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आपकी सारी बीमारियों को जड़ से सफा कर सकता है एक छोटा सा प्याज

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प्याज़ एक वनस्पति है जिसका कन्द सब्ज़ी के रूप में प्रयोग किया जाता है। भारत में महाराष्ट्र में प्याज़ की खेती सबसे ज्यादा होती है। यहाँ साल मे दो बार प्याज़ की फ़सल होती है – एक नवम्बर में और दूसरी मई के महीने के क़रीब होती है। प्याज़ भारत से कई देशों में निर्यात होता है, जैसे कि नेपाल, पाकिस्तान, श्रीलंका, बांग्लादेश, इत्यादि। प्याज़ की फ़सल कर्नाटक, गुजरात, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, बिहार, पश्चिम बंगाल मध्य प्रदेश जैसी जगहों पर अलग-अलग समय पर तैयार होती है।
प्याज के फायदे:-
यह कच्ची प्याज या पका हुआ प्याज है या नहीं, वे लाभ के साथ भरी हुई हैं। और जब भी आप चाहते हैं – दिन या रात आप उन्हें खा सकते हैं सब्जियां विटामिन सी और बी 6, फोलेट, लोहा और पोटेशियम का उत्कृष्ट स्रोत हैं। प्याज भी मैंगनीज में समृद्ध हैं जो ठंड और फ्लू से सुरक्षा प्रदान करते हैं। प्याज में क्वार्सटिन भी होता है, एक और एंटीऑक्सीडेंट जो सूजन से लड़ता है। दिलचस्प बात यह है कि, सूप में पकने के प्याज अपने क्वैकेटिन मूल्य को कम नहीं करते बल्कि केवल सब्जी से सूप के शक्ल में एंटीऑक्सीडेंट को स्थानांतरित करते हैं।
एलियम और एलिल डिस्लाफ़ाइड, प्याज में दो फाइटोकेमिकल्स, एलिकिन पोस्ट इंजेक्शन में परिवर्तित होते हैं। एलिकिन, कुछ अध्ययनों के अनुसार, कैंसर और मधुमेह से लड़ने के गुण होते हैं। यह रक्त वाहिकाओं की तंगता और रक्तचाप के निम्न स्तर को कम कर सकता है। यहां तक ​​कि अन्य प्याज प्रकार जैसे chives, लीक, और उथले के समान लाभ होते हैं।
यहां तक ​​कि प्याज से आवश्यक तेलों में भी लाभ होता है तेल एंटीसेप्टिक और जीवाणुरोधी गुण हैं। प्याज, जब लहसुन के साथ मिलकर, अधिक लाभ हो सकता है दोनों, एक साथ, प्रभावी एंटिडिएंटेंट्स, दर्दनाशक,एंटीकायगुलंट्स और विरोधी भड़काऊ होने के लिए जाना जाता है।और हालांकि प्याज सीधे वजन घटाने को प्रेरित नहीं कर सकते हैं, उन्हें उच्च-कैलोरी खाद्य पदार्थों के लिए प्रतिस्थापन के लिए कुछ योगदान कर सकते हैं

मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल में पहले से ज्यादा बढ़ीं कांग्रेस की मुश्किलें

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दस दिन पहले हां और ना के बीच आखिरकार कांग्रेस अध्यक्ष पद से राहुल गांधी के इस्तीफे के बाद यूपीए अध्यक्ष सोनिया गांधी को कांग्रेस का अंतरिम अध्यक्ष बनाया गया. दस दिन का समय कोई ज्यादा नहीं होता लेकिन कांग्रेस पार्टी के भीतर और बाहर दोनों जगह इस बात की चर्चा है कि कुछ भी बदला नहीं है. हालांकि इस सबके बीच सवाल यही है कि सोनिया गांधी अंतरिम अध्यक्ष हैं और इसके बाद कौन? चर्चा सिर्फ यही नहीं, एक और चर्चा मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल की भी हो रही है और कहा जा रहा है कि दूसरे कार्यकाल में सरकार कहीं अधिक मजबूत है. तो वहीं कांग्रेस के लिए तुलना इस प्रकार हो रही है कि मोदी सरकार के पहले कार्यकाल से कहीं बुरे वक्त में कांग्रेस मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल में पहुंच गई है.

कौन होगा अगला अध्यक्ष?

सोनिया गांधी को साल 1998 में कांग्रेस की कमान सौंपी गई थी और वह 2017 तक अपने पहले कार्यकाल में अध्यक्ष रहीं. इस दौरान कांग्रेस ने 2 बार लोकसभा चुनाव जीता और कई राज्यों में अपनी सरकार कायम की. सोनिया के बाद राहुल गांधी का अध्यक्ष बनना तय था लेकिन राहुल गांधी के इस्तीफे के बाद कांग्रेस को कोई और नया चेहरा ही नहीं मिल पाया. करीब महीने भर तक पार्टी बगैर अध्यक्ष के चलती रही और आखिरकार फिर से सोनिया गांधी को ही कांग्रेस का अंतरिम अध्यक्ष नियुक्त कर दिया गया. उसकी पड़ी वजह थी कि कांग्रेस पार्टी गांधी परिवार की धुरी के आस-पास ही घूमती है और परिवार से इतर अगर कोई अध्यक्ष बनता तो कांग्रेस में टूट का खतरा पैदा होता.

राहुल गांधी की अब फिर से कांग्रेस की कमान संभालने को कब तैयार होंगे इस पर कुछ भी साफ नहीं है. सोनिया गांधी के बाद गांधी परिवार से बाहर का कोई शख्स पार्टी की कमान संभालेगा, इसकी उम्मीद भी कम है. ऐसे में पार्टी के सामने चुनौती गंभीर है क्योंकि सोनिया गांधी पहले ही स्वास्थ्य कारणों से जूझ रही हैं साथ ही उनकी बढ़ती उम्र भी सक्रियता के आड़े आ सकती है. अगर उनके बाद अध्यक्ष पद का नया विकल्प नहीं तलाशा गया तो पार्टी बिखर सकती है.

राज्यों में कैसे मिलेगी जीत

साल 2014 में मिली शर्मनाक हार के बाद कांग्रेस ने 3 राज्यों के विधानसभा चुनाव में जीत दर्ज कर जनता में भरोसा बढ़ाती नजर आई लेकिन एक साल बाद फिर 2019 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस का वही हश्र हुआ. साल 2018 में कांग्रेस ने बीजेपी से मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ जैसे राज्य भले ही छीने लेकिन 2019 में हार के साथ ही कर्नाटक उसके हाथ से निकल गया. कांग्रेस के विधायकों की बगावत से दक्षिण के इस राज्य में फिर से कमल खिल गया है.

आने वाले एक साल में दिल्ली, हरियाणा और महाराष्ट्र जैसे राज्यों में विधानसभा चुनाव होने हैं. तीनों ही राज्यों में पार्टी नेतृत्व के गंभीर संकट से जूझ रही है. हरियाणा में मौजूदा खट्टर सरकार से मुकाबले के लिए पार्टी के चेहरा अभी तय नहीं है. पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र हुड्डा कांग्रेस आलाकमान के सामने खुद के मुख्यमंत्री पद का दावेदार घोषित कराने में जुटी है और इसके लिए उन्होंने ताल भी ठोंक दी है.

दूसरी ओर दिल्ली में पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित के निधन के बाद कांग्रेस पूरी तरह नेतृत्व विहीन हो चुकी है. यहां भी उसके पास बड़े बहुमत वाली आम आदमी पार्टी और 7 सांसदों वाले बीजेपी से पार पाना होगा. महाराष्ट्र में बीजेपी और शिवसेना के गठबंधन के सामने कांग्रेस-एनसीपी का साथ काफी पिछड़ चुका है. महाराष्ट्र में बीजेपी के युवा मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के सामने कांग्रेस किसके चेहरे पर दांव लगाएगी यह कह पाना काफी मुश्किल है.

सीटें बढ़ीं, साथ में चुनौती भी…

इस लोकसभा चुनाव में पार्टी के सांसदों की संख्या 44 से बढ़कर 52 जरूर हुई पर कांग्रेस के दिग्गज नेताओं को हार का मुंह देखना पड़ा. यहां तक कि पार्टी के तत्कालीन अध्यक्ष राहुल गांधी अपनी परंपरागत सीट अमेठी से हाथ धो बैठे. लोकसभा में कांग्रेस दल के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे से लेकर यूपीए सरकार में मंत्री रहे दिग्गज कांग्रेसियों को बीजेपी की आंधी में तिनका भी नसीब नहीं हुआ.

लोकसभा में 303 सांसदों के साथ बीजेपी ज्यादा मजबूत होकर सत्ता में लगातार दूसरी बार वापस आई जहां फिलहाल एनडीए के पास कांग्रेस से करीब 7 गुना अधिक सांसद हैं. वहीं राज्यसभा में अगले साल तक बीजेपी बहुमत हासिल कर लेगी और उच्च सदन में कांग्रेस सिकुड़ती चली जाएगी.

एक ओर मोदी सरकार अपने दूसरे कार्यकाल में प्रचंड बहुमत के बल पर कड़े और बड़े फैसले ले रही है तो दूसरी ओर कांग्रेस विपक्षी खेमे को भी एक साथ लाने में विफल रही. राज्यसभा में जम्मू कश्मीर पुनर्गठन बिल और तीन तलाक विधेयक पर वोटिंग के दौरान कांग्रेस गैर एनडीए वाले दलों को भी सरकार के खिलाफ नहीं खड़ा कर सकी. इसका नतीजा हुआ कि मोदी सरकार ने बहुप्रतिक्षित तीन तलाक बिल के अलावा जम्मू कश्मीर से धारा 370 हटाने का ऐतिहासिक फैसला लेकर अपने दृढ़निश्चिय को प्रदर्शित कर दिया है. आने वाले विधानसभा चुनावों में बीजेपी इसे भुनाने की पूरी कोशिश करेगी जो कांग्रेस के लिए बड़ी चुनौती खड़ी कर सकते हैं.

जब बाहर आई अंदर की कलह

संगठन के तौर पर कांग्रेस फिलहाल एकजुट भले ही दिख रही हो लेकिन नेताओं के बयानों से साफ है कि पार्टी के कई बड़े नेता पार्टी की हर लाइन से सहमत नहीं हैं. मसलन कश्मीर से धारा 370 हटाने पर कांग्रेस में 2 फाड़ खुलेआम देखने को मिला. राहुल गांधी के करीबी ज्योतिरादित्य सिंधिया से लेकर पूर्व संगठन महासचिव जनार्दन द्विवेदी और युवा कांग्रेसी दीपेंद्र हुड्डा ने मोदी सरकार के इस फैसले का समर्थन कर दिया जबकि कांग्रेस मुखर होकर इस फैसले के खिलाफ खड़ी है. यही नहीं इसी फैसले के खिलाफ जाकर राज्यसभा में पार्टी के चीफ व्हिप भुवनेश्वर कलिता ने तो कांग्रेस से अपना इस्तीफा तक दे दिया.

मोदी सरकार ने दूसरे कार्यकाल की शुरुआत से ही एक के बाद एक गोल दागकर कांग्रेस के बैकफुट पर खड़ा कर दिया है. कांग्रेस लोकसभा चुनाव की हार से उबर पाती उससे पहले ही पार्टी कई नई चुनौतियों से जूझ रही है. आने वाले वक्त में यह मुश्किलें और बढ़ेंगी क्योंकि भारी बहुमत से साथ जीतकर आई बीजेपी अपने कड़े फैसलों की बदौलत कांग्रेस पर और भी भारी पड़ने वाली है.

बड़ी ख़बर : सोनिया गांधी का संकेत , 22 अगस्त के बाद मिल सकता है दिल्ली को नया अध्यक्ष

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एक माह से बिना दिल्ली प्रदेश कांग्रेस कमेटी (Delhi Pradesh Congress Committee) अध्यक्ष के ही लटक-लटककर चल रही प्रदेश कांग्रेस को 22 अगस्त के बाद नया नेतृत्व मिल सकता है। इस आशय के संकेत भी सीधे पार्टी आलाकमान सोनिया गांधी ने स्वयं दिए हैं। अभी तक प्रदेश प्रभारी की कमान संभाल रहे पीसी चाको से उन्होंने इस दिशा में कुछ नामों पर विचार करने और पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की 75वीं जयंती मनाने के बाद उन्हें इसके लिए सुझाव देने को कहा है।

दरअसल, सोमवार को पीसी चाको और प्रदेश के तीनों कार्यकारी अध्यक्षों हारून यूसुफ, देवेंद्र यादव और राजेश लिलोठिया ने अध्यक्ष चुने जाने के बाद सोनिया गांधी से उनके निवास पर शिष्टाचार भेंट की। इस मुलाकात के दौरान दो दिन बाद यानी 22 अगस्त को इंदिरा गांधी इंडोर स्टेडियम में राजीव गांधी की जयंती पर होने वाले जन्मजयंती उत्सव की तैयारियों पर भी चर्चा की गई। कार्यकारी अध्यक्षों ने उन्हें बताया कि किस स्तर पर क्या कुछ व्यवस्था की जा रही है।

सूत्रों के मुताबिक इस मुलाकात के बाद पीसी चाको ने सोनिया गांधी से अलग से भी बातचीत की। इस दौरान उन्होंने दिल्ली कांग्रेस की स्थिति पर संक्षेप में प्रकाश डाला और कहा कि विधानसभा चुनाव सिर पर हैं। अगर अध्यक्ष का फैसला जल्द कर दिया जाए पार्टी मजबूती के साथ चुनाव की तैयारियों में जुट सकती है। इस पर सोनिया ने पीसी चाको से कहा कि आप इतने सालों से दिल्ली के प्रभारी हैं, अनुभव भी रखते हैं, कुछ नामों पर विचार करें एवं 22 तारीख का कार्यक्रम हो जाने के बाद मुझे सुझाव दें और बात करें।

मालूम हो कि प्रदेश कांग्रेस की कमान संभाल रहीं शीला दीक्षित का 20 जुलाई को निधन हो गया था। तभी से यह पद रिक्त है। आलाकमान को शीला के कद का पार्टी में ऐसा कोई नेता नजर नहीं आ रहा, जिसकी सर्वस्वीकार्यता हो और जो विधानसभा चुनाव में मजबूती के साथ कांग्रेस का झंडा बुलंद कर सके। हालांकि वरिष्ठता के क्रम में अध्यक्ष पद के लिए कई नाम चल रहे हैं, लेकिन हर किसी के साथ विवाद भी जुड़े हुए हैं। कयास यह भी लगाया जा रहा है कि दिल्ली से बाहर के किसी बड़े नाम वाले नेता को यह जिम्मेदारी सौंप दी जाए, लेकिन उसमें भी बगावत की आशंका ज्यादा है।

प्रधानमंत्री ने किया उद्धाटन, इन सांसदों को ही मिलेंगे अत्याधुनिक सुविधाओं वाले नए मकान

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सांसदों के लिए अत्याधुनिक सुविधाओं से लेस नए मकान (डुप्लेक्स) बनाए गए हैं, लेकिन ये केवल उन्हीं को मिलेंगे जो कम से कम चार बार सांसद रह चुके हैं। ये नए मकान लुटियन दिल्ली के नॉर्थ और साउथ एवेन्यू में पुराने मकान तोड़कर बनाए गए हैं। जानकारी के मुताबिक ये निर्धारित समय से छह महीने पहले बन गए हैं, जिनकी लागत 12 करोड़ रुपये कम आई है। 17वीं लोकसभा के सांसदों के लिए तैयार इन मकानों का सोमवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उद्घाटन किया है।

क्या हैं सुविधाएं?

सासंदों के लिए तैयार किए गए स्टेट ऑफ द आर्ट इन डुप्लेक्स में सीसीटीवी, सीवरेज ट्रीटमेंट योजना, रेन वाटर हार्वेस्टिंग, जल संरक्षण, सोलर स्ट्रीट लाइट जैसी सुविधाएं हैं। इसके अलावा हर डुप्लेक्स के बाहर एक ड्राइंग रूम, डाइनिंग रूम, बाथरूम के साथ-साथ चार बेड रूम, किचन और पूजा रूम मौजूद हैं।

पहले 64 फ्लैट्स थेइस स्थान पर पहले 64 फ्लैट्स थे, जिन्हें तोड़कर 36 डुप्लेक्स बनाए गए हैं। इनमें से चार राज्यसभा सांसदों और 32 लोकसभा सांसदों के लिए हैं। बताया जा रहा है कि आने वाले समय में नॉर्थ और साउथ एवेन्यू में सभी पुराने फ्लैट्स तोड़कर 264 नए डुप्लेक्स बनाए जाएंगे। बता दें ये टाइप-7 कैटेगरी के हैं और हाउसिंग कमेटी के नियम के मुताबिक इसके पात्र चार या उससे अधिक बार के सांसद ही होंगे। हालांकि तीन बार के वो सांसद भी इसके पात्र हो सकते हैं, जो अपने राज्य में मंत्री रहे हैं। अभी तक 303 नए सांसद ऐसे हैं, जिन्हें मकान आवंटित हो चुके हैं। वहीं नए पुराने सांसदों को मिलाकर कुल 384 को मकान मिल चुका है। आने वाले दो दिन में 20 सांसदों को औपचारिक पत्र मिलेगा और अगले स्पताह तक बाकी बचे सांसदों को भी मकान अलॉट किए जाएंगे। वहीं कुछ सांसदों को मकान जल्द खाली करने को कहा गया है।

एक हफ्ते में खाली करने होंगे बंगले

पूर्व सांसदों को एक सप्ताह में सरकारी आवास खाली करने का लोकसभा की एक समिति ने अल्टिमेटम दिया है। अगर वे बंगलों को खाली नहीं करते हैं तो वहां बिजली, पानी और गैस का कनेक्शन काट दिया जाएगा। बता दें लोकसभा के ऐसे पूर्व सांसदों की संख्या 200 से भी अधिक है। जिन्होंने अभी तक सरकारी बंगलों को खाली नहीं किया है।

80 करोड़ रुपये आई लागत

इन मकानों को बनाने का टेंडर 92 करोड़ रुपये का था, जिसकी लागत 80 करोड़ रुपये ही आई है। इसका कुल क्षेत्रफल 418 स्क्वेयर मीटर है। अप्रैल 2017 में शुरू हुआ ये काम दिसंबर, 2019 में पूरा होना था। लेकिन ये तय समय से छह महीने पहले जून, 2019 में ही पूरा हो गया।

इस घरेलू उपाय से दूर करे गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल कैंसर को

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लोगों को अनियमित जीवनशैली से होने वाले रोगों जैसे डायबिटीज, हाई ब्लडप्रेशरवहार्ट फेल जैसी बीमारियों के बारे में पता होगा, लेकिन बहुत से लोगों ने गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल कैंसर (पेट की आंतों या पेट के कैंसर) के बारे में नहीं सुना होगा.नयीतकनीकों से इसकाइलाजसरलहो गया है. गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल यानी जीआई कैंसरहिंदुस्तानमें चौथा सबसे अधिक लोगों को होने वाला कैंसर बन गया है.यहस्त्रियोंकी तुलना में पुरुषों को ज्यादा प्रभावित करता है.यह साइलेंटकातिलके रूप में धीरे-धीरे बढ़ता जाता हैवशरीर के आंतरिक अंगों जैसे बड़ी आंत, मलाशय, भोजन नली, पेट, गुर्दे, पित्ताशय की थैली, पैनक्रियाज या पाचक ग्रंथि, छोटी आंत, अपेंडिक्सवगुदा को प्रभावित करता है.इससे पीड़ित लोगों कोप्रारम्भमें पेट दर्द, अपच रहना, मलोत्सर्ग की आदत में गड़बड़ी आदि का सामना करना पड़ता है.इन्हें नजरअंदाज करने से स्थिति गंभीर हो जाती है.

जागरूकता है जरूरी

सबसे बड़ीआवश्यकतालोगों में इसके प्रति जागरूकता उत्पन्न करनावउन्हें स्वस्थ पाचन तंत्र के महत्व को समझाना है.अभी जीआई कैंसर केविषय मेंलोगों में जागरूकता की कमी है.मरीजों की देखभाल का समूचा ईकोसिस्टम बनाने कीआवश्यकताहै.इस ईकोसिस्टम के तहत मरीजों की जल्द से जल्द जांच, आधुनिकउपायोंसे मरीजों काउपचारवउनके दर्द को कम करने वाली बेहतर देखभाल को प्रोत्साहन देना चाहिए.

जीवनशैली मेंपरिवर्तनजरूरी

रोग के प्रारंभिक लक्षणों को नियंत्रित करने के लिएचिकित्सकजीवनशैली मेंपरिवर्तनकी सलाह देते हैं.इसके तहत पोषक आहार लेना, व्यायाम करना आदि शामिल हैं.इसमें मरीजों की समय सेजाँचको कतई नजरअंदाज नहीं किया जा सकता.

समय परजाँचसेठीकउपचार

एक मरीज के तौर पर लक्षणों को गंभीरता से लेना चाहिएवगैस्ट्रोएंट्रोलॉजिस्ट को समय पर दिखाना चाहिए.जाँचसुविधाओं में फीकल अकल्ट ब्लड टेस्ट, नॉन-इनवेसिव विधियां जैसे पेट की अल्ट्रासोनोग्राफी, सीटी स्कैनवएमआरआई शामिल हैं.इससेइलाजबहुत ज्यादासरलहो जाता है.

जांच के नए-नए तरीके

ये जीआई कैंसर रोग की स्थितिवलक्षणों के आधार परभिन्न-भिन्नहो सकते हैं.इनमें अंतर करने के लिएवकैंसर के खास प्रकार का पता लगाने के लिए मरीजों की जल्द से जल्दजाँचकरना बेहद आवश्यक है.कोलनगियोस्कोपी की मदद सेचिकित्सकपित्ताशय की थैली को देख सकते हैं.इससे उन्हें खास तरह के कैंसर का पता लगाने में मदद मिलती है.इससेइलाजबहुत ज्यादासरलहो जाता है.

कारण है हैरान कर देने वाला, दसवीं में बेटा हुआ फेल तो बाप ने बंटवाई मिठाई और निकाला जुलूस

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आज के समय में पढ़ाई लिखाई को लेकर अत्पयधिक प्हरतिस्लेपर्धा हो चुकी है | बच्चे आजकल अपनों हमजोली में खेलने कूदने की अपेक्षा दिन भर पढ़ाई में लगे रहते हैं और माता पिता की उम्मीदें बच्चों से इतनी ज्यादा बढ़ चुकी हैं कि उनका बचपन कहीं खोता जा रहा है |
बच्चे का रुझान पढ़ाई लिखाई के अलावा किसी अन्य क्षेत्र में होता है तो वह पढ़ाई में अच्छा प्रदर्शन कर्ण नहीं पाता और दबाव में कई बार अनुचित कदम भी उठा लेता है |

लेकिन आज हम आपको एक ऐसी पिता के बारे में बताने जा रहे हैं जिसने आज के समाज में एक मिसाल पेश की है | मध्य प्रदेश के रहने वाले इस पिता की सोच समाज से अलग है | सरस्वती शिशु मंदिर में पढने वाला आशु व्यास दसवीं की परीक्षा में 6 में से 4 विषयों में फेल हो गया था | घर पहुँचने पर वह बेहद परेशान नज़र आ रहा था | पिता ने अपने बेटे को देखकर तुरंत समझ गया और उसको डांटने मारने की अपेक्षा उसके परीक्षा देने परही पूरे मोहल्ले में मिठाई बटवाई, जलूस निकलवाया और खूब आतिशबाजी की | जब आशु के चेहरे पर से तनाव खत्म हो गया तो पिता ने चैन की सांस ली |

काफी समझदार होते हैं गधे, याददाश्त होती है तेज़, जानें अन्य अनजाने तथ्य

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गधा, घोड़ा परिवार का सबसे छोटा सदस्य है. वैसे दुनिया में गधे ऐसा माना जाता है जिसमें समझदारी नहीं होती. इसलिए इसे गधा कहा जाता है. आपको बता दें, यह अफ्रीका और मध्य पूर्व में अफ्रीकी जंगली गधे से 5000 साल पहले अस्तित्व में आया था. गरीब देशों में गधे को एक काम करने वाले जानवर के रूप में प्रयोग किया जाता है. दुनिया में 41 मिलियन गधों में से 11 लाख केवल चीन में पाए जा सकते हैं. ये गधे खेतों के अलावा, मेक्सिको में जंगली और संयुक्त राज्य अमेरिका के दक्षिणी हिस्सों में भी पाए जाते हैं. आज हम इनके ही बारे में कुछ रोचक तथ्य बताने जा रहे हैं.

1. क्या आपको पता था कि गधे के पास श्रेष्ठ स्मृति होती है? वे 25 साल पहले मिले किसी अन्य स्थान या अन्य गधे को याद रखने में सक्षम होते हैं.

2. कोयोट्स और भेड़िये के खिलाफ पशुधन की रक्षा के लिए गधे का उपयोग किया जा सकता है. वे सहजता से हमला करते हैं, काटने और लात मारकर और अगर उन्हें मौका मिलता है तो वे उन्हें मार भी देंगे.

3. गधे ऊंचाई में 31 से 63 इंच तक पहुंच सकते है और 180 से 1.060 पाउंड वजन तक पहुंच सकते है.

4. क्रिसीपस नामक एक ग्रीक दार्शनिक को अपने गधे को शराब पीने और अंजीर खाने के कारण हंसी से मृत्यु हो गई थी.

5. यदि कोई गधा किसी काम को असुरक्षित मानता है तो वह ऐसी किसी गतिविधि में कभी शामिल नहीं होगा.

6. साल 1896 ओलंपिक में पहला मैराथन जीतने के बाद, स्पाइडरडन लुइस को ग्रीस के राजा द्वारा उन्हें जो कुछ भी चाहिए वह पेश किया गया था. लेकिन उसने अपने खनिज जल व्यापार के साथ उसकी मदद करने के लिए एक गधा गाड़ी मांगी.

7. उचित रखरखाव और देखभाल के साथ, एक गधा 40 से अधिक वर्षों तक जीवित रह सकता है.

8. गधा एक शाकाहारी जानवर है. इसका आहार घास और अनाज पर आधारित है. कई अन्य जानवरों के विपरीत, गधे बहुत कठिन, शुष्क पौधों से नमी निकाल सकते हैं.

9. गधे की शक्ति भी होती है, जो अश्वशक्ति का एक-तिहाई है.

10. गधे प्रकृति पशुसमूह जानवर हैं. वे समूहों में रहना पसंद करते हैं लेकिन एक गधा भी वास्तव में बकरियों के समूह के साथ खुशी से रह सकता है.

11. गधे में गर्भावस्था लगभग 11 महीने तक चलती है और एकल बच्चे (फोयल) के साथ समाप्त होती है.

12. किसी अन्य प्रजाति के दूध की तुलना में एक गधे का दूध मानव दूध की तरह अधिक समान होता है.

13. जब सभी इलाकों में यात्रा करने की बात आती है, तो गधे घोड़ों की तुलना में कहीं बेहतर होते हैं. वास्तव में, गधे को सभी इलाके के जानवर माना जाता है.

14. गधे के दूध में गाय के दूध की तुलना में अधिक चीनी और प्रोटीन और कम वसा होता है. इसका इस्तेमाल अतीत में तपेदिक बच्चों, बीमार बच्चों और तपेदिक से निदान लोगों के इलाज में किया जाता था.

15. एक गधा उचित रेगिस्तान स्थितियों में 60 मील की दूरी से एक और अन्य गधे की आवाज सुनने में सक्षम होते है. यह उनके बड़े कानों के कारण संभव है.

16. ज़ेबरा और गधे के बीच एक क्रॉस को ज़ोनकी, ज़ेबोनकी, ज़ेडोनक, या ज़ेबैडोनक कहा जा सकता है.

17. घोड़ों की तुलना में, गधे अपनी सोच सुनिश्चित करने के लिए स्वतंत्र सोच और निर्णय लेने में सक्षम होते हैं.

18 गधे बारिश से नफरत करते हैं. उनका बालों का कोट जलरोधक नहीं होता है और लंबी अवधि के लिए बारिश में रहना वास्तव में उनके स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचाता है.

राजीव गांधी की 75वीं जयंती: सोनिया-मनमोहन सिंह ने दी श्रद्धांजलि,PM मोदी ने भी किया याद

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कांग्रेस की अध्यक्ष सोनिया गांधी, पूर्व राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी तथा पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह सहित कई नेताओं ने पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की 75वीं जयंती के मौके पर मंगलवार को उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। सोनिया गांधी, मुखर्जी और डॉ. सिंह सुबह में राजीव गांधी की समाधी स्थल वीर भूमि गए और उनकी समाधी पर पुष्प अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी। राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा ने भी अपने पिता राजीव गांधी को श्रद्धांजलि अर्पित की। वहीं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की जयंती के मौके पर उन्हें याद किया।

मोदी ने ट्वीट किया कि हमारे पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की जयंती के मौके पर उन्हें नमन।वरिष्ठ कांग्रेस नेता गुलाम नवी आजाद, हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा तथा अहमद पटेल ने भी राजीव गांधी को श्रद्धांजलि अर्पित की। इस मौके पर कांग्रेस ने अपने ट्विटर अकाउंट पर लिखा कि भारत की ताकत एकता और विविधता में निहित है।

जब हम राजीव गांधी को उनकी 75वीं जयंती के मौके पर याद कर रहे हैं, तो हमें यह अवश्य याद रखना चाहिए कि उन्हें शब्द आज भी अधिक प्रासंगिक हैं। हमें कभी भी सांप्रदायिक उत्तेजना को हमारी एकता के बंधन को तोड़ने की अनुमति नहीं देनी चाहिए। उल्लेखनीय राजीव गांधी की आज 75वीं जयंती है। उनका जन्म 20 अगस्त 1942 को बाम्बे (अब मुंबई) में हुआ था।

बिग बी मां के साथ लेने पहुंचे थे एयरपोर्ट, साड़ी पहन पहली बार भारत आई थीं राजीव गांधी की दुल्हन

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राजीव गांधी की शादी करवाने में बच्चन परिवार ने खास भूमिका निभाई थी। आज राजीव गांधी के जन्मदिन पर हम आपको वो किस्सा बताते हैं जब अमिताभ बच्चन की मां तेजी बच्चन, इंदिरा गांधी की बहू को लेने एयरपोर्ट गई थीं । साथ ही राजीव और सोनिया की शादी के लिए तेजी बच्चन ने ही इंदिरा गांधी को मनाया था । तेजी बच्चन ने ही सोनिया को भारतीय परंपरा की सीख दी थी ।

गांधी और बच्चन परिवार के याराना का तो इतिहास भी गवाह रहा है । अमिताभ बच्चन और राजीव गांधी का बचपन साथ खेलते-कूदते बीता। दोनों परिवार के रिश्तों के बीच काफी उतार-चढ़ाव भी आए । फिर एक समय ऐसा आया जब दोनों परिवार के संबंधों में विश्वास की गाड़ी पटरी से उतर गई । दोनों परिवार के बीच रिश्ते की कहानी किसी बॉलीवुड फिल्म की कहानी से कम नहीं है ।

अमिताभ बच्चन के पिता विदेश मंत्रालय में हिंदी अधिकारी के रूप में काम करते थे। पूर्व प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू उनके काम, सच्चाई और सिद्धांतों की बहुत इज्जत करते थे। इलाहाबाद में रहते हुए दोनों परिवार बहुत करीब आ गए। अमिताभ बच्चन की मां तेजी बच्चन और नेहरू की बेटी इंदिरा गांधी की बहुत अच्छी दोस्त बन गईं।

बाद में जब बच्चन परिवार दिल्ली शिफ्ट हुआ तब तेजी बच्चन को सोशल एक्टिविस्ट के रूप में पहचाना जाने लगा और इंदिरा के साथ उनकी दोस्ती गहरी होती गई। 1984 में इंदिरा गांधी की हत्या तक दोनों परिवारों के संबंध बहुत घनिष्ठ रहे। यह रिश्ता अमिताभ और राजीव गांधी की दोस्ती के रूप में आगे बढ़ता गया।

यह अमिताभ बच्चन ही थे, जो अपनी मां तेजी बच्चन के साथ 13 जनवरी 1968 की सुबह कड़ाके की सर्दी में पालम एयरपोर्ट पर सोनिया गांधी को लेने पहुंचे थे। इस दिन सोनिया गांधी, राजीव की मंगेतर के रूप में भारत आई थीं । सोनिया को बच्चन परिवार के घर ठहराया गया और तेजी ने उनको भारतीय संस्कृति और तौर तरीकों के बारे में समझाया।

ऐसा भी कह सकते हैं कि तेजी ने सोनिया के लिए उनकी मां का रोल निभाया था । खबरों के मुताबिक, राजीव गांधी जब सोनिया गांधी से शादी करने की तैयारी में थे तब तेजी बच्चन ने ही मध्यस्थ के रूप में भूमिका निभाई थी । इंदिरा गांधी एक इटैलियन लड़की से अपने बेटे की शादी को लेकर अनिच्छुक थीं। इंदिरा गांधी को शादी के लिए तैयार करने वाली तेजी ही थीं ।

पूर्व विधायक अखिलेश सिंह का निधन.

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उत्तर प्रदेश के रायबरेली सदर से कांग्रेस विधायक अदिति सिंह के पिता अखिलेश सिंह का निधन हो गया है. लंबे समय से कैंसर से पीड़ित अखिलेश सिंह ने मंगलवार सुबह लखनऊ के पीजीआई में आखिरी सांस ली. उनका पार्थिव शरीर रायबरेली स्थित पैतृक गांव लालूपुर लाया जाएगा.

बता दें अखिलेश सिंह लंबे समय से कैंसर से जूझ रहे थे. उनका इलाज सिंगापुर में भी चल रहा था. वे लखनऊ के पीजीआई में रूटीन चेकअप के लिए आये थे. जहां उनकी तबीयत बिगड़ती गई और मंगलवार सुबह करीब 5 से 6 बजे के करीब उन्होंने अंतिम सांस ली.