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चाहे पेट कितना भी ख़राब हो जादू का असर दिखायेगा इस फल का रस..

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बारिश के मौसम में अक्सर तरह-तरह के बीमारी बिन बुलाये ही आ पहुँचती है। इनमें पेट की बीमारी आम है। दस्त शुरू होते ही शरीर इतना कमजोर हो जाता है की बस पूछिए मत। बचपन में जब हम दस्त शुरू होते ही हमारे पैरेंट्स हमें तरह-तरह के घरेलु दवा देना शुरू कर देते थे। इस समय पानी की कमी पूरी करने वाले फल और सब्जियां खिलाते-पिलाते रहते थे।

आजकल दस्त होने पर इलेक्ट्रोलाइट पेय पदार्थ पिलाया जाता है। लेकिन आप इसके अलावा सेब का पतला जूस भी पी सकते है। सेब के पतले जूस से पानी की कमी दूर होती है और दस्त में आराम मिलता है।

पतला सेब का जूस इलेक्ट्रोलाइट पेय का अच्छा विकल्प है। यह आंत्रशोध और पानी की कमी दोनों बीमारियों में कारगर है। इसलिए आज से ही अपने घर सब रखना शुरू कर दीजिये क्या पता कब इसकी जरूरत पड़ जाए।

बल्लेबाज ने अंपायर के सिर पर मारा झन्नाटेदार शॉट, हो गई मौत…

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डॉक्टरों की काफी कोशिशों के बाद भी जॉन विलियम्स (Umpire John Williams) को बचाया नहीं जा सका. वाकया डिविजन-2 (Division two) के मैच के दौरान का है, जो पेमब्रोक व नारबर्थ Pembroke vs Narborth के बीच हुआ था.

लगातार नई तकनीक और बदलावों के बावजूद क्रिकेट के मैदान पर अनहोनी होने का खतरा बना रहता है. न केवल क्रिकेट (Cricket) बल्कि कई खेलों में इस तरह के हादसे होते रहते हैं, जिसमें किसी खिलाड़ी तक की मौत हो जाती है. भारतीय क्रिकेट रमन लांबा (Raman Lamba) हों या फिर ऑस्ट्रेलियाई बल्लेबाज फिल ह्यूज (Phillip Huge), ऐसे तमाम उदाहरण हैं जब खेल के मैदान पर लगी चोट इतनी खतरनाक हो जाती है कि किसी की जान भी चली जाती है. क्रिकेट के मैदान पर एक बार फिर ऐसा ही एक दर्दनाक वाकया हुआ है. दरअसल, मैच के दौरान एक बल्लेबाज ने झन्नाटेदार शॉट लगाया और गेंद सीधी अंपायर के सिर पर जाकर लगी. डॉक्टरों की काफी जद्दोजहद के बाद भी अंपायर को बचाया नहीं जा सका. वाकया डिविजन-2 के मुकाबले के दौरान का है. यह मैच वेल्स में पेमब्रोक और नारबर्थ के बीच खेला गया था.

पेमब्रोक और नारबर्थ के बीच खेले गए इस मुकाबले में 80 साल के जॉन विलियम्स (John Williams) भी मैदानी अंपायरिंग की जिम्मेदारी संभाल रहे थे. यह मैच 13 जुलाई को आयोजित हुआ था. इस दौरान अंपायरिंग कर रहे जॉन विलियम्स के सिर पर बल्लेबाज का शॉट आकर लगा और वह वहीं बेहोश हो गए. उन्हें तुरंत अस्पताल ले जाया गया, जहां कई दिनों तक उनका इलाज चला, लेकिन आखिरकार गुरुवार 15 अगस्त को उन्होंने दम तोड़ दिया. डॉक्टरों की काफी कोशिशों के बावजूद उन्हें बचाया नहीं जा सका.

पेमब्रोकशायर क्रिकेट ने इस दुखद सूचना को साझा करते हुए बताया कि गुरुवार सुबह अंपायर जॉन विलियम्स से जुड़ी एक दुखद खबर सामने आई है. उनका आज अस्पताल में निधन हो गया है. निधन के वक्त परिवार के लोग उनके साथ ही थे. दुख की इस घड़ी में पेमब्रोकशायर क्रिकेट जॉन के परिवार के साथ पूरी मजबूती से खड़ा है.

जब पुलिस ने ततैया की मदद से भगोड़े को गिरफ्तार कर लिया… जानें कैसे

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जर्मनी में एक भगोड़े को पकड़ने में पुलिस जब नाकामयाब हो रही थी, तब ऐसे वक्त पर एक ततैया की मदद से पुलिस उस भगोड़े को अपने कब्जे में कर पाई। जाने-अनजाने में ततैया ने पुलिस की मदद की और जिसकी वजह से पुलिस उसे गिरफ्तार कर पाई।

जर्मनी के ओल्डेनबर्ग पुलिस ने कहा कि सोमवार को एक असामान्य स्टिंग ऑपरेशन हुआ जब अधिकारियों ने एक 32 वर्षीय व्यक्ति को गिरफ्तार करने की कोशिश की, जिसे 11 महीने की हिरासत की सजा सुनाई गई थी।

32 वर्षीय संदिग्ध (नाम जारी नहीं किया गया है) पुलिस को चकमा देकर भाग गया और बालकनी से सीधे ततैया के घोंसले में कूद गया।

इसके बाद गुस्साए ततैयों की झूंड ने उस भगोड़े आदमी पर हमला कर दिया, जिससे वह सड़क पर भागा। अधिकारियों ने उसे वहां पकड़ने की कोशिश की, मगर ततैया के हमलों को देखकर उन्होंने ऐसा नहीं किया।

हालांकि, संदिग्ध ततैयों के हमले से भाग निकलने में कामयाब रहा, लेकिन ततैया से बचने की कोशिश में वह एक इन्फ्लेटेबल पूल में कूद गया, जहां पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया।

जानिए मच्छरों को दूर रखने का सबसे अच्छा तरीका, इसे अपनाने के बाद आप चैन की नींद सो सकते हैं..

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इस समय बरसात का मौसम चल रहा है, इस मौसम में मच्छरों की संख्या कुछ ज्यादा ही हो जाती है, और हम रात में चैन से सो भी नही पाते हैं, खासतौर पर बच्चों के लिए मच्छर बेहद हानिकारक होते हैं, मच्छरों के काटने से मलेरिया जैसी खतरनाक बीमारी होने का खतरा बना रहता है।

मच्छरों से बचने के लिए लोग कॉइल आदि का इस्तेमाल करते हैं, जो सेहत के लिए बेहद हानिकारक होते हैं, इसीलिए आज हम आपको एक ऐसा तरीका बताने वाले हैं, जिससे आप न सिर्फ मच्छरों से बचे रहेंगे बल्कि आपकी सेहत को भी कोई नुकसान नही होगा।

इस उपाय के लिए सबसे पहले कोई मिटटी का बर्तन ले लीजिये, फिर इसमें 3 से 4 लहसुन की कलियों को कूटकर रख लीजिये, इसके बाद इसमें कपूर की 3 से 4 टिकिया लेकर उन्हें मसलकर इसी में डाल लें, इसके बाद इसमें आधा चम्मच देशी घी मिला लें, अब इन चीजों को अच्छे से मिक्स कर लीजिये।

अब सोने से पहले इसे जला दीजिये, यह मच्छरों को तेजी से दूर करता है, यह 10 से 15 मिनट तक जल सकता है, इससे रात भर मच्छर आपके कमरे में नही आएंगे और इसमें ऐसी चीजों का मिश्रण है जो आपकी सेहत को बिलकुल भी नुकसान नही पहुंचाती है, यह बच्चों के लिए बेहद सेफ और कारगर उपाय है।

भारतीय नोटों पर गांधी जी की ये तस्वीर आखिर क्यों छपती है ? जानिए इसके पीछे की रोचक कहानी…

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महात्मा गांधी हमारे देश के राष्ट्रपिता है. महात्मा गांधी की तस्वीर को भारतीय करंसी के ट्रेडमार्क के रूप में इस्तेमाल किया गया. लेकिन अक्सर हमारे मन में यह सवाल उठता है कि करंसी नोट पर दूसरे क्रांतिकारियों की तस्वीर क्यों नहीं छपती. कभी भी नोट पर गांधी जी के अलावा किसी दूसरे क्रांतिकारी की तस्वीर नहीं छपती. आप अगर इस सवाल का जवाब जानना चाहते हैं तो यह खबर आपके लिए है.

करंसी ट्रेडमार्क हैं महात्मा गांधी

महात्मा गांधी की तस्वीर हमारी करंसी का ट्रेडमार्क है. लेकिन यह तस्वीर कैसे नोटों पर आई, जो हमारी करंसी का ट्रेडमार्क बन गई. दरअसल, यह केवल पोट्रेट फोटो नहीं, बल्कि गांधी जी की संलग्न तस्वीर है. इसी तस्वीर से गांधी का चेहरा पोट्रेट के रूप में लिया गया.

कहां की है यह तस्वीर

यह तस्वीर उस समय खींची गई थी जब गांधी जी ने तत्कालीन बर्मा और भारत में ब्रिटिश सेक्रेटरी के रूप में कार्यरत फ्रेडरिक पेथिक लॉरेंस के साथ कोलकाता स्थित वायसराय हाउस में मुलाकात की थी. इसी तस्वीर से गांधी जी का चेहरा पोट्रेट के रूप में भारतीय नोटों पर अंकित किया गया.

रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने किया बदलाव

बता दें कि गांधी जी की तस्वीर से पहले नोटों पर अशोक स्तंभ अंकित हुआ करता था. लेकिन 1996 में रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने इसे बदलने का निर्णय लिया. इस निर्णय के मुताबिक, नोटों पर अशोक स्तंभ की जगह महात्मा गांधी की फोटो और अशोक स्तंभ को नोट के बाएं तरफ अंकित कर दिया गया. बता दें कि 1987 में जब पहली बार पांच सौ का नोट आया था तो उसमें गांधी जी का वाटर मार्क यूज किया गया था. लेकिन 1996 के बाद सभी नोटों में गांधी जी की तस्वीर अंकित हो गई.

सिर्फ एक रुपए का नोट जारी करती है सरकार

करंसी ऑफ ऑर्डिनेंस के नियम के मुताबिक भारत सरकार केवल एक रुपए का नोट जारी करती है. जबकि 2 रुपए से लेकर 2000 रुपए तक की करंसी रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया की तरफ से जारी की जाती है.

महात्मा गांधी से पहले किंग जॉर्ज की तस्वीर

सबसे पहले नोटों पर किंग जॉर्ज की तस्वीर छपी होती थी. 1996 की शुरुआत में कागजों वाले नोट जारी हुए, जिन पर महात्मा गांधी की तस्वीर छपी थी. अब वही नोट प्रचलन में हैं. किंग जॉर्ज की फोटो वाला नोट बंद होने के बाद अशोक स्तंभ वाला 10 रुपए का नोट चलन में आया.

जानिए यहां बहती है देश की सबसे साफ नदी, इतना साफ है यहां का पानी कि लगता है शीशे पर तैर रही है नाव…

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देश के उत्तर पूर्वी राज्य मेघालय में एक ऐसी नदी है जिसके चर्चे पुरे विश्व में हो रहे हैं। जी हां दरअसल इस नदी का पानी साफ़ है कि नदी का तल तक आराम से दिख जाता है। ऐसा लगता है कि नदी न हो मानो आर पार देखने वाला कोई शीशा हो।

जी हां, दरअसल मेघालय की उमनगोत नदी को देश की सबसे साफ नदी का रुतबा हासिल है। इस नदी का पानी इतना साफ है कि इसपे चलने वाली नाव भी कांच पर तैरती सी नजर आती हैं।

बता दें कि यह शिलांग से 85 किमी दूर भारत-बांग्लादेश सीमा के पास दावकी कस्बे के बीच से बहती है। यहां के लोग इसे पहाड़ियों में छिपा स्वर्ग भी कहते हैं।

मालूम हो कि इस नदी में सफाई की वजह यहां रहने वाले आदिवासी समुदायों की पुरखों से चली आ रही परंपराएं हैं। दरअसल सफाई इनके संस्कारों में है और बुजुर्ग इसकी निगरानी करते हैं।

हर दिन होती है नदी की सफाई

बता दें कि उमनगोत नदी तीन गांवों में से बहती है जो हैं दावकी, दारंग और शेंनान्गडेंग। इन्हीं गांवों के लोगों के जिम्मे इसकी सफाई है। मौसम और पर्यटकों की संख्या के हिसाब से महीने में एक, दो या चार दिन कम्युनिटी डे के होते हैं।

बता दें कि इस दिन गांव के हर घर से कम से कम एक व्यक्ति नदी की सफाई के लिए आता है। मालूम हो कि इस गांव में करीब 300 घर हैं और सभी मिलकर नदी की सफाई करते हैं।

यहां तक की इस नदी में गंदगी फैलाने पर 5000 रु. तक जुर्माना वसूला जाता है। दरअसल नवंबर से अप्रैल तक सबसे अधिक पर्यटक यहां आते हैं।

इसके अलावा मानसून में यहां बोटिंग बंद रहती है। जानकारी के लिए बता दें कि उमनगोत के पास के गांव मावलिननॉन्ग को एशिया के सबसे साफ गांव का दर्जा भी हासिल है।

लैवेंडर तेल से युवाओं में हो सकता है यह बड़ा बदलाव

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रिसर्च में माना गया है कि लैवेंडर तेल के इस्तेमाल को रोकने के बाद नौजवान लड़के-लड़कियों में होने वाली असमान स्तन वृद्धि रुक गई है

लैवेंडर तेल के बारे में किस ने नहीं सुना होगा. इसके कई फायदे भी गिनाए जाते हैं, लेकिन हाल ही ‘जर्नल ऑफ एंडोक्रिनोलॉजी मेटबॉलिजम’ में छपे एक रिसर्च में यह बात सामने आई है कि लैवेंडर का तेल युवा लड़कियों में असामान्य स्तन वृद्धि का कारण बन रहा है.

पहले के रिसर्च में यह बताया गया था कि आवश्‍यकता से अधिक मात्रा में लैवेंडर तेल का उपभोग करना लड़कों के लिए हानिकारक हो सकता है. यह लड़कों के हार्मोन विघटनकर्ता के रूप में काम कर सकता है. इसके परिणामस्‍वरूप युवा लड़कों में असामान्‍य स्‍तन वृद्धि हो सकती है. लेकिन नए हुए रिसर्च में यही बात लड़कियों के लिए भी कही गई है.

रिसर्च में माना गया है कि लैवेंडर तेल के इस्तेमाल को रोकने के बाद नौजवान लड़के-लड़कियों में होने वाली असमान स्तन वृद्धि रुक गई है. रिसर्च के प्रमुख जांचकर्ता जे.टाइलर रामसे ने कहा कि लोगों को इसके बारे में पता होना चाहिए. यहां तक कि डॉक्टरों को भी पता होना चाहिए कि लैवेंडर के तेल में एंडोक्रिन-डिस्रप्टिंग केमिकल मौजूद होते हैं. जोकि स्तन के असमान वृद्धि में सहायक होते हैं.

जानिए पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी से जुड़ी 5 बड़ी बातें…

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पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी का आज पहली पुण्यतिथि है. लंबी बीमारी के बाद 16 अगस्त 2018 को दिल्ली के एम्स अस्पताल में पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी निधन हो गया था. वाजपेयी की याद में आज को सदैव अटल नाम से कार्यक्रम भी रखा गया है. अटल की पहली पुण्यतिथि पर जानिए उनसे जीवनकाल से जुड़ी कुछ बातें…

अटल बिहारी वाजपेयी तीन बार देश के ने प्रधानमंत्री बने. इस दौरान उन्होंने अपने भाषणों से सबको हिलाकर रख दिया. वे पहली बार साल 1996 में 16 मई से 1 जून तक, 19 मार्च 1998 से 26 अप्रैल 1999 तक और फिर 13 अक्टूबर 1999 से 22 मई 2004 तक देश के प्रधानमंत्री रहे हैं.

अटल बिहारी वाजपेयी का जन्म 25 दिसंबर 1924 को मध्य प्रदेश के ग्वालियर में हुआ था. वाजपेयी की पढ़ाई-लिखाई कानपुर में हुई. छात्र जीवन से ही वे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़ गए थे. कानपुर से पोस्टग्रैजुएशन करने के बाद उन्होंने एलएलबी के लिए दाखिला लिया लेकिन पढ़ाई बीच में ही छोड़कर वह राजनीति में सक्रिय हो गए. अगस्त 1942 में उन्हें और बड़े भाई प्रेम को भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान 23 दिन के लिए गिरफ्तार किया गया.

अटल बिहारी वाजपेयी भारतीय जनसंघ के संस्थापक सदस्यों में थे. 1968 से 1973 तक वह उसके अध्यक्ष भी रहे थे. 1955 में उन्होंने जनसंघ के टिकट पर पहली बार लोकसभा का चुनाव लड़ा, लेकिन हार गए. 1957 में जनसंघ ने उन्हें तीन लोकसभा सीटों लखनऊ, मथुरा और बलरामपुर से चुनाव लड़ाया. इनमें से बलरामपुर (जिला गोण्डा, उत्तर प्रदेश) से चुनाव जीतकर वह पहली बार लोकसभा पहुंचे.

साल 1977 में केंद्र में मोरारजी देसाई के नेतृत्व में पहली बार गैर-कांग्रेसी सरकार बनी. वाजपेयी उस सरकार में विदेश मंत्री बनाए गए. इस दौरान उन्होंने संयुक्त राष्ट्र अधिवेशन में हिन्दी में भाषण दिया. ऐसा करने वाले वह देश के पहले नेता थे.

पायलट ने खेत में उतारा विमान, 233 लोगों की जान बचाने वाले पायलट की हो रही तारीफ…

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रुस के लोगों ने चमत्कार का एहसास किया जब एक यात्रियों से विमान को आपातकालीन स्थिति में मक्के के खेत में लैंड कराया गया।गुरुवार को एक रुसी विमान में उड़ान के चंद मिनटों बाद ही कुछ पक्षी घुस गए।पक्षियों के घुसने के साथ विमान को मास्को के पास एक मक्के के खेत में उतारा गया।इस विमान में 233 लोग सवार थे। स्वास्थ्य मंत्रालय ने कहा कि 23 लोग घायल हुए हैं, जिनमें नौ बच्चे शामिल हैं। उन्होंने खुशी जाहिर करते हुए कहा कि राहत की बात ये रही कि इस इमरजेंसी लैंडिग में किसी शख्स की जान नहीं गई।उन्होंने कहा कि विमान के इंजन में पक्षियों के घुसते ही वह बंद हो गया था। जिसके बाद इसे पास के ही मक्के के खेत में सफलता पूर्वक उतारा गया।इस घटना के बाद रुस की मीडिया में पायलट की जमकर तारीफ हो रही है। एक स्थानीय चैनल ने विमान के पायलट दमीर यूसुपोव को ‘हीरो’ और इस घटना को ‘चमत्कार’ करार करार दिया है।उनके अनुसार दमीर एक हीरो हैं जिन्होंने 233 लोगों की जान बचाई। चैनल ने कहा कि दमीर ने बिना लैंडिंग गियर और एक असफल इंजन के साथ एक विमान को सफलतापूर्वक जमीन पर उतारा।कुछ लोगों ने इस वाक्ये की तुलना यूएस में हुए उस घटनाक्रम से की है, जहां साल 2009 में यूएस एयरवेज के एक विमान को आपातकालीन स्थिति में हुडसन नदी में उतारा गया था।विमान में सवार एक यात्री ने स्थानीय चैनल से बात करते हुए कहा कि प्लेट, टेक ऑफ के कुछ ही मिनटों बाद बुरी तरह से हिलने लगा था।यात्री के अनुसार पांच सेकण्ड के भीतर ही विमान की दाहिने तरफ की लाइटें जलने लगीं और कुछ जलने की बदबू आने लगी।जैसे ही विमान जमीन पर उतरा, सभी यात्री तेजी से भागने लगे। Ural एयरलाइंस का एयरबस A321 विमान 226 यात्रियों और सात चालक दल के सदस्यों को मास्को के ज़ुकोवस्की हवाई अड्डे से रूस-एनेक्सिया क्रीमिया के सिम्फ़ेरोपोल ले जा रहा था। तभी उसके इंजन में पक्षी फंस गए थे।

भारत के पूर्व बल्लेबाज वीबी चंद्रशेखर ने खुदकुशी की…

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भारत के पूर्व सलामी बल्लेबाज वी बी चंद्रशेखर ने चेन्नई के मयलापुर के अपने घर में गुरुवार को खुदकुशी कर ली. उनका शव बेडरूम में सीलिंग फैन से लटका पाया गया. चंद्रशेखर 57 साल के थे. पहले चंद्रशेखर की मौत की वजह हार्ट अटैक बताई जा रही थी लेकिन पुलिस ने उनकी खुदकुशी की पुष्टि की है.

कुछ मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक पहले आत्महत्या की आशंका भी जताई जा रही थी. लेकिन बाद में पुलिस ने खुदकुशी की पुष्टि की. चंद्रशेखर की मौत उनके 58वें जन्मदिन से 6 दिन पहले हुई है. बता दें कि चंद्रशेखर ने भारत के लिए 1988 से 1990 के बीच 7 वनडे मैच खेले थे.

फ्रेंचाइजी में घाटे की वजह से डिप्रेशन में थे

जांच अधिकारी एस मुरुगन ने कहा कि चंद्रशेखर ने कोई सुसाइड नोट नहीं छोड़ा था. चंद्रशेखर की पत्नी ने कहा कि उन्होंने उनके कमरे का दरवाजा खटखटाया तो कोई आवाज नहीं आई. इसके बाद उन्होंने खिड़की से झांक कर देखा तो उनका शव पंखे से लटका पाया.

पुलिस के मुताबिक उनकी पत्नी ने कहा कि चंद्रशेखर ने परिवार के लोगों के साथ शाम को चाय पी और फिर लगभग पौने छह बजे अपने कमरे में चले गए. पत्नी ने कहा कि क्रिकेट फ्रेंचाइजी के कारोबार मे घाटा होने की वजह से डिप्रेशन में थे. वीबी तमिलनाडु के प्रीमियर लीग में खेलने वाली एक टीम- वीबी कांचा वीरन्स के मालिक थे. साथ ही वेलाचेरी में एक क्रिकेट एकेडमी भी चलाते थे.वीबी चंद्रशेखर ने भारत के लिए 7 वनडे मैचों में 88 रन बनाए थे. इसमें एक अर्धशतक भी शामिल है. इंटरनेशनल क्रिकेट में भले ही चंद्रशेखर कमाल न दिखा पाए हों लेकिन फर्स्ट क्लास में उन्होंने 81 मैच खेले, जिसमें 43.09 की औसत से 4,999 रन बनाए. फर्स्ट क्लास में चंद्रशेखर के नाम 10 शतक और 23 अर्धशतक भी शामिल है. साल 1987-88 में तमिलनाडू को रणजी ट्रॉफी जिताने में चंद्रशेखर की अहम भूमिका थी.

आईपीएल में चेन्नई सुपर किंग्स की तरफ से खेलने वाले सुरेश रैना ने ट्वीट किया, ”वीबी चंद्रशेखर सर के निधन की खबर से बहुत दुखी हूं. उनके प्रयासों से ही चेन्नई सुपर की मजबूत नींव रखी गई. हम पर हमेशा ही उन्होंने विश्वास रखा और हौंसला बढ़ाया. मेरी संवेदनाएं उनके परिवार के साथ हैं.”चंद्रशेखर चेन्नई सुपर किंग्स के 3 साल तक मैनेजर भी रहे और टीम में धोनी को लाने में सबसे बड़ा हाथ इनका ही माना जाता है.