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छत्तीसगढ़ – मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल को बी.पी. मण्डल सामाजिक न्याय रत्न सम्मान से किया गया सम्मानित…

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छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल का आज नई दिल्ली में आयोजित समारोह में बी.पी. मण्डल सामाजिक न्याय रत्न से सम्मानित करते हुए उनका जन अभिनंदन किया गया। श्री बघेल को छत्तीसगढ़ में अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और पिछड़े वर्ग के लिए आरक्षण बढ़ाने के फैसले के लिए उन्हें यह सम्मान प्रदान किया गया। सामाजिक न्याय के प्रणेता और पिछड़ा वर्ग आयोग के अध्यक्ष तथा बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री स्वर्गीय श्री बी.पी. मंडल की जयंती के अवसर पर आज नई दिल्ली के कॉन्स्टिटूशन क्लब में यह कार्यक्रम आयोजित किया गया। पूर्व राज्य सभा सांसद श्री शरद यादव ने मुख्यमंत्री श्री बघेल को श्री बी पी मंडल सामाजिक रत्न पुरस्कार से सम्मानित किया।
    छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल ने कहा है कि, वर्षों से जिन्होंने संविधान सम्मत अधिकारों की रक्षा के लिए अपना खून-पसीना बहाया है उनके ‘दुःख के दिन बीत गए है’। 25 अगस्त सामाजिक न्याय के लिए एक ऐतिहासिक दिन है। मंडल आयोग की रिपोर्ट के रचयिता बीपी मंडल जी की आज जयंती है। संविधान बचाओ संघर्ष समिति ने आज के ही दिन अगर मेरा सम्मान करने का फैसला किया है तो यह मेरे लिए सौभाग्य की बात है और मेरे लिए भावुक कर देने वाला पल है।
    श्री बघेल द्वारा छत्तीसगढ़ राज्य में अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और पिछड़ा वर्ग के आरक्षण बढ़ाए जाने पर यह सम्मान उन्हें प्रदान किया गया।
    मुख्यमंत्री श्री बघेल ने कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए कहा कि, संविधान के अनुच्छेद-340 को लागू करते हुए सामाजिक न्याय का जो पहलू छूट गया था, वह मंडल कमीशन की सिफारिशें लागू करने के साथ आज से 26 साल पहले एक हद तक पूरा हुआ था। मंडल साहब की सिफारिशों का जो हिस्सा ठीक तरह से लागू नहीं हुआ था, हमने छत्तीसगढ़ में उसे पूरा करने की कोशिश की है। दरअसल मैंने कोई खास काम नहीं किया है, बस संविधान की सिफारिशों को ठीक तरह से लागू करने का फैसला किया है। उन्होंने कहा कि, गांधी-नेहरु की सर्वजन हिताए नीतियों पर विश्वास हमारी प्राथमिकता है।

    कार्यक्रम का आयोजन संविधान बचाओ संघर्ष समिति द्वारा किया गया था। कार्यक्रम में राज्य सभा सांसद श्री पी.एल. पुनिया, श्री शरद यादव, संविधान बचाओ संघर्ष समिति के श्री अनिल जय हिंद, मुख्यमंत्री के पिता श्री नंदकुमार बघेल सहित अन्य गणमान्य नागरिक गण भी उपस्थित थे।
    मुख्यमंत्री श्री बघेल ने कहा कि, मैंने मुख्यमंत्री की तरह बस संविधान के बुनियादी सिद्धांत को लागू करने का प्रयास किया है। हमारी सरकार आते ही हमने अमीर व गरीब के बीच भेद कम करने की दिशा में कई कड़े कदम उठाए। इस दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए हमने प्रदेश निवासी अनुसूचित जनजाति को 32 प्रतिशत, अनुसूचित जाति को 13 प्रतिशत तथा अन्य पिछड़ा वर्ग को 27 प्रतिशत आरक्षण प्रदान करने की घोषणा की।  
    मुख्यमंत्री ने कहा कि हमने यह फैसला क्यों किया? मुझे हमेशा से लगता था कि समाज में अनुसूचित जाति और पिछड़ा वर्ग में किसान और कामगार ही तो हैं और यही लोग आर्थिक और सामाजिक रूप से सबसे वंचित लोग हैं, तो इन लोगों को ही आगे बढ़ाने की जरूरत है। इनको आगे बढ़ाने के लिए जो काम आजादी के बाद से होना चाहिए था, दुर्भाग्य से हो नहीं सका। आरक्षण मिला तो पिछड़ा वर्ग वंचित रह गया। जब अधिकार मिला तो आधा अधूरा मिला। कभी संविधान का हवाला देकर, कभी सुप्रीम कोर्ट के किसी फैसले का हवाला देकर उनको संवैधानिक अधिकार से वंचित कर दिया गया।

हमारा फैसला उनको अधिकार संपन्न बनाना है

    श्री बघेल ने कहा कि, हमारे पुरखो के सपनो से लेकर आज की पीढ़ी की आशाओं तक सबके बीच एक तारतम्य है। एक सिलसिला है अगर कुछ असंगत था ,तो हाल ही में गुजरा ढेड दशकों का वक्त। छत्तीसगढ़ के संसाधन, विकास की संभावनाएँ, लोकजीवन, जनजीवन की चुनौतियां, हमारे समाज की संरचनाएं, जनता की आकांक्षाये सब कुछ अलग है। सवाल यह नहीं उठता कि देश-दुनिया की नजर में छत्तीसगढ़ को किस तरह से देखा जाए। सवाल तो यह है कि, हमारा छत्तीसगढ़ किस दिशा में आगे बढ़े। उन्होंने कहा कि, हम नीतियों और प्रावधानों को ठीक तरह से लागू करना चाहते हैं और हमारी नीयत भी साफ है।

हम एक लंबे सफर पर हैं, हमारी लड़ाई लंबी है

    श्री बघेल ने कहा कि हमारी सरकार ने किसानों को दूसरे तरीकों से आगे बढ़ाने के उपाय किए हैं। हमने आदिवासियों की ओर ध्यान देना शुरु किया। हमें ठीक तरह से समझ में आ गया है कि किसानों की आय दोगुना करने के थोथे नारे लगाने की जगह यदि सच में उनकी आय बढ़ा दी जाए तो पूरा समाज उससे लाभांवित होता है।
    उन्होंने कहा कि एक उदाहरण के साथ मैं बताता हूं कि यह कैसे होता है। हमने किसानों और तेंदूपत्ता मजदूरों को पैसा दिया तो नोटबंदी के बाद से मंदी झेल रहे बाजार में रौनक लौट आई, कारोबार बढ़ने लगा। आज देश में ऑटोमोबाइल सेक्टर में 30 प्रतिशत की गिरावट आई है। लेकिन छत्तीसगढ़ अकेला प्रदेश है, जिसमें 15 प्रतिशत से अधिक की बढ़ोत्तरी दर्ज हुई है, इसका मतलब यह है कि छत्तीसगढ़ में आटोमोबाइल सेक्टर में 45 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी हुई है।
    हम आदिवासी क्षेत्रों में लघु वनोपज संग्रहण के दायरे को बढ़ा रहे हैं और आदिवासियों को अधिकतम लाभ पहुंचाने के लिए फूड प्रोसेसिंग यूनिट लगाने जा रहे हैं। कोंडागांव में मक्का प्रोसेसिंग संयंत्र लगाने का कार्य शुरु भी हो चुका है।
    श्री बघेल ने कहा की, हमने विकास के नए मापदंड तय किए। जीवन स्तर ऊपर उठाने ओर प्रतिव्यक्ति आए बढ़ाने की दिशा में देश में अभिनवकारी पहल कर उसे जमीनी स्तर पर मूर्त रूप भी दिया। नरवा, गरूवा, घुरवा, बारी, के माध्यम से अर्थव्यवस्था और पर्यावरण को नया जीवन देने की पहल की है। पशुधन की सेवा करने के लिए सुराजी ग्राम योजना के तहत गांवों में गौठान बनाए जा रहे हैं। गौठानों में मवेशियों के चारा, पानी और सुरक्षा के प्रबंध किए जाएंगे। गौठानों के रखरखाव के लिए गौठान समितियां बनाई जा रही है।
मुख्यमंत्री श्री बघेल ने कहा कि गौठानों में एकत्रित होने वाले गोबर से वर्मी खाद और कम्पोस्ट बनाई जाएगी। जिससे जैविक खेती को बढ़ावा मिलेगा। इन प्रयासों से लोगों की आर्थिक स्थिति मजबूत होगी ।
    कार्यक्रम में उपस्थित राज्य सभा सांसद श्री पी.एल. पुनिया व शरद यादव ने मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल द्वारा छत्तीसगढ़ राज्य में आरक्षण को 58 प्रतिशत से बढ़ाकर 72 प्रतिशत किए जाने को साहसिक कदम बताया।उन्होंने कहा कि ,देश में कुछ बड़े घराने ही सब कुछ समेटने लगे हैं। ऐसे में यदि वंचितों को हम कुछ दे सकते हैं तो सिर्फ यही एक रास्ता है आरक्षण का, जिसे बढ़ाकर आपने अन्य राज्यों के लिए एक मिशाल प्रस्तुत किया है। उन्होंने कहा कि आने वाले दिनों में अन्य प्रदेश भी आपके इस निर्णय का अनुसरण करेंगे। वंचितों के उत्थान के लिए आपने जो कदम उठाया वह वाकई में ऐतिहासिक है।
    श्री बघेल ने कहा कि, हम संकट और संक्रमण के दौर से गुजर रहे हैं। जब कुछ ताकतें देश में सामाजिक विभाजन की रेखा खींचने में लगी हुई हैं, जब देश से आरक्षण खत्म करने की कोशिशें हो रही हैं, तब हमें एक साथ खड़े होकर सामाजिक एकता और सामाजिक न्याय की लड़ाई को मजबूती से आगे बढ़ाना होगा। हमें नजरें मिलाकर देश की सामाजिक हकीकत पर बात करनी होगी।

मुख्यमंत्री : दूरस्थ क्षेत्र के हाट बाजारों में मिला अच्छा प्रतिसाद, 2 अक्टूबर से पूरे प्रदेश में होगी लागू…

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मुख्यमंत्री हाट बाजार क्लीनिक योजना का प्रदेश के वनांचल और दूरस्थ क्षेत्रों में अच्छा प्रतिसाद मिल रहा है। इन इलाकों के हॉट-बाजारों में पहुंचने वाले ग्रामीणों का मेडिकल टीम द्वारा स्वास्थ्य परीक्षण कर उन्हें निःशुल्क दवाई का वितरण किया जा रहा है। यह योजना जून 2018 से शुरु की गयी है। बड़ी संख्या में मुख्यमंत्री हाट बाजार क्लीनिक से लोग लाभान्वित हो रहे है।

मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल ने आगामी 2 अक्टूबर से इसे पूरे प्रद्रेश में लागू करने का निर्णय लिया है। राज्य सरकार की इस महात्वाकांक्षी योजना की सतत समीक्षा मुख्यमंत्री सचिवालय द्वारा प्रतिदिन की जा रही है। मुख्यमंत्री स्वयं इसकी हर माह समीक्षा करेंगे। मुख्यमंत्री ने इस योजना को प्रदेश में लागू करने के संबंध में मुख्यसचिव और सभी जिला कलेक्टरों को पत्र लिख कर विस्तृत दिशा निर्देश दिए हैं। स्वास्थ्य विभाग को इस योजना के बेहतर क्रियान्वयन के सभी तैयारियां सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।

इसी तरह राज्य सरकार द्वारा छत्तीसगढ़ के दूरस्थ और वनांचलों में चलायी जा रही सुपोषित छत्तीसगढ़ योजना का विस्तार 2 अक्टूबर से पूरे प्रदेश में होने जा रहा है। मुख्यमंत्री हर माह स्वंय इस योजना की भी समीक्षा करेंगे। इस योजना में कुपोषण से पीड़ितों को महिला समूह और पंचायतों के माध्यम से प्रतिदिन निःशुल्क गर्म भोजन प्रदान किया जाएगा। इसके लिए सभी कलेक्टरों को इन दोनों योजनाओं की मैदानी स्तर पर क्रियान्वयन और मानिटरिंग सुनिश्चित करने को कहा है। महिला एवं बाल विकास विभाग को भी इस योजना के और अधिक गुणात्मक सुधार के निर्देश दिए गए हैं।

पिता और मां वॉलीबॉल खिलाड़ी लेकिन सिंधु ने बैडमिंटन चुना और इतिहास रच दिया

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पुसारला वेंकटा सिंधु यानी पीवी सिंधु, जी हां, पीवी ने रविवार को स्विट्जरलैंड में बीडब्ल्यूएफ बैडमिंटन वर्ल्ड चैम्पियनशिप-2019 जीतकर इतिहास रच दिया है। वो बैडमिंटन वर्ल्ड चैम्पियनशिप जीतने वाली पहली भारतीय महिला बन गई हैं। इसके लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह, उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू, खेल मंत्री किरण रिजिजू, राजस्थान की पूर्व सीएम वसुंधरा राजे और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने ट्वीट कर पीवी सिंधु को बधाई दी है।

सिंधु ने जापान की नोजुमी ओकुहारा को 21-7, 21-7 से हराया। इस जीत के साथ ही सिंधु ने ओकुहारा से साल 2017 का बदला ले लिया। दो साल पहले में वर्ल्ड चैंपियनशिप के फाइनल में ओकुहारा ने सिंधु का सपना तोड़ा था। पीवी सिंधु ने ओलंपिक 2016 में रजत पदक जीता था। साल 2012 में सिंधु ने 17 साल की उम्र में वर्ल्ड बैडमिंटन रैंकिंग में शीर्ष 20 खिलाड़ियों में जगह बना ली थी।

साल 2009 में जीता पहला अंतरराष्ट्रीय पदक

तेलंगाना के हैदराबाद में 5 जुलाई 1995 को जन्मीं पीवी सिंधु का बैडमिंटन में अंतरराष्ट्रीय करियर साल 2009 से शुरू हुआ। उन्होंने राष्ट्रीय स्तर पर धूम मचाने के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपना पहला पदक साल 2009 में जीता था। पीवी सिंधु के पिता पीवी रमन्ना और मां पी. विजया भी वॉलीबॉल खिलाड़ी रहे, लेकिन बेटी पीवी सिंधु ने बैडमिंटन को चुना। पीवी सिंधु के पिता पीवी रमन्ना को साल 2000 में अर्जुन पुरस्कार से नवाजा गया था। पीवी सिंधु ने मेंहदीपट्टनम स्थित सेंट ऐन्स कॉलेज फॉर वुमेन से पढ़ाई की।

बचपन में ही शटलर बनने का कर लिया था फैसला

जब साल 2001 में पुलेला गोपीचंद ने ऑल इंग्लैंड ओपन बैडमिंटन चैम्पियनशिप का खिताब जीता था, उस समय सिंधु ने बड़ी होकर शटलर बनने का निश्चय कर लिया था। उन्होंने महज 8 साल की उम्र में ही बैडमिंटन खेलना शुरू कर दिया था। उन्होंने महबूब अली की देखरेख में बैडमिंटन की बेसिक ट्रेनिंग सिकंदराबाद के रेलवे इंस्टीट्यूट ऑफ सिगनल इंजीनियरिंग ग्राउंड से शुरू की थी। इसके बाद सिंधु ने पुलेला गोपीचंद की हैदराबाद स्थित गोपीचंद एकेडमी में ट्रेनिंग लेना शुरू कर दिया था।

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मचाई धूम पुरस्कार भी झटके

पीवी सिंधु ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहला पदक साल 2009 में जीता था। इसके बाद साल 2013 में उन्होंने विश्व चैम्पियनशिप में कांस्य पदक जीता था। वो साल 2014 में विश्व चैम्पियनशिप, एशियन गेम्स और राष्ट्रमंडल खेलों में कांस्य पदक जीत चुकी हैं। उन्होंने साल 2016 में रियो डी जिनेरियो ओलंपिक और साल 2017 में विश्व चैम्पियनशिप में रजत पदक जीता था। पीवी सिंधु को साल 2013 में अर्जुन अवॉर्ड, साल 2015 में पद्मश्री पुरस्कार और साल 2016 में राजीव गांधी खेलरत्न पुरस्कार से नवाजा जा चुका है।

मुकेश अंबानी की कंपनी ने इस मंदिर में चढ़ाया 1.11 करोड़ रुपये का चंदा

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भारत के सबसे अमीर शख्स मुकेश अंबानी की गिनती दान देने वाले देश के टॉप कारोबारियों में होती है। अब रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड (आरआईएल) ने तिरुमला के पास स्थित भगवान वेंकटेश्वर के मंदिर में रविवार को 1.11 करोड़ रुपये का चंदा चढ़ाया है। एक अधिकारी ने इसकी जानकारी दी। कंपनी के एक प्रतिनिधि ने तिरुमला तिरुपति देवस्थानम्स के विशेष अधिकारी एवी धर्मा रेड्डी को 1.10 करोड़ रुपये का डिमांड ड्राफ्ट सौंपा है। मंदिर के अधिकारियों ने इसकी जानकारी दी। कंपनी ने तिरुमला तिरुपति देवस्थानम्स से इस धन का इस्तेमाल मंदिर द्वारा श्रद्धालुओं के लिये चलाये जाने वाली निशुल्क भोजन योजना में करने का निवेदन किया है। यह भी

इस संदर्भ में अधिकारीका कहना है कि इस योजना से रोजाना करीब एक लाख लोग लाभान्वित होते हैं। इसे मंदिर के पास 1985 से अब तक जमा हुए 1000 करोड़ रुपये से अधिक के कोष पर प्राप्त ब्याज से चलाया जाता है।

दान देने के मामले में तीसरे स्थान पर अंबानी

बता दें कि साल 2016 के हुरुन रिसर्च सेंटर के आंकड़ों के मुताबिक, मुकेश अंबानी ने उस साल कुल 303 करोड़ रुपये का दान किया था। इस मामले में वो तीसरे स्थान पर थे। दूसरे स्थान पर चीफ एग्जिक्यूटिव कृष गोपालकृष्णन थे, जिन्होंने 313 करोड़ रुपये का दान दिया। वहीं पहले स्थान पर एचसीएल के चेयरमैन शिव नाडर रहे, जिन्होंने कुल 630 करोड़ दान में दिए था।

छत्तीसगढ़ : मुख्यमंत्री ने वर्ल्ड चैम्पियनशिप जीतने पर सिंधु को दी बधाई…

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मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल ने पी.व्ही. सिंधु के वर्ल्ड बैडमिंटन चैम्पियनशिप जीतने पर बधाई और शुभकामनाएं दी हैं। उन्होंने अपने संदेश में कहा है कि इससे हर भारतीय का सिर गर्व से ऊंचा हुआ है। उल्लेखनीय है कि पी.व्ही. सिंधु ने स्विट्जरलैंड के बासेल में हुए वर्ल्ड बैडमिंटन चैम्पियनशिप के फाइनल मुकाबले में जापान की नोजोमी ओकुहरा को हराया। यह चैम्पियनशिप जीतने वाली सिंधु भारत की पहली महिला खिलाड़ी हैं।

न्यूक्लियर बम गिराकर चक्रवाती तूफान को रोकना चाहते हैं डोनाल्ड ट्रंप!

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अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) अपने अजीबोगरीब बयानों के लिए अक्सर सुर्खियों में बने रहते हैं. अब ट्रंप ने अफ्रीकी तट से अमेरिका की ओर तेजी से बढ़ रहे भयंकर चक्रवाती तूफान (Hurricanes) को रोकने के लिए न्यूक्लियर बम (Nuclear Bombs) गिराने का सुझाव दिया है, ताकि यह अमेरिकी सरजमीं तक न पहुंच पाए.अखबार ‘Axios’ ने अपनी एक रिपोर्ट में ये जानकारी दी है. रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी राष्ट्रपति तूफान की ताजा स्थिति की जानकारी ले रहे थे, तभी उन्होंने अपने अधिकारियों को न्यूक्लियर बम गिराने का सुझाव दिया. ट्रंप ने अधिकारियों से पूछा कि क्या ये संभव है कि तूफान को रोकने के लिए उसके रास्ते में न्यूक्लियर बम गिराया जाए?

रिपोर्ट के मुताबिक, ऐसा पहली बार नहीं, जब ट्रंप ने न्यूक्लियर बम से आंधी-तूफान रोकने का सुझाव दिया हो. इसके पहले भी उन्होंने अमेरिकी वैज्ञानिकों से इसपर रिसर्च करने को कहा था, ताकि आने वाले समय में भयंकर तूफान से अमेरिका में होने वाले नुकसान को रोका जा सके.

वैसे डोनाल्ड ट्रंप का ये आइडिया नया नहीं है. Axios की रिपोर्ट के मुताबिक, सबसे पहले ये सुझाव एक वैज्ञानिक ने 34वें राष्ट्रपति ड्वाइट डेविट आइजनहावर के कार्यकाल में दिया था. हालांकि, वैज्ञानिकों को कहना है कि तूफान रोकने के लिए न्यूक्लियर बम गिराने का सुझाव प्रैक्टिकल नहीं है.

बता दें कि अमेरिका में हर साल तूफान से भारी तबाही मचती है. अमेरिका में तूफान आने से सात साल पहले ही उसका नामकरण कर दिया जाता है, यानी साल 2022 में कौन सा नाम पड़ेगा उसका नाम 2005 में ही तय कर दिया जाता है.

अमेरिका में अगर साल 2022 में कोई भयानक तूफान आएगा तो उसका नाम एलेक्स होगा. यह तूफान सबसे भयानक होगा जो अमेरिका को तबाह कर देगा. वहीं, अगर कई तूफान आए तो इस तूफान को वाल्टर नाम से पुकारा जाएगा.

जन्मदिन विशेष: ‘हम भविष्य से डरते हैं क्योंकि हम आज को बर्बाद कर रहे हैं’

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दुनियाभर में शांति और प्रेम का संदेश देने वाली मदर टेरेसा 109 साल पहले आज ही के दिन जन्मी थीं. पढ़िए उनकी जिंदगी की कही वो बातें जो हर किसी के जीवन के लिए एक बेहतरीन सीख है.

विश्व बैंक के अध्यक्ष रहे रॉबर्ट मेक्नामारा मदर टेरेसा के बड़े प्रशंसक थे. उन्होंने कहा था कि मदर टेरेसा नोबेल शांति पुरस्कार की सबसे बड़ी हकदार हैं, क्योंकि वो मानव मर्यादा को भंग किए बगैर शांति को बढ़ावा देने में यकीन करती हैं.

मदर टेरेसा के विचारों को कुछ ऐसे समझा जा सकता है कि उन्होंने सम्मान में दिए जाने वाले भोज कार्यक्रमों को रद्द करने का अनुरोध किया था. ताकि बचे हुए धन से कोलकाता के गरीबों की भलाई में इस्तेमाल किए जा सकें.

मदर टेरेसा को नजदीक से जानने वाले लोग कहते हैं कि उनके हाथ मिलाने में इतना आकर्षण हुआ करता था कि लोग उनसे जुड़े बिना नहीं रह पाते थे.

पूरी जिंदगी गरीबों की मदद करने वाली मदर टेरेसा को चार या पांच घंटे से ज़्यादा नींद की ज़रूरत नहीं पड़ती थी.

मदर टेरेसा ने 1947 में ही भारत की नागरिकता ले ली थी. वो फर्राटेदार बांग्ला बोलती थीं.

मदर टेरेसा का मानना था कि मनुष्य को पाप से नफरत करनी चाहिए, पापी से नहीं.

अमेरिका के राष्ट्रपति रोनल्ड रीगन, रूस के राष्ट्रपति मिखाइल गोर्बाचोव, जर्मनी के चांसलर हेलमट कोल या फिर यासिर अराफात, सबका मदर टेरेसा के प्रति विशेष अनुराग था.

1977 में जब इंदिरा गांधी चुनाव हार गईं तो मदर टेरेसा ज़ोर दे कर उनसे मिलने गईं थी.

जीवन के अंतिम दिनों तक मदर टेरेसा ने गरीबों के शौचालय अपने हाथों से साफ किए और अपनी साड़ी को खुद अपने हाथों से धोया.

छत्तीसगढ़ : चेम्बर ऑफ कामर्स एण्ड इंडस्ट्रीज के प्रतिनिधि मंडल ने की ‘मुख्यमंत्री’ से सौजन्य मुलाकात…

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मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल से छत्तीसगढ़ चेम्बर ऑफ कामर्स एण्ड इंडस्ट्रीज के प्रतिनिधि मंडल ने मुख्यमंत्री निवास में सौजन्य मुलाकात की। मुख्यमंत्री को प्रतिनिधि ने व्यापारजगत के लिए राज्य सरकार द्वारा उठाए गए कदमों के प्रति आभार व्यक्त किया। श्री बघेल को इस अवसर पर भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा की प्रतिकृति भी भेंट की।

मुख्यमंत्री ने प्रतिनिधि मंडल से कहा कि ग्राहकों की जेब में पैसा होने पर उत्पाद की बिक्री होगी। उन्होंने कहा कि हमारी सरकार ने सत्ता में आते ही किसानों को कर्ज के बोझ का भार हठाया है। प्रदेश की अर्थ व्यवस्था को गति देने के लिए किसानों को धान का प्रति क्विंटल ढाई हजार रूपए और अल्प कालीन कृषि ऋण मुक्ति का ऐतिहासिक फैसला लिया है, इससे जहां उद्योग और व्यापार जगत में तेजी आयी है। ऑटोमोबाइल सेक्टर में जहां मंदी का माहौल है, वहीं छत्तीसगढ़ में 26 प्रतिशत की उछाल देखा गया है। मध्यम और कमजोर वर्ग को राहत देने के लिए भूमि की गाइड लाइन दरों में 30 प्रतिशत की कमी की गई है। साथ ही 5 डिसमिल से छोटे भू-खंडों की रजिस्ट्री पर लगा प्रतिबंध हटा दिया गया है। नामांतरण, डायवर्सन और बटांकन का सरलीकरण किया गया है। प्रकरणों को लोक सेवा गारंटी योजना में शामिल कर समय सीमा में निराकरण करने से शहरों में मकान और भूखंड खरीदना आसान हो गया है। अब किसी भी आवासीय प्रोजेक्ट के लिए जरुरी सभी तरह की एनओसी लेने के लिए सिंगल विंडो सिस्टम लागू करने का फैसला लिया गया है।

भारी जाम से बचने के लिए अमीर कर रहे एंबुलेंस से सफर

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ये अजीबो-गरीब वाकया ईरान (Iran) की राजधानी तेहरान (Tehran) की. तेहरान की सड़कों पर हमेशा ही भारी जाम लगा रहता है. इस भारी जाम की स्थिति से निपटने के लिए वहां के अमीर लोगों ने एक नई तरकीब निकाली है. वे लोग एंबुलेंस (Ambulance) को टैक्सी तरह इस्तेमाल कर रहे हैं. शहर के अमीर लोग जाम से बचने के लिए मेडिकल सर्विस का गलत ईस्तेमाल कर रहे हैं. तेहरान ईरान का सबसा घनी आबादी वाला शहर है. यहां की आबादी एक करोड़ 40 लाख की है.

शहर में विकास और निर्माण के कार्य के दौरान लोग नियमों का उल्लंघन करते हैं, जिसकी वजह से सड़कें और चौराहे योजनाबद्ध तरीके से नहीं बनी हुई है. इसी वजह से लोगों को रोज भारी जाम से दो-चार होना पड़ता है. मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक तेहरान ट्रैफिक जाम के मामले में दुनिया के सबसे खराब शहरों शुमार है. लोग यहां वाहर निकलने से कतराते हैं, ताकि उन्हें जाम में दिक्कतों का सामना न करना पड़े. इस स्थिति से बचने के लिए शहर के अमीरों ने एंबुलेंस का दुरुपयोग करना शुरू कर दिया है.

कछ ही दिनों पहले एक फुटबॉलर ने प्राइवेट एंबुलेंस सर्विस को फोनकर उनके घर एंबुलेंस को भेजने के लिए कहा. साथ ही उसने खुलकर बता दिया था कि उसके घर में कोई बीमार नहीं है. वो एंबुलेंस का उपयोग टैक्सी के तौर पर करना चाहते हैं. न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, एक प्राइवेट एंबुलेंस सर्विस के अधिकारी महमूद रहिमी ने बताया कि हमें अभिनेता, खिलाड़ी और अमीर लोग इसी तरह कॉल करते हैं.

पूर्व पीएम मनमोहन सिंह की SPG सुरक्षा हटाई गई, जानिए क्या होती है X, Y, Z और Z+ सुरक्षा

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केंद्रीय गृह मंत्रालय ने नेताओं को मिली सुरक्षा की समीक्षा की है। इसके तहत मंत्रालय ने कुछ नेताओं की सुरक्षा को वापस लेने का आदेश जारी किया है। इसके तहत अब पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को मिली एसपीजी सुरक्षा को वापस ले लिया है। अब वह जेड प्लस सुरक्षा कवर में रहेंगे।

भारत में सुरक्षा की श्रेणी खतरे के स्तर के साथ एक स्टेटस सिंबल भी माना जाता है। केंद्रीय गृह मंत्रालय इंटेलीजेंस ब्यूरो (आईबी) की सिफारिश पर हर साल विशिष्ट लोगों की सुरक्षा की समीक्षा करता है। खतरे के स्तर को देखते हुए विशिष्ट और अति विशिष्ट लोगों को विभिन्न स्तर की सुरक्षा दी जाती है।

एसपीजी सुरक्षा 
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गांधी परिवार को एसपीजी की सुरक्षा प्राप्त है। यह सुरक्षा का सबसे ऊंचा स्तर होता है। इसमें तैनात कमांडो के पास अत्याधुनिक हथियार और संचार उपकरण होते हैं।

पहले यह सुरक्षा पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को भी मिली हुई थी लेकिन आईबी रिपोर्ट की समीक्षा के बाद खतरे के कम स्तर को देखते हुए उनसे यह सुरक्षा वापस ले ली गई है।

जेड प्लस श्रेणी की सुरक्षा 
स्पेशल प्रोटक्शन ग्रुप की सुरक्षा के बाद जेड प्लस भारत की सर्वोच्च सुरक्षा श्रेणी है। इस श्रेणी में संबंधित विशिष्ट व्यक्ति की सुरक्षा में 36 जवान लगे होते हैं। इसमें 10 से ज्यादा एनएसजी कमांडो के साथ दिल्ली पुलिस, आईटीबीपी या सीआरपीएफ के कमांडो और राज्य के पुलिसकर्मी शामिल होते हैं।

हर कमांडो मार्शल आर्ट और निहत्थे युद्ध करने की कला में माहिर होता है। सुरक्षा में लगे एनएसजी कमांडो के पास एमपी 5 मशीनगन के साथ आधुनिक संचार उपकरण भी होता है। इसके अलावा इनके काफिले में एक जैमर गाड़ी भी होती है जो मोबाइल सिग्नल जाम करने का काम करती है। देश में चुनिंदा लोगों को ही जेड प्लस की सुरक्षा प्राप्त है।

जेड श्रेणी की सुरक्षा 
जेड श्रेणी की सुरक्षा में चार से पांच एनएसजी कमांडो सहित कुल 22 सुरक्षागार्ड तैनात होते हैं। इसमें दिल्ली पुलिस, आईटीबीपी या सीआरपीएफ के कमांडो व स्थानीय पुलिसकर्मी भी शामिल होते हैं।

वाई श्रेणी की सुरक्षा 
यह सुरक्षा का तीसरा स्तर होता है। कम खतरे वाले लोगों को यह सुरक्षा दी जाती है। इसमें कुल 11 सुरक्षाकर्मी शामिल होते हैं। जिसमें दो पीएसओ (निजी सुरक्षागार्ड) भी होते हैं। इस श्रेणी में कोई कमांडो नहीं तैनात होता है। देश में सबसे ज्यादा लोगों को वाई श्रेणी की सुरक्ष दी गई है।

एक्स श्रेणी की सुरक्षा 
इस श्रेणी में दो सुरक्षा गार्ड तैनात होते हैं। जिसमें एक पीएसओ (व्यक्तिगत सुरक्षा अधिकारी) होता है। देश में काफी लोगों को एक्स श्रेणी की सुरक्षा प्राप्त है।

कुछ महीने पहले गृह मंत्रालय ने सुरक्षा समीक्षा के आधार पर आरजेडी प्रमुख लालू प्रसाद यादव, बिहार के सारण से भाजपा सांसद राजीव प्रताप रूडी की सुरक्षा हटा दी थी। वहीं बिहार के जमुई से लोक जनशक्ति पार्टी के सांसद चिराग पासवान की सुरक्षा में लगे सीआरपीएफ जवानों को वापस बुला लिया गया था। चिराग की सुरक्षा श्रेणी में कटौती करते हुए अब उन्हें वाई श्रेणी की सुरक्षा दी गई है।

इसके अलावा बहुजन समाज पार्टी के राज्यसभा सांसद सतीश चंद्र मिश्र का नाम केंद्रीय सुरक्षा सूची से हटा लिया गया था। अब उन्हें सिर्फ यूपी में जेड श्रेणी की सुरक्षा दी गई है। पहले उन्हें दिल्ली पुलिस और यूपी में सीआरपीएफ की सुरक्षा प्राप्त थी।