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भूपेश सरकार के ड्रीम प्रोजेक्ट में बड़ी लापरवाही, फंड के अभाव में रुका गौठान निर्माण…

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छत्तीसगढ़ सरकार (Chhattisgarh Government) ने चार चिन्हारी के रूप में नरवा गरवा घुरवा और बारी बचाने के लिए सूबे में मुहीम छेड़ रखी है. लेकिन जिस तरह से ग्राम अमरताल (Amartal) में गौठान बनाने में लेटलतीफी (Lateality) और लापरवाही (negligence) उजागर हुई है, उससे ऐसा नहीं लगता है कि चार चिन्हारी में से एक चिन्हारी गाय (Cow) को बचाया जा सकता है. क्योंकि ग्राम अमरताल में गौठान नहीं बनने से सड़क (Road) में बैठे हुए मवेशी आए दिन दुर्घटना का शिकार हो रहे है. तो वहीं गौठान नहीं बनने से मवेशी किसानों के खेतों में घुस कर धान की फसल को भी चौपट कर रहे है. फिलहाल अमरताल के ग्रामीण इस वजह से काफी परेशान है. साथ ही ग्रामीणों (Farmers) ने जल्द से जल्द गौठान(Gothan) निर्माण कराए जाने की भी मांग की है.

अमरताल के ग्रामीण और पूर्व सरपंच का आरोप है कि फंड की कमी की वजह से गौठान नहीं बन पा रहा है. तो वहीं गौठान नहीं बनने से मवेशी सड़क किनारे बैठे रहते है जिससे सड़क पर चलने वाले राहगीर मवेशियों से टकराकर दुर्घटना का शिकार हो रहे है. यहां तक ती सड़कों पर बैठे मवेशी भारी वाहनों की चपेट में आकर आए दिन दुर्घटना(Accident) का शिकार भी हो रहे है. सरपंच ईश्वरी देवी का कहना है कि अमरताल ग्राम का उपेक्षा क्षेत्र के विधायक,सांसद और अधिकारी भी करते है. गांव के लिए कोई फंड ना तो सांसद देते हैं, ना विधायक और ना ही अधिकारी यहां के लिए किसी भी विकास कार्य (Development work) के लिए जल्दी से फंड देते है. यही वजह है कि काम अटका पड़ा हुआ है.

सरपंच सचिव रामायण यादव भी गौठान निर्माण बंद होने का टिकरा शासन और प्रशासन पर ही फोड़ रहे है. उनका साफ साफ कहना है कि जब तक फंड नहीं आएगा, तब तक काम नहीं कराया जाएगा. अब तक जो भी पैसा (Money) हमारे पास था उसे लगाकर कार्य कराया गया है. हमे अपना ही पैसा नहीं मिला है. बाजार से उधार लेकर काम कराया गया है. अब जब सरकार से पैसा मिलेगा तभी काम आगे बढ़ेगा. वहीं इस मामले जिला पंचायत के सीईओ तीर्थराज अग्रवाल का कहना है कि ग्राम अमरताल में गौठान का काम प्रगति पर है. बारिश होने के कारण काम धीरे हो गया था. सब इंजीनियर को निर्देशित किया गया है. राशि की कोई समस्या नहीं है, मनरेगा और चौदहवें वित्त की राशि उपयोग करने की अनुमति दे दी गई है.

सरकार ने तैयार किया ये नया प्लान, अब छत्तीसगढ़ी भाषा तय करेगी अफसरों का फ्यूचर …

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सरकार (Government) का मानना है कि इससे ना केवल गैर छत्तीसगढ़िया अधिकारी और कर्मचारी छत्तीसगढ़ी सीखेंगे और उसे उपयोग में लाएंगे, बल्कि इससे ग्रामीणों (Villagers) से उनका संवाद भी ठीक से हो पाएगा.

छत्तीसगढ़ी (Chhattisgarhi) राजभाषा (Official Language) आयोग को बने कई साल हो गए, लेकिन इस बात को लेकर हमेशा सवाल उठते रहे कि राज्य के गैर छत्तीसगढ़ी अधिकारी (Officers) और कमर्चारियों को छत्तीसगढ़ी भाषा का ना ही प्रशिक्षण दिया गया ना ही राजकाज में भाषा की अनिवार्यता की गई. वहीं अब सरकार राज्य के अधिकारी-कर्मचारियों की सीआर Confidential Report (CR) लिखने के लिए छत्तीसगढ़ी की जानकारी को अनिवार्य करने पर विचार कर रही है. इसके लिए जल्द प्रस्ताव (Offer) तैयार किया जा सकता है. सरकार का मानना है कि इससे ना केवल गैर छत्तीसगढ़िया अधिकारी और कर्मचारी छत्तीसगढ़ी सीखेंगे और उसे उपयोग में लाएंगे, बल्कि इससे ग्रामीणों से उनका संवाद भी ठीक से हो पाएगा. वहीं इसके लिए मंत्रालय (Ministry) में अगले सप्ताह से प्रशिक्षण (Training) भी शुरू किया जा रहा है. वहीं बीजेपी (BJP) ने भी इस पहल का स्वागत किया है.

छत्तीसगढ़ी राजभाषा आयोग के पूर्व सचिव सुरेन्द्र दुबे (Surendra Dubey) का कहना है कि ये विचार छत्तीसगढ़ी भाषा के साथ इस राज्य के स्थानीय निवासियों के हित में भी है. उनका कहना है कि उन्होंने अपने कार्यकाल में बकायदा प्रशासनिक शब्दावली (Administrative terminology) भी तैयार कराई थी, ताकि प्रशासनिक कामकाज में इसका उपयोग किया जा सके. वहीं छत्तीसगढ़िया क्रांतिसेना के प्रदेश अध्यक्ष अमित बघेल (Amit Baghel) का कहना है कि ये एक अच्छी पहल है. लेकिन सरकार को यह मॉनिटर करने की भी जरूरत है कि अधिकारी- कर्मचारियों ने छत्तीसगढ़ी जानने के बारे में जो दावा किया है वो सहीं है या नहीं. केवल कागज में भर दिया और प्रमोशन पालें, ये नहीं होना चाहिए. 

अरुण जेटली पर राखी सावंत ने की विवादित पोस्ट, सोशल मीडिया पर तस्वीर शेयर कर लिखा ‘RIP’

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पूर्व वित्त मंत्री अरुण जेटली इस वक्त एम्स में भर्ती हैं। उनकी हालत नाजुक बनी हुई है। शुक्रवार देर रात भाजपा के कई बड़े नेता जेटली का हाल जानने एम्स पहुंचे। इनसे पहले राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने भी एम्स में जाकर उनका हाल चाल जाना। देशभर से लोग उनके जल्द स्वस्थ होने की दुआएं कर रहे हैं, इस बीच अभिनेत्री राखी सावंत की एक विवादित पोस्ट से बवाल हो गया है।

राखी सावंत ने अपनी इंस्टाग्राम पोस्ट में अरुण जेटली की तस्वीर शेयर करते हुए लिखा- ‘RIP’ (रेस्ट इन पीस)

राखी सावंत की इस पोस्ट के बाद लोगों ने उन्हें ट्रोल करना शुरू कर दिया। एक यूजर ने पोस्ट पर कमेंट करते हुए लिखा- ‘अफवाहें फैलाना बंद करें।’

अपनी पोस्ट पर घिरता हुआ देख राखी ने अपनी इस इंस्टाग्राम पोस्ट को डिलीट कर दिया। हालांकि इसके बाद राखी ने माफी भी नहीं मांगी।

राखी सावंत ने बीते दिनों ही एक NRI से शादी रचाई है। इसकी तस्वीरें उन्होंने सोशल मीडिया पर शेयर की थीं। हाल ही में उनका ब्राइडल फोटोशूट चर्चा में आया था।

दुनिया के 5 ऐसे देश जहां नहीं पाए जाते है मच्छर, पहला नाम जानकर यकीन नहीं करोगे…

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5. अंटार्कटिका

अंटार्कटिका विश्व का पांचवा सबसे बड़ा महाद्वीप है, लेकिन इतना ज्यादा ठंडा कि यहाँ मच्छर तो क्या कोई साधारण जी भी जीवित नहीं रह सकता। अंटार्कटिका में ही दक्षिणी ध्रुव निहित है और यहां का सबसे कम तापमान माइनस 90 डिग्री सेल्सियस और सबसे ज्यादा तापमान 5 से 15 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच पाता है।

4. सेशेल्स

हिंद महासागर में स्थित इस छोटे से 115 दीप समूह वाले देश में मच्छर नहीं है। इसका कारण यह बताया गया है कि यहां पर प्राकृतिक रूप से स्तनधारी जीव नहीं पाए जाते हैं। सेशेल्स अफ्रीका महाद्वीप के सबसे कम आबादी वाली कंट्री है ,यहां केवल 92000 लोग ही रहते हैं और यहां का ही ह्यूमन डेवलपमेंट इंडेक्स अफ्रीका के बाकी देशों से ज्यादा है।

3. फ्रांस

फ्रांस दुनिया का तीसरा ऐसा देश है जहां मच्छर नहीं पाए जाते है। ट्रांस को दुनिया का एक अमीर और मजबूत अर्थव्यवस्था वाला देश माना जाता है। इस देश में मच्छर ना होने का कारण यहां का मजबूत मैनेजमेंट है।

2. . न्यू केलेडोनिया

न्यू केलेडोनिया दुनिया का दूसरा ऐसा देश है जहां मच्छर नहीं पाए जाते हैं। न्यू केलेडोनिया दक्षिणी प्रशांत महासागर में ऑस्ट्रेलिया देश के पास है। इज फ्रांस के एक आधिकारिक क्षेत्र माना जाता है।

1. आइसलैंड

आइसलैंड दुनिया का पहला ऐसा देश है जहां मच्छर नहीं पाए जाते हैं। आइसलैंड को दुनिया का एक खूबसूरत और आकर्षक देश माना जाता है। आइसलैंड नॉर्थ अटलांटिक ओशन में स्थित एक छोटा सा देश है जो ग्रीनलैंड और यूरोप के बीच में पड़ता है। आइसलैंड की महासागरीय वातावरण मच्छरों का अपने से दूर खाड़ी में रहने पर मजबूर कर देती है

नीलम शर्मा दूरदर्शन की वरिष्ठ एंकर का हुआ निधन, कैंसर से थीं पीड़ित…

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दूरदर्शन समाचार (डीडी न्यूज) की वरिष्ठ एंकर नीलम शर्मा का शनिवार को निधन हो गया। वह कैंसर की बीमारी से ग्रसित थी। जिनकी उम्र लगभग 50 वर्ष थी। मार्च महीने में राष्ट्रपति ने उन्हें नारी शक्ति पुरस्कार देकर सम्मानित किया गया था।

नीलम शर्मा पिछले 20 वर्षों से दूरदर्शन से जुड़ी हुई थी। करियर के 20 साल में उन्होंने तेजस्विनी से लेकर बड़ी चर्चा जैसे कई लोकप्रिय कार्यक्रमों का संचालन किया। नीलम शर्मा ने वर्ष 1995 में दूरदर्शन से अपने करियर की शुरूआत की थी। अचानक उनके निधन से हर कोई हतप्रभ है।

बता दें कि उन्होंने डीयू के लेडी श्रीराम कॉलेज फॉर वूमेन से स्नातक की पढ़ाई की थी। उसके बाद भारतीय जन संचार संस्थान से डिप्लोमा किया। नीलम शर्मा का नोएडा के एक अस्पताल में इलाज चल रहा था। स्वास्थ्य खराब होने के चलते उन्हें वेंटिलेटर पर रखा गया था। जिनके निधन की जानकारी डीडी न्यूज ने ट्वीट कर शोक व्यक्त किया।

वहीं अब नीलम शर्मा के परिवार में उनके पति और एक 15 वर्षीय बेटा है। प्रसार भारती के एक अधिकारी ने ट्वीट करते हुए लिखा कि वह निधन की खबर सुनकर सदमे है। वह नारी शक्ति की प्रतीक थी। एक तेजस्विनी को खो दिया है।

सीजेआई गोगोई : यह समझना होगा कानून से स्नातक करने वाले कानूनी पेशा क्यों नहीं चुनते…

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भारत के मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई ने शनिवार को कहा कि वकीलों की भूमिका पर ध्यान देने की जरूरत है और यह समझने की आवश्यकता है कि कानून से स्नातक करने वाले अच्छे अवसरों के बावजूद प्राकृतिक रूप से कानूनी पेशा क्यों नहीं चुनते हैं। सीजेआई ने कहा कि वकील वादकारियों के वकील और सलाहकार के रूप में कार्य करते हैं और कानून के तहत उनके अधिकारों को सुरक्षित रखने में उनकी मदद करते हैं। अपने मुवक्किलों के लिए कार्य करते समय वह कानून की व्याख्या और न्यायाधीशों को कानूनी प्रस्तावों को निर्धारित करने में मदद करते हैं। 

न्यायाधीश गोगोई नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी के सातवें वार्षिक दीक्षा समारोह में बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि कानून के शिक्षण संस्थानों का उद्देश्य ऐसे वकीलों को सामने लाना है जो बार के भावी नेताओं के रूप में देश की सेवा कर सकेंगे।

नमाज पढ़ने से सड़क मस्जिद नहीं बन जाती

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उच्चतम न्यायालय में अयोध्या में भूमि विवाद के दौरान रामलला विराजमान के वकील सीएस वैद्यनाथन की बहस सातवें दिन जारी रही। वैद्यनाथन ने कहा कि विवादित स्थल पर ये पूर्ण मस्जिद नहीं थी और मंदिर ही था, जिसमें हिंदू पूजा करते थे। उन्होंने कहा कि मुसलमान सड़क पर भी नमाज पढ़ते हैं तो इसका मतलब यह नहीं है सड़क को मस्जिद मान लिया जाए और उसके बाद वे उस पर मालिकाना हक जताएं।

मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई की अध्यक्षता में पांच जजों की पीठ के समक्ष वैद्यनाथन ने कहा कि नमाज पढ़ने से मालिकाना हक नहीं मिल जाता, मस्जिद में कोई चित्र नहीं होता ये इस्लामिक कायदों के खिलाफ है। जबकि हिंदू खंबों पर खुदे चित्रों की पूजा करते हैं।

पत्थर का जिक्र: जस्टिस भूषण ने पूछा कि 1950 में कमिश्नर की रिपोर्ट में एक पत्थर का जिक्र आया है, जिसमें रामजन्मभूमि लिखा था, पत्थर में ये शब्द कब कुरेदे गए। इस बीच, राम जन्मस्थान उद्धार समिति ने वकील ने कहा कि ये शब्द 1901 में कुरेदे गए। समिति के सौजन्य से यह काम अयोध्या कमिश्नर ने करवाया। उस वक्त देश में ब्रिटेन के सम्राट भारत भ्रमण पर आ रहे थे।

सही व्याख्या नहीं: इस बीच, मुस्लिम पक्ष के वकील ने हस्तक्षेप किया और किया और संविधान पीठ के 1994 के फैसले में ‘नमाज कहीं भी पढ़ी जा सकती है’ को स्पष्ट नहीं किया गया है। ये इस्लाम की सही व्याख्या नहीं है।

शिवालय भी पाए गए थे: वैद्यनाथन ने बताया कि पुरातत्व विभाग द्वारा की गई खुदाई में शिवालय भी पाए गए थे। इसमें पिलर पर खड़ा एक मंडप जैसी संरचना थी। ईंटों की एक ध्वस्त दीवार थी। खुदाई में ईसा पूर्व तीसरी सदी में अशोक के समय, उसके बाद गुप्तकाल और फिर पहली सदी एडी के कुषाण काल और फिर सातवीं सदी एडी में राजपूत काल के अवशेष मिले थे।

पुरातात्विक सबूत दिखाएं : रंजन गोगोई 
इस बीच, मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई ने कहा कि पुरातात्विक सबूत दिखाएं। रामलला के वकील ने हाईकोर्ट के आदेश पर विवादित स्थल का पुरातात्विक सर्वे किया गया था। यह रिपोर्ट 2003 में आई थी, जिसमें बताया गया था कि विवादित स्थल के नीचे हिंदू मंदिर के अवशेष थे। इस रिपोर्ट के आधार पर ही हाईकोर्ट ने माना था कि मंदिर को तोड़कर ही मस्जिद बनाई गई।

मस्जिद की तरह इस्तेमाल होती थी 
पीठ के अन्य जज जस्टिस बोब्डे ने रामलला के वकील से पूछा कि सवाल ये भी है क ये मस्जिद बनी थी या मस्जिद की तरह इस्तेमाल की जाती थी। वैद्यनाथन ने कहा कि सड़क पर भी नमाज पढ़ी जाती है लेकिन इसका मतलब ये नहीं कि सड़क ही मस्जिद बन जाए, इस हिसाब से यह मस्जिद नहीं थी। लोग यहां नमाज पढ़ते रहे जिससे उनका कब्जा रहे, लेकिन इसमें आस्था का पूर्ण अभाव था।

MP : मोतियाबिंद का ऑपरेशन कराने गए 11 मरीजों ने गंवाई आंखों की रोशनी, मचा हड़कंप…

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मध्य प्रदेश के इंदौर (Indore) से एक दिल दहला देने वाला मामला सामने आया है। दरअसल यहां स्थित एक आई हॉस्पिटल (Hospital) में मोतियाबिंद के ऑपरेशन (cataract surgery) के बाद 11 मरीज़ों की आंखों की रोशनी (lost eye light) चली गई। सीएमओ प्रवीण जड़िया ने बताया कि सीएम कमलनाथ के आदेशानुसार मरीज़ों का अन्य अस्पताल में इलाज चालू है और मामले की जांच की जाएगी। वहीं राज्य के स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि उन्होंने अस्पताल का लाइसेंस रद्द करने का आदेश दिया है। मामले का खुलासा होने के बाद अस्पताल का ऑपरेशन थियेटर सील कर दिया गया है और मामले की जांच के लिये समिति गठित की गयी है।

मिली जानकारी के मुताबिक आठ अगस्त को राष्ट्रीय अंधत्व निवारण कार्यक्रम के तहत इंदौर आई हॉस्पिटल में 13 मरीजों के मोतियाबिंद ऑपरेशन किये गये थे। इनमें से तीन मरीजों को ठीक होने के पश्चात निजी अस्पताल से छुट्टी दे दी गयी थी। लेकिन शेष 10 मरीजों ने आंखों की रोशनी बाधित होने की शिकायत की है। सीएमओ द्वारा बताया गया कि पहली नजर में लगता है कि मोतियाबिंदऑपरेशनों के दौरान कथित संक्रमण से मरीजों की आंखों की हालत बिगड़ी। संक्रमण के कारणों की जांच की जा रही है। अस्पताल का लाइसेंस निलंबित करने पर विचार किया जा रहा है। इंदौर, प्रदेश के लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री तुलसीराम सिलावट का गृह नगर है। सिलावट ने मोतियाबिंद ऑपरेशनों के बिगड़ने को दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए कहा कि मामले की जांच के लिये इंदौर सम्भाग के आयुक्त (राजस्व) की अध्यक्षता में सात सदस्यीय समिति बनाने के आदेश दिये गये हैं।

फेमस रेड लाइट एरिया छोड़ अब इन इलाकों में जा रहीं सेक्स वर्कर..

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मुंबई के चर्चित रेड लाइट एरिया कमाठीपुरा को छोड़कर काफी सेक्स वर्कर्स दूसरे इलाकों में शिफ्ट हो रही हैं. मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, कम आय और रियल एस्टेट के बढ़ते दाम की वजह से सेक्स वर्क करने वाली महिलाएं कमाठीपुरा छोड़ने को मजबूर हो रही हैं. एक सेक्स वर्कर ने बताया कि उनके साथ काम करने वाली काफी महिलाएं मुंबई के उपनगरीय इलाकों में शिफ्ट कर गई हैं

एएनआई के मुताबिक, आरती नाम की सेक्स वर्कर ने कहा कि कमाठीपुरा में जिंदगी चलाने में मुश्किल होने लगी थी. वे अब ठाणे के कदावली में रहती हैं और उन्हें लंबी दूरी तय करके कमाठीपुरा आना पड़ता है. उन्होंने कहा कि रेंट तो बढ़ रहा है, लेकिन उनकी आय नहीं.

आरती ने कहा कि उन्हें परिवार की भी देखभाल करनी होती है और इसलिए कमाई कम पड़ जाती है. वहीं, एक अन्य सेक्स वर्कर ने बताया कि उनके साथ काम करने वालीं काफी महिलाएं अब कदावली, कल्याण और इनके आसपास के इलाकों में रहने लगी हैं

सोशल एक्टिविटीज इंटिग्रेशन नाम के एनजीओ के डायरेक्टर विनय वत्स का कहना है कि कमाठीपुरा में कम आय वर्ग वाली सेक्स वर्कर रहती हैं. कई महिलाएं यहां महंगा किराया नहीं दे पा रही हैं और वे नालसपोरा, तुर्भे और वशी जैसी जगहों पर चली गई हैं.

विनय ने कहा कि वे 1990 के दशक से सेक्स वर्कर्स के साथ काम कर रहे हैं. लेकिन बीते 20 सालों में रेंट काफी अधिक बढ़ गया है. अब 15 हजार रुपये महीने तक यहां रेंट देना होता है.

चूंकि कमाठीपुरा सेंट्रल मुंबई में आता है और आसपास में व्यापारिक जगहों के बढ़ने की वजह से यहां किराया काफी बढ़ गया है. रियल एस्टेट डेवलपर की नजर भी इन जगहों पर है.

सेक्स वर्कर्स के मुद्दे पर काम करने वाले एक्टर जे ब्रान्डन हिल ने कहा कि ये काफी बुरा है कि यहां रहने वाली महिलाओं को किराए की वजह से दूसरी जगहों पर शिफ्ट होना पड़ रहा है. उन्होंने कहा कि उम्मीद है कि आने वाले वक्त में स्थिति सामान्य होगी.

कमाठीपुरा को देश का दूसरे सबसे बड़ा रेड लाइट एरिया माना जाता रहा है. करीब 25 साल पहले यहां 50,000 तक सेक्स वर्कर्स रहा करती थीं. लेकिन बाद के सालों में इनकी संख्या में कमी आई.

पिता ने भारत सरकार से की ये दरख्वास्त चार पीढ़ी से देश सेवा को समर्पित शहीद संदीप का परिवार,

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लांसनायक संदीप थापा की शहादत की खबर मिलते ही पिता हवलदार(सेवानिवृत्त) भगवान सिंह की आंखे भी नम हो गईं। उनका गला भर आया। बावजूद उन्हें बेटे की शहादत पर गर्व था। भगवान सिंह का कहना है कि उनके बेटे ने भारत माता की सेवा में अपने प्राण न्योछावर किए हैं। फौज में भेजने के साथ ही उन्होंने अपने दोनों बेटों को भारत माता की सेवा में समर्पित कर दिया था। कहा कि उन्हें अपने बेटे की शहादत पर गर्व है कि वह देश के काम आया।

पाकिस्तान की कायरतापूर्ण हरकत पर उनकी आंखें गुुस्से से भर आई। एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि भारतीय सेना को पाकिस्तान की हरकत का मुंह तोड़ जवाब देना चाहिए। हर बार पाकिस्तान सीजफायर उल्लंघन कर भारतीय सैनिकों के मनोबल को तोड़ना चाहता है। कब तक भारतीय परिवार अपने घरों के बेटों को ऐसी कायरतापूर्ण हरकतों में खोते रहेंगे? भारत सरकार को पाकिस्तान के खिलाफ कड़े कदम उठाने चाहिए। जिससे वह कभी भी भारत की ओर आंख उठा कर नहीं देख सके।

लांसनायक संदीप का परिवार चार पीढ़ियों से देश की सेवा कर रहा है। संदीप के परदादा भी भारतीय सेना में थे। जिसके बाद उनके दादा लक्ष्मण सिंह भी सेना में बतौर सूबेदार अपनी सेवाएं दी। पिता भगवान सिंह भी सेना में हवलदार के पद पर तैनात रहें। वहीं, अब लासंनायक संदीप के साथ ही उनके भाई नवीन थापा भी सेना में सैनिक के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। 

लांसनायक संदीप थापा के भाई नवीन थापा ने कभी सपने में भी नहीं सोचा था कि उन्हें अपने भाई की शहादत की खबर माता-पिता को देनी पड़ेगी। नवीन भी संदीप के साथ गोरखा राइफल में राजौरी सेक्टर के नौशेरा में तैनात थे। शनिवार की सुबह दोनों ही नोशेरा में पाकिस्तान की ओर से की गई कार्रवाई का जवाब दे रहे थे। तभी संदीप सिंह गोलाबारी में घायल हो गए। जिसके बाद उन्हें उपचार के लिए सेना अस्पताल ले जाया गया। जहां उपचार के दौरान वह शहीद हो गए।

सेना के उच्चाधिकारियों ने यह खबर नवीन को दी तो वह फफक पड़े। इस बीच परिजनों को कहीं से खबर मिली कि राजौरी सेक्टर के नौशेरा में शहीद हुआ जवान और कोई नहीं लांसनायक संदीप है, लेकिन इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हो पा रही थी। जिसके बाद संदीप के पिता भगवान सिंह संदीप की रेंजीमेंट में तैनात और उन्हीं के गांव में रहने वाले एक जवान के घर पर गए। जो इन दिनों छुट्टी पर घर आया हुआ था।

इसी जवान ने उनकी बात फोन पर रेंजीमेंट में तैनात संदीप के छोटे भाई नवीन से कराई। जिस पर नवीन ने रुंधे हुए गले से भाई संदीप के शहीद होने की खबर अपने पिता को दी। जिसे सुन पिता भगवान सिंह एक बार के लिए स्तब्ध रह गए। उन्होंने किसी तरह अपने को संभाला और घर पहुंच घटना की जानकारी पत्नी और बेटी को दी। कुछ ही देर में यह खबर पूरे क्षेत्र में फैल गई।