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देशभर में होगा विस्तार, भोजन की बर्बादी रोकने रेलवे ने की ये नायाब पहल

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साउथ वेस्टर्न रेलवे (South Western Railway) ने हुबली स्टेशन पर 6 फुट ऊंचा फ्रीज़ (Fridge) लगाया है जिसमें 5 रैक हैं. इनमें 2 रैक पके हुए खाने को रखने के लिए जबकि 2 रैक फल और सब्जियों को रखने के लिए बनाए गए हैं. इस फ्रीज़ की कीमत 80000 रुपये है. इसका मूल उद्देश्य ही मुसाफिरों और स्टेशन के फूड कोर्ट (Food Court) में बचे अतिरिक्त भोजन को सुरक्षित रखना है.खास बात ये है कि इस फ्रीज़ को लगाने के तीन दिन के भीतर ही 100 से ज़्यादा जरूरतमंदों ने इसमें रखे भोजन से अपनी भूख मिटाई है. कोई भी ज़रूरतमंद व्यक्ति इससे फ्री में खाना लेकर खा सकता है. इसके साथ ही इस फ्रीज़ में मांसाहारी भोजन को रखने की मनाही भी है, ताकि हर तरह के जरूरतमंद इसके भोजन को खा सकें.

देशभर में खुलेंगे जनता फ्रीज़
इसके साथ ही ऐसे काम को आगे बढ़ाने के लिए NGO से भी संपर्क किया जा रहा है. भारतीय रेल में हर रोज़ करीब 2.5 करोड़ मुसाफिर सफर करते हैं. बड़ी संख्या में लोगों के फुट फॉल के साथ ही उनके इस्तेमाल करने के बाद भारी मात्रा में खाने वाले सामानों की बर्बादी भी होती है. इसलिए रेलवे को कोशिश है कि इस जनता फ्रीज़ की योजना का विस्तार किया जाए ताकि देशभर में भोजन की बर्बादी को अपने स्तर पर रोक सके. साउथ वेस्टर्न रेलवे ने इस फ्रीज़ का प्रचार स्टेशन और आसपास के इलाकों में भी करना शुरू किया है ताकि ज्यादा से ज्यादा भोजन को बचाया जा सके जिससे कि ज़्यादा से ज्यादा लोगों की भूख मिटाई जा सके.

एक और जहां भारत भूख की गंभीर समस्या से जूझ रहा है, वहीं दूसरी और देश में बड़े पैमाने पर खाने की बर्बादी की जाती है. संयुक्त राष्ट्र के आंकड़ों के मुताबिक भारत में 40 फीसदी खाना बर्बाद हो जाता है, जिसकी कीमत करीब 50 हज़ार करोड़ रुपये होती है. इसमें रख रखाव, आबंटन और बचे हुए भोजन को फेंक देना सबसे बड़ा कारण है.

हम रोज़ाना अपने आस-पास ढेर सारा खाना बर्बाद होते हुए देखते ही हैं. ख़ासकर शादी, होटल, पारिवारिक और सामाजिक कार्यक्रमों, यहां तक कि घरों में भी बचा हुआ खाना यू हीं फेंक दिया जाता है. अगर ये खाना बचा लिया जाए और ज़रूरतमंदों तक पहुंचा दिया जाए तो कई लोगों का पेट भर सकता है. 

बाढ़ के समय वाहनों को होने वाले नुकसान को करें कम, अपनाएं ये कदम

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भारत के बड़े हिस्सों में अचानक आई जल प्रलय ने बड़े पैमाने पर मनुष्यों के जीवन के साथ-साथ उनकी संपत्ति को भी भारी नुकसान पहुंचाया है। मुंबई भारी बारिश के कारण एक अहाते में दीवार के ढह जाने से 27 लोगों की मृत्यु हो गई तथा 120 से भी अधिक लोग घायल हो गए। इस वर्ष इस शहर में मात्र 48 घंटे की अवधि में 540 मिलिमीटर्स बारिश दर्ज की गई।

बाढ़ के दौरान वाहन असुरक्षितबाढ़ के इस पानी में सैकड़ों पब्लिक और प्राइवेट वाहन डूब गए और अगले दिन जब पानी उतरा तब ये वाहन खराब हालत में मिले। बाढ़ के दौरान पानी में से किसी भी वाहन, खासकर कार को लेकर गुजरना असुरक्षित है क्योंकि आप नहीं जानते कि कब इस पानी का स्तर बढ़ जाएगा, आपकी कार के सेंट्रल डोर लॉकिंग सिस्टम को जाम कर देगा और आपको तथा कार के अंदर बैठे अन्य लोगों को अंदर ही फंसा छोड़ देगा। मुंबई तथा देश के बाकी ऐसे स्थान जहां बारिश की वजह से बाढ़ के हालात का पैदा होना हर साल आम है, वहां इसकी वजह से मोटर इंश्योरेंस क्लेम की संख्या में अत्यधिक तेजी आई है। अधिकांश कार मालिक अपनी गाड़ियां टो करवाकर पास के गैरेज तक सुधरवाने के लिए ले जाते हैं। उदाहरण के लिए इस वर्ष मोटर इंजन के डैमेज होने की कुछ ही रिपोर्ट दर्ज हुईं और फलस्वरूप क्लेम्स तुलनात्मक रूप से उतने ऊंचे नहीं गए। चूंकि इंजन का डैमेज हमेशा मोटर इंश्योरेंस पॉलिसी के अंतर्गत कवर नहीं किया जाता, इसलिए आपको यह सुनिश्चित रखने की आवश्यकता है कि आपकी कार और आप, दोनों ही बाढ़ के दौरान सुरक्षित रहें। नीचे दिए गए बिंदुओं पर गौर करें और जानें कि इस स्थिति में मनुष्य और गाड़ियों दोनों का ही नुकसान कम से कम करने के लिए क्या किया जा सकता है।

  • बाढ़ के दौरान, कार के भीतर न रहें। गाड़ी की खिड़कियों को नीचे कर लें और दरवाजों को खुला रखें। क्योंकि कार के बाहर पानी का स्तर बढ़ने पर आप अंदर फंस सकते हैं। ऐसा नहीं किया तो यह कार में मौजूद हर व्यक्ति के लिए जानलेवा हो सकती है। कार से बाहर आ जाएं और तेजी से किसी ऊंची जगह जाने का प्रयास करें। याद रखें कि इंसान का जीवन किसी भी गाड़ी से अधिक कीमती है चाहे वह गाड़ी कितनी भी महंगी क्यों न हो।
  • यह सुनिश्चित करें की आपकी कार पानी में कितनी डूबी थी इससे यह पता चलेगा कि पानी कार पर कहां तक था। यदि पानी का स्तर दरवाजों से ऊपर नहीं गया है तो इसका मतलब है कि आपकी गाड़ी को गंभीर नुकसान हो सकता है। मगर जिस क्षण आप इस बात को नोटिस करेंगे कि पानी का स्तर डैशबोर्ड की बेसलाइन पर पहुंच रहा है, तुरंत अपने इंश्योरेंस प्रोवाइडर या सर्विसिंग यूनिट को कॉल करें और उनकी हिदायतों का पालन करें।
  • कार के फ्यूल सिस्टम को देखें। पुरानी कारों से पूरे फ्यूल को निकाल देने की जरूरत होती है। ब्रेक, क्लच, पावर स्टीयरिंग तथा कूलेंट (ठंडा करने वाली गैस या लिक्विड) को बदल देना चाहिए।
  • यदि गाड़ी का इंजन थोड़ी देर भी पानी के अंदर रहा है और खासतौर पर यदि यह पूरी तरह डूबा रहा है तो उपयुक्त यही है कि उसे बाहर निकलने के बाद तुरंत स्टार्ट न करें। यदि आप ऐसा करते हैं तो इसकी पूरी आशंका है कि पानी इंजन के भीतर पहुंच जाएगा और इसकी अंदरूनी रॉड्स को मोड़ देगा। गाड़ी के मेक और मॉडल के हिसाब से एक डैमेज हुए इंजन के लिए 20,000 से एक लाख रुपये तक चुकाने पड़ सकते हैं।
  • जब भी बाढ़ में से ड्राइव करके गुजर रहे हों तो हमेशा कार की स्पीड को बढ़ाये रखें ताकि पानी को एग्जॉस्ट में जाने से रोका जा सके।
  • यदि संभव हो तो कुछ दिन कार को स्टार्ट करने से बचें, क्योंकि एयर डक्ट में बची पानी की कोई भी बूंद इंजन को खराब कर सकती है।
  • अक्सर सर्विस प्रोवाइडर शॉर्ट सर्किट की दुर्घटना से बचने के लिए बैटरी को निकाल देने पर जोर देते हैं। ऐसे में जब आप बैटरी को वापस कनेक्ट करते हैं तो यह सुनिश्चित करें कि आपने सारे इलेक्ट्रिकल सिस्टम्स एक के बाद एक जांच लिए हैं। इसके लिए सबसे पहले हॉर्न से शुरू करते हुए फिर हेडलाइट्स, इंडिकेटर्स और फिर एयर कंडीशनिंग, स्टीरियो, पॉवर लॉक्स, खिड़कियां और सीट्स तथा यहां तक कि एंड की लाइट्स तक को चैक करें। यदि आपको थोड़ी भी गड़बड़ महसूस हो तो तुरंत अपने मैकेनिक से संपर्क करें।
  • अपने नजदीकी गैराज या सर्विस प्रदाता तक कार को पूरी जांच के लिए ले जाने के लिए किसी टो सर्विस (गाड़ी को खींचकर ले जाने वाला साधन) की मदद लें। जब टो वैन या टो करने वाली गाड़ी रास्ते में हो, गाड़ी को सुखाना शुरू करें ताकि काई और जंग उसमें अंदर न बैठ पाए, लेकिन गलती से भी गाड़ी के इंजन को किसी बाहरी साधन या स्टार्टर से चालू करने की कोशिश न करें। कार के गीले इंटीरियर को सूखे कपड़े से सुखाने की कोशिश करें। याद रखें कि यदि गाड़ी नमक वाले पानी में डूबी थी तो नुकसान और भी ज्यादा हो सकता है क्योंकि नमक का पानी ज्यादा नुकसान पहुंचाने वाला होता है।
  • एक ऐसी विस्तृत मोटर इंश्योरेंस पॉलिसी खरीदें, जिसमें आवश्यकता के अनुसार विशेष एड-ऑन कवर करने की सुविधा हो, ताकि आप पर एकदम से आर्थिक भार न पड़े। आपके द्वारा किया गया इंश्योरेंस कार को हुए अधिकतम नुकसान की भरपाई करने में मदद करेगा, इससे आपको अपनी जेब से कम से कम पैसा चुकाना पड़ेगा।
  • अंत में: आपका वाहन भारी वर्षा और बाढ़ की वजह से होने वाली किसी भी क्षति या डैमेज के लिए इंश्योरेंस द्वारा कवर होना चाहिए। किसी भी मोटर इंश्योरेंस को खरीदते समय पूरे कागज सहित नीचे लिखी बारीक लाइनों को भी ध्यान से पढ़ें, ताकि आपकी कार को सबसे बेहतर सुरक्षा कवर मिल सके।

संजय दत्ता, चीफ- अंडरराइटिंग,
क्लेम्स, एक्च्युरी तथा रीइंश्योरेंस,
आईसीआईसीआई लोम्बार्ड जनरल इंश्योरेंस

Chandrayaan2 हुआ चंद्रमा की कक्षा में दाखिल ,ISRO प्रमुख बोले- बहुत बड़ी सफलता

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श्रीहरिकोटाः प्रक्षेपण के 29 दिन बाद चंद्रयान-2 आज यानी मंगलवार को सुबह चंद्रमा की कक्षा में सफलतापूर्वक दाखिल हो गया है..इसरो ने ट्वीट कर यान के चांद की कक्षा में पहुंचने की जानकारी दी. चंद्रयान-2 का विक्रम लैंडर सात सितंबर को चंद्रमा पर लैंड करेगा.खबरों के मुताबिक पीएम नरेंद्र मोदी भी चंद्रयान-2 की लैंडिंग देखने के लिए इसरो में मौजूद रहेंगे. इसरो के प्रमुख के सिवन ने प्रेस कॉन्‍फ्रेंस ने इस अभियान की जानकारी दी साथ ही इसे बड़ी सफलता बताया.

इसरो प्रमुख ने कहा कि सुबह 9 बजे चांद की कक्षा में पहुंचा चंद्रयान-2. अभी चंद्रयान-2 चांद की परिक्रमा कर रहा है. कहा कि हम पूरी तरह से एक्यूरेसी पर काम कर रहे हैं ताकि मिशन चंद्रयान-2 को चांद के दक्षिणी सतह पर उतार सके. बताया कि 28, 30 अगस्त और 1 सितंबर को चंद्रयान-2 को 18 हजार किलोमीटर की ऊंचाई से 100/100 किलोमीटर की ऊंचाई तक लाएंगे.

अब चंद्रयान-2, 118 किमी की एपोजी (चांद से कम दूरी) और 18078 किमी की पेरीजी (चांद से ज्यादा दूरी) वाली अंडाकार कक्षा में अगले 24 घंटे तक चक्कर लगाएगा. इस दौरान चंद्रयान की गति को 10.98 किमी प्रति सेकंड से घटाकर करीब 1.98 किमी प्रति सेकंड किया गया.

चंद्रयान-2 चांद की कक्षा में प्रवेश करने के बाद 31 अगस्त तक चंद्रमा के चारों ओर चक्कर लगाता रहेगा. इस दौरान एक बार फिर कक्षा में बदलाव किया जाएगा. चंद्रयान-2 को चांद की सबसे करीबी कक्षा तक पहुंचाने के लिए चार बार कक्षा बदली जाएगी.

चन्द्रयान 2 को चंद्रमा पर स्थापित करने की प्रक्रिया बहुत जटिल है क्योंकि इसमें 39,240 किलोमीटर प्रति घंटे का वेग है. यह गति हवा के माध्यम से ध्वनि की गति से लगभग 30 गुनी है. इसरो के अध्यक्ष डॉ के सिवन ने कहा, एक छोटी सी गलती भी चंद्रयान 2 की चंद्रमा के साथ मुलाकात नाकाम कर सकती है.

बता दें कि यह भारत का अब तक का सबसे महत्वाकांक्षी अंतरिक्ष अभियान है. गत 22 जुलाई को प्रक्षेपण यान जीएसएलवी मार्क।।।-एम 1 के जरिए प्रक्षेपित किए गए चंद्रयान-2 ने गत 14 अगस्त को पृथ्वी की कक्षा से निकलकर चंद्र पथ पर आगे बढ़ना शुरू किया था.

बेंगलुरु के नजदीक ब्याललू स्थित डीप स्पेस नेटवर्क (आईडीएसएन) के एंटीना की मदद से बेंगलुरु स्थित इसरो, टेलीमेट्री, ट्रैकिंग एंड कमांड नेटवर्क (आईएसटीआरएसी) के मिशन ऑपरेशंस कांप्लेक्स (एमओएक्स) से यान की स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है.

इसरो ने 14 अगस्त को कहा था कि चंद्रयान-2 की सभी प्रणालियां सामान्य ढंग से काम कर रही हैं. यदि यह अभियान सफल रहा तो रूस, अमेरिका और चीन के बाद भारत चंद्रमा की सतह पर रोवर पहुंचाने वाला चौथा देश बन जाएगा.

आधार लिंकिंग : Facebook-WhatsApp की दलील- ये ग्‍लोबल मामला, सुप्रीम कोर्ट ही करे सुनवाई

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Facebook-WhatsApp को आधार से लिंक करने के मामले पर मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई. Facebook और WhatsApp की तरफ से कहा गया कि कुल चार याचिकाएं दाखिल हुई हैं. इनमें से दो मद्रास में, एक ओडिशा में और एक मुंबई में. अपने पक्ष में कंपनी ने कहा कि लाखों कानून हैं जिनका पालन उसे करना पड़ता है. करोड़ों यूजर्स हैं.

WhatsApp की तरफ से कहा गया कि मद्रास हाई कोर्ट में केंद्र सरकार ने हलफनामा दायर कर कहा कि वह इस मामले को देख रही है. सरकार ने कहा कि वो इस मामले में गाइडलाइन जारी करेगी. WhatsApp की ओर से जिरह करते हुए वरिष्‍ठ वकील कपिल सिब्बल ने कहा कि ‘पॉलिसी मामले को हाई कोर्ट कैसे तय कर सकती है? ये संसद के अधिकार क्षेत्र में आता है.’

Facebook-WhatsApp ने कहा कि सभी मामलों को सुप्रीम कोर्ट में ट्रांसफर किया जाए. वही इन मामलों को सुने और उनका निपटारा करे. उसकी तरफ से सिब्‍बल ने कहा कि ‘ऐसा न हो कि एक हाई कोर्ट कुछ आदेश पारित करे और दूसरा हाई कोर्ट कुछ और. उन्‍होंने कहा कि ये ग्लोबल मामला है.’

जब अटॉर्नी जनरल ने किया Blue Whale का जिक्र

  • सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि डार्क वेब Blue Whale से ज्यादा खतरनाक है, हमने सुना है. आज कल टेक्नोलॉजी में आपस में ही प्रतिस्पर्धा है आगे निकलने की.
  • अटॉर्नी जनरल ने जवाब देते हुए कहा कि ‘हमारे पास वो मैकेनिज्‍म नहीं है कि ओरिजिनेटर का पता लगा पाएं. आप ये देखिए Blue Whale के जरिये भारत में कितने लोग मर गए. आज तक इसका पता नही चल पाया कि इसे किसने बनाया था.’
  • अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपालन ने अदालत में कहा कि Blue Whale को लेकर अभी भी पता लगाया जा रहा है कि इसको किसने बनाया था. ये बेहद गंभी मामला है. इसपर सुप्रीम कोर्ट ने पूछा कि किन शर्तो पर जानकारी साझा की जाए? ये सारे सवाल भी कोर्ट के सामने हैं. क्रिमिनल मामले में कई प्रोसीजर है जिससे अपराधी तक पहुंचा जा सकता है.

399 में नहीं बस इतने रुपए में जियो में दे रही है 84 दिनों तक कॉल और इंटरनेट वाला धमाकेदार ऑफर

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जियो ने मार्केट में सस्ते ऑफर्स पेश कर ग्राहकों के लिए इंटरनेट और फ्री कॉलिंग की सुविधा उपलब्ध कराई है। हाल ही में जियो ने ग्राहकों के लिए एक ऑफर उपलब्ध कराया है जिसने पूरा टेलीकॉम जगत हिला डाला है।

जियो का यह ऑफर पेटीएम कैशबैक ऑफर है, जिसमें जियो ग्राहकों को 399 रुपए वाले ऑफर को रिचार्ज पर कराने पर 210 रुपए का कैशबैक मिल रहा है।

यानि, इस ऑफर में जियो ग्राहकों को मात्र 189 रुपए में 84 दिनों के लिए फ्री कॉल और इंटरनेट का लाभ मिलेगा। जियो ग्राहकों को इसके लिए पेटीएम ऐप से अपना जियो नम्बर रिचार्ज करना होगा, जिसके बाद आपको पेटीएम में 210 रुपए का कैशबैक मिलेगा।

इसका इस्तेमाल आप अगले जियो रिचार्ज में कर सकते हैं। इसमें आपको कैशबैक के बाद 189 रुपए में 84 दिनों के लिए कॉल और इंटरनेट मुफ्त मिलेगा।

अमेरिका के इस राष्ट्रपति की बास्केटबॉल जर्सी बिकी 85 लाख रुपये में

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अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा की बास्केटबॉल जर्सी सोमवार को 85 लाख 86 हजार 300 रुपये में बिकी है। ये जानकारी जर्सी को बेचने वाले डलास ऑक्शन हाउस ने दी है। 23 नंबर वाली ये जर्सी उस वक्त की है जब ओबामा की उम्र 18 साल थी। तब ओबामा हवाई के पुनाहौ हाई स्कूल में सीनियर थे। हेरिटेज ऑक्शन्स के अनुसार तब ओबामा वहां रहते थे।

बिकने से पहले जर्सी का मूल्य एक लाख डॉलर था। ओबामा को बास्केटबॉल का फैन माना जाता है। वह व्हाइट हाउस में भी अपने स्टाफ, सेलिब्रिटीज और रिश्तेदारों के साथ अपने कार्यकाल के दौरान कई बार इस खेल को खेलते देखे गए थे।

स्वामीजी की भविष्यवाणी राजीव गांधी को लेकर सच हुई थी…

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पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी (Rajiv Gandhi) राजनीति में आने को इच्छुक नहीं थे. उनके राजनीति में आने को लेकर एक दिलचस्प वाकया बताया जाता है…

पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी (Rajiv Gandhi) की 75वीं जयंती पर पूरा देश उन्हें याद कर रहा है. राजीव गांधी के समाधिस्थल वीरभूमि पर पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी, पूर्व पीएम मनमोहन सिंह और कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने श्रद्धांजलि दी. प्रधानमंत्री मोदी (PM Modi) ने भी ट्विटर पर राजीव गांधी को श्रद्धांजलि दी.

20 अगस्त 1944 को जन्में राजीव गांधी देश के सबसे कम उम्र के प्रधानमंत्री बने थे. 1984 में इंदिरा गांधी की हत्या के बाद, जब अचानक उन्हें प्रधानमंत्री की कुर्सी मिली तो उनकी उम्र महज 40 साल थी. पायलट की ट्रेनिंग ले चुके राजीव गांधी राजनीति में आने को इच्छुक नहीं थे, लेकिन परिस्थितियों ने उन्हें देश का सबसे कम उम्र का प्रधानमंत्री बना दिया.

इंजीनियरिंग की पढ़ाई की लेकिन डिग्री नहीं ले पाए
राजीव गांधी ने पायलट बनने से पहले इंजीनियरिंग की पढ़ाई की थी, लेकिन वो पढ़ाई पूरी नहीं कर पाए. क्रैंबिज के ट्रीनिटी कॉलेज के इंजीनियरिंग डिपार्टमेंट में उन्होंने दाखिला लिया था. तीन साल की पढ़ाई के बाद भी उन्हें डिग्री नहीं मिल पाई. इसके बाद राजीव गांधी ने लंदन के इंपीरियल कॉलेज के मैकेनिकल इंजीनियरिंग में एडमिशन लिया. लेकिन वहां भी वो पढ़ाई पूरी नहीं कर पाए. राजीव गांधी कहा करते थे कि उन्हें रटने में दिलचस्पी नहीं थी. इसलिए वो इंजीनियरिंग की परीक्षाओं में फेल होते रहे. इसके बाद राजीव गांधी ने दिल्ली के फ्लाइंग क्लब में एडमिशन लिया और वहां पायलट की ट्रेनिंग ली. 1970 में उन्होंने एयर इंडिया में काम किया. विमान उड़ाने के अपने शौक के बारे में बात करते हुए राजीव गांधी ने एक बार सिम्मी ग्रेवाल के साथ इंटरव्यू में कहा था कि विमानों को लेकर उनकी उत्सुकता उस वक्त शुरू हुई थी, जब उनके नाना पंडित नेहरू उन्हें पहली बार ग्लाइडिंग क्लब लेकर गए थे. राजीव ने कहा था, ‘उस वक्त मैंने काफी एंज्वॉय किया था. अभी भी करता हूं. ये एक अलग तरह की आजादी देता है. ये आपको सारी चीजों से दूर ले जाता है.’

बहुत कम लोगों को पता है कि राजीव गांधी को फोटोग्राफी का भी शौक था. फोटोग्राफी के बारे में वो गहरी समझ रखते थे. कई मौकों पर उन्हें कुछ पब्लिशर्स ने फोटोग्राफी को लेकर किताब लिखने को कहा लेकिन अपने जीवनकाल में राजीव गांधी ऐसा कुछ नहीं कर पाए.

उनके निधन के बाद सोनिया गांधी ने उनके खीचें फोटोग्राफ्स को लेकर एक किताब रिलीज करवाई. किताब का नाम है- Rajiv’s World- Photographs by Rajiv Gandhi. 1995 में आई इस किताब में 4 दशकों में खींचे गए राजीव गांधी के फोटोग्राफ्स शामिल हैं. इसमें जंगल, पहाड़, झरने जैसे कुदरती खूबसूरती वाले फोटोग्राफ्स के साथ राजीव के पालतू जानवरों से लेकर उनके दोस्तों और रिश्तेदारों के फोटोग्राफ्स तक शामिल हैं.

राजीव गांधी ऐसे एकलौते प्रधानमंत्री रहे हैं, जो अपनी कार खुद चलाया करते थे. प्रधानमंत्री रहने के दौरान भी वो कई मौकों पर खुद ही कार ड्राइव किया करते थे. चुनाव यात्राओं के दौरान भी वो खुद ही ड्राइव करके सभा स्थल तक पहुंच जाया करते थे.

राजीव गांधी पर किताब लिखने वाले पत्रकार सुमन चट्टोपाध्याय ने अपनी किताब में लिखा है कि एक बार बंगाल के एक चुनाव में उन्हें राजीव गांधी के साथ कार में यात्रा का अवसर मिला. राजीव खुद ही ड्राइव कर रहे थे. वो ग्रां प्री ड्राइवर की तरह स्टेट हाइवे पर कार को भगाए जा रहे थे. कई बार उनकी सुरक्षा काफिले में चल रही गाड़ियां उनसे काफी पीछे छूट जातीं. राजीव गांधी की स्पीड को मैच करना आसान नहीं था.

जब स्वामीजी ने की राजीव गांधी के राजनीति में आने की भविष्यवाणी

ये सभी जानते हैं कि राजीव गांधी राजनीति में आने के इच्छुक नहीं थे. उनकी राजनीति में आने को लेकर एक दिलचस्प वाकया बताया जाता है. उस वक्त संजय गांधी की प्लेन क्रैश में मौत हुई थी. इंदिरा गांधी और राजीव गांधी से लोग मिलने आ रहे थे. इसी मौके पर शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंदजी भी शोक संतप्त परिवार से मिलने गए.

इंदिरा गांधी से मुलाकात के दौरान उन्होंने कहा कि अब राजीव को ज्यादा लंबे वक्त तक प्लेन नहीं उड़ाना चाहिए. इस पर इंदिरा गांधी ने कहा कि राजीव अगर प्लेन नहीं उड़ाएगा तो करेगा क्या? कहा जाता है कि स्वामी जी बोले- ‘अगर कोई इंसान खुद को भगवान को सौंप देता है तो ईश्वर ही उसकी आगे की देखभाल करते हैं. मेरा विश्वास है कि राजीव को खुद को देशसेवा में समर्पित कर देना चाहिए.’

इसके बाद कांग्रेस के नेता और सांसद राजीव गांधी से राजनीति में आने का आग्रह करने लगे. इंदिरा गांधी ने राजनीति में आने के फैसले को अपने बेटे पर छोड़ रखा था. राजीव गांधी कहा करते थे कि अगर मेरे राजनीति में आने से मेरी मां को मदद मिलती है तो मैं जरूर राजनीति में आ जाऊंगा.

ALERT : इस तारीख से ‘बेकार’ हो जाएंगे 90 करोड़ ATM कार्ड, SBI खाताधारकों के लिए बड़ी खबर

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देश के सबसे बड़े सरकारी बैंक स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के खाताधारकों के लिए बड़ी खबर है। बैंक जल्द ही अपने एटीएम कार्ड को बंद करने जा रहा है। SBI के करोड़ों खाताधारकों को बैंक के इस फैसले से झटका लगने वाला है। एसबीआई ने प्लास्टिक डेबिट कार्ड बंद करने का फैसला कर लिया हैं। एसबीईआई बैंक की योजना एटीएम कार्ड बंद कर डिजिटल पेमेंट सेवा को बढ़ावा देने की है। इसी योजना के तहत बैंक 90 करोड़ एटीएम कार्ड को बंद करने की तैयारी कर रहा है।

इस तारीख से बंद हो जाएंगे SBI के 90 करोड़ डेबिट कार्ड

स्टेट बैंक के चेयरमैन रजनीश कुमार ने बताया है कि उनकी योजना है कि जल्द ही डेबिट कार्ड को विड्रा करने की है। तय अनुमान के मुताबिक SBI 18 महीनों में अपने सभी 90 करोड़ डेबिट कार्ड को बंद करने की तैयारी कर रहा है। एसबीआई के इस फैसले के बाद SBI खाताधारक एटीएम का इस्तेमाल नहीं कर पाएंगे। इसके बाद सिर्फ डिजिटल पेमेंट सर्विस काम करेगी। आपको बता दें कि देश में 90 करोड़ डेबिट कार्ड और 3 करोड़ क्रेडिट कार्ड हैं। एसबीआई का लक्ष्य है कि 18 महीने बाद सभी ATM कार्ड को बंद कर दिया जाए। ऐसे में सवाल उठता है कि इसके बाद आप कैश कैसे निकालेंगे।

ऐसे निकाल पाएंगे ATM से पैसा

एसबीआई द्वारा 90 करोड़ एटीएम कार्ड बेकार किए जाने के बाद सबसे पहला सवाल यहीं उठ रहा है कि आखिर इसके बाद SBI खाताधारक पैसा कैसे निकालेंगे। इसे लेकर एसबीआई के चेयरमैन रजनीश कुमार ने कहा कि एसबीआई खाताधारक डिजिटल पेमेंट गेटवे ‘YONO’ प्लेटफॉर्म की मदद से कैश निकाल सकेंगे। उन्होंने कहा योनो एप की दद से डेबिट कार्ड मुक्त देश बनाने में काफी मदद मिलेगी। उन्होंने कहा योनो के जरिये ATM मशीनों से नकदी निकाली जा सकेगी। इसकी मदद से लोग शॉपिंग कर सकेंगे। इसके लिए बैंक ने तैयारी की है। पहले से ही 68,000 ‘योनो कैशपॉइंट’ की स्थापित कर दिया है। इसे अगले 18 महीनों में बढ़ाकर 10 लाख करने की योजना है।

क्या है योनो सेवा

आपको बता दें कि एसबीआई ने इसी साल मार्च में ‘योनो कैश’ सेवा शुरू की है। इस एप की मदद से लोग बिना डेबिट कार्ड के पैसे निकालने सकते हैं। ये एप बेहद सुरक्षित है और आसान है। रजनीश कुमार के मुताबिक आने वाले वक्त में ग्राहकों के लिए क्रेडिट कार्ड उनकी जेब में स्टैंड-बॉय के तौर पर होगा। लोगों को प्लास्टिक कार्ड रखने की जरूरत नहीं होगी। उन्होंने कहा फिलहाल भी क्यूआर कोड भुगतान करने के लिए बेहद सुरक्षित और सुविधाजनक तरीका है। बैंक ने योनो एप के जरिए कैश निकालने की सुविधा पहले 16,500 एटीएम पर करवाई थी, लेकिन अब उसे सभी एटीएम पर अपग्रेड करवाया जा रहा है।

प्रेमसंबंध से पिता था नाराज, तो 15 साल की बेटी ने प्रेमी के साथ मिलकर पिता की कर दी हत्या

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क्या 15 साल की किशोरी अपने प्रेमी के साथ मिलकर अपने पिता की हत्या सिर्फ इसलिए कर सकती है कि उसका पिता उसके प्रेम संबंध को लेकर नाराज था? अभी तक पुलिस की जांच में जो बातें सामने आयीं हैं, उसके अनुसार बंगलुरु की एक किशोरी ने अपने पिता को पहले नींद की गोलियां दी और फिर अपने प्रेमी के साथ मिलकर पिता की हत्या चाकू से वार करके कर दी. इतना ही नहीं उनदोनों ने शव को पेट्रोल छिड़ककर जलाने का भी प्रयास किया.

पुलिस को दिये बयान में किशोरी ने बताया कि उसके पिता उसके प्रेम संबंध को लेकर नाराज रहते थे और उसे मोबाइल भी इस्तेमाल नहीं करने देते थे. जिससे वह उनसे नाराज थी, इसलिए उसने अपने पिता की हत्या कर दी.

पुलिस ने बताया है कि घटना के दिन लड़की की मां और उसका भाई कहीं बाहर गये हुए थे. लड़की ने उसी दिन पिता के हत्या की योजना बनायी और अपने प्रेमी को घर बुलाया. पहले उसने पिता को दूध के साथ नींद की गोलियां दी और जब वह सो गये तो चाकू से पिता की हत्या कर दी.

अगले दिन सुबह वह तीन बोतल पेट्रोल लेकर आयी और शव को बाथरूम में ले जाकर आग दी. धुआं उठता देख पड़ोसियों ने पुलिस को सूचना दी जिसके बाद पुलिस वहां आयी और पूछताछ शुरू किया. हालांकि लड़की की मां अपने पति की हत्या से सदमे में है और वह इस बात पर भरोसा नहीं कर पा रही हैं कि उसकी बेटी ने अपने पिता का खून कर दिया है.

कुछ ही सेंकेंड में कर लेते हैं सीटें बुक, टिकट एजेंट यूं कर रहे हैं तत्काल टिकटों में सेंधमारी

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टिकट एजेंट प्रतिबंधित सॉफ्टवेयरों के जरिये तत्काल टिकटों की सेंधमारी कर रहे हैं। महज कुछ सेकेंड में ही सीटें बुक कर लेते हैं और आरक्षण केंद्रों पर खड़े पैसेंजरों के हाथ सिर्फ मायूसी लगती है। ऐसे दलालों का रैकेट त्योहारों पर सक्रिय हो जाता हैै। आरपीएफ के एक अधिकारी बताते हैं कि अक्तूबर, 2017 में पहली बार लखनऊ में सॉफ्टवेयर से टिकट बनाने वाला एजेंट गिरफ्तार हुआ था, जबकि उससे पहले इनका रैकेट गोंडा तक ही सीमित था। इतना ही नहीं मुंबई व पुणे में बुक हुए तत्काल टिकटों को दलाल हवाई जहाज व ट्रेन से लखनऊ भेजते हैं। ऐसे टिकट लाने वाले कई लोग गिरफ्तार हो चुके हैं, जिसमें पुष्पक एक्सप्रेस का एक कोच अटेंडेंट भी शामिल था।

केस-1
‘रेड मिर्ची’ से 40 सेकंड में बनाता था 20 तत्काल टिकट
 
आलमबाग बाराबिरवा स्थित किंग-विंग टूर एंड ट्रेवेल कंपनी में इंदिरा पार्क निवासी सुनील श्रीवास्तव रेड मिर्ची सॉफ्टवेयर से 40 सेकंड में 20 तत्काल टिकट बुक करता था। महीने में सात हजार टिकट बुक करता था और सॉफ्टवेयर के लिए महीने का 5,400 रुपये भुगतान करता था। सुनील की गिरफ्तारी पिछले साल हुई थी। उसके पास से दिल्ली-मुम्बई के 30 कन्फर्म टिकट बरामद किया गया था।
केस-2 
ढाई हजार का सॉफ्टवेयर, 80 हजार कमाई 
पूर्वोत्तर रेलवे की सीआईबी टीम ने चारबाग आहूजा भवन स्थित आरके ट्रेवेल्स से तीन रेल टिकट दलालों को दबोचा था। सॉफ्टवेयर मुम्बई से ढाई से तीन हजार रुपये में खरीदा गया था। उससे करीब 80 हजार रुपये की कमाई कर चुका था। कार्रवाई में 77 टिकट, 1.21 लाख रुपये, सौ से अधिक फेक आईडी हाथ लगी।
केस-3
सॉफ्टवेयर से हैक कर लेते थे लग्जरी ट्रेनों के टिकट 
आशियाना के ट्रैवेल जोन व चौक में एसके ट्रेवल की दुकानों से प्रतिबंधित सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल कर ई-रेलवे टिकट बनाए जाते थे। यहां से 12.88 लाख रुपये के 713 रेलवे टिकट बरामद किए गए। दलाल सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल कर पुष्पक, शताब्दी, बेगमपुरा, एसी एक्सप्रेस, लखनऊ मेल जैसी लग्जरी ट्रेनों के तत्काल टिकट हैक कर लेते थे।

तीन साल की सजा व दस हजार जुर्माना

कमाई लाखों में, जुर्माना दस हजार 
आरपीएफ सीआईबी इंचार्ज अमित राय ने बताया कि टिकट दलाल पकड़े जा रहे हैं, लेकिन इस धंधे में इतना मुनाफा है कि दलाल जमानत पर छूटकर आते हैं और नई आईडी से दोबारा कारोबार खोल देते हैं। पकड़े जाने पर तीन साल की सजा व दस हजार रुपये जुर्माना है।

जमकर होती है वसूली 
दलाल दिल्ली व जम्मू की ट्रेनों में स्लीपर सीट कन्फर्म करवाने के एवज में 300 से 500 रुपये तक लेते हैं, जबकि एसी बोगियों के लिए हजार से 12 सौ रुपये वसूलते हैं। पुष्पक एक्सप्रेस, लखनऊ मेल या एसी एक्सप्रेस में टिकट कन्फर्म करवाने के एवज में मनमाने रेट लिए जाते हैं।

स्लीपर टिकट की बुकिंग पर 20 रुपये प्रति टिकट मिलता है कमीशन

इसलिए करते हैं सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल 
टिकट एजेंटों को स्लीपर टिकट की बुकिंग पर 20 रुपये प्रति टिकट और एसी में 40 रुपये कमीशन मिलता है। जबकि सॉफ्टवेयर से बनवाए गए टिकट पर वे मनमाने रेट वसूलते हैं। दूसरे, आरक्षण केंद्रों पर आम यात्रियों के लिए तत्काल बुकिंग जहां सुबह दस बजे एसी सीटों के लिए व 11 बजे स्लीपर के लिए शुरू होती है, वहीं एजेंटों को सवा दस व सवा 11 बजे बुकिंग की सुविधा मिलती है।

ऐसे में तत्काल का सॉफ्टवेयर प्रयोग कर एजेंट सेंधमारी करते हैं।

देखें ऐसे काम करता है सॉफ्टवेयर

ऐसे काम करता है सॉफ्टवेयर 
विशेषज्ञों की मानें तो यह सॉफ्टवेयर इतना तेज काम करता है कि आईआरसीटीसी वेबसाइट को पछाड़ देता है। इन सॉफ्टवेयरों पर तत्काल टिकटों की फीडिंग एडवांस में हो जाती है और जैसे ही सुबह दस बजे तत्काल कोटा खुलता है, इन सीटों की बुकिंग हो जाती है।

इन सॉफ्टवेयरों का हो रहा इस्तेमाल 
– रेड मिर्ची
– बीकॉस्यू
– टी सिस्टम
– आई स्मार्ट
– चाइना
– क्लाउड