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राजनांदगांव को मिली बड़ी सौगात : एस्ट्रोटर्फ परिवर्तन को मिली प्रशासकीय स्वीकृति, हॉकी जगत में खुशी की लहर

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राजनांदगांव। शुक्रवार का दिन खेल जगत के लिये खास रहा, क्योंकि लंबे समय से प्रतीक्षित राजनांदगांव के अंतर्राष्ट्रीय हॉकी स्टेडियम के एस्ट्रोटर्फ परिवर्तन को प्रशासकीय स्वीकृति मिल गई है। यह ऐतिहासिक उपलब्धि शहर के जनप्रतिनिधियों के निरंतर प्रयासों का परिणाम है, जिसने पूरे खेल जगत में उत्साह का संचार किया है।
विधानसभा अध्यक्ष एवं राजनांदगांव विधायक डॉ. रमन सिंह के विशेष प्रयास, मुख्यमंत्री तथा अध्यक्ष छत्तीसगढ़ ओलंपिक संघ विष्णु देव साय, उपमुख्यमंत्री एवं खेल मंत्री अरूण साव, सांसद संतोष पांडे तथा महापौर मधुसूदन यादव के समन्वित प्रयासों से यह महत्वपूर्ण स्वीकृति संभव हो पाई है। अब उम्मीद है कि बहुत जल्द राजनांदगांव के एस्ट्रोटर्फ को बदलने की प्रक्रिया प्रारंभ कर दी जाएगी, जिससे खिलाड़ियों को अंतरराष्ट्रीय स्तर की सुविधाएं उपलब्ध होंगी।
इस महत्वपूर्ण उपलब्धि पर छत्तीसगढ़ हॉकी के अध्यक्ष फिरोज अंसारी सहित डीएचए सचिव शिवनारायण धकेता, अंतरराष्ट्रीय हॉकी खिलाड़ी मृणाल चौबे, नीलम जैन, भूषण साव, कुतुबुद्दीन सोलंकी, रमेश डाकलीया, प्रकाश सांखला, ज्ञानचंद जैन, आशा थॉमस प्रिंस भाटिया, महेंद्र ठाकुर, गुणवंत पटेल, रणविजय प्रताप सिंह, तीरथ गोस्वामी, अजय झा, प्रकाश शर्मा, अब्दुल कादिर, राजू रंगारी, अनुराज श्रीवास्तव, रामावतार जोशी, गणेश प्रसाद शर्मा, कुमार स्वामी, शकील अहमद, किशोर धीवर, खुशाल यादव, अरुण शुक्ला, राजेश यादव, दिग्विजय श्रीवास्तव, आशीष सिन्हा, शहर के वरिष्ठ खिलाड़ी एवं समस्त खेल प्रेमी नागरिकों ने विधानसभा अध्यक्ष एवं विधायक डॉ. रमन सिंह सहित सभी जनप्रतिनिधियों के प्रति आभार व्यक्त किया है।
सभी ने एक स्वर में कहा कि इस स्वीकृति से न केवल राजनांदगांव हॉकी को नई गति मिलेगी, बल्कि युवा खिलाड़ियों को अपनी प्रतिभा निखारने का एक मजबूत मंच भी प्राप्त होगा।
राजनांदगांव की यह उपलब्धि शहर के विकास और खेल संस्कृति को नई दिशा देने वाली साबित होगी। छत्तीसगढ़ हॉकी के अध्यक्ष फिरोज अंसारी ने उम्मीद किया है कि टर्फ परिवर्तन के बाद यहां और भी बड़े हॉकी आयोजन देखने को मिलेंगे तथा खिलाड़ियों को विश्व स्तरीय प्रशिक्षण और प्रदर्शन का अवसर मिलेगा।

CG Police Transfer-Posting Order: पुलिस में बड़ा तबादला.. पांच थाना प्रभारी समेत 9 इंस्पेक्टर का ट्रांसफर…

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जिन थानों के प्रभारी प्रभावित हुए है उनमें खमतराई, आरंग, तेलीबांधा, खम्हारडीह और राजेंद्र नगर थाना शामिल है। इसके अलावा एसीसीयू के प्रभारी भी हटा दिए गए है।

रायपुर में नौ निरीक्षकों का तबादला, पांच थानों के प्रभारी बदले गए, एसीसीयू प्रभारी भी हटाए गए

रायपुर: राजधानी रायपुर में कानून व्यवस्था को मजबूत करने, आपराधिक गतिविधियों में लगाम लगाने और अधिकारी-कर्मचारियों में अनुशासन कायम करने के मकसद से वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक कार्यालय ने देर रात रायपुर जिले के पांच थाने और अन्य प्रकोष्ठ के प्रभारियों का तबादला सूची जारी किया है।

इस तबादले में जिन थानों के प्रभारी प्रभावित हुए है उनमें खमतराई, आरंग, तेलीबांधा, खम्हारडीह और राजेंद्र नगर थाना शामिल है। इसके अलावा एसीसीयू के प्रभारी भी हटा दिए गए है। देखें सभी 9 निरीक्षकों के तबादले और नई जगह पर पोस्टिंग की सूची..

आज साय कैबिनेट की महत्वपूर्ण बैठक.. धान खरीदी समेत कई अहम विषयों पर सरकार ले सकती है बड़े फैसले…

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छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में आज साय कैबिनेट की अहम बैठक होने जा रही है। छत्तीसगढ़ कैबिनेट की ये अहम बैठक महानदी भवन मंत्रालय में सुबह 10:30 बजे से शुरु होगी। सीएम विष्णुदेव साय कैबिनेट की इस बैठक की अध्यक्षता करेंगे। आज होने वाली साय कैबिनेट की इस बैठक में कई अहम् मुद्दों पर चर्चा के बाद मुहर लग सकती है। मंत्रालय में आज होने वाली कैबिनेट की बैठक में शीतकालीन सत्र में विधेयकों को लेकर चर्चा होगी। इसके साथ ही कैबिनेट की बैठक में धर्मांतरण संशोधन कानून पर मुहर लग सकती है। वहीं सीएम साय की अध्यक्षता में आज होने वाली साय कैबिनेट की बैठक में धान खरीदी, किसानों की समस्या जैसे कई विषयों पर चर्चा हो सकती है।

31 नए कार्यों का शिलान्यास, घर-घर शुद्ध जल और सिंचाई सुविधाओं पर फोकस, जल संसाधन विभाग के कार्यों से मजबूत होगा कृषि ढांचा, ये परियोजनाएं भी प्रस्तावित हैं…

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मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय आज स्वतंत्रता सेनानी शहीद वीर नारायण सिंह की जन्मभूमि एवं कर्मभूमि सोनाखान पहुंचेंगे। बलौदाबाजार-भाटापारा जिले के समग्र विकास के लिए 101 करोड़ 44 लाख 53 हजार रुपये के 119 विकास कार्यों का लोकार्पण एवं भूमि पूजन करेंगे।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय आज स्वतंत्रता सेनानी शहीद वीर नारायण सिंह की जन्मभूमि एवं कर्मभूमि सोनाखान पहुंचेंगे। इस गौरवशाली अवसर पर मुख्यमंत्री शहीद वीर नारायण सिंह को उनके बलिदान दिवस पर श्रद्धांजलि अर्पित करने के साथ ही, बलौदाबाजार-भाटापारा जिले के समग्र विकास के लिए 101 करोड़ 44 लाख 53 हजार रुपये के 119 विकास कार्यों का लोकार्पण एवं भूमि पूजन करेंगे।

मुख्यमंत्री द्वारा दिए जाने वाले इस विकास पैकेज में 75 करोड़ 55 लाख रुपये की लागत के 88 विकास कार्यों का लोकार्पण शामिल है, जिससे ये योजनाएं तुरंत क्षेत्र की जनता को समर्पित हो जाएंगी।

वहीं, 25 करोड़ 89 लाख 48 हजार रुपये की लागत के 31 नए विकास कार्यों का भूमिपूजन किया जाएगा, जो भविष्य में क्षेत्र की प्रगति का मार्ग प्रशस्त करेंगे। इस महत्वपूर्ण कार्यक्रम में उप मुख्यमंत्री अरुण साव, जिले के प्रभारी एवं स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल, आदिम जाति विकास मंत्री रामविचार नेताम, राजस्व मंत्री टंकराम वर्मा, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री केदार कश्यप, अनुसूचित जाति विकास मंत्री गुरु खुशवंत साहेब, रायपुर सांसद बृजमोहन अग्रवाल, जांजगीर-चांपा सांसद कमलेश जांगड़े, पूर्व विधानसभा अध्यक्ष गौरीशंकर अग्रवाल सहित कई स्थानीय जनप्रतिनिधि उपस्थित रहेंगे।

मुख्यमंत्री द्वारा जिन प्रमुख कार्यों का लोकार्पण किया जाएगा, उनमें जन स्वास्थ्य को प्राथमिकता देते हुए लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के अंतर्गत कई महत्वपूर्ण नल जल प्रदाय योजनाएं शामिल हैं। इन योजनाओं से विभिन्न ग्रामों में शुद्ध पेयजल की आपूर्ति सुनिश्चित होगी।

प्रमुख लोकार्पित कार्यों में ग्राम ओड़ान में दो करोड़ 40 लाख 85 हजार की लागत से रेट्रोफिटिंग नल जल प्रदाय योजना, ग्राम खरतोरा में दो करोड़ 35 लाख आठ हजार की लागत से रेट्रोफिटिंग नल जल प्रदाय योजना, ग्राम सकरी (स) में एक करोड़ 90 लाख की लागत से रेट्रोफिटिंग नल जल प्रदाय योजना, ग्राम गोरधा में एक करोड़ 72 लाख 22 हजार की लागत से एकल नल जल प्रदाय योजना और ग्राम दतान (ख) में एक करोड़ 61 लाख 24 हजार की लागत से रेट्रोफिटिंग नल जल प्रदाय योजना प्रमुख हैं।

आगामी विकास की आधारशिला रखते हुए, जल संसाधन विभाग के कई महत्वपूर्ण निर्माण कार्यों का भूमिपूजन किया जाएगा। ये परियोजनाएं सिंचाई और जल संरक्षण को मजबूती प्रदान करेंगी, जिससे किसानों को सीधा लाभ मिलेगा। प्रमुख भूमिपूजन कार्यों में पांच करोड़ 84 लाख 11 हजार रुपये की लागत से विकासखंड कसडोल के ग्राम अर्जुनी में जोंक शीर्ष जीर्णोध्दार एवं तटबंध निर्माण शामिल है।

इसके अतिरिक्त, तीन करोड़ 63 लाख 35 हजार रुपये की लागत से बलौदा बाजार अंतर्गत लवन शाखा नहर के तिल्दा, करदा लाटा एवं सिरियाडीह माइनर का जीर्णोध्दार एवं पुनर्निर्माण होगा। जल संरक्षण के लिए विकासखंड कसडोल के मटिया नाला में तीन करोड़ 36 लाख 60 हजार रुपये की लागत से स्टापडेम निर्माण तथा विकासखंड पलारी के ग्राम परसाडीह में खोरसीनाला में दो करोड़ 99 लाख 33 हजार रुपये की लागत से स्टापडेम निर्माण भी प्रस्तावित है।

छत्तीसगढ़ में चुनिंदा गांवों को मॉडल सोलर विलेज के रूप में विकसित किया जाएगा…

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सौर ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए अब ग्रामीण क्षेत्रों में जोर दिया जा रहा है। केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी प्रधानमंत्री सूर्यघर योजना के तहत छत्तीसगढ़ में चुनिंदा गांवों को मॉडल सोलर विलेज के रूप में विकसित किया जाएगा।

सौर ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए अब ग्रामीण क्षेत्रों में जोर दिया जा रहा है। केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी प्रधानमंत्री सूर्यघर योजना के तहत जिले में चुनिंदा गांवों को मॉडल सोलर विलेज के रूप में विकसित किया जाएगा। इस दिशा में जिला प्रशासन ने तैयारी शुरू कर दी है।

मॉडल सोलर विलेज के लिए पांच हजार से अधिक आबादी वाले राजस्व ग्रामों का चयन किया जाना अनिवार्य है। इस हिसाब से जिले के जिल के लगभग 10 गांव मॉडल सोलर विलेज के रूप में विकसित किए जाएंगे। निर्धारित मानकों के मुताबिक, वह ग्राम प्राथमिकता पाएगा जिसमें गैर-सरकारी माध्यमों से सर्वाधिक सौर ऊर्जा क्षमता स्थापित की जाएगी। इसी आधार पर अंतिम चयन किया जाएगा।

अधिक आबादी वाले गांवों की सूची तैयार की जा रही है। मूल्यांकन क्रेडा के अधिकारियों ने बताया कि प्रत्येक ग्राम का जरूरतों के अनुसार सामुदायिक सौर संयंत्रों के प्रस्ताव तैयार कर जिला स्तर पर प्रस्तुत किया जाएगा। छह माह की अवधि पूर्ण होने पर जिला स्तरीय समिति द्वारा सभी ग्रामों का मूल्यांकन किया जाएगा।

यह मूल्यांकन ग्रामीणों द्वारा स्थापित सौर संयंत्रों की संख्या, योजनाओं के लिए किए गए आवेदनों, सामुदायिक सहभागिता, उपलब्ध ऊर्जा सुविधाओं और सौर संसाधनों के उपयोग की आधारशिला पर किया जाएगा।

इसी मूल्यांकन के आधार पर जिले के पहले सोलर मॉडल विलेज का चयन किया जाएगा और चयनित ग्राम का विस्तृत प्रस्ताव तैयार कर 15 मार्च तक ऊर्जा विभाग, छत्तीसगढ़ शासन को भेजा जाएगा। उसके बाद उस गांव को पूर्णतः सौर ऊर्जा आधारित आदर्श मॉडल ग्राम के रूप में विकसित किया जा सकेगा।

“लोकसभा में वंदे मातरम् पर चर्चा को लेकर राहुल गांधी ने दिया 4 शब्दों में जवाब, मोदी बनाम कांग्रेस की भिड़ंत फिर तेज”

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संसद में राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम्’ के 150 साल पूरे होने पर चल रही ऐतिहासिक बहस के बीच सोमवार को कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने बेहद संक्षिप्त लेकिन सटीक प्रतिक्रिया दी।

जब उनसे इस मुद्दे पर सवाल पूछा गया तो उन्होंने सिर्फ चार शब्दों में जवाब दिया “प्रियंका का भाषण सुनो।” राहुल का यह बयान राजनीतिक गलियारों में तुरंत चर्चा का विषय बन गया।

इससे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लोकसभा में ‘वंदे मातरम्’ पर विशेष चर्चा की शुरुआत की। उन्होंने इस गीत को आज़ादी की लड़ाई का प्रेरणास्रोत बताया और इसके ऐतिहासिक महत्व को रेखांकित किया। पीएम मोदी ने कांग्रेस पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि 1937 में फैजाबाद में हुई कांग्रेस बैठक में ‘वंदे मातरम्’ के कुछ महत्वपूर्ण अंतरों को हटाया गया, जिससे देश के विभाजन के बीज बोए गए।

कांग्रेस का पलटवार, टैगोर का हवाला

प्रधानमंत्री के इस आरोप पर कांग्रेस ने कड़ा विरोध जताया है। पार्टी का कहना है कि 1937 में लिया गया फैसला नोबेल विजेता कवि रवींद्रनाथ टैगोर की सलाह पर आधारित था। कांग्रेस ने दावा किया कि यह फैसला सभी समुदायों की भावनाओं का सम्मान करने के लिए किया गया था। कांग्रेस ने बीजेपी से इस मुद्दे पर माफी की मांग की है और आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री और सत्तारूढ़ दल ने कांग्रेस वर्किंग कमेटी (CWC) और रवींद्रनाथ टैगोर का अपमान किया है।

राज्यसभा विवाद ने बढ़ाया सियासी तापमान

यह बहस ऐसे समय शुरू हुई है जब शीतकालीन सत्र से ठीक पहले राज्यसभा सचिवालय ने सांसदों को सदन के अंदर ‘वंदे मातरम्’ और ‘जय हिंद’ जैसे नारों के इस्तेमाल से बचने की सलाह दी थी। विपक्ष ने इसे देश की आज़ादी के प्रतीकों के अपमान के तौर पर देखा और आरोप लगाया कि बीजेपी नीत एनडीए को ये राष्ट्रीय प्रतीक असहज करते हैं।

लोकसभा में क्या बोले प्रधानमंत्री मोदी

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि ‘वंदे मातरम्’ सिर्फ राजनीतिक स्वतंत्रता का नारा नहीं था, बल्कि यह मातृभूमि को उपनिवेशवाद से मुक्त कराने का आह्वान था। उन्होंने याद दिलाया कि 1905 में जब अंग्रेजों ने बंगाल का विभाजन किया था, तब ‘वंदे मातरम्’ ने देश को एकजुट रखा।

उन्होंने कहा, “जब ‘वंदे मातरम्’ के 100 साल पूरे हुए थे, तब देश आपातकाल की जंजीरों में जकड़ा हुआ था। उस समय संविधान का गला घोंटा गया और देशभक्तों को जेल में डाल दिया गया। अब 150 साल के मौके पर हमें इसकी गौरवशाली विरासत को फिर से स्थापित करने का अवसर मिला है।”

बहस का वक्त और कांग्रेस की ओर से जवाब

लोकसभा में इस बहस के लिए कुल 10 घंटे का समय तय किया गया है, जिसमें से तीन घंटे NDA सांसदों को दिए गए हैं। कांग्रेस की ओर से डिप्टी लीडर ऑफ अपोजीशन गौरव गोगोई इस बहस में अपनी पार्टी का पक्ष रख रहे हैं।

इसी बीच राहुल गांधी का “प्रियंका का भाषण सुनो” वाला जवाब साफ संकेत देता है कि इस मुद्दे पर कांग्रेस का मुख्य जवाब आज लोकसभा में प्रियंका गांधी के भाषण के जरिए सामने आएगा।

“इंडिया गठबंधन ICU में… उमर अब्दुल्ला के तीखे बयान से कांग्रेस-आरजेडी को लगी मिर्ची, बीजेपी ने ले ली मौज”

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जम्मू -कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने इंडिया गठबंधन की ऐसी तीखी आलोचना की, जिससे कांग्रेस और आरजेडी को मिर्ची लग गई। बीजेपी ने इसे मौके को लपक लिया। एक मीडिया के कार्यक्रम में उमर अब्दुल्ला ने कहा कि बिहार विधानसभा में हार के बाद इंडिया गठबंधन अभी लाइफ सपोर्ट पर है।

हर बार कोई पैडल लाता है और हमें थोड़ा झटका देता है। हम फिर से उठ खड़े होते हैं। लेकिन दुर्भाग्य से बिहार जैसे नतीजे आते हैं और हम फिर से नीचे गिर जाते हैं और फिर किसी को हमें आईसीयू में ले जाना पड़ता है।

बिहार चुनाव में हेमंत सोरेन की उपेक्षा से भी नाराज

मीडिया के एक कार्यक्रम में उमर अब्दुल्ला ने इंडिया गठबंधन में कई ऐसी खामियां गिनाईं, जिससे कांग्रेस-आरजेडी की काफी किरकिरी हुई। उन्होंने गठबंधन के भीतर दरार को उजागर कर दिया। उन्होंने कहा कि गठबंधन ने पहले नीतीश कुमार को एनडीए के हाथों में वापस धकेल दिया। उन्होंने बिहार चुनाव के दौरान हेमंत सोरेन के नेतृत्व वाले झारखंड मुक्ति मोर्चा को सीट बंटवारे में शामिल नहीं करने को गठबंधन की विफलता करार दिया। उमर अब्दुल्ला के बयान पर आरजेडी सांसद ने कहा कि लोग प्रतिकूल परिस्थितियों में जल्दबाजी में टिप्पणी करते हैं, लेकिन ऐसा करने से बचना चाहिए। उन्होंने कहा कि अगर गठबंधन लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर है, तो उमर भी उसी गठबंधन का हिस्सा हैं। जिम्मेदारी ताना मारने से खत्म नहीं होती।

बीजेपी बोली, ICU में नहीं, मर चुका है इंडी गठबंधन

कांग्रेस सांसद मनोज कुमार ने कहा कि उमर अब्दुल्ला इंडिया गठबंधन के साथ मजबूती से खड़े हैं। उन्होंने कहा कि उमर हमारे गठबंधन सहयोगी हैं। कभी-कभी लोग सवाल उठाते हैं। वह इंडिया गठबंधन में हैं। अगर उन्हें कुछ कमी लगती है, तो वह बता रहे हैं। वह बीजेपी के पास नहीं जाएंगे, वह हमारे साथ हैं। जम्मू और कश्मीर के लोग राहुल गांधी पर भरोसा करते हैं, इसीलिए उमर अब्दुल्ला ने जम्मू और कश्मीर में बड़ी जीत हासिल की। इस बीच बीजेपी ने उमर के बयान पर चुटकी है। बीजेपी नेता शहनवाज हुसैन ने कहा कि उमर अब्दुल्ला गलत हैं। इंडी गठबंधन लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर नहीं है, यह मर चुका है। लोकसभा चुनाव के बाद इंडी गठबंधन समाप्त हो गया। इसे श्रद्धांजलि दी जानी चाहिए। इसके पास न तो कोई नेता है और न ही कोई नीति।

“Vande Mataram: वंदे मातरम् का वो शब्द जिससे अंग्रेजों ने हिन्दू-मुस्लिमों में फूट डाली, जिन्ना ने लिखा था नेहरू को पत्र”

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देश के राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम् पर लोकसभा में 10 घंटे चर्चा होगी. इसकी शुरुआत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कर दी है. वंदे मातरम् के 150 साल पूरे हो गए हैं. यह बंकिम चंद्र चटर्जी की वो रचना है जिसे उन्होंने 7 नवंबर, 1875 को रचा.

यह गीत पहली बार पत्रिका बंगदर्शन में उनके उपन्यास आनंदमठ के हिस्से के रूप में छपा. 1896 में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के अधिवेशन में रवींद्रनाथ टैगोर ने मंच पर वंदे मातरम् गाकर इतिहास रचा था. यह पहला मौका था जब वंदे मातरम् राष्ट्रीय स्तर पर सार्वजनिक रूप से गाया गया. हजारों लोगों की आंखे नम थीं.

धीरे-धीरे यह गीत आजादी के आंदोलनों में दूर-दूर तक गूंजने लगा. अंग्रेजों के खिलाफ क्रांतिकारियों में जोश भरने लगा. 1905 में बंगाल विभाजन का विरोध करने वाले हर आंदोलनकारी की जुबान पर यही गीत था. सभा हो या रैली-प्रदर्शन, हर जगह यह गीत ऐसा गूंजा कि अंग्रेजों के अंदर डर भर दिया. 1907 में अंग्रेजों ने इस पर पाबंदी लगा दी. अंग्रेजों ने इस गीत को आधार बनाकर हिन्दू-मुस्लिमों में फूट डालने का काम किया.

कैसे पैदा हुआ वो विवाद, जिसकी आज भी चर्चा होती है?

अंग्रेजों ने हमेशा से ही ‘बांटो और राज करो’ की नीति के जरिए हिंदुओं-मुसलमानों के बीच दूरियां पैदा करने की कोशिश की. जब हर तरफ लोगों की जुबान पर वंदे मातरम् गीत था तब अंग्रेजों ने इसे धर्म के नाम पर बांटने का जरिया बनाया.

इस गीत के शब्दों को लेकर मुस्लिम लीग को उकसाने का काम किया. 1909 के अमृतसर में हुए अधिवेशन में वंदे मातरम् का विरोध हुआ. अध्यक्ष सैयद अली इमाम ने इसे मुद्दा बनाते हुए वंदे मातरम् को इस्लाम विरोधी बताया. इसे सांप्रदायिक बताते हुए अस्वीकार कर दिया.

वंदे मातरम् को रचने वाले बंकिम चंद्र चटर्जी. वो शब्द जिस पर छिड़ा था विवाद

वंदे मातरम् गीत में देश को देवी दुर्गा के रूप में देखा गया और उन्हें ‘रिपुदलवारिणी’ यानी दुश्मनों का संहार करने वाला कहा गया. इसी ‘रिपुदलवारिणी’ शब्द को लेकर बड़ा विवाद हुआ था. मुस्लिम समुदाय को लगता था कि रिपु यानी दुश्मन शब्द का इस्तेमाल उनके लिए किया गया है, जबकि विशेषज्ञों का मानना है कि उस समय अंग्रेजों को रिपु यानी दुश्मन माना गया.

यह विवाद थमा नहीं. मुस्लिम लीग ने इसे इस्लाम की मान्यताओं के खिलाफ बताया. तर्क दिया कि इस्लाम में अल्लाह के अलावा किसी अन्य के प्रति भक्ति या उपासना करने का कोई स्थान नहीं है. आजादी के लिए लड़ रही कांग्रेस पर दबाव बढ़ गया था. एक तरफ वंदे मातरम् हिन्दू आंदोलनकारियों में जोश भर रहा था. वहीं, दूसरी तरफ कांग्रेस मुस्लिम लीग से उलझकर अंग्रेजों के खिलाफ चल रहे आंदोलन को सुस्त नहीं पड़ने देना चाहती थी. इसलिए कांग्रेस ने इस विवाद का हल निकालने के लिए कमेटी बनाई.

विवाद का क्या हल निकला?

कमेटी में रवींद्र नाथ टैगोर, नेहरू, अबुल कलाम आज़ाद और सुभाष चंद्र बोस को शामिल किया गया. कमेटी ने 1937 में बीच का रास्ता निकाला. तय किया गया गया कि इस गीत के शुरू के दो पद्य गाए जाएंगे जिनमें कोई धार्मिक पहलू नहीं है. 1938 के हरीपुरा कांग्रेस अधिवेशन में ऐसा ही किया गया, लेकिन इससे न तो गीत के समर्थक खुश थे और न विरोधी.

जिन्ना ने गीत को त्यागने के लिए पत्र लिखा

मामला बढ़ने पर जिन्ना ने पंडित नेहरू को 17 मार्च, 1938 को एक पत्र लिखा. पत्र में वंदे मातरम् को त्यागने की बात लिखी. जिन्ना का तर्क था कि जिस ‘आनंद मठ’ किताब से यह गीत लिया गया है वह मुस्लिम विरोधी है. बंकिम के साहित्य पर काम करने वालों ने जिन्ना की बात को खारिज किया. तर्क दिया कि साहित्य में कहीं भी मुस्लिमों का विरोध नहीं किया गया है.

समिति ने पाया था कि इस गीत के पहले के दो पैरा मातृ भूमि की प्रशंसा में हैं, गीत में उसके आगे हिन्दू देवी-देवताओं का जिक्र किया गया है. इसीलिए दो पैरा को ही मान्यता दी गई ताकि किसी की भावना आहत न हो. अंत में 24 जनवरी 1950 को इसे राष्ट्र गीत के रूप में मंजूर किया. अब इस गीत के 150 साल पूरे होने पर फिर से इसकी चर्चा हो रही है.

ब्रिटिश शासन का वो फरमान, जिसके जवाब में लिखा गया वंदे मातरम्

“POK में लश्कर का नया आतंकी लॉन्च पैड: मरकज़ की आड़ में बना रहा जिहादियों का नया ठिकाना”

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पाक अधिकृत कश्मीर (POk) में लश्कर-ए-तैयबा की तरफ से बड़ी साजिश की जा रही है. यहां रावलकोट में लश्कर के जेहादियो के लांच पैड बनाए जा रहे हैं. ख़ुद लश्कर के POK में प्रवक्ता ने मरकज़ बनाने की बात कुबूल की है.

ऑपरेशन सिंदूर में भारतीय सेना ने लश्कर-ए-तैयबा के लांच पैड तबाह किए थे. POK में मरकज़ की आड़ में आतंकी लश्कर-ए-तैयबा के लांच पैड तैयार करता है. दरअसल, रावलकोट (POK) के खैगला इलाके में एक इमारत बन रही है.

इसके बारे में कहा जा रहा है कि लश्कर-ए-तैयबा (LeT) वहां अपने आतंकियों के लिए लॉन्चपैड और शेल्टर तैयार कर रहा है. यहां एक डुअल यूज़ (दोहरी इस्तेमाल वाली) सुविधा बताई जा रही है, जिसका नाम अल-अक्सा मरकज़ है.

आतंकियों को सुरक्षित करने की जा रही है व्यवस्था

LeT इसे मस्जिद बताने की कोशिश कर रहा है. वीडियो में LeT के POK प्रवक्ता आमिर ज़िया भी शुरुआत में इसे मस्जिद बताते हैं, लेकिन बात करते-करते गलती से इसे मरकज़ कह देते हैं, जिससे असल मंशा साफ हो जाती है. लश्कर की रणनीति है कि POK के अलग-अलग इलाकों में छोटे-छोटे मरकज़ बनाकर अपने आतंकियों को छिपाने और सुरक्षित रखने की व्यवस्था की जाए.

पाकिस्तान में लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद की बड़ी बैठक आयोजित की गई. 6 नवंबर को बहावलपुर में ये मीटिंग की गई थी. मीटिंग में जैश के कई कमांडरों के साथ लश्कर का डिप्टी चीफ सैफुल्लाह कसूरी भी बैठा हुआ दिख रहा है. ऑपरेशन सिंदूर से पहले भी ऐसी ही मीटिंग बहावलपुर में हुई. मीटिंग में जैश के कई कमांडरों के साथ लश्कर का डिप्टी चीफ सैफुल्लाह कसूरी भी बैठा हुआ दिख रहा है.

लश्कर-ए-तैयबा के डिप्टी चीफ ने दी थी धमकी

लश्कर-ए-तैयबा के डिप्टी चीफ सैफुल्लाह कसूरी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को धमकी देते हुए कहा था कि भारत को ऑपरेशन सिंदूर की ‘कीमत चुकानी पड़ेगी.’समर्थकों की एक सभा को संबोधित करते हुए उसने कहा कि नरेंद्र मोदी को ध्यान से सुनना चाहिए और अपने ज़ालिम लोगों से कहना चाहिए वह समय पास है जब हमारे डैम और नदियां हमारी होंगी. पूरा जम्मू और कश्मीर हमारा होगा.”

सैफुल्लाह कसूरी ने कहा कि भारत पर और हमलों का इशारा करते हुए कहा, हम बदला लेना अच्छी तरह जानते हैं. दुश्मन को यह नहीं सोचना चाहिए कि हम हिम्मत हार जाएंगे या चुप रहेंगे. हम ईंट का जवाब पत्थर से देंगे.

“क्या Meesho देगा धमाकेदार रिटर्न? लिस्टिंग से पहले ही कर रहा है कमाल”

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ऑनलाइन शॉपिंग कंपनी मीशो का आईपीओ शेयर मार्केट में आ गया है. आईपीओ की लिस्टिंग की तारीख 10 दिसंबर है, लेकिन यह आईपीओ लिस्टिंग से पहले की कमाल कर रहा है. मीशो लिमिटेड के शेयर अभी 40-41 रुपये प्रति शेयर के ग्रे मार्केट प्रीमियम (GMP) पर हैं, जो बुधवार, 10 दिसंबर को कंपनी की तय स्टॉक मार्केट लिस्टिंग से पहले इश्यू प्राइस से 36.04% प्रीमियम दिखाता है.

IPO प्रोसेस, जो 3 दिसंबर को खुला और 5 दिसंबर को बंद हुआ, अब अलॉटमेंट फेज में है और अलॉटमेंट सोमवार, 8 दिसंबर तक फाइनल होने की उम्मीद है. शेयर मंगलवार, 9 दिसंबर को डीमैट अकाउंट में क्रेडिट किए जाने हैं.

IPO के लिए एक रिटेल लॉट की कुल कीमत 135 शेयरों के लिए 14,985 रुपये थी. GMP अनलिस्टेड मार्केट में प्राइसिंग सिग्नल पर आधारित है और लिस्टिंग से पहले इन्वेस्टर की उम्मीद की जाने वाली भावना को दिखाता है, हालांकि यह असली लिस्टिंग प्राइस का भरोसा नहीं देता है.

मीशो IPO सब्सक्रिप्शन

एक्सचेंज डेटा के मुताबिक, मीशो के IPO, जो कुल 5,421.2 करोड़ रुपये का था, को कुल 79.03 गुना सब्सक्रिप्शन मिला. इस इश्यू में 4,250 करोड़ रुपये का फ्रेश इश्यू शामिल था, जिसमें लगभग 38.29 करोड़ शेयर थे, साथ ही लगभग 10.55 करोड़ शेयरों का ऑफर फॉर सेल भी था. कुल 27.79 करोड़ शेयरों के ऑफर साइज के मुकाबले, इन्वेस्टर्स ने लगभग 2,197 करोड़ शेयरों के लिए बोली लगाई.

इंस्टीट्यूशनल कोटा को 120.18 गुना सब्सक्रिप्शन मिला, जिसमें 15 करोड़ से ज्यादा शेयरों के अलॉटमेंट के मुकाबले 18 बिलियन शेयरों से ज्यादा की बोलियां लगीं. नॉन-इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स हिस्सा 38.16 गुना सब्सक्राइब हुआ, जबकि रिटेल इंडिविजुअल इन्वेस्टर सेगमेंट में इस कैटेगरी के लिए रिजर्व शेयरों के मुकाबले 19.08 गुना बोलियां मिलीं. इनिशियल पब्लिक ऑफरिंग (IPO), 3 दिसंबर को पब्लिक सब्सक्रिप्शन के लिए खुला और 5 दिसंबर को खत्म हुआ. टाइमलाइन के मुताबिक, अलॉटमेंट का बेसिस आज 8 दिसंबर को फाइनल होने की उम्मीद है. सफल एप्लिकेंट्स को मंगलवार, 9 दिसंबर तक डीमैट अकाउंट में उनके शेयर मिलने की उम्मीद है. स्टॉक बुधवार, 10 दिसंबर को BSE और NSE पर ट्रेडिंग शुरू करने वाला है.

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मीशो वैल्यूएशन और कंपनी मॉडल

मीशो के IPO की कीमत सेल्स के मार्केट कैपिटलाइज़ेशन के लगभग 5.3x के वैल्यूएशन पर रखी गई थी. कंपनी के बिजनेस मॉडल को एसेट-लाइट बताया गया है, जिसे लॉजिस्टिक्स इंफ्रास्ट्रक्चर और सप्लाई चेन ऑप्टिमाइज़ेशन सिस्टम से सपोर्ट मिला है. ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म मुख्य रूप से छोटे और मीडियम सेलर्स को सर्विस देता है और अफोर्डेबिलिटी और स्केल पर फोकस करके काम करता है.

सेलर प्राइसिंग और ऐड मोनेटाइजेशन के अपने अप्रोच के आधार पर कंपनी की तुलना कुछ ग्लोबल वैल्यू वाली ई-कॉमर्स फर्मों से की गई है. रिपोर्ट्स बताती हैं कि मीशो के प्लेटफॉर्म में लॉजिस्टिक्स कैपेबिलिटी और प्राइसिंग स्ट्रक्चर शामिल हैं, जिन्हें पूरे भारत के टियर-2 और टियर-3 शहरों में स्केलेबिलिटी के लिए डिजाइन किया गया है.