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डोनाल्ड ट्रंप ने फिर की कश्मीर मुद्दे पर मध्यस्थता की पेशकश, छेड़ा हिन्दू-मुस्लिम का राग

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अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) ने एक बार फिर कश्मीर (Kashmir) को लेकर मध्यस्थता की पेशकश की है. ट्रंप ने कश्मीर मुद्दे को विस्फोटक बताया है. उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) के समक्ष वह इस सप्ताह के अंत में इस मुद्दे को उठाएंगे. अमेरिका ने पीएम मोदी से कश्मीर में तनाव कम करने के लिए कदम उठाने का अनुरोध किया था.

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) ने संवाददाताओं से कहा, ‘कश्मीर बेहद जटिल जगह है. यहां हिंदू हैं और मुसलमान भी और मैं नहीं कहूंगा कि उनके बीच काफी मेलजोल है.’ उन्होंने कहा कि मध्यस्थता के लिए जो भी बेहतर हो सकेगा, मैं वो करूंगा.

Pak पीएम से फोन पर की थी बात
इससे पहले मंगलवार को ट्रंप ने पाकिस्तान के पीएम इमरान खान से फोन पर बात की थी. इस दौरान इमरान को कश्मीर पर भारत के खिलाफ बयानबाजी को लेकर एहतियात बरतने को कहा है. ट्रंप ने मौजूदा हालात को मुश्किल बताया और दोनों पक्षों से संयम बरतने को कहा. 
अमेरिकी राष्ट्रपति ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से फोन पर करीब 30 मिनट बात करने के बाद उन्होंने खान से बात की. मोदी ने बातचीत के दौरान पाकिस्तानी नेताओं द्वारा ‘भारत विरोधी हिंसा के लिए उग्र बयानबाजी और उकसावे’ का मुद्दा उठाया. व्हाइट हाउस के अनुसार, ट्रंप ने खान से जम्मू-कश्मीर मामले पर भारत के खिलाफ बयानबाजी में संयम बरतने और तनाव कम करने को लेकर चर्चा की.

व्हाइट हाउस ने कहा, खान के साथ बातचीत के दौरान, ट्रंप ने दोनों पक्षों के तनाव बढ़ाने से बचने और संयम बरतने की आवश्यकता पर जोर दिया. उसने कहा, दोनों नेताओं ने अमेरिका-पाकिस्तान आर्थिक एवं व्यापार सहयोग बढ़ाने की दिशा में काम करने पर भी सहमति जताई.

पा‍किस्‍तान एयरफोर्स के जेट पहुंचे कश्‍मीर

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26 फरवरी को हुई बालाकोट एयर स्‍ट्राइक के बाद इंडियन आर्मी पाकिस्‍तान की ओर से आने वाली किसी प्रतिक्रिया के लिए पूरी तरह से तैयार थी। सेना के सूत्रों की ओर से इस बात की जानकारी दी गई है। सूत्रों की मानें तो एयरस्‍ट्राइक की प्‍लानिंग के समय ही इस बात की योजना भी बना ली गई थी कि अगर पाकिस्‍तान सेना ने किसी भी तरह का दुस्‍साहस दिखाने की कोशिश की तो फिर इंडियन आर्मी उसका जवाब देगी। सेना, पाक आर्मी से निबटने के लिए पूरी तरह से तैयार थी।

जनरल रावत ने खुद दी जानकारी

यह बात खुद आर्मी चीफ जनरल बिपिन रावत ने उस समय बताई जब वह सोमवार को रिटायर हो रहे ऑफिसर्स के सम्‍मान में आयोजित एक कार्यक्रम में थे।जनरल रावत के मुताबिक उन्‍होंने केंद्र सरकार को यह बात बता दी थी कि सेना पाकिस्‍तान की सीमा में घुसकर उन्‍हें जवाब देने के लिए तैयार है। 26 फरवरी को इंडियन एयरफोर्स (आईएएफ) के मिराज 2000 फाइटरर जेट्स पाकिस्‍तान के खैबर पख्‍तूनख्‍वा प्रांत के बालाकोट में दाखिल हुए थे। इने जेट्स ने जैश-ए-मोहम्‍मद के ठिकानों को निशाना बनाया था।

बालाकोट हवाई हमला, 14 फरवरी को हुए पुलवामा आतंकी हमले का जवाब था। बालाकोट के अगले दिन पाकिस्‍तान एयरफोर्स के जेट्स जम्‍मू कश्‍मीर के राजौरी के सुंदरबनी में दाखिल हुए थे। इन जेट्स का मकसद भारतीय सैन्‍य ठिकानो को निशाना बनाना था। लेकिन आईएएफ के जेट्स ने उनकी योजना को पूरी तरह से विफल कर दिया। सेना के एक ऑफिसर की तरफ से बताया गया, ‘सरकार जब दूसरे विकल्‍पों को परख रही थी तो उसने आर्मी चीफ से सेना की तैयारियों के बारे में पूछा था। आर्मी चीफ ने सरकार को इस बात की जानकारी दी थी कि हम किसी भी तरह के दुस्‍साहस से निबटने के लिए पूरी तरह से तैयार हैं।’

हर हालात के लिए तैयार सेना

इस ऑफिसर ने यह भी बताया कि सेना प्रमुख ने सरकार को इस बात की सूचना भी दी थी कि साल 2016 में उरी आतंकी हमले को देखते हुए सेना ने किसी भी आपातकाल के हालात से निबटने के लिए जरूरी गोला-बारूद बाद इकट्ठा करर लिया है। उरी आतंकी हमले के बाद सेना ने पीओके में सर्जिकल स्‍ट्राइक को अंजाम दिया था। उरी हमले में 19 जवान शहीद हो गए थे।

अब आप ऐसे निकाल सकेंगे कैश, बंद होने वाले हैं SBI के ATM कार्ड

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देश के सबसे बड़े सरकारी बैंक SBI के डेबिट या एटीएम कार्ड आने वाले दिनों में बेकार हो जाएंगे. एसबीआई के चेयरमैन रजनीश कुमार ने इसके संकेत दिए हैं. 

एसबीआई के चेयरमैन ने कहा कि हम डेबिट कार्ड को प्रचलन से बाहर करना चाहते हैं. हम इस बात को लेकर आश्वस्त हैं कि इसे समाप्त किया जा सकता है. ऐसे में सवाल है कि डेबिट कार्ड बंद होने की स्थिति में ग्राहक एटीएम मशीन से कैश कैसे निकाल सकेंगे.आइए स्‍टेप बाई स्‍टेप समझते हैं इस पूरे मामले को..

दरअसल, एसबीआई चेयरमैन रजनीश कुमार ने कहा है कि बैंक डेबिट कार्ड मुक्त देश बनाने में ‘योनो’ ऐप सबसे बड़ी भूमिका निभाने वाला है. इसका मतलब यह हुआ कि आने वाले दिनों में YONO (यू ओन्ली नीड वन) ऐप के जरिए कैश निकाला जाएगा. 

यहां बता दें कि एसबीआई के YONO ऐप पर “योनो कैश” नाम से एक सुविधा दी जाती है. इसके तहत ग्राहक बिना कार्ड इस्तेमाल के एसबीआई के ‘योनो कैशप्वाइंट’ एटीएम से पैसे निकाल सकते हैं. इसके लिए बैंक पहले ही 68,000 ‘योनो कैशप्वाइंट’ की स्थापना कर चुका है और अगले 18 माह में इसे 10 लाख करने की योजना है.

कैसे कर सकेंगे इस्‍तेमाल 
इसके लिए आपके फोन में एसबीआई के YONO ऐप का इन्‍स्‍टॉल होना अनिवार्य है. इसके बाद YONO ऐप के ‘योनो कैश’ कैटेगरी को सेलेक्ट करना होगा. इस कैटेगरी के खुलने के साथ ही आपसे अमाउंट की जानकारी ली जाएगी. इसका मतलब यह हुआ कि उतने अमाउंट को एंटर करना होगा जितने की आपको जरूरत है. अगले स्‍टेप में आपको 6 डिजिट के ट्रांजेक्शन पिन का चयन करना है. इस पिन की जरूरत एटीएम से पैसे निकालते वक्‍त पड़ेगी. इसके अलावा आपके रजिस्‍टर्ड मोबाइल नंबर पर एक मैसेज आएगा. इस मैसेज में एक ट्रांजेक्शन नंबर होगा. 

इसके बाद आपको एसबीआई के नजदीकी ‘योनो कैशप्वाइंट’ एटीएम पर जाना होगा. यहां एटीएम स्‍क्रीन पर ‘योना कैश’ विकल्प चुनना है. इसे सेलेक्‍ट करने के बाद आपसे ट्रांजेक्‍शन नंबर मांगा जाएगा. ऐसे में आपके मैसेज के जरिए मिले ट्रांजेक्शन नंबर को एंटर करना होगा. फिर अमाउंट टाइप कर ‘योनो ऐप’ में सेलेक्ट 6 डिजिट का पिन एंटर करना है. पिन डालने के बाद आपको कैश मिल जाएगा. ग्राहक को पिन और ट्रांजेक्‍शन नंबर दोनों की मदद से अगले 30 मिनट के भीतर निकासी प्रक्रिया को पूरा करना होगा. इसके बाद यह नंबर अवैध हो जाएगा.

यहां बता दें कि SBI की ओर से अकसर योनो ऐप के जरिए कैश निकालने के बारे में जानकारी दी जाती है. ऐसे में अगर आप एसबीआई के ग्राहक हैं तो इस ऐप को डाउनलोड कर इस्‍तेमाल शुरू कर दें ताकि आने वाले वक्‍त में ज्‍यादा दिक्‍कतों का सामना न करना पड़े.

KBC: 1 लाख 60 हजार जीतने के बाद इस इमारत को पहचानने में फेल हुए विवेक, मिले बस 10 हजार

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पंजाब के जालंधर के रहने वाले और कर्नाटक के बैंगलोर में बतौर जीएसटी इंस्पेक्टर (GST) काम करने वाले विवेक भगत कौन बनेगा करोड़पति (KBC 11) के 11वें सीजन से बाहर हो गए हैं. वे कर्नाटक की ही एक ऐतिहासिक इमारत को पहचानने में नाकाम रहे. इस सवाल से पहले वे एक लाख 60 हजार रुपये जीत चुके थे. अगर वे इस केबीसी क्व‌िज को यही छोड़ देते उन्हें सारे पैसे मिल जाते. लेकिन उन्होंने गलत जवाब देकर ये सारे पैसे खो दिए. उन्हें महज दस हजार रुपये से ही संतोष करना पड़ा.

उल्लेखनीय है कि केबीसी में अगर कोई कंटेस्टेंट पहले दो पड़ावों तक गलत जवाब देता है तो उसे महज 10 हजार रुपये ही मिलते हैं. अगर वो सवाल का जवाब देने से मना कर दे तो जिस लेवल पर खेल रहा होता है उसमें आखिरी सवाल के लिए जीते पैसे उसे मिल जाते हैं.

चारों लाइफ लाइन इस्तेमाल कर चुके थे विवेक भगत
जीएसटी इंस्पेक्टर विवेक भगत ने महज नौ सवालों के जवाब देने में अपनी चारों लाइफ लाइन के इस्तेमाल कर लिए थे. वे अपनी पूर्व प्रतिभागी चित्रलेखा राठौर की तुलना में काफी कमजोर नजर आ रहे थे.

विवेक भगत के सा‌थ केबीसी 11 में कुल तीन प्रतिभागी बाहर हो गए. पहले प्रतिभागी अनिल महज 10 हजार रुपये के साथ गेम से बाहर गए थे. वे जिम ट्रेमर थे. गुजरात के रहने वाले थे. इसके बाद रायपुर की चित्रलेखा कुल 6.40 लाख रुपये लेकर इस गेम से बाहर हुईं. इसके बाद विवेक भगत. 
कर्नाटक बीजापुर स्थित गोल गुंबज की तस्वीर देखने के बाद विवेक भगत इसे नहीं पहचान पाए. उन्होंने बहुत सोचने के बाद इस इमारत को बीबी का मकबरा बता दिया. लेकिन यह गलत जवाब ‌था.

अगर आपको अपनी पुश्तैनी जमीन की चिंता है तो अब भूल जाएं

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अगर आप नौकरी-पेशा (Service Class) आदमी हैं और आपको अपनी पुश्तैनी जमीन (Ancestral Lands) की चिंता सता रही है तो अब आप खुश हो जाइए. उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) की योगी सरकार ने आपकी यह चिंता दूर कर दी है. अब आप दिल्ली (Delhi), पंजाब (Punjab) या फिर मुंबई (Mumbai) में बैठे-बैठे अपनी जमीन का मालिकाना हक (Owner’s Right) के साथ-साथ और जानकारी (Information) हासिल कर सकते हैं. अब आपको अपनी जमीन का नक्शा, जमीन के कागज सभी ऑनलाइन (Online) ही नजर आ जाएंगे. यहां तक की आप अपनी जमीन के कागजों का प्रिंट आउट (Print Out) भी निकाल सकते हैं.

यूपी सरकार की वेबसाइट के जरिए जानकारी हासिल करें
बीते दिनों ही यूपी सरकार ने एक वेबसाइट शुरू की है, जिसमें सभी जिलों की जमीन के दस्तावेजों का डिजिटलीकरण कर दिया गया है. यूपी सरकार की शुरू की गई इस वेबसाइट UPBHUNAKSHA.GOV.IN पर क्लिक कर आप अपनी जमीन के बारे में पता कर सकते हैं. इसके लिए आपको इस वेबसाइट पर जाना पड़ेगा. जैसे ही वेबसाइट खुलेगी बायीं तरफ राज्य, जिला, तहसील और गांव का नाम लिखा आएगा.

ठीक बायीं तरफ ही लैंड टाइप का ऑप्शन आएगा. इस ऑप्शन में देख पाएंगे कि जो जमीन आप देख रहे हैं वह किस टाइप की है. क्या वह जमीन कृषि योग्य है या बंजर है. आपकी जमीन अभी किसके अधिकार में है. ये सारी जानकारी आपको इस वेबसाइट के जरिए मिल जाएगी.

आप देख सकते हैं कि जमीन का क्षेत्रफल, खातेदार का नाम क्लिक करते ही आ जाएगा. अब यूपी में खेती की जमीन से जुड़ा कुछ काम कराने के लिए राजस्व विभाग का चक्कर नहीं काटना पड़ेगा. लोगों को अक्सर खसरा-खतौनी की जरूरत पड़ती है. बात चाहे जमीन की रजिस्ट्री कराने की हो, किसान क्रेडिट कार्ड बनवाने की हो या किसी अन्य सरकारी योजना का फायदा उठाने की, हर काम के लिए खसरा-खतौनी काम आते हैं.

कुछ वक्त पहले तक इन कागजातों से जुड़ी जानकारी पाने के लिए लोगों को तहसील या फिर पटवारी के पास जाना पड़ता था. इसमें समय और पैसा दोनों खर्च होते थे. अब तकनीक की मदद से ये काम आसान हो गया है. अब इन कागजातों को आसानी से कम्प्यूटर पर देखकर आप अपना समय और पैसा दोनों बचा सकते हैं.

कुल मिलाकर अब किसी भूखंड का नक्शा लेने के लिए अब आम आदमी, किसानों और बाहर नौकरी कर रहे लोगों को तहसील के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे. यूपी शासन के निर्देश पर अब हर जिले के सभी तहसीलों में लैंड रिकॉर्ड ऑनलाइन कर दिया गया है.

मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल गौर का निधन, लंबे समय से थे बीमार

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मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और भाजपा के वरिष्ठ नेता बाबूलाल गौर का लंबी बीमारी के बाद निधन हो गया है. वह 15 दिनों से भोपाल के एक निजी अस्पताल में भर्ती थे. वह 89 साल के थे. वह पिछले कुछ समय से बीमार चल रहे थे और मंगलवार शाम उनकी तबीयत और गंभीर हो गई थी.

बाबूलाल गौर के निधन पर बीजेपी और कांग्रेस सहित अन्य दलों के नेताओं ने भी शोक जताया है. बाबूलाल गौर 23 अगस्त 2004 से 29 नवंबर 2005 तक मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे.गौर पहली बार 1974 में भोपाल दक्षिण विधानसभा क्षेत्र के उपचुनाव में जनता समर्थित उम्मीदवार के रूप में निर्दलीय विधायक चुने गये थे.

गौर का जन्म उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ के नौगीर गांव में दो जून 1930 को हुआ था. वे साल 1946 से ही राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़ गए थे. वे भारतीय मजदूर संघ के संस्थापक सदस्य भी रहे.

अगर रहती है कफ की समस्या, तो इन 5 चीजों को खाने से करें परहेज

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वात और पित्त के साथ शरीर में कफ का संतुलन सही होना जरूरी है। कफ के बढ़ने पर 28 प्रकार के रोग आपको घेर सकते हैं। लेकिन इनसे बचने के लिए आपको ऐसी चीजों से बचना होगा, जो कफ पैदा करती हैं या कफ को बढ़ा सकती हैं। आइए जानते हैं कौन सी चीजें कफ में न खाएं और किन चीजों का सेवन करें –

1 वसायुक्त चीजें – वसायुक्त चीजों का सेवन कफ बढ़ाने का काम करती हैं इसलिए जितना हो सके इनसे बचने की कोशिश करें।

2 दूध – दूध कफ को बढ़ाता है। अगर आपकी कफ प्रकृति है तो आपको दूध का सेवन कम करना चाहिए या फिर

हल्दी के साथ इसका सेवन करें।

3 मांस – कफ बढ़ने पर मांस का सेवन आपके लिए नुकसानदायक हो सकता है, इसलिए कफ होने पर मांस का सेवन करने से बचें और अगर कफ की तासीर हो तो मांस का सेवन कम से कम करें।

4 मक्खन –

मक्खन में वसा अधिक होता है, इसलिए यह कफ बढ़ाने का काम करता है। कफ की समस्या में मक्खन या मक्खन युक्त चीजों का सेवन न करें।

5 पनीर –

पनीर से कफ तो बनता ही है, कई लोगों को पाचन संबंधी समस्या भी हो सकती है क्योंकि कुछ लोगों को पनीर आसानी से नहीं पचता। इसलिए अतिसेवन न करें।

क्या खाएं –

1 सुबह या दिन के भोजन के बाद गुड़ का सेवन फायदेमंद हो सकता है। गुड़ की तासीर गर्म होती है, यह कफ को कम करने के साथ ही पाचन क्रिया को बेहतर बनाता है।2 तुलसी, सौंठ, अदरक और शहद जैसी चीजों का सेवन कफ को कम करने में बहुत फायदेमंद होता है, तो इन्हें किसी भी तरह से डाइट में शामिल करें। 

खाने में करें इन सात ‘सुपर फूड्स’ को शामिल, दूर रहेंगी पेट की सारी बीमारियां

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स्वस्थ रहने का सीधा संबंध पेट से जुड़ा होता है। अगर पेट में किसी तरह की कोई समस्या नही है तो फिर आपको कोई बीमारी भी नही होगी। लेकिन समस्या तो यह है कि हम पाचन शक्ति को सही नहीं रख पाते हैं और बीमार पड़ जाते हैं। लेकिन हमारे आसपास खाने की ऐसी चीजें मौजूद हैं कि यदि इनका सेवन किया जाए तो पाचन को दुरुस्त रखा जा सकता है। तो आइए जाने वो कौन से खाद्य पदार्थ हैं जिनका सेवन करने से पाचन क्रिया सही रखी जा सकती है।

ग्रीन टी

मेटाबॉलिज्म सिस्टम सही रखना है तो ग्रीन टी का सेवन बहुत लाभकारी है। मेटाबॉलिज्म का सीधा संबंध पेट की चयापचय क्रिया से होता है। ग्रीन टी में कैटेचिन पोलीफेनॉल्स पाई जाती है जो इसका मुख्य कारक है।

अंडे का सफेद हिस्सा पेट की पाचन शक्ति सही रखनी है तो अंडे का सफेद भाग खाना चाहिए। इसमें अमीनो एसिड होता है जो भोजन के पचने में मददगार है। 

नींबू नींबू के रस का सेवन सुबह के समय जरूर करना चाहिए क्योंकि यह लीवर और शरीर से विषाक्त पदार्थों को निकालने में मदद करता है। 

अदरक

इसका स्वाद थोड़ा सा तेज होता है इसलिए बहुत से लोग अदरक का सेवन नहीं करते हैं। लेकिन इसके सेवन से पाचन की क्रिया बीस प्रतिशत तक बढ़ सकती है और यह माहवारी के समय होने वाले दर्द में भी राहत दिलाती है।

लहसुन भोजन में लहसुन को जरूर शामिल करना चाहिए। विटामिन बी6 और विटामिन सी से भरपूर लहसुन पेट के लिए भी फायदेमंद है। इसको खाने से मुंहासों, दाग धब्बों से तो छुटकारा मिलता ही है साथ ही यह कैंसर जैसी भयानक बीमारी से भी बचाता है।

ब्रोकोली कम कैलोरी वाली ये सब्जी चयापचय की क्रिया को सही रखती है। इसमें मौजूद कैल्शियम और विटामिन के शरीर के लिए बहुत फायदेमंद होता है। इसके अलावा ब्रोकोली में ग्लूकोसिनोलेट्स और विटामिन सी होता है जो खाने को जल्दी पचाने में मदद करता है। 

पालक हरी सब्जियों का सेवन तो हमेशा ही सेहत के लिए अच्छा होता है। इसमें भी पालक तो गुणों का भंडार है। आयरन से भरपूर इस सब्जी को खाने से आंखों की रोशनी बढ़ती है और यह हड्डियों को भी मजबूत बनाता है।

जानिए कौन है ‘प्रिंस’ हबीबुद्दीन तूसी, जो कर रहा राम मंदिर बनाने की हिमायत

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आखिरी मुगल शासक बहादुर शाह जफर के वंशज होने का दावा करने वाले प्रिंस हबीबुद्दीन तूसी ने अयोध्‍या में राम मंदिर को लेकर बड़ी बात कही है।

रविवार को हैदराबाद में उन्‍होंने कहा कि अगर अयोध्‍या में राम मंदिर बना तो वह उसके लिए सोने की ईंट देंगे। प्रिंस हबीबुद्दीन तूसी ने यह भी कहा कि वह चाहते हैं कि सुप्रीम कोर्ट राम जन्‍मभूमि की जमीन उन्‍हें सौंप दे।

उन्‍होंने दावा किया कि वह ही इस भूमि के आधिकारिक हकदार हैं। क्‍योंकि वह पहले मुगल शासक बाबर के वंशज हैं, जिसने बाबरी मस्जिद बनवाई थी। प्रिंस हबीबुद्दीन तूसी ने कहा कि कि अगर सुप्रीम कोर्ट उन्‍हें राम जन्‍मभूमि सौंप देता है तो वह पूरी जमीन राम मंदिर निर्माण के लिए दान कर देंगे। उन्‍होंने कहा कि वह लोगों की भावनाओं का सम्‍मान करते हैं और यह मानते हैं कि जहां पर अयोध्‍या की उस जगह पर पहले राम मंदिर ही था।

इससे पहले प्रिंस याकूब मीडिया के सामने आए थे तो उन्होंने कहा था कि 1857 में अंग्रेजों से जान बचाकर भागे दिल्ली के शासक बहादुरशाह जफर के वंशज 105 सालों तक भूमिगत रहे। प्रिंस याकूब हबीबुद्दीन तुसी ने बताया कि अंग्रेज तो जफर के वंश को ही खत्म करना चाहते थे। इसके लिए उन्होंने जफर के 48 बच्चों की हत्या कर दी। लेकिन जफर की 49वीं संतान मिर्जा क्यूएश ने दिल्ली से काठमांडू भागकर जान बचाई थी।

तुसी ने इससे पहले ताजमहल को भी अपनी संपत्ति बताया था बल्कि बाबर के वंशज होने का दावा करते हुए डीएनए रिपोर्ट की कॉपी भी सौंपी अदालत को सौंपी थी जिसमें उन्हें मुगलों का असली वारिस करार दिया गया था। हालांकि डीएनए रिपोर्ट का मिलान किसके साथ हुआ है और वह सही है या नहीं इसकी कोई पुष्टि नहीं हुई है।

जन्माष्टमी 2019: त्यौंहार और रिश्तों में प्यार की मिठास को बढ़ाने के लिए घर में यूं बनाएं ‘नारियल की बर्फी’

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कृष्ण जन्माष्टमी का त्यौंहार बेहद करीब है। इस खास त्यौहार को और भी मीठा और यादगार बनाने के लिए घर में ही ‘नारियल की बर्फी’ बना सकते हैं जो भोग में भी इस्तेमाल की जा सकती हैं और अपने प्रियों को खिलाकर आप उनका मुंह मीठा कर सकते है…

आवश्यक सामग्री: नारियल (कद्दूकस किया हुआ) : 250 gm
चीनी : 200 gm
दूध : 1/2 कप
देसी घी : 1 छोटा स्पून
काजू : 7-8 कटे हुए
बादाम : 7-8 कटे हुए
इलाइची पाउडर : 1/2 छोटा स्पून


बनाने की विधि: पहले सारी सामग्री निकाल ले, नारियल को बारीक कद्दूकस कर ले या फिर बाजार वाला नारियल का बुरादा इस्तेमाल कर ले और काजू बादाम को छोटा छोटा काट ले। अब एक बड़े प्याले में चीनी ले।

चीनी में दूध डालकर मिला ले। अब इस में नारियल डाले और अच्छे से मिलाये।

अब कड़ाई को गैस पर रखे और उस में तैयार मिश्रण डाल दे। कुछ देर चलाते रहे, जब चीनी पिघलने लगे तब गैस को धीमा कर दे और पकने दे जब तक की मिश्रण कड़ाई न छोड़ने लगे। मिश्रण को बीच बीच में चलाते रहे ताकि ये जले नहीं।

अब इस में इलाइची पाउडर और कटे हुए काजू बादाम डाले और मिलाये।

जब मिश्रण कड़ाई छोड़ने लगे और काफी गाड़ा हो जाए तो समझ लीजिए की ये जमने लायक हो गया है। अब एक थाली में चारों तरफ अच्छे से घी लगा दे। इस मिश्रण को तैयार होने में 15-20 मिनट लगेगे।

अब मिश्रण को इस थाली में डाले और स्पून से फैला दे। जब हल्का सा ठंडा हो जाए तब इसे बर्फी के आकार में काट ले। काट कर इसे थाली में ही छोड़ दे जब तक की पूरी तरह ठंडा न हो जाए। 1 घंटे में आपकी बर्फी बिलकुल जम जायेगी।

लीजिए आपकी नारियल की बर्फी तैयार है। इसे निकाले और मजे से खाए। जो बर्फी बच जाए उसे डिब्बे में रख कर फ्रिज में रख दे। पर ध्यान रहे नारियल की बर्फी ज्यादा दिन तक नहीं चलती है। इसलिए इसे 2-3 हफ्तों में खाले।