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कानपुर स्टेशन की बाउंड्री तोड़ बाहर निकली ट्रेन, पटरी से उतरे 4 डिब्बे

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उत्तर प्रदेश के कानपुर सेंट्रल स्टेशन पर बुधवार सुबह एक ट्रेन पटरी से उतर गई. कानपुर-लखनऊ मेमू के चार डिब्बे प्लेटफॉर्म नंबर 3 पर पटरी से उतर गए. इस दौरान ट्रेन ने कानपुर स्टेशन की बाउंड्री को भी तोड़ दिया. इस हादसे में किसी के हताहत होने की खबर नहीं है. रेलवे के आला अधिकारी मौके पर हैं और ट्रेन को दोबारा पटरी पर लाने की कोशिश की जा रही है.

मौके पर पहुंचे रेलवे अधिकारियों का कहना है कि आज सुबह कानपुर-लखनऊ मेमू लखनऊ से कानपुर आ रही थी. कानपुर स्टेशन पर पटरी चेंज करते समय ट्रेन के चार डिब्बे पटरी से उतर गए. इस हादसे के दौरान स्टेशन की बाउंड्री के कई पिलर टूट कर गिए.इसके बाद हड़कंप मच गया. यात्रियों में अफरा-तफरी मच गई.

रेलवे अधिकारियों का कहना है कि ट्रेन में लखनऊ से कानपुर आने वाले यात्री सवार थे. ट्रेन की रफ्तार धीमी होने की वजह से बड़ा हादसा टल गया. ट्रेन के पटरी से उतरने की वजह से अन्य ट्रेनों का संचालन प्रभावित है. कानपुर-लखनऊ मेमू को दोबारा पटरी पर लाने की कोशिश की जा रही है. मौके पर रेलवे के टेक्निकल स्टॉफ की टीम पहुंच गई है.

जब निरहुआ के लिए भिड़ गईं आम्रपाली और काजल, देखें वायरल भोजपुरी वीडियो

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भोजपुरी फिल्‍म इंडस्‍ट्री में दिनेश लाल यादव ‘निरहुआ’ एक ऐसा नाम है जिसके गानों का फैंस को बेसब्री से इंतजार रहता है. 2006 से अपना फिल्‍मी सफर शुरू करने वाली निरहुआ और आम्रपाली दुबे की जोड़ी इंडस्‍ट्री में फिल्‍म के हिट होने की गारंटी मानी जाती है. दो साल पहले इस जोड़ी ने काजल राघवानी संग ट्राएंगल बनाया.

‘झुमका झुलनिया दिह’ यह गाना इतना हिट हुआ कि दो साल में इसे 1.7 करोड़ से ज्‍यादा व्‍यूज मिले हैं. कल्‍पना की आवाज में भोजपुरी का चुलबुलापन बरकरार है और उन्‍होंने प्‍यारे लाल यादव के शब्‍दों को बखूबी गाया. गाने में काजल और आम्रपाली के बीच निरहुआ फंसे दिख रहे हैं. दोनों उनसे कहती हैं कि अपना दिल सौतन को न दें.

‘झुमका झुलनिया दिह’ के अलावा निरहुआ के ट्रेडमार्क गाने ‘निरहुआ सटल रहे’ को 3 करोड़ से ज्‍यादा बार देखा गया है.

निरहुआ भोजपरी सिनेमा के उस वर्ग से आते हैं जो एक्टिंग और सिंगिंग दोनों करते हैं. मनोज तिवारी, पवन सिंह, खेसारी लाल यादव जैसे भोजपुरी सुपरस्टार्स के बीच उनकी एक अलग पहचान है.

शालिजा धामी बनीं पहली फ्लाइट कमांडर, मिलेगा स्थाई कमीशन

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मेरे देश की बेटियां आसमान छू रही हैं. आसमान में अपनी क्षमता और काबिलियत को फिर एक बार साबित किया है एक बेटी ने. इस बेटी का नाम है – शालिजा धामी. विंग कमांडर शालिजा देश की पहली भारतीय महिला वायुसेना अधिकारी हैं जो फ्लाइट कमांडर बनी हैं. 15 साल से वायुसेना में रहते हुए देश के सेवा करने वाली शालिजा धामी ने हिंडन एयर बेस में चेतक हेलिकॉप्टर यूनिट में फ्लाइट कमांडर का पदभार संभाला है.

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फ्लाइट कमांडर का पद वायुसेना में पहली प्रमुख लीडरशिप पोजिशन होती है. शालिजा धामी के यहां पहुंचने से महिलाओं के लिए वायुसेना में आगे बढ़ने का रास्ता खुला है. नौ साल के बच्चे की मां शालिजा पंजाब के लुधियाना में पली-बढ़ी हैं. वे बचपन से ही पायलट बनना चाहती थी. 15 साल के अपने करियर में वे चेतक और चीता हेलिकॉप्टर उड़ाती रही हैं. विंग कमांडर धामी चेतक और चीता हेलीकॉप्टरों के लिए भारतीय वायुसेना की पहली महिला योग्य फ्लाइंग इंस्ट्रक्टर भी हैं.

2300 घंटे तक उड़ान का अनुभव रखने वाली शालिजा धामी वायुसेना की पहली महिला अधिकारी हैं जिन्हें लंबे कार्यकाल के लिए स्थाई कमीशन प्रदान किया जाएगा. गौरतलब है कि दिल्ली हाईकोर्ट में लंबी और कठिन कानूनी लड़ाई जीतने के बाद महिला अधिकारियों को अपने पुरुष समकक्षों के साथ स्थाई कमीशन पर विचार करने का अधिकार मिला है. आपको बता दें कि भारतीय वायुसेना में 1994 में पहली बार महिलाओं को शामिल किया गया. लेकिन उन्हें नॉन-कॉम्बैट रोल दिया गया. धीमे-धीमे करके महिलाओं ने संघर्ष करके अब कॉम्बैट रोल्स हासिल किए हैं.

कैसे मिलता है स्थाई कमीशन

वायुसेना प्रमुख एयर मार्शल बीएस धनोआ ने कहा था कि वायुसेना में महिलाओं के लिए स्थाई कमीशन दो बातों पर निर्भर करता है पहला- वैकेंसी की संख्या और दूसरा- मेरिट. उन्होंने कहा वायुसेना के साथ सभी सेना में महिलाओं की भर्ती के लिए कोई पाबंदी नहीं है. स्थाई कमीशन के लिए चयन होने से पहले महिला ऑफिसर ने 13 साल तक वायुसेना में अपनी सेवा दी हो. जिसके बाद उनका चयन स्थाई कमीशन लागू किया जाएगा. बता दें, महिलाएं शॉर्ट सर्विस कमीशन के तहत एयरफोर्स में नियुक्त की जाती है.

क्या होगा फायदा

महिलाओं के लिए स्थाई कमीशन लागू होने की वजह से महिला उम्मीदवार ज्यादा वक्त तक सेना में काम कर सकेंगी और उन्हें कई अन्य सुविधाएं भी मिलेंगी. स्थाई कमीशन से महिलाएं 20 साल तक काम कर सकेंगी और इसे बढ़ाया भी जा सकता है. वहीं बीएस धनोआ ने कहा, “अगर महिलाएं चाहती हैं तो वह स्थायी कमीशन तहत काम कर सकती हैं. क्योंकि सेना में वह शॉर्ट सर्विस कमीशन के तहत काम करती हैं.

पहले क्या थे नियम

इससे पहले शॉर्ट सर्विस कमीशन के अधिकारी 10 साल की सर्विस के बाद स्थाई कमीशन के लिए योग्य होते हैं, लेकिन उनका एनुअल रिपोर्ट में ट्रैक अच्छा होना चाहिए. वहीं स्थाई कमीशन के आधिकारी शॉर्ट सर्विस कमीशन में शिफ्ट नहीं हो सकते हैं. अगर कोई जाना चाहता है तो उसे रिटायरमेंट लेना होगा.

बच्चे की भूख बढ़ाने के लिए अपनाएं ये टिप्स

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क्या आपका बच्चा बेहद कमजोर हैं, क्या उसको भूख नहीं लगती हैं। तो आपको कुछ टिप्स बताते हैं, जिनका यूज करने से बच्चे को भूख लगनी शुरू हो जाएगी। आपको बता दें कि बदलते लाइफस्टाइल की वजह से भी भूख न लगना आजकल आम परेशानी हो गई है।

जिससे बच्चों का विकास भी रूक सकता है। इससे बच्चे के शरीर में कमजोरी भी आ सकती है। आप इसके लिए कुछ घरेलू टिप्स अपना सकते है..चलिए जानते हैं.

-पुदीना सेहत के लिए बेहद गुणकारी होता हैं, यह शरीर को ठंडक देता हैं। थोड़े से पुदीने के रस में शहद मिला लीजिए और सुबह शाम इस मिश्रण का 1-1 चम्मच गुनगुने पानी के साथ बच्चे को दीजिए। इससे पेट साफ रहेगा और भूख भी लगनी शुरू होगी।

-हरी पत्तेदार सब्जियों का सूप बच्चे को दीजिए। इससे कब्ज की समस्या से छुटकारा मिलेगा और पेट में गैस भी नहीं बनती। इससे आपकी भूख बढ़ेगी।

-अगर आपके बच्चे को भी भूख नहीं लगती हैं तो आप उसको खाने के लिए सेब दीजिए। इससे बच्चे का खून साफ होना शुरू हो जाएगा और भूख भी लगने लगेगी। सेब के साथ काला नमक जरूर दीजिए। बच्चा सेब न खाए तो इसका जूस भी लाभकारी है।

जॉनसन एंड जॉनसन पर लगा 4100 करोड़ रुपये का जुर्माना, जानें क्या है मामला

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मशहूर फार्मा कंपनी जॉनसन एंड जॉनसन पर एक बार फिर 57.20 करोड़ डॉलर (करीब 41 अरब रुपए) का जुर्माना लगा है. अमेरिका की एक अदालत ने यह जुर्माना नशीली दवाओं के इस्तेमाल से जुड़े ओपॉयड संकट मामले में लगाया है. अमेरिका की सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन एजेंसी के अनुसार, देश में ओपॉयड के चलते 1999 से 2017 के दौरान करीब 4 लाख लोगों की मौत हुई.

ओकलाहोमा की क्लेवलैंड काउंटी की जिला अदालत के जज थाड बाकमैन ने अपने फैसले में कहा कि कंपनी ने जानबूझकर ओपॉयड के खतरे को नजरअंदाज किया और अपने फायदे के लिए डॉक्टरों को नशीली दर्द निवारक दवाएं लिखने के लिए अपने पक्ष में किया. जज ने राज्य सरकार की ओर से ओपॉयड पीड़ितों के इलाज के लिए मांगी गई राशि के मुकाबले जॉनसन एंड जॉनसन को काफी कम भुगतान करने का आदेश दिया है. राज्य सरकार ने 17 अरब डॉलर की मांग की थी.

‘जॉनसन एंड जॉनसन’ की घटिया हिप इंप्लांट का शिकार दुनिया भर के मरीज हुए हैं. इसी साल 7 मई को कंपनी ने अमेरिका की एक कोर्ट में एक बिलियन डॉलर का जुर्माना भरा. कंपनी के खिलाफ यहां करीब 6000 केस दायर हुए थे. कंपनी पर आरोप लगे थे कि साल 2003 से 2013 तक लोग घटिया हिप इंप्लांट के शिकार हुए.

जज ने कहा कि जॉनसन एंड जॉनसन ने राज्य के कानून तोड़ा है. कंपनी की गलत, भ्रामक और खतरनाक मार्केटिंग के कारण तेजी से नशे की लत बढ़ी और ओवरडोज से मौत के मामले सामने आए. कंपनी ने इससे 20 साल के दौरान इससे अरबों डॉलर की कमाई की है. इस फैसले पर ओपॉयड दवा बनाने वाली करीब दो दर्जन कंपनियों की नजर थी, क्योंकि इन दवाओं को बनाने वाली कंपनियों, वितरकों और विक्रेताओं पर अमेरिका में इसी तरह के करीब 2500 मुकदमे चल रहे हैं.

1965 के भारत-पाकिस्तान युद्ध के बारे में जानिए ये 10 बड़ी बातें

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1962 में हुए चीन के साथ हुए युद्ध से भारत अभी उबर भी नहीं पाया था कि पाकिस्तानी सेना ने भारतीय सीमा में घुसकर एक और युद्ध के संकेत दे दिए थे. 1965 में हुए भारत और पाकिस्तान के युद्ध को दुनिया के बड़े युद्धों में से एक गिना जाता है. पढ़िए भारत-पाकिस्‍तान युद्ध से जुड़ी 10 बड़ी बातें.

  • माना जाता है कि 1965 के युद्ध की नींव जनवरी, 1965 में रखी गई थी, जब पाकिस्तान ने कच्छ के रण में ऑपरेशन डेजर्ट हॉक चलाया था. इस ऑपरेशन का मकसद था कच्छ के रण की जमीन कब्जा करना और भारतीय सेना का ध्यान भटकाकर कश्मीर में हमला करना. इसके बाद बड़ी डेवलपनमेंट हुई, जब अप्रैल में लगातार दोनों देश एक-दूसरे की सीमाओं पर बने चौकियों पर गोलीबारी करने लगे.
  • 5 अगस्त, 1965. कोई तय आंकड़ा नहीं है, लेकिन अनुमान है कि करीब 33 हजार पाकिस्तानी फौजी लाइन ऑफ कंट्रोल लांघकर भारत की ओर बढ़े थे. इसके जवाब में 15 अगस्त के दिन भारतीय सेना भी एलओसी क्रॉस कर गई.
  • बढ़ते तनावों के बीच 28 अगस्त, 1965 को भारतीय सेना ने पीओके में 8 किलोमीटर अंदर जाकर हाजी पीर समेत कुछ और पोस्ट पर कब्जा कर लिया. 1 सितंबर को पाकिस्तान ने जवाब में ऑपरेशन ग्रैंड स्लैम लॉन्च किया और जंग शुरू हुई.
  • पाकिस्तान ने जम्मू-कश्मीर के अखनूर सेक्टर में हमला करना शुरू कर दिया. इस हमले के पीछे भारतीय सेना की सप्लाई को रोकने की साजिश थी. तत्कालीन रक्षा मंत्री एसबी चौहान ने तय किया कि इस युद्ध में वायुसेना को भी लगाना चाहिए. वायुसेना की 45 स्क्वॉड्रन को पाकिस्तान के खिलाफ लाया गया.
  • पाकिस्तान पर दबाव बनाने के लिए तत्कालीन प्रधानमंत्री लालबहादुर शास्त्री ने सेना को सीमा पार कर हमला करने की खुली छूट दे दी. भारतीय सेना ने पहली बार अंतरराष्ट्रीय सीमा पार किया था. मेजर जनरल प्रसाद के नेतृत्व में भारतीय सेना का 15 इनफैंट्री ने सीमा पार की. प्रधानमंत्री शास्त्री के निर्देश के बाद भारतीय सेनाओं ने लाहौर और सियालकोट को निशाना बनाया और बड़े हमले किए.
  • 22 सितंबर तक युद्ध चला और संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद को बीच में आना पड़ा, जिसके बाद दोनों देशों के बीच युद्ध रुका और सीजफायर की घोषणा हुई. 23 सितंबर को अधिकारिक तौर पर युद्ध समाप्ति की घोषणा हुई.
  • पाकिस्तान ने हताश होकर युद्ध अमेरिकी पैटन टैंकों को उतारने का फैसला किया. पाकिस्तान के पास 97 पैटन टैंकों का बेड़ा था. पाकिस्तान ये टैंक लेकर अमृतसर की ओर बढ़ा, खेम करन और मु्न्नाबाओ पर कब्जा किया. इन टैंकों का वजन 60 टन था और ये 105 एमएम की तोप और एम-60 राइफल से लैस था.
  • पाकिस्तान को इन टैंकों पर बहुत भरोसा था, लेकिन वीर अब्दुल हमीद ने पाकिस्तान के इस भ्रम को तोड़ दिया, जब वो अपनी जीप से टैंकों को एक के बाद एक इन पैटन टैंकों को ध्वस्त करते चले गए. हवलदार अब्दुल हमीद ने अकेले ही 7 पाकिस्तानी पैटन टैंकों को तबाह कर दिया था. इस अदम्य साहस के लिए उन्हें परमवीर चक्र से नवाजा गया.
  • आसल उत्ताड़ में हुए युद्ध को टैंकों की कब्र के नाम से भी जाना जाता है. यहां पर पाकिस्तान के 100 टैंक ध्वस्त हुए थे. ‘पैटन नगर’ इसी के बाद अस्तित्व में आया, क्योंकि पाकिस्तान ने सबसे ज्यादा टैंक यहीं भेजे थे. भारत की ओर से ध्वस्त और कब्जे में ली गई टैंकों की संख्या भी यहीं सबसे ज्यादा थी.
  • युद्ध के रुकने के बाद जो आकलन हुए, उसके मुताबिक, भारत ने 1920 किलोमीटर वर्ग जमीन पर कब्जा किया था और पाकिस्तान ने 540 वर्ग किलोमीटर जमीन पर कब्जा किया था. जंग में भारत के 2,863 और पाकिस्तान के 5,800 सैनिक मारे गए. भारत के 97 टैंक ध्वस्त हुए थे और पाकिस्तान के 450 टैंकों को भारतीय सैनिकों ने तबाह किया था. आखिरकार भारत को इस युद्ध में बड़ी जीत हासिल हुई.

देश में एटीएम फ्रॉड केस 10 % बढ़े, 21.4 करोड़ की लगी चपत

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एटीएम कार्ड का नंबर पूछे बिना और कार्ड बदले बिना ही खाते से पैसे निकालने का खेल लगातार जारी है. वहीं, सरकार और बैंक भी अपने स्तर पर इसे रोकने के लिए कई योजनाओं पर विचार कर रहे हैं. एटीएम फ्रॉड को रोकने के लिए दिल्ली स्टेट लेवल बैंकर्स कमिटी ने दो एटीएम ट्रांजैक्शन के बीच में छह से 12 घंटे का समय रखने का सुझाव दिया है, तो केनरा बैंक ने 10000 से अधिक रुपये एटीएम से निकालने के लिए पिन जरुरी कर दिया है. पिन डाले बिना अब एटीएम से पैसे नहीं निकाले जा सकेंगे.

भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआइ) के आंकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2018-19 में एटीएम फ्रॉड के मामलों में बढ़ोतरी हुई है. वित्त वर्ष 2017-18 में जहां एटीएम फ्रॉड के 911 मामले सामने आये, वहीं वित्त वर्ष 2018-19 में एटीएम फ्रॉड के कुल मामले बढ़कर 980 हो गये. आरबीआइ के आंकड़ों के मुताबिक, भले ही एटीएम फ्रॉड के मामले में बढ़ोतरी हुई है, लेकिन फ्रॉड में शामिल राशि में कमी दर्ज की गयी है. जहां वित्त वर्ष 2017-18 में 65.3 करोड़ रुपयों का नुकसान हुआ था, तो वहीं वित्त वर्ष 2018-19 में 21.4 करोड़ रुपयों का ही नुकसान हुआ है. हालांकि, इन आंकड़ों में एक लाख से नीचे के मामले शामिल नहीं थे.

महाराष्ट्र में एटीएम फ्रॉड की सबसे ज्यादा केस : साल 2018-19 के दौरान महाराष्ट्र में एटीएम धोखाधड़ी के 233 मामले दर्ज किये गये. वहीं, देश की राजधानी दिल्ली में दिल्ली में एटीएम धोखाधड़ी के 179 केस दर्ज किये गये. हाल के महीनों में कार्ड की क्लोनिंग के मामले भी सामने आये हैं जिसमें बड़ी संख्या में विदेशी नागरिक शामिल थे.

-1969 में यूएस में लॉन्च हुआ था एटीएम, भारत में 1987 में एचएसबीसी ने की थी शुरुआत

सबसे ज्यादा धोखाधड़ी एटीएम कार्ड से

एटीएम और प्लास्टिक कार्ड 43%

मोबाइल बैंकिंग 25%

इंटरनेट बैंकिंग 12%

बैंकिंग एप्लीकेशन सॉफ्टवेयर 03%

देश में एटीएम की संख्या दो साल में 597 घट कर 2,21,703 रह गयी

980 केस दर्ज हुए एटीएम फ्रॉड के वित्त वर्ष 2018-19 में, 21.4 करोड़ रुपयों का हुआ नुकसान

911 मामले सामने आये एटीएम धोखाधड़ी के वित्त वर्ष 2017-18 में, 65.3 करोड़ रुपयों की चपत

इस महीने अब तक 79 पैसे सस्ता हुआ पेट्रोल, जानें आज क्या रहा पेट्रोल-डीजल का भाव?

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कच्चे तेल के दाम बढ़ोतरी के बावजूद घरेलू बाजार में पेट्रोल-डीजल के दाम में कोई बदलाव नहीं हुआ है. लगातार 3 दिन से पेट्रोल-डीजल के दाम स्थिर रहे हैं. पेट्रोल-डीजल के दाम में बुधवार को भी कोई बदलाव नहीं हुआ है. आपको बता दें कि रविवार को अगस्त महीने में पहली बार लगातार दूसरे दिन पेट्रोल (Petrol) और डीजल (Diesel) की कीमतों में बढ़ोतरी देखी गई थी.

महानगरों में पेट्रोल-डीजल के भाव
इंडियन ऑयल (Indian Oil) की वेबसाइट के अनुसार बुधवार को दिल्ली, मुंबई, कोलकाता और चेन्नई में पेट्रोल के लिए ग्राहकों को क्रमश: 72.07 रुपये, 77.73 रुपये, 74.77 रुपये और 74.86 रुपये प्रति लीटर बिक रहा है. वहीं दूसरी ओर चारों महानगरों में ग्राहकों को डीजल के लिए क्रमश: 65.35 रुपये, 68.51 रुपये, 67.73 रुपये और 69.04 रुपये प्रति लीटर बेचा जा रहा है. 

SMS के जरिए पेट्रोल-डीजल के दाम जानने के लिए आप इंडियन ऑयल ग्राहक RSP<डीलर कोड> 92249 9 2249 को भेज सकते हैं. बीपीसीएल ग्राहकों को RSP<डीलर कोड> 9223112222 पर भेजना होगा. एचपीसीएल ग्राहकों को HPPRICE<डीलर कोड> 9222201122 पर भेजना होगा. 

रोजाना सुबह 6 बजे बदलती हैं कीमतें
पेट्रोल-डीजल के दाम हर दिन घटते-बढ़ते रहते हैं. पेट्रोल-डीजल का नया दाम सुबह 6 बजे से लागू हो जाता है. इनकी कीमत में एक्साइज ड्यूटी, डीलर कमीशन सब कुछ जोड़ने के बादल इसकी कीमत लगभग दोगुनी हो जाती है. पेट्रोल डीजल की कीमत को अमेरिकी डॉलर का एक्सचेंज रेट, क्रूड ऑयल की कीमत, ईंधन की मांग और अन्य चीजें प्रभावित करती रहती हैं. जब इंटरनेशनल क्रूड ऑयल की कीमत बढ़ती है तो भारत में इनका दाम बढ़ता है. भारत में पेट्रोल-डीजल की कीमतें अंतर्राष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के भाव पर निर्भर करती हैं क्योंकि देश में तेल की खपत का काफी बड़ा हिस्सा आयात होता है.

पेट और सांस संबंधी रोगों को दूर करती है मुलेठी

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हमारी सेहत के लिए मुलेठी बेहद गुणकारी होती हैं। इसलिए हर रोज इसका सेवन करना चाहिए। मुलेठी एक एेसी औषधी है जिसके प्रयोग से कई रोगों से छुटकारा पाया जा सकता है।

ग्लिसराइजिक एसिड के होने की वजह से इसका स्वाद शक्कर से 50 गुना ज्यादा मीठा होता है। ये पेट के रोग, सांस संबंधी रोग और स्तन रोग को दूर करती है। चलिए जानते हैं इसके फायदों के बारे में..

-अगर आपके गले में खराश हो गई, या फिर सर्दी और खांसी हो गई हैं तो आप मुलेठी का सेवन कीजिए,इससे आपकी सेहत ठीक रहेगी। इसका सेवन करने से बेहद आराम मिलता है। जिन लोगों को दमा की परेशानी हो उनके लिए मुलेठी लाभकारी होती है। ये बलगम को निकालती है और खांसी से आराम मिलता है।

-क्या आप कैविटी करने वाले बैक्टीरिया से परेशान हैं तो आप मुलेठी का यूज कीजिए,इससे आपके दांत ठीक रहेंगे। अच्छी सेहत के लिए इसके जड़ के पाउडर का प्रयोग करना चाहिए।

-अगर आप अल्सर से परेशान हैं तो मुलेठी का सेवन कीजिए। इससे पेट के अल्‍सर ठीक हो जाएंगे। मुलेठी का चूर्ण अल्सर के अपच और एसिडिटी पर लाभकारी प्रभाव डालता है। साथ ही अल्सर के घावों को भी तेजी से भरता है। ये कब्ज और सीने में जलन जैसी परेशानियों के इलाज में भी सहायता करता है।

-क्या आपको बार-बार हिचकी आती हैं, तो आप 5 ग्राम मुलेठी के चूर्ण को पानी के साथ खाने से फायदा होता है।

हमारी स्किन के लिए बेहद गुणकारी होते हैं नीम के पत्ते

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 हमारी स्किन के लिए नीम के पत्ते बेहद गुणकारी होते हैं, इसका यूज करके हम स्किन को ठीक कर सकते हैं। गर्मियों में त्वचा की कई तरह की समस्याएं हो जाती है। पसीने की वजह से मुंहासे और ऑयली स्किन की परेशानी का सामना करना पड़ता है।

ऐसे में महिलाएं कई तरह के ब्यूटी सामान का यूज करती हैं जिससे अधिक फर्क देखने को नहीं मिलता। ऐसे में नीम की पत्तियों का यूज करके चेहरे की सभी परेशानियां को दूर किया जा सकता है। नीम के पत्तों में एंटी-बैक्टीरियल और एंटी-फंगल गुुण होते हैं जो त्वचा को कई तरह के लाभ पहुंचाता है।

-गर्मियों में पसीने के कारण से चेहरे पर मुंहासों की परेशानी हो जाते हैं। ऐसे में नीम की पत्तियों को उबाल लीजिए और कॉटन की मदद से इस पानी को मुंहासों पर लगाना चाहिए।

-चेहरे पर बढ़ती उम्र के साथ झुर्रियों की परेशानी देखने को मिलती है। झुर्रियों को कम करने के लिए नीम के पानी को हर रोज चेहरे पर लगाना चाहिए और सूखने के बाद साफ कीजिए।

-अगर स्किन पर एलर्जी हो जाती है जिस कारण से उनके चेहरे और शरीर के दूसरे हिस्सों पर दाग-धब्बे हो जाते हैं। ऐसे में नीम की कुछ पत्तियों को पानी में उबाल लीजिए और इस पानी से नहाएं लीजिए। नीम में मौजूद एंटी-बैक्टीरिल गुण स्किन की इंफैक्शन को समाप्त करता है।