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यहाँ नहीं आता कोई भी बारात लेकर, बंदरों की वजह से कुंवारी हैं इस गाँव की लड़कियां

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बंदर एक मेरूदण्डी, स्तनधारी प्राणी है। इसके हाथ की हथेली एवं पैर के तलुए छोड़कर सम्पूर्ण शरीर घने रोमों से ढकी है। कर्ण पल्लव, स्तनग्रन्थी उपस्थित होते हैं। मेरूदण्ड का अगला भाग पूँछ के रूप में विकसित होता है। हाथ, पैर की अँगुलियाँ लम्बी नितम्ब पर मांसलगदी है।


हर बाप की यही तमन्ना होती है लेकिन, कभी-कभी कुछ ऐसे कारण होते हैं कि वो अपनी बेटी की शादी नहीं करवा पाते हैं। कुछ पैसों की कमी से तो कुछ और भी प्रॉब्लम होती हैं।
लेकिन, कभी आपने सुना है कि बंदरों की वजह से किसी घर की लड़की की शादी ना हो। जी हाँ, आज हम एक ऐसे ही गाँव की चर्चा कर रहे हैं। इस गावं में बंदरों की वजह से लड़कियां कुंवारी हैं। यह किसी एक घर की बात नहीं है पूरे गाँव की लड़कियों की बात हैं। बंदरो की वजह से इस गाँव का कोई भी घर अपनी बेटी की शादी नहीं करवा पाया है।
बिहार की राजधानी पटना से 75 किमी. दूर भोजपुर जिले में रतनपुर गाँव। इस गाँव में लकड़ियों की शादी नहीं हो पा रही है। दरअसल, इस गाँव में बंदरो का इतना आंतक की यहाँ कोई भी बारात नहीं ला रहा हैं। बताया जा रहा है कि यहाँ पर आने वाले सभी के साथ बंदर लूट-पाट मचाते हैं। इतना ही नहीं, उन्हें लहूलुहान करते हैं। ऐसे में यहाँ आने वाले हर कोई डर के मारे इस गांव में नहीं आता।
यहाँ तक कि इसी कारण गाँव की लड़कियों की शादी भी नहीं हो पा रही हैं। बंदरो के उत्पात के कारण इस गाँव में कोई भी आने को तैयार नहीं है। यहाँ तक कि गांव के सभी लोग इन बंदरो से परेशान हैं। ग्रामीणों का कहना है कि वो जैसे-तैसे इस गाँव में जी रहे है पर बंदर किसी को घर से बाहर तक नहीं निकलने देते हैं। इतना ही नहीं, इस गाँव में बाहर के लोग भी आने को तैयार नहीं है क्योंकि जो भी बाहर का आता है बंदर उन पर हमला बोल देते हैं।
गांव के लोग बताते है कि बंदरो की वजह से इस गांव में कोई भी अपनी बेटी की शादी नहीं कर पाता हैं। यदि करता भी है तो बंदर मिठाई इत्यादि सब लूट लेते हैं और उत्पात मचाते हैं। हमने बहुत बार बंदरो के प्रकोप से बचाने के लिए सरकार से अपील की। लेकिन, आज तक किसी भी सरकार ने इन बंदरो से छुटकरा नहीं दिलाया।
हमने बहुत बार सिस्टम तक यह बात पहुँचाने की कोशिश की है पर अभी तक किसी भी तरह का कोई भी रेस्पोंस नहीं आया हैं। इतना ही नहीं, यहाँ अब बच्चे भी घर से बाहर निकलने से डरने लगे हैं क्योंकि यहाँ पर बंदर कब किस पर हमला कर ,दे इसका किसी को पता नहीं।

पूर्व वित्त मंत्री अरुण जेटली की लगातार बिगड़ रही हालत, दुआओं का दौर जारी

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पूर्व वित्त मंत्री अरुण जेटली की लगातार हालत बिगड़ रही है। जिसके बाद अब दुआओं का दौर जारी हो गया है। हर जगह उनकी ठीक होने का दुआएं मांगी जा रही है। बीते दिनों अरुण जेटली के जल्द स्वस्थ होने के लिए हवन भी किया गया। अब खबरें आ रही है कि पूर्व वित्त मंत्री अरुण जेटली की हालत बेहद नाजुक बनी हुई है। उन्हें अभी एम्स के कार्डियो-न्यूरो सेंटर में भर्ती रखा गया हैं।

जेटली एक्सट्रॉकोर्पोरियल मेम्ब्रेन ऑक्सीजनेशन (ECMO) और इंट्रा-एओर्टिक बैलून पंप (IABP) सपोर्ट पर हैं। इस पर उन्हीं मरीजों को रखा जाता है जिनका फेफड़ा और दिल काम करने में सक्षम नहीं होता। वहीं पक्ष और विपक्ष के नेता लगातार उन्हें देखने दिल्ली के एम्स अस्पताल पहुंच रहे हैं। रविवार देर रात केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह उन्हें देखने के लिए एम्स पहुंचे। इससे पहले रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और बीजेपी सांसद गौतम गंभीर उन्हें देखने के लिए एम्स पहुंचे थे।

66 साल के जेटली को सांस लेने में तकलीफ और बेचैनी की शिकायत के बाद 9 अगस्त को एम्स में भर्ती कराया गया था। एम्स ने 10 अगस्त से अरुण जेटली के स्वास्थ्य की स्थिति पर कोई बुलेटिन जारी नहीं किया है। अरुण जेटली को लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर रखा गया था। डॉक्टर्स की एक टीम अरुण जेटली की स्थिति की निगरानी कर रही है।

संघ प्रमुख मोहन भागवत ने फिर की आरक्षण पर चर्चा करने की वकालत

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राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत ने एक बार फिर आरक्षण पर चर्चा करने की वकालत की है। उन्होंने रविवार को कहा कि जो आरक्षण के पक्ष में हैं और जो इसके खिलाफ हैं, उन्हें सौहार्दपूर्ण वातावरण में इस पर विमर्श करना चाहिए। संघ प्रमुख ने कहा कि उन्होंने आरक्षण पर पहले भी बात की थी, लेकिन तब इस पर काफी बवाल मचा था और पूरा विमर्श असली मुद्दे से भटक गया था। भागवत ने कहा कि जो आरक्षण के पक्ष में हैं, उन्हें इसका विरोध करने वालों के हितों को ध्यान में रखते हुए बोलना चाहिए। वहीं जो इसके खिलाफ हैं उन्हें भी वैसा ही करना चाहिए। 

ज्ञान उत्सव के समापन सत्र में उन्होंने कहा कि आरक्षण पर बहस का परिणाम हर बार तीव्र क्रिया और प्रक्रिया के रूप में देखा गया है। इस मसले पर समाज के विभिन्न वर्गों में सौहार्द बनाने की जरूरत है। गौरतलब है कि इससे पहले संघ प्रमुख ने आरक्षण नीति की समीक्षा करने की वकालत की थी, जिसका विभिन्न दलों और जातियों ने कड़ा विरोध किया था। 

उन्होंने कहा कि आरएसएस, भाजपा और पार्टी के नेतृत्व वाली सरकार तीनों का अलग अस्तित्व है और किसी एक के काम के लिए दूसरे को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता। मोदी सरकार पर संघ के प्रभाव पर उन्होंने फिर कहा कि क्योंकि भाजपा और सरकार में संघ के कार्यकर्ता हैं, वे आरएसएस की सुनते हैं, लेकिन उनका हमसे सहमत होना जरूरी नहीं है।

विमानन ईंधन पर टैक्स घटाने की तैयारी में सरकार, सस्ता हो सकता है हवाई सफर

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सरकार ने विमानन ईंधन यानी एयर टरबाइन फ्यूल (एटीएफ) में बदलाव की तैयारी शुरू कर दी है। इसके तहत विमानन मंत्रालय ने भारत के सभी हवाईअड्डों पर एटीएफ खरीदने पर चुकाए जाने वाले अतिरिक्त करों को औचित्यपूर्ण बनाए जाने के लिए एक समिति का गठन किया है। कुछ वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों ने यह जानकारी दी है। ऐसे में एटीएफ पर कर कम होता है तो हवाई सफर भी कुछ सस्ता हो सकता है। वर्तमान में विमानन कंपनियां को अपने विमानों के लिए किसी भी हवाईअड्डे पर एटीएफ खरीदने पर थ्रोपुट शुल्क (थ्रोपुट चार्ज), इनटू प्लेन शुल्क और फ्यूल इन्फ्रास्ट्रक्चर शुल्क जैसे कई शुल्क का भुगतान करना पड़ता है। 

एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, ‘इन चार्जेस पर कई बार कर लगता है।’ एक अन्य सरकारी अधिकारी ने कहा कि विमानन कंपनियों और हवाईअड्डा परिचालकों के बीच एक प्रत्यक्ष बिलिंग व्यवस्था विकसित करने के लिए विमानन मंत्रालय ने विमानन कंपनियों, हवाईअड्डा परिचालकों, तेल कंपनियों सहित अन्य के प्रतिनिधित्व वाली एक समिति का गठन किया है। यह समिति जल्द ही अपनी रिपोर्ट जमा कर सकती है।

विमानन कंपनियों को सालाना 400 करोड़ रुपये की बचतसरकारी अनुमानों के मुताबिक, यदि प्रत्यक्ष बिलिंग व्यवस्था को लागू किया जाता है तो विमानन कंपनियों को सालाना 400 करोड़ रुपये की बचत होगी। भारत में विमानन कंपनियों के कुल खर्च में एटीएफ की हिस्सेदारी लगभग 40 फीसदी है। इसलिए एटीएफ पर किसी भी तरह के कर से विमानन कंपनियों पर खासा असर पड़ता है।

100 रुपये के शुल्क पर चुकाने होते हैं 164 रुपयेइस मामले के बारे में विस्तार से बताते हुए पहले अधिकारी ने कहा, ‘थ्रोपुट चार्ज के लिए बिलिंग का ही उदाहरण लें, जो हवाईअड्डा परिचालक द्वारा तेल कंपनी से वसूला जाता है। इसके बदले में तेल कंपनी इस चार्ज को विमानन कंपनी से वसूलती है।

हालांकि जटिल बिलिंग प्रक्रिया के चलते थ्रोपुट चार्जेस पर जीएसटी, उत्पाद शुल्क और वैट जैसे कर जुड़ जाते हैं।’ उन्होंने कहा कि दिल्ली हवाईअड्डे पर यदि हवाईअड्डा परिचालक सिर्फ 100 रुपये थ्रोपुट शुल्क वसूलता है तो विमानन कंपनी को 164 रुपये का भुगतान करना पड़ता है।

बाबर के वंशज ने कहा, राममंदिर बनेगा तो नींव रखने के लिए देंगे सोने की ईंट

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आखिरी मुगल बादशाह (Last Mughal Emperor) बहादुर शाह जफर (Bahadur Shah Zafar) वंशज हबीबुद्दीन तुसी ने अयोध्या (Ayodhya) में राम मंदिर (Ram Mandir) के निर्माण की इच्छा जाहिर की है. तुसी ने कहा है कि अगर अयोध्या में राम मंदिर बनता है तो उनका परिवार इसकी पहली ईंट रखेगा. इसके अलावा उन्होंने कहा है कि हम मंदिर की नींव के लिए सोने की ईंट दान में देंगे. हाल ही में तुसी ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर अयोध्या रामजन्मभूमि-बाबरी मस्जिद केस का पक्षकार बनने की भी मांग की थी, हालांकि उनकी याचिका स्वीकार नहीं हुई.

अंग्रेजी अख़बार टाइम्स ऑफ इंडिया को दिए एक इंटरव्यू में तुसी ने दावा किया है कि जिस राम जन्मभूमि को लेकर विवाद चल रहा है लेकिन उसके मालिकाना हक के कागजात किसी भी पक्ष के पास नहीं हैं. ऐसे में उन्होंने कहा कि मुगल वंश का वंशज होने के नाते वे अदालत के सामने अपनी बात कहना चाहते हैं. उन्होंने कहा कि वे सिर्फ अदालत के सामने अपने विचार रखना चाहते हैं. उन्होंने कहा कि वे मांग करते हैं कि सिर्फ एक बार ही सही कोर्ट उनकी बात सुन ले.

तुसी का दावा, बाबर ने सिर्फ मुस्लिम सैनिकों को नमाज पढ़ने के लिए दी थी जगह
तुसी ने कहा कि 1529 में प्रथम मुगल शासक बाबर (First Mughal Emperor Babar) ने अपने सैनिकों को नमाज पढ़ने की जगह देने के लिए बाबरी मस्जिद (Babri Masjid) का निर्माण कराया था. यह स्थान सिर्फ सैनिकों के लिए था और किसी को यहां नमाज पढ़ने की अनुमति नहीं थी. हालांकि उन्होंने इस बहस में पड़ने से इंकार किया है कि इससे पहले यहां पर क्या था. लेकिन उन्होंने कहा है कि अगर हिंदू उस जगह को भगवान राम का जन्मस्थान मानकर उसमें आस्था रखते हैं तो वे एक सच्चे मुस्लिम की तरह उनकी भावना का सम्मान करेंगे. 
जब तुसी से जमीन के मालिकाना हक के कागजात होने की बात पूछी गई तो उन्होंने कहा कि भले ही उनके पास भी इसके मालिकाना हक के कागजात न हों लेकिन मुगल वंश के उत्तराधिकारी होने की हैसियत के चलते वे इस जमीन के मालिक माने जा सकते हैं. ऐसे में उन्होंने कहा कि अगर उन्हें यह जमीन मिलती है तो वह उसे मंदिर निर्माण के लिए दान कर देंगे.

सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने बीते कई दिनों से नियमित रूप से अयोध्या मामले में सुनवाई कर रहा है. इसकी सुनवाई चीफ जस्टिस रंजन गोगोई (CJI Ranjan Gogoi) की अध्यक्षता वाली 5 सदस्यीय संवैधानिक पीठ इस मामले की सुनवाई कर रही है. इस संवैधानिक पीठ में जस्टिस एसए बोबडे, जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़, जस्टिस अशोक भूषण और जस्टिस एसए नज़ीर भी शामिल है. यह पूरा विवाद 2.77 एकड़ जमीन को लेकर है.

अमेरिका में एक अंडा और एक समोसा कितने का मिलता है क्या आप जानते हो।

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समोसा एक तला हुआ या बेक किया हुआ भरवां अल्पाहार व्यंजन है। इसमें प्रायः मसालेदार भुने या पके हुए सूखे आलू, या इसके अलावा मटर, प्याज, दाल, कहीम कहीं मांसा भी भरा हो सकता है। इसका आकार प्रायः तिकोना होता है किन्तु आकार और नाप भिन्न-भिन्न स्थानों पर बदल सकता है। अधिकतर ये चटनी के संग परोसे जाते हैं।
वैसे तो आप इंडिया में अक्सर अंडे और समोसे खरीदते रहते होगे। लेकिन क्या आपके मन में यह सवाल उठा है कि आखिर अमेरिका में एक अंडा और एक समोसे का क्या रेट होगा। आज आपको भारत की कुछ ऐसे ही चीजों के अमेरिकन रेट बताएंगे। जिनको आप भारत में अक्सर खरीदते रहते हो और हम आपको यह भी बताना चाहते हैं कि भारत में एक अंडे का रेट ₹6 है। और भारत का एक नॉर्मल समोसा करीब ₹5 का होता है चलिए अब देखते हैं अमेरिका में इसका क्या रेट होता है।
अमेरिका में एक अंडा मूल्य
यहां पर हम आपको यह भी बताना चाहते हैं कि भारत में अगर आप बॉयल अंडा लेते हो तो यह ₹7 का होता है। अमेरिका में एक अंडे का रेट ₹10 है। जो कि भारत से सिर्फ ₹4 ज्यादा है। अगर हम अमेरिका में एक दर्जन अंडे लेते हैं तो हमें इसके लिए 1.66 यूएस डॉलर चुकाने होंगे। जो कि भारत के 117 रूपए होंगे।
अमेरिका में एक समोसा मूल्य
वैसे तो भारत में समोसे का कोई फिक्स रेट नहीं है लेकिन फिर भी हम एक नॉर्मल समोसे का एवरेज लेकर मान लेते हैं कि भारत में एक समोसा ₹5 का होगा।समोसे के मामले में अमेरिका सबसे महंगा देश माना जाता है यहां आपको एक समोसा ₹127.18 रुपए का मिलेगा। जो कि भारत के मुकाबले कहीं ज्यादा महंगा है। अगर हम आपको इसको यूएस डॉलर में बताएं तो अमेरिका में दो समोसे 3.58 यूएस डॉलर के मिलेंगे। यानी भारत के 254.36 रुपए।

छत्तीसगढ़ में कम बारिश से चिंता में किसान, अब बोरवेल के भरोसे खेती…

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छत्तीसगढ़ का अन्नदाता फसल की पैदावार को लेकर चिंतित है, क्योंकि बरसात की आस अधूरी रह गई है। ऐसे में महामाया के बजाय सरना, एचमटी धान की लागत निकल नहीं पाएगी। अभनपुर महुदा गांव के किसान रुक्मणी साहू ने कहा कि आषाढ़ के बाद सावन का महीना भी सूखा में बीत गया, लेकिन जिले में अब तक अच्छी बारिश नहीं हुई है। फसलों को पानी नहीं मिलने से वे सूखने के कगार पर पहुंच गई हैं। वहीं कुछ लोगों के पास बोरवेल की सुविधा है। उसी के भरोसे खेती तैयार कर रहे हैं। बाकी किसानों की खेती भगवान भरोसे है यानी धान को कुल पानी का अभी तक 25 फीसद ही पानी मिल पाया है।

किसानों का बियासी कार्य रुका

जिले की संभावित औसत वर्षा 705 मिमी है, लेकिन अभी तक जिले में 503.6 मिमी ही बारिश हुई है। आषाड़ का महीना सूखा बीतने के बाद अब किसानों को तीजा नवरात्रि तक बरसात की उम्मीद लगाए बैठे हैं। आसमान पर बादल तो छाते हैं, लेकिन बारिश नहीं होती है। किसानों ने शुरू में हुई अच्छी बरसात से बोनी कार्य तो पूरा कर लिया। वहीं अभी कई हिस्सों में रोपाई भी हो गई, लेकिन कई किसानों का बियासी का कार्य भी बरसात के कारण रुका हुआ है।

प्रदेश में सामान्य हुई बरसात

प्रदेश में बस्तर के छह जिलों में अधिक बरसात हुई है, जहां पर वाटर मैनेजमेंट के तहत पानी को जमा करना चाहिए। इसके अलावा सरगुजा, राजनांदगांव, दुर्ग, बेमेतरा, भाटापारा, मुंगेली, रायपुर जिले के कुछ ब्लॉक में कम बरसात हुई है। हालांकि अभी भादों की बरसात शेष है, जिससे किसानों को घबराने की आवश्यकता नहीं है, क्योंकि धान की फसल को लगभग 900 से 12 मिमी पानी की आवश्यकता होती है, जिसमें 500 मिमी तक मिल चुका है।

बांध में पानी हुआ कम

किसानों के लिए पानी की दिक्कत लगभग आठ जिलों में है। इसी तरह से प्रदेश के लगभग 44 छोटे-बड़े डैम, तालाब में पानी उनकी कुल समक्षता के अनुरूप 68 फीसद भरा हुआ है, जो कि पिछले वर्ष भी 15 अगस्त तक यह संख्या 56 फीसद रहा था, इसलिए डैम के आसपास के किसानों को राहत हैं। बाकी ब्लॉकों में सूखा है।

क्या कहते हैं कृषि वैज्ञानिक

इंदिरा गांधी कृषि विवि में मौसम वैज्ञानिक व विभागाध्यक्ष डॉ. जीके दास का कहना है कि किसानों को परेशान होने की जरूरत नहीं है। किसान खेत की नमी को देखते हुए एक बार में युरिया का छिड़काव नहीं करे, बल्कि दो से तीन बार का छिड़काव फसल में किया जाए। इससे धान की फसल प्रभावित नहीं होगी। वहीं कृषि विभाग भी जिलेवार के बदले सुख रहे ब्लाकों के कृषकों को जागरूक करना चाहिए। वहीं आने वाले दिनों में बारिश के अच्छे संकेत है, इसलिए किसान परेशान नहीं हो।

किसानों से बातचीत

बारिश नहीं होने से खेत की नमी गायब कम हो गई है। कुछ दिन पहले हुई बरसात से सड़कों का पानी खेत में आया है। इसी के भरोसे फसल है। – रुक्मणी साहू

तीजा तक अच्छी बरसात होने की उम्मीद में बैठे है, अन्यथा फसल की कुल लागत भी निकलना मुश्किल है। – अलंग राम साहू

उंचान होने के कारण खेत में पानी रुकता नहीं है, जिससे देरी से रोपाई किया, अब फसल के लिए पानी है। – नंदकुमार पटेल

बोरवेल के माध्यम से धान की सिंचाई कर रहे है, लेकिन आगे चलकर स्थिति दिक्क्त हो जाएगी।

टमाटर के बाद अब झेलनी पड़ रही दवाओं की मार, पाकिस्तान की जनता का हाल बेहाल…

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मोदी सरकार द्वारा जम्मू-कश्मीर से आर्टिकल 370 हटाने के बाद से पाकिस्तान काफी बौखलाया हुआ है. पाकिस्तान ने अपनी इसी बौखलाहट में भारत के साथ द्विपक्षीय व्यापार को बंद कर दिया था, लेकिन अब पाकिस्तान को अपने इस फैसले के कारण महंगाई की मार झेलनी पड़ रही है.

खबरों के मुताबिक, पाकिस्तान सरकार के इस फैसले के कारण वहां के लोगों को महंगाई की मार झेलनी प़ड़ रही है. खबरों के अनुसार, पाकिस्तान के बाजारों में दवाओं की काफी कमी है, जिससे लोगों को मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है. 

दवाओं के साथ-साथ पाकिस्तान के लोगों क रोजमर्रा के सामानोंं के लिए भी महंगाई का सामना करना पड़ रहा है. इसे लेकर अब पाकिस्तान के नियोक्ता महासंघ ने सरकार से अपील की है कि वह भारत से हवाईअड्डों या फिर बंदरगाहों पर पहले से ही पहुंचे सामानों को स्थानीय बाजारों में लाने की अनुमति दे दें.

महासंघ ने पाकिस्तान की सरकार से कहा है कि उन्हें आशंका है कि जीवन रक्षक दवाएं, जो भारत से कच्चे माल के रूप में आती हैं. वह बाजारा से गायब हो सकती है. इसलिए महासंघ ने सरकार से अनुरोध किया है कि वह अपने नियमों में तब तक ढील कर दें जबतक आयात के लिए कुछ अन्य व्यवस्था ना हो जाए.

दर्शन के लिए लगी 3 किमी लंबी कतार, ‘तिरुपति बालाजी’ मंदिर में उमड़ा भक्तों का सैलाब…

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 देश के सबसे धनवान मंदिरों में से एक तिरुपति मंदिर में इन दिनों भक्तों का सैलाब आया हुआ है. आंध्र प्रदेश के चित्‍तूर जिले में स्थित भगवान वेंकटेश्‍वर के तिरुपति बालाजी मंदिर में पिछले लगभग एक सप्ताह से रोजाना हजारों की तादाद में श्रद्धालु भगवान के दर्शन के लिए पहुंच रहे हैं. 16 अगस्त को भी यहां हजारों की तादाद में श्रद्धालु पहुंचे और भगवान के दर्शन किए.

प्राप्त जानकारी के अनुसार बीते शुक्रवार यानी 16 अगस्त को 80,957 भक्‍तों ने भगवान के दर्शन किए. वहीं मंदिर को चढ़ावे के रूप में कुल 3.32 करोड़ रुपये आए. उल्लेखनीय है कि पिछले एक सप्ताह से तिरुपति मंदिर में बड़ी संख्‍या में भक्त पहुंच रहे हैं, जिससे रोजाना दर्शन के लिए श्रद्धालुओं की लंबी कतार देखने को मिलती है. ऐसे में हालात यह हैं कि सर्वदर्शन का औसत समय भी 16 घंटे का हो गया है, जिससे श्रद्धालु 16 घंटों तक भगवान के दर्शन कर पा रहे हैं. मंदिर में भक्तों की तादाद का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि मंदिर में दर्शन को जाने वाले सभी कंपार्टमेंट फुल हैं और श्रद्धालुओं को क्यू कॉम्प्लेक्स के बाहर प्रतीक्षा करना पड़ रही है.

इतना ही नहीं बालाजी के दर्शन के लिए भक्तों की 2 से 3 किमी लंबी कतार देखने को मिल रही है. बता दें कि प्रभु वेंकटेश्वर या बालाजी को भगवान विष्णु का अवतार माना जाता है. ऐसा माना जाता है कि भगवान विष्णु ने कुछ समय के लिए स्वामी पुष्करणी नामक तालाब के किनारे निवास किया था. ऐसे में भक्त भगवान के दर्शन के लिए घंटों प्रतीक्षा करने में भी नहीं कतरा रहे हैं.

आयुर्वेद में बताया इन चीजों के सेवन से पाचन तंत्र जिंदगी में कभी खराब नहीं होगा…

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पाचन वह क्रिया है जिसमें भोजन को यांत्रि‍कीय और रासायनिक रूप से छोटे छोटे घटकों में विभाजित कर दिया जाता है ताकि उन्हें, उदाहरण के लिए, रक्तधारा में अवशोषित किया जा सके. पाचन एक प्रकार की अपचय क्रिया है: जिसमें आहार के बड़े अणुओं को छोटे-छोटे अणुओं में बदल दिया जाता है।

तो चलिए आपको बताते हैं उन्हें नुस्खों के बारे मे

गुड:-
गुड हमारी पाचन क्रिया को बेहतर करने के लिए बहुत ही अच्छी औषधि है| आयुर्वेद में बताया गया है कि अगर आप खाना खाने के बाद गुड़ का सेवन नियमित रूप से करते हैं तो आपका पाचन तंत्र जिंदगी में कभी खराब नहीं होगा|

आंवला:-
आयुर्वेद में आंवले को बहुत अच्छी औषधि माना गया है| क्योंकि है शरीर के तीनों रोगों वात पित्त कफ को ठीक करने की ताकत रखता है| आंवले में बहुत ज्यादा मात्रा में औषधीय गुण पाए जाते हैं| रोज आंवले का सेवन करने से आपका पाचन तंत्र बेहतर होगा।

जीरा:-
जीरा हमारे पाचन तंत्र को मजबूत करने के लिए बहुत अच्छी औषधि है| आप एक चम्मच जीरे को एक गिलास पानी में भिगोकर रख दें और सुबह उस पानी को पी लें तथा जीरे को खा ले| कुछ देने ऐसा करने से आपका पाचन तंत्र बहुत मजबूत हो जाएगा और खाना भी बहुत जल्दी पचने लगेगा|