प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आज लोगों से आने वाले समय में राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी से जुड़ी किसी न किसी एक जगह की यात्रा जरूर करने का अनुरोध किया ।
श्री मोदी ने अकाशवाणी पर ‘ मन की बात ‘ कार्यक्रम में कहा कि वह कुछ महीने पहले गुजरात में दांडी गये थे। आजादी के आंदोलन में ‘नमक सत्याग्रह’, दांडी, एक बहुत ही बड़ा महत्वपूर्ण परिवर्तनकारी बिन्दु है। दांडी में उन्होंने महात्मा गाँधी को समर्पित अति-आधुनिक एक संग्रहालय का उद्घाटन किया था।देशवासी आने वाले समय में महात्मा गाँधी से जुड़ी कोई-न-कोई एक जगह की यात्रा जरूर करें।
उन्होंने कहा कि इन स्थानों में पोरबंदर , साबरमती आश्रम , चंपारण , वर्धा का आश्रम और दिल्ली में महात्मा गाँधी से जुड़े हुए स्थान हो सकते हैं। आप जब ऐसी जगहों पर जाएँ तो अपनी तस्वीरों को सोशल मीडिया पर साझा जरुर करें, ताकि, अन्य लोग भी उससे प्रेरित हों और उसके साथ अपनी भावनाओं को व्यक्त करने वाले दो-चार वाक्य भी लिखिए। आपके मन के भीतर से उठे हुए भाव, किसी भी बड़ी साहित्य रचना से, ज्यादा ताक़तवर होंगे।
सीरियाई एयर डिफ़ेंस सिस्टम ने दमिश्क़ के दक्षिण में स्थित एक एयरपोर्ट पर इस्राईल के मिसाइल हमलों को विफल बना दिया है। ग़ौरतलब है कि इस्राईल ने शनिवार की रात को दमिश्क़ पर कई मिसाइल दाग़े थे, जिन्हें सीरियाई डिफ़ेंस सिस्टम ने लक्ष्य पर लगने से पहले ही हवा में नष्ट कर दिया।
इस बीच, इस्राईली सेना ने दावा किया है कि उसने इस हमले में घातक ड्रोन हमले की योजना को नाकाम कर दिया है। वहीं सीरियाई सेना का कहना है कि यह हमला दमिश्क़ के दक्षिण में स्थित अक़रबा गांव के आसपास किया गया था, लेकिन इस्राईल के अधिकांश मिसाइलों को हवा में ही नष्ट कर दिया गया।
पार्स टुडे डॉट कॉम के अनुसार, इस हमले में किसी तरह के जानी या माली नुक़सान की कोई ख़बर नहीं है। इस्राईल, ईरानी ख़तरे का मुक़ाबला करने के बहाने सीरिया पर हवाई हमले करता रहता है, लेकिन वह बहुत ही कम इन हमलों की ज़िम्मेदारी स्वीकार करता है।
इस्राईली प्रधान मंत्री नेतनयाहू ने इस हमले के बाद ट्वीट करके दावा किया, ‘हमारी सेनाएं हर क्षेत्र में ईरानी आक्रमण का मुक़ाबला करने के लिए अभियान जारी रखे हुए हैं, अगर कोई आपकी हत्या करने के लिए खड़ा हो रहा है, तो आप पहले ही उसकी हत्या कर दें।
अविभाजित म.प्र. में पंडित रविशंकर शुक्ल से दिगिव्जिय सिंह तक मुख्यमंत्री रहे तो छत्तीसगढ़ राज्य बनने के बाद अजीत जोगी, डॉ. रमन सिंह तथा भूपेश बघेल (निरंतर) मुख्यमंत्री बन चुके हैं। अविभाजित म.प्र. में छत्तीसगढ़ से पं. रविशंकर शुक्ल, पं. श्यामाचरण शुक्ल, नरेश सिंह, मोतीलाल वोरा मुख्यमंत्री रहे तो विभाजन होने के बाद उमा भारती, बाबूलाल गौर, शिवराज सिंह तथा वर्तमान में कमलनाथ मुख्यमंत्री हैं। अविभाजित म.प्र. में कौन मुख्यमंत्री कैसा रहा इस पर पूर्व मुख्य सचिव एम.एन. बुच ने अपनी पुस्तक ‘व्हेन द हारवेस्ट मून इन ब्लू’ में प्रकाश डाला है। उनकी नजरों में श्यामाचरण शुक्ल बेहतर मुख्यमंत्री रहे तो अर्जुन सिंह, दिग्विजय सिंह को भेद भरे, गूढ़ या रहस्यमय मुख्यमंत्री कहा है। सुंदरलाल पटवा के कार्यकाल को डीपी मिश्रा की याद ताजा करने वाला बताया है तो हाल में दिवंगत बाबूलाल गौर के कार्यकाल की तुलना प्रकाश चंद सेठी के कार्यकाल से की है। वैसे छत्तीसगढ़ के पहले मुख्यमंत्री नौकरशाह अजीत जोगी 15 साल तक शासन की बागडोर सम्हालने वाले डॉ. रमन सिंह तथा करीब 9 महीने पहले छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री बने युवा भूपेश बघेल पर कोई नौकरशाह यदि किताब भविष्य में लिखेगा तो वह दिलचस्प जरूर होगी, क्योंकि अजीत जोगी के कार्यकाल कलेक्टर राज यानि नौकरशाहों पर पूर्व नियंत्रण वाला शासनकाल माना जा सकता है तो डॉ. रमन सिंह के कार्यकाल को नौकरशाहों पर निर्भर कहा जा सकता है जहां तक भूपेश बघेल की सरकार की बात है तो 9 माह में अभी आंकलन संभव नहीं है पर छत्तीसगढिय़ा लोगों की सरकार के मुखिया छत्तीसगढिय़ा की छवि कुछ बनती दिखाई दे रही है नौकरशाहों के नियंत्रण के विषय में अभी कोई स्पष्ट राय नहीं बन सकी है।
साहब, डॉ. साहब और भूपेश
छत्तीसगढ़ के पहले मुख्यमंत्री अजीत जोगी छत्तीसगढ़ की नई राजधानी के लिए स्थल चयन, धान खरीदी के लिए जाने जाएंगे तो विधायकों का दलबदल कराने, कलेक्टरों के माध्यम से सरकार चलाने के लिए जाने जाएंगे, अजीत जोगी नौकरशाह होने के कारण ‘साहब’ कहलाना ही पसंद करते थे और लोग उन्हें मुख्यमंत्री बनने पर भी साहब ही कहते थे। लगातार 15 साल तक मुख्यमंत्री रहने वाले डॉ. रमन सिंह छत्तीसगढ़ की नई राजधानी विकसित करने, गरीबों को एक-दो रुपये किलो चांवल देने छग को विकसित राज्य के रूप में खड़ा करने का प्रयास करने, नौकरशाहों पर नियंत्रण नहीं रख पाने के नाम पर जाने जा सकते हैं। तीसरे तथा वर्तमान मुख्यमंत्री-भूपेश बघेल बतौर कांग्रेस अध्यक्ष 68 विधायक जिताने वाले, मूल छत्तीसगढिय़ा, छत्तीसगढ़ को भविष्य में नया स्वरूप देने ‘नरवा, गरुवा, घुरवा तथा बाड़ी’ शुरु करने , आते ही मुख्य सचिव तथा पुलिस महानिदेशक बदलने एक बड़े चर्चित आईपीएस मुकेश गुप्ता को निलंबित करने, कुछ भ्रष्ट नौकरशाहों के खिलाफ जांच कराने के नाम पर चर्चा में है। वहीं कुछ राजनेताओं के खिलाफ भी जांच कराने की हिम्मत करने वाले नेता के रूप में उभरे हैं। नौकरशाहों पर उनका नियंत्रण कितना है इसका खुलासा तो अभी नहीं हो सका है पर एडीजी स्तर के दो चर्चित पुलिस अफसर एसआरपी कल्लूरी तथा जीपी सिंह की नियुक्ति पर वे चर्चा में जरूर हैं। बहरहाल पूर्व मुख्यमंत्री साहब, डॉ. साहब कहलाते थे पर लोग जब अफसरों से पूछते हैं कि ‘भूपेश कति हे…?’ तो सभी को आश्चर्य होता है। अभी तक एक आम छत्तीसगढिय़ा की छवि भूपेश बघेल के साथ-जुड़ी हुई है।
श्यामाचरण बेहतर तो दिग्गीराजा रहस्यमय….
पूर्व मुख्य सचिव एम.एच. बुच द्वारा लिखित पुस्तक ‘व्हेन द हारवेस्ट मून इन ब्लू’ मेें अविभाजित मध्यप्रदेश के कुछ मुख्यमंत्रियों के कार्यकाल पर प्रकाश डाला गया है। उन्होंने म.प्र. के निर्माता की श्रेणी में 2 मुख्यमंत्रियों पं. श्यामाचरण शुक्ल तथा प्रकाशचंद सेठी को शामिल किया है। पं. श्चामाचरण शुक्ल के विषय में बुच ने लिखा है.. शुक्ल वाज द ओनली विजनरी चीफ मिनिस्टर दी स्टेट हैज एव्हर हेट। वे विकास पुरुष थे, विकास के पुरोधा, स्वप्नदृष्टा थे, विकास की युक्तियों में सतत लीन। उनकी आंखों में म.प्र. को विकसित, समृद्ध और आधुनिक राज्य बनाने का सपना तैरता रहता था। उनके जेहन में विकास का बहुत साफ ब्लूप्रिंट था। म.प्र. की सिंचाई सहित कई योजनाएं उन्हीं की देन है।
प्रकाश चंद सेठी के मुख्यमंत्रित्व कार्यकाल के विषय में बुच ने लिखा है कि सेठी क्लासिकल ढांचे में ढले सनकी नेता थे। कई बार पागलपन की हदों को छूते थे वे बौद्धिक दिग्गिज तो नहीं थे पर उनमें व्यवहारिकता थी। गजब का कामनसेंस था, केंद्र सरकार से उनके रिश्ते बेहद उमदा थे। निहायत ईमानदार प्रकाशचंद सेठी ने सर्तकतापूर्वक अफसरों का चयन किया था और अफसरों को बेरोकटोक भी काम करने दिया। वे गवर्नर के भ्रष्ट तौर-तरीकों को मानने और साथ देने तैयार नहीं थे। उनके कार्यकाल में जल आपूर्ति, आवास निर्माण, बिजली उत्पादन समेत अधोसंरचना का विकास तेजी से हुआ। उनकी ईमानदारी का आलम तो यह था जब वे कालांतर में बीमार पड़े और मृत्यु शैया पर थे तब उनके पास न तो अपना स्वयं का मकान था और न ही ईलाज कराने के लिए समुचित पैसा…।
म.प्र. के चाणक्य अर्जुन सिंह को कहा जाता था पूर्व मुख्य सचिव एम.एन. बुच ने अपनी पुस्तक में अर्जुन सिंह के विषय में लिखा है कि यकीनन उनके पास कुशाग्रबुद्धि थी, उनकी ग्राह्यता गजब की थी। अपनी शिक्षा, बुद्धिमता और पृष्ठभूमि के चलते वे महान राजनेता हो सकते थे लेकिन वे जोड़-तोड़ की राज्यस्तरीय रणनीति से उपर नहीं उठ सके। उनकी सराहना करनी होगी कि उन्होंने रायपुर, दुर्ग, पीथमपुर तथा मंदीद्वीप आदि में औद्योगिक केंद्रों का जाल बिछाकर प्रदेश में औद्योगिकीकरण की नीव रखी थी। पूर्व मुख्य सचिव बुच ने अपनी पुस्तक अविभाजित म.प्र. के आखरी मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह को भेदभरी, गूढ़और रहस्यमय शख्सियत माना है। दिग्गीराजा मृदूभाषी, सुशिक्षित, तीक्ष्ण बुद्धि तथा शालीन बताया है उन्होंने दिग्विजय सिंह को राजनीति में ‘सब कुछ चलता है मार्का राजनीति’ का समर्थक बताया है। बुच लिखते हैं कि दिग्गी राजा न जाने कैसे इस निष्कर्ष पर पहुंच गये कि सत्ता, कामों और उपलब्धियों से नहीं वरन, जाति, धर्म और सामाजिक कारकों के आधार पर जोड़-तोड़ से चलती है। राजनीति पंडित इसे दिग्विजय सिंह की सोशल इंजीनियरिंग कहते हैं। बुच की नजरों में दिग्विजय सिंह राजनीतिज्ञों की प्रजाति होमो पालिटिक्स के सर्वोत्तम उदाहरण हैं।
लौह पुरुष, राजनीति के चाणक्य डीपी मिश्रा के विषय में बुच ने अपनी पुस्तक में लिखा है कि मंत्रिमंडल में उनका गजब का नियंत्रण था। वे मोरारजी भाई तथा सरदार पटेल जैसी दृढता के प्रशासक थे। आर.पी. नरोन्हा उस समय मुख्य सचिव थे। उस समय सीएम और सीएस के आपसी रिश्ते अच्छे थे। उन्होंने प्रशासनिक आदर्श का प्रतिमान रच दिया था।
अविभाजित म.प्र. के मुख्यमंत्री तथा मिनी अटल बिहारी वाजपेयी कहे जाने वाले सुंदरलाल पटवा के विषय में लिखा है कि बेहिचक कठोर निर्णय लेने की उनकी कार्यप्रणाली और प्रशासनिक शैली के चलते पटवा जी, डीपी मिश्रा की याद दिलाते थे। उन्होंने यह भी लिखा है कि बाबरी ढांचा ध्वंस के बाद भोपाल में कानून की बदहाली के लिए पटवा नहीं तत्कालीन कलेक्टर प्रवेश शर्मा, पुलिस कप्तान सुरेन्द्र सिंह की अक्षमता जिम्मेदार थी। म.प्र.के विभाजन के बाद बाबूलाल गौर भी मुख्यमंत्री बने थे। बुच ने उनके विषय में भी लिखा है। उन्होंने बाबूलाल गौर के कार्यकाल की तुलना प्रकाश चंद सेठी के कार्यकाल से की है। उन्होंने लिखा है कि बाबूलाल गौर अपनी सीमाओं से वाकिफ थे। उन्होंने विजय सिंह जैसा बढिय़ा मुख्य सचिव चुना, अफसरों का विश्वास जीता राजभवन से भी अच्छे रिश्ते बनाये थे। उन्होंने शहरीकरण, उर्जा को प्राथमिकता दी थी।
और अब बस…..
0 छत्तीसगढ़ में पार्षद, विधायक, सांसद, केन्द्रीय मंत्री का सफर पूरा कर रमेश बैस त्रिपुरा के राज्यपाल बन गये हैं। उनकी सहजता ही है कि वे अपनी राजनीति और उम्र से छोटी छग की राज्यपाल सुश्री अनसुईया उइके से सौजन्य मुलाकात करने पहुंच गये।
0 एक बार प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने कहा था कि देश को पीएम (प्रधानमंत्री), सीएम (मुख्यमंत्री) तथा डीएम (कलेक्टर) चलाते हैं। छत्तीसगढ़ के पहले मुख्यमंत्री अजीत जोगी ने डीएम के बाद सीएम का सफर पूरा किया।
0 चरणदास महंत पहले नायब तहसीलदार थे, विधायक, मंत्री, सांसद केंद्रीय मंत्री होने के बाद अब वे छग विधानसभा के अध्यक्ष बन चुके हैं।
0 छत्तीसगढ़ में 15 सालों तक मुख्यमंत्री रहे डॉ. रमनसिंह कभी भी राज्यमंत्रिमंडल में शामिल नहीं रहे सीधे मुख्यमंत्री बन गये।
0 भूपेश बघेल मुख्यमंत्री बनने के पहले अविभाजित म.प्र. में दिग्विजय मंत्रिमंडल तथा छग बनने पर अजीत जोगी मंत्रिमंडल में शामिल रहे।
0 अमितेष शुक्ल के द्वारा पं. रविशंकर शुक्ल, पिता श्यामाचरण शुक्ल अविभाजित म.प्र. के मुख्यमंत्री रहे इसलिए वे मुख्यमंत्री पद के लिए स्वयं को स्वाभाविक दावेदार मानते हैं।
छत्तीसगढ़ (Chhattisgarh) की राजधानी रायपुर (Raipur) के एक उद्योगपति ने मौदहापारा पुलिस (Police) स्टेशन में ठगी (Fraud) की शिकायत दर्ज कराई है. उद्योगपति (Industrialist) सौरव तोला का आरोप है कि नूतन पावर इस्पात प्राइवेट लिमिटेड का शेयर दिलाने के नाम पर उसके साथ ठगी और धोखाधड़ी की गई है. उद्योगपति का दावा है कि शेयर दिलाने के नाम पर उसके साथ 10 करोड़ 33 लाख 20 हजार रुपये की ठगी की गई है. रायपुर (Raipur) के ही चौबे कॉलोनी में रहने वाले प्रदीप अग्रवाल नाम के व्यक्ति ने उसके साथ ठगी की है. पुलिस ने आरोपी के खिलाफ धारा 420 के तहत जुर्म (Crime) दर्ज कर लिया है.
मिली जानकारी के मुताबिक साल 2016 में प्रार्थी और आरोपी के बीच एग्रीमेंट हुआ था. सौरव तोला वर्तमान में नूतन इस्पात का डायरेक्टर है. आरोपी नूतन इस्पात का पहले मालिक रह चुका है. प्रदीप अग्रवाल और सौरव तोला के बीच 2016 में एमओयू (MOU) हुआ था. सौदे का पूरा पैसा सौरव ने दिया था. इसके बावजूद भी 100 प्रतिशत शेयर में 17 प्रतिशत शेयर अभी भी आरोपी के नाम पर ही है. पुलिस के मुताबिक आरोपी ने फैक्ट्री तक जाने वाली सड़क को भी अपना बताकर प्रार्थी के नाम से करा देने की बात कही थी. जबकि उस सड़क की जमीन आरोपी के नाम से नहीं है. वह जमीन किसी और के नाम पर है.
शिकायतकर्ता में पास है 83 फीसदी शेयर पुलिस (Police) के मुताबिक वर्तमान में नूतन इस्पात का डायरेक्टर शिकायतकर्ता सौरव तोला है. जिसके पास अभी 83 प्रतिशत शेयर है और आरोपी प्रदीप अग्रवाल पहले फैक्ट्री का मालिक था. लेकिन उसके अभी भी 17 प्रतिशत शेयर है. प्रार्थी की धोखाधड़ी की शिकायत पर पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया गया है. जांच की जा रही है. जांच के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी. फिलहाल मामले में पुलिस की जांच जारी है. मामला हाई प्रोफाइल होने के कारण पुलिस विशेष सतर्कता बरतते हुए आगे की कार्रवाई कर रही है.
सरसों तेल का इस्तेमाल करना इन 3 बीमारियों में है जहर के समान, जरूर जाने :– दैनिक जीवन में सरसों के तेल का प्रयोग प्रायः किया जाता है। सब्जी के साथ ही सरसों के तेल को बालों में लगाने, शरीर में मालिश करने में भी काम में लाया जाता है। सरसों के तेल में ओमेगा 3 फैटी एसिड भरपूर मात्रा में पाया जाता है जिसमे कि एन्टी-इंफ्लेमेटरी गुण होते हैं इसलिए सरसों के तेल से जोड़ों की मालिश करने से जोड़ों का दर्द कम हो जाता है। इसके फायदे तो हैं लेकिन नुकसान भी कम नहीं है, तो आइये जानते हैं।
सरसों के तेल का ज्यादा सेवन राइनाइटिस का कारण बन सकता है। नाक में होने वाली एलर्जी को एलर्जिक राइनाइटिस कहते हैं। यानी बहती नाक, बंद नाक और सिरदर्द आदि इसके लक्षण होते हैं।
सरसों के तेल में एलील आइसोथियोसाइनेट नामक एक और हानिकारक रसायन पाया जाता है, जिसके परिणामस्वरूप फेफड़ों, गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल ट्रैक्ट, आंतों आदि की लिनिंग की सूजन हो सकती है, अगर किसी को अल्सर, फैटी लिवर की समस्या है तो अपना तेल आज ही बदल दें।
जिनका कोलेस्ट्रॉल हाई रहता है और हार्ट की समस्या है उनको सरसों तेल का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए, ये तेल ऐसे लोगों के लिए किसी जहर से कम नहीं है। क्योंकि इसमें 42% इरुसिक एसिड होता है, यह हृदय की मांसपेशियों को बुरी तरह से नुकसान पहुंचाता है और कभी कभी इससे हृदय घात भी हो जाता है।
अगर आप सरसो तेल का इस्तेमाल करते हैं तो बेहिचक करें लेकिन लगातार बिलकुल भी नहीं अन्य तेलों को भी बदल-बदल इस्तेमाल करें कोई साइड इफेक्ट्स नहीं होंगे।
पतंजली (Patanjali) योगपीठ से जुड़े तमाम समर्थकों के लिए बीते चौबीस घंटे बेहद तनावपूर्ण रहे. योगपीठ के महामंत्री आचार्य बालकृष्ण (Acharya Balkrishna) को शुक्रवार को गंभीर हालत में ऋषिकेश स्थित एम्स लाया गया था. चिकित्सकों के लगातार और बेहतर प्रयास का नतीजा ये रहा कि आचार्य बालकृष्ण (Acharya Balkrishna) अब बिल्कुल ठीक हैं. वे वापस पतंजली (Patanjali) पहुंच चुके हैं. हांलाकि, इन सबके बीच सोशल मीडिया पर आई खबरों ने कई सवाल खड़े किए हैं, जिनका जवाब मिलना बाकि है.
आचार्य बालकृष्ण (Acharya Balkrishna) वह नाम है जिसे देश और दुनिया में भली भांति जाना जाता है. योगगुरु रामदेव के बेहद करीबी बालकृष्ण को शुक्रवार को चिंताजनक हालत में एम्स लाया गया. इससे पहले उनकी खराब हालत को देखते हुए हरिद्वार के भूमानंद अस्पताल से हायर सेंटर के लिए रेफर किया गया था. सुबह से ही उनके शुभचिंतकों का एम्स में तांता लगा रहा.
सीएम त्रिवेंद्र रावत हों या फिर खुद योगगुरू रामदेव सभी आचार्य का हाल लेने के लिए एम्स पहुंचे. आचार्य जल्द से जल्द ठीक हों ये कामना हर कोई कर रहा था. इस बीच कांग्रेस नेता किशोर उपाध्याय ने एक ट्वीट कर सोशल मीडिय़ा पर चल रही खबरों को हवा दे दी. उपाध्याय ने आशंका जाहिर की है कि आचार्य महज बिमार नहीं हैं बल्कि उनके साथ कोई साजिश की गई है. असल, में सोशल मीडिया में चर्चाएं इस तरह की हैं कि बालकृष्ण को किसी मिलने वाले ने एक मिठाई खिलाई, जिसके बाद उनकी हालत खऱाब हो गई. अब वह शख्स कौन था. क्या उसकी मंशा साफ थी, या मिठाई खाकर आचार्य का बीमार पड़ना महज एक इत्तेफाक भर था. हांलाकि खुद सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत भी जांच से इनकार नहीं कर रहे हैं. योगगुरू रामदेव तो खुलकर आशंका भी जता रहे हैं और जांच की बात भी कह रहे हैं.
दरअसल, आचार्य की तबीयत खराब होने के पीछे जिस मिठाई को वजह माना जा रहा है. उसकी जांच के लिए एम्स की ओर से एंजाइम को दिल्ली भेजा गया है. अब सबकुछ उस रिपोर्ट पर निर्भर है, जो दिल्ली से आनी है.
एम्स के डीन एकेडममिक डॉक्टर मनोज गुप्ता की माने तो फिलहाल कुछ भी कह पाना संभव नहीं है. रिपोर्ट सामने आने के बाद ही ये पता लग पाएगा कि आचार्य की तबीयत खराब होने के पीछे वजह क्या थी. क्या वास्तव में बालकृष्ण किसी साजिश का शिकार हुए या फिर उस मिठाई (पेड़ा) में कुछ एसा था जो आचार्य को हजम नहीं हो पाया. चूंकि मामला बेहद हाई प्रोफाइल है, लिहाजा पुलिस के अधिकारी कुछ भी कहने से बच रहे हैं. ऑफ द कैमरा उनका कहना है कि अभी तक मामले में किसी तरह की कोई शिकायत नही मिली है, लिहाजा कुछ भी करना और कहना जल्दबाजी होगी.
फिलहाल एम्स प्रबंधन ने आचार्य बालकृष्ण (Acharya Balkrishna) को पूरी तरह आराम करने की सलाह दी है, लेकिन हर आम और खास की नजरें उस रिपोर्ट पर टिकी हैं, जो दिल्ली से आनी है. इस रिपोर्ट के बाद ही असल तस्वीर साफ हो पाएगी.
ग्लोबल रेस्ट्रॉन्ट चेन मैकडॉनल्ड्स भारत में एक बड़ा खुलासा करने के बाद घिर गया है। उसने ट्वीट करते हुए बताया है कि देश में उसका प्रत्येक रेस्ट्रॉन्ट हलाल सर्टिफाइड है। मैकडॉनल्ड्स ने एक ट्विटर हैंडल से आए सवाल का जवाब देते हुए कहा है कि भारत में किसी भी मैकडॉनल्ड्स रेस्त्रां के मैनेजर्स से हलाल सर्टिफिकेट मांगा जा सकता है।
मैकडी के इस ट्वीट पर कुछ लोग बिफर गए और ट्विटर पर इस रेस्त्रां के बहिष्कार की मांग तेज हो गई। शुक्रवार को ट्विटर पर #boycottmcdonalds सबसे ऊपर ट्रेंड करने लगा। ट्विटर यूजर ने मैकडी पर आरोप लगाते हुए कहा कि वह गैर-मुस्लिमों को हलाल मीट खाने को बाध्य कर रही है। venkysplace नाम के ट्विटर हैंडल ने लिखा कि, ‘हिंदू, सिख सहित सभी गैर-मुस्लिम ग्राहकों को हलाल मीट खाने को विवश कर रहे हैं? क्या यह अल्पसंख्यकवाद का अत्याचार थोपना नहीं है? हिंदू धार्मिक भावना का क्या? हम आपके 80 फीसद उपभोक्ता हैं, फिर भी हमारा कोई मायने नहीं है?’ इसने लिखा, ‘क्या हमें मैकडी का बहिष्कार करना पड़ेगा?’
वहीं, upasanatigress नाम के एक ट्विटर यूज़र ने लिखा है कि वह इस इस्लामिक फूडचेन में कभी खाना नहीं खाएंगी। उन्होंने लिखा कि, ‘वाह, हमें नहीं पता था कि आप एक इस्लामिक फूडचेन फ्रैंचाइजी हैं। मैं इस रेस्त्रां का खाना कभी नहीं खाऊंगी जो इस्लामी रीति-रिवाजों के अनुसार भोजन परोसता है। भारत में केवल 15 फीसद मुसलमानों को खाना खिलाकर आपका व्यवसाय नहीं चल सकता।’
VRINDAVAN FOOD PRODUCT द्वारा संचालित शताब्दी एक्सप्रेस के किचिन में यात्रियों के लिए सड़ी प्याज से दाल में बघार लगाया जाता है और सब्जी तैयार की जाती है। जिला प्रशासन की टीम शनिवार को जब शताब्दी एक्सप्रेस के कांतिनगर स्थित बेस किचन में पहुंची तो यहां भारी मात्रा में सड़ी हुई बदबूदार प्याज मिली। चावल के पैक पर न तो बैच नंबर मिला न रेट। टीम ने 25 किलो से ज्यादा सड़ी हुई प्याज को नष्ट करा दिया।
दिल्ली-भोपाल के बीच शताब्दी एक्सप्रेस में ग्वालियर से सप्लाई होने वाले खाने की क्वालिटी घटिया होने की शिकायत कलेक्टर के पास पहुंची थी। इसी आधार पर एसडीएम पुष्पा पुषाम ने खाद्य सुरक्षा अधिकारी लोकेंद्र सिंह, सतीश धाकड़ व लखनलाल को यहां जांच के लिए भेजा। दोपहर दो बजे टीम किचन में पहुंची तो खाना बनाते समय कर्मचारी सिर पर कैप तक नहीं लगाए थे। बिना ग्लब्स पहने ही खाना बना रहे थे।
किचन का संचालन वृंदावन फूड प्रोडक्ट द्वारा किया जाता है। यहां ठेकेदार नहीं मिला। टीम ने मैनेजर रामचंद राय की मौजूदगी में तुअर दाल, चावल, पनीर और मिर्च-मसाले के चार नमूने लिए हैं। खाद्य सुरक्षा अधिकारी लोकेंद्र सिंह ने बताया कि एक क्रेट में प्याज भरी थी। प्याज के छिलके काले और गले हुए थे। पिछले साल रेलवे के सीनियर डीसीएम विपिन कुमार सिंह ने भी यहां छापा मारकर भारी मात्रा सड़ा हुआ खाद्य पदार्थ नष्ट कराया था।
घरेलू हिंसा, नशे की लत, बच्चों की पढ़ाई का दबाव और प्रेम प्रसंग ने छत्तीसगढ़ को सर्वाधिक आत्महत्या के मामलों वाले राज्यों की टॉप फाइव सूची में शामिल कर दिया है। यदि आबादी के अनुपात में देखें तो छत्तीसगढ़ में आत्महत्या के आंकडे देश के औसत से भी अधिक हैं।
नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) के अनुसार देश में महाराष्ट्र ऐसा राज्य है, जहां 13 प्रतिशत आत्महत्या के मामले दर्ज हैं, जो सबसे ज्यादा हैं। पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु 11.5 प्रतिशत के साथ दूसरे नंबर पर बने हुए हैं। चौथे स्थान पर तेलंगाना और मध्यप्रदेश 7.7 प्रतिशत के साथ बने हुए हैं। पांचवें क्रम में गुजरात और छत्तीसगढ़ 5.4 प्रतिशत के साथ हैं।
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शासन की जनजागरूकता की तैयारी
प्रदेश में आत्महत्या के मामले को रोकने के लिए शासन की पहल पर स्वास्थ्य विभाग नौ से 14 सितंबर तक जनजागरूकता के लिए विभिन्न् गतिविधियां और कार्यक्रम आयोजित करने की तैयारी कर रहा है। इनमें मनोरोगियों की पहचान एवं उपचार, जेल में मानसिक स्वास्थ्य के लिए शिविरों का आयोजन, जागरूकता चौपाल, और आत्महत्या की रोकथाम संबंधी वाद-विवाद स्पर्धा आदि शामिल है।
इनका कहना है
देश में पांच सर्वाधिक आत्महत्याओं वाले प्रदेशों में छत्तीसगढ़ भी शामिल है । यदि आबादी के हिसाब से आंकडे देखें तो प्रदेश में प्रति एक लाख में 27.7 लोग आत्महत्या करते हैं। यह आंकड़ा देश की औसत से भी ज्यादा है। दुर्ग-भिलाई नगर में यह आंकड़ा 34.9 जबकि भारत का आंकड़ा केवल 10.6 है । – डॉ. महेंद्र सिंह, उपसंचालक, राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम, रायपुर
नशा व सोशल मीडिया भी वजह
पं. रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय की मनोवैज्ञानिक की प्रो. डॉ. प्रियंवदा श्रीवास्तव ने बताया कि आत्महत्या के सर्वाधिक मामले किशोर अवस्था के आ रहे हैं, लेकिन हाल की घटनाओं को देखें तो प्रौढ़ भी धैर्य खोकर आत्महत्या कर रहे हैं। इसका सबसे बड़ा कारण है प्रदेश में बढ़ती नशे की लत।
नशा जीने की इच्छाशक्ति को खत्म कर देता है। ऐसे लोगों में छोटी-छोटी बातों में आत्महत्या करने का विचार आने लगता है। सोशल मीडिया भी आत्महत्या की प्रमुख वजह बन रहा है। लोग पर्याप्त नींद नहीं लेते और लोगों के विचारों को देखकर तनाव ग्रस्त हो रहे हैं।
जब-जब छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट की स्थापना को लेकर चर्चा होगी तब-तब पूर्व केंद्रीय कानून व वित्त मंत्री अस्र्ण जेटली की याद जेहन में रहेगी। केंद्रीय विधि मंत्री के रूप में जेटली ने एक नवंबर सन् 2000 को छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट का शुभारंभ किया था। इसके साथ ही बिलासपुर का नाम देश के नक्शे पर एक पहचान बन गया।
तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने छत्तीसगढ़ राज्य निर्माण की सौगात दी थी। इसके साथ ही बिलासपुर में हाईकोर्ट की स्थापना करने की घोषणा के बाद एक नवंबर 2000 को छत्तीसगढ़ में एक नए और सुनहरे युग की शुस्र्आत हुई। रायपुर को राजधानी तो बिलासपुर को न्यायधानी का दर्जा मिला।
इस दौरान भवन नहीं होने की वजह से छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट की शुस्र्आत करने के लिए राज्य शासन ने नार्मल स्कूल भवन का चयन किया था। इसके बाद तत्कालीन केंद्रीय कानून मंत्री अस्र्ण जेटली शुभारंभ के लिए आए थे।
हाईकोर्ट के विधिवत उद्घाटन के दौरान सुप्रीम कोर्ट के जज बीएन कृपाल, जबलपुर हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस भवानी सिंह, छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट के एक्टिंग चीफ जस्टिस आरएस गर्ग व छत्तीसगढ़ के तत्कालीन मुख्यमंत्री अजीत जोगी भी इस ऐतिहासिक क्षण के गवाह बने थे।
तब उन्होंने भाषण में कहा था कि प्रदेश में आदिवासियों के साथ ही गरीबों की संख्या अधिक है। लोगों को त्वरित न्याय मिले और समय पर न्यायदान की प्रक्रिया पूरी हो इस लिहाजा से हाईकोर्ट की स्थापना की गई है। वर्तमान में लोगों को जबलपुर तक का सफर तय करना पड़ता था। अब ऐसा नहीं होगा। जेटली के भाषण में यकीनन छत्तीसगढ़ के लिए एक अपनापन झलक रहा था।
नगरीय निकाय सम्मेलन में आए थे जेटली
वर्ष 2016 में प्रदेश भाजपा के बैनर तले बिलासपुर में प्रदेश नगरीय निकाय जनप्रतिनिधियों का सम्मेलन आयोजित किया गया था। अस्र्ण जेटली सम्मेलन में शामिल हुए थे। इसी बीच उन्होंने प्रभावी भाषण दिया था। सम्मेलन के बाद छत्तीसगढ़ भवन में दिग्गज भाजपा नेताओं और पदाधिकारियों के साथ भोजन के बाद रायपुर के लिए रवाना हुए थे।