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छत्तीसगढ़ : तकनीकी शिक्षा विभाग में 64 लोगों के तबादले

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कौशल विकास तकनीकी शिक्षा विभाग के अंतर्गत शासकीय पॉलीटेक्निक संस्थाओं में कार्यरत प्राचार्य, विभागाध्यक्ष, व्याख्याता, सहायक कर्मशाला अधीक्षक, लेखापाल, मुख्य लिपिक और सहायक ग्रेड-2 का तबादला किया गया है।

विभाग से बुधवार को जारी आदेश के अनुसार प्रकाश कुमार पाण्डेय दुर्ग से धमतरी, टीवी दीक्षित कोंडागांव से बेरला, सोहन लाल वर्मा बेरला से कोंडागांव, अमित मिश्रा रामानुजगंज से धमतरी, एसपी मिश्रा धमतरी से रामानुजगंज, डॉ. आइसी भारती बिलासपुर से महासमुंद, डॉ. जेएल बल खैरागढ़ से उप संचालक संचालनालय रायपुर, सूरज सिंह सुकमा से अंबिकापुर, सोनू वर्मा सुकमा से तखतपुर, केदार सिदार तखतपुर से सुकमा, अर्पूवा कुमार दास सुकमा से खैरागढ़, तोषण कुमार श्रीवास खैरागढ़ से सुकमा, नीलकमल साहू सुकमा से महासमुंद, गजेंद्र कुमार साहू महासमुंद से सुकमा, राहुल कुमार श्रीवास्तव सुकमा से कबीरधाम, गोविंद प्रसाद वर्मा कबीरधाम से सुकमा, सरला देवांगन नारायणपुर से रायपुर, राकेश कुमार गुप्ता रायपुर से नारायणपुर, बृजेंद्र सिंह राजपूत नारायणपुर से दुर्ग, हुसैन उल्ला खान दुर्ग से नारायणपुर, फनेंद्र भारती जोशी नारायणपुर से धमतरी, दीपक कुमार श्रीवास्तव धमतरी से नारायणपुर, अंकित बाफना नारायणपुर से खैरागढ़, अनिल कुर्रे खैरागढ़ से नारायणपुर, चंद्रेश देवांगन बीजापुर से बिलासपुर, गोवर्धन भारद्वाज बिलासपुर से बीजापुर, भरत कमार बीजापुर से धमतरी, सुरेंद्र कुमार तखतपुर से बीजापुर, हेमसागर गुप्ता बीजापुर से रायपुर, राकेश कुमार सिंह रायपुर से बीजापुर, मदन कुमार पटेल बीजापुर से कोरबा, चितरंजन लाल कोरबा से बीजापुर, आशुतोष सिन्हा बीजापुर से रामानुजगंज, हरीश कुमार दुर्ग से बीजापुर, विनय कुमार मिश्रा जगदलपुर से दुर्ग, भुवनेश्वर प्रसाद दुर्ग से जगदलपुर, गौरव गुप्ता दुर्ग से सुकमा, गजेंद्र देवांगन दुर्ग से सुकमा, अस्र्ण कुमार जशपुर से रायपुर, निधि श्ार्मा रायपुर से जशपुर, आरपी वर्मा भाटपारा से बालोद, एके चंदेल बिलासपुर से बिलासपुर, ममता पटेल दुर्ग से रायपुर, चंद्रकला साहू अंबिकापुर से कोरबा, सुगंधा सिप्पी रायगढ़ से दुर्ग, विपिन चंद्र डहरिया धमतरी से रायगढ़, अनिल सोनी खैरागढ़ से दुर्ग, दिपिका बाम्बेश्वर तखतपुर से दुर्ग, तृणा बैनर्जी बेरला से बिलासपुर, नेहा अग्रवाल बिलासपुर से बेरला, हितेश बरड़िया जशपुर से खैरागढ़, अभिरन्यु कुमार सिंह खैरागढ़ से जशपुर, रूपेश कुमार नेताम कोरबा से कांकेर, आशुतोष कुमार राठौर कांकेर से कोरबा, अमन कुमार देवांगन सूरजपुर से रायपुर, अवधेश कुमार सिंह रायपुर से सूरजपुर, धातृ वर्मा रायपुर से अंबिकापुर, आशुतोष चंद्र भेसले अंबिकापुर से रायपुर, योगेश सलेचा नारायणपुर से कोंडागांव, दानेश्वर ताम्रकार कांकेर से बेरला, श्यामलाल साहू बेरला से कांकेर, राजकुमार यदु गरियाबंद से रायपुर और गजानंद वैष्णव खैरागढ़ से गरियाबंद भेजे गए हैं।

कम कीमत मे लें इनोवा का मजा, मारुति सुजुकी ने लॉन्च की 6 सीटर प्रीमियम कार XL6…

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मारुति सुजुकी ने भारत में XL6 कार लॉन्च कर दिया है। इस कार की कीमत 9.79 लाख रुपये से शुरू होकर 11.46 लाख रुपये रखी गई है। कार की यह कीमत एक्स-शोरूम दिल्ली की है। XL6 (एक्सएल-6) मारुति सुजुकी की दूसरी क्रॉसओवर कार है। मारुति सुजुकी की पहली क्रॉसओवर कार एस-क्रॉस थी।

मारुति सुजुकी एक्सएल-6 एक 6 सीटर कार है जिसमें बीच की रो में आर्मरेस्ट के साथ कैप्टन सीट दी गई है औऱ थर्ड रो में 2 सीट दी गई हैं। मतलब तीनों लाइन में 2-2 सीट दी गई हैं।

मारुति सुजिकी एक्सएल-6 फ्रंट से लेकर बैक तक पूरी तरह से रिडिजाइन की गई है। कार में एग्रेसिव दिखने वाले हेडलैंप के साथ ग्रिल दी गई है। इसमें एलईडी डे-टाइम रनिंग लैंप और इंडीकेटर दिए गए हैं।

मारुति सुजुकी एक्सएल-6 में प्रीमियम स्टोन फिनिश और रिच सिल्वर टच के साथ ब्लैक इंटीरियर दिया गया है। सेकेंड और थर्ड रो की सीटों को आसानी से रिक्लाइन किए जाने का फीचर दिया गया है।

कार की दूसरे रो की सीट में वन टच रिक्लाइन और स्लाइड मैकेनिज्म दिया गया है। इससे यात्रियों को तीसरी रो में पहुंचने में कोई परेशानी नहीं होती।

सेफ्टी फीचर्स- 
स्मार्टफोन कनेक्टिविटी के साथ स्मार्ट प्ले स्टूडियो इनफोटेनमेंट सिस्टम दिया गया है। सेफ्टी फीचर्स की बात करें तो ड्युअल फ्रंट एयरबैग, एबीएस (एंटी लॉक ब्रेकिंग सिस्टम) ईबीडी (इलेक्ट्रॉनिक ब्रेक फोर्स डिस्ट्रीब्यूशन) के साथ दिया गया है। हालांकि ईपीएस (EPS- इलेक्ट्रॉनिक स्टेबिलिटी प्रोग्राम) विद हिल होल्ड फंक्शन सिर्फ ऑटोमैटिक वैरियंट में दिया गया है।

एक्लएल-6 कार बीएस-6 एमिशन नार्म्स के साथ आती है। इसमें 1.5 लीटर K15 पेट्रोल इंजन दिया गया है। यह इंजन एसएचवीएस (स्मार्ट हाइब्रिड व्हीकल) टेक्नॉलॉजी के साथ आता है। इस टेक्नॉलॉजी को न्यू जेनरेशन अर्टिगा में दिया जा रहा है।

यह पेट्रोल कार 4-स्पीड ऑटोमैटिक और 5-स्पीड मैनुअल टॉर्क कनवर्टर के साथ आती है। कार में दिया गया K15 इंजन 103बीएचपी का पॉवर देता है जो कि अधिकतम 138 एनएम का टॉर्क जेनरेट करता है।

उपलब्ध है सिर्फ पेट्रोल वेरियंट- 
इस कार को कंपनी ने अभी तक डीजल इंजन के साथ लॉन्च नहीं किया है लेकिन कंपनी का कहना है कि अगर लोगों की डिमांड हुई तो इसका डीजल वेररियंट लॉन्च किया जाएगा।

बाजार में मौजूद इन कारों से है टक्कर- 
मारुति की कार एक्सएल-6 का कॉम्पिटिशन रेनो लॉजी और महिंद्रा की मराजो के साथ है। चर्चा यह भी है कि मारुति की इस कार से टोयोटा की इनोवा को भी झटका लग सकता है। हालांकि इनोवा और एक्सएल-6 की कीमत और अन्य फीचर में अंतर है लेकिन कम कीमत में भी इनोवा का आनंद लेने वालों के लिए यह एक बेहतर कार हो सकती है।

सड़क पर गिरे हुए पैसे मिले तो फौरन इस जगह उसका करें इस्तमाल , होगी धन की वर्ष !

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अगर कहीं से धन-लाभ हो जाए तो यह बहुत रोमांचक कर देने वाला अनुभव होता है। इससे भी ज्यादा खास अनुभव वो होता है जब आपको राह हैं,पर चलते हुए कुछ पैसे मिल जाते हैं। कई लोग सड़क किनारे गिरे इन रुपयों को उठाकर अपने निजी काम में लेते हैं। वहीं कई लोग इन्हें उठाकर किसी धार्मिक कार्य में लगाते हैं या किसी जरूरतमंद को दे देते हैं। ऐसे में क्या सड़क में पड़े पैसे किस बात का संकेत हैं।

आपको जो पैसे रास्ते में मिले हैं, उनका आपके ऊपर क्या प्रभाव पड़ेगा, यह इस बात पर आधारित होते हैं। कि आपको नोट मिला है या सिक्का।

अगर आपको कोई सिक्का प्राप्त हुआ है, तो इसका संबंध नई शुरुआत से है। अगर आप किसी नई योजना को साकार करना चाहते हैं तो उसके लिए अब सही समय आ गया है।

अगर आपको कोई नोट प्राप्त हुआ है, तो इसका अर्थ यह है कि आपको अपनी परिस्थितियों को गंभीरता से देखने की जरूरत है। आपको मनचाही सफलता मिलेगी, बशर्ते आप अपने ऊपर नियंत्रण और विश्वास दोनों कायम रखें।

सड़क पर पड़ा पैसा एक और बात का संकेत भी हो सकता है, शायद आपके पूर्वज आपको इन सिक्कों के जरिए अपना आशीर्वाद आप तक पहुंचाना चाहते हैं।

वहीं इसका संबंध पारलौकिक शक्तियों के साथ भी है, वो इन सिक्कों के जरिए आपको यह अहसास दिलवाना चाहती हैं कि आप स्वयं को कम मत आंकिए, वह आपसे यह भी कहती हैं कि अगर आप अपना आत्मविश्वास खो चुके हैं तो उन्हें पुन: जीवित करने की कोशिश करें।

Maruti की इन गाड़ियों पर मिल रहा खास ऑफर, कार खरीदने वालों के लिए बढ़िया मौका…

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मारुति सुजुकी (maruti suzuki) भी ग्राहकों को लुभाने के लिए कुछ आकर्षक ऑफर्स लेकर आई है. Maruti अपनी कई गाड़ियों पर बढ़िया ऑफर्स दे रही है

ऑटो सेक्टर में मंदी का दौर चल रहा है. देश की सबसे बड़ी कार निर्माता Maruti Suzuki से लेकर कई कार कंपनियों पर इसका सीधा असर पड़ा है. आलम ये है कि गाड़ियों की सेल्स ठप हो गई है. ऐसे में कार कंपनियां गाड़ियों की बिक्री बढ़ाने के लिए कई तरह के ऑफर्स दे रही हैं. ये समय उन लोगों के लिए बेस्ट है, जो नई कार खरीदने का प्लान कर रहे हैं.

मिल रहा है ये ऑफर

मारुति सुजुकी भी ग्राहकों को लुभाने के लिए कुछ आकर्षक ऑफर्स लेकर आई है. Maruti अपनी कई गाड़ियों पर बढ़िया ऑफर्स दे रही है. अपनी डीजल गाड़ियों की बिक्री बढ़ाने के लिए कंपनी Dzire, Swift, Vitara Brezza और S-Cross जैसी डीजल कारों पर पांच साल के लिए या एक लाख किलोमीटर के लिए फ्री वॉरंटी दे रही है. बता दें कि कंपनी ने हाल ही में घोषणा की थी कि एक अप्रैल, 2020 से इन गाड़ियों की मैन्यूफैक्चरिंग बंद हो जाएगी, क्योंकि तब BS-VI एमिशन के नियम लागू हो जाएंगे.इसके बाद से ही इन गाड़ियों की डिमांड घट गई है, जिसे बढ़ाने के लिए कंपनी यह ऑफर ले आई है.

मारुति के इस वॉरंटी स्कीम में कंपोनेंट्स और हाई-प्रेशर पंप, कम्प्रेसर, इलेक्ट्रॉनिक कंट्रोल मॉड्यूल (ECM), क्रिटिकल इंजन और ट्रांसमिशन पार्ट्स और सस्पेंशन स्ट्रट्स के रिप्लेसमेंट भी शामिल होंगे. बता दें कि 2012-13 में फ्यूल को लेकर डिमांड में आई कमी और नकारात्मक हालात के दौरान अप्रैल-जून की तिमाही में डीजल कारों का शेयर 48% था, जो अब 14% हो गया है. वहीं, मारुति के डीजल व्हीकल के ओवरऑल सेल भी 22% पर आ गए हैं, जो एक साल पहले 28% पर था.

मेरे पिता को मेरे अभिनेत्री बनने पर विश्वास नहीं था : रवीना टंडन

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बॉलीवुड में एक दशक तक शीर्ष अभिनेत्रियों में शुमार रहीं रवीना टंडन के पिता फिल्म निर्माता रवि टंडन को विश्वास ही नहीं था कि रवीना कभी अभिनेत्री भी बन सकती हैं। नब्बे के दशक से लेकर 2000 तक अपनी अदाकारी से लोगों के दिलों पर राज करने वाली रवीना टंडन ने खुद यह बात साझा की है। रवीना ने कहा कि उनके पिता रवि टंडन का मानना था कि वह एक अभिनेत्री नहीं बन पाएंगी क्योंकि उन्होंने कभी भी अभिनय या नृत्य से संबंधित कोई औपचारिक प्रशिक्षण नहीं लिया था।

रवीना ने मंगलवार को मुंबई में हुए तीसरे एंटरटेनमेंट ट्रेड अवार्ड कार्यक्रम के दौरान मीडिया से बातचीत में बताया, ‘मेरे पिता को विश्वास नहीं था कि मैं अभिनय में उतर सकती हूं, क्योंकि मैं फिल्मों में प्रवेश करने से पहले अभिनय या नृत्य कक्षाओं में शामिल नहीं हुई थी। स्कूल खत्म करने के बाद मैंने तुरंत कैमरे का सामना किया, इसलिए वह थोड़ा हैरान थे। मुझे लगता है कि वह सुखद रूप से हैरान थे।’

रवि टंडन ने सत्तर और अस्सी के दशक में कई उल्लेखनीय फिल्मों का निर्माण किया। इनमें ‘मजबूर’ (1974), ‘खेल खेल में’ (1975), ‘वक्त की दीवार’ (1981) और ‘खुद्दार’ (1982) शामिल हैं। उन्हें एंटरटेनमेंट ट्रेड अवार्डस के दौरान लाइफटाइन अचीवमेंट अवार्ड से नवाजा गया।

रवीना टंडन आजकल डांस रियलिटी शो ‘नच बलिए’ के सीजन नौ में जज की भूमिका निभा रही हैं। इस शो के प्रोड्यूसर सलमान खान हैं।

दिल्ली में रविदास मंदिर तोड़े जाने पर बवाल, चंद्रशेखर की गिरफ्तारी पर बोलीं प्रियंका- दलितों का अपमान बर्दाश्त नहीं

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दिल्ली में रविदास मंदिर तोड़े जाने के विरोध में रामलीला मैदान में जुटे भीम आर्मी के कार्यकर्ता ने प्रदर्शन की। जिसके बाद पुलिस ने उनके उपर लाठीचार्ज और आंसू गैस के गोले दागे। इसके बाद पुलिस ने भीम आर्मी के प्रमुख चंद्रशेखर आजाद समेत करीब 80 लोगों को गिरफ्तार करना पड़ा। इन्हीं गिरफ्तारियों के बाद कांग्रेस की महासचिव प्रियंका गांधी ने बीजपी सरकार पर हमला बोला है।

उन्होंने ट्वीट करके कहा, “बीजेपी सरकार पहले करोड़ों दलित बहनों-भाइयों की सांस्कृतिक विरासत के प्रतीक रविदास मंदिर स्थल से खिलवाड़ करती है और जब देश की राजधानी में हजारों दलित भाई-बहन अपनी आवाज उठाते हैं तो बीजेपी उन पर लाठी बरसाती है, आंसू गैस चलवाती है, गिरफ़्तार करती है।”

उन्होंने दूसरे ट्वीट में कहा, “दलितों की आवाज का ये अपमान बर्दाश्त से बाहर है। यह एक जज्बाती मामला है उनकी आवाज का आदर होना चाहिए।”

वही कांग्रेस नेता रणदीप सुरजेवाला ने कहा कि बीजेपी सरकार गुरु रविदास मंदिर तोड़ने का विरोध करने पर गरीबों पर देश की राजधानी में बेरहमी से लाठियां भांज रही है। गरीब अगर आवाज उठाए तो अपराधी है। बीजेपी है तो मुमकिन है। गोदी मीडिया नहीं दिखाएगा या बताएगा क्योंकि यह सच असुविधाजनक है।”

दरअसल दिल्ली विकास प्राधिकरण द्वारा हाल ही में 15 शताब्दी के संत मंदिर को गिरा दिया गया। इसकी इजाजत सुप्रीम कोर्ट द्वारा दी गई। जिसके बाद दिल्ली और पंजाब के कुछ हिस्सों में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन शुरू हुआ। सरकार की इस कार्रवाई के बाद अब इन लोगों ने इस फैसले के खिलाफ दिल्ली के रामलीला मैदान में धरना प्रदर्शन करने के लिए पहुंचे। जिसके बाद दिल्ली के तुगलकाबाद और आसपास के इलाकों बीती शाम अचानक हिंसा भड़क गई। हिंसक भीड़ ने कई गाड़ियों में आग लगा दी और कई जगहों पर तोड़फोड़ की। इसके बाद दिल्ली पुलिस ने भीड़ पर लाठी चार्ज किया और आंसू गैस के गोले दागे।

राजीव की दोस्ती से शुरू हुई राजनीति जेल तक कैसे पहुंची : पी चिदंबरम

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आईएनएक्स मीडिया मामले में अभियुक्त पूर्व गृह मंत्री पी चिदंबरम को सीबीआई ने गिरफ़्तार कर लिया है.

इस मामले में गिरफ़्तारी से बचने के लिए उन्होंने हाई कोर्ट में ज़मानत याचिका दायर की थी जिसे कोर्ट ने ख़ारिज कर दिया था जिसके बाद उन्होंने ज़मानत के लिए मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट का रुख किया लेकिन शीर्ष अदालत ने इस पर तत्काल सुनवाई से इनकार करते हुए मामले को बुधवार को उपयुक्त बेंच के सामने ले जाने को कहा.

मंगलवार की शाम जाँच एजेंसियों – सीबीआई और ईडी के अधिकारी – चिदंबरम को गिरफ़्तार करने के लिए दिल्ली में उनके घर पहुंचे लेकिन वो वहाँ नहीं मिले.

इसके बाद जांच एजेंसियों ने उनके घर के बाहर नोटिस चिपका दिया जिसमें उनसे पेश होने के लिए कहा गया. साथ ही उनके ख़िलाफ़ लुकआउट नोटिस भी जारी किया गया. पर बुधवार को उन्हें शीर्ष अदालत से राहत नहीं मिल सकी.

फिर बुधवार की शाम क़रीब सवा आठ बजे एक प्रेस वार्ता करके पी चिदंबरम ने अपने ऊपर लगे सभी आरोपों को ख़ारिज किया और कहा कि वो भागे नहीं है बल्कि अपने हितों की रक्षा के लिए क़ानून की शरण में गए हैं.

बयान जारी करने के बाद चिदंबरम कांग्रेस दफ़्तर से ज़ोरबाग़ इलाक़े में स्थित अपने घर पहुंचे. उनके घर पहुंचने के कुछ मिनट बाद ही सीबीआई की टीम भी घर पहुंच गई और वहां से उन्हें गिरफ़्तार कर लिया गया.

विवादों से रहा है चिदंबरम का नाता

मनमोहन सरकार में पलानीअप्पन चिदंबरम के वित्त मंत्री रहते कुछ ऐसे मुद्दे उठे जिस पर तब खूब विवाद हुआ.

वरिष्ठ पत्रकार परंजोय गुहा ठकुरता कहते हैं, “उनके राजनीतिक विरोधी कहते थे कि उनकी आर्थिक विचारधार दक्षिणपंथी है. लेकिन चिदंबरम ने कहा कि कांग्रेस समाजवाद में विश्वास करती है और मैं भी उसी में विश्वास करता हूं.”

वे कहते हैं, “उन्होंने कई बजट पेश किए और बड़े-बड़े पूंजीपतियों को खुश करने का कोशिश किया लेकिन साथ-साथ उन्होंने यह भी दिखाने की कोशिश की कि वो ग़रीबों के लिए भी कुछ कर रहे हैं, समाजवाद में विश्वास करते हैं.”

परंजोय कहते हैं, “लेकिन चिदंबरम के साथ आईएनएक्स और एयरसेल मैक्सिस का जो ताज़ा विवाद जुड़ा है उसमें आरोप है कि जिस समय वो वित्त मंत्री थे उन्होंने इन कंपनियों में विदेशी निवेश को अनुमति दिया उससे उनके बेटे की कंपनी को भी फायदा पहुंचा. लेकिन चिदंबरम का कहना है कि हमारे पीछे आप क्यों लग रहे हैं क्योंकि उस वक्त मैं अकेला तो नहीं था. फॉरेन इन्वेस्टमेंट प्रमोशन बोर्ड (एफ़आईपीबी) का भी एक नियम है जिसे मान कर इसे किया गया. साथ ही कैबिनेट कमेटी ऑन इकोनॉमी भी थी.”

2जी घोटाले में आरोप

मनमोहन सिंह सरकार के पहले कार्यकाल के दौरान चिदंबरम जब वित्त मंत्री थे तब 2जी के लाइसेंस को लेकर वो विवादों में आए थे.

वरिष्ठ पत्रकार परंजोय गुहा ठकुरता कहते हैं, “चिदंबरम पर यह आरोप था कि जब वे वित्त मंत्री थे और तब के दूरसंचार मंत्री ए राजा ने जो लेटर ऑफ़ इंटेंट जारी किया उस पर उनका मुंह बंद था. मामला अदालत में पहुंचा लेकिन कोर्ट ने तब ये बात नहीं माना कि चिदंबरम का उसमें कोई हाथ है. अभी तक इस पर कोई अपील नहीं हुई है.”

परंजोय कहते हैं कि चिदंबरम की छवि मिलीजुली है. कभी अच्छा काम किया, कभी जो काम किया उसमें विवाद हुआ. कांग्रेस आर्थिक उदारीकरण की नीति में विश्वास करते हैं, खुले बाज़ार में विश्वास करते हैं.

परंजोय कहते हैं, “यूनाइटेड फ्रंट सरकार में जब चिदंबरम वित्त मंत्री थे तब उन्होंने वॉलेंट्री डिस्कोल्जर ऑफ़ इनकम स्कीम लाए थे कि अगर आपके पास काला धन है तो आप बता दें आप पर हम कार्रवाई नहीं करेंगे. उसकी बहुत आलोचना हुई थी.”

चिदंबरम ने क्या अच्छा किया?

आर्थिक नीति के मोर्चे पर चिदंबरम के कार्यकाल में क्या अच्छा हुआ? इसपर परंजोय कहते हैं, “आर्थिक नीति के मोर्चे पर उस वक्त भारत का सकल घरेलू उत्पाद आज की तुलना में तेज़ी से बढ़ रहे थे. उस समय किसानों के लिए कर्ज़ माफ़ी भी किया गया था. कैबिनेट ने उस समय रोज़गार गारंटी स्कीम मनरेगा का जो बड़ा फ़ैसला किया उससे देश के ग्रामीण इलाके के लोगों को फायदा पहुंचा.”

गुहा कहते हैं कि नरसिम्हा राव सरकार में वाणिज्य राज्य मंत्री के रूप में चिदंबरम आयात-निर्यात के क्षेत्र में उदारीकरण लाए थे.

हालांकि परंजोय कहते हैं कि चिदंबरम और उनके बेटे के ख़िलाफ़ जो भी आरोप लगाए जा रहे हैं वो सही हैं या ग़लत यह कोर्ट तय करेगा.

चिदंबरम राजनीति में कैसे आए

मनमोहन सिंह की सरकार में गृह मंत्री और वित्त मंत्री रहे पी चिदंबरम तमिलनाडु के चेट्टियार समुदाय से आते हैं.

वरिष्ठ पत्रकार अदिति फडनीस कहती हैं, “चेट्टियार बेहद उद्यमी माने जाते हैं. यह समुदाय पिछले 100 सालों से विदेश व्यापार के मामले में बहुत आगे रहा है. व्यापार के लिए चेट्टियार समुदाय बर्मा, इराक, ईरान तक गया. उन देशों से सामान लाकर भारत में बेचा और उन देशों के साथ व्यापार का सिलसिला बढ़ाया.”

जिस तरह गुजरात के लोगों की छवि बिजनेस और व्यापार से जुड़ी है वैसे ही तमिलनाडु के चेट्टियार समुदाय का विदेश जाने की परंपरा और विदेश व्यापार से गहरा नाता रहा है.

पी चिदंबरम समृद्ध परिवार से आते हैं. उनका परिवार तमिलनाडु के शिवगंगा ज़िले में कराइकुडी इलाके का रहने वाला है.

अदिति कहती हैं, “उनकी स्कूली शिक्षा किसी तमिल पाठशाला में नहीं बल्कि चेन्नई स्थित मद्रास क्रिश्चियन कॉलेज हायर सेकेंड्री स्कूल में हुई. इसके बाद प्रेसिडेंसी कॉलेज से विज्ञान में स्नातक किया.”

“जब उनके परिवार ने कहा कि उन्हें घर का बिजनेस संभालना है तो उन्होंने इससे साफ़ इनकार कर दिया. फिर उनके पिता ने कहा कि पहले आप आगे विदेश जा कर पढ़ाई कीजिए फिर आगे सोचेंगे.”

साठ के दशक में अधिकतर भारतीय उच्च शिक्षा के लिए इंग्लैंड जाया करते थे लेकिन चिदंबरम ने हार्वर्ड जाना चुना. वहां से उन्होंने बिजनेस मैनेजमेंट और क़ानून की पढ़ाई की.

अदिति कहती हैं, “जब चिदंबरम वापस लौट कर आए तो उनकी मुलाक़ात एक लड़की नलिनी से हुई जो थीं तो एक समृद्ध परिवार से लेकिन उनके अपनी जाति की नहीं थी. नलिनी के पिता हाई कोर्ट में जज थे. लेकिन जब चिदंबरम ने अपने परिवार से नलिनी से शादी करने की बात की तो उन्हें घर छोड़ने के लिए कह दिया गया.” नलिनी चिदंबरम (दाएं), कार्ति चिदंबरम (बीच में)

जब चिदंबरम ने घर छोड़ा

इसके बाद चिदंबरम ने घर छोड़ दिया.

अदिति फडनीस के मुताबिक, “खुद चिदंबरम ने मुझे एक इंटरव्यू में बताया कि उनके पास तब एक सूटकेस और 2,400 रुपये थे. उन्होंने कहा कि घर छोड़ कर जा रहा हूं. फिर उन्होंने क़ानून की प्रैक्टिस शुरू की. साथ-साथ उन्होंने राजनीति भी करनी शुरू की. उन्होंने ट्रेड यूनियन के कई केस लिए. एक तरह से कहा जाए तो उन्होंने ट्रेड यूनियन की राजनीति करने की कोशिश की.”

बाद में चिदंबरम ने सुप्रीम कोर्ट और देश के विभिन्न हाई कोर्ट में वकालत किया.

उस समय इंदिरा गांधी प्रधानमंत्री थीं और 1969 में कांग्रेस के विभाजन, बैंकों के राष्ट्रीयकरण और राजा-महाराजाओं के प्रिवी पर्स बंद करने को लेकर चिदंबरम बहुत प्रभावित हुए. वे इंदिरा का बहुत आदर किया करते थे.

कांग्रेस और राजीव से जुड़ाव

अदिति ने बताया कि जब राजीव गांधी को इंदिरा गांधी ने राजनीति में ढालने की कोशिश की उसी दौरान उनकी चिदंबरम से एक एयरपोर्ट पर मुलाक़ात हुई.

1984 में पहली बार चुनाव लड़ने से पहले हुई इस मुलाक़ात में चिदंबरम ने राजीव गांधी को बहुत प्रभावित किया.

वे कहती हैं, “उन दोनों में दोस्ती हो गई. जब राजीव प्रधानमंत्री बने तो उन्होंने चिदंबरम को कपड़ा मंत्रालय देने का प्रस्ताव रखा लेकिन चिदंबरम ने कहा कि मेरे परिवार को कपड़े का बिजनेस है लिहाजा कोई अन्य मंत्रालय दिया जाए. फिर चिदंबरम को कार्मिक मंत्रालय दिया गया.” नरसिम्हा राव और मनमोहन सिंह

शनिवार की छुट्टी

अदिति कहती हैं कि चिदंबरम जब राजीव गांधी के कैबिनेट में थे तब उन्होंने कई सुधार किए जिनमें से एक सरकारी कर्मचारियों को शनिवार को छुट्टी देने की परंपरा की शुरुआत करना था.

वे कहती हैं, “राजीव गांधी के साथ कई मंत्री थे जिनमें एक थे अरुण नेहरू. जब दोनों के बीच दरार पड़ी तो राजीव गांधी ने चिदंबरम को उनकी जगह गृह राज्य मंत्री बनाया. उस दौरान चिदंबरम गृह मंत्रालय में राजीव गांधी की कान और नाक थे.”

अदिति फडनीस के मुताबिक, “जब राजीव गांधी की हत्या हुई तब चिदंबरम पूरी तरह टूट से गए थे. तमिलनाडु सरकार उस वक्त राजीव गांधी के शव से मिले जूते, घड़ी, कपड़े वापस नहीं दे रही थी. तब चिदंबरम की वकील पत्नी नलिनी ने गांधी परिवार की तरफ से अदालत में केस लड़ीं और परिवार को राजीव गांधी की उन चीज़ों पर अधिकार दिलाने का काम किया.”

“फिर जब पीवी नरसिम्हा राव की सरकार बनी और महमोहन सिंह वित्त मंत्री बनाए गए तब चारों ओर आर्थिक मोर्चे पर निराशा का माहौल था. उस दौरान पी चिदंबरम वाणिज्य मंत्री बनाए गए और उस दौरान उन्होंने जुलाई 1991 में एक नई आयात-निर्यात नीति बनाई, जिसकी तारीफ़ खुद मनमोहन सिंह भी किया करते हैं.”

नरसिम्हा राव सरकार से क्यों दिया इस्तीफ़ा

अदिति फडनीस कहती हैं, “उस दौरान चूंकि अर्थव्यवस्था में सुधार हुआ लेकिन शेयर बाज़ार को लेकर रेगुलेशन सरकार उतनी जल्दी नहीं बदल पायी. उसी दौरान हर्षद मेहता घोटाला सामने आया. बाज़ार गिरा और अर्थव्यवस्था चरमरा गई. उस दौरान हर्षद मेहता ने जिन कंपनियों में पैसे लगाए थे उनमें से कुछ कंपनियों में चिदंबरम की पत्नी ने भी पैसे लगाए थे.”

“उन्हें इसकी जनकारी प्रधानमंत्री पीवी नरसिम्हा राव को इसकी जानकारी दी और कहा कि वे इस्तीफ़ा देने को तैयार हैं. लेकिन इस बातचीत के बाद वो जैसे ही घर पहुंचे उन्हें टीवी से इसकी जानकारी मिली कि उनका इस्तीफ़ा स्वीकार कर लिया गया है.”

“इस प्रकरण से चिदंबरम और नरसिम्हा राव के बीच गहरी खटास हो गई. इसके बाद चुनाव का समय आया. उस सयम तमिलनाडु में कांग्रेस और डीएमके साथ चुनाव लड़ा करते थे लेकिन नरसिम्हा राव ने इसे बदलने की कोशिश की और बूटा सिंह को एआईएडीएमके की प्रमुख जयललिता से बात करने के लिए नियुक्त किया.”

“इससे कांग्रेस के लोग बेहद नाराज़ हुए. चिदंबरम और जीके मूपनार ने एक अलग पार्टी तमिल मनीला कांग्रेस (टीएमसी) का गठन किया और चुनाव में भारी जीत दर्ज की.”

“टीएमसी और डीएमके ने मिलकर सरकार बनाई. लेकिन मूपनार के देहांत के बाद टीएमसी बिखर गई और चिदंबरम की कांग्रेस में वापसी हुई.”

“इस दौरान कांग्रेस की राजनीति से नरसिम्हा राव का बहिर्गमन और सोनिया गांधी का आगमन हुआ. उन्होंने चिदंबरम की मदद ली.”

“तब देवेगौड़ा और आईके गुजराल की यूनाइटेड फ्रंट की सरकार को कांग्रेस बाहर से समर्थन दे रही थी. चिदंबरम दोनों प्रधानमंत्रियों के कार्यकाल के दौरान कुछ समय के लिए वित्त मंत्री बनाए गए.”

अदिति कहती हैं, “जब गुजराल और देवेगौड़ा की सरकार गिरी और 2004 में कांग्रेस की सरकार बनी तब चिदंबरम फिर वित्त मंत्री बनाए गए. इसी दौरान विनिवेश और अन्य मामलों को लेकर सरकार को समर्थन दे रहे वामपंथी दल उनसे नाराज़ हो गए. उसी दौरान नवंबर 2008 में उन्हें गृह मंत्रालय सौंपा गया. जब 2009 में कांग्रेस की दोबारा सरकार बनी तो चिदंबरम एक बार फिर गृह मंत्री बनाए गए.” कार्ति चिदंबरम

क्या है आईएनएक्स मीडिया मामला

सीबीआई ने मीडिया कंपनी आईएनएक्स मीडिया के ख़िलाफ़ 15 मई, 2017 को एक एफ़आईआर दर्ज की थी. आरोप है कि आईएनएक्स मीडिया ग्रुप को 305 करोड़ रुपये के विदेशी फ़ंड लेने के लिए फ़ॉरेन इनवेस्टमेंट प्रमोशन बोर्ड (एफ़आईपीबी) की मंज़ूरी में कई तरह की अनियमितताएं बरती गईं.

जब साल 2007 के दौरान कंपनी को निवेश की स्वीकृति दी गई थी उस समय पी चिदंबरम वित्त मंत्री हुआ करते थे.

चिदंबरम तब जांच एजेंसियों के रडार पर आए जब आईएनएक्स मीडिया के प्रमोटर इंद्राणी मुखर्जी और उनके पति पीटर मुखर्जी से ईडी ने पूछताछ की.

ईडी ने इस संबंध में 2018 में मनी लांड्रिंग का एक मामला भी दर्ज किया था.

टाइम्स ऑफ़ इंडिया की एक रिपोर्ट के अनुसार ईडी ने अपने आरोप पत्र में लिखा है, “इंद्राणी मुखर्जी ने जांच अधिकारियों को बताया कि चिदंबरम ने एफ़आईपीबी मंज़ूरी के बदले अपने बेटे कार्ति चिदंबरम को विदेशी धन के मामले में मदद करने की बात कही थी.”

‘कार्ति चिदंबरम ने पैसों की मांग की थी’

सीबीआई ने पी चिदंबरम के बेटे कार्ति चिदंबरम को फ़रवरी 2018 में चेन्नई एयरपोर्ट से गिरफ़्तार कर लिया था.

उनके ख़िलाफ़ ये आरोप लगाए गए थे कि उन्होंने आईएनएक्स मीडिया के ख़िलाफ़ संभावित जांच को रुकवाने के लिए 10 लाख डॉलर की मांग की थी. बाद में कार्ति चिदंबरम को कोर्ट से ज़मानत मिल गई थी.

सीबीआई का कहना है कि आईएनएक्स मीडिया की पूर्व डायरेक्टर इंद्राणी मुखर्जी ने उनसे पूछताछ में कहा कि कार्ति ने पैसों की मांग की थी. जांच एजेंसी के मुताबिक़ ये सौदा दिल्ली के एक पांच सितारा होटल में तय हुआ था. इंद्राणी मुखर्जी अपनी बेटी शीना बोरा की हत्या के आरोप में जेल में हैं. इंद्राणी मुखर्जी

एयरसेल-मैक्सिस सौदे में भी है नाम

केंद्रीय जांच एजेंसी 3500 करोड़ रुपये के एयरसेल मैक्सिस सौदे में भी चिदंबरम की भूमिका की जांच कर रही है.

साल 2006 में मलेशियाई कंपनी मैक्सिस ने एयरसेल में 100 प्रतिशत हिस्सेदारी हासिल कर ली थी. इस मामले में रज़ामंदी देने को लेकर चिदंबरम पर अनियमितताएं बरतने का आरोप है. वो 2006 में हुए इस सौदे के वक़्त पहली यूपीए सरकार में वित्त मंत्री थे. 2जी से जुड़े इस केस में चिदंबरम और उनके परिवार पर हवाला मामले में केस दर्ज है.

आरोप है कि विदेशी निवेश को स्वीकृति देने की वित्त मंत्री की सीमा महज़ 600 करोड़ है फिर भी 3500 करोड़ रुपये के एयरसेल-मैक्सिस डील को आर्थिक मामलों की कैबिनेट समिति की इजाज़त के बिना पास कर दिया गया.

लेकिन पी चिदंबरम ने हमेशा अपने और अपने बेटे के ख़िलाफ़ सभी इल्ज़ामों को ख़ारिज किया है. उनके अनुसार उनके ख़िलाफ़ इल्ज़ाम राजनीतिक प्रतिशोध से प्रेरित हैं.

गिरफ़्तारी से पहले चिदंबरम ने क्या कहा?

बुधवार की शाम को कांग्रेस के दफ़्तर पर प्रेस वार्ता में चिदंबरम ने अपने ऊपर लगाए गए सभी आरोपों को ख़ारिज करते हुए कहा कि वो भागे नहीं हैं बल्कि अपने हितों की रक्षा के लिए क़ानून की शरण में गए हैं.

आईएनएक्स मीडिया केस के बारे में चिदंबरम ने कहा, “आईएनएक्स मीडिया केस में मुझ पर किसी भी अपराध का कोई आरोप नहीं है. ना ही मेरे परिवार से जुड़ा कोई व्यक्ति किसी आरोप में अभियुक्त है. तथ्य ये है कि ना ही सीबीआई या ईडी ने किसी अदालत के समक्ष कोई चार्जशीट दाख़िल की है. न ही सीबीआई की दर्ज की गई एफ़आईआर में मेरे ख़िलाफ़ कोई आरोप लगाए गए हैं. बावजूद इसके ऐसी व्यापक छवि बनाई गई है कि अपराध किए गए हैं और मैंने और मेरे बेटे ने वो बड़े अपराध किए हैं. ये वो झूठ हैं जो पैथोलॉजिकल झूठों ने फैलाएं हैं.”

इसके बाद उन्होंने बताया कि वो अग्रिम जमानत की कोशिश में लगे थे जो उन्हें नहीं मिली. उन्होंने कहा, “जब ईडी और सीबीआई ने मुझे पूछताछ के लिए बुलाया तो मैंने अदालत से गिरफ़्तारी से बचने के लिए अग्रिम ज़मानत मांगी. 31 मई 2018 और 25 जुलाई 2018 के हाई कोर्ट के आदेशों ने मुझे अग्रिम ज़मानत दे दी. बीते तेरह से पंद्रह महीनों तक मुझे अग्रिम ज़मानत प्राप्त थी. इन मामलों की अंतिम सुनवाई 25 जनवरी 2019 को पूरी हो गई थी और फ़ैसला सुरक्षित रख लिया गया. सात महीने बाद अब हाई कोर्ट ने कल मेरी अग्रिम ज़मानत रद्द कर दी है.”

उन्होंने कहा, “मुझ पर आरोप लगाया गया कि मैं न्याय से भाग रहा हूं जबकि सच ये है कि मैं तो इंसाफ़ मांग रहा हूं. मैं क़ानून का सम्मान करूंगा, भले ही उसे लागू करने में जांच एजेंसियां पक्षपात करें.”

अंत में उन्होंने कहा कि वो शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले का इंतज़ार कर रहे हैं. उन्होंने कहा, “मैं जितना आज़ादी में विश्वास रखता हूं मैं उतना ही अपने देश के जजों की समझ में विश्वास रखता हूं. दोस्तों, शुक्रवार तक और उसके बाद भी, उम्मीद करते हैं कि आज़ादी की रोशनी चमकती रहेगी और देश को रोशन करती रहेगी.”

चुकंदर का सेवन किसके लिए है जहर के समान और किसके लिए है वरदान, जानिए इसके फायदे और नुकसान

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चुकंदर सेहत के लिए बहुत ही लाभदायक होता है। इसे बीट भी कहा जाता है। चुकंदर कई बीमारियों को खत्म करने की क्षमता रखता है। इसमें बहुत सारे पोषक तत्व पाए जाते हैं। बीट का सेवन कई बीमारियों से बचाता भी है। इसके सेवन से जहां बहुत से फायदे हैं तो कई नुकसान भी हैं। आज मैं आपको चुकंदर के फायदे और नुकसान के बारे में बातायेंगे। आइये जानते हैं चुकंदर यानी बीट के फायदे और नुकसान।

चुकंदर के फायदे

1.मोतियाबिंद आंख से जुड़ी बीमारी है, जो 60 साल की उम्र के बाद ज्यादा देखने को मिलती है। इस बीमारी के कारण देखने की क्षमता कमजोर हो जाती हैं। अगर आप बुढ़ापे में ऐसी बीमारी से बचना चाहते हैं, तो विटामिन-सी से युक्त चुकंदर का सेवन रोजाना जूस या सलाद के रूप में कर सकते हैं। विटामिन-सी आंखों को स्वस्थ रखने का काम करता है

2.बीट के फायदों में लिवर स्वास्थ्य भी शामिल है। शरीर को पोषित करने के लिए लिवर का स्वस्थ रहना बहुत जरूरी है। लिवर से जुड़ी समस्याओं से बचने के लिए आप चुकंदर का रोजाना सेवन कर सकते हैं। बीटरूट हाई फैट वाले भोजन से होने वाली लिवर की क्षति को कम करने में मदद करता है। इसमें फ्लेवोनॉयड्स भी पाया जाता है, जो मेटाबॉलिज्म को बनाए रखने में सहायता करता है

3.बीट के फायदों में कोलेस्ट्रॉल नियंत्रण भी शामिल है। कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित करने और इसके घातक परिणामों से बचने के लिए आप चुकंदर का सेवन कर सकते हैं। चुकंदर में कैलोरी की मात्रा कम होती है और इसमें शून्य कोलेस्ट्रॉल होता है

4.पाचन क्रिया की मजबूती के लिए आप चुकंदर का सेवन कर सकते हैं। चुंकदर में ग्लूटामाइन नाम का एमिनो एसिड होता है, जो भोजन को पचने में मदद करने के साथ-साथ इम्यून सिस्टम को ठीक रखता है।

5.चुकंदर आयरन से भरपूर होता हैं, जो शरीर में आयरन की आपूर्ति करने का काम करता है। इसके सेवन से एनीमिया में धीरे-धीरे सुधार होने लगता है। भविष्य में एनीमिया के डर से बचने के लिए आप रोजाना थोड़ी मात्रा में चुकंदर का सेवन कर सकते हैं।

चुकंदर के नुकसान

1 अगर आप रोजाना चुकंदर का जूस पीते हैं, तो इससे आपके शरीर में शुगर बढ़ सकती है, क्योंकि 100 ग्राम चुकंदर में लगभग 7 ग्राम शुगर होती है। हां, अगर आप अतिरक्त शर्करा का सेवन नहीं करते, तो यह आपके लिए लाभकारी है।

2 चुकंदर का जूस, आपके ब्लडप्रेशर के स्तर को कम करता है। अगर आप ब्लडप्रेशर को कम करने के लिए दवाईयां खाते हैं, तो इसका सेवन खतरनाक हो सकता है।।

3 चुकंदर का एक नुकसान बेटुरिया भी है। बेटुरिया वह स्थिति है, जिससे मूत्र एवं मल का रंग लाल या गुलाबी हो जाता है और कई आप समझते हैं कि यह रक्त है। लेकिन यह स्थिति ज्यादा से ज्यादा 48 घंटे तक होती है, जिसके बाद सब सामान्य हो जाता है।

4 रोजाना चुकंदर का जूस पीना नुकसानदायक हो सकता है, इसलिए इसका प्रयोग सप्ताह में तीन बार से ज्यादा न करें। एक बार में चुकंदर के जूस की आठ औंस से अधिक मात्रा लेना हानिकारक हो सकता है।

SSC में फर्जी प्रमाणपत्र से नौकरी देने वाला आरोपी गिरफ्तार, इस तरह करता था ठगी…

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छत्तीसगढ़ (Chhattisgarh) की राजधानी रायपुर की पुलिस (Police) ने नौकरी लगाने के नाम पर फर्जी नियुक्ति पत्र देकर ठगी (Fraud) करने वाले आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है. आरोपी को दिल्ली (Delhi) के करोल बाग से गिरफ्तार किया गया है. आरोपी देश के अलग-अलग राज्यों में ठगी करता था. कर्मचारी चयन आयोग (SSC) की परीक्षा के बाद आरोपी परिक्षार्थियों को निशाना बनाता था. उन्हें अपने झांसे में लेकर ठगी की घटना को अंजाम देता था. आरोपी के खिलाफ छत्तीसगढ़ (Chhattisgarh) सहित 8 राज्यों में ठगी मामला दर्ज है. पुलिस (Police) से मिली जानकारी के मुताबिक आरोपी दिल्ली निवासी दीपक कुमार सिंह है. कर्मचारी चयन आयोग (SSC) के नाम से वाटरमैन एवं स्वीपर पद के लिए फर्जी नियुक्ति पत्र जारी कर आरोपी ने रायपुर (Raipur) के परीक्षार्थियों से ठगी की थी. आरोपी शातिराना तरीके से घटना को अंजाम देता था. 8 राज्यों की पुलिस को आरोपी की तलाश थी. वाटर मैन एवं स्वीपर पद के लिए रकम लेकर फर्जी नियुक्ति पत्र जारी कर आरोपी ने ठगी की थी.

इस तरह की ठगी
पुलिस से मिली जानकारी के मुताबिक कर्मचारी चयन आयोग जे-5 अनुपम नगर रायपुर के उप निदेशक वेदप्रकाश पटवा ने पंडरी पुलिस थाने में शिकायत दर्ज कराई थी. शिकायत के अनुसार राज्य के बेरोजगार युवाओं को छत्तीसगढ शासन, छत्तीसगढ़ स्टाफ सलेक्शन कमीशन, एस-8 अनुपम नगर रायपुर के नाम से वाटरमैन एवं स्वीपर पद के लिए नियुक्ति पत्र जारी किया जा रहा है. आवेदकों को भेजे गए नियुक्ति पत्र में भारत सरकार, कर्मचारी चयन आयोग के पुराने लोगो (मोनो) का प्रयोग किया गया है. इतना ही नहीं उक्त संस्था का नाम इस कार्यालय से मिलता जुलता है. आरोपी अलग अलग बैंक खातों का इस्तेमाल बेरोजगार युवाओं से ठगी की रकम लेने के लिए करता था. 

पुलिस से मिली जानकारी के मुताबिक दिल्ली के करोल बाग में कुछ दिनों तक लगातार पुलिस की टीम कैम्प कर आरोपी को लोकेट किया गया. आरोपी दीपक कुमार को गिरफ्तार करने में सफलता प्राप्त किया गया. टीम द्वारा प्राप्त साक्ष्यों के आधार पर आरोपी से कड़ाई से पूछताछ करने पर आरोपी द्वारा अपने अन्य साथियों के साथ मिलकर उक्त घटना को कारित करना स्वीकार किया गया तथा आरोपी दीपक कुमार ने पूछताछ में बताया कि उसका अलग-अलग बैंकों में दर्जन भर से अधिक खाते हैं, जिसके माध्यम से वह ठगी करता था. आरोपी को ट्रांजिट रिमाण्ड पर दिल्ली से रायपुर लाया गया है.

गाय और भैंस के दूध में अंतर क्या है?

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गाय और भैंस का दूध पोषक तत्व व खनिजों से भरपूर होता है। इस कारण इन्हें सेहत के लिए अच्छा माना जाता है। हालांकि गाय व भैंस के दूध में पोषक तत्वों की मात्रा व उसकी सुपाच्यता में अंतर होता है। ऐसा माना जाता है कि गाय का दूध आसानी से पच जाता है। भैंस का दूध अपेक्षाकृत भारी होता है। इसे पचाने में कई लोगों को दिक्कत भी होती है। यह वजन भी बढ़ाता है। डेयरी प्रोडक्ट के लिए भैंस का दूध ज्यादा प्रयोग में आता है।

16.5 करोड़ टन सालाना दूध के साथ उत्पादन भारत दुनिया में है सबसे ऊपर। अमेरिका दूसरे व चीन तीसरे नंबर पर है।

सुपाच्य और मानसिक विकास के लिए अच्छा:-

यह प्रोटीन का अच्छा स्रोत है। इसे नियमित लेने से मांसपेशियां मजबूत होती हैं। दांतों व हड्डियों के विकास के लिए कैल्शियम की ज्यादा जरूरत होती है। इसमें प्रचुर कैल्शियम दांत, हड्डियों को मजबूत करता है। दूध से त्वचा निखरती है। दूध मिलाकर नहाने से भी त्वचा में चमक आती है।

100 मी.ली. दूध में इन सात तत्वों की मात्रा अलग- अलग होती है :-

1. प्रोटीन :-भैंस के दूध में गाय के दूध की अपेक्षा प्रोटीन अधिक होता है। भैंस के दूध में 18% तो गाय के दूध 16% प्रतिशत प्रोटीन होता है। ज्यादा प्रोटीन के कारण भैंस का दूध कम सुपाच्य और गाय का दूध अधिक पाचक होता है।

2. फैट :-भैंस के दूध में 7% व गाय के दूध में 4% फैट होता है। ऐसे लोग जिन्हें खाना नहीं पचता, डाइटिंग या जिमिंग करते हैं उनके लिए गाय का दूध अच्छा है। भैंस के दूध में कार्बोहाइड्रेट 13 ग्राम व गाय में 12 ग्राम होता है।

3. कैलोरी :-भैंस के 100 मि.ली. दूध में 110 कैलोरी व गाय के दूध में 66 कैलोरी होती है। भैंस के दूध से बने डेयरी उत्पाद को ज्यादा समय के लिए स्टोर किया जा सकता है जबकि गाय के दूध वाली चीज़ों को नहीं कर सकते हैं।

4. कैल्शियम :-भैंस के दूध में कैल्शियम 41%,गाय के दूध में 27% होता है। भैंस के दूध में मैग्नीशियम,पोटैशियम, फॉस्फोरस, सोडियम की मात्रा अधिक होती है। गाय में विटामिन ए 9% तो भैंस के दूध में 7 प्रतिशत होता है।

5. कोलेस्ट्रॉल :-भैंस के दूध में गाय की अपेक्षा कोलेस्ट्रोल कम होता है। यह पीसीओडी, हाइपरटेंशन, किडनी रोग और मोटापे से पीड़ित लोगों के लिए लाभकारी है। गाय के दूध का घी पित्त शांत करता है व भैंस का घी कफ बनाता है।

6. विटामिन :-भैंस के दूध में सोडियम 127 मिग्रा व गाय में 105 मिग्रा होता है। यह महिलाओं व बच्चों के लिए अधिक उपयोगी होता है। भैंस के दूध में 2 प्रतिशत आयरन होता है जबकि गाय के दूध में नहीं होता है।

7. पानी :-गाय के दूध में करीब 87 प्रतिशत तक पानी होता है।इसलिए यह काफी हल्का होता है। गाय का दूध शरीर को हाइड्रेटेड रखता है। लेकिन भैंसे के दूध में ज्यादा पानी (83 फीसदी) होता है। इसके अलावा भैंस के दूध में उसे गाढ़ा बनाने वाले पदार्थ ज्यादा होते हैं।