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करप्शन पर मोदी सरकार का एक और बड़ा वार, फिर 22 अफसरों को जबरन किया रिटायर

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केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार (Narendra Modi Government) के दूसरे कार्यकाल में सरकारी विभागों की सफाई यानी ‘नाकारा अफसरों’ को निकालने का सिलसिला लगातार जारी है. सरकार ने सोमवार, 26 अगस्त को एक बार फिर टैक्स विभाग (Tax Department) के 22 सीनियर अफसरों को जबरन रिटायर (Compulsory Retirement) करने का फैसला लिया है. इससे पहले भी टैक्स विभाग के ही 12 वरिष्ठ अफसरों को जबरन रिटायर कर दिया गया था. आपको बता दें कि इसके पहले जून महीने में भी वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण (Finance Minister Nirmala Sitharaman) ने वित्त मंत्रालय (Finance Ministry) का कार्यभार संभालते ही सख्त फैसला लेते हुए कई बड़े अधिकारियों को जबरन रिटायर कर दिया था. डिपार्टमेंट ऑफ पर्सनल एंड एडमिनिस्ट्रेटिव रिफॉर्म्स के नियम 56 के तहत वित्त मंत्रालय के इन अफसरों को सरकार समय से पहले ही रिटायरमेंट दे रही है.

टैक्स विभाग में पहले भी कई बड़े अधिकारियों को दिया जा चुका है जबरन रिटायरमेंट- जून महीने में नियम 56 के तहत रिटायर किए गए सभी अधिकारी इनकम टैक्स डिपार्टमेंट में चीफ कमिश्नर, प्रिंसिपल कमिश्नर्स और कमिश्नर जैसे पदों पर तैनात थे. रिपोर्ट्स के मुताबिक इनमें से कई अफसरों पर कथित तौर पर भ्रष्टाचार, अवैध और बेहिसाब संपत्ति जैसे गंभीर आरोप थे.

आपको बता दें कि नियम 56(J) के तहत केंद्र सरकार नाकारा सरकारी अधिकारियों को घर भेजना चाहती है. 50 साल से अधिक के अधिकारियों को घर भेजकर युवाओं को सिस्टम में शामिल करने से ब्यूरोक्रेसी की क्षमता बेहतर बनाई जा सकेगी. केंद्रीय सतर्कता आयुक्त और अन्य निगरानी समिति की मदद से भ्रष्ट कर्मियों पर नजर रखी जाएगी.

इस नियम के तहत किया जबरन रिटायर- सेंट्रल सिविल सर्विसेज 1972 के नियम 56(J) के हिसाब से 30 साल तक सेवा पूरी कर चुके या 50 साल की उम्र पर पहुंच चुके अधिकारियों की सेवा सरकार समाप्त कर सकती है. >> उन्हें नोटिस और तीन महीने के वेतन-भत्ते देकर घर भेजा जा सकता है. ऐसे अधिकारियों के काम की हर तीसरे महीने समीक्षा की जाती है और अगर उन पर भ्रष्टाचार या अक्षमता/अनियमितता के आरोप पाए जाते हैं तो जबरन रिटायरमेंट दिया जा सकता है.

>> सरकार के पास यह विकल्प दशकों से मौजूद है, लेकिन अब तक गंभीरता से इस पर कारवाई नहीं की जाती थी. इस सरकार में भी साल 2014, 2015 और 2017 में इस नियम पर गंभीरता के अमल करने के आदेश दिए गए, इस टर्म में सरकार अब कमर कसके इसे लागू कराने के प्रयास में जुटी है.

>> इस नियम में अब तक ग्रुप ए और बी के अधिकारी ही शामिल थे, अब ग्रुप सी के अधिकारी भी इसमें आ गए हैं. केंद्र सरकार ने सभी केंद्रीय संस्थानों से इस बारे में मासिक रिपोर्ट मंगाना शुरू कर दिया है.

>> सरकार के जरिए ऐसे अधिकारियों को अनिर्वाय रिटायरमेंट दिया जा सकता है. ऐसा करने के पीछे सरकार का मकसद नॉन-फॉर्मिंग सरकारी सेवक को रिटायर करना होता है.

जम्मू-कश्मीर की पहली लड़की जिसने पास की AIIMS परीक्षा, इसलिए है खास

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जम्मू-कश्मीर के राजौरी जिले की इरमीम शमीम अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) की एमबीबीएस प्रवेश परीक्षा पास करने वाली पहली गुर्जर महिला बन गई हैं. बता दें कि यह परीक्षा जून महीने में आयोजित की गई थी. शमीम सीमावर्ती ज़िला के धानोर गांव की रहने वाली हैं और इस परीक्षा को पास करने के लिए काफी मेहनत की थी.

शमीम के गांव के आसपास कोई स्कूल नहीं था इसलिए वह प्रत्येक दिन 10 किलोमीटर पैदल चलकर दूसरे गांव के स्कूल जाया करती थी.

इरमीम एक पिछड़े समुदाय से हैं और उसका परिवार आर्थिक समस्याओं से जूझ रहा है. इन सबके बावजूद हौसलों में शमीम सवर्ण हैं. मीडिया से बात करते हुए उन्होंने कहा, ‘सभी के जीवन में कुछ-न-कुछ परेशानी होती है लेकिन अगर कोई चुनौतियों से लड़ता है तो उसके जीवन में सफलता ज़रूर आती है.’

परिवार के लोग शमीम की इस उपलब्धि से काफी ख़ुश हैं. उनकी चाहत है कि वह एक सफल डॉक्टर बनकर जम्मू-कश्मीर और देश की सेवा करे.

मीडिया से बात करते हुए शमीम के चाचा लियाकत चौधरी ने कहा कि हमारी भतीजी पूरे क्षेत्र के लिए आशा की किरण है. उन्होंने कहा, ‘जम्मू-कश्मीर की लड़कियों ने राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर अपनी प्रतिभा को लोहा मनवाया है.’

ज़िला विकास कमिश्नर ऐजाज़ असद ने इरमीम शमीम की तारीफ़ करते हुए उनकी पढ़ाई जारी रखने में भरपूर मदद का आश्वासन दिया है.

भाजपा के कद्दावर नेता मुरली मनोहर जोशी की तबीयत को लेकर आई बड़ी खबर, जानें

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बीजेपी के दिग्गज नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री डॉक्टर मुरली मनोहर जोशी तबीयत को लेकर हाल ही में सोशल मीडिया पर खबर आई थी कि, उनकी तबीयत खराब है। हालाकि, यह खबर झूठी निकली है वह पूरी तरह से स्वस्थ है।

दरअसल हाल ही में बीजेपी के दिग्गज नेता मुरली मनोहर जोशी की तबीयत अचानक खराब हने की खबर सामने आई थी। तबीयत बिगड़ने के चलते डॉक्टर मुरली मनोहर जोशी को इलाज के लिए कानपुर के अस्पताल में भर्ती कराया गया है। डॉक्टर उनका इलाज कर रहे हैं।लेकिन यह खबर पूरी तरह से बेबुनियाद है।

वहीं पूर्व वित्त मंत्री अरुण जेटली के निधन से पहले ही भाजपा में गम का माहौल है। ऐसे में मुरली मनोहर का तबीयत का खराब होना बीजेपी के लिए बुरी खबर है।

पूर्व केंद्रीय मंत्री डॉक्टर मुरली मनोहर जोशी का बीमार होना भाजपा के लिए एक बुरी खबर है। मुरली मनोहर जोशी 85 साल के हैं। मुरली मनोहर जोशी किसी काम के चलते कानपुर गए हुए थे। जहां उनकी अचानक तबीयत खराब हो गई। बता दे कि , भाजपा के संस्थापक सदस्यों और अध्यक्ष रह चुके डॉक्टर मुरली मनोहर जोशी पार्टी के सबसे वरिष्ठ और कद्दावर नेता है। डॉक्टर मुरली मनोहर जोशी की तबीयत किस वजह से खराब हुई है इसके बारे में अभी तक पता नहीं चल पाया है।

वहीं पूर्व वित्त मंत्री अरुण जेटली के हुए असमायिक निधन से बीजेपी में गम का माहौल है। लंबी बीमारी के बाद अरुण जेटली का दिल्ली के एम्स अस्पताल में शनिवार को 12 बजकर 7 मिनट पर निधन हो गया था। आज अरुण जेटली का निगमबोध घाट पर राजकीय सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया गया।

सावधान : एटीएम में ठगी के लिए ऐसी शातिराना सेंटिंग देखकर कान खड़े हो जाएंगे, देखिए वीडियो

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एटीएम कार्ड को लेकर हो रही ठगी रुकने का नाम नहीं ले रही। आए दिन नए नए तरीको से हो रही ठगी ने लोगों के अन्दर ऑनलाइन लेनदेन को लेकर डर पैदा कर दिया है। दिल्ली के अर्जुन नगर से भी एक शातिराना मामला सामने आया है।

https://twitter.com/umashankarsingh/status/1165551297719701504

अर्जुन नगर के सफदरजंग इंक्लेव (Safdarjung Enclave) पर कैनरा बैंक (Canara Bank) का एटीएम है। जहां कुछ शातिरों ने एटीएम में कैमरा सेट कर दिया था। जिसके जरिए वह लोगों के एटीएम पिन और कार्ड के नंबर ले रहे थे।

साइबर शातिरों की इस ठगी को एक युवक ने पकड़ लिया और उसने इसका खुलासा कर दिया। इस खुलासे को युवक ने वीडियो बनाकर वायरल कर दिया। जो इस समय काफी लोगो द्वारा शेयर किया जा रहा है।

विधवा बनकर 6 बार कर चुकी है शादी, बेहद खतरनाक है यह लुटेरी दुल्हन

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राजस्थान का शेखावाटी अंचल दुल्हन खरीद की मंडी बनता जा रहा है। इसी बात का फायदा खरीद-फरोख्त करने वाले गिरोह और दलाल जमकर उठा रहे हैं। आए दिन लुटेरी दुल्हनें सामने आ रही हैं। ताजा मामला सीकर जिले के श्रीमाधोपुर के गांव पटवारी का बास में सामने आया है। यहां तीन लाख में यूपी से खरीदकर लाई गई दुल्हन दस दिन में ही सामन लेकर फरार हो गई। पुलिस ने आरोपी दुल्हन समेत चार दलालों को गिरफ्तार कर जेल भिजवाया है।

पुलिस जांच में सामने आया कि गिरोह हर बार महिला को विधवा बताकर उसकी शादी करवा रहा था। अब तक इसी तरह से आधा दर्जन युवकों के साथ शादी रचाकर उन्हें ठगा जा चुका है। श्रीमाधोपुर पुलिस थाने के हैड कांस्टेबल मालीराम ने बताया कि 16 अगस्त 2019 को पटवारी का बास निवासी मोहनलाल जाट ने मामला दर्ज कराया था कि खण्डेला थाने के ग्राम फतेहपुरा निवासी हरिश कुमार जाट व गुमानसिंह की ढ़ाणी निवासी बन्शीधर जाट ने मथुरा यूपी के नारसिंह व उसकी पत्नी सरोज को लेकर आए और उसे लड़की बताकर तीन लाख रुपयों में शादी कराने की बात कही।

तीन लाख देने पर 6 अगस्त को यूपी मथूरा निवासी प्रमिला के साथ शादी करवा दी। प्रमिला कुछ दिन साथ रहकर रुपए व गहने लेकर भाग गई। पुलिस जांच में सामने आया कि दलाल हरीश जाट और यूपी में रह रहे दलाल नाहरसिंह व सरोज एक दूसरे के संपर्क में थे। उन्होंने करीब आधा दर्जन फर्जी शादियों की बात कबूली है। दलाल ने पीड़ित मोहनलाल जाट को प्रमिला को विधवा बताकर 3 लाख में शादी करवाने की बात करी। तीन लाख में दोनों की शादी हो गई। पुलिस ने बताया कि प्रमिला पहले भी 5-6 फर्जी शादी कर लाखों रुपए ठग चुकी है।

कश्मीर: मीडिया प्रतिबंध का समर्थन करने के प्रेस काउंसिल के कदम की पत्रकार संगठन ने की आलोचना

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भारत में मान्यता प्राप्त पत्रकारों के एकमात्र संगठन प्रेस एसोसिएशन ने भारतीय प्रेस परिषद (पीसीआई) के उस कदम पर गहरी आपत्ति जताई है जिसमें पीसीआई अध्यक्ष जस्टिस चंद्रमौली कुमार प्रसाद ने सुप्रीम कोर्ट में कश्मीर टाइम्स की कार्यकारी संपादक अनुराधा भसीन द्वारा दायर याचिका में हस्तक्षेप करने की मांग की है.

शुक्रवार को पीसीआई अध्यक्ष ने परिषद को बताए बिना ही मामले में दखल देने के लिए सुप्रीम कोर्ट से अनुमति मांगी थी, जिससे पीसीआई के कम से कम दो सदस्य नाराज हो गए.

पीसीआई की ओर से यह अनुरोध शुक्रवार को वकील अंशुमन अशोक ने किया था. अपने आवेदन में पीसीआई ने संचार माध्यमों पर प्रतिबंध को न्यायोचित ठहराते हुए कहा कि सुरक्षा कारणों से मीडिया पर तर्कसंगत रोक लगाई गई है.

पीसीआई ने कहा कि चूंकि भसीन की याचिका में एक तरफ पत्रकारों…मीडियाकर्मियों के निष्पक्ष एवं स्वतंत्र रिपोर्टिंग के अधिकार पर चिंता जताई गई है, वहीं दूसरी तरफ राष्ट्रीय एकता और संप्रभुता का मामला है, इसलिए परिषद् का मानना है कि इसे अपना विचार उच्चतम न्यायालय के समक्ष पेश करना चाहिए और प्रेस की स्वतंत्रता के साथ ही राष्ट्र हित में उनकी याचिका पर निर्णय करने में सहयोग करना चाहिए.

बता दें कि, बीते 10 अगस्त को भसीन ने सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दाखिल करके जम्मू कश्मीर में मीडिया पर लगाए गए प्रतिबंधों को चुनौती दी थी. उन्होंने राज्य में मोबाइल, इंटरनेट और लैंडलाइन सेवाओं पर लगाए गए सभी प्रतिबंधों में तत्काल ढील देने की मांग की थी ताकि पत्रकार अपना काम कर सकें.

प्रेस एसोसिएशन के दो सदस्य जयशंकर गुप्ता और सीके नायक ने आश्चर्य जताते हुए कहा कि ऐसे गंभीर मामले में परिषद को विश्वास में नहीं लिया गया. बता दें कि, परिषद के अध्यक्ष गुप्ता और परिषद के महासचिव नायक दोनों पीसीआई के भी मौजूदा सदस्य हैं.

उन्होंने एक बयान जारी करते हुए कहा कि 22 अगस्त को पूरे दिन काउंसिल की मीटिंग चली थी और उस दौरान इस याचिका का कोई जिक्र नहीं हुआ था, जिसे मीटिंग के दौरान ही सुप्रीम कोर्ट में दाखिल किया गया था.

बयान में कहा गया कि बैठक में जम्मू-कश्मीर में मीडिया की स्थिति पर चिंता जाहिर करते हुए सदस्यों ने प्रस्ताव भी पेश किया था. उन्होंने दावा किया कि इस मामले पर न तो विचार किया गया और न ही इस पर सदस्यों के विचार मांगे गए. जम्मू-कश्मीर में मीडिया की स्थिति को देखते हुए परिषद ने एक कमेटी का गठन भी किया था लेकिन अध्यक्ष ने कभी भी किसी लिखित याचिका की चर्चा नहीं की.

बयान में आगे कहा गया कि पीसीआई के दो मुख्य उद्देश्य प्रेस की स्वतंत्रता बनाए रखना और पत्रकारिता की गुणवत्ता में लगातार वृद्धि करना है. लेकिन पांच अगस्त के बाद से जम्मू-कश्मीर में ना ही कोई अखबार प्रकाशित हो पाया है और ना ही कोई न्यूज एजेंसी अपना काम कर पाई है.

मीडिया पर लगे प्रतिबंध का समर्थन करने पर आउटलुक मैगजीन के पूर्व संपादक और पीसीआई के पूर्व सदस्य कृष्णा प्रसाद ने पीसीआई के कदम की आलोचना की और कहा कि यह जिम्मेदारियों को त्यागने की शर्मनाक हरकत है.

उन्होंने शुक्रवार को द वायर से कहा, ‘लोगों के नाम पर संसद के प्रावधान के तहत गठित हुई प्रेस काउंसिल अगर एक स्वतंत्र मीडिया को देश की स्वायत्तता के खतरे के रूप में देखती है और अगर उसे लगता है कि विशेष परिस्थिति में पाठकों और दर्शकों को अंधेरे में रखा जा सकता है तो यह भारतीय लोकतंत्र के लिए दुख का दिन है.’

आईएएस अधिकारी ने दिया इस्तीफ़ा, कहा- जम्मू कश्मीर में अघोषित आपातकाल

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भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) के एक अधिकारी कन्नन गोपीनाथन ने जम्मू कश्मीर में लगे आभासी आपातकाल के खिलाफ बोलने के लिए देश में सबसे प्रतिष्ठित मानी जाने वाली अपनी नौकरी से इस्तीफा दे दिया.

बता दें कि, बीते 5 अगस्त को जम्मू कश्मीर को विशेष राज्य का दर्जा देने वाले अनुच्छेद 370 के अधिकतर प्रावधानों के बाद से वहां पर भारी संख्या में सुरक्षा बल तैनात हैं, चप्पे-चप्पे पर सुरक्षा बलों का पहरा है, संचार सेवाएं पूरी तरह से बंद हैं.

द वायर से बात करते हुए गोपीनाथन ने कहा, ‘यह यमन नहीं है, यह 1970 के दशक का दौर नहीं है जिसमें आप पूरी जनता को मूल अधिकार देने से इनकार कर देंगे और कोई कुछ नहीं कहेगा.’

उन्होंने कहा, ‘एक पूरे क्षेत्र में सभी तरह के प्रतिबंधों को लगाकर उसे पूरी तरह से बंद किए हुए पूरे 20 दिन हो चुके हैं. मैं इस पर चुप नहीं बैठ सकता हूं चाहे खुल कर बोलने की आजादी के लिए मुझे आईएएस से ही इस्तीफा क्यों न देना पड़े और मैं वही करने जा रहा हूं.’

बता दें कि, 2012 में आईएएस में शामिल होने वाले गोपीनाथन अरुणाचल-गोआ-मिजोरम-केंद्र शासित प्रदेश कैडर से जुड़े हुए हैं. ऐसा हो सकता है कि उन्हें जम्मू कश्मीर भेजा जा सकता था जिसे एक केंद्र शासित प्रदेश बना दिया गया है.

इस समय वे दादर एवं नागर हवेली सरकार के साथ जुड़े हुए थे लेकिन 21 अगस्त बुधवार को उन्होंने अपना इस्तीफा दे दिया. वहां पर वे बिजली, शहरी विकास और शहर एवं देश नियोजन विभाग के सचिव थे.

गोपीनाथन ने कहा, ‘मैं सार्वजनिक तौर पर तब तक कुछ नहीं कहना चाहता था जब तक कि मेरा इस्तीफा स्वीकार नहीं हो जाता है. लेकिन यह बात तब लीक हो गई जब उनके साथियों ने यह सूचना केरल की मीडिया को बता दी जिनके साथ उन्होंने एक सोशल मीडिया ग्रुप में यह बात शेयर की थी.’

वायर से बात करते हुए गोपीनाथन ने कहा, ‘बाहरी संकट या सशस्त्र विद्रोह होने पर संविधान आपातकाल लगाने (और स्वतंत्रता को निलंबित करने) की अनुमति देता है, लेकिन कश्मीर में, लोगों की स्वतंत्रता को इस आधार पर रोक दिया गया है कि यदि ऐसा नहीं किया जाता है तो आंतरिक गड़बड़ी हो सकती है. 44वें संशोधन के बाद किसी भी मामले में आंतरिक गड़बड़ी को आधार बनाते हुए आपातकाल नहीं लगाया जा सकता है.’

उन्होंने कहा, ‘निश्चित तौर पर आपातकाल की तरह यहां पर कोई औपचारिक घोषणा नहीं की गई. सब कुछ आईएएस अधिकारियों के कार्यकारी आदेशों पर छोड़ दिया गया है. इसके साथ ही नागरिकों के न्यायिक सहायता मांगने पर रोक भले ही न लगी हो लेकिन अदालतें उन पर कार्यवाही करने को उत्सुक नहीं दिख रही है.’

गोपीनाथन खासतौर पर इस साल जनवरी में आईएएस से इस्तीफा देने वाले पूर्व आईएएस टॉपर शाह फैसल की गिरफ्तारी के तरीके को लेकर चिंतित हैं.

इस मामले में 19 अगस्त को दिल्ली हाईकोर्ट में एक हैबियस कॉर्पस याचिका लगाई गई. ऐसी याचिकाओं पर तत्काल सुनवाई की जाती है लेकिन अदालत ने कहा कि वह इस मामले पर 3 सितंबर को सुनवाई करेगी.

अधिकारी ने कहा कि पिछले कुछ समय से सिविल सेवा से मोहभंग होने के बाद भी कश्मीर की असामान्य स्थिति ने उन्हें यह कदम उठाने के लिए मजबूर कर दिया.

उन्होंने कहा, ‘अगर मैं एक अखबार का मालिक हूं, तो कल मेरी हेडलाइन सिर्फ ’20’ शब्द होगी क्योंकि यह बीसवां दिन है जब कश्मीर के लोगों से उनकी स्वतंत्रता छीनकर उन पर इन प्रतिबंधों को लगा दिया गया है.’

आईएएस छोड़ने के बाद उनकी योजना के बारे में पूछे जाने पर गोपीनाथन ने कहा, ‘मैंने इतनी दूर का नहीं सोचा है. लेकिन आज से बीस साल बाद अगर लोग मुझसे पूछेंगे कि जब देश के एक हिस्से में आभासी आपातकाल लगा दिया गया था तब आप क्या कर रहे थे तब कम से कम मैं यह कह सकूंगा कि मैंने आईएएस से इस्तीफा दे दिया था.’

केरल के कोट्टायम के रहने वाले गोपीनाथन ने अपनी स्कूली शिक्षा पुथुप्पल्ली से पूरी की थी. इसके बाद उन्होंने बिरला इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी से इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग की थी. साल 2018 में केरल में आई भारी बाढ़ में उन्होंने चेंगन्नुर के राहत कार्यों में बहुत सक्रियता दिखाई थी. उन्होंने अपनी पहचान छुपाने की पूरी कोशिश की थी लेकिन एक साथी आईएएस अधिकारी ने उन्हें पहचान लिया था.

स्पोक और अलॉय व्हील में से कौन है बेहतर,जानिए नफे-नुकसान

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एक जमाना था जब बाइक मॉडिफिकेशन की बड़ी निशानी अलॉय व्हील्स हुआ करते थे क्योंकि तब आम बाइक्स में मेकर्स स्पोक व्हील्स ही दिया करते थे। तब से लेकर अब तक ये बहस जारी है कि अलॉय व्हील्स बेहतर है या स्पोक व्हील्स।

स्पोक व्हील्स :

यह ज्यादा ड्यूरेबल होते हैं। ऑफ रोड बाइक्स, डर्ट बाइक्स, स्क्रेम्बलर्स में दुनिया इन्हें आज भी उपयोग में लाना पसंद करती है। भारत में हीरो एक्सपल्स 200 और रॉयल एनफील्ड हिमालयन में स्पोक व्हील्स दिए जाते हैं। महंगी मानी जाने वाली ट्रायम्फ स्क्रैम्बलर 1200 एक्ससी और डुकाटी मल्टीस्ट्राडा 1260 एनड्यूरो में ट्यूबलेस स्पोक रिम्स दिखती हैं।

फायदे जब बाइक, ऑफ रोडिंग के दौरान तीखे बम्प से गुजरती है तो स्पोक व्हील्स लचीला होने के कारण काफी हद तक झटके झेल जाते हैं। अगर कुछ नुकसान होता है तो इन्हें आसानी से ठीक करवाया जा सकता है। इनके पार्ट्स आसानी से बदले जा सकते हैं जो सस्ते भी होते हैं।

नुकसान ज्यादातर बाइक्स में स्पोक व्हील्स के अंदर ट्यूब होते हैं, जिन्हें बदलना, रिपेयर करवाना, इनके पंक्चर जुड़वाना बड़ा काम होता है क्योंकि पूरी व्हील असेंबली को बाहर निकालना होता है। ढीले-टूटे स्पोक ठीक करवाना भी झंझट है। ट्यूबलैस स्पोक व्हील्स महंगे होते हैं।

अलॉय व्हील्स :

1970 के दशक से दुनिया इनका उपयोग कर रही है लेकिन भारत पहुंचने में इन्हें काफी वक्त लगा। यह कास्ट-एल्युमिनियम के बनते हैं। वक्त के साथ इन्हें बनाना काफी सस्ता हो गया और मेकर्स कीमत में बचत के कारण इनका खूब उपयोग करने लगे। दिखने में सुंदर होने की वजह से, अब तो ये कम बजट वाली बाइक्स में भी दिए जा रहे हैं।

फायदे इनकी कठोरता का फायदा बाइक के परफॉर्मेंस को मिलता है और इसीलिए यह ज्यादा हॉर्सपॉवर और टॉर्क के दबाव पर टिके रहते हैं। हाई स्पीड पर स्टेबल रहते हैं, तेज गति से लिए मोड़ पर जगह नहीं छोड़ते। ट्यूबलैस होते हैं तो पंक्चर बनवाना, टायर बदलवाना आसान होता है।

नुकसान ये जरा भी लचीले नहीं होते, बल्कि काफी सख्त होते हैं। जैसे ही व्हील, हाई स्पीड पर गहरे गड्ढे या स्पीड ब्रेकर से गुजरता है, इनमें क्रैक या डेन्ट आ जाता है। ये ठीक भी नहीं हो पाते हैं और इन्हें बदलना ही पड़ता है। जरा-सी वजह के कारण बहुत ज्यादा पैसा खर्च करना पड़ सकता है।

Sports : वर्ल्ड बैडमिंटन चैंपियनशिप जीतकर पीवी सिंधु ने रचा इतिहास

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नई दिल्ली: आज रविवार को BWF बैडमिंटन विश्व चैम्पियनशिप-2019 के फाइनल में पी.वी. सिंधु ने ओकुहारा को सीधे सेटों में 21-7, 21-7 से मात देकर उन्होनें गोल्ड मेडल अपने नाम कर लिया है।

पी.वी. सिंधु ने ओकुहारा को सीधे सेटों में 21-7, 21-7 से मात देकर जीता पहला गोल्ड। पूरे मैच के दौरान सिंधु की स्पीड के आगे नहीं टिक पाई ओकुहारा। हार के बाद अब ओकुहारा की मुश्किलें बढ़ती हुई नजर आ रही हैं।

यह बात जानकर आप भी कभी नहीं पीयेंगे फ्रिज का ठंडा पानी

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पीने का पानी या पीने योग्य पानी, समुचित रूप से उच्च गुणवत्ता वाला पानी होता है जिसका तत्काल या दीर्घकालिक नुकसान के न्यूनतम खतरे के साथ सेवन या उपयोग किया जा सकता है। अधिकांश विकसित देशों में घरों, व्यवसायों और उद्योगों में जिस पानी की आपूर्ति की जाती है वह पूरी तरह से पीने के पानी के स्तर का होता है, लेकिन वास्तविकता में इसके एक बहुत ही छोटे अनुपात का उपयोग सेवन या खाद्य सामग्री तैयार करने में किया जाता है।
हमारे शरीर में खून की कमी का सबसे बड़ा कारण है ठंडा पानी! जब हम पानी पीते हैं, तो यह हमारे पेट में जाता है! तब हमारा पेट इसे शारीरिक तापमान तक गर्म करता है! हमारे शरीर में गर्मी लाने का काम खून करता है या कहें कि खून हमारे शरीर में गर्मी पैदा करता है!तो जब ठंडा पानी हमारे पेट में आता है, तो अन्य अंगों से खून पेट में जमा होकर इस पानी को गरम करता है! जब खून पेट में इकट्ठा हो जाता है, तो शरीर उन अंगों में खून की कमी हो जाती है!
आमतौर पर हमारे शरीर में जो बड़ी आंत होती है, वह ठंडा पानी पीने पर सिकुड़ जाती है! क्यूंकि बड़ी आंत का खून पेट में पानी को गरम करने के लिए चला जाता है! आपने देखा होगा कि जो लोग ठंडा पानी पीते हैं, वे सुबह टॉयलेट में आधा-एक घंटा लगाकर बाहर आते हैं! कई लोग तो किताबें, अखबार या मोबाइल फ़ोन का इस्तेमाल भी टॉयलेट में ही करते हैं! क्यूंकि उनका पेट साफ़ नहीं होता और वे उस समय में टाइम पास करने के लिए इन चीज़ों का इस्तेमाल करते हैं! पेट साफ न होने से कब्ज की समस्या हो जाती है! और यह तो आप जानते ही हैं की कब्ज हमारे शरीर में और भी कई रोगों को आमंत्रण देती है!
तो फिर किस मौसम में कैसा पानी पीएं? इसका हल आयुर्वेद में दिया है:-
1- गर्मियों में मिट्टी के घड़े का पानी पीएं!
2- सर्दियों में गुनगुना पानी पीएं!
3- बरसात में पानी को उबाल कर साधारण तापमान में लाकर पीएं!