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जवाहर लाल नेहरू से नरेंद्र मोदी तक, जानिए कौन-कौन रहे हैं आजाद भारत के प्रधानमंत्री

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आजादी के बाद से अब तक भारत में 15 प्रधानमंत्री चुने जा चुके हैं। जवाहर लाल नेहरू से शुरू हुई ये गिनती अब नरेंद्र मोदी तक पहुंच चुकी है। इस बीच गुलजारीलाल नंदा, लालबहादुर शास्त्री, इंदिरा गांधी, मोरारजी देसाई, चौधरी चरण सिंह, राजीव गांधी, विश्वनाथ प्रताप सिंह, चंद्रशेखर, नरसिंह राव, अटल बिहारी वाजपेयी, एच डी देवगौड़ा, इंद्रकुमार गुज़राल, मनमोहन सिंह और नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री रहे। आइए जानते हैं देश में अब तक बने प्रधानमंत्रियों के बारे में.

भारत 1857 से ही अपनी आजादी की लड़ाई लड़ रहा था। 90 साल की लंबी जद्दोजहद और कुर्बानी के बाद इसके हिस्से में खुशियां आईं। 1946 आते-आते देश की स्थिति बिल्कुल बदल चुकी थी। हर हिंदुस्तानी आजादी के एक नए जोश-व-जज्बे से सराबोर था। उधर ब्रिटेन में लेबर पार्टी के सत्ता में आने के बाद उम्मीदों के नए चराग़ रौशन हो गए। इसी बीच ब्रिटेन ने भारत को आजाद करने का फैसला किया। 2 अप्रैल, 1946 को कैबिनेट मिशन दिल्ली पहुंचा।

जवाहर लाल नेहरू

इसके साथ ही देश की आजादी और बंटवारे का झगड़ा अपने चरम पर पहुंच गया। इसी दौरान ये बहस भी तेज़ हो गई कि आखिर आजाद भारत का पहला प्रधानमंत्री कौन होगा? स्वतंत्र भारत के पहले प्रधानमंत्री बनने की दौड़ में सरदार वल्लभ भाई पटेल भी आगे-आगे थे लेकिन महात्मा गांधी की बदौलत ये पद जवाहरलाल नेहरू को मिला। वह 15 अगस्त 1947 में आजाद भारत के पहले प्रधानमंत्री बने।

गुलजारीलाल नंदा

गुलजारीलाल नन्दा (4 जुलाई, 1898 – 15 जनवरी, 1998) भारतीय राजनीतिज्ञ थे। उनका जन्म सियालकोट, पंजाब, पाकिस्तान में हुआ था। वे 1 9 64 में जवाहर लाल नेहरू की मृत्यु के बाद भारत के प्रधानमंत्री बने। उन्हें कार्यवाहक प्रधानमंत्री बनाया गया। दूसरी बार लाल बहादुर शास्त्री की मृत्यु के बाद 1966 में यह कार्यवाहक प्रधानमंत्री बने। इनका कार्यकाल दोनों बार उसी समय तक सीमित रहा जब तक की कांग्रेस पार्टी ने अपने नए नेता का चयन नहीं कर लिया।

लाल बहादुर शास्त्री

27 मई 1964 को पंडित जवाहरलाल नेहरू का निधन हो गया। इसके बाद सबसे बड़ा सवाल यही खड़ा हुआ कि नेहरू के बाद कौन? उस वक्त के देश और दुनिया के सभी बड़े अखबरों की सुर्खियां थीं- Who after Nehru? अगले प्रधानमंत्री की खोज और ये जिम्मा उस वक्त कांग्रेस पार्टी के अध्यक्ष के। कामराज को दिया गया। नेहरू के निधन के बाद प्रधानमंत्री पद की दौड़ में लाल बहादुर शास्त्री और मोरारजी देसाई का नाम सबसे आगे था।

शास्त्री पर नेहरू खुलकर भरोसा करते थे। अपने आखिरी दिनों में नेहरू बहुत हद तक लाल बहादुर शास्त्री पर निर्भर रहने लगे थे। वहीं, मोरारजी देसाई का नेतृत्व भी दमदार था और प्रधानमंत्री पद की दौड़ में वो खुले तौर पर शामिल थे। लेकिन जब के। कामराज ने मोरारजी देसाई को लेकर पार्टी नेताओं से बात की तो ज्यादातर नेता इससे सहमत नहीं दिखे और लाल बहादुर शास्त्री ने 9 जून 1964 को प्रधानमंत्री पद की शपथ ली और देश के दूसरे प्रधानमंत्री बने।

इंदिरा गांधी

भारत के पहले प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू की इकलौती संतान इंदिरा गांधी के लिए पीएम बनने की राह ज्यादा मुश्किल नहीं रही। 11 जनवरी 1966 की रात ताशकंद में लाल बहादुर शास्त्री का निधन हो गया। इसके बाद यही सवाल उठा कि अब देश का अगला प्रधानमंत्री कौन? गुलजारी लाल नंदा को कार्यवाहक प्रधानमंत्री बना दिया गया। और एक बार फिर प्रधानमंत्री बनाने की जिम्मेदारी कांग्रेस अध्यक्ष के। कामराज के कंधों पर आ गई।

उस वक्त कांग्रेस को ऐसे प्रधानमंत्री की जरूरत थी जो पार्टी की बात सुने। एकबार फिर मोरारजी देसाई पीएम का रेस में थे लेकिन मोरारजी देसाई के पक्ष में गुजरात और यूपी के मुख्यमंत्रियों को छोड़कर कोई भी नहीं था। सबने सर्वसम्मति से इंदिरा गांधी को देश का तीसरा प्रधानमंत्री चुना। इंदिरा गांधी ने 24 जनवरी 1966 को प्रधानमंत्री पद की शपथ ली। इसके बाद 1967 और 1971 का चुनाव जीत कर वह फिर प्रधानमंत्री बनीं। 1980 के लोकसभा चुनाव में भी इंदिरा गांधी ने जीत दर्ज की थी और देश की छठी प्रधानमंत्री बनी थीं। 14 जनवरी 1980 को उन्होंने पीएम पद की शपथ ली।

मोरारजी देसाई

भारतीय राजनीति में मोरारजी देसाई का नाम उन नेताओं में शुमार है जो जिद्दी होने के साथ-साथ हठी भी थे। वो किसी की बात सुनते नहीं थे लेकिन अपने इरादों के पक्के थे। शुरू से ही उन्हें प्रधानमंत्री बनने की चाह थी और कहीं-न-कहीं उनका अपना रवैया ही उनके आड़े आता रहा। हर बार अपनी दावेदारी उन्होंने खुद पेश की। नेहरू के निधन के बाद उन्होंने प्रधानमंत्री पद के लिए सबसे पहले अपना नाम आगे बढ़ाया।

जय प्रकाश नारायण (जेपी) को ‘भ्रमित’ और इंदिरा गांधी को ‘लिटिल गर्ल’ बताते हुए वो लाल बहादुर शास्त्री के खिलाफ खड़े हुए, लेकिन पीएम पद नहीं मिला। शास्त्री के निधन के बाद भी स्थितियां ऐसी थीं कि उनका हारना तय था, लेकिन फिर भी वो पीछे नहीं हटे। उन्हें हमेशा लगता था कि उनकी काबिलियत के बावजूद उन्हें जानबूझकर पीएम नहीं बनाया जा रहा। 1967 में भी उन्हें मनाना बहुत मुश्किल रहा। इसके बाद 1975 में उन्होंने ‘जनता पार्टी’ ज्वाइन की और 1977 में आखिरकार देश के चौथे प्रधानमंत्री बने।

चौधरी चरण सिंह

भारत के प्रधानमंत्री के कार्याकल की सूची में चौधरी चरण सिंह का नाम बहुत ही कम समय के लिए दर्ज है, लेकिन राजनीति और देश सेवा में उनका योगदान सुनहरे अक्षरों में अपनी जगह रखता है। वो भारत के इकलौते ऐसे नेता रहे हैं जिन्हें किसान अपना सबसे बड़ा नेता मानते हैं। इमरजेंसी के बाद 1977 में हुए आम चुनाव में जनता गठबंधन की तरफ से चौधरी चरण सिंह प्रधानमंत्री पद के दावेदार थे।

दलित नेता जगजीवन राम की पीएम बनने की बढ़ती संभावना देखते हुए उन्होंने अपनी दावेदारी वापस ली और इस तरह मोरारजी देसाई प्रधानमंत्री बन गए। लेकिन इन तीनों दिग्गज नेताओं में मतभेद के चलते मोरारजी की सरकार जल्द ही गिर गई और फिर चरण सिंह कांग्रेस के समर्थन से प्रधानमंत्री बने। इसके लिए उनकी जमकर किरकिरी भी हुई। एक महीने में ही उन्हें इस्तीफा भी देना पड़ा। भारतीय राजनीति में चौधरी चरण सिंह के नाम ऐसे प्रधानमंत्री का रिकॉर्ड बना, जिन्हें पद पर रहते कभी संसद का सामना नहीं करना पड़ा।

राजीव गांधी

इंदिरा गांधी की हत्या के बाद की सहानुभूति लहर ने 1984 के लोकसभा चुनाव में राजीव गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस को 400 से ज्यादा सीटें दी। ये करिश्मा ऐसा था जो नेहरू और इंदिरा भी न कर सके। लेकिन उसी राजीव गांधी को 1989 के लोकसभा चुनाव में जनता ने ने 200 से भी कम सीटों में समेट दिया। राजीव गांधी की इस हार में अहम भूमिका रही उनकी सरकार में ही मंत्री रहे वी पी सिंह की।

विश्वनाथ प्रताप सिंह

विश्वनाथ प्रताप सिंह उर्फ़ वीपी सिंह ने बोफोर्स घोटाले का मुद्दा कुछ यूं उछाला कि वो हर घर तक पहुंच गया। राजीव गांधी के कुछ औऱ करीबियों के साथ मिल वी पी सिंह बोफोर्स के सहारे सत्ता के करीब पहुंच गए और 2 दिंसबर 1989 को उन्होंने आठवें प्रधानमंत्री के तौर पर शपथ ली। हालांकि उनकी सरकार ज्यादा दिनों तक नहीं चली।

चंद्रशेखर सिंह

1989 में जब जनता दल की गठबंधन सरकार बनी तो उस समय प्रधानमंत्री पद की रेस में चंद्रशेखर भी शामिल थे, लेकिन वीपी सिंह का पलड़ा भारी पड़ा। वीपी सिंह को प्रधानमंत्री बनाने के लिए अरुण नेहरू और देवीलाल जैसे दिग्गज नेताओं ने बकायदा साजिश रची जिसकी भनक तक चंद्रशेखर को न लगी।

लेकिन वीपी सिंह की पारी बहुत लंबी नहीं चली और 11 महीने के बाद ही उनकी सरकार गिर गई और फिर चंद्रशेखर प्रधानमंत्री बने। दिलचस्प बात ये है कि भारतीय राजनीति के युवा तुर्क कहे जाने वाले चंद्रशेखर कभी मंत्री भी नहीं रहे और सीधे प्रधानमंत्री । उन्होंने 10 नवंबर 1990 को भारत के नौवें प्रधानमंत्री के तौर पर शपथ लिया, हालांकि उनकी भी सरकार 21 जून 1991 में गिर गई।

पीवी नरसिम्हा राव

1991 में पीवी नरसिम्हा राव राजनीति से संन्यास लेने की योजना बना रहे थे लेकिन तभी ऐसी घटना हुई जिसने उन्हें प्रधानमंत्री बना दिया। राजीव गांधी की हत्या के बाद कांग्रेस को ऐसा नेता चाहिए था जो पार्टी के साथ-साथ देश को भी संभाल सके। ऐसी स्थिति में सोनिया गांधी ने पीवी नरसिम्हा राव को चुना और 21 जून 1991 को वह भारत के 10वें प्रधानमंत्री बने।

अटल बिहारी वाजपेयी

‘जो कल थे वो आज नहीं हैं जो आज हैं वो कल नहीं होंगे। होने न होने का क्रम इसी तरह चलता रहेगा। हम हैं हम रहेंगे, ये भ्रम भी सदा पलता रहेगा।” ये लाइन अटल बिहारी वाजपेयी की हैं जो पहली बार 13 दिनों के लिए प्रधानमंत्री रहे लेकिन लोगों के दिलों पर अपनी गहरी छाप छोड़ गए। 1996 में भारत की राजनीति के इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ जब कोई सरकार 13 दिनों में गिर गई।

दूसरी बार वाजपेयी की सरकार 13 महीनों तक चली। 1998 में उनकी साफ-सुथरी छवि ने उन्हें फिर प्रधानमंत्री बनाया। इस बार उन्होंने अपने पूरे पांच साल पूरे किए। वाजपेयी पहले ऐसे गैर-कांग्रेसी नेता थे जिन्होंने पूरे पांच साल प्रधानमंत्री पद संभाला।

भारतीय राजनीति के इतिहास में 1996 में ऐसा पहली बार हुआ जब दो साल में ही देश को तीन प्रधानमंत्री मिले। सबसे पहले बीजेपी के अटल बिहारी वाजपेयी पीएम बने। जब वो लोकसभा में बहुमत सिद्ध नहीं कर पाए तो उन्हें इस्तीफा देना पड़ा। कांग्रेस दूसरी सबसे बड़ी पार्टी थी लेकिन सरकार बनाने का दावा नहीं किया और इसके बाद यूनाइटेड फ्रंट ने जब सरकार बनाने की सोची तो फिर पीएम पद के लिए एचडी देवगौड़ा का नाम आया।

एचडी देवेगौड़ा

उस समय कर्नाटक की राजनीति में देवगौड़ा का नाम काफी बड़ा था और उनकी छवि साफ-सुथरी थी। प्रधानमंत्री पद के दावेदार तो कई थे लेकिन देवगौड़ा के नाम पर सहमति बनई। ये भी काफी दिलचस्प है कि 1996 के चुनाव में सिर्फ 46 सीटें लाने वाली पार्टी जनता दल के नेता देवगौड़ा को पीएम पद मिला। उन्होंने 1 जून 1996 को पद की शपथ ली और 21 अप्रैल 1997 को सरकार गिर गई।

इंद्र कुमार गुजराल

1996 में राजनीतिक अस्थिरता का आलम ये था कि दो साल के भीतर ही तीन प्रधानमंत्री बने लेकिन फिर भी लोकसभा का कार्यकाल पूरा नहीं हो पाया। बीजेपी के अटल बिहारी वाजपेयी और यूनाइटेड फ्रंट के एचडी देवगौड़ा के बाद तीसरे प्रधानमंत्री बने थे इंद्र कुमार गुजराल।

उस समय प्रधानमंत्री पद की रेस में कई दिग्गज नेता थे लेकिन गठबंधन के ये बड़े नेता अपने ही लोगों की साजिश के शिकार थे। ऐसे में पाकिस्तान में पैदा हुए इंद्र कुमार गुजराल को प्रधानमंत्री पद की कुर्सी तोहफे में दी गई। दिलचस्प ये है कि जब प्रधानमंत्री पद के लिए उनके नाम का निर्णय हुआ तो उस वक्त वो सो रहे थे। उन्होंने 21 अप्रैल 1997 को पद की शपथ ली और 19 मार्च 1998 में सरकार गिर गई।

मनमोहन सिंह

2004 के लोकसभा चुनावों में किसी को ये अंदाजा नहीं था कि एनडीए को जनता बेरहमी से सत्ता से खारिज कर देगी। ना ‘इंडिया शाइनिंग’ का नारा लोगों को लुभा पाया और ना ही अटल बिहारी वाजपेयी की साफ सुथरी छवि। कांग्रेस के रणनीतिकारों ने इस बार गठंबधन की राजनीति की ठानी। साथ ही हर तरफ सुर्खियां यही रहीं कि अगर यूपीए को जीत मिली तो सोनिया गांधी ही प्रधानमंत्री बनेंगी।

उस समय किसी को इस बात की भनक भी नहीं थी कि मनमोहन सिंह देश की बागडोर संभालने वाले हैं। 13 मई को नतीजे आए और 20 मई को मनमोहन सिंह ने प्रधानमंत्री पद की शपथ ली। इसके बाद साल 2009 में भी यूपीए की सरकार बनी और मनमोहन सिंह दूसरी बार प्रधानमंत्री बने।

नरेंद्र मोदी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में बीजेपी ने साल 2014 में अपने दम पर बहुमत हासिल कर सरकार बनाई। कांग्रेस अपने इतिहास में सबसे कम सीटों (44 सीट) पर सिमट गई। इसके बाद एक बार फिर साल 2019 के चुनावों में पिछली बार से अधिक (303) सीटें लाकर फिर से वो देश के प्रधानमंत्री बनें। कांग्रेस की एक बार फिर से दुर्गति हुई और मात्र 52 सीटों पर सिमट गई।

बागपत: हाथ में हैंड ग्रेनेड, हथियारों के साथ युवक का फोटो वायरल, पुलिस ने लिया हिरासत में

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 73वें स्वतंत्रता दिवस को लेकर यूपी हाई अलर्ट है। वहीं, बागपत से एक ऐसी तस्वीर सामने आई जिसने सबके होश उड़ा दिए। दरअसल, सोशल मीडिया पर एक तस्वीर वायरल हो रही है। जिसमें एक युवक हैंड ग्रेनेड व हथियारों के साथ दिखाई दे रहा है। वायरल हो रही ये फोटो जब पुलिस के सामने पहुंचे तो उसके पैरों के नीचे से जमीन खिसक गई। बता दें कि तस्वीर वायरल होने के बाद पुलिस युवक को हिरासत में लेकर पूछताछ कर रही है। पुलिस इस बात की जांच कर रही है कि फोटो किसी ने युवक को फंसाने के लिए एडिट कर वायरल किया है या युवक किसी गिरोह का सदस्य है।तीन फोटो हुए वायरल

मीडिया खबरों के मुताबिक, आरोपी युवक की पहचान रामवीर उर्फ मोनू जाट के रुप में हुई है। वह बागपत कोतवाली इलाके के बागु गांव का रहने वाला बताया जा रहा है। उसके तीन फोटो सामने आए हैं। एक फोटो में वह हाथ में हैंड ग्रेनेड लेकर सेल्फी ले रहा है। जबकि दूसरे फोटों में हथियारों के जखीरे का प्रदर्शन कर रहा है। उसके पास भारी मात्रा में हथियार व कारतूस हैं।

क्या कहा एसपी ने

एसपी शैलेश कुमार पांडेय ने बताया कि युवक के सोशल मीडिया पर फोटो वायरल हुए है। पूछताछ के लिए उसे लाया गया है। उससे जानकारी ली जा रही है। अभी तक कोई महत्वपूर्ण जानकारी नहीं मिली है और न ही कोई हथियार बरामद हुए है। प्रकरण की पूरी सच्चाई जानने के बाद ही पुलिस किसी नतीजे पर पहुंचेगी।

ट्विटर पर हुए फोटो वायरल

स्वतंत्रता दिवस से एक दिन पहले सोशल मीडिया पर युवक के हैंड ग्रेनेड और हथियारों के जखीरे के साथ फोटो वायरल हुए हैं। ट्विटर पर एक एजेंसी के एकाउंट से युवक के फोटो वायरल किए गए हैं। बुधवार को ट्विटर पर युवक के तीन फोटो अपलोड किए गए हैं।

पीएम ने 73वें स्वतंत्रता दिवस पर देश को किया संबोधित, सेना को लेकर बड़ा ऐलान, जानिए मोदी के भाषण की अहम बातें

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प्रधामंत्री नरेंद्र मोदी ने लाल किले की प्राचीर पर 73वें स्वतंत्रा दिवास पर तिरंगा फहराया और देश वासियों को स्वतंत्रता दिवस की बधाई दी। इस मौके पर उन्होंने देश को संबोधित करते हुए कश्मीर समेत कई अहम मुद्दों पर बात की। साथ ही कई अहम घोषणाएं भी कीं।

फोटो: डीडी न्यूज

पीएम मोदी के संबोधन की अहम बातें:

सबका साथ, सबका विकास हमारी सरकार का मूल मंत्र:

लाल किले की प्राचीर से देश को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि हम सबका साथ-सबका विकास का मंत्र लेकर चले थे, लेकिन पांच साल में यह सबका साथ-सबका विकास और सबका विश्वास हो गया है, और यह देश की वजह से हुआ है। उन्होंने कहा कि अब हम संकल्प से सिद्धी की ओर बढ़ रहे हैं।

जम्मू-कश्मीर से धारा 370 हटाना जरूरी था:

देश को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि हम समस्या को टालते भी नहीं हैं और समस्या को पालते भी नहीं हैं। जो काम 70 साल में नहीं हुआ वो हमारी सरकार ने 70 दिन में कर दिया। संसद के दोनों सदनों ने दो तिहाई बहुमत से इस पर फैसला लिया गया। पीएम ने कहा कि जम्मू-कश्मीर को लेकर 70 साल में हर किसी ने कुछ ना कुछ किया है। उन्होंने कहा कि घाटी के लोगों को कई सुविधाओं का फायदा नहीं मिल पा रहा था, वहां पर भ्रष्टाचार, अलगाववाद ने अपने पैर जमा लिए थे।

फोटो: डीडी न्यूज

सुरक्षा बलों को लेकर पीएम मोदी ने किया बड़ा ऐलान:

देश को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने कहा, “हमारे सुरक्षा बल हमारी शान हैं। हमारी सेनाओं के बीच समन्वय को और बढ़ाने के लिए मैं आज एक बड़े फैसले की घोषणा करता हूं। भारत में अब एक चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (सीडीएस) होगा। यह सुरक्षा बलों को और भी मजबूत बनाने जा रहा है।”

फोटो: डीडी न्यूज

देश के बुनियादी ढांचे पर 100 लाख करोड़ रुपये का निवेश का ऐलान:

पीएम मोदी ने कहा कि आज 21वीं सदी की जरूरतों के मुताबिक, देश में आधुनिक बुनियादी ढांचे की स्थापना की जा रही है। उन्होंने कहा कि हमने देश के बुनियादी ढांचे पर 100 लाख करोड़ रुपये का निवेश करने का फैसला किया है।

देश में पर्यटन को बढ़ावा देने पर पीएम मोदी ने दिया जोर:

देश को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने कहा, “भारत में बहुत कुछ है। मुझे पता है कि लोग छुट्टियों के लिए विभिन्न देशों की यात्रा करते हैं, लेकिन क्या हम 2022 से पहले भारत में कम से कम 15 पर्यटन स्थलों पर जाने के बारे में सोच सकते हैं, जब हम आजादी के 75 साल पूरे करेंगे।”

पीएम मोदी ने देश वासियों से की डिजिटल पेमेंट की अपील:

लाल किले की प्राचीर से देश को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने देश वासियों से डिजिटल पेमेंट करने की अपील की। उन्होंने कहा, “डिजिटल पेमेंट को हां, नकद को ना’ क्या हम इसे अपना आदर्श बना सकते हैं? आइए हम पूरे देश में डिजिटल भुगतान का उपयोग बढ़ाएं।”

विश्व भारत के साथ व्यापार करने के लिए उत्सुक:

पीएम मोदी ने कहा कि आज देश में एक स्थिर सरकार है, नीति प्रणाली अनुमानित है। उन्होंने कहा कि विश्व भारत के साथ व्यापार करने के लिए उत्सुक है। हम कीमतों को नियंत्रण में रखने और विकास को गति देने के लिए काम कर रहे हैं। पीएम ने कहा कि हमारी अर्थव्यवस्था के मूल तत्व मजबूत हैं।

भ्रष्टाचार और काले धन को हटाने की दिशा में हर प्रयास सराहनीय:

लाल किले की प्रचीर से देश को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि भ्रष्टाचार और काले धन को हटाने की दिशा में हर प्रयास स्वागत योग्य है। उन्होंने कहा कि भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई को आगे भी जारी रखना है।

पीएम मोदी ने जनसंख्या नियंत्रण पर जोर दिया:

पीएम मोदी ने जनसंख्या नियंत्रण पर जोर देते हुए कहा कि देश में जनसंख्या वृद्धि से बहुत सारी परेशानियां बढ़ेंगी। उन्होंने कहा कि छोटे परिवार की नीति का पालन करने वाले भी राष्ट्र के विकास में योगदान देते हैं, यह भी देशभक्ति का एक रूप है।

हर घर में जल पहुंचाने के लिए काम करना है:

देश को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि हर घर में जल पहुंचाने के लिए काम करना है। उन्होंने कहा कि पानी के संग्रह के लिए लगातार प्रयास होने चाहिए। पीएम ने कहा कि पानी पर 70 साल के काम को पांच गुणा बढ़ाना है।

आज देश का मिजाज बदल गया है:

देश को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि आज देश की सोच बदल गई है। उन्होंने कहा कि पहले जो लोग बस अड्डे की मांग करते थे, आज वे पूछते हैं कि हवाई अड्डा कब बनेगा। पीएम ने कहा कि पहले गांव में पक्की सड़क की मांग होती थी, लेकिन आज लोग पूछते हैं कि सड़क फोर लेन या 6 लेन बनेगी।

PAK के कहने पर चीन ने की मांग- कश्मीर पर जल्द हो UNSC की बैठक

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भारत द्वारा जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 कमजोर किए जाने की वजह से सबसे ज्यादा मुश्किल पाकिस्तान को हो रही है. पाकिस्तान ने लगातार भारत के फैसले का विरोध किया है और कई देशों से इसमें दखल देने की मांग की है. अब पाकिस्तान के दोस्त चीन ने उसकी बात मानते हुए संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद को बैठक बुलाने की मांग की है. इस बैठक में चीन ने जम्मू-कश्मीर मसले पर पाकिस्तान की शिकायतों को सुनी जाने की बात कही है. बताया जा रहा है कि अब इस मसले पर 16 अगस्त को UNSC में बैठक हो सकती है.

चीन की तरफ से आधिकारिक तौर पर पोलैंड को ये खत लिखा गया है. UNSC में पोलैंड अगस्त महीने का काउंसिल चेयरमैन है इसलिए किसी भी बैठक को बुलाने के लिए उसकी मंजूरी जरूरी है.

संयुक्त राष्ट्र के एक अधिकारी के मुताबिक, चीन की इस सिफारिश पर बात हो रही है, 16 अगस्त को इस पर बैठक भी हो सकती है. बता दें कि इससे पहले चीन की तरफ से इस मसले पर भारत-पाकिस्तान को शांति बरतने की बात कही थी.

गौरतलब है कि बीते दिनों पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी ने भी इस मसले पर संयुक्त राष्ट्र को चिट्ठी लिखी थी और चीन जाकर वहां के विदेश मंत्री से मुलाकात की थी. पाकिस्तान का आरोप था कि भारत के द्वारा लिया गया फैसला संयुक्त राष्ट्र के नियमों का उल्लंघन है.

पाकिस्तान की तरफ से इस मसले को कई देशों के सामने उठाया गया है, लेकिन हर किसी ने इसे भारत का आंतरिक मामला बताया है. और पाकिस्तान से द्विपक्षीय तौर पर काम करने को कहा है. संयुक्त राष्ट्र ने भी इस मसले को भारत का आंतरिक मसला बताया था.

अभी हाल ही में विदेश मंत्री एस. जयशंकर भी चीन गए थे, जहां उन्होंने चीनी विदेश मंत्री वांग ली के साथ द्विपक्षीय वार्ता करते हुए जम्मू-कश्मीर पर भारत की स्थिति बताई थी. जयशंकर ने साफ कहा था कि भारत ने जो फैसला लिया है वह उसका आंतरिक मामला है और इससे ना चीन-ना पाकिस्तान किसी की सीमा पर असर पड़ता है.

आपको बता दें कि बुधवार को पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) की विधानसभा में ऐलान किया था कि पाकिस्तान इस मसले को पूरी दुनिया के सामने उठाएगा.

देशभक्ति में डूबा वाघा-अटारी बॉर्डर, लोगों ने लगाए ‘भारत माता की जय’ के नारे

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देश आज 73वां स्वतंत्रता दिवस मना रहा है। इस खास मौके पर पूरे देश में कार्यक्रमों का ओयाजन किया गया है। साथ ही आज देश भाई-बहनों का पर्व रक्षा बंधन भी मना रहा है। पूरे देश में आज स्वतंत्रता की खुशियां मनाई जा रही है। भारत और पाकिस्तन की सीमा पर स्थित वाघा बॉर्डर पर स्वतंत्रता दिवस के कार्यक्रम का आयोजन किया गया है। 

बता दें कि अटारी पंजाब के अमृतसर में स्थित हैं, जबकि वाघा लाहौर में स्थित हैं। लोग पूरे जोश उल्लास के साथ वाघा बॉर्डर पर कार्यक्रम का लुत्फ उठा रहे है। तस्वीरों में

स्वतंत्रता दिवस के कार्यक्रम के लिए वाघा-अटारी बॉर्डर पर बुधवार रात से ही लड़ियों से सजावट की जा रही थी। यहां एक भव्य कार्यक्रम का आयोजन किया गया।

दोनों देशों के जवानों ने सीमा पर जोश के साथ परेड किया। जवानों ने सीमा पर भारत माता की जय के नारे लगाए। जवानों ने कई तरह की कलाबाजी भी की।

स्वतंत्रता दिवस पर वाघा-अटारी बॉर्डर पर तिरंगा फहराया गया। बीएसएफ के जवानों ने सीमा पर तिरंगा फहरा कर जय हिंद के नारे लगाए। नारेबाजी में लोगों ने भी भरपूर समर्थन किया।

वाघा-अटारी बॉर्डर पर लोगों ने जोश के साथ भारत माता के नारे लगाए। बीएसएफ लोगों का जोश बढ़ा रही थी। लोग देश भक्ति में डूबे नजर आए। लोग जय हिंद के नारे के साथ बीएसएफ का जोश बढ़ा रहे थे। जिसके बाद सीमा पर खड़ें जवान तरह-तरह की कलाबाजियां कर रहे थे।

भारतीय जवानों ने पाकिस्तानी जवानों की तरफ देखकर शौर्य का प्रदर्शन किया। भारतीय जवानों ने भारत माता की जय के नारे लगाए।

‘बीटिंग रिट्रीट सेरेमनी’, जिसका गवाह बनने के लिए दोनों देशों के हजारों लोग हर रोज जुटते हैं। यह वाघा बार्डर पर हर शाम दोनों देशों के राष्ट्रीय ध्वज उतारने का अवसर है। इसकी शुरुआत 1959 में हुई। उसके बाद से यह बिना रुके जारी है। हां, 1965 और 1971 में भारत-पाक युद्ध के दौरान इसका आयोजन नहीं किया गया। बंटवारे के बाद से सालों से तनावपूर्ण माहौल के बीच इस दिखावटी दोस्ती का प्रदर्शन होता है।

लद्दाख में स्वतंत्रता दिवस का जश्न, जमकर नाचे सांसद जामयांग शेरिंग

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संसद में अपने भाषण से सोशल मीडिया पर छा जाने वाले लद्दाख के सांसद जामयांग शेरिंग एक बार फिर चर्चा में हैं. गुरुवार को स्वतंत्रता दिवस के मौके पर वह लेह में थे, जहां उन्होंने स्थानीय लोगों के साथ मिलकर इसका जश्न मनाया. जश्न में बीजेपी सांसद इतना डूबे कि उन्होंने जमकर डांस किया.

बता दें कि लद्दाख अब एक केंद्र शासित प्रदेश बन गया है. इसकी मांग स्थानीय लोग काफी लंबे समय से करते आए थे, जो अब जाकर पूरी हुई है.

इससे पहले लोकसभा में इस बिल के पारित होने के बाद जब जामयांग शेरिंग पहली बार अपने क्षेत्र में पहुंचे थे तो वहां उनका जबरदस्त स्वागत हुआ था. तब भी वह समर्थकों के साथ खूब झूमे थे. तब वह हाथ में तिरंगा लेकर थिरके थे और समर्थकों के साथ जश्न मनाया था.

बता दें कि संसद में जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 कमजोर किए जाने और लद्दाख को केंद्र शासित बनाए जाने के बिल पर जब चर्चा हो रही थी, तब जामयांग शेरिंग ने भाषण दिया था. उस भाषण की काफी चर्चा हुई थी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भी तारीफ की थी.

उनके भाषण में पीडीपी, नेशनल कॉन्फ्रेंस निशाने पर रहे थे. अपने भाषण में उन्होंने कहा था कि अनुच्छेद 370 की वजह से लद्दाख की पहचान छुपी रही. साथ ही कश्मीर के नेता भारत सरकार से पैसा ले जाकर घाटी में ही रखते थे और लद्दाख को पूरी तरह से पिछड़ा ही रखा गया.

कांग्रेस मुख्याल में पार्टी अध्यक्ष सोनिया गांधी ने फराया तिरंगा

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73वें स्वतंत्रता दिवस के मौके पर कांग्रेस मुख्यालय में समारोह आयोजित किया गया। इस मौके पर कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी तिरंगा फहराया। इस मौके पर पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह, मोती लाल वोरा, राहुल गांधी, कपिल सिब्बल और गुलाम नबी आजाद समेत पार्टी के कई बड़े नेता मौजूद थे।

राखी पर धर्मेंद्र को याद आई बहन, बोले- ‘स्ट्रगल के दिनों में इन्होंने बालकनी में सोने की जगह दी थी’

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रक्षाबंधन के मौके पर एक्टर धर्मेंद्र को अपनी बहन की याद आई । हाल ही में धर्मेंद्र ने सोशल मीडिया पर एक पुरानी तस्वीर शेयर की है । इस फोटो में धर्मेंद्र के साथ एक महिला नजर आ रही हैं । ये महिला धर्मेंद्र को राखी बांध रही है । इस फोटो को शेयर करने के साथ धर्मेंद्र ने कैप्शन भी लिखा ।

धर्मेंद्र लिखते हैं, ‘मेरे गाँव की इस देवी ने, मेरे स्ट्रगल के दिनों, अपने रेल्वे क्वॉर्टर की बालकनी में रहने को जगह दी थी मुझे । हर साल राखी बाँधती थीं । ये नहीं रहीं । राखी के दिन बहुत याद आती है इनकी । देश, दुनिया की तमाम बहनों को, राखी के शुभ दिन पर जी जान से प्यार दुआएं ।’

इस पोस्ट से साफ है कि धर्मेंद्र अपने स्ट्रगल के दिनों में महिला के घर की बालकनी में सोया करते थे । धर्मेंद्र की पोस्ट पर आए कमेंट से पता लगा कि इस महिला का नाम लक्ष्मी है । धर्मेंद्र के इस पोस्ट को 3 घंटे में 40 हजार से ज्यादा लोग लाइक कर चुके हैं । धर्म पाजी के फैंस उनकी तारीफ कर रहे हैं । 

बता दें कि 83 साल के धर्मेंद्र अब फिल्मों से दूर हैं । अब वो अपना ज्यादातर समय फार्म हाउस पर गुजारते हैं । धर्मेंद्र सोशल मीडिया पर भी काफी एक्टिव रहते हैं । खेती और पशु पालन करते अक्सर वो वीडियो शेयर करते रहते हैं । धर्मेंद्र का पोता यानी सनी देओल का बेटा करण देओल जल्द ही बॉलीवुड में एंट्री करने जा रहा है ।

करण की डेब्यू फिल्म का नाम ‘पल-पल दिल के पास’ है । इस फिल्म का टीजर हाल ही में रिलीज हुआ था, जिसे धर्मेंद्र ने अपनी इंस्टाग्राम वॉल पर भी शेयर किया । फिल्म को सनी देओल ने डायरेक्ट किया है । करण की फिल्म का नाम धर्मेंद्र के गाने ‘पल-पल दिल के पास’ से लिया गया है ।

मुख्यमंत्री ‘‘गढ़बो नवा छत्तीसगढ़‘‘ छायाचित्र प्रदर्शनी का आज करेंगे शुुभारंभ

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 मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल कल 15 अगस्त को स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर सायं 4.30 बजे राजधानी रायपुर के कलेक्टोरेट गार्डन के पास टाऊन हॉल में ‘गढ़बो नवा छत्तीसगढ़’ छायाचित्र प्रदर्शनी का शुभारंभ करेंगे। जनसंपर्क विभाग द्वारा आयोजित यह छायाचित्र प्रदर्शनी 15 अगस्त से 21 अगस्त तक प्रातः 10 बजे से रात्रि 8 बजे तक आयोजित की जाएगी। 

मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल राजधानी रायपुर में स्वतंत्रता दिवस के मुख्य समारोह में ध्वजारोहण करेंगे

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 मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल 15 अगस्त को राजधानी रायपुर के पुलिस परेड ग्राउण्ड में आयोजित स्वतंत्रता दिवस के मुख्य समारोह में सबेरे 9 बजे ध्वजारोहण कर परेड की सलामी लेंगे और प्रदेश जनता के नाम संदेश का वाचन करेंगे। समारोह में मुख्यमंत्री पुलिस अधिकारियों व कर्मचारियों को पदक अलंकरण, पुरस्कार वितरण करेंगे। मुख्यमंत्री इस अवसर पर स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों को सम्मानित करेंगे। समारोह में स्कूलों बच्चों द्वारा सांस्कृतिक कार्यक्रमों की प्रस्तुति दी जाएगी। पुलिस एवं अर्धसैनिक बलों द्वारा आकर्षक मार्चपास्ट किया जाएगा। समारोह का मुख्य आकर्षण नारायणपुर जिले के पोटाकेबिन के बच्चों द्वारा मलखम्ब और जंगल वॉर फेयर कॉलेज कांकेर द्वारा हॉर्स शो का प्रदर्शन किया जाएगा।