राष्ट्रीय राजधानी में अगले साल की शुरुआत में होने वाले विधानसभा चुनावों से पहले दिल्ली कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं ने सोमवार को यहां कांग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी से मुलाकात की। कांग्रेस नेताओं के अनुसार, दिल्ली इकाई के प्रभारी पी. सी. चाको, राज्य के कार्यकारी अध्यक्ष राजेश लिलोथिया और हारुन यूसुफ ने सोनिया गांधी के साथ विभिन्न मुद्दों पर चर्चा की।
दिल्ली कांग्रेस इकाई के प्रमुख का पद तीन बार मुख्यमंत्री रहीं शीला दीक्षित का पिछले महीने निधन होने के बाद खाली हो गया।
संजय दत्त जो कि बॉलीवुड के सबसे दिग्गज अभिनेताओं में से एक हैं, 2013 में आई फिल्म पुलिसगिरी में पुलिस इंस्पेक्टर का किरदार निभा चुके हैं। पर उनके ऊपर पुलिस की वर्दी बिल्कुल भी नहीं जमती।
2. गोविंदा-
गोविंदा जो की अनेकों सुपरहिट फिल्मों में अभिनय कर चुके हैं फिल्म आ गया हीरो में पुलिस के किरदार में दिखे थे। पर वह इस फिल्म में पुलिस के किरदार में बिल्कुल भी जमते नहीं दिखे।
3. शाहिद कपूर-
शाहिद कपूर ने फिल्म फटा पोस्टर निकला हीरो में पुलिस इंस्पेक्टर का किरदार निभाया था। पर वह पुलिस की वर्दी में बिल्कुल भी सूट नहीं करते।
4. नील नितिन मुकेश-
बॉलीवुड के एक बेहतरीन विलेन नील नितिन मुकेश ने 2017 की फिल्म दशहरा में विलेन का किरदार निभाया था, पर उन पर यह किरदार बिल्कुल भी सूट नहीं किया।
5. तुषार कपूर-
तुषार कपूर जोकि एक कॉमेडियन एक्टर हैं कई फिल्मों में पुलिस की वर्दी पहन चुके हैं, पर उन पर पुलिस की वर्दी बिल्कुल भी नहीं जमती ।
कश्मीर पर पाकिस्तान को दुनिया भर के सामने शर्मिंदा होना पड़ा. हालांकि उसके लिए बेइज्जत होने का सिलसिला नया नहीं. हम आपको कुछ ऐसी तस्वीरें दिखाते हैं जिन्हें अगर वहां के प्रधानमंत्री इमरान खान देख लें तो शर्म से गड़ जाएं. इन तस्वीरों की वजह से पूरी दुनिया में पाकिस्तान की ऐसी बेइज्जती हुई कि उसे मुंह छिपाने की जगह नहीं मिली.
इस साल पाकिस्तान के स्वतंत्रता दिवस के मौके पर दुबई से एक फोटो आई. यह फोटो थी दुनिया की सबसे ऊंची इमारत बुर्ज खलीफा की, जिसपर पाकिस्तान का राष्ट्रध्वज उकेरा गया था. मगर गड़बड़ ये हो गई कि यह झंडा उल्टा था.
पाकिस्तान के स्वतंत्रता दिवस के दिन ही, लाहौर में महाराणा रणजीत सिंह की प्रतिमा तोड़ दी गई. यह तस्वीर गवाह है कि पाकिस्तान में कैसी नफरत भरी भड़ी है.
इस साल वाघा-अटारी बॉर्डर पर बीटिंग रिट्रीट समारोह के दौरान भी पाकिस्तान को शर्मिंदगी का सामना करना पड़ा. दरअसल पाकिस्तानी जवानों के पैर ठीक से नहीं पड़े और उनका बैलेंस बिगड़ने लगा. इसका वीडियो इंटरनेट पर वायरल हुआ और पाकिस्तान का खूब मजाक बना.
ये तस्वीर गवाह है कि पाकिस्तान कैसे सफेद झूठ बोलता है. संयुक्त राष्ट्र में पाकिस्तान की राजदूत ने यह तस्वीर कश्मीर में भारतीय सेना की कार्रवाई से घायल युवती की बताई थी, जबकि असल में यह फोटो गाज़ा की एक लड़की की है.
पिछले साल पाकिस्तान और ऑस्ट्रेलिया के बीच क्रिकेट सीरीज हुई. इस सीरीज की जो ट्रॉफी थी, उसने दुनियाभर में पाकिस्तान को एक बार फिर शर्मिंदा किया. यह ट्रॉफी एक बिस्किट के जैसी थी और लोग मजाक में पूछ रहे थे कि इसे खाना है कि घर ले जाना है.
प्रकृति की अनेक घटनाओं में चक्रवात, भूकंप, बाढ़ इत्यादि आते हैं| आपने ओखी, कैटरीना, वरदा जैसे चक्रवातों के नाम अवश्य सुने होंगे| आपके मन में यह प्रश्न जरूर आता होगा कि आखिर चक्रवातों के नाम कैसे रखे जाते हैं और इनके नाम कौन रखता है?
दरअसल चक्रवातों के नाम एक समझौते के तहत रखे जाते हैं| इस पहल की शुरुआत अटलांटिक क्षेत्र में 1953 में एक संधि के माध्यम से हुई थी| अटलांटिक क्षेत्र में हरिकेन और चक्रवात का नाम देने की परंपरा 1953 से ही जारी है जो मियामी स्थित राष्ट्रीय हरिकेन सेंटर की पहल पर शुरू हुई थी|
1953 तक ऑस्ट्रेलिया में चक्रवातों के नाम भ्रष्ट नेताओं के नाम पर और अमेरिका में महिलाओं के नाम (जैसे कैटरीना, इरमा आदि) पर रखे जाते थे| लेकिन 1979 के बाद से एक मेल (male) व फिर एक फीमेल (female) नाम रखा जाता है|
उत्तर-पश्चिमी प्रशांत क्षेत्र में दिए जाने वाले अधिकांश नाम व्यक्तिगत नाम नहीं हैं| हालांकि कुछ नाम पुरुष और महिला के नाम पर जरूर रखे गए हैं, लेकिन ज्यादातर नाम फूलों, जानवरों, पक्षियों, पेड़ों, खाद्य पदार्थों के नाम पर रखे गए हैं|
भारतीय सागरों में चक्रवातों के नामों को वर्णमाला क्रम में आवंटित नहीं किया जाता है| यदि किसी चक्रवात की रफ़्तार 34 नॉटिकल मील प्रति घंटा से ज्यादा है तो उसको कोई विशेष नाम देना जरूरी हो जाता है|
हिन्द महासागर क्षेत्र के 8 देशों (भारत, पाकिस्तान, श्रीलंका, बांग्लादेश, मालदीव, म्यांमार, ओमान और थाईलैंड) ने भारत की पहल पर 2004 से चक्रवाती तूफानों को नाम देने की व्यवस्था शुरू की थी| विश्व मौसम विज्ञान मौसम संगठन और एशिया और प्रशांत के लिए संयुक्त राष्ट्र आर्थिक और सामाजिक कमीशन ने साल 2000 में चक्रवातीय तूफानों का नामकरण शुरू किया| उत्तर हिन्द महासागर में उठने वाले तूफानों का नामकरण भारतीय मौसम विभाग करता है| अक्टूबर 2018 में ओडिशा के तट पर चक्रवात का नाम तितली रहा |
अब तक चक्रवात के करीब 64 नामों को सूचीबद्ध किया जा चुका है; जो कि इस प्रकार हैं;
2004 में चार चक्रवात आये थे; अग्नि, हिबारू,प्यार और बाज, इसी तरह 2005 में 3 चक्रवात आये; फानूस, माला और मुक्दा. इसी तरह 2015 में 4 चक्रवात आये, 2016 में 3 और 2017 में सिर्फ एक ‘ओखी’ जिसका नाम बांग्लादेश से रखा था| यदि अगला चक्रवात हिन्द महासागर क्षेत्र में आता है तो इसका नाम भारत द्वारा ‘सागर’ दिया जायेगा, जो कि पहले से ही इन 8 देशों ने तय कर दिया है|इसी प्रकार2019 और 2020 में जितने भी चक्रवात आते हैं उनके नाम पहले से ही तय हैं| मई 2019 में भारत चक्रवात फोनी था|
उष्णकटिबंधीय चक्रवातों के नाम को एक निश्चित नाम इसलिए दिया जाता है ताकि भविष्यवाणी और चेतावनी जारी करने वाला मौसम विभाग, सामान्य जनता को यह जानकारी दे सके कि चक्रवात किस दिशा में आगे बढ़ रहा है, उसकी गति कितनी है और लोगों को किस दिशा में सुरक्षित स्थानों की ओर जाना चाहिए| अगर किसी चक्रवात को कोई नाम नही दिया गया तो आम जनता यह नही जान पायेगी कि कौन से चक्रवात के लिए भविष्यवाणी और चेतावनी जारी की गयी है ऐसी स्थिति में जान-माल का ज्यादा नुकशान हो सकता है| इसके अलावा पडोसी देशों का सहयोग लेकर इस आपदा से आसानी से निपटा जा सकता है| अर्थात इन चक्रवातों को नाम स्थानीय लोगों और मौसम विभाग के बीच संचार को सुलभ बनाने के लिए किया जाता है|
अगर आप भी केंद्रीय कर्मचारियों की श्रेणी में आते हैं और डियरनेस एलाउंस के बढ़ने का इंतजार कर रहे हैं तो बता दें कि बढ़ा हुआ DA मिलने में कुछ समय लग सकता है. बता दें कि खबरों के अनुसार सरकार सितम्बर में DA को लेकर ऐलान कर सकती है. दरअसल सरकार ने अब तक DA की घोषणा नहीं की है. मालूम हो कि फिलहाल DA 12% की दर से तय किया गया है. बता दें कि कर्मचारियों को उम्मीद है कि इसको 5% तक बढ़ाया जा सकता है.
त्योहारों पर हो सकता है DA का एलान
आपको बता दें कि ऑल इंडिया ऑडिट एंड एकाउंट्स कमेटी के जनरल सेक्रेट्री हरीशंकर तिवारी ने इस संबंध में बताया कि त्योहार आने वाला है सितम्बर के अंत तक सरकार त्योहरों को ध्यान में रखते हुए DA का तोहफा दे सकती है.
दरअसल सरकार अभी अगर DA की घोषणा करती है तो सिर्फ जुलाई का एरियर मिलेगा. जबकि अगर सितम्बर या अक्टूबर में DA एनाउंस होता है तो कर्मचारियों को दो से तीन महीने का एरियर मिलेगा जो अच्छी रकम होगी.
बता दें कि 5% DA बढ़ने के आधार पर कम से कम 900 रुपए प्रति माह की बढ़ोतरी होगी. मालूम हो कि इस आधार पर कर्मचारियों को 1800 से 2700 रुपये तक एरियर मिल सकता है. हालांकि जिन कर्मचारियों का प्रमोशन हो चुका है उनकी बेसिक पे भी पहले से बढ़ चुकी है. बता दें कि उनके DA का कैलकुलेशन अलग होगा.
DA में होगा इस बार इतना फायदा
लेवल न्यूनतम बेसिक पे बढ़ोतरी (5% DA बढ़ोतरी के साथ) (रु. में)
लेवल 1 18000 900
लेवल 2 19900 995
लेवल 3 21700 1085
लेवल 4 25500 1275
लेवल 5 29200 1460
जानिए कितने समय पर बढ़ता है डीए
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि सरकार हर 6 महीने में महंगाई भत्ते का रिव्यू करती है. जी हां, दरअसल इस साल जनवरी में पहली छमाही में डीए में वृद्धि की गई थी. वहीं दूसरी छमाही में डीए जुलाई में लागू होना था हालांकि यह अब तक लागू नहीं हो सका है.
मालूम हो कि DA का कैल्कुलेशन AICPI इंडेक्स के आंकड़ों के हिसाब से होता है. दरअसल इस बार DA 5% बढ़ना तय माना जा रहा है. बता दें कि खबरों के अनुसार यह डीए अगस्त के आखिरी सप्ताह में या दशहरे के पहले लागू किया जा सकता है. दरअसल अगर ऐसा होता है तो कर्मचारियों को जुलाई, अगस्त और सितम्बर का एरियर भी मिलेगा. यानी डबल फायदा मिलने की संभावना है।
पूरे उत्तर भारत में बाढ़ का कहर जारी है. देश के कई राज्य इस समस्या से जूझ रहे हैं. कहीं सिर ढकने के लिए छत नहीं है तो किसी को खाना नसीब नहीं हो रहा. बाढ़ की तबाही के बाद जीवन अस्त-व्यस्त है. बाढ़ से बच भी जाएं तो बीमारियों का खतरा रहता है. लेकिन अगर कुछ जरूरी सावधानियां बरती जाएं तो इनसे बचा जा सकता है.बाढ़ के दौरान बीमारियां फैलने का सबसे ज्यादा डर दूषित खाने और पानी से होता है.
राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एनडीएमए) ने बीमारियों से बचने के लिए लिए कुछ सुझाव दिए हैं, जिन्हें अपनाकर आप अपने परिवार को बाढ़ से होने वाली बीमारियों और बाकी समस्याओं से बचा सकते हैं.
बाढ़ के दौरान बीमारियों से बचें – 7 सावधानियां
सिर्फ सूखा और ताजा खाना ही खाएं. बासी खाना न खाएं
पानी को अच्छी तरह उबालकर या फिर उसमें क्लोरीन की गोली डालकर उपयोग करें.
अगर पानी की लाइन या सीवेज टूट गए हों तो नल और टॉयलेट का उपयोग न करें
घर के आसपास के इलाके को साफ रखें, गंदगी न फैलने दें
बच्चों को बाढ़ के पानी में खेलने से रोकें
अगर आपके बिजली के स्विच टूटे हुए हैं तो उनका उपयोग न करें
मलेरिया जैसी बीमारियों से बचने के लिए मच्छरदानी का उपयोग करें
बता दें कि फिलहाल कुछ राज्य पूरी तरह से भारी बारिश और बाढ़ की चपेट में हैं. उत्तराखंड और हिमाचल जैसे राज्यों में भारी बारिश ने जमकर तबाही मचाई है. ईस्ट मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, ओडिशा, तमिलनाडु, पुडुचेरी सहित कई राज्यों में भारी बारिश की चेतावनी जारी की गई है. इनके अलावा पंजाब, हरियाणा और दिल्ली में भी बाढ़ को लेकर अलर्ट जारी किया गया है.
पाकिस्तान में महंगाई लगातार आसमान छू रही है। महंगाई की मार झेल रहे पाकिस्तान में इमरान सरकार भी नाकाम नजर आ रही है। खाने-पीने के सामान से लेकर सोना-चांदी के भाव में आग लगी हुई है। पाकिस्तान सरकार की नाकामयाबियों की वजह से निवेशकों का भरोसा भी कम होते जा रहा है। पाक में हालात बद से बदतर होते जा रहे हैं। महंगाई सर चढ़कर तांडव कर रही हैं वहां की आवाम त्रस्त हैं।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, आम जनता की रोजमर्रा की जरूरतों को पूरा करना भी मुश्किल हो गया हैं। यहाँ दाल, चीनी, गैस, दूध, फल समेत तमाम चीजों के दामों में आग लगी हुई है।
दूध – पाकिस्तान में दूध भारत की तुलना में दोगुने से भी ज्यादा कीमत पर बिक रहा है। यहां एक लीटर दूध के लिए लोगों को 100 रु से 120 रुपये देने पड़ रहे हैं।
चाय नसीब होना भी मुश्किल – कमरतोड़ महंगाई ने लोगों से चाय भी छीन ली हैं। बता दें की यहाँ दूध तो महंगा हैं ही लेकिन एक किलो चीनी के लिए लोगों को 80 रुपये चुकाने पड़ रहे हैं।
दाल – भारत से व्यापारिक तोड़ने से पाकिस्तान ने अपने पैर पर ही कुल्हाड़ी मार ली है। पडोसी देश में दाल की कीमतें आसमान छू रही हैं। यहाँ चना दाल 160 रु, मूंग दाल 170 रु, मसूर दाल 130 रु और अरहर की दाल 180 रु किलो तक बिक रही है।
पेट्रोल व कूकिंग गैस – पाकिस्तान में पेट्रोल व कूकिंग गैस की कीमत भी आसमान छू रही है। यहाँ एक लीटर पेट्रोल की कीमत 117 रुपये है।
बता दें कि पाकिस्तान में डॉलर की कीमत भारत के मुकाबले दोगुने से भी ज्यादा है। भारत में एक डॉलर की कीमत 71 रुपये 14 पैसे है वहीं पाकिस्तान में एक डॉलर की कीमत 159 रुपये 76 पैसे हैं। इससे आप अंदाजा लगा सकते है कि पाकिस्तान कितना कंगाल हैं। इसके बावजूद पाकिस्तान अपने हरकतों से बाज आने वाला नहीं है।
ड्यूक एंड डचेज ऑफ कैम्ब्रिज प्रिंस विलियम और उनकी पत्नी केट मिडिलटन अक्टूबर में होने वाला पाकिस्तान का दौरा कैंसिल कर सकते हैं। मीडिया रिपोर्ट्स में कहा गया है कि भारत और पाकिस्तान के बीच बढ़ते तनाव की वजह से दोनों दौरा टालने का फैसला ले सकते हैं। जून में दोनों का पाकिस्तान का दौरा करने की खबरें आई थीं। आपको बता दें कि पांच अगस्त को भारत ने जम्मू कश्मीर से आर्टिकल 370 को हटाने का फैसला किया है। इसके बाद राज्य को मिला विशेष दर्जा खत्म हो गया है। भारत के फैसले के बाद से ही दिल्ली और इस्लामाबाद के बीच तनाव के हालात हैं।
पाकिस्तान की ओर से की गई थी रिक्वेस्ट
मीडिया रिपोर्ट्स में ब्रिटेन के फॉरेन एंड कॉमनवेल्थ ऑफिस की ओर से जारी बयान का हवाला दिया गया है। पाकिस्तान के न्यूज इंटरनेशनल की ओर से कहा गया है कि शाही जोड़े का पाकिस्तान दौरा हो पाएगा ऐसा संभव नहीं लगता क्योंकि क्षेत्र में इस समय तनाव है। जून में आधिकारिक बयान जारी कर किंग्सटन पैलेस ने जानकारी दी थी कि प्रिंस विलियम और केट अक्टूबर में पाकिस्तान का दौरा करेंगे। दोनों का पाकिस्तान दौरा उस समय तय हुआ था जब इस्लामाबाद की ने फॉरेन एंड कॉमनवेल्थ ऑफिस के पास अनुरोध किया गया था। प्रिंस विलियम और केट अगर पाकिस्तान जाते तो किसी शाही परिवार से कोई 13 वर्ष बाद पाकिस्तान की सरजमीं पर कदम रखता।
क्वीन एलिजाबेथ दो बार गईं पाकिस्तान
प्रिंस विलियम से पहले उनकी दादी क्वीन एलिजाबेथ II साल 1961 और 1997 में पाकिस्तान गई थी। एलिजाबेथ का पहला पाक दौरा ऐसे समय में हुआ था जब शीत युद्ध अपने चरम पर था और पाकिस्तान पश्चिमी देशों का चहेता बना हुआ था। उनके बाद उनके पिता प्रिंस चार्ल्स और उनकी पत्नी कैमिला ने साल 2006 में पाकिस्तान का दौरा किया था। प्रिंस चार्ल्स को प्रिंस ऑफ वेल्स और उनकी पत्नी को डचेज ऑफ कॉर्नवेल की उपाधि मिली हुई है। वहीं, प्रिंस विलियम की मां प्रिंसेज डायना अक्सर पाकिस्तान जाती रहती थीं। पाक के प्राइम मिनिस्टर इमरान खान की पहली पत्नी जेमिमा खान और डायना काफी अच्छी दोस्त थीं।
गुजरात में आणंद जिले के वासद सीएचसी सेंटर में बच्ची को जन्म देने के बाद एक महिला की मौत हो गई। मां का दूध नहीं मिल पाने की वजह से वह बच्ची 14 घंटे तक भूख से तड़पती रही। बाद में उसकी जानकारी आणंद के जिला विकास अधिकारी (डीडीओ) अमित प्रकाश यादव और उनकी पत्नी एडीशनल चीफ ज्युडीशियल मजिस्ट्रेट चित्रा रत्नू को हुई। दोनों बच्ची के पास पहुंचे। चित्रा रत्नू ने अस्पताल में बच्ची को पहले स्तनपान कराया फिर, पति की सहमति से उसे गोद भी ले लिया। इस तरह बच्ची को मजिस्ट्रेट माता, डीडीओ पिता मिल गया।
आणंद के दंपति ने लिया बच्ची को गोद
संवाददाता के अनुसार, उक्त दंपति आणंद जिले में ही तैनात है। दंपति ने यहां से बहने वाली मही नदी के नाम से ही इस बच्ची का नाम मही रखा है। खास बात यह भी है कि मही को एक भाई भी मिल गया है। दरअसल, दंपति के पास डेढ़ साल का एक लड़का भी है, उसका नाम धैवत है। इसके अलावा बेटी मही के जैविक पिता की पहले ही दो पुत्रियां हैं। तीसरी बच्ची का जन्म और पत्नी की मौत से उसे पालने में परेशानी आना तय था। लिहाजा पिता ने भी बच्ची को गोद देने के लिए हामी भर दी।
वडोदरा में हुई थी मां की मौत
आणंद में ऐसा हो रहा है कि जिले के किसी भी सरकारी अस्पताल में प्रसुति के दौरान महिला की मौत होती है तो डीडीओ को जानकारी देनी होती है। ऐसे में जब डिलीवरी के वक्त गर्भवती महिला की हालत नाजुक होने पर 3 अगस्त को डीडीओ को पता चला तो वह सीएचसी और पीएसची के लिए आए। अपने तीसरे बच्चे को जन्म देने के बाद ही महिला की वडोदरा पहुंचने से पहले मौत हो गई। बारिश की वजह से मृत महिला के परिवार का कोई सदस्य वडोदरा नहीं पहुंच सका था। इस बात का जिक्र डीडीओ अमित यादव ने अपनी पत्नी सीजेएम चित्रा से किया।
पति के कहने पर चित्रा ने बच्ची को दूध
अमित ने बताया गया कि बच्ची ने पिछले 14 घंटे से कुछ भी नहीं खाया। जिसके चलते पत्नी चित्रा बच्ची को स्तनपान कराने को तैयार हो गई। बाद में अमित ने कहा कि हमने बच्ची के पिता और परिवार के बात कर बच्ची को गोद लेने का फैसला किया है। इस बच्ची को गोद लेने के लिए जरूरी सभी प्रक्रिया को पूरा किया गया है।
राज्यभर में हो रही तारीफ
दंपति के अनुसार, उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ अभियान में अपना योगदान दिया है। अब राज्यभर में लोग उनके द्वारा किए गए कार्य की प्रशंसा कर रहे हैं।
एस्सार पावर एमपी लिमिटेड पर मध्य प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने 10 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया है. बोर्ड ने कंपनी पर यह जुर्माना पर्यावरण मुआवजे के तौर पर लगाया है. एस्सार पर पहले भी 50 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया था. दरअसल, सिंगरौली में कंपनी के पावर प्लांट की एक दीवार टूटने के कारण कई किसानों की जमीनों पर राख फैल गई थी जिसके बाद उनकी फसल बर्बाद हो गई.
किसानों को मुआवजा देने के लिए कंपनी पर 50 लाख का जुर्माना लगाया गया था. हालांकि जुर्माने की सही रकम, जो कंपनी को भरनी है वह असेस्मेंट प्रॉसेस पूरा होने के बाद ही पता लगेगी. एस्सार पावर प्लांट के बांध की दीवार टूटने के कारण दूषित पानी आस-पास के गांवों में फैल गया था. लगभग 200 एकड़ जमीन पर यह पानी फैल गया था जिसके कारण किसानों की फसल बर्बाद हो हई थी. यह हादसा 6 और 7 अगस्त की देर रात हुआ था. भारी बारिश के कारण दीवार के टूटने की आशंका जताई गई लेकिन कंपनी का दावा है कि दीवार को कुछ अज्ञात लोगों ने नुकसान पहुंचाया था.
इस पूरे मामले में कंपनी किसानों के मुआवजे के लिए पहले ही 50 लाख रुपये जिला प्रशासन को दे चुकी है. वहीं अब 10 करोड़ रुपये की और रकम दी जानी है. केंद्र और राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की एक जॉइन्ट टीम ने 11 अगस्त नुकसान का आंकलन करने के लिए इलाके का मुआयना किया था. बोर्ड ने कंपनी को दीवार की मरम्मत कराने के लिए भी 15 दिन का समय दिया था. बोर्ड ने जिला प्रशासन को पावर प्लांट की बिजली-पानी सप्लाई भी तुरंत बंद करने के आदेश दिए थे.