदिम जाति कल्याण मंत्री और छत्तीसगढ़ जनजाति सलाहकार परिषद के उपाध्यक्ष डॉ. प्रेमसाय सिंह टेकाम, विधायक तथा परिषद के उपाध्यक्ष श्री रामपुकार सिंह, खाद्य मंत्री श्री अमरजीत भगत, परिषद के सदस्य और विधायक सर्वश्री मनोज मंडावी, शिशुपाल सोरी, चिन्तामणि महाराज, लखेश्वर बघेल, गुलाब कमरो, विनय भगत, चक्रधर सिंह, इंदर शाह मंडावी और डॉ. श्रीमती लक्ष्मी धु्रव, पूर्व विधायक श्री बोधराम कंवर और श्रीमती देवती कर्मा, मुख्य सचिव श्री सुनील कुजूर, अपर मुख्य सचिव द्वय श्री आर.पी. मंडल और श्री अमिताभ जैन, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव श्री गौरव द्विवेदी, प्रमुख सचिव विधि एवं विधायी कार्य श्री रविशंकर शर्मा, आदिम जाति कल्याण विभाग के सचिव श्री डी.डी. सिंह, राजस्व सचिव श्री एन.के. खाखा, वित्त सचिव डॉ. कमलप्रीत सिंह सहित संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

आज लॉन्च होगी सस्ती 7 सीटर Renault Triber, जानें- खासियत

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Renault कंपनी आज भारतीय ऑटो बाजार में आज बड़ा धमाका करने जा रही है. कंपनी अपनी नई कार Renault Triber लॉन्च करने जा रही है. इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है ये 7 सीटर कार है और इसकी कीमत बाजार में मौजूद दूसरी 7 सीटर कार की तुलना में बेहद कम होने की उम्मीद की जा रही है.

Renault Triber की बुकिंग 17 अगस्त से ही चल रही है. अगर आप रेनॉ की इस सेवन सीटर कार को खरीदना चाहते हैं तो 11 हजार रुपये की टोकन मनी के साथ बुकिंग करा सकते हैं. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक इसकी कीमत 5 लाख से 8 लाख रुपये के बीच होगी.

इन गाड़ियों से मुकाबला

दरअसल भारतीय बाजार में सेवन सीटर कार की खास डिमांड है, वैसे बाजार में ढेरों 7 सीटर कारें मौजूद हैं. लेकिन दावा किया जा रहा है कि बाजार में मौजूद तमाम गाड़ियों के मुकाबले Renault Triber सबसे सस्ता और शानदार विकल्प साबित हो सकता है. ट्राइबर रेनॉ क्विड और डस्टर के बीच के गैप को भरेगी. रेनॉ ट्राइबर का मुकाबला हुंडई की नई लॉन्च Grand i10 Nios, मारुति सुजुकी अर्टिगा से रहेगा.

डिजाइन भी है खास

Triber कंपनी का सुपर स्पेसियस और अल्ट्रा मॉड्यूलर प्रोडक्ट है. Renault Triber, Kwid के CMF-A प्लेटफॉर्म के मॉडिफाइड वर्जन पर बेस्ड है. Triber में कंपनी ने ऐसा डिजाइन दिया गया है कि इसमें लोगों को ज्यादा स्पेस मिल सके. कंपनी का कहना है कि ट्राइबर की सीट्स को 100 से ज्यादा तरीके से एडजस्ट किया जा सकता है. रेनॉ ट्राइबर 4 मीटर से छोटी एमपीवी (मल्टी परपज व्हीकल) है.

कम कीमत में शानदार फीचर्स

Renault की इस सस्ती कार को भारत और फ्रांस की टीमों ने मिलकर डेवलप किया है. इंफोटेनमेंट सिस्टम में ऐपल कार प्ले और एंड्रॉयड ऑटो का सपोर्ट भी दिया गया है. साथ ही यहां ऑन-बोर्ड नेविगेशन और कुछ इंटेलिजेंट फंक्शन जैसे- ड्राइविंग स्टाइल कोचिंग और ड्राइवर इकोनॉमी रेटिंग भी मौजूद हैं. रेनॉ ट्राइबर में डुअल-टोन कलर स्किम, इंस्ट्रूमेंट क्लस्टर में 3.5-इंच LCD स्क्रीन और 7.9-इंच टचस्क्रीन इंफोटेनमेंट सिस्टम दिया गया है. यानी ये सिस्टम Kwid, Lodgy, Duster और Captur के 7.0-इंच से बड़ा है.

सेफ्टी के लिए क्या-क्या है खास

सेफ्टी के नजरिये से Renault Triber में डुअल-फ्रंट एयरबैग, ABS, रियर पार्किंग सेंसर और स्पीड वॉर्निंग सिस्टम जैसे फीचर्स दिए गए हैं. Triber के हायर वेरिएंट में रिवर्स पार्किंग कैमरा और ज्यादा एयरबैग्स भी मिलेंगे. मैकेनिकल स्पेसिफिकेशन्स की बात करें तो Triber में Kwid के 1.0-लीटर (BR10) का अपग्रेडेड वर्जन, थ्री-सिलिंडर पेट्रोल इंजन दिया गया है. ये इंजन इंटरनेशन मॉडलों जैसे Renault Clio और Dacia Sandero में उपयोग में लाया जाता है. लॉन्च के वक्त इस कार में केवल एक ट्रांसमिशन- 5 स्पीड मैनुअल गियरबॉक्स ही मिलेगा.

बालों के रूखेपन के झंझट से पूरी तरह छुटकारा पाने के बेहतरीन नुस्खे

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बालों की इस उलझन के लिए ज्यादातर हेयर एक्सपर्ट्स कंडिशनर यूज करने की सलाह देते हैं लेकिन लंबे समय तक कंडिशनर के इस्तेमाल से बाल खराब होने का भी डर रहता है। ऐसे में आप चाहें तो इन घरेलू उपायों को अपनाकर बालों की इस झंझट से पूरी तरह छुटकारा पा सकते हैं।

एपल साइडर विनेगर या फिर प्याज का रस शैंपू करने के बाद बालों में प्याज का रस लगाकर कुछ देर के लिए छोड़ दें। इसके बाद बालों को अच्छी तरह धो लें ताकि प्याज की गंध दूर हो जाए। अगर आपको प्याज की गंध पसंद नहीं है तो आप एपल साइडर विनेगर का इस्तेमाल भी कर सकते हैं। दो चम्मच विनेगर को एक लीटर पानी में मिला लें शैंपू के बाद इससे बालों को धोएं। इन दोनों ही उपायों से बालों में चमक तो आएगी ही साथ ही बालों में रूखापन भी नहीं रह जाएगा।

अंडे का इस्तेमाल भी रहेगा फायदेमंद

ज्यादातर लोगों को पता ही नहीं होता है कि अंडा एक बेहतरीन कंडिशनर है। अंडे के सफेद हिस्से और पीले हिस्से को अलग कर लें। सफेद भाग में जैतून का तेल मिलाकर लगाने से बालों की उलझन दूर हो जाएगी और बालों की चमक भी बनी रहेगी।

तौलिये का सही इस्तेमाल करें

शैंपू के बाद बालों को तौलिये से रगड़कर सुखाने के बजाय, हल्के हाथों से दबा-दबाकर सुखाएं गीले बाल काफी कमजोर होते हैं ऐसे में उनके टूटने की आशंका बहुत ज्यादा होती है|

इसके अलावा जब भी धूप में निकलें बालों को ढककर निकलें ताकि बाल उलझें कम और उन पर धूल, धुंए का असर भी कम हो।

चेहरे को चमकदार और बेदाग बनाने के लिए काम आएगा नारियल तेल और बेकिंग सोडा

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 क्या आप भी खूबसूरत स्किन पाना चाहते हैं, अक्सर महिलाएं और लड़कियां अपने चेहरे का खास ख्याल रखती हैं।

अपने चेहरे को चमकदार और बेदाग बनाने के लिए घरेलू तरीकों को अपनाएं। चलिए आईये जानते हैं कुछ ऐसी ही चीजों के बारे में, जिन्हे अपनाकर आप खूबसूरत स्किन पा सकते हैं।

लीजिए नारियल तेल यूज: त्वचा के लिए नारियल तेल बेहद ही गुणकारी है। ये स्किन को नमी प्रदान करता है। सबसे बड़ी बात इसका कोई भी साइड इफेक्ट नहीं होता।

कीजिए बेकिंग सोडा यूज: बेकिंग सोडा त्वचा में मौजूद डेड सैल्स को दूर करता है और नए सैल्स बनाने में सहायता करता है।

आवश्यक सामग्री: स्किन के लिए बेहद गुणकारी हैं नारियल तेल, लीजिए बेकिंग सोडा यूज

ऐसे बनाएं पेस्ट और ऐसे लीजिए यूज : नारियल तेल और बेकिंग सोडा को मिलाकर पेस्ट तैयार कर लीजिए। इसे चेहरे पर पैक की तरह लगाना चाहिए और हल्के हाथों से मसाज कीजिए।

मसाज सर्कुलर मोशन में कीजिए। मसाज करने के तुरंत बाद ही चेहरे को पानी से धो लीजिए। ये एक तरह का प्राकृतिक क्लीनर है। अगर आपकी त्वचा सेंसटिव है तो नारियल तेल में बेकिंग सोडा कम मिलाएं।

छत्तीसगढ़ : मुख्यमंत्री जिले वासियों को देंगे 84 करोड़ 69 लाख रूपए के विकास कार्यों की सौगात…

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मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल जिला मुख्यालय महासमुंद में 28 अगस्त को जिले वासियों को 84 करोड़ 69 लाख रूपए की लागत से होने वाले 32 विकास कार्यों की सौगात देंगे। इनमें 61 करोड़ 97 लाख रूपए के 18 कार्योंं का लोकार्पण तथा 22 करोड़ 72 लाख रूपए के 14 कार्यों का शिलान्यास करेंगे।
 
मुख्यमंत्री श्री बघेल 61 करोड़ 97 लाख रूपए के 18 कार्यों का लोकार्पण करेंगे, इनमें 3 करोड़ 37 लाख 4 हजार रूपए के कौहाकुड़ा से बेलर मार्ग में पुल-पुलियों का निर्माण, 3 करोड़ 76 लाख 69 हजार रूपए के बेलर से घोंच मार्ग में पुल-पुलियों का निर्माण, 5 करोड़ 67 लाख 2 हजार रूपए के हर्राटार से लाखनपाली मार्ग का उन्नयन कार्य (लंबाई 4़.80 कि.मी.), 4 करोड़ 52 लाख 3 हजार रूपए के जम्हारी से दुलारपाली मार्ग निर्माण (लंबाई 3.00कि.मी.), एक करोड़ 63 लाख 38 हजार के महासमुंद-खट्टी-लभरा मार्ग कि.मी. 16/4 में पुल निर्माण, एक करोड़ 28 लाख 38 हजार के बाल संप्रेषण गृह भवन महासमुंद का निर्माण, 84 लाख 82 हजार के प्री. मै. आदिवासी कन्या छात्रावास भूकेल का निर्माण, एक करोड़ 62 लाख 76 हजार के 50 सीटर आदिवासी कन्या आश्रम पिरदा में भवन का निर्माण, एक करोड़ 62 लाख 76 हजार के 50 सीटर आदिवासी कन्या आश्रम खोकसा में भवन का निर्माण, 4 करोड़ 67 लाख 74 हजार के घोंच बगारपाली मार्ग के सुखा नाला पर उच्च स्तरीय पुल निर्माण, 4 करोड़ 90 लाख 75 हजार के मोंहगांव पथरला मार्ग के करमेल नाला पर उच्च स्तरीय पुल निर्माण, 5 करोड़ 21 लाख 63 हजार के भलेसर कनेकेरा मार्ग के केशवा नाला पर उच्च स्तरीय पुल निर्माण, 4 करोड़ 63 लाख 68 हजार के महासमुंद ब्लॉक मुख्यालय में कार्यरत् शासकीय अधिकारियों, कर्मचारियों हेतु आवास निर्माण एवं विकास का कार्य, 17 करोड़ 40 लाख के पुुलिस हाउसिंग कार्पोरेशन द्वारा निलयम योजनान्तर्गत अराजपत्रित अधिकारियों के लिये आवास गृह निमाण, 19 लाख 62 हजार के गौठान निर्माण कार्य ग्राम पंचायत काैंआझर, 19 लाख 62 हजार के गौठान निर्माण कार्य ग्राम पंचायत डूमरपाली, 19 लाख 62 हजार के गोठान निर्माण कार्य जोेरातराई, 19 लाख 62 हजार के गौठान निर्माण कार्य ग्राम पंचायत रूमेकेल शामिल है।

इसी प्रकार 22 करोड़ 72 लाख रूपए के 14 निर्माण कार्यों का शिलान्यास करेंगे, इनमें एक करोड़ 21 लाख 16 हजार रूपए के लागत से झलप में शास.उ.मा.वि. भवन का निर्माण, एक करोड़ 21 लाख 16 हजार रूपए के लागत से खल्लारी में शास.उ.मा.वि. भवन का निर्माण, 10 करोड़ 6 लाख 45 हजार रूपए के लागत से नवीन आदर्श आवासीय महाविद्यालय ग्राम लोहराकोट में भवन निर्माण, 2 करोड़ 65 लाख 55 हजार रूपए के लागत से भलेसर कृषि विज्ञान केन्द्र नयापारा शेर मार्ग का निर्माण पुल पुलिया सहित लं. 1.975 कि.मी., 66 लाख 95 हजार रूपए के लागत से शासकीय हाईस्कूल उमरदा, 66 लाख 95 हजार रूपए के लागत से शासकीय हाईस्कूल सोरमसिंघी, 66 लाख 95 हजार रूपए के लागत से शासकीय हाईस्कूल खैरझिटी, 66 लाख 95 हजार रूपए के लागत से शासकीय हाईस्कूल नवाडीहखुर्द, 66 लाख 95 हजार रूपए के लागत से शासकीय हाईस्कूल संतपाली, 66 लाख 95 हजार रूपए के लागत से शासकीय हाईस्कूल लंबर, 66 लाख 95 हजार रूपए के लागत से शासकीय हाईस्कूल मेमरा, 66 लाख 95 हजार रूपए के लागत से शासकीय हाईस्कूल केन्दुढ़ार, एक करोड़ 11 लाख 50 हजार रूपए के लागत से शासकीय हायर सेकेण्डरी स्कूल जमदरहा एवं एक करोड़ 11 लाख 50 हजार रूपए के लागत से शासकीय हायर सेकेण्डरी स्कूल बम्हनी शामिल है।

वायनाड में आज बाढ़ पीड़ितों से मिलेंगे राहुल गांधी

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चार दिवसीय केरल दौरे पर पहुंचे राहुल गांधी का आज अपने संसदीय क्षेत्र वायनाड में दूसरा दिन है. राहुल गांधी सुबह पौने दस बजे से बाढ़ पीड़ितों से मुलाकात करेंगे. राहुल गांधी सबसे पहले थिरुनेल्ली इलाके के बाढ़ पीड़ितों से मुलाकात करेंगे. मुलाकात का यह सिलसिला शाम साढ़े छह बजे तक चलेगा. राहुल गांधी बुधवार को कालपेट्टा के गेस्ट हाऊस में रात गुजारेंगे.

वायनाड केरल में बाढ़ से सबसे ज्यादा प्रभावित जिलों में से एक है. इस जिले के लगभग 50,000 लोगों ने राज्य सरकार की ओर से इस महीने की शुरुआत में लगाए गए राहत शिविरों में शरण ले रखी है.

राहुल गांधी ने अपने ट्विटर हैंडल पर लिखा, “मैं अगले कुछ दिनों के लिए अपने संसदीय निर्वाचन क्षेत्र, वायनाड में हूं. बाढ़ राहत शिविरों का दौरा करूंगा और इलाके में चल रहे पुनर्वास कार्य का जायजा लूंगा. ज्यादातर काम पूरे हो गए हैं, मगर कुछ और काम किए जाने की अभी भी जरूरत है.”

सांसद राहुल बाढ़ प्रभावित इलाकों का दौरा करेंगे और संभावना है कि वह 30 अगस्त को दिल्ली लौट जाएंगे. मंगलवार को पहले पड़ाव में राहुल गांधी राहत शिविरों में गए और चुंगम थलाप्पुज्हा गांव के सेंट थॉमस चर्च में ठहरे हुए बाढ़ प्रभावित लोगों के बीच उन्होंने राहत सामग्री बांटी.

बेहतर रिजल्ट्स पाने के लिए ऐसे कीजिए फेशियल

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आजकल हर महिलाएं फेशियल करवाती हैं, जिससे उनकी स्किन खूबसूरत बन जाएं। इसलिए महंगे से महंगा फेशियल करवाने के लिए तैयार हो जाती हैं। लेकिन वो नहीं जानती है कि इससे परेशानी हो सकती हैं।

इसके कई बार इसके साइड इफैक्ट भी हो जाते हैं। इससे आपका वक्त और पैसे दोनो ही बर्बाद होते हैं। इसके लिए जरुरी नहीं है कि पार्लर जाकर पैसे खर्च किए जाएं। आप घर में भी कुछ आसान टिप्स को फोलो कर के फेशियल कर सकती हैं। चलिए जानते हैं फेशियल के बारे में.

-आप फेशियल करने से पहले चेहरे को किसी हर्बल फेसवॉश से धो लीजिए। इससे चेहरे पर लगी गंदगी साफ होगी, और चेहरा चमकने लगेगा। -चेहरे को गहराई से साफ करने के लिए थोडा़ सा क्लींजिंग मिल्क रुई पर लगाना चाहिए और चेहरे को अच्छे से साफ कर लीजिए।

-आप चेहरे पर 2-3 मिनट के लिए हल्के हाथों से स्क्रब कीजिए। यह चेहरे की डेड त्वचा को साफ करता है। इसके लिए आप चीनी का यूज भी कर सकती हैं।

-मसाज करने से ब्लड सर्कुलेशन बढ़ता है तथा स्किन पर जमी मैल दूर होगी। इसके लिए आप मलाई या आॅलिव आॅयल का यूज कर सकती हैं। इससे चेहरे में चमक आती है और तनाव भी दूर होता है।

-आप इसके बाद स्टीम लीजिए। स्टीम लेने के लिए स्टीमर या फिर किसी बर्तन में गर्म पानी भर कर चेहरे पर भाप लीजिए लेकिन ये याद रखे की जब भी स्टीम ले एक तौलिए से सिर को जरूर ढंक लीजिए।

-आपकी स्किन के लिए हल्दी और बेसन का फेस पैक काफी लाभकारी होता है। ये स्किन की गंदगी को साफ करता है। तीन चम्मच बेसन, थोड़ी सी हल्दी तथा एक चम्मच दूध को मिलाकर पैक तैयार लीजिए। इसे चेहरे पर लगा लीजिए तथा 20 मिनट बाद चेहरे का पानी से धो लीजिए।

बीजेपी नेता का आरोप, तिरुपति मंदिर से गायब हुआ चांदी का मुकट

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तिरुमला की पहाड़ियों पर स्थित प्रसिद्ध भगवान वेंकटेश्वर के मंदिर से सोने-चांदी के आभूषण गायब होने का मामला सामने आया है. तिरुमाला तिरुपति देवस्थानम (टीटीडी) के खजाने से करीब 5 किलो वजन का चांदी का एक मुकुट और कुछ सोने के आभूषण गायब हो गए हैं. यह आरोप ट्रस्ट के पूर्व सदस्य और बीजेपी नेता ने लगाया है.

भाजपा नेता और पूर्व ट्रस्ट सदस्य भानु प्रकाश रेड्डी ने कहा कि टाइट सुरक्षा के बीच कीमती आभूषण गायब हुए हैं. इस बाबत उन्होंने घोटाले का आरोप लगाते हुए दस्तावेज जारी किए. उन्होंने मांग उठाई कि टीटीडी को सहायक कार्यकारी अधिकारी श्रीनिवासुलु के खिलाफ कार्रवाई करनी चाहिए. रेड्डी ने इस प्रकरण के जांच की मांग की है.

तिरुपति में मीडिया से बातचीत के दौरान रेड्डी ने कहा कि श्रद्धालुओं द्वारा दान किए गए मुकुट और सोने के आभूषण अक्टूबर 2017 से खजाने से गायब हैं. वहीं, TTD के कार्यकारी अधिकारी अनिल कुमार सिंघल ने कहा कि टीटीडी सतर्कता और लेखा विभाग के अधिकारियों ने दो साल पहले कोषागार से लगभग 7 लाख रुपये के कुछ चांदी और स्वर्ण लेखों की कमी को देखा था. इसको लेकर एक टीटीडी अधिकारी के वेतन से हर महीने 25,000 रुपये की राशि वसूल की जाती थी.

बता दें कि आंध्र प्रदेश का वेंकटेश्वर मंदिर बरसों से श्रद्धालुओं के बीच आस्था का प्रतीक बना हुआ है. इसी महीने अमेरिका में रहने वाले 2 भारतीय मूल के कारोबारियों ने तिरुमला के निकट स्थित प्रसिद्ध भगवान वेंकटेश्वर मंदिर को दान में 14 करोड़ रुपए दिए थे. उद्योगपतियों ने यह दान नाम न बताने की शर्त पर दिया था.