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पीएम मोदी ने लाल किले से भारतीय रेल के लिए कही ऐसी बात, सुनकर जोर से हंस पड़े रेल मंत्री…

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73वें स्‍वतंत्रता दिवस के मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लाल किले की प्राचीर से राष्‍ट्र को लगातार छठी बार संबोधित करते हुए देश में बढ़ती विकास की गति की चर्चा की. इसके लिए उन्‍होंने भारतीय रेलवे का एक ऐसा उदाहरण दिया, जिसे सुन लाल किले के प्रांगण में बैठे रेल मंत्री पीयूष गोयल सुनकर जोर से हंस पड़े. विकास की ‘नई राह’ पर चल पड़ी भारतीय रेल का उदाहरण देते हुए पीएम मोदी ने खास तौर पर वंदे भारत एक्‍सप्रेस का जिक्र किया.

दरअसल, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लाल किले की प्राचीर से देशवासियों को संबोधित करते हुए कहा कि ‘इससे पहले अगर कागज पर कोई निर्णय लिया जाता था कि एक क्षेत्र में रेलवे स्टेशन बनाया जाएगा, तो सालों तक लोगों में सकारात्मकता बनी रहती थी…. अब समय अब बदल गया है. लोग स्टेशन से संतुष्ट नहीं हैं. वे तुरंत पूछते हैं “वंदे भारत एक्सप्रेस हमारे क्षेत्र में कब आएगी?’

यह बात सुन केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने रेल मंत्री पीयूष गोयल की ओर देखा और उनसे कुछ ही था कि वह जोर से हंस पड़े. जाहिर है विकास की पटरी पर दौड़ रही भारतीय रेल के बारे में पीएम मोदी की सराहना सुन वे खुश हो गए.

आलू की ओम प्रजाति कैसे भरेगी किसानों की जेब जानिए..

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दस साल के शोध के बाद केंद्रीय आलू अनुसंधान संस्थान (सीपीआरआई) मोदीपुरम के वैज्ञानिकों ने आलू की नई कुफरी फ्राई ओम प्रजाति तैयार की है। खासतौर से फ्रेंच फ्राई में काम आने वाला यह आलू सामान्य तौर पर खाने में भी स्वादिष्ट है। रोग प्रतिरोधक क्षमता दूसरी प्रजातियों से अधिक होने के साथ इसकी उत्पादन क्षमता 5-10 टन ज्यादा है।
सीपीआरआई के प्रधान वैज्ञानिक डॉ. वीके गुप्ता के अनुसार किसी भी प्रजाति को तैयार करने में 10-12 साल लग जाते हैं। नई प्रजाति कुफरी फ्राई ओम पश्चिमी उत्तर प्रदेश ही नहीं बल्कि देश भर के किसानों की आय बढ़ाने में काफी कारगर साबित होगी। इसमें पछेता झुलसा बीमारी लड़ने की क्षमता अधिक है। ऐसा वायरस डाला गया है, जो बीमारी की रोकथाम कर सके। इसका औसत उत्पादन 30 से 35 टन प्रति हेक्टेयर है। जबकि दूसरी प्रजातियों का उत्पादन 25-30 टन प्रति हेक्टेयर है। यह प्रजाति कुफरी फ्राईसोना प्रजाति के माध्यम से तैयार हुई है।
ये है प्रजाति की खासियत
– आलू लंबा और सफेद गुद्दा
– पछेता झुलसा बीमारी नहीं लगेगी
– फ्रेंच फ्राई के लिए बड़े होटलों में प्रयोग होगा
– औसत उत्पादन सामान्य प्रजातियों से 5-10 टन अधिक
– आलू की स्टैंडर्ड लिमिट 75 एमएम की है
– कुफरी की अन्य प्रजातियों में सबसे बेहतर
इन जगहों पर बहुत उपयोगी
सीपीआरआई के प्रधान वैज्ञानिक के अनुसार इस प्रजाति में पछेता झुलसा बीमारी को पोटेटो वायरस वाई से रोका जाएगा। यह प्रजाति पश्चिम उत्तर प्रदेश के अलावा हरियाणा, पंजाब, राजस्थान, मध्यप्रदेश, छिंदवाड़ा, रायपुर आदि के किसानों के लिए बहुत ही उपयोगी है। रिसर्च के दौरान सीपीआरआई के देशभर के 18 सेंटरों पर इसका परीक्षण किया गया था। सभी जगह परीक्षण सफल रहा। 11 जगह पर उत्पादन अधिक रहा है।
सेंटरों में दूसरी प्रजाति से तुलना
स्थान कुफरी फ्राईओम, कुफरी फ्राइसोना
हिसार 33.8 29.2
जालंधर 32.7 33.0 
मोदीपुरम 38.9 35.5 
पंतनगर 30.7 28.2
दिशा 35.0 38.8
छिंदवाड़ा 37.5 35.1
ग्वालियर 33.9 33.0
कानपुर 33.3 26.6
कोटा 18.8 16.7
रायपुर 21.4 18.9
नोट: कुल आलू उपज टन प्रति हेक्टेयर
स्थान कुफरी फ्राईओम, कुफरी फ्राइसोना
हिसार 29.1 25.4
जालंधर 17.4 17.4 
मोदीपुरम 27.8 22.3 
पंतनगर 28.3 25.9
दिशा 25.6 21.9
छिंदवाड़ा 28.8 26.9
ग्वालियर 24.1 23.3
कानपुर 23.6 21.6
कोटा 16.7 15.1
रायपुर 13.8 10.8
नोट: प्रसंस्करण के बाद आलू उत्पादन (टन प्रति हेक्टेयर)

कुफरी फ्राईसोना बनी माध्यस
इस प्रजाति को कुफरी फ्राईसोना के माध्यम से किसानों के लिए तैयार किया गया है। यह प्रजाति उत्पादन के साथ खाने में भी अच्छी होगी। देशभर के 18 सेंटरों पर इसका परीक्षण सफल रहा। इसी साल से इसका बीज किसानों को देना शुरू कर दिया जाएगा। -डॉ. वीके गुप्ता, प्रधान वैज्ञानिक सीपीआरआई
अब तक 61 प्रजाति
वैज्ञानिकों ने शोध कर संस्थान से अच्छी प्रजाति निकाली है। अब तक करीब 61 प्रजाति यहां से निकल चुकी हैं। यह प्रजाति बड़े होटलों में फ्रेंच फ्राई के लिए प्रसिद्ध होगी। खाने में भी अच्छी होगी।

छत्तीसगढ़ में थर्मल पॉवर प्लांट की जमीन से सोलर एनर्जी की योजना..

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छत्तीसगढ़ में बंद किए गए एक सरकारी थर्मल पॉवर प्लांट की जमीन से सोलर एनर्जी के उत्पादन की संभावना तलाशी जा रही है। हालांकि बंद किए गए संयंत्र की जमीन को खाली करने में अभी वक्त लग सकता है। इसकी वजह यह बताई जा रही है कि बंद की गई चार यूनिटों के साथ दो और यूनिट हैं, जो चालू हैं।

इस बीच बिजली कंपनी प्रबंधन में खाली होने वाली जमीन के उपयोग को लेकर प्रारंभिक चर्चा हुई है। बिजली कंपनियों के अध्यक्ष शैलेंद्र शुक्ला ने बताया कि जमीन के उपयोग को लेकर अभी कोई फैसला नहीं हुआ है, इसमें वक्त लग सकता है। वैसे सोलर यूनिट की स्थापना बेहतर विकल्प हो सकता है।

53 वर्ष पुरानी हो चुकी थी यूनिटें

बिजली अफसरों के अनुसार कोरबा पूर्व संयंत्र की कुल स्थापित क्षमता 440 मेगावॉट थी। इसमें 50-50 मेगावॉट की चार और 120 मेगावॉट की दो यूनिटें शामिल हैं। 50 मेगवॉट के पहले संयंत्र से करीब 53 वर्ष पहले 22 अक्टूबर 1966 में उत्पादन शुरू हुआ था। दूसरी यूनिट 1967, तीसरी और चौथी यूनिट 1968 में चालू हुई। वहीं 120 मेगावॉट की दो यूनिटें क्रमश 1976 और 1981 में शुरू हुई।

तीन वर्ष से बंद था उत्पादन

50 मेगावॉट की चारों यूनिटों से करीब तीन वर्ष से उत्पादन बंद था। पुरानी होने की वजह से इन संयंत्रों से उत्पादन महंगा पड़ रहा था। साथ ही प्रदूषण भी अधिक हो रहा था। इसी वजह से 2017 के पहले इन यूनिटों को बंद कर दिया गया था। अब सरकार ने आधिकारिक स्र्प से इन संयंत्रों को बंद करने की घोषणा के साथ खाली होने वाली जमीन के उपयोग के लिए बिजली कंपनी प्रबंधन को अधिकृत किया है।

इस वजह से सोलर पर विचार

छत्तीसगढ़ में निजी और सरकारी क्षेत्र के छोटे-बड़े करीब दो दर्जन थर्मल पॉवर प्लांट चल रहे हैं। इनकी कुल उत्पादन क्षमता 22 हजार मेगावॉट से अधिक है। थर्मल प्लांट्स के कारण न केवल प्रदूषण का खतरा रहता है बल्कि वहां से निकलने वाली फ्लाइ एश भी बड़ी समस्या बनती जा रही है। ऐसे में सरकार अब नए थर्मल प्लांट के पक्ष में नहीं है। चूंकि प्लांट औद्योगिक क्षेत्र में है और आसपास दूसरे पावर प्लांट है। इस वजह से वहां सोलर संयंत्र को ही बेहतर विकल्प माना जा रहा है।

छह एकड़ जमीन पर एक मेगावॉट का संयंत्र

गैर परंपरागत ऊर्जा स्रोतों के जानकार अफसरों के अनुसार एक मेगावॉट का सोलर प्लांट स्थापित करने के लिए करीब छह एकड़ जमीन की जरूरत पड़ती है। ऐसे में 200 मेगावॉट के थर्मल यूनिट को बंद करके वहां बड़े सोलर प्लांट की स्थापना की जा सकती है।

एक महिला डॉक्टर जिसके सामने न किसी सरकार की चलती है न अफसर की..

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तिनियुक्ति कार्यकाल खत्म होने के बाद भी मैडम 07 सालों से छत्तीसगढ़ में जमी हैं. उन्हें वापस भेजने के लिए कई फाइलें चलीं मगर अपनी पहुंच और संपर्कों के जरिए वे मंत्री से लेकर आइएएसों तक को ठेंगा दिखा रही हैं. अब डॉ. सुनीता जैन की सेवाएं गुपचुप तरीके से छत्तीसगढ़ में संविलियन की तैयारी चल रही है.

जानते चलिए कि डॉ. सुनीता जैन, मध्यप्रदेश के बालाघाट में स्थित पीजी कॉलेज में असिस्टेंट प्रोफेसर थीं. 2013 में वे प्रतिनियुक्ति पर छत्तीसगढ़ चली आईं. भाजपा सरकार में अपनी पहुंच और संपर्कों का इस्तेमाल कर स्कूल शिक्षा विभाग के उपक्रम राजीव गांधी शिक्षा मिशन में उप संचालक बन गईं.

सरकार के मंत्रियों और कुछ अफसरों का संरक्षण उन्हें इस कदर हासिल हुआ कि कम समय में ही उन्हें मलाईदार विभाग मिलते चले गये. राजीव गांधी शिक्षा मिशन में काम करने के बाद डॉ.सुनीता जैन बतौर उपसंचालक, लोक शिक्षण संचालनालय आ गईं और कुछ समय बाद ही उन्हें एससीईआरडी यानि राज्य शैक्षिक अनुसंधान प्रशिक्षण में एडिशनल डायरेक्टर बना दिया गया.

एससीईआरटी द्वारा उनकी सेवाओं की वापसी के लिए अभी हाल ही में दो बार शासन को पत्र भी लिखा गया किंतु शासन स्तर पर इनकी मजबूत पकड़ होने से ये यहीं पर काबिज हैं.

आश्चर्य यह कि मैडम की नियुक्ति यूजीसी के नियमों के विपरीत हुई. इसकी पुष्टि पं. रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय के कुलसचिव द्वारा जारी एक आदेश से होती है जिसमें उन्होंने साफ किया है कि असिस्टेंट प्रोफेसर को सिर्फ सहायक संचालक पद पर ही नियुक्ति किया जा सकता है लेकिन मैडम जैन एडिशनल डायरेक्टर पद तक पहुंच गई हैं.

सूत्रों के मुताबिक मैडम जैन की प्रतिनियुक्ति महज एक साल के लिए थी जो 2014 में खत्म हो गई थी. आश्चर्य कि अधिकतम चार साल का कार्यकाल भी उन्होंने पूरा कर लिया है. फिर भी वे लगभग सात सालों से छत्तीसगढ़ में टिकी हुई हैं.

उनकी वापसी के लिए दो बार पत्र भी लिखा गया. असिस्टेंण्ट प्रोफेसर राम किशोर साहू ने स्कूल शिक्षा विभाग के सचिव को एक पत्र 26 अगस्त 2017 को लिखते हुए मांग की थी कि मैडम जैन को वापस उनके मूल विभाग में भेजा जाए परंतु यह कवायद भी ठण्डे बस्ते में पड़ गई.

बताया जाता है कि मध्य प्रदेश सरकार ने उनकी नियुक्ति को खत्म कर दिया है लेकिन छत्तीसगढ़ में डॉ.सुनीता जैन जमी हुई हैं और ठप्पे के साथ नौकरी कर रही हैं. उनकी प्रतिनियुक्ति का कार्यकाल भी खत्म हो चुका है और उनकी पदोन्नति भी नियम विरूदध है. इसके बावजूद सरकार या विभाग कोई कार्रवाई नही कर पा रहा है.

अपने विभाग में मैडम का इस कदर दबदबा है कि वे अपने उपर के अधिकारियों को डमी समझती हैं. यही दर्द कई आइएएसों ने भी जताया. भाजपा सरकार जाने के बाद उम्मीद थी कि कांग्रेस सरकार में ऐसे अफसर नपेंगे लेकिन मैडम जैन का जलवा रायपुर से नईदिल्ली तक बरकरार है.

सुना है कि उन्होंने अपने नये विभागीय मंत्री और सचिव को भी झांसे में ले रखा है.अपने उंचे रसूख और रूतबे के कारण एससीईआरटी में इनसे वरिष्ठ तीन संयुक्त संचालक, पांच उप संचालक इनके अधीन काम करने और इनकी खरीखोटी सुनने को मजबूर हैं.

मैडम यह भी कहती फिरती हैं कि आइएएस संचालक तो यहां डमी हैं दरअसल सारा काम मुझे ही देखना है इसलिए आपको मेरी बात सुननी पड़ेगी. यानि एक आइएएस ने भी इनकी पहुंच और प्रतिभा के सामने अपने घुटने टेक दिए हैं.

चल रही थी अंतिम संस्कार की तैयारी, पति की अंतिम इच्छा पत्नी ने ऐसे पूरी की…

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छिंदवाड़ा इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल सांइस का 1 अगस्त से सत्र प्रारंभ हो चुका है। वहीं कॉलेज को सोमवार को पहला देहदान मिल गया, जिस पर एमबीबीएस के स्टूडेंट प्रैक्टिकल कर सकेंगे। वार्ड नंबर दो फैंडस कॉलोनी निवासी रिटायर्ड बैंक कैशियर सत्यप्रकाश शुक्ला का रविवार को दुर्ग छत्तीसगढ़ में ह्दयघात से निधन हो गया। सत्यप्रकाश अपनी पुत्री के ससुर की तेहरवी में शामिल होने गए थे। सोमवार की सुबह उनका शव छिंदवाड़ा उनके निवास स्थान लाया गया। परिजन जब उनकी अंतिम संस्कार की तैयारी कर रहे थे इसी दौरान उनकी पत्नी सुधा शुक्ला ने परिजनों को इस बात की सूचना दी कि जिंदा रहने के दौरान पति ने यह अंतिम इच्छा जाहिर की थी कि उनकी मौत के बाद उनके शव को मेडिकल कॉलेज को दान कर दिया जाए।

परिजनों ने जिला अस्पताल के सीएस डॉ सुशील राठी से संपर्क कर देहदान की बात बताई, जिसके बाद मेडिकल कॉलेज प्रबंधन से संपर्क कर परिजनों ने सभी तरह की औपचारिकताएं पूर्ण की। जिसके बाद शव को मेडिकल कॉलेज को सौंपा गया जिसे फ्रीजर में रखवाया गया। कॉलेज की कक्षाएं शुरू हो चुकी है इस दौरान एमबीबीएस के विद्यार्थी प्रैक्टिकल करेंगे।

देहदान का जिले में पहला मामला

मेडिकल कॉलेज में प्रैक्टिकल के लिए मानव शरीर की आवश्यकता पड़ती है। कॉलेज का सत्र अगस्त से शुरू हुआ है। प्रदेश के अन्य मेडिकल कॉलेज में देहदान के कई मामले आते है। मेडिकल कॉलेज को आने वाले दिनों में और आवश्यकता पड़ेगी ऐसे में जिला प्रशासन व मेडिकल कॉलेज लगातार प्रयासरत है जिस पर एमबीबीएस विद्यार्थी प्रैक्टिकल करेंगे। डॉक्टर्स के मुताबिक एक देह से दस डॉक्टर सीखते हैं।

प्रयास कर रहे हैं

मेडिकल के लिए पहली बॉडी देहदान में मिली है, जिस पर एमबीबीएस के विद्यार्थी प्रैक्टिकल कर सकेंगे। कॉलेज को और बॉडी उपलब्ध कराई जा सके। जिसको लेकर प्रयास किए जा रहे है। प्रशासन की स्वीकृति के बाद अज्ञात बॉडी जिनके वारसान नहीं मिलते है वह स्वीकृत कराई जा सकती है।

जिले में देहदान का पहला मामला सामने आने के बाद शहर के लोग सीनियर सिटीजन सत्यप्रकाश के इस निर्णय का स्वागत कर रहे है। लोगों का मानना है कि लोगों को आगे आना चाहिए। मौत के बाद बॉडी मेडिकल कॉलेज को देने से वहां पढ़ने वाले विद्यार्थी प्रैक्टिकल कर सकेंगे। इस बात को लेकर लोगों में जागरुकता नहीं है। देहदान के साथ ही पूर्व में कई लोग आगे आए है जिन्होंने मरने के बाद नेत्रदान करने का निर्णय लिया है। लोगों का कहना है कि जिले में भले ही यह पहला मामला हो, लेकिन अब लोगों में जागरूकता भी आएगा।

जानिए नग्न होकर नदी में कूदने वाली विदेशी लड़की ने होश में आने पर बताई यह कदम उठाने की दर्दभरी कहानी..

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राजस्थान की राजधानी के शिप्रापथ पुलिस थाना इलाके के मानसरोवर में द्रव्यवती नदी में निर्वस्त्र होकर छलांग लगाने वाली विदेशी युवती ने यह कदम उठाने की वजह बताई है। पुलिस पूछताछ में उसने बताया कि उसे अपनी मां के ज्यादा बीमार होने की जानकारी मिली थी।

मां के बीमार होने से वह डिप्रेशन में आ गई जिसे कम करने के लिए उसने ज्यादा गोलियां खा ली थीं। इससे उसे होश नहीं रहा और तबीयत बिगड़ने लगी तो उसने कपड़े उतार कर नदी में छलांग लगा दी। उपचार के बाद परिजन युवती को अपने साथ ले गए। वह मूलरूप से ओमान की राजधानी मस्कट की रहने वाली है। जयपुर में किराए का मकान लेकर यहां पढ़ाई कर रही है। शिप्रापथ थानाधिकारी सुरेन्द्र यादव ने बताया कि युवती को उपचार के बाद जयपुरिया अस्पताल से छुट्टी मिल गई है। युवती को परिजन अपने साथ ले गए।

पूछताछ में सामने आया कि उसे मां के ज्यादा बीमार होने की सूचना मिली थी। इससे वह डिप्रेशन में आकर गोलियां खा ली थी। गौरतलब है कि शनिवार शाम को कतर निवासी ओशीन मिशेल भाकरे ने रिद्धि-सिद्धि के पास द्रव्यवती नदी में निवस्त्र होकर छलांग लगा दी थी। सूचना पर शिप्रापथ थानाधिकारी सुरेन्द्र यादव ने उसे अपनी जान पर खेलकर बचाया था।

छुट्टी पर आराम के बजाए सेना के लिए तैयार कर रहे जवानों की नई खेप…

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एक सैनिक जब छुट्टी लेकर घर आता है तो वह सैनिक जीवन को भूलकर कु छ आराम करना चाहता है, लेकि न दो माह की छुट्टी पर आए बेटमा के विजय यादव यहां भी अपनी सैन्य दिनचर्या को ही जी रहे हैं। उनका मकसद अपने गांव के युवाओं को काबिल बनाना है और इसीलिए वे उन्हें सेना में भर्ती होने के लिए शारीरिक प्रशिक्षण दे रहे हैं। वे हर साल छुटि्टयों में आकर युवाओं को मुफ्त में प्रशिक्षण देते हैं। उनकी एक ही शर्त है अनुशासन और इसी का नतीजा भी सामने है, जिसे मानकर पिछले सात सालों में उनके 50 से अधिक शागिर्द सेना में भर्ती हो चुके हैं।

बेटमा के दशहरा मैदान पर इन दिनों सेना भर्ती कैंप जैसा नजारा है। यहां सुबह छह बजे से ही युवा दौड़, लंबी कूद, बीम आदि करते हैं। ये सभी भारतीय सेना में भर्ती होना चाहते हैं और विजय यादव इन्हें प्रशिक्षित कर रहे हैं। जामनगर में तैनात विजय रोजाना सुबह दो घंटे युवाओं को प्रशिक्षण देते हैं। वे भर्ती के दौरान अधिकारियों से बातचीत करने के लहजे और लिखित परीक्षा के टिप्स भी देते हैं।

चार सौ मीटर का ट्रैक बनवाया 

विजय ने प्रशिक्षण के लिए यहां कु छ अस्थायी तैयारियां भी की हैं। उन्होंने चार सौ मीटर दौड़ के लिए एक ट्रैक, जबकि लंबी कू द के लिए दस फीट लंबा गड्ढा बनवाया है। रस्सी चढ़ने के साथ दूसरे कई शारीरिक अभ्यास के लिए उन्होंने इंतजाम कि ए हैं। इस प्रशिक्षण शिविर में बेटमा सहित आसपास के करीब 70 युवा आ रहे हैं।

ट्रेनिंग के समय मिले पुरस्कार

विजय अब तक भारतीय सेना के साझा युद्धाभ्यासों में चीन और अमेरिका की सेना के साथ युद्धाभ्यास कर चुके हैं। वे कु पवाड़ा, बारामुला, असम आदि स्थानों पर भी तैनात रह चुके हैं। सेना में उन्हें ट्रेनिंग के दौरान कई बार बेस्ट स्टूडेंट का पुरस्कार भी मिला। ट्रेनिंग देने के पीछे विजय का एक ही मकसद है कि वे जिन कारणों से दो बार चूक गए, उसका सामना किसी और को न करना पड़े।

तीसरी बार में हुए सफल

विजय के मुताबिक नियमों की जानकारी के अभाव में वे दो बार सेना भर्ती में चूके। इसके अलावा वे सिर्फ दौड़ते थे। यह पता नहीं था कि सीने का माप भी जरूरी है। उन्होंने इन सबकी तैयारी की और तीसरी बार में सफल हो गए। उन्होंने वर्ष 2007 से युवाओं को प्रशिक्षण देना शुरू किया, जबकि वर्ष 2012 में पहली बार उनके द्वारा प्रशिक्षित एक युवक का सेना में चयन हुआ।

BJP – कांग्रेस के खिलाफ धारा 370 को हथियार की तरह इस्तेमाल करेगी..

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जम्मू और कश्मीर (Jammu and kashmir) में धारा 370 और अनुच्छेद 35 ए हटाने के बाद बीजेपी बेहद उत्साह में है. बीजेपी (BJP) अलग-अलग तरीके से इसे उत्सव की तरह तो मना रही है. वहीं अब इसे कांग्रेस (Congress) के खिलाफ हथियार की तरह भी इस्तेमाल भी किया जाएगा. इसके लिए गांव गांव जाकर लोगों को बताया जाएगा कि कांग्रेस केन्द्र सरकार के इस फैसले के विरोध में तो है, लेकिन विरोध के लिए सही तर्क भी नहीं दे पा रही है.

जम्मू -कश्मीर को लेकर देश भर के लोगों में एक अलग ही भावनात्मक लगाव है. इसका लाभा बीजेपी लेने की कोशिश कर रही है. छत्तीसगढ़ (Chhattisgarh) बीजेपी के वरिष्ठ विधायक और पूर्व मंत्री बृजमोहन अग्रवाल (Brijmohan Agrawal) का दावा है कि जो ऐतिहासिक फैसला उनकी सरकार ने लिया है, उसके बाद लोगों को बीजेपी से और स्नेह हो गया है. भरोसा बढ़ गया है. वहीं कांग्रेस के प्रति नाराजगी भी है. रायपुर सांसद सुनील सोनी (MP Sunil Soni) का कहना है कि केंद्रीय नेत्रृत्व से निर्देशित किया गया है कि कांग्रेस (Congress) की इस पूरे मसले पर जो सोच रही उसे राज्य भर में गांव गांव में जाकर बताया जाए. कार्यकर्ताओं को छोटे-छोटे आयोजन करने के लिए कहा गया है. ताकि कांग्रेस के खिलाफ माहौल बने.

बीजेपी का तरीका गलत
वहीं इस पूरे मसले पर कांग्रेस का कहना है कि राज्य ही नहीं देश की जनता जानती है कि बीजेपी कैसी है. राज्यसभा सांसद व कांग्रेस की वरिष्ठ नेता छाया वर्मा कहती हैं कि कश्मीर मसले को लेकर केन्द्र सरकार को जो तरीका था वो गलत था. ऐसे में इससे कांग्रेस को कोई नुकसान नहीं होगा. बहरहाल बीजेपी की सोच है कि यदि बात उनके मुताबिक लोगों तक पहुंच गई तो इसका लाभ उन्हें निकाय चुनाव में भी मिलेगा. वहीं पार्टी कि छवि भी मजबूत होगी. अब देखना यह होगा कि कांग्रेस इसके बाद क्या करती है. 

PM मोदी ने किया बड़ा बदलाव, बहादुरी का मेडल ही नहीं सैनिकों को मिलती हैं ये भी सुविधाएं…

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वर्ष 2017 से मोदी सरकार ने परमवीर चक्र विजेता सैनिकों का भत्ता 10,000 रुपये से बढ़ाकर 20,000 रुपये कर दिया है. वहीं अशोक चक्र पाने वालों का भत्ता 6,000 से बढ़कर 12,000 हो गया. महावीर चक्र विजेताओं का भत्ता 5,000 रुपये से बढ़कर 10,000 रुपये हो गया है. कीर्ति चक्र विजेताओं का भत्ता 4,500 रुपये से बढ़कर 9,000 रुपये हो गया है.सर्वोच्च वीरता मेडल परमवीर चक्र (Paramvir Chakra)हो या फिर वीर चक्र (Vir Chakra), इसे पाकर हर सैनिक गर्व और शान से फूला नहीं समाता है. लेकिन ऐसा नहीं है कि बहादुरी के लिए वीरता मेडल पाने वाले सैनिकों को सिर्फ मेडल ही दिए जाते हैं.सैनिकों के मान-सम्मान को बढ़ाने के लिए उन्हें सम्मान राशि भी दी जाती है. जीवनभर परिवार सहित कई तरह की सुविधाएं दी जाती हैं. खास बात यह है कि वर्ष 2017 से (PM Narendra Modi) ने वीर सैनिकों को मिलने वाली यह सम्मान राशि दोगुनी कर दी है.

परमवीर चक्र पाने पर पहले यह मिलती थी सम्मान राशि 

सूबेदार मेजर बाना सिंह को 1988 में सियाचिन से घुसपैठियों को खदेड़ने के लिए बहादुरी के सर्वोच्च सम्मान परमवीर चक्र से सम्मानित किया गया था. परमवीर चक्र पाने पर बाना सिंह के वेतन में 50 रुपये प्रति महीने भत्ता जोड़ा गया. 18 साल तक बाना सिंह को 50 रुपये भत्ता मिलता रहा. किसी भी सरकार ने इसे बढ़ाने की नहीं सोची. बाना सिंह ने इसलिए आवाज़ नहीं उठाई क्योंकि उनके मुताबिक उन्होंने बहादुरी के लिए परमवीर चक्र पाया था भत्ते के लिए नहीं. 2012-13 के आसपास इस भत्ते को बढ़ाकर 1500 रुपये कर दिया गया. लेकिन जब पीएम मोदी तक यह आवाज़ पहुंची तो इस भत्ते को 10 हजार रुपये कर दिया गया.

वीरता मेडल पाने वालों को अब इतनी मिलती है सम्मान राशि वॉयस ऑफ एक्स सर्विसमैन सोसाइटी के राष्ट्रीय सचिव बीर बहादुर सिंह बताते हैं, ‘2017 से सरकार ने अब वीरता मेडल पाने वालों की सम्मान राशि बढ़ाकर सैनिकों का मान बढ़ाया है. अब परमवीर चक्र विजेताओं का भत्ता 10,000 रुपये से बढ़ाकर 20,000 रुपये हो गया है. अशोक चक्र पाने वालों का भत्ता 6,000 से बढ़कर 12,000 हो गया. महावीर चक्र विजेताओं का भत्ता 5,000 रुपये से बढ़कर 10,000 रुपये हो गया है. कीर्ति चक्र विजेताओं का भत्ता 4,500 रुपये से बढ़कर 9,000 रुपये हो गया है. वीर चक्र विजेताओं को 3,500 रुपये से बढ़कर 7,000 रुपये होगा. इसी तरह शौर्य चक्र, मिलिट्री क्रॉस और अन्य विजेताओं के भत्ते को भी बढ़ा दिया गया है. पहले और दूसरे विश्व युद्ध में जंगी इनाम जीतने वालों का भत्ता 500 रुपए से बढ़ाकर 1,000 रुपए कर दिया गया है.’

जीवनभर परिवार को भी मिलता है भत्ता राष्ट्रीय सचिव बीर बहादुर सिंह बताते हैं, ‘वीरता मेडल पाने वाला सैनिक नौकरी में रहने के दौरान तो यह भत्ता पाता ही है. रिटायर होने के बाद भी उसे पेंशन के साथ यह सम्मान राशि जोड़कर मिलती रहती है. अगर सैनिक की पेंशन के दौरान या नौकरी के दौरान मौत हो जाती है तो उसकी पत्नी इस सम्मान राशि को पाने की हकदार हो जाती है.’

सम्मान राशि ही नहीं, मिलती हैं यह सुविधाएं भी

वीरता मेडल पाने वालों को एक ओर जहां हर महीने एक सम्मान राशि दी जाती हैं वहीं दूसरी सुविधाएं भी परिवार सहित दी जाती हैं. वीरता मेडल परमवीर चक्र हो या वीर चक्र पाने वाले हर सैनिक को रेल और हवाई जहाज के किराए में छूट मिलती है. पेंशन पर भी किसी तरह का कोई टैक्स नहीं देना होता है. वीरता मेडल पाने वाले सैनिक का सम्मान करते हुए राज्य सरकारें भी कई तरह की सुविधाएं उन्हें समय-समय पर देती रहती हैं.

ये 10 सितारे मरने से पहले दुनिया में अपनी छाप छोड़ गए , नंबर 1 को कभी भुलाया नहीं जाएगा…

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आज हम आपको उन 10 सितारों के बारे में बताएंगे जो मरने से पहले दुनिया में अपनी छाप छोड़ गए हैं.

10. चार्ली चैपलिन – दुनिया में मशहूर कॉमिक एक्टर चार्ली चैपलिन ने मरने से पहले अपनी साइलेंट कॉमेडी की छाप दुनिया भर छोड़ी हैं.

9. जॉनी वॉकर – इंडियन सिनेमा के लीजेंड कॉमेडियन एक्टर जॉनी वॉकर जैसी क्लासिक कॉमेडी आज तक कोई एक्टर नहीं कर पाया है, इनका निधन साल 2003 में हुआ था.

7. राज कपूर – इंडियन सिनेमा के ग्रेटेस्ट फिल्म मेकर और एक्टर राज कपूर साहब का बॉलीवुड इंडस्ट्री को आगे बढ़ाने में बहुत बड़ा हाथ रहा हैं. करीब 54 साल की उम्र उन्होंने दुनिया को अलविदा कह दिया था.

6. हीथ लेजर – अमेरिकन एक्टर हीथ लेजर ने अपनी आखिरी फिल्म द डार्क नाईट में जोकर के किरदार के जरिये दुनिया में अपनी छाप छोड़ी, इस फिल्म के बाद उनका निधन हो गया था.

5. अमरीश पुरी – इंडियन सिनेमा के ग्रेट विलेन अमरीश पुरी साहब ने हॉलीवुड फिल्म ‘इंडियाना जोंस एंड द टेम्पल ऑफ डूम’ के जरिये दुनियाभर में अपनी एक्टिंग का लोहा मनवाया था. मरने से पहले अमरीश पुरी साहब भी अपनी छाप छोड़ गए हैं.

4. राज कुमार – बॉलीवुड इतिहास के महान कलाकार राज कुमार अपने बोलने के अंदाज की वजह से आज भी जाने जाते हैं, इनका निधन साल 1996 में हुआ था.

3. कादर खान – बॉलीवुड सिनेमा के मल्टी टैलेंटेड एक्टर कादर खान साहब ने मरने से पहले अपने बेहतरीन काम के जरिये दुनिया में छाप छोड़ी है, कॉमेडी के लिए आज भी उन्हें याद किया जाता है.

2. श्रीदेवी – इंडियन सिनेमा की सबसे कामयाब अभिनेत्री रही श्रीदेवी ने पिछले साल दुनिया को अलविदा कह दिया है. उन्होंने मरने से पहले अपनी एक्टिंग की छाप दुनिया में छोड़ी है.

1. माइकल जैक्सन – दुनिया के सबसे पॉपुलर सिंगर और डांसर रह चुके माइकल जैक्सन का निधन साल 2009 को हुआ था. किंग ऑफ पॉप कहे जाने वाले माइकल जैक्सन को उनके कार्य की वजह से कभी नहीं भुलाया जाएगा.