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“साइबर अलर्ट: CBI, ATS और सुप्रीम कोर्ट के नाम पर साइकोलॉजिकल अटैक, ठग ऐसे लूट रहे बुजुर्गों की जिंदगी भर की कमाई”

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मध्य प्रदेश में डिजिटल अरेस्ट के मामलों में तेजी से बढ़ोतरी हो रही है और अपराधियों के निशाने पर अब पेंशनभोगी बुजुर्ग हैं. यह नया साइबर फ्रॉड सिर्फ आर्थिक अपराध नहीं बल्कि मनोवैज्ञानिक हमला माना जा रहा है.

ठग खुद को सीबीआई, एटीएस, पुलिस और सुप्रीम कोर्ट से जुड़ा अधिकारी बताकर बुजुर्गों को डराते हैं और उनकी जीवन भर की बचत लूट ले जाते हैं. हाल के महीनों में कई चौंकाने वाले मामले सामने आए हैं जिनमें बुजुर्गों से करोड़ों रुपये ठगे जा चुके हैं.

जबलपुर में 72 साल के एक बुजुर्ग से ठगों ने 76 लाख रुपये ठग लिए. उन्हें फर्जी राष्ट्रीय सुरक्षा मामले में फंसाने की धमकी देकर लगातार वीडियो कॉल पर निगरानी में रखा गया. इसी तरह दूसरे 72 साल के बुजुर्ग से एटीएस पुणे का अधिकारी बनकर 21.5 लाख रुपये ऐंठ लिए गए. भोपाल में एक 71 साल के रिटायर्ड बीएचईएल सुपरवाइजर को 70 दिनों तक डिजिटल रूप से बंधक रखा गया और उनसे 68.3 लाख रुपये ले लिए गए.

अन्य कौन-कौन से लोग हुए ठगी के शिकार?

एक 55 साल के रिटायर्ड नेवी कमांडर से भी 68.49 लाख रुपये ठगे गए जिनमें नकली आरबीआई नोटिस और स्काइप पर बनाई गई फर्जी सुनवाई शामिल थी. सबसे ताजा मामला 85 साल के रिटायर्ड मिलिट्री इंजीनियर सर्विसेज अधिकारी का है. वे पूरे एक हफ्ते तक यह मानते रहे कि वे सुप्रीम कोर्ट की ऑनलाइन सुनवाई में हिस्सा ले रहे हैं. नकली जजों और ईडी अधिकारियों के आदेशों पर उन्होंने दिल्ली और डिब्रूगढ़ के खातों में 36 लाख रुपये भेज दिए.

पुलिस ने क्या बताया?

पुलिस का कहना है कि इन सभी पीड़ितों में कुछ बातें समान हैं. ये सभी उम्रदराज हैं, अकेले रहते हैं और डिजिटल सिस्टम की ज्यादा समझ नहीं रखते. इसके अलावा ठग ऐसे लोगों को निशाना बनाते हैं जो साल के अंत में लाइफ सर्टिफिकेट जमा कराने के समय सरकारी प्रक्रियाओं से जुड़े रहते हैं.

साइकियाट्रिस्ट ने क्या बताया?

कंसल्टेंट साइकियाट्रिस्ट डॉ सत्यकांत त्रिवेदी का कहना है कि डिजिटल गिरफ्तारी असल में मानसिक गिरफ्तारी है. बुजुर्ग तकनीक में कमजोर होते हैं और डर के कारण ठगों के निर्देशों पर निर्भर हो जाते हैं. परिवार का साथ न मिलना और मजाक का डर उन्हें और असुरक्षित बना देता है.

बढ़ते मामलों को देखते हुए एमपी साइबर क्राइम यूनिट ने सलाह जारी की है. पेंशनभोगियों से कहा गया है कि वे परिवार के संपर्क में रहें. किसी भी अधिकारी जैसे दिखने वाले कॉल पर तुरंत सवाल उठाएं और किसी भी स्थिति में डराकर मांगे गए पैसे ट्रांसफर न करें.

छत्तीसगढ़ को मिले 3 नए IAS अफसर, कैडर आवंटन सूची जारी…

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IAS Cadre Allocation: केंद्रीय कार्मिक प्रशिक्षण मंत्रालय ने यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा (UPSC-CSE 2024) के परिणामों के आधार पर भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) के लिए चुने गए उम्मीदवारों को कैडर आवंटित कर दिया है।

यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा 2024 पास करके भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) के लिए चुने गए उम्मीदवारों को कैडर आवंटित कर दिया गया है। कार्मिक, लोक शिकायत और पेंशन मंत्रालय ने कैडर आवंटन की सूची जारी कर दी है। कैडर आवंटन सूची के अनुसार, छत्तीसगढ़ को कुल तीन नए IAS अधिकारी मिले हैं, जिसे राज्य के प्रशासनिक ढांचे के लिए बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है।

लिस्ट के मुताबिक, ऑल इंडिया टॉपर शक्ति दुबे को उनके होम स्टेट उत्तर प्रदेश कैडर का आवंटन किया गया है। वहीं यूपीएससी 2024 में 65वीं रैंक प्राप्त करने वाली आईपीएस अधिकारी पूर्वा अग्रवाल को झारखंड कैडर मिला है। पूर्वा अग्रवाल मूल रूप से छत्तीसगढ़ कैडर की आईपीएस अधिकारी रह चुकी हैं।

आगामी प्रशिक्षण तैनाती की प्रक्रिया जल्द होगी शुरू

केंद्रीय मंत्रालय द्वारा जारी इस कैडर सूची के बाद चयनित अभ्यर्थियों की आगामी प्रशिक्षण व तैनाती की प्रक्रिया जल्द शुरू की जाएगी। नए IAS अधिकारियों के आने से छत्तीसगढ़ प्रशासन को मजबूती मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।

Weather; सावधान… पड़ने वाली है कड़ाके की ठंड, 18 जिलों में शीतलहर का अलर्ट…

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दिसंबर के दूसरे सप्ताह में मामूली उतार-चढ़ाव के बावजूद ठंड का असर बढ़ने की संभावना है। मौसम विभाग ने सोमवार और मंगलवार को रायपुर समेत दर्जनभर जिलों में शीतलहर का अलर्ट जारी किया है।

दुर्ग जिले में अब रात में अधिक ठंड पडऩे लगी है। क्योंकि न्यूनतम तामपान लगातार घट रहा है। वहीं अधिकतम तापमान सामान्य से अधिक है, इसलिए दिन में ठंड कम पड़ रही है। मौसम विभाग से मिली जानकारी के अनुसार, रविवार को दुर्ग जिले में अधिकतम तापमान 29.6 डिग्री दर्ज किया गया। यह इस समय के सामान्य तापमान से 2 डिग्री अधिक हैं। वहीं न्यूनतम तापमान 9.2 डिग्री दर्ज किया गया। यह सामान्य से 4.5 डिग्री कम है।

मौसम विभाग ने सोमवार को मौसम शुष्क रहने व एक-दो क्षेत्र में शीतलहर चलने की संभावनी व्यक्त की है। प्रदेश में रविवार को सबसे अधिक ठंडा अंबिकापुर रहा। जहां अधिकतम तापमान 25.8 और न्यूनतम तापमान 5.2 डिग्री दर्ज किया गया।

इन जिलों में पड़ेगी ठंड

मौसम विभाग की ओर से जारी बुलेटिन के अनुसार गौरेला-पेण्ड्रा-मारवाही, मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर, कोरिया, सरगुजा, जशपुर, सूरजपुर, बलरामपुर, कबीरधाम, मुंगेली, खैरागढ़-छुईखदान-गंडई, राजनांदगांव, बेमेतरा, रायपुर, दुर्ग, मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी, बालोद और कोरबा जिलों में तापमान में और गिरावटा आने की संभावना जताई है। तापमान में गिरावट आने के चलते ठंड में बढ़ोतरी होगी। राजधानी रायपुर समेत आस-पास के इलाकों में पिछले कुछ दिनों से कड़ाके की ठंड पड़ रही है।

दिसंबर के दूसरे सप्ताह में मामूली उतार-चढ़ाव के बावजूद ठंड का असर बढ़ने की संभावना है। मौसम विभाग ने सोमवार और मंगलवार को रायपुर समेत दर्जनभर जिलों में शीतलहर का अलर्ट जारी किया है। बीते तीन-चार दिनों से राज्य में तापमान में लगातार गिरावट दर्ज की जा रही है, खासकर सीमावर्ती जिलों में कड़ाके की सर्दी चरम पर है।

CG Accident: सड़क हादसा, आमने-सामने की टक्कर में दो युवकों की मौत..

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रायपुर से लगे आरंग क्षेत्र में रविवार को समोदा–कुसमुंद रोड पर एक भीषण सड़क हादसा हो गया। बाइक और स्कूटी की आमने-सामने भिड़ंत में दो युवकों की मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई।

छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर से लगे आरंग क्षेत्र में रविवार को समोदा–कुसमुंद रोड पर एक भीषण सड़क हादसा हो गया। बाइक और स्कूटी की आमने-सामने भिड़ंत में दो युवकों की मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई। टक्कर इतनी तेज थी कि दोनों वाहन बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गए और घटनास्थल पर कुछ देर तक अफरा-तफरी का माहौल बना रहा।

सूचना मिलते ही आरंग थाना पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिस ने दोनों मृतकों के शवों का पंचनामा कर उन्हें पोस्टमार्टम के लिए भेजा। पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों को सौंपे जाएंगे। पुलिस हादसे के कारणों की जांच में जुटी

खूनी मोड़ बना हादसे का सबब

पुलिस हादसे के कारणों की जांच में जुट गई है। स्थानीय लोगों के अनुसार सड़क पर अवैध ओवरटेकिंग और तेज रफ्तार दुर्घटना की प्रमुख वजह मानी जा रही है, हालांकि पुलिस ने इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं की है। घटना के बाद क्षेत्र में शोक का माहौल है। पुलिस ने अपील की है कि समोदा–कुसमुंद रोड पर लगातार बढ़ते यातायात को देखते हुए वाहन चालक सावधानी से ड्राइव करें और तेज रफ्तार से बचें।

CG: मुख्यमंत्री श्री साय की अध्यक्षता में केबिनेट बैठक 10 दिसंबर को आयोजित की जाएगी…

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रायपुर, मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय की अध्यक्षता में केबिनेट बैठक 10 दिसंबर को प्रातः 11 बजे से मंत्रालय महानदी भवन में आयोजित की जाएगी।

शिक्षा ही सामाजिक विकास का मूलमंत्र : मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय

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मुख्यमंत्री श्री साय सर्व रविदास समाज के शपथ ग्रहण समारोह में शामिल

रायपुर: सामाजिक विकास का वास्तविक आधार शिक्षा है। चाहे जीवन जीने की कला हो, व्यापार हो, कृषि हो या कोई अन्य क्षेत्र — हर क्षेत्र में सफलता का पहला कदम शिक्षा ही है। मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने राजधानी रायपुर स्थित इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के कृषक सभागार में आयोजित छत्तीसगढ़ प्रदेश सर्व रविदास समाज के शपथ ग्रहण समारोह को संबोधित करते हुए यह बात कही। मुख्यमंत्री श्री साय ने मंच पर सभी नव-निर्वाचित पदाधिकारियों को शपथ दिलाई और उन्हें शुभकामनाएँ दीं।

मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने कहा कि राज्य सरकार प्रारंभ से ही शिक्षा के स्तर को उन्नत करने के लिए निरंतर प्रयासरत है। राज्य गठन के समय जहाँ मात्र एक मेडिकल कॉलेज था, वहीं आज प्रदेश में लगभग 15 मेडिकल कॉलेज संचालित हो रहे हैं। इसी प्रकार, छत्तीसगढ़ में आईआईटी, ट्रिपल-आईटी, आईआईएम, लॉ यूनिवर्सिटी, एम्स, सिपेट जैसे राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर के प्रतिष्ठित संस्थानों की स्थापना से स्थानीय युवाओं को बड़े अवसर प्राप्त हुए हैं।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि समाज को मजबूत और संगठित होना समय की आवश्यकता है, क्योंकि संगठित समाज ही राष्ट्र निर्माण में निर्णायक भूमिका निभाता है। उन्होंने प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के मूलमंत्र — “सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास” — का उल्लेख करते हुए कहा कि इन्हीं मार्गदर्शक सिद्धांतों के अनुसार राज्य सरकार 23 महीनों से सभी वर्गों के हित में काम कर रही है।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि प्रदेश सरकार ने हाल के महीनों में अनेक महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं जिसमें अन्नदाताओं के लिए कृषक उन्नति योजना, प्रत्येक परिवार को पक्का मकान देने हेतु प्रधानमंत्री आवास योजना, माताओं और बहनों को आर्थिक सुरक्षा प्रदान करने वाली महतारी वंदन योजना, दूरस्थ अंचलों में शिक्षकों की उपलब्धता सुनिश्चित करने हेतु शिक्षक युक्तियुक्तकरण जैसे कदम शामिल हैं।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि अब तक विभिन्न विभागों में 10 हजार से अधिक युवाओं को नियुक्ति पत्र प्रदान किए जा चुके हैं। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग की परीक्षाएं पूर्ण निष्पक्षता के साथ संपन्न कराई गई हैं, जिससे युवाओं में नया विश्वास उत्पन्न हुआ है।

उन्होंने यह भी कहा कि वर्तमान परिदृश्य को ध्यान में रखते हुए राज्य सरकार ने नई उद्योग नीति लागू की है, जिससे स्थानीय लोगों को अधिक अवसर, रोज़गार और स्वरोजगार प्राप्त हो सकेगा।

मुख्यमंत्री श्री साय ने समाज के लोगों से आग्रह किया कि वे अधिकाधिक संख्या में शासन की योजनाओं का लाभ लेकर अपने जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाएँ।

कार्यक्रम को छत्तीसगढ़ चर्म शिल्पकार विकास बोर्ड के अध्यक्ष श्री ध्रुव कुमार मिर्धा ने भी संबोधित किया और नव-निर्वाचित पदाधिकारियों को बधाई दी।

इस अवसर पर सर्व रविदास समाज छत्तीसगढ़ के प्रदेश अध्यक्ष श्री विजय मेहरा, रायपुर संभाग आयुक्त श्री महादेव कांवरे, श्री दिलीप वासनीकर सहित बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।

जमीन खरीद-फरोख्त के लिए जारी नई कलेक्टर गाइडलाइन दरों में भारी बढ़ोतरी के बाद राज्य में राजनीतिक माहौल गरमाया…

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छत्तीसगढ़ में जमीन खरीद-फरोख्त के लिए जारी नई कलेक्टर गाइडलाइन दरों में भारी बढ़ोतरी के बाद राज्य में राजनीतिक माहौल गरमाया हुआ है। बढ़ते असंतोष के बीच मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा है कि सरकार जरूरत पड़ने पर गाइडलाइन में बदलाव पर विचार किया जाएगा।

छत्तीसगढ़ में जमीन खरीद-फरोख्त के लिए जारी नई कलेक्टर गाइडलाइन दरों में भारी बढ़ोतरी के बाद राज्य में राजनीतिक माहौल गरमाया हुआ है। कई जिलों में गाइडलाइन दरें 100 प्रतिशत तक, जबकि कुछ क्षेत्रों में यह बढ़ोतरी 500 प्रतिशत तक दर्ज की गई है।

अचानक हुई इस वृद्धि के खिलाफ आम जनता, किसान, व्यापारी और विभिन्न राजनीतिक दल खुलकर विरोध जता रहे हैं। बढ़ते असंतोष के बीच मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने मामले पर संज्ञान लेते हुए पत्रकारों से चर्चा के दौरान कहा कि सरकार जनता को किसी भी तरह की परेशानी नहीं होने देगी और जरूरत पड़ने पर गाइडलाइन में बदलाव पर विचार किया जाएगा।

मध्य प्रदेश की तर्ज पर छत्तीसगढ़ में सिंचाई प्रणाली अपनाई जाएगी; मुख्यमंत्री विष्णु देव साय…

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राज्य में मध्य प्रदेश की तर्ज पर ”प्रेशर इरिगेशन नेटवर्क” तकनीक से सिंचाई होगी। रविवार को मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने मध्य प्रदेश के भोपाल में वहां की सिंचाई व्यवस्था का अध्ययन किया। इसके बाद तय किया गया कि मध्य प्रदेश की तर्ज पर छत्तीसगढ़ में सिंचाई प्रणाली अपनाई जाएगी।


अभी पारंपरिक नहर आधारित सिंचाई:
अभी पारंपरिक नहर आधारित सिंचाई में पानी का एक बड़ा हिस्सा रिसाव, वाष्पीकरण और अनियंत्रित बहाव के कारण व्यर्थ हो जाता है, जिससे खेतों तक वास्तविक जल आपूर्ति सीमित रहती है और पूरी कमांड एरिया में समान सिंचाई नहीं हो पाती। सामान्यतः पारंपरिक प्रणाली की कुल सिंचाई दक्षता केवल 35 प्रतिशत मानी जाती है।

वहीं दूसरी ओर ”प्रेशर इरिगेशन नेटवर्क” प्रणाली में पानी पाइपलाइनों के माध्यम से नियंत्रित दबाव के साथ सीधे खेतों तक पहुंचाया जाता है, जिससे पानी का अपव्यय लगभग शून्य हो जाता है। इस तकनीक से सिंचाई दक्षता बढ़कर 65 प्रतिशत से अधिक हो जाती है, जो जल संरक्षण और उत्पादन बढ़ाने दोनों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।

मुख्यमंत्री साय को मध्य प्रदेश शासन के जल संसाधन विभाग के अपर मुख्य सचिव राजेश राजौरा ने भोपाल में सिंचाई की नवीनतम तकनीक ”प्रेशर इरिगेशन नेटवर्क” के संबंध में विस्तृत प्रेजेंटेशन दिया। उन्होंने बताया कि पारंपरिक सिंचाई पद्धतियों की तुलना में यह प्रणाली कहीं अधिक कुशल, आधुनिक और जल संरक्षण के अनुरूप है। राजौरा ने प्रस्तुति के दौरान बताया कि जहां पारंपरिक नहर आधारित सिंचाई में लगभग 35 प्रतिशत एफिशिएंसी प्राप्त होती है, वहीं प्रेशर इरिगेशन प्रणाली में दक्षता बढ़कर 65 प्रतिशत तक पहुंच जाती है।

”प्रेशर इरिगेशन नेटवर्क” तकनीक में प्रेशर आधारित पाइपलाइनों से सिंचाई की जाती है, जिससे पानी का रिसाव और अपव्यय कम होता है तथा बिजली की उल्लेखनीय बचत होती है। उन्होंने यह भी बताया कि इस प्रणाली में भू-अधिग्रहण की आवश्यकता न्यूनतम होती है, जिससे परियोजनाएं समय पर और लागत प्रभावी तरीके से पूरी की जा सकती हैं।

मध्य प्रदेश में 13 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में इस तकनीक से सिंचाई की जा रही है और आगामी वर्षों में इसे 40 लाख हेक्टेयर तक विस्तारित करने का लक्ष्य है। इस मॉडल से न केवल जल उपयोग दक्षता बढ़ी है, बल्कि किसानों की उत्पादकता और सिंचाई सुविधा में भी महत्वपूर्ण सुधार देखने को मिला है।

मुख्यमंत्री साय ने प्रेजेंटेशन की सराहना करते हुए कहा कि सिंचाई की यह उन्नत तकनीक जल प्रबंधन की वर्तमान और भविष्य की आवश्यकताओं के अनुरूप है। उन्होंने कहा कि हम इस तकनीक का छत्तीसगढ़ में भी अधिकतम उपयोग सुनिश्चित करेंगे, ताकि राज्य के किसानों को कम पानी में अधिक सिंचाई सुविधा और बेहतर उत्पादन मिल सके। जल संरक्षण, ऊर्जा बचत और त्वरित क्रियान्वयन के दृष्टिकोण से यह तकनीक अत्यंत उपयोगी सिद्ध होगी। इस तकनीक के माध्यम से भूमि अधिग्रहण किए बिना भी सिंचाई का लाभ मिल सकेगा।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने विभागीय अधिकारियों को इस तकनीक के अध्ययन, परीक्षण और चरणबद्ध क्रियान्वयन के लिए दिशा-निर्देश दिए। इस अवसर पर छत्तीसगढ़ में मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव सुबोध सिंह, मध्य प्रदेश जल संसाधन विभाग के प्रमुख अभियंता विनोद देवड़ा, अधीक्षण यंत्री विकास राजोरिया मौजूद रहे।

प्रणाली में सिंचाई पूरी तरह पाइपलाइन आधारित होने के कारण नहर निर्माण की आवश्यकता कम हो जाती है और भू-अधिग्रहण भी न्यूनतम होता है। इससे परियोजनाओं की लागत घटती है और कार्य समय पर पूरे होते हैं। पारंपरिक सिंचाई की तुलना में इस तकनीक में पंपिंग दक्षता अधिक होती है, जिससे बिजली की उल्लेखनीय बचत होती है।

समान दबाव से पानी वितरण होने के कारण खेतों के टेल एंड के क्षेत्रों को भी पर्याप्त पानी मिलता है। इस प्रणाली से फसलों की उत्पादकता में वृद्धि, जल प्रबंधन में सुधार और किसानों की आय में वृद्धि जैसे व्यापक लाभ प्राप्त होते हैं।

समितियों में धान की अवैध खपत को लेकर सख्त हुआ प्रशासन

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समितियों में धान की अवैध खपत को लेकर सख्त हुआ प्रशासन कई तरह से गड़बड़ियां पकड़ रहा है। पहले समितियों में जिस धान का सत्यापन और मिलान खरीदी के आखिरी दौर में शुरू किया जाता था, वहीं अब ये कार्रवाई खरीदी के दौरान की जा रही है।

राजनांदगांव। समितियों में धान की अवैध खपत को लेकर सख्त हुआ प्रशासन कई तरह से गड़बड़ियां पकड़ रहा है। पहले समितियों में जिस धान का सत्यापन और मिलान खरीदी के आखिरी दौर में शुरू किया जाता था, वहीं अब ये कार्रवाई खरीदी के दौरान की जा रही है। इससे केंद्रों में धान के अवैध डंप पकड़े जा रहे हैं।

प्रशासनिक कसावट के बीच हो रही धान खरीदी में नए प्रयोग किए गए हैं। इस बार उड़नदस्ता को मॉनिटरिंग टीम से मिल रही जानकारी पर कार्रवाई के लिए भेजा जा रहा है। जिस केंद्र में भी आंकड़ों में हेर-फेर नजर आता है टीम को तत्काल अलर्ट कर दिया जाता है। इसके बाद स्टेक का सत्यापन शुरू होता है। इस सत्यापन में केंद्र में ऑनलाइन दर्ज खरीदी से अधिक संग्रहण मिलने पर अतिरिक्त धान जब्त किया जा रहा है।

प्रशासन का संयुक्त दल केंद्रों में अचानक पहुंचकर मिलान की कार्रवाई कर रहा है। स्टेक की गणना में अब तक घुमका, तुमड़ीबोड़, पटेवा जैसी समितियों में सैकड़ों क्विंटल का अवैध डंप बरामद किया गया है। इस धान की कीमत भी लाखों में है। बड़ी बात यह है कि इस धान पर दावा करने कोई किसान भी सामने नहीं आ रहा है। इस प्रशासनिक कार्रवाई ने कोचियों की कमर तोड़ दी है। उनके पैंतरे हर जगह असफल साबित हो रहे हैं।

धान खरीदी पर प्रशासन की कड़ी निगरानी से जिले में अब तक 157 प्रकरण में 19248 क्विंटल धान पकड़ा जा चुका है। सबसे बड़ी खेप घुमका और तुमड़ीबोड़ के उपार्जन केंद्रों में पकड़ी गई। प्रशासन ने अब तक लगभग छह करोड़ रुपये का धान बरामद किया है। ये आंकड़े दिखाते हैं कि सरहदी जिले में कितने बड़े पैमाने पर अवैध तरीके से समितियों में धान खपाया जा रहा था।

धान खरीदी से पहले कलेक्टर के निर्देश पर समितियों के पुराने रिकॉर्ड खंगाले गए थे। इसमें उन समितियों को मार्क किया गया जहां गड़बड़ियों की आशंका सबसे ज्यादा रहती है। इन केंद्रों को विशेष तौर पर निगरानी के लिए रखा गया है। बताया जाता है कि 96 केंद्र में से 25 केंद्रों को इस सूची में रखा गया है। रियल टाइम मॉनिटरिंग भी की जा रही है, जिससे प्रबंधकों में भी डर बना हुआ है।

इधर, घुमका में 79 एकड़ की गिरदावरी में गड़बड़ी के मामले को प्रशासन ने गंभीरता से लिया है। इस प्रकरण के लिए तीन साल के सैटेलाइट नक्शे से जांच की जाएगी। इस मामले में व्यापारी व किसान नवीन लुनिया के साथ ही गिरदावरी रिपोर्ट तैयार करने वाले पटवारी, प्राधिकृत अधिकारी, व्यापारी को धान उपलब्ध करवाने वाले कोचिये और संबंधित अन्य लोगों की भूमिका भी खंगाली जा रही है।

“इंडिगो संकट मामले को लेकर सरकार सख्त, DGCA ने CEO को भेजा शो-कॉज नोटिस, गठित हुई कमेटी”

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इंडिगो की उड़ानों में बड़े पैमाने पर हुई देरी और कैंसिलेशन के बाद कंपनी ने संकट प्रबंधन टीम बनाई है. कंपनी की पैरेंट कंपनी इंटरग्लोब एविएशन ने कहा कि यह टीम हालात पर नजर रखकर स्थिति को सामान्य करने की कोशिश करेगी.

बोर्ड की मीटिंग के बाद लिया गया फैसला

इंटरग्लोब एविएशन की तरफ से जारी बयान में कहा गया कि जैसे ही उड़ानों के कैंसिल और लेट होने की समस्या सामने आई, बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स की तुरंत बैठक बुलाई गई. इस बैठक में प्रबंधन टीम ने स्थिति की गंभीरता और कारणों की जानकारी बोर्ड सदस्यों को दी.

कंपनी ने बनाया क्राइसिस मैनेजमेंट ग्रुप

बयान के अनुसार बोर्ड मीटिंग के बाद फैसला लिया गया कि एक क्राइसिस मैनेजमेंट ग्रुप (CMG) बनाया जाए. इस ग्रुप में चेयरमैन विक्रम सिंह मेहता, बोर्ड डायरेक्टर्स ग्रेग सरेट्स्की, माइक व्हिटेकर, अमिताभ कांत, और कंपनी के सीईओ पीटर एल्बर्स शामिल हैं. यह टीम लगातार स्थिति की निगरानी कर रही है और प्रबंधन से अपडेट ले रही है कि उड़ानों को सामान्य बनाने के लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं.

ग्राहकों को राहत देने के लिए कदम

कंपनी ने कहा कि बोर्ड सभी प्रभावित यात्रियों की परेशानी को कम करने के लिए तुरंत कदम उठा रहा है. यात्रियों को कैंसिलेशन पर रिफंड और तारीख बदलने पर अतिरिक्त शुल्क में राहत दी जा रही है.

DGCA ने जारी किया शो-कॉज नोटिस

इधर, उड़ानों की भारी अव्यवस्था को लेकर DGCA (नागरिक उड्डयन महानिदेशालय) ने इंडिगो के CEO पीटर एल्बर्स को शो-कॉज नोटिस जारी किया है. DGCA ने कहा कि हाल के दिनों में इंडिगो की उड़ानों में भारी लेट और कैंसिलेशन से यात्री परेशान हुए हैं और यह योजना और संसाधन प्रबंधन में बड़ी लापरवाही का परिणाम है.