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Swiggy से वेज फूड किया था ऑर्डर, लेकिन खाने में मिले 2-3 हड्डी के टुकड़े

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 क्या हो अगर आप शाकाहारी हैं और आप वेज फूड आर्डर करते हैं लेकिन उसमें हड्डियों के 2-3 टुकड़े मिलते हैं? और ये बात भी आपको खाना खाते वक्त मालूम हो। जाहिर है कि इससे फूड सर्व करने वाले ऐप के प्रति आपका विश्वास टूट जाएगा। ऑनलाइन फूड डिलीवर करने वाली कंपनी स्वीगी से खाना ऑर्डर करने वाली एक महिला पत्रकार के साथ भी यही हुआ। महिला पत्रकार ने जब इसकी शिकायत स्वीगी से की, उनकी तरफ से तरह-तरह के बहाने दिए जा रहे थे।स्वीगी 
वेज फूड में मिले हड्डी के टुकड़े

रीवा सिंह ने स्वीगी से वेज फूड ऑर्डर किया था लेकिन उनके खाने में हड्डी के टुकड़े मिले तो यकीन नहीं हुआ। रीवा का कहना है कि उनको इस बात का एहसास तक नहीं था। उनका कहना था कि वेग की जगह अगर स्वीगी की तरफ से नॉन-वेज फूड आता तो लौटा देतीं, लेकिन शाकाहारी खाने में अचानक से हड्डियां मिलने लगें तो वाकई ये गंभीर बात है। रीवा ने इस बड़ी लापरवाही की शिकायत स्वीगी से की लेकिन उनके रवैए से रीवा संतुष्ट नहीं थीं।

महिला पत्रकार के बार-बार शिकायत करने पर स्वीगी ने ऑर्डर रिप्लेस करने की बात कही लेकिन रीवा के लिए ये काफी नहीं था। रीवा ने उक्त रेस्टोरेंट को स्वीगी के लिस्ट से हटाने की मांग की लेकिन कंपनी ने इसका कोई जवाब नहीं दिया। कंपनी की तरफ से बना बनाया जवाब मिलता रहा कि उनको इस असुविधा के लिए खेद है। रीवा ने स्वीगी को समझाना चाहा कि ये वेज फूड के बदले नॉन-वेज फूड का मसला नहीं है बल्कि, वेज फूड में हड्डी के टुकड़े मिलने का मसला है क्योंकि इस तरह की गलती से तो खाने को लेकर विश्वास कमजोर हो जाएगा।

वहीं, कंपनी ने काफी देर के बाद जवाब दिया कि इस ऑर्डर का रिफंड कर दिया गया है। लेकिन रीवा का कहना था कि मसला रिफंड का नहीं, बल्कि भरोसे का है। इसके बाद कंपनी की तरफ से इसका कोई जवाब नहीं मिला। कंपनी के रवैए से परेशान रीवा ने इस मुद्दे को सोशल मीडिया पर उठाया और अपने फेसबुक-ट्विटर पोस्ट के जरिए इसकी शिकायत की, जहां कई यूजर्स की प्रतिक्रियाएं आ रही हैं। दरअसल, आज के वक्त में बहुत से लोग ऑनलाइन खाना ऑर्डर करते हैं और अगर इस कदर की गलती खाने को लेकर हो, तो फिर फूड सर्विंग ऐप्स की विश्वसनीयता सवालों के घेरे में आ जाएगी।

पद्मश्री सम्मानित श्री दामोदर गणेश बापट के निधन पर मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल ने गहरा दुःख प्रकट किया…

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मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल ने समाजसेवी पद्मश्री सम्मानित श्री दामोदर गणेश बापट के निधन पर गहरा दुःख प्रकट किया है। श्री बापट का बीती रात बिलासपुर के एक अस्पताल में निधन हो गया। मुख्यमंत्री ने अपने शोक सन्देश में कहा है कि स्वर्गीय श्री बापट ने अपना पूरा जीवन कुष्ठ रोगियों की सेवा में समर्पित कर दिया।

चांपा शहर के नजदीक ग्राम सोठी में भारतीय कुष्ठ निवारक संघ द्वारा संचालित आश्रम में कुष्ठ पीड़ितों के इलाज के साथ उनके पुनर्वास के अनेक कार्यों की उन्होंने शुरुआत की। कुष्ठ रोग के प्रति लोगों को जागरूक करने के लिए भी उन्होंने महत्वपूर्ण योगदान दिया।

 मानवता की सेवा के प्रति स्वर्गीय श्री बापट का समर्पण अनुकरणीय और देहदान का संकल्प प्रेरणादायक है। उनका निधन छत्तीसगढ़ के लिए अपूरणीय क्षति है। मुख्यमंत्री ने उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित की है।

इस पाकिस्तानी एक्ट्रेस का अपहरण और गैंगरेप किया गया था…

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हाल ही में भारत ने जम्मू और कश्मीर राज्य को विशेष दर्जा देने वाले अनुच्छेद 370 और 35A को खत्म कर दिया। अब यह एक राज्य नहीं रह गया है बल्कि दो क्षेत्रों जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में विभाजित कर दिया गया है। खैर, जम्मू-कश्मीर हमारे देश का मामला है, लेकिन यह पाकिस्तान है जो कश्मीर से अनुच्छेद 370 के निरस्त होने से घबरा रहा है। ऐसा इसलिए है, क्योंकि धारा 370 के खत्म होने के साथ ही जम्मू-कश्मीर भारत का अभिन्न अंग बन जाएगा और इससे क्षेत्र में पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद को खत्म करने में मजबूती मिलेगी।

खैर, पाकिस्तान को कश्मीर पर ध्यान केंद्रित करने के बजाय अपने देश की असफलताओं पर ध्यान केंद्रित करने की आवश्यकता है।इसकी अर्थव्यवस्था पहले से ही कमजोर है और यह दुनिया के सबसे गरीब देशों में से एक है। इसके अलावा, यह विशेष रूप से महिला अभिनेताओं के लिए रहने का सबसे बुरा स्थान बन गया है। पाकिस्तान में बलात्कार के मामले हमेशा अधिक रहे है।

वर्ष 2007-2019 में अभिनेत्रियों के बलात्कार और हत्या के मामलों की अधिकतम संख्या दर्ज की गई थी। एक कथित बलात्कार का मामला सामने आया है और यह प्रसिद्ध मंच नर्तक और अभिनेत्री सितारा बेग का था। उसका अपहरण कर लिया गया था और सात लोगों के एक समूह द्वारा पांच सितारा होटल लाहौर में कथित रूप से सामूहिक बलात्कार किया गया था।

MP के ‘उसेन बोल्ट’ ने मचाया धमाल, खेल मंत्री सहित शिवराज सिंह ने की तारीफ…

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मध्य प्रदेश के शिवपुरी जिले के धावक रामेश्वर गुर्जर ने अब बोल्ट को चुनौती दी है और नंगे पांव दौड़ते हुए ही बोल्ट के रिकॉर्ड के करीब पहुंचकर सभी को हैरान कर दिया है. उनका नंगे पैर दौड़ने वाला वीडियो सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रहा है. इस वीडियो ने सोशल मीडिया पर सनसनी मचा दी है, इसे देखकर खेल मंत्री किरण रिजिजू ने उन्हें एथलीट अकादमी में दाखिल कराने का भरोसा भी दिया है, तो वही शिवराज सिंह चौहान ने रामेश्वर गुर्जर की जमकर तारीफ की है. रिजिजू ने कहा- एथलेटिक अकादमी में कराउंगा दाखिला

धावक रामेश्वर गुर्जर वीडियो देखकर खेल मंत्रालय का जिम्मा संभाल रहे मंत्री रिजिजू ने मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को ट्विटर पर टैग करते हुए लिखा, ‘शिवराज जी, किसी से कहें कि इसे (धावक) मेरे पास ले आए. मैं उसे एक एथलेटिक अकादमी में रखने की व्यवस्था करूंगा.’

वहीं राज्य के खेल मंत्री जीतू पटवारी ने भी रामेश्वर को भोपाल में बेहतर प्रशिक्षण देने की बात कही है. पटवारी ने मंगलवार को रामेश्वर को भोपाल आमंत्रित करते हुए अधिकारियों से कहा, ‘ऐसी प्रतिभा को बेहतर खेल सुविधा, अच्छे शूज और प्रशिक्षण दिया जाए, तो वह 100 मीटर की दूरी नौ सेकेंड में ही तय कर सकता है.’

मंडी में मची अफरा-तफरी, सेब न बिकने पर सड़कों पर उतरे बागवान..

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शिमला की भट्टाकुफर फल मंडी में शुक्रवार देर रात ट्रक की ब्रेक फेल होने के कारण दो मजदूर इसकी चपेट में आ गए। जिससे गुस्‍साए मजदूरों ने शनिवार को मंडी में कामकाज ठप कर हड़ताल शुरू कर दी। इस कारण सैकड़ों बागवानों का लाखों रुपये का सेब नहीं बिक पाया। सेब न बिकने से गुस्साए बागवान सड़क पर उतर आए और बीच सड़क में प्रदर्शन शुरू कर दिया। बागबानों के चक्काजाम से ढली-संजौली मार्ग पर यातायात पूरी तरह से ठप हो गया है। रात को अनियंत्रित ट्रक ने दो मजदूरों को रौंद दिया था ट्रक में सेब लदा हुआ था।

तेज रफ्तार ट्रक नंबर यूपी-15 डीटी-4211 ने मजदूरों को रोंदने के बाद एक अन्य ट्रक एचआर 45 सी-1700 को टक्कर मार दी। सेब सीजन के चलते फल मंडी में लोगों की काफी भीड़ थी। दोनों घायलों को आइजीएमसी में इलाज चल रहा है। वहीं घटना के बाद आरोपित चालक फरार हो गया है। इस घटना के बाद फल मंडी में अफरा-तफरी मची है।

खौफ में कह दी ये बात ‘राजनाथ सिंह’ के ‘न्यूक्लियर पॉलिसी’ वाले बयान से बेचैन हुआ पाकिस्तान…

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केंद्रीय रक्षामंत्री राजनाथ सिंह अपने सख्त फैसले से विरोधियों के हौसले तोड़ने के लिए जाने जाते हैं। इसी सिलसिले में इस बार रक्षामंत्री ने ‘न्यूक्लियर पॉलिसी’ पर एक धमाकेदार बयान दिया। इस धमाकेदार बयान की वजह से पड़ोसी मुल्क यानि पाकिस्तान में चारो तरफ हाहाकार मच गच गया है। जी हां, राजनाथ सिंह का ‘न्यूक्लियर पॉलिसी’ वाला बयान आग की तरह सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, जिससे पाकिस्तान की रातों की नींद और दिन का चैन खोता हुआ नज़र आ रहा है। बौखलाहट तो इतनी ज्यादा हो गई है कि दिन भर राजनाथ सिंह का बयान ही पाकिस्तानी मीडिया ने दिखाया। तो चलिए जानते हैं कि हमारे इस लेख में आपके लिए क्या खास है?

रक्षामंत्री राजनाथ सिंह का ‘न्यूक्लियर पॉलिसी’ वाले बयान का पाकिस्तानी मीडिया विश्लेषण कर रहा है। पाकिस्तानी मीडिया तरह तरह के सवाल ज़रूर उठा रहा है, लेकिन उसके सवालों से ही उसकी बौखलाहट सामने आ रही है कि किस तरह से राजनाथ सिंह ने सिर्फ बयान देकर ही पड़ोसी देश की कमर तोड़ दी है। बता दें कि पड़ोसी देश में इन दिनों हालात बद से बदतर होते जा रहे हैं, जिसकी वजह इमरान खान दर दर मदद मांगने के लिए भटकते हुए नज़र आ रहे हैं, लेकिन हर जगह से उन्हें मुंह की खानी पड़ रही है।

राजनाथ सिंह का ‘न्यूक्लियर पॉलिसी’ वाला बयान

केंद्रीय रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने अपने ‘न्यूक्लियर पॉलिसी’ वाले बयान में स्पष्ट रुप से कहा कि भारत की न्यूक्लियर पॉलिसी बिल्कुल स्पष्ट है, जिसमें ‘नो फर्स्ट यूज’ हमारा सिद्धांत रहा है। इसके साथ ही रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने आगे कहा कि भविष्य में क्या होगा, यह सिर्फ परिस्थितियों पर निर्भर करेगा और ये बयान उन्होंने पोखरण में दिया। बता दें कि राजनाथ सिंह के इसी बयान की वजह से पड़ोसी मुल्क में खलबली मच गई और वहां हाई कमान की मीटिंग बुलाई जाने लगी।

राजनाथ सिंह के बयान से बौखलाया पाकिस्तान

जहां एक तरफ राजनाथ सिंह पोखरण से ‘न्यूक्लियर पॉलिसी’ पर बयान दे रहे थे, तो वहीं दूसरी तरफ उनके बयान का विश्लेषण पाकिस्तानी मीडिया कर रहा था। पाकिस्तानी मीडिया ने उनके बयान का विश्लेषण करते हुए कई तर्क पेश की, जिसमें सभी तर्कों में सिर्फ और सिर्फ पाकिस्तान का डरा हुआ चेहरा ही सामने आया। दरअसल, पाकिस्तान की मीडिया ने अपने तर्क में कहा कि अब युद्ध होगा, तो भारत न्यूक्लियर स्ट्राइक करेगा, क्योंकि उसने खुली चुनौती दी है।

चोर की दाढ़ी में तिनका वाला पाकिस्तान राजनाथ सिंह ने अपने बयान में कहीं पर भी पाकिस्तान का जिक्र नहीं किया, लेकिन पाकिस्तानी मीडिया ने दिन पर उसी मुद्दे पर चर्चा करके यह साफ कर दिया कि चोर की दाढ़ी में तिनका है, जिसका सीधा सा मतलब यही है कि पाकिस्तान अपनी हरकतों से बाज नहीं आने वाला है, क्योंकि उसे शांति रास ही नहीं आ रही है। इतना ही नहीं, पाकिस्तानी मीडिया कह रहा है कि भारत अब न्यूक्लियर स्ट्राइक कर सकता है, जिसकी वजह से सेना को तैयार रहना चाहिए।

ये है दुनिया का सबसे अमीर परिवार, हर घंटे कमाता है 28 करोड़ रुपये…

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जेफ बेजोस को तो आप जानते ही होंगे। ये दुनिया के सबसे अमीर शख्स हैं, लेकिन क्या आप ये जानते हैं कि दुनिया का सबसे अमीर परिवार कौन सा है? आपको जानकर हैरानी होगी कि दुनिया का सबसे अमीर परिवार हर घंटे 28 करोड़ रुपये से ज्यादा कमाता है। इस सूची में अंबानी परिवार भी शामिल है।

दरअसल, ब्लूमबर्ग ने दुनिया के 25 सबसे अमीर परिवारों की एक सूची निकाली है, जिनके पास लगभग डेढ़ लाख करोड़ रुपये हैं।

दुनिया के सबसे अमीर परिवारों की सूची में पहले स्थान पर सुपरमार्केट वॉलमार्ट को चलाने वाला परिवार है। रिपोर्ट के मुताबिक, वॉलमार्ट परिवार हर मिनट करीब 50 लाख रुपये, हर घंटे करीब 28 करोड़ 46 लाख रुपये और हर दिन करीब सात अरब 12 करोड़ रुपये कमाता है।

वॉलमार्ट परिवार के अलावा सूची में दूसरे स्थान पर मार्स परिवार है। उनकी कंपनी मार्स बार्स चॉकलेट बनाती है। वहीं, सूची में फरारी, बीएमडब्ल्यू और हयात होटल समूह को चलाने वाले परिवार भी शामिल हैं।

भारत के सबसे अमीर शख्स मुकेश अंबानी का परिवार इस सूची में नौवें स्थान पर है। अंबानी परिवार की कुल कमाई 50.4 बिलियन यानी करीब 5040 करोड़ रुपये है।

जानिए जब वहीदा रहमान को याद आयी ‘गाइड’ की शूटिंग…

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उदयपुर में ‘गाइड’ फिल्म की शूटिंग के दिनों की याद, करीब 50 साल बीतने के बाद एक अन्य फिल्म के सिलसिले में झीलों के शहर पहुंचीं वहीदा रहमान को अतीत के गलियारों में ले गई.

‘गाइड’ में नायिका की भूमिका निभाने वाली वहीदा ‘डेजर्ट डॉल्फिन’ की शूटिंग के लिए उदयपुर में हैं. अब 81 बरस की हो चुकीं वहीदा ने एक बयान में बताया, मैं लंबे समय के बाद उदयपुर आई हूं. मैं तब यहां आई थी जब हम ‘गाइड’ की शूटिंग कर रहे थे. हम लोग लेक पैलेस होटल में ठहरे थे.

उन्होंने बताया, जब फिल्म निर्माताओं ने इस पैलेस के दौरे का कार्यक्रम बनाया तो मेरे आश्चर्य का ठिकाना नहीं रहा. पुरानी यादें ताजा होने पर खुशी जाहिर करती वहीदा लॉस एंजिलिस में रहने वाली फिल्म निर्माता मंजरी मैकिजानी के निर्देशन में बन रही ‘डेजर्ट डॉल्फिन’ की शूटिंग उदयपुर के समीप खेमपुर गांव में कर रही हैं. यहां एक विशाल स्केटपार्क बनाया गया है. यह फिल्म प्रेरणा नामक एक किशोरी की कहानी है जिसे स्केटबोर्ड बेहद पसंद है.

एक अप्रवासी भारतीय जेसिका राजस्थान में स्थानीय समुदाय के लिए राज्य का पहला स्केटपार्क बनाती है. जेसिका की भूमिका में अमृत मघेरा हैं. आखिरी बार कमल हासन की ‘विश्वरूपम’ में नजर आईं वहीदा का कहना है कि अपने 60 बरस से अधिक के करियर में उन्होंने कभी किसी फिल्म को बजट के आधार पर बड़ी या छोटी नहीं माना.

उन्होंने कहा, मैंने कभी नहीं सोचा कि प्रोजेक्ट छोटा है या बड़ा. शुरू से ही मैं प्रयोग करना चाहती थी और मैंने किये. लेकिन कभी भी किसी भी प्रोजेक्ट को मैंने जल्दबाजी में हां नहीं कहा. वहीदा ने बताया, अब से पहले न तो मैंने स्केटबोर्डिंग के बारे में सुना था और न ही भारत में स्केटपार्क देखा था. लेकिन इस फिल्म की कहानी सुनने पर मुझे यह अलग हट कर लगी. इसलिए मैं इसके लिए तैयार हो गई.

मंजरी और उनकी बहन विनती मैकिजानी बॉलीवुड के दिवंगत अभिनेता मैकमोहन की बेटियां हैं. मैकमोहन ने ‘जंजीर’, ‘शोले’, ‘डॉन’ और ‘शान’ जैसी फिल्मों में खलनायक की भूमिका निभाई थी. ‘डेजर्ट डॉल्फिन’ की सहलेखिका और सहनिर्माता विनती हैं. यह फिल्म 2020 में रिलीज होगी.

इस राज्य में जाने के लिए लेना पड़ता है वीजा, कारण जानकर रह जाएंगे दंग…

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आमतौर पर लोगों को विदेश जाने के लिए वीजा की जरूरत पड़ती है, लेकिन आपको जानकर हैरानी होगी कि भारत में ही कुछ राज्य ऐसे हैं, जहां जाने के लिए देश के ही लोगों को ‘वीजा’ लेना पड़ता है। यहां बिना वहां की राज्य सरकार की अनुमति के आप राज्य की सीमा में प्रवेश नहीं कर सकते।

देश के उत्तरपूर्व में बसे तीन खूबसूरत राज्य मिजोरम, अरुणाचल प्रदेश और नगालैंड में ये नियम लागू हैं। इन राज्यों में ‘इनर लाइन परमिट’ लिए बगैर कोई भी भारतीय नागरिक राज्य की सीमा में घुस भी नहीं सकता। केवल स्थानीय निवासियों को ही राज्य में कहीं भी बेरोकटोक घूमने की छूट है।

दरअसल, इनर लाइन परमिट एक प्रकार का आंतरिक वीजा है। यह ठीक वैसे ही है, जैसे कि बतौर विदेशी नागरिक हम किसी और देश में जाने के लिए वीजा लेते हैं। इनर लाइन परमिट नौकरी और पर्यटन दोनों के लिए लेना होता है।

भारत में ही भारतीय नागरिकों के लिए बने इनर लाइन परमिट के इस नियम को ब्रिटिश सरकार ने बनाया था, जो अब तक लागू है। हालांकि समय-समय पर इसमें सुधार किया जाता रहा है। बंगाल ईस्टर्न फ्रंटियर विनियम, 1873 के तहत यह नियम एक सीमित अवधि के लिए किसी संरक्षित या प्रतिबंधित क्षेत्र में प्रवेश की अनुमति देता है।

कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि ब्रिटिश सरकार ने इनर लाइन परमिट का ये नियम अपने व्यापारिक हितों की रक्षा के लिए बनाया था। वहीं कुछ लोग मानते हैं कि इस नियम को सीमावर्ती राज्यों की जनजाति और उनकी संस्कृति आदि की रक्षा के लिए बनाया गया था, ताकि बाहरी लोग इन जगहों पर आकर उनकी संस्कृति को प्रभावित न कर सकें। इनर लाइन परमिट उन राज्यों की सीमा पर बनाए जाते हैं, जहां आपको जाना हो।

इसके अलावा दिल्ली, कोलकाता और गुवाहाटी में भी इनके दफ्तर मौजूद हैं, जहां से आप इनर लाइन परमिट बनवा सकते हैं। दिल्ली में मिजोरम हाउस, नगालैंड हाउस और अरुणाचल प्रदेश में ये खास परमिट बनाए जाते हैं। इनर लाइन परमिट दो तरह के होते हैं। अगर आप इन राज्यों में सिर्फ घूमने के लिए जा रहे हैं तो एक बार में आपको अधिकतम 15 दिन का ही इनर लाइन परमिट मिलेगा और अगर इससे ज्यादा दिन आप राज्य में रहना चाहते हैं तो परमिट को अगले 15 दिनों के लिए रिन्यू करवा सकते हैं।

वहीं नौकरी या रोजगार के लिए अलग परमिट बनाया जाता है। अगर विदेशी नागरिक इन राज्यों में घूमना चाहते हैं तो उनके लिए इनर लाइन परमिट की जरूरत नहीं होती, बल्कि उनके लिए ‘प्रोटेक्टेड एरिया परमिट’ का नियम है।

अरुण जेटली को एम्स में ECMO पर रखा गया, जानें क्या काम करती है ये मशीन…

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पूर्व वित्त मंत्री अरुण जेटली (66 वर्षीय) अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) में एडमिट हैं। 9 अगस्त को सांस लेने में हो रही तकलीफ की वजह से अरुण जेटली को एम्स में रात को 9 बजे भर्ती कराया गया था। एम्स में जेटली को एक्स्ट्रा-कॉरपोरियल मैम्ब्रेन ऑक्सीजेनेशन (ECMO) पर रखा गया है। ताकि वह सांस ले सकें। आज ( 17 अगस्त) दिन में गृह मंत्री अमित शाह देखने जा सकते हैं। जेटली की हालत में फिलहाल कोई सुधार नहीं है। कल शुक्रवार (16 अगस्त) देर रात गृह मंत्री अमित शाह अरुण जेटली के स्वास्थ्य का हाल जानने एम्स गये थे। जेटली जब से एम्स में भर्ती हैं पिछले इन दिनों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, गृह मंत्री अमित शाह और बाबा रामदेव समेत कई नेता उनसे मिलने एम्स पहुंच चुके हैं। इनके अलावा विपक्ष के कई नेता भी जेटली को देखने गये थे।

कैसे काम करता है ECMO पर

ECMO एक लाइफ सपोर्ट सिस्टम है, जो शरीर को उस वक्त ऑक्सीजन सप्लाई करने में मदद करता है, जब मरीज के फेफड़े या दिल काम नहीं कर पा रहे हों। एक्सपर्ट का कहना है कि इस मशीन का इस्तेमाल तब किया जाता है, जब मरीज सांस ले पाने के लिये अपने शरीर से मदद नहीं ले पाता है। इस मशीन के प्रयोग के लिए शरीर की एक नस में से खून को निकालकर उसे ऑक्सीजेनेटर मशीन से जोड़ दिया जाता है, जिससे खून दिल तथा फेफड़ों का बाईपास कर प्रवाहित होता रहता है। डॉक्टरों के मुताबिक किसी भी शख्स को इस उपकरण पर कुछ दिन के लिए भी रखा जा सकता है, और कुछ हफ्ते भी।

अरुण जेटली किस-किस बीमारी से हैं पीड़ित

अरुण जेटली डायबिटीज समेत कई बीमारियों से जूझ रहे हैं। पिछले साल मई में किडनी ट्रांसप्लांट के बाद से उनका स्वास्थ्य लगातार बिगड़ता चला गया। उनके पैर में सॉफ्ट टिश्यू कैंसर का भी कुछ ही महीनों पहले ट्रीटमेंट हुआ है। डॉक्टरों की एक टीम जेटली की निगरानी कर रही है, जिसमें एंडोक्रिनोलॉजिस्ट्स, कार्डियोलॉजिस्ट्स और नेफ्रोलॉजिस्ट्स भी शामिल हैं।

जेटली के बायें पैर में सॉफ्ट टिशू कैंसर हो गया है जिसकी सर्जरी के लिए जेटली इसी साल जनवरी में अमेरिका भी गए थे। वो सितंबर 2014 में डायबिटीज मैनेज के लिए गैस्ट्रिक बाईपास सर्जरी करा चुके हैं। इसके अलावा वो साल 2005 में हार्ट सर्जरी भी करा चुके हैं।

पिछली सरकार में वित्त मंत्री रहे अरुण जेटली ने दोबारा मंत्रिमंडल में शामिल होने से मना कर दिया था। उन्होंने पत्र में लिख कर कहा था कि उन्हें मंत्री बनाने पर विचार न करें। इसी साल मई में उपचार के लिए जेटली को एम्स में भर्ती कराया गया था।