जिनमें फोन की पूरी उपस्थिति और डिजाइन है। हाल ही में, इस स्मार्टफोन को भारतीय मानक कार्यालय (बीआईएस) द्वारा भी प्रमाणित किया गया है, जिसके बाद यह माना जाता है कि लेनोवो ए 6 नोट जल्द ही भारतीय बाजार में प्रवेश करेगा। वहीं, कंपनी ने Lenovo A6 Note की रिलीज डेट पेश की। Lenovo A6 Note को भारत में 5 सितंबर को लॉन्च किया जाएगा।
लेनोवो मोबाइल्स ने मीडिया को एक निमंत्रण भेजते हुए कहा कि कंपनी 5 सितंबर को भारत में एक आयोजन कर रही है, जिसके दौरान कंपनी के नए उत्पाद को लॉन्च किया जाएगा। हालाँकि लेनोवो द्वारा लॉन्च किए जाने वाले डिवाइस का नाम नहीं बताया गया है, इस निमंत्रण में हैशटैग #KillerNote का उपयोग किया गया था। इस लेबल के साथ, यह स्पष्ट हो गया कि 5 सितंबर को कंपनी केवल नोट डिवाइस लॉन्च करेगी। बीआरआई सूची और चेंग के फोटो एक्सचेंज के बाद, यह लगभग पुष्टि की जा सकती है कि लेनोवो ए 6 नोट 5 सितंबर को भारत में लॉन्च किया जाएगा।
लेनोवो के उपाध्यक्ष द्वारा साझा की गई तस्वीरों में, ए 6 नोट एक स्क्रीन पर एक वाटरड्रॉप पायदान के साथ प्रदर्शित किया गया है। जबकि स्क्रीन के तीनों हिस्से पूरी तरह से गोल होते हैं, शरीर का निचला हिस्सा प्रदान किया जाता है।
राजस्थान के आदिवासी बहुल डूंगरपुर जिले
में छात्र राजनीति में प्रमुख छात्र संगठन एबीवीपी व एनएसयूआई की धाक अब
धीरे-धीरे कम हो रही है. जिले में भील प्रदेश विद्यार्थी मोर्चा छात्र
संगठन ने दोनों प्रमुख छात्र संगठनों को काफी पीछे छोड़ दिया है. पिछले तीन
साल से हालात ये है की डूंगरपुर जिले के राजकीय कॉलेजो में भील प्रदेश
विद्यार्थी मोर्चा ही जीत दर्ज कर रहा है. इधर इस बार भी भील प्रदेश
विद्यार्थी मोर्चा ने दोनों प्रमुख संगठनों की नींद उड़ा दी है.
इस बार भी जिले के 5 कॉलेजो में से 4 कॉलेजो में अपने
पैनल उतारे है, जबकि एनएसयूआई ने जिले के दो कॉलेज व एबीवीपी ने तीन कॉलेज
में अपने उम्मीदवार उतारे है.
प्रदेश के आदिवासी बहुल डूंगरपुर जिले
में छात्रसंघ चुनावों में तीसरे मोर्चे के रूप में उतरे भील प्रदेश
विद्यार्थी मोर्चा ने छात्र राजनीती के प्रमुख छात्र संगठन एबीवीपी व
एनएसयूआई के पसीने छुड़ा दिए है. वर्ष 2016 में जिले के सबसे बड़े एसबीपी
कॉलेज में भील प्रदेश विद्यार्थी मोर्चा ने जीत के साथ छात्र राजनीति में
अपनी दस्तक दी थी और फिर इसके बाद पीछे मुड़कर नहीं देखा. जातिगत मुद्दों पर
की गई छात्र राजनीति के बदोलत भील प्रदेश विद्यार्थी मोर्चा ने एसबीपी
कॉलेज में प्रमुख छात्र संगठन कहे जाने वाले एबीवीपी व एनएसयूआई को मात
देकर लगातार 3 साल तक जीत दर्ज करते हुए हैट्रिक बनाई. भील प्रदेश
विद्यार्थी की इस जीत का असर बाद में जिले के अन्य कॉलेजो में भी देखने को
मिला.
इधर छात्रसंघ चुनाव 2019 में भी भील प्रदेश
विद्यार्थी मोर्चा ने जिले के सबसे बड़े एसबीपी कॉलेज के साथ वीकेबी गर्ल्स
कॉलेज, सागवाडा भीखाभाई कॉलेज व सीमलवाडा कॉलेज कुल चार कालेजो में अपने
पैनल उतार कर दोनों प्रमुख छात्र संगठनो की नींद उड़ा दी है. वहीं दूसरी और
एबीवीपी जिले के एसबीपी कॉलेज, विकेबी गर्ल्स कॉलेज और सीमलवाडा कुल तीन
कॉलेज और एनएसयूआई ने एसबीपी और सागवाडा भीखाभाई कॉलेज में ही अपने पैनल
उतारे है. वैसे से तो जातिगत मुद्दों को लेकर चुनावी मैदान में उतरे भील
प्रदेश विद्यार्थी मोर्चा का पलड़ा इस बार भी भारी नजर आ रहा है. हालांकि
दोनों प्रमुख छात्र संगठनों के नेता इस बार अपनी-अपनी जीत के दावे कर रहे
है.
इधर छात्रसंघ चुनाव के तहत सभी छात्रसंगठन
अपनी-अपनी जीत के दावे जरुर कर रहे है लेकिन छात्र राजनीति में भील प्रदेश
विद्यार्थी मोर्चा के बाद से छात्र राजनीति में पिछले 3 साल में आमूल-चूल
बदलाव आया है. भील प्रदेश विद्यार्थी मोर्चा ने प्रमुख छात्र संगठन कहे
जाने वाले एबीवीपी व एनएसयूआई से ज्यादा युवाओं में अपना विश्वास पैदा किया
है यही कारण रहा की दिसंबर 2018 में हुए विधानसभा चुनाव में भी इसी छात्र
संगठन की भारतीय ट्राइबल पार्टी ने डूंगरपुर जिले की चार में से दो
विधानसभा सीटें चौरासी और सागवाड़ा जीती थी. बहराल अब देखना होगा की इस
छात्र संघ चुनाव में चौथी बार भी भील प्रदेश विद्यार्थी मोर्चा का विजयी रथ
आगे बढ़ेगा या अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद, एनएसयूआई और एसएफआई छात्र
संगठन इस विजयी रथ को रोकने में कामयाब हो पाते है.
घर हो या फिर आपका ऑफिस या फिर आपकी कार को हर जगह फर्स्ट एड बॉक्स रखना
चाहिए। क्योंकि कभी भी कोई भी घटना या फिर हादसा हो सकता है। ऐसे में आप
अपनी सेहत को बचाने के लिए इसका इस्तेमाल कर सकते है। आपको बता दें कि
फर्स्ट एड वह चिकित्सा मदद है। जो छोटे-मोटे हादसों में डॉक्टरी मदद ज्यादा
जल्दी नहीं मिल पाने के कारण एक पीड़ित को दी जाती है। लेकिन इसके लिए यह
बात जानना सबसे ज्यादा जरूरी है। कि इसमें से कौन-कौन सी चीजें होती है।
यानी कि वह कौन-कौन सी दवाइयां और उपकरण होते है। जो कि इसके अंदर जरूर
मौजूद होने चाहिए तो आइए जानते हैं।
पट्टी को चिपकाने वाला टेप
एनेस्थेटिक स्प्रे या लोशन – खुजली वाले चकत्ते के लिए
छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले में बिना बताए मायके जाने को लेकर पति-पत्नी में घरेलू विवाद (Domestic Violence) हो गया. विवाद इतना ज्यादा बढ़ गया कि नौबत मारपीट तक पहुंच गई. इसके बाद गुरुवार देर रात महिला ने फांसी लगाकर खुदकुशी (Suicide) कर ली. पति ने महिला का शव कमरे में रस्सी से लटका हुआ देखा, जिसके बाद वह पड़ोसियों की मदद लेकर उसे अस्पताल ले गया. हालांकि अस्पताल में डॉक्टरों ने महिला को मृत घोषित कर दिया. घटना कोतवाली क्षेत्र के कतियापारा की है.
पूरा मामला
कतियापारा निवासी
योगेश नामदेव की शादी राधा नामदेव से करीब 9 माह पहले हुई थी. योगेश एक
बेकरी (Bakery) में काम करता है. इसी क्रम में गुरुवार को उसकी पत्नी अपनी
बड़ी मां के साथ मां का हाल-चाल जानने अस्पताल गई थी. इसके बाद वह अपने
मायके चली गई और शाम को वापस लौटी.
इस
दौरान घर आने के बाद राधा ने योगेश को फोन पर खाना लेते आने के लिए कहा.
योगेश बिरयानी लेकर घर पहुंचा. इसके बाद पति-पत्नी खाना खाने लगे, तभी राधा
ने अपनी मां को देखने की बात बताई. इस पर योगेश ने बिना बताए जाने पर
नराजगी जताई, जिसके बाद दोनों ने एक-दूसरे को गुस्से में थप्पड़ (Slapped)
मार दिया. फिर दोनों सोने चले गए. इसके बाद आधी रात में राधा ने उठकर फांसी
लगा ली.
इधर, संबंधित मामले में योगेश का कहना है कि विवाद हुआ तो
राधा ने पहले उस पर हाथ उठा दिया, जिस पर योगेश ने भी उसे चांटा मार दिया.
झगड़ा खत्म होने के बाद वे सोने चले गए. इस बीच जब रात करीब एक बजे उठा तो
देखा राधा कमरे में नहीं थी. फिर दूसरे कमरे में जाकर देखा तो राधा रस्सी
के फंदे पर झूल रही थी. योगेश ने सोचा भी नहीं था कि एक चांटे का इतना बुरा
मान जाएगी.
अक्सर हम सभी अखबारों (Newspaper) या टीवी (Television) में देखते, सुनते या पढ़ते हैं कि पुलिस ने शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए धारा-144 लगा दी है. कहीं भी किसी भी शहर में हालात बिगड़ने की संभावना या किसी बड़ी घटना के बाद धारा-144 लगा दी जाती है. लेकिन अब रायपुर (Raipur) शहर में संचालित हुक्का बार(Hookah Bar) पर भी धारा- 144 लगने वाली है. बता दें कि पुलिस राजधानी में संचालित हो रहे हुक्का बार पर अब धारा 144 लगाने की तैयारी कर रही है. फिलहाल रायपुर में 100 से अधिक हुक्का बार संचालित है. जानकारी के मुताबिक हुक्का बार के संचालकों द्वारा नाबालिगों को लगातार प्रवेश दिया जा रहा है जो नियम के खिलाफ है. इस पर पुलिस सख्त नजर रखने जा रही है.
कोतवाली सीएसपी (CSP) डीसी पटेल का कहना है राजधानी पुलिस ने रायपुर कलेक्टर (Raipur Collector) डॉ. एस. भारती दासन को एक पत्र लिख कर हुक्का बार में धारा 144 लगाने का आग्रह किया है. पुलिस का मानना है कि इसके बाद संचालकों पर कड़ी कार्रवाई (Strict Action) की जा सकेगी. बीते तीन सालों में दर्जनों बार पुलिस ने हुक्का बार पर कार्रवाई की मगर कड़े नियम नहीं होने की वजह से संचालकों की मनमानी पर अंकुश नहीं लग रहा है. अब इस बार संचालकों पर पुलिस सख्त कार्रवाई के मूड में दिख रही है.
बता दें कि Code of Criminal Procedure (CrPC ) की धारा-144 शांति व्यवस्था कायम करने के लिए लगाई जाती है. जहां भी ये धारा लगाई जाती है वहां चार या उससे ज्यादा लोग इकट्ठे नहीं हो सकते. इस धारा को लागू किए जाने के बाद उस स्थान पर हथियारों को लेकर जाने पर भी रोक लगा दी जाती है. धारा-144 का उल्लंघन करने वाले या इस धारा का पालन नहीं करने वाले व्यक्ति को पुलिस गिरफ्तार भी कर सकती है.
रायपुर में पुलिस ने की थी बड़ी कार्रवाई: रायपुर में जनवरी(January) पुलिस की दस अलग-अलग टीम ने एक साथ 30 हुक्का बार (Hooka bar) में छापा मारा था. देर रात तक चली इस कार्रवाई में 15 नाबालिग(Minors) और छात्र हुक्का गुड़गुड़ाते मिले था. कोतवाली और तेलीबांधा पुलिस थाने से 55 पुलिस कर्मियों के साथ राजेंद्रनगर, डीडीनगर, पंडरी, कोतवाली, तेलीबांधा थाना प्रभारी ने एक साथ शहर के 30 हुक्का बार में दबिश दी थी. पुलिस की टीम को मौके पर नाबालिग, छात्र हुक्का पीते हुए मिले थे. वहीं ग्राहकों को शराब और बीयर भी परोसा जा रहा था. पुलिस ने दस नग हुक्का सेट, पाइप, अलग-अलग फ्लेवर के ढेरों तबांखू के पैकेट, 20 बोतल बीयर सहित अन्य सामाग्री जब्त की गई थी. मामले में हुक्का बार के मालिक, मैनेजर और कर्मचारियों पर कार्रवाई भी हुई थी.
राजस्थान को देश में मुख्यमंत्री नि:शुल्क दवा योजना में प्रथम स्थान पाने का बहुत फायदा हुआ है। अब देश के 15 से अधिक राज्यों के मंत्री या मुख्यमंत्री अगले दो साल में राजस्थान आएंगे और इस योजना को धरातल पर देखेंगे, इतना ही नहीं उसका अध्ययन भी करेंगे और इसकी शुरुआत तीसरे ही दिन छत्तीसगढ़ ने कर भी दी है।
ज्ञात हो कि छत्तीसगढ़ के स्वास्थ्य मंत्री टी एस सिंह देव जयपुर आए। अब अगला नंबर हिमाचल, झारखंड, मिजोरम का है। गौरतलब है कि राजस्थान देश का अकेला प्रदेश है जिसमें एक साथ 712 दवाएं इस स्कीम में नि:शुल्क उपलब्ध करवाई जा रही है।
आपको बता दें कि 2 अक्टूबर 2011 को गहलोत ने अपने पिछले कार्यकाल में इस योजना को शुरू किया था। कुछ माह पहले अमरीका के पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा के सलाहकार पेट्रिक ग्रेसपार्ड भी जयपुर के बस्सी आए और फ्री दवा योजना की क्रियान्विति देखी और प्रभावित हुए। अब तक छोटे अफसरों में 18 राज्यों की टीमें इस योजना को दौरा कर देख चुकी, लेकिन लगातार देश में राजस्थान के अव्वल रहने पर अब मंत्री और सीएम भी इस योजना को देखने आएंगे।
देश के पेट्रोल पंप पर 6 सेवाएं लोगों को फ्री में मिलती हैं। लेकिन लोगों को इस बारे में पता नहीं होता है इसलिए लोग इसका लाभ नहीं उठा पाते हैं। पेट्रोल पंप वाले कई बार इन सेवाओं का पैसा भी वसूल लेते हैं, जो एकदम गलत है। इसके खिलाफ आप ऑनलाइन शिकायत भी कर सकते हैं। इसमें शिकायत लिखने के बाद यह सीधे पेट्रोलियम कंपनियों के पास जाती है, जिस पर कार्रवाई भी की जाती है।
तो आइए जानते हैं पेट्रोल पंप पर मिलने वाली सुविधाओं के बारे में
पेट्रोल पंप पर मिलने वाली पहली फ्री सेवा इमर्जेंसी होने पर आप पेट्रोल पंप से फ्री फोन कॉल कर सकते हैं। सड़क हादसे में जख्मी हो जाने या अन्य किसी दुर्घटना में आप इस सुविधा का लाभ ले सकते हैं। इसके लिए पेट्रोल पंप वाले आपको मना नहीं कर सकते हैं। यदि वे आपको मना करते हैं तो आप उसकी शिकायत कर सकते हैं।
पेट्रोल पंप पर मिलने वाली दूसरी फ्री सेवा अगर आपको ऐसा लगता है कि पेट्रोल पंप पर फ्यूल की क्वालिटी अच्छी नहीं है, तो आप फिल्टर पेपर लेकर उसे चेक कर सकते हैं। इस पेपर का हर पेट्रोल पंप पर होना जरूरी है और आप इसकी मांग कर सकते हैं। अगर आप क्वालिटी खुद नहीं चेक कर सकते हैं, तो इसके लिए पेट्रोल पंप पर तैनात कर्मचारियों को भी कह सकते हैं। अगर वे फिलटर पेपर देने से मना करते हैं तो आप इसकी शिकायत कर सकते हैं।
पेट्रोल पंप पर मिलने वाली तीसरी फ्री सेवा हादसा हो जाने पर आप किसी भी नजदीकी पेट्रोल पंप से फर्स्ट ऐड किट की मांग सकते हैं। सभी पेट्रोल पंप को फर्स्ट ऐड किट रखना कानूनन जरूरी है। अगर वे आपको फर्स्ट ऐड किध उपलब्ध नहीं करवाते हैं तो भी आप शिकयत कर सकते हैं।
पेट्रोल पंप पर मिलने वाली चौथी फ्री सेवा हर पेट्रोल पंप पर शौचालय की मुफ्त सुविधा होना जरूरी है। ये सुविधा का लाभ आप फ्री में उठा सकते हैं और इसके लिए आपको किसी तरह के पैसे की मांग नहीं की जाएगी।
पेट्रोल पंप पर मिलने वाली पांचवीं फ्री सेवा पेट्रोल पंप पर वाहनों के टायरों की हवा भरने की सुविधा भी फ्री सेवा के दायरे में आती है। आप कभी भी अपने टायर में फ्री में हवा भरवा सकते हैं। भले ही आपको पेट्रोल नहीं भी लेना हो तो भी आप अपने वाहन में फ्री में हवा की जांच करवा सकते हैं और इसके लिए आपसे पैसे की मांग नहीं की जाएगी।
पेट्रोल पंप पर मिलने वाली छठवीं फ्री सेवा कोई भी किसी भी पेट्रोल पंप पर पीने का पानी ले सकते हैं। आप वाटर कूलर से भी पानी की बोतल भर सकते हैं इसके लिए पेट्रोल पंप वाले आपसे पैसे नहीं ले सकते हैं।
वोडाफोन ग्राहकों के लिए अच्छी खबर है। वोडाफोन ने अपने 20 रुपये वाले टॉक टाइम प्लान को एक बार फिर से पेश किया है। इस बार न सिर्फ इसमें फुल टाक टाइम का बेनिफिट दिया जा रहा है, बल्कि इसके साथ 28 दिनों की वैलिडिटी एक्सटेंशन की भी सुविधा दी जा रही है। जब से कंपनी की मिनिमम रिचार्ज स्कीम आई है तब से प्रीपेड यूजर्स को कंपनी की सर्विसेज जारी रखने के लिए हर महीने 24 या फिर 35 रुपये का रिचार्ज कराना जरूरी हो गया है। हालांकि, अब यूजर्स इस 20 रुपये वाले प्लान को रिचार्ज करके भी अपने नंबर पर सर्विसेज को जारी रख सकते हैं। इसमें यूजर्स को 20 रुपये के टॉकटाइम के साथ 28 दिनों की सर्विस वैलिडिटी बढ़ाने की सुविधा मिलेगी। एक तरह से देखा जाए तो मिनिमम रिचार्ज स्कीम की वजह से दूसरे नेटवर्क पर शिफ्ट हो रहे कस्टमर्स को रोकने के लिए यह एक अच्छा कदम है।
प्लान में टॉक टाइम के साथ पाएं वैलिडिटी एक्सटेंशन भी
बता दें कि पिछले साल वोडाफोन-आइडिया और भारती एयरटेल जैसी कंपनियों ने 20 रुपये, 50 रुपये और 100 रुपये वाले कई प्लान्स को बंद कर दिया थे। हालांकि, वोडाफोन ने बाद में 50 रुपये और 100 रुपये वाले प्लान पेश कर दिए थे, जबकि एयरटेल ने सिर्फ 100 रुपये और 500 रुपये वाले टॉक टाइम प्लान ही लॉन्च किए। अब वोडाफोन ने 20 रुपये वाला प्लान लॉन्च कर दिया है, जिसमें यूजर्स 20 रुपये के टॉक टाइम के साथ 28 दिन के लिए सर्विस वैलिडिटी को भी एक्सटेंड कर सकते हैं। हालांकि, यह प्लान कुछ चुनिंदा शहरों के लिए ही जारी किया गया है।
वोडाफोन के 35 रुपये वाले रिचार्ज प्लान में 26 रुपये का टॉक-टाइम
वोडाफोन के 35 रुपये वाले रिचार्ज प्लान में कस्टमर्स को 26 रुपये का टॉक-टाइम, 100MB डाटा और 28 दिनों की वैलिडिटी मिलती है। इसके साथ ही वोडाफोन के ग्राहकों को 65 रुपये वाले प्लान में 55 रुपये का टॉक टाइम के साथ 200 MB इंटरनेट डाटा और 28 दिनों की सर्विस वैलिडिटी मिलती है।
वोडाफोन के 299 रुपये में 70 दिन की वैलिडिटी
इसके अलावा वोडाफोन हाल ही में 299 रुपये का प्रीपेड प्लान लेकर आया है, जिसके तहत यूज़र्स को 70 दिन की वैलिडिटी के साथ कुल 3जीबी डेटा और एक हजार एसएमएस मिलेंगे। इस प्लान में वैलिडिटी पीरियड के दौरान किसी भी नंबर पर यूज़र्स को अनलिमिटेड एसटीडी और लोकल कॉलिंग की सुविधा मिलेगी।
जानें एयरटेल की 23 रुपये
बता दें कि भारती एयरटेल के स्मार्ट रिचार्ज प्लान की तरह वोडाफोन और आइडिया ने भी ऐक्टिव रिचार्ज प्लान या सर्विस वैलिडिटी एक्सटेंशन प्लान पेश किया था, जिसके शुरुआती कीमत 24 रुपये है। एयरटेल में यह प्लान 23 रुपये का है, जिसे रिचार्ज कराने पर यूजर्स को 28 दिनों की वैलिडिटी एक्सटेंशन के साथ रेट कट बेनिफिट्स की सुविधा मिलती है।
यह महज इत्तेफाक है कि अगस्त 2018 से लेकर अगस्त 2019 तक एक साल से भी कम समय में देश ने तकरीबन दर्जन भर दिग्गज नेताओं को खो दिया है। इनमें ज्यादातर नेता कांग्रेस-BJP के हैं।
नई दिल्ली [जागरण स्पेशल]। 9 अगस्त से दिल्ली स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (All India Institute of Medical Sciences) में भर्ती भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री अरुण जेटली ने शनिवार को दुनिया को अलविदा कह दिया। एम्स में भर्ती रहने के दौरान उन्होंने 15 दिन तक जिंदगी की जंग लड़ी और मौत को मात देने की कवायद में जुटे रहे, लेकिन शनिवार को पूर्व केंद्रीय मंत्री अरुण जेटली जिंदगी की जंग हार गए और उनका निधन हो गया।
यह महज इत्तेफाक है कि अगस्त, 2018 से लेकर अगस्त, 2019 तक एक साल से भी कम समय में देश ने तकरीबन दर्जन भर दिग्गज नेताओं को खो दिया है। इनमें ज्यादातर नेता कांग्रेस (Congress) और भारतीय जनता पार्टी (Bhartiay Janta Party) से जुड़े थे और इन सभी ने किसी-न-किसी रूप में इतिहास रचा। इनमें सबसे बड़ा नाम भारत रत्न और पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी का है, जिनका निधन 16 अगस्त, 2018 को दिल्ली के एम्स में ही हुआ था। इसके बाद मदन लाल खुराना, शीला दीक्षित, जयपाल रेड्डी, सुषमा स्वराज, नारायण दत्त तिवारी, जगन्नाथ मिश्रा, बाबू लाल गौर और शनिवार को अरुण जेटली ने भी एम्स में अंतिम सांस ली।
भाजपा के दो पूर्व केंद्रीय समेत और एक सीएम का अगस्त महीने में निधन यह मजह इत्तेफाक है कि इस साल अगस्त महीने में ही दो पूर्व केंद्रीय मंत्रियों (सुषमा स्वराज और अरुण जेटली) का निधन हुआ, जबकि बाबू लाल गौर का निधन भी अगस्त महीने में हुआ। बता दें कि मूलरूप से उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ के रहने वाले बाबू लाल गौर ने मध्य प्रदेश का मुख्यमंत्री बनकर एक इतिहास ही रचा था।
वहीं, बिहार के पूर्व सीएम जगन्नाथ मिश्रा का निधन 19 अगस्त को दिल्ली के द्वारका में हुआ था। उन्हें बिहार में तीन बार मुख्यमंत्री रहने का रुतबा हासिल था।
28 जुलाई को हुआ केंद्रीय मंत्री जयपाल रेड्डी का निधन पूर्व केंद्रीय मंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता जयपाल रेड्डी (Jaipal Reddy) का पिछले महीने 28 जुलाई को हैदराबाद में निधन हो गया। पूर्व केंद्रीय मंत्री जयपाल रेड्डी पिछले कई दिनों से खराब स्वास्थ्य की समस्या से गुजर रहे थे। उनके निधन पर राज्यसभा में श्रद्धांजली देने के दौरान उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडु रो पड़े थे।
6 पूर्व सीएम का एक साल से भी कम समय में निधन इनमें पांच, नारायाण दत्त तिवारी, मदन लाल खुराना, शीला दीक्षित, सुषमा स्वराज (दिल्ली), जगन्नाथ मिश्रा (बिहार) और बाबू लाल गौर (मध्य प्रदेश) के सीएम रह चुके थे। इनमें सबसे बड़ा नाम तो नारायण दत्त तिवारी का था, जिन्होंने इस लिहाज से इतिहास रचा था कि वे दो राज्यों (उत्तर प्रदेश और उत्तरांखड) के सीएम रहे इकलौते भारतीय नेता था। अब तक यह रिकॉर्ड उन्हीं के नाम है।
दिल्ली से जुड़े 4 बड़े नेताओं का निधन दिल्ली से जुड़े तीन बड़े नेताओं शीला दीक्षित (20 जुलाई), सुषमा स्वराज (6 अगस्त) और अरुण जेटली (24 अगस्त) का निधन हुआ। इनमें दो (शीला दीक्षित और सुषमा स्वराज) नेता तो दिल्ली के पूर्व सीएम रह चुके थे, जबकि अरुण जेटली 1999 से 2012 तक दिल्ली एवं जिला क्रिकेट संघ (Delhi and District Cricket Association) के अध्यक्ष भी रहे।
माना जाए तो एक साल के भीतर दिल्ली ने तीन नहीं चार बड़े नेताओं (मदन लाल खुराना, शीला दीक्षित, सुषमा स्वराज और अरुण जेटली) को खोया है, जिनका राज्य स्तर पर ही नहीं, बल्कि राष्ट्रीय स्तर की राजनीति में भी दखल था। चारों ही केंद्रीय मंत्री रहे चुके थे।
दो नेताओं ने की थी डीयू से पढ़ाई इनमें अरुण जेटली और शीला दीक्षित ने तो दिल्ली विश्वविद्यालय (Delhi university) से पढ़ाई की थी। केंद्र में वित्त मंत्री जैसा अहम महकमा संभालने वाले अरुण जेटली ने तो दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ (Delhi University Students Union) से राजनीति के करियर की शुरुआत की थी।
तीन का जन्म पंजाब में, बाद में बने दिल्ली के सीएम मदन लाल खुराना, शीला दीक्षित और सुषमा स्वराज तीनों का रिश्ता पंजाब से रहा था। जहां सुषमा स्वराज का जन्म अंबाला (फिलहाल हरियाणा में, विभाजन से पहले यह पंजाब में था) में हुआ तो शीला दीक्षित का जन्म पंजाब के कपूरथला में हुआ था। वहीं, मदन लाल खुराना का जन्म पंजाब (पाकिस्तान) में हुआ था। बाद में तीनों की दिल्ली के मुख्यमंत्री बने।
मदनलाल खुराना और सुषमा स्वराज का रात को हुआ निधन यह महज संयोग है कि भाजपा से जुड़े दोनों मुख्यमंत्रियों (मदन लाल खुराना और सुषमा स्वराज) का निधन रात को हुआ। जब मदन लाल खुराना ने 27 अक्टूबर को अंतिम सांस ली तो वह दिन शनिवार का था और समय रात का था। वहीं, सुषमा स्वराज का निधन भी रात को ही हुआ।
शीला, मदन लाल खुराना और अरुण जेटली का शनिवार को हुआ निधन यह भी महज संयोग है कि शीला दीक्षित, मदन खुराना और अरुण जेटली का जिस दिन निधन हुआ वह दिन शनिवार ही था।
शीला, मदन लाल खुराना और सुषमा स्वराज तीनों रहे केंद्रीय मंत्री यह भी संयोग अजब है कि तीनों ही केंद्रीय मंत्री रहे। जहां शीला दीक्षित सीएम बनने से पहले केंद्रीय मंत्री बनीं तो सुषमा स्वराज और मदनलाल खुराना पूर्व मुख्यमंत्री होने के बाद केंद्रीय मंत्री के पद पर रहे।
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने शुक्रवार को बैंकों के लिए सत्तर हजार करोड़ रुपये के पैकेज सहित कई आर्थिक रियायतों की घोषणा की। इस पर बाजार का रुख क्या रहेगा यह तो सोमवार को सामने आ जाएगा, मगर जिन लोगों पर आर्थिक सुस्ती की मार पड़ चुकी है उनके लिए यह फैसले कितने जीवनदायी साबित होंगे ये देखना होगा। सीतारमण ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि भारत में मंदी के हालात नहीं हैं और हमारी स्थिति अन्य मुल्कों से कहीं बेहतर है, हालांकि जमीनी हकीकत बहुत अच्छी तस्वीर पेश नहीं कर रही।
वाराणसी में कई कारखाने बंद हैं, उत्तराखंड और नोएडा में श्रमिकों को छुट्टी पर भेजा रहा है। आगरा के होटल और जूता कारोबारी मायूस हैं। कमोबेश यही हालात मेरठ, कानपुर और लखनऊ का भी है। ऑटो सेक्टर की हालत तो पहले ही खस्ता थी अब कपड़ा सेक्टर में भी उत्पादन घटाया जा रहा है।
घर बैठना पड़ रहा : आगरा में पांच सेक्टर (पर्यटन, फुटवियर, हस्तशिल्प, चांदी-पायल, रिटेल) मुख्य हैं। पिछले तीन साल में किसी इकाई ने पंजीकरण रद नहीं कराया है, लेकिन हालात चिंताजनक नजर आ रहे हैं। पर्यटन की बात करें तो इस बार होटलों की बुकिंग सितारा होटलों में 30 प्रतिशत और बजट होटलों में 50 प्रतिशत तक गिर गई। कारोबार अच्छा नहीं होने की वजह से एक हजार से ज्यादा लोगों को घर बैठना पड़ा है।
आगरा टूरिस्ट वेलफेयर चैंबर के अध्यक्ष प्रहलाद अग्रवाल के मुताबिक, मध्यम श्रेणी के होटलों को अपने रोजमर्रा के खर्च निकालना भी मुश्किल हो रहा है। ताजनगरी के फुटवियर उद्योग में भी यही स्थिति है। उधारी अटक जाने से 1000 सप्लायर घर बैठ गए हैं। लगभग 4000 अस्थाई श्रमिकों को फैक्ट्री में रक्षाबंधन के बाद से काम नहीं मिला। हस्तशिल्प उत्पादों के विक्रेताओं की स्थिति भी ठीक नहीं है।
ऑटो सेक्टर 15,000 तक नौकरियां चली गईं तीन महीने में एसआईएएम के मुताबिक
नौकरी गंवाने वालों में अधिकतर अस्थायी कर्मचारी शामिल 10.65% उत्पादन घटा सभी वाहनों का अप्रैल-जुलाई 2018 की तुलना में 21.56% ब्रिकी घट गई यात्री वाहनों की अप्रैल-जुलाई 2019 के दौरान 7.50% जीडीपी और 49% हिस्सेदारी मैन्यूफैक्चरिंग में ऑटो सेक्टर की 10 लाख तक नौकरियां जाने की आशंका जताई जा रही इस सेक्टर में
ऑटो मोबाइल कंपनी में एक हफ्ते की छुट्टी ग्रेटर नोएडा के हबीबपुर गांव के पास ऑटोमोबाइल की एक बड़ी कंपनी में कर्मचारियों को एक-एक सप्ताह के लिए छुट्टी दी गई है। एक दूसरी विदेशी कंपनी जो बीयरिंग बनाती थी उसमें भी एक सप्ताह के लिए घर भेज दिया गया है। कर्मचारियों का कहना है कि पहले इस तरह की छुट्टी कभी नहीं दी गई।
कताई उद्योग का उत्पादन एक-तिहाई घटा ऑटो सेक्टर के बाद अब कपड़ा उद्योग में भी मंदी का असर दिखने लगा है। प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष तौर पर दस करोड़ रोजगार देने वाले कताई उद्योग के उत्पादन में एक-तिहाई तक कमी आई है। संकट से उबरने के लिए सूती धागा तैयार करने वाली कताई मिलों ने हफ्ते में एक दिन उत्पादन भी बंद रखने का फैसला लिया है। उत्तर भारत कपड़ा मिल संघ के मुताबिक 102 मिल उनके साथ पंजीकृत हैं, जिनमें से 15 अपना पंजीकरण रद्द करवा चुकी हैं।
संघ ने इस स्थिति पर अखबारों में विज्ञापन देकर भी सरकार का ध्यान आकर्षित करने की कोशिश की थी। संघ ने बताया कि हफ्ते में एक दिन मिल बंद रखने से उत्पादन में 15 फीसदी तक की कमी आती है। एसोसिएशन के उपाध्यक्ष मुकेश त्यागी के मुताबिक जिस तरह आज ऑटो इंडस्ट्री के हाल पर बात हो रही है, कताई उद्योग पर भी बात हो।
विदेशी आयात चुनौती बना संघ का कहना है कि भारत में कपास के दाम अंतरराष्ट्रीय बाजार से अधिक हैं। इस वजह से तैयार सूती धागा भी महंगा पड़ता है और निर्यात घट रहा है। श्रीलंका और इंडोनेशिया में सूती धागा सस्ता है, इसलिए मिलें इनका निर्यात कर रही हैं। इसी तरह बांग्लादेश से कपड़ा भी सस्ते दामों पर निर्यात किया जा रहा है।
* 34% घट गया सूती धागे का निर्यात साल की दूसरी तिमाही में। * 696 करोड़ डॉलर रह गया 1063 करोड़ डॉलर से घटकर।
दूसरा सबसे बड़ा उत्पादक भारत का टैक्सटाइल सेक्टर बड़ी मात्रा में कताई उद्योग पर निर्भर करता है। दुनिया में सूती धागे का सबसे ज्यादा उत्पादन चीन के बाद भारत में होता है।
बैंकिंग 9,49,279 करोड़ रुपये के एनपीए (गैर निष्पादित ) भारतीय बैंकिंग व्यवस्था में * 50 फीसदी हिस्सा तो महज 150 बड़े पूंजीपतियों की वजह से
आर्थिक विकास दर * 5 साल के न्यूनतम स्तर पर जीडीपी वृद्धि दर। * 5.8 प्रतिशत थी जनवरी-मार्च तिमाही में जीडीपी की दर। * 6.2 प्रतिशत आंकी गई है 2018-19 के लिए आपेक्षित वार्षिक जीडीपी दर, जो पिछले वर्ष से कम। * 07 फीसदी जीडीपी रहने का अनुमान वित्त वर्ष 2019-20 में आईएमएफ का।