Home Blog Page 2776

डायबिटीज के मरीजों को नहीं लेना पड़ेगा इंसुलिन का इंजेक्शन अगर इन पांच चीजों का करेंगे सेवन…

0

भारत में हर चौथा इंसान डायबिटीज के किसी न किसी प्रकार से पीड़ित है। डायबिटीज के मरीज को समय के साथ दिल और गुर्दों की बीमारियां घेर लेती हैं। शरीर में इंसुलिन का स्तर गिरने लगता है तो शुगर के मरीजों को अलग से इंसुलिन का इंजेक्शन लेना पड़ता है। लेकिन अगर सही खानपान और जीवनशैली पर नियंत्रण रखा जाए तो डायबिटीज जैसी गंभीर रोग के होते हुए भी इंसान स्वस्थ जीवन जी सकता है। तो आइए जानते वो कौन से खाद्य पदार्थ हैं जिनका सेवन शुगर के मरीजों के लिए वरदान है। 

हल्दी वैसे तो हल्दी का सेवन भारतीय खानों में किया ही जाता है। लेकिन अगर किसी को टाइप टू डायबिटीज की बीमारी है तो उसे हल्दी का सेवन जरूर करना चाहिए। हल्दी में करक्यूमिन नामक सक्रिय घटक होता है जो डायबिटीज को रोकने में मदद करता है। 

मेथी आयुर्वेद के नियमों के अनुसार अगर किसी को मधुमेह की बीमारी है तो उसे रोज सुबह खाली पेट मेथी के पाउडर का सेवन गर्म पानी के साथ करना चाहिए। मेथी से शुगर को नियंत्रित करने में मदद मिलती है जिससे शरीर में इंसुलिन की मात्रा बढ़ जाती है। 

करेला बहुत सारे ऐसे खाद्य पदार्थ हैं जिनका नियमित रूप से सेवन शरीर में मधुमेह की बीमारी के असर को कम करता है। इसी में शामिल में करेला। जिसके कड़वे स्वाद में छुपा है सेहत का खजाना। डायबिटीज की तकलीफ होने पर सुबह करेले के जूस का सेवन असरकारक है। 

बेरी बेरी जैसे फलों का सेवन जो स्वाद में थोड़े खट्टे होते हैं, करने से भी शुगर नियंत्रित रहती है। खून में शुगर का स्तर सामान्य रखने और इन्सुलिन की मात्रा को सही रखने में यह मदद करता है। 

मिस्सी रोटी मधुमेह से पी़ड़ित व्यक्ति को केवल गेंहू के आटे की रोटी नहीं खानी चाहिए। इस आटे में चने का आटा मिलाकर उसकी रोटी का सेवन करने से शुगर नियंत्रित होता है क्योंकि चने के आटे में ग्लिसेमिक इंडेक्स 70 होता है और गेंहू के आटे में सौ होता है।

पाठकों के दिमाग़ में गोबर भर देने के ज़िद पर अड़ा हिन्दी मीडिया

0

पिछले शुक्रवार को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने जो एलान किया, उसे बड़ा बताकर मीडिया चुप हो गया है। ख़ासकर हिन्दी पाठकों के दिमाग़ में गोबर भर देने के ज़िद पर अड़ा हिन्दी मीडिया। अख़बार और टीवी दोनों।

क्या किसी ने बताया आपको कि 1400 मामले वापस ले लिए गए, वे मामले क्या थे, किन लोगों के ख़िलाफ़ चल रहे थे, उनकी गंभीरता क्या थी? लेकिन वित्त मंत्री ने टैक्स अधिकारियों के कथित आतंक के कंधे पर बंदूक रखकर सारे मामले वापस कर लिए। जहां आई ए एस और आई पी एस बोल नहीं पा रहे हैं, वहां सिर्फ आयकर अधिकारी ही थे जो स्वतंत्र रूप से नोटिस भेज रहे थे और बिजनेस घरानों को परेशान कर रहे थे। कितनी मासूम दलील है। दिल आ जाता है ऐसी मूर्खता के सावन पर।

उसी तरह से जो फैसला लिया गया वो नौकरी वालों के हित में था या बिजनेस के हित में?

aunindyo chakravarty ने इसे विस्तार से समझाया है कि किस तरह से बिजनेस कंपनियां नौकरी जाने का भय दिखा कर सरकार से बड़ी रियायतें वसूल ले गईं। इससे नौकरी जाने या नई नौकरी मिलने की संभावना पर कोई फर्क नहीं पड़ेगा।

अलग-अलग नज़रिए से चीज़ों को देखने समझने का सिलसिला जारी रहे। इस लेख को पढ़ें ज़रूर। हिन्दी के अख़बार और चैनल का उपभोग कर रहे हैं तो सवालों के साथ कीजिए। ज़रा दिमाग़ लगाइये कि ये जो बता रहा है उसमें सूचना कितनी है। कितनी तरह की सूचना है। या सिर्फ जयजयकार है। बाकी आपकी नियति फिक्स हो चुकी है। वो नहीं बदलने वाली।

क्या बीजेपी को रोकने के लिए अपना सब कुछ दाव पर लगा देगी कांग्रेस

0

देश आजादी के बाद करीब 6 दशकों तक देश पर राज करने वाली कांग्रेस पार्टी (Congress party) की हालात ऐसी हो जाएगी शायद इसका अंदाजा किसी ने नहीं लगाया होगा. 2014 के लोकसभा (Lok Sabha) से शुरु हुआ कांग्रेस का पतन 2019 के लोकसभा चुनाव के बाद और तेज हो गया. हालंकि, 2018 के अंत में हुए तीन राज्यों के विधानसभा चुनावों में ऐसा लगा कि कांग्रेस एक बार वापसी करेगी लेकिन 2019 के चुनावों में मिली हार के बाद कांग्रेस नेतृत्व भी संकट में चला गया. हालांकि, सोनिया गांधी ने कांग्रेस की कमान अपने हाथ में लेकर इस संकट को कुछ हद तक कम करने की कोशिश की है. फिलहाल, तीन राज्यों में होने वाले चुनावों को लेकर कांग्रेस की तैयारी को देखकर सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है कि कांग्रेस का पूरा जोर सत्ता में वापसी करने की बजाय बीजेपी को रोकने में पर है. इसके लिए कांग्रेस अपना सब कुछ दाव पर लगाने को तैयार है.

बीजेपी को रोकने के लिए हर राज्य में गठबंधन
इस साल के अंत में जिन तीन राज्यों में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं, उनमें हरियाणा और महाराष्ट्र में जहां कांग्रेस पिछले विधानसभा चुनाव में सत्ता से बाहर हुई थी. वहीं, पश्चिम बंगाल में पिछले चार दशक से कांग्रेस सत्ता में आने का इंतजार कर रही थी लेकिन इस बार कांग्रेस नेतृत्व ने जिस तरह बीजेपी रोकने के लिए ममता बनर्जी के सामने आत्मसमर्पण कर दिया उससे साफ है चार दशक बाद अब कांग्रेस के नेता सत्ता में वापसी के अपने सारे रास्ते बंद देख रहे हैं.

उनका उद्देश्य सिर्फ बीजेपी को पश्चिम बंगाल में सत्ता से आने से रोकना है. कुछ यही हाल महाराष्ट्र का भी है. एनसीपी और कांग्रेस में जिस तरह के समझौते के खबरें आ रही हैं उसमें एक बात साफ है एनसीपी फ्रंटफूट पर है जबकि कांग्रेस बैकफुट पर है. बात करें हरियाणा तो बीजेपी रोकने की राजनीति के नाम पर कांग्रेस दो फाड़ हो चुकी है जिन नेताओं के सहारे कांग्रेस बीजेपी सरकार को उखाड़ फेकने की कोशिश में लगी है वो नेता पार्टी के साथ कितने दिन रहेंगे इसका भी भरोसा नहीं है. जम्मू कश्मीर में भी धारा 35ए और 370 हटाने का कांग्रेस के कुछ नेताओं ने जिस तरह विरोध किया उसमें भी कांग्रेस की नीतियों से ज्यादा असर बीजेपी के विरोध का रहा है. यही वो कारण था जिसके चलते इस बड़े मुद्दे पर कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व में भी फूट नजर आई. साथ ही जिस तरह कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने पार्टी के दिग्गज नेताओं के 370 हटाने के सरकार के फैसला का समर्थन करने के बाद विपक्ष के नेताओं के साथ कश्मीर की यात्रा की उससे साफ है कि कांग्रेस बीजेपी का विरोध करने के लिए कोई भी कीमत देने को तैयार है.

IIT मुंबई से की है M.Tech की पढ़ाई, अब करेगा रेल पटरियों की मरम्‍मत…

0

शुरुआत से ही वे सरकारी नौकरी करना चाहते थे. कुमार को भरोसा है कि वे भविष्य में सरकारी अधिकारी बनेंगे.

देश की सबसे प्रतिष्ठित इंजीनियरिंग संस्थानों में शुमार आईआईटी मुंबई ( IIT Bomaby) से एमटेक करने के बाद रेलवे की ग्रुप डी नौकरी ट्रैक मेनटेनर (ट्रैकमैन) के पद पर ज्‍वॉइन करने वाले पटना के श्रवण कुमार इन द‍िनों खूब चर्चा में हैं.श्रवण की पोस्‍टिंग 30 जुलाई को धनबाद रेल मंडल में की गई हैं. दरअसल, आईआईटी जैसे प्रतिष्‍ठ‍ित शैक्षण‍िक संस्‍थान में पढ़ाई करने वाले छात्रों से बेहतर नौकरी की उम्‍मीद की जाती है. ऐसे में एम.टेक करने के बाद श्रवण कुमार का रेलवे के ग्रुप डी पद पर ज्‍वॉइन करना सभी को हैरान कर रहा है. 

श्रवण कुमार ने बतौर ट्रैक मेनटेनर (इसे ट्रैकमैन भी कहा जाता है) रेलवे में ज्‍वॉइन क‍िया है. इस पद पर न‍ियुक्‍त कर्मचारियों की प्रमुख जिम्‍मेदारी होती है रेलवे ट्रैक की देखभाल करना. 

जानिए क्या करता है ट्रैकमैन
श्रवण कुमार ने धनबाद रेलवे डिविजन में ट्रैक मेनटेनर (ट्रैकमैन) की पोस्ट पर जॉइन किया. उनकी पोस्टिंग पब्लिक वर्क्स इंस्पेक्टर (PWI) के अंडर चंदरपुरा में हुई. वे चंदरपुरा और Telo सेक्शन के बीच पटरियों के मेंटेनेंस का काम देखेंगे. ट्रैकमैन को एक सीमित दायरे की पटरियों की देखभाल की जिम्मेदारी दे दी जाती है. जिसे जिस दायरे की जिम्मेदारी दी गई, उसका काम से देखना होता है कि उतने हिस्से की पटरियां पूरा तरह दुरुस्त हो. उनमें कोई कमी न आए. उन्हें पटरी के किसी भी जॉइंट पर किसी नट-बोल्ड में कोई कमी लगती है तो वे तुरंत उसकी मरम्मत करते हैं. 
देश की सबसे प्रतिष्ठित इंजीनियरिंग संस्थान से इतनी बड़ी डिग्री लेकर ग्रुप डी की नौकरी जॉइन करने पर धनबाद रेलवे डिविजन के अफसर भी चौंक गए थे. बिहार की राजधानी पटना के निवासी श्रवण ने 2010 में आईआईटी जेईई में सफलता पाई. उनकी कटेगरी रैंक (सीएमएल) 1,570 थी. उन्होंने आईआईटी मुंबई में इंटीग्रेटेड डुएल डिग्री कोर्स में दाखिला लिया था. साल 2015 में उन्होंने एक साथ बीटेक और एमटेक की डिग्री हासिल की. उनकी ब्रांच मेट्रोलॉजी एंड मैटेरियल साइंस थी.

शुरुआत से ही वे सरकारी नौकरी करना चाहते थे. कुमार को भरोसा है कि वे भविष्य में सरकारी अधिकारी बनेंगे. उनके बहुत से सहपाठी और IITian दोस्त प्राइवेट नौकरी कर रहे हैं, लेकिन वे श्रवण को भी प्राइवेट नौकरी करने के लिए मनाने में नाकाम रहे. 
दिल्‍ली यूनिवर्सिटी की 8वीं कटऑफ जारी, कुछ सीटें अब भी खाली

जमानत पर सुनवाई से जज का इनकार, हनीप्रीत को जेल में ही रहना होगा

0

हरियाणा हाई कोर्ट ने सोमवार को हनीप्रीत की जमानत याचिका पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया. अदालत के इस फैसले ने बाबा की चहेती हनीप्रीत को मुश्किल में डाल दिया है. इससे पहले भी हनीप्रीत की ओर से स्थानीय अदालत में जमानत याचिका दायर की गई थी. जिसे खारिज कर दिया गया था. उसी के बाद हनीप्रीत ने हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था.

डेरा सच्चा सौदा के प्रमुख गुरमीत राम रहीम सिंह इंसा की खासमखास रही हनीप्रीत अभी जेल से बाहर नहीं आ पाएंगी. हाई कोर्ट के जज जस्टिस सुरेंद्र गुप्ता ने उनकी जमानत याचिका पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया. इससे पहले भी हनीप्रीत की याचिका निचली अदालत से खारिज हो गई थी. ऐसे में हनीप्रीत का जमानत पर जेल से बाहर निकलना मुश्किल लग रहा है. हालांकि जज साहब ने हनीप्रीत की जमानत याचिका को चीफ जस्टिस के पास भेज दिया.

आपको बता दें कि गुरमीत राम रहीम के जेल जाने के बाद अगर कोई शख्स सबसे ज्यादा सुर्खिय़ों में था, तो वो थी हनीप्रीत उर्फ प्रियंका तनेजा. बाबा की सबसे खास और अहम राजदार हनीप्रीत इस वक्त जेल में बंद है. वो हर दिन जेल से बाहर आने की कवायद कर रही है. लेकिन उसकी तमाम कोशिशें नाकाम साबित हो रही हैं. हनीप्रीत की डेरे में अहम भूमिका थी. वहां होने वाले हर फैसले में उसकी सहमति भी ज़रूरी होती थी. आखिर कौन है हनीप्रीत. हम आपको बताने जा रहे हैं हनीप्रीत के बारे में वो सबकुछ जो आप जानना चाहते हैं.

कौन है हनीप्रीत

जिस हनीप्रीत इंसा को आप जानते हैं, उसका असली नाम प्रियंका तनेजा है. जी हां, सही सुना आपने प्रियंका तनेजा. उसके पिता रामानंद तनेजा हैं, जबकि मां का नाम आशा तनेजा है. उसका एक भाई साहिल तनेजा और एक बहन नीशु तनेजा है. वह मूल रूप से फतेहाबाद, हरियाणा की रहने वाली है.

ऐसे डेरे में आई थी हनीप्रीत

मूल रूप से हरियाणा के फतेहाबाद जिले की रहने वाली प्रियंका तनेजा 1996 में पहली बार डेरे के कॉलेज में 11वीं क्लास में पढ़ने के लिए आई थी. पहले डीएवी स्कूल फतेहाबाद से उसने दसवीं की परीक्षा पास की थी. डीएवी स्कूल में प्रियंका की तत्कालीन क्लास टीचर सुनीता मदान के मुताबिक वो पढ़ने में तेज नहीं थी. मगर उसे नाचने, गाने और अभिनय का बहुत शौक था. जब वह डेरे में आई तो उसी साल राम रहीम लड़कियों को आर्शीवाद देने के बहाने उनके स्कूल में आया. तभी उसकी नजर प्रियंका तनेजा पर पड़ी.

प्रियंका बन गई राम रहीम की हनीप्रीत

कुछ समय बाद ही राम रहीम ने प्रियंका तनेजा को अपने वश में कर लिया. और फिर उसका नया नाम करण किया गया. अब प्रियंका राम रहीम की हनीप्रीत बन चुकी थी. धीरे-धीरे हनीप्रीत और राम रहीम की नजदीकियां बढ़ने लगी. ऐसे में बाबा के राज भी हनीप्रीत के सामने आने लगे. हनीप्रीत अब गुरमीत की सबसे करीबी बन गई थी. गुरमीत उस पर इतना मेहरबान था कि उसे कभी डेरे से बाहर नहीं जाने दिया. उसकी पढ़ाई लिखाई सब डेरे में ही करवाई गई. वहीं पर उसके नाम पर कई बड़े कारोबार शुरू किए गए.

राम रहीम का भक्त था हनीप्रीत का परिवार

दरअसल, प्रियंका तनेजा का पूरा परिवार पिछले कई सालों से डेरे का अनुयायी है. आज भी डेरे में कई बड़े प्रोजेक्ट हनीप्रीत के नाम से चल रहे हैं. यही नहीं उसके भाई साहिल तनेजा को भी गुरमीत का आर्शीवाद मिला. वह डेरे में बड़े स्तर पर कारोबार करता है. हनीप्रीत के पिता रामानंद तनेजा पहले पुरानी दिल्ली के सामने एमआरएफ टायर्स का शोरूम चलाते थे. जिसका नाम सच टायर्स था. लेकिन बाद में उन्होंने डेरे में ही एक बड़ा सीड प्लांट डाल लिया. हनीप्रीत की एक छोटी बहन है नीशु तनेजा, जिसकी शादी गुड़गांव में हुई है. बताय़ा जाता है कि उसकी शादी में भी बाबा का खास योगदान था.

पिता को मिली थी अहम जिम्मेदारी

इसी तरह से हनीप्रीत के चाचा अभी भी सिरसा के परशुराम चौक पर एमआरएफ टायर का शोरूम चलाते हैं. उसके मामा और कई रिश्तेदार सिरसा के मुख्य मार्गों पर टायरों का कारोबार करते हैं. हनीप्रीत के नाम पर डेरे के अंदर एक बुटीक भी है. अब उसके पिता रामानंद तनेजा डेरा की पर्चेजिंग कमेटी के हेड हैं. बाजार का सारा लेन-देन उनके जिम्मे था.

केवल नाम की शादी

प्रियंका तनेजा उर्फ हनीप्रीत और विश्वास गुप्ता की शादी 14 फरवरी, 1999 को डेरा प्रमुख राम रहीम ने ही कराई थी. हालांकि दोनों की शादी ज्यादा दिन नहीं चल सकी. कुछ समय बाद हनीप्रीत ने राम रहीम से शिकायत की कि उसके ससुराल वाले उसे दहेज के लिए परेशान कर रहे हैं. बताया जाता है कि राम रहीम ने हनीप्रीत की शादी तो गुप्ता से कराई थी, लेकिन उसे कभी भी हनीप्रीत के साथ संबंध बनाने नहीं दिया गया.

2009 में राम रहीम ने लिया था गोद

इसके बाद राम रहीम ने साल 2009 में उसे गोद ले लिया. राम रहीम की खुद की दो बेटियां और एक बेटा है. उनके नाम अमनप्रीत, चमनप्रीत और जसमीत इंसा हैं. इसके बाद साल 2011 में विश्वास गुप्ता ने पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में मुकदमा दायर कर राम रहीम के कब्जे से उसकी पत्नी यानी हनीप्रीत को मुक्त कराने की मांग की थी. गुप्‍ता ने राम रहीम पर हनीप्रीत के साथ अवैध संबंध होने का भी आरोप लगाया था.

हनीप्रीत उन चंद डेरा समर्थकों में से एक है जिसकी गिनती राम रहीम के करीबियों में होती है. वह डेरा के कई महत्‍वपूर्ण फैसले लेने के साथ ही राम रहीम की फिल्‍मों को भी डायरेक्‍ट कर चुकी है. उसने ‘MSG: द वॉरियर लॉयन हार्ट’ का भी निर्देशन किया है. राम रहीम को दोषी ठहराए जाने के दौरान वह कोर्ट रूम से लेकर जेल भेजे जाने तक साये की तरह राम रहीम के साथ नजर आई थी.

बाबा राम रहीम कोई भी फैसला लेने से पहले सिर्फ हनीप्रीत से ही सलाह लेता था. बाबा की इस बेबी के हाथ में डेरे की सभी चाबियां रहती थीं. पैसे से लेकर हर वो फैसला जो डेरे से संबंधित होता था, वो हनीप्रीत की करती थी. हनीप्रीत ही राम रहीम के फिल्म प्रोडक्शन का काम संभालती थी. बाबा की सारी फिल्में हनीप्रीत ने ही डायरेक्ट की थीं.

इस शख्स से ‘घबराता’ है चिदंबरम परिवार, जिसकी मदद से जांच एजेंसियों ने कसा शिकंजा

0

पूर्व वित्त मंत्री पी. चिदंबरम और कार्ति चिदंबरम को कानून के शिकंजे तक पहुंचाने में एक शख्स का बड़ा योगदान है। ये दोनों भले ही उस शख्स से नाराज हों और उसे गलत ठहराते रहे, लेकिन सीबीआई और ईडी अप्रत्यक्ष तौर पर उसका शुक्रिया करती रही हैं। उस शख्स ने चिदंबरम परिवार के किस देश में कहां प्रॉपर्टी है, बैंक खातें हैं या प्रॉपर्टी खरीद का जरिया क्या है, ये सभी जानकारियां सबूतों के साथ जांच एजेंसियों को सौंपी थी।

स्वामी ने दी जानकारी

ये शख्स कोई और नहीं बल्कि भाजपा के वरिष्ठ नेता सुब्रमण्यम स्वामी हैं। ईडी और आयकर विभाग 2015 में चिदंबरम के खिलाफ धीरे-धीरे कुछ खोजने में लगा था, लेकिन ज्यादा सफलता नहीं मिल पा रही थी। तभी अचानक सुब्रमण्यम स्वामी पूर्व वित्त मंत्री के खिलाफ खुलकर सामने आ गए। उन्होंने जांच एजेंसियों को अलर्ट भेजना शुरु कर दिया। मार्च 2017 में उन्होंने पीएम नरेंद्र मोदी को सात पन्नों का एक पत्र भेजकर चिदंबरम का मामला उछाल दिया। करीब 23 विदेशी बैंकों में चिदंबरम परिवार के खाते, कैंब्रिज में प्रॉपर्टी और रुपयों का लेन-देन, यह सब कैसे हुआ, ये जानकारी भी जांच एजेंसियों को दे दी गई। इस परिवार की मुखौटा कंपनियां कहां-कहां पर हैं, ये सूचना भी ईडी के पास पहुंच चुकी थी।

24 देशी-विदेशी कंपनियों के दस्तावेज सौंपे

आयकर विभाग ने स्वामी के मुहैया कराए गए दस्तावेजों की जांच की, तो सब सही निकलता चला गया। चिदंबरम परिवार के ठिकानों पर छापेमारी कर आयकर विभाग ने दो सौ से ज्यादा पन्नों की रिपोर्ट तैयार कर दी। एक हार्ड डिस्क भी जब्त की गई, जिसमें काई अहम जानकारियां थीं। इसके बाद स्वामी ने ही करीब 24 देशी-विदेशी कंपनियों के दस्तावेज जांच एजेंसी को दे दिए। इनमें भ्रष्टाचार से जुड़े मामलों की कई फाइलें भी थीं। साथ ही, 18 ऐसी कंपनियों के दस्तावेज भी जांच एजेंसियों के हाथ में दे दिए, जिनसे यह पता चला कि चिदंबरम परिवार ने कई कंपनियों में कथित तौर पर गैर-कानूनी तरीके से रुपयों का लेन-देन किया था। इनमें विदेशी कंपनियों की खरीद-फरोख्त के दस्तावेज भी शामिल थे।

कैंब्रिज में प्रॉपर्टी खरीदी

ईडी अधिकारी का कहना है कि स्वामी ने जो भी दस्तावेज सार्वजनिक किए, जांच के दौरान वे सभी सही पाए गए। स्वामी ने विदेश में चिदंबरम परिवार की जिन संपत्तियों का जिक्र किया था, हार्ड डिस्क की जांच में भी वही बातें सामने आईं। आयकर विभाग को स्वामी के जरिये यह पहले ही पता चल गया था कि कीर्ति की कंपनियों में पी चिदंबरम, उनकी पत्नी नलिनी चिदंबरम और कीर्ति की पत्नी श्रीनिधि का भी शेयर है। 2008 में कैंब्रिज में ‘सीबी 237 एक्यू’ प्रॉपर्टी खरीदी गई थी। यह प्रॉपर्टी एडमंड सुले हॉल्ट और हैदर हॉल्ट नाम से खरीदी गई।

विजय माल्या से था कनेक्शन

यह प्रॉपर्टी खरीदने के लिए लंदन स्थित मेट्रो बैंक में कीर्ति चिदंबरम के खाता संख्या 16714313 से पेमेंट की गई थी। चिदंबरम ने इस प्रॉपर्टी में केवल नलिनी का हिस्सा बताया था, जबकि कीर्ति ने उस प्रॉपर्टी को दूसरे तरीके से बांटा था। बतौर स्वामी, चिदंबरम ने इस प्रॉपर्टी को सार्वजनिक नहीं किया था। इसके बाद स्वामी ने ये बात भी खोल दी कि विजय माल्या की ब्रिटिश कम्पनी डिएगो स्कॉटलैंड लिमिटेड से कीर्ति की कंपनी को पंद्रह हजार यूएस डॉलर दे दिए गए। इस बाबत स्वामी का आरोप था कि यह राशि कथित तौर पर माल्या की पीएम और वित्तमंत्री से मुलाकात कराने के लिए दी गई थी।

पी चिदंबरम ने की कार्ति की मदद

साल 2015 में जब सुब्रमण्यम स्वामी ने कार्ति चिदंबरम की कई कंपनियों के बीच हुए वित्तीय लेनदेन का खुलासा किया, तो एंडवांटेज कंसलटिंग प्राइवेट लि., आईएनएक्स मीडिया और एयरसेल-मैक्सिस डील में कई नए दस्तावेज सामने आ गए। स्वामी ने सार्वजनिक तौर से पी. चिदंबरम पर यह आरोप लगा दिया कि उन्होंने बतौर वित्तमंत्री रहते हुए अपने बेटे कार्ति चिदंबरम को एयरसेल-मैक्सिस डील के जरिए फायदा लेने में मदद की। इसके लिए न केवल दस्तावेजों की प्रक्रिया रोकी गई, बल्कि कुछ समय के लिए अधिग्रहण प्रक्रिया को भी नियंत्रित कर दिया गया और यह सब इसलिए किया गया ताकि कीर्ति चिदंबरम को अपनी कंपनियों के शेयरों की कीमतें बढ़ाने का वक्त मिल जाए।

पीएम को लिखा था पत्र

साल 2017 में स्वामी ने पीएम से मांग की थी कि जल्द से जल्द चिदंबरम परिवार के खिलाफ सीबीआई और ईडी की जांच शुरु कराई जाए। उनकी प्रॉपर्टी जब्त हो।स्वामी ने अपने पत्र में यह भी लिख दिया कि वित्त मंंत्रालय आयकर विभाग की चेन्नई यूनिट को इस मामले की जांच के लिए इजाजत नहीं दे रहा है। छह माह से उनके पास दस्तावेज मौजूद हैं, लेकिन अभी तक कोई भी कार्रवाई नहीं हुई। एफआईपीबी की मंजूरी पर भी स्वामी ने कई खुलासे किए। इसके दो माह बाद ही सीबीआई ने मई 2017 को आईएनएक्स मीडिया मामले में एफआईआर दर्ज कर दी। इसके साथ ईडी ने भी मनी लांड्रिंग निरोधक कानून (पीएमएलए) के तहत मामला दर्ज कर चिदंबरम परिवार पर अपना शिकंजा कस दिया।

19 साल में 113 फिल्मे कर चुका यह मशहूर अभिनेता अब हो गया कंगाल ,अब जी रहा है ऐसी जिंदगी

0

दोस्तों आज हम आपको एक ऐसे एक्टर के बारे में बताने वाले है जो अब कंगाल होकर अपनी जिंदगी बिता रहा है, उस एक्टर का नाम राजपाल यादव है जिन्होंने अपने अभिनय करियर की शुरुआत साल 1999 में फिल्म दिल क्या करे से की थी। राजपाल यादव अबतक लगभग 113 फिल्मों में काम कर चुके है अपने शानदार कॉमेडी से इन्होंने अपने फैंस को कई सालों तक हँसाया है इनका क्रेज फैंस के बीच इतना था कि यह एक साल में दस से अधिक फिल्में करते थे।

लेकिन आज राजपाल यादव अपनी जिंदगी गुमनामी में में बिता रहे है इससे पहले यह जेल भी जा चुके है इन्होंने साल 2010 में अपनी फिल्म अता पता लापता के लिए 5 करोड़ कर्ज लिया था जिसे वह चूका नहीं पाए और उन्हें तीन महीने के लिए जेल जाना पड़ा था।

उनकी यह फिल्म बॉक्स ऑफिस पर पूरी तरह से असफल रही थी इस फिल्म ने राजपाल यादव की जिंदगी में उथल पुथल मचा दी थी इनके हालात इतने खराब हो गए थे की यह 5 करोड़ नहीं चूका पाए। राजपाल यादव अब पूरी तरह से कंगाल हो चुके है फिल्मी दुनिया से अभी तक किसी ने भी उनकी मदद के लिए हाथ नहीं बढ़ाया है।

आप भी जानिए अंडा खाने से कौन कौन-सी बीमारियां दूर होती है…

0

अंडा हमारी सेहत के लिए बहुत लाभदायक होता है। यह बात तो डॉक्टर भी कहते है। आपने बच्चपन में सुना होगा कि संडे हो या मंडे रोज खाएं अंडे। यह बात सत्य है कि अंडे खाने से बहुत सी बीमारियां दूर होती है। हर रोज सिर्फ एक अंडा खाने से भी बहुत फायदा मिलता है। यहां तक की आप कई गंभीर बीमारियों से भी छुटकारा पा सकते हैं।

हर रोज एक अंडे का सेवन करने से 12 प्रतिशत स्ट्रोक पडऩे की आशंका कम हो जाती है। अमेरिका के शोधकर्ताओं ने एक अध्ययन किया है, जिसमें पाया कि कोरोनरी हार्ट डिजीज जिससे सबसे अधिक मौतें होती हैं, जैसी गंभीर बीमारी से सिर्फ हर रोज एक अंडा खाकर बचा जा सकता है।

अंडे का सेवन करने तथा स्ट्रोक होने के खतरे के बीच क्या कनेक्शन है। अंडे में बहुत सारे न्यूट्रिशंस होते हैं, एंटीऑक्सीडेंट्स से भरपूर अंडा ऑसीडेटिव तनाव तथा इन्फ्लेमेशन को कम करता है। इतना ही नहीं अंडे में प्रोटीन की भरपूर मात्रा होती है जो कि ब्लड प्रेशर कम करने में मदद करता है। एक बड़े अंडे में 6 ग्राम प्रोटीन होता है साथ ही इसमें जियैक्सेंथिन तथा ल्यू्टिन नामक एंटीऑक्सीडेंट होते हैं जो कि अंडे की जर्दी में मौजूद होते हैं। साथ ही इसमें विटामिन ई, डी तथा ए मौजूद होता है।

विटामिन ई हार्ट अटैक कम करने में मदद करता है, खासतौर पर उन लोगों में जिन्हें हार्ट डिजीज हैं।

इसे पढ़ने के बाद आप कभी खुद को रोक नहीं पाएंगे बैंगन खाने से

0

आपने यह अवश्य सुना होगा की सब्जियां हमारी सेहत के लिए कितनी ज्यादा फायदेमंद होती हैं लेकिन आप को ये पता हैं की इससे क्या और कैसे फायदे होंगे | अगर सब्जियों को सिर्फ सब्जियों की तरह ही देखा और खाया जाए तो आपको वो आनंद नहीं आएगा जो आपको तब मिलता है

जब आपको बहुत अच्छी तरह मालूम हो कि आप जो सब्जी खा रहे हैं वो शरीर के लिए कितनी ज्यादा फायदेमंद है बेंगन तो आप खाते ही होंगे और अगर नहीं खाते हैं तो फिर हमारा दवा है की इसे पढ़ने के बाद आप बेंगन खाने से खुद को कभी भी रोक नहीं पाएंगे।

बैंगन एक बहुत ही कम कैलोरी वाली सब्जी है जो उन लोगों द्वारा अच्छी मात्रा में लिया जा सकता है जो अपनी अतिरिक्त कैलोरी को बहुत कम करना चाहते हैं। अपने डाइट की लिस्ट में बेंगन को जोड़ने से आपका वजन कम होने में बहुत मदद मिलेगी।

यह आहार फाइबर का खजाना है और अपने शरीर में फाइबर की भरपूर आपूर्ति के लिए आपको पर्याप्त मात्रा में इसका सेवन करना चाहिए। या अच्छे पाचन में भी सहायक है। यदि आप पर्याप्त मात्रा में बैंगन खाते हैं तो आपका शरीर हल्का और बहुत ज्यादा ऊर्जावान लगता है|

सावधान! फ्रिज में रखी ये 5 चीज आपके लिए है जहर, आज ही फेंक दें बाहर

0

ज्यादातर लोग बचे हुए खाने को फ्रिज में रख देते हैं. खासतौर पर गर्मियों के सीजन में खाने के खराब होने से बचाने के लिए हम बचे हुए खाने को फ्रिज में रखते हैं. लेकिन क्या आप जानते हैं हम कुछ ऐसे खाने को भी फ्रिज में रख देते हैं, जो फ्रिज में रखने के बाद खाने से सेहत के लिए नुकसान हो जाता है. चलिए जानते हैं आखिर कौन सी हैं वो चीजें जिसे फ्रिज में रखने से जहर बन जाती हैं.

दाल-सब्जी

दाल और सब्जी ऐसी खाने की चीज है, जो हर लोगों के घर में बनती है. अगर ये बच जाए, तो अगले दिन या फिर शाम को खाने के लिए हम इसे फ्रिज में रख देते हैं. अगर आप भी ऐसा करने हैं, तो ये आपके लिए काफी खतरनाक हो सकता है. क्योंकि फ्रिज में बची हुई दाल और सब्जी रखने से इसके पोषक तत्व खत्म हो जाते हैं.

साथ ही लंबे समय तक इसे फ्रिज में रखने से इसके अंदर एडीविटीज, फ्रुक्टोज कॉर्न सिरप, कार्बोहाइड्रेट और ट्रांस-फैट जैसे फैटी एसिड पैदा हो जाते हैं. ये हमारी सेहत के लिए जहर के समान होता है. इससे कैंसर का खतरा बढ़ता है.

Bakery का सामान

फ्रिज में बेकरी का सामान मतलब चॉकलेट, पेस्ट्रीज, केक और मिठाइयां कभी भी ना रखें. यह सामान चीनी, मैदे और कार्बोहाइड्रेट्स से तैयार किए जाते हैं. फ्रिज में रखे बेकरी के प्रोडक्ट्स का सेवन करने से कब्ज, हार्ट, हाई ब्‍लड प्रेशर और डायबिटीज से जुड़ी बीमारियों का शिकार बना सकते हैं.