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SBI की इस खास स्कीम के जरिए मिलता है मोटा ब्याज, घर में रखे सोने से करें कमाई

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अगर आपके पास घर पर सोने की ज्‍वेलरी या सोने के सिक्के रखें हैं तो अब आप इस ज्‍वेलरी और सिक्कों से कमाई कर सकते हैं. इस स्कीम के जरिए आप घर में रखे सोने को इस स्कीम में लगा सकते हैं. इससे आपको दो फायदा होंगे. पहला यह कि सोना चोरी होने का टेंशन खत्म हो जाएगी. दूसरा सोने के एवज में आपको ब्याज मिलेगा.अगर आपके पास घर पर सोने की ज्‍वेलरी या सोने के सिक्के रखें हैं तो अब आप इस ज्‍वेलरी और सिक्कों से कमाई कर सकते हैं. जी हां स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) गोल्‍ड डिपॉजिट स्‍कीम (R-GDS) के तहत मोटे ब्याज के साथ कई फायदे देता है. SBI ज्‍वेलरी या सोने की शुद्धता के आधार पर आपको सोने का जमा प्रमाण पत्र देता है. वहीं, जब जमा की अवधि खत्‍म हो जाती है, तब 3, 4, 5 या 6 साल बाद आप उस सोने को या तो गोल्‍ड के रूप में या कैश के रूप में ब्‍याज के साथ उस समय के दाम के हिसाब से पैसा ले सकते हैं. इस स्कीम के जरिए आप घर में रखे सोने को इस स्कीम में लगा सकते हैं. इससे आपको दो फायदा होंगे. पहला यह कि सोना चोरी होने का टेंशन खत्म हो जाएगी. दूसरा सोने के एवज में आपको ब्याज मिलेगा. 

आइए आपको बताते हैं इस स्कीम के बारे में
एसबीआई की वेबसाइट पर दी गई जानकारी के मुताबिक, भारत में रहने वाला कोई भी व्यक्ति इस स्कीम में शामिल हो सकता हैं. सिंगल, जाइंट अकाउंट भी खुलवाया जा सकता हैं. एचयूएफ, पार्टरशिप फर्म भी इसमें निवेश कर सकती हैं.

कम से कम कितना सोना जमा करना होगा इस स्कीम के तहत 30 ग्राम सोना जमा करना अनिवार्य है, ज्यादा की कोई लिमिट नहीं है.

स्कीम को बीच में तोड़ने पर पैनल्टी
एक साल के तय समय से पहले पैसा निकालने पर ब्याज दर पर पैनल्टी लगेगी. वहीं, मीडियम टर्म वाली अवधि में निवेशक 3 साल के बाद स्कीम से बाहर हो सकते हैं. लॉन्ग टर्म वाली स्कीम से 5 साल के बाद ही बाहर निकला जा सकता हैं. इन अवधी के बीच में पैसा निकाला तो पैनल्टी लगेगी.

किस शाखा में मिलेगा स्कीम का फायदा
SBI की दिल्ली में पीबीबी ब्रांच, SME ब्रांच चांदनी चौक, कोयम्बटूर ब्रांच, हैदराबाद की मेन ब्रांच, मुंबई की बुलियन ब्रांच में इसका फायदा उठाया जा सकता है.

कितने साल के लिए होता है जमा
इस स्कीम में 1-3 साल के लिए जमा किया जाता है. एसबीआई में इस स्कीम का नाम शॉर्ट टर्म बैंक डिपॉजिट (STBD) रखा हैं. वहीं, मीडियम और लॉन्ग टर्म के लिए जमा अवधि 5-7 और 12-15 साल है.

कितना मिलेगा ब्याज
STBD स्कीम में फिलहाल एक साल के लिए 0.50 फीसदी ब्याज दिया जा रहा है. दो साल के लिए 0.55 फीसदी और तीन साल के लिए 0.60 फीसदी है. वहीं, लॉन्ग टर्म यानी 5-7 साल के लिए 2.25 फीसदी/सालाना ब्याज मिलेगा. 12-15 साल के लिए 2-5 फीसदी/सालाना का ब्याज मिलेगा.

मिलते हैं ये फायदे

लोन की सुविधा 
आप SBI की किसी भी शाखा में गोल्‍ड के मौलिक मूल्य के 75 प्रतिशत तक रुपये के ऋण का लाभ उठा सकते हैं. यानी आपको एसबीआई की गोल्‍ड डिपॉजिट स्‍कीम से लोन में भी फायदा मिलेगा.
निष्क्रिय सोने पर मिलेगा ब्‍याज
लॉकर में रखे सोने में आपको कुछ नहीं मिलता है. तो वहीं निष्क्रिय सोना यानी की बहुत दिनों से घर पर पड़े हुए सोने पर आपको ब्‍याज भी मिलेगी. एसबीआई गोल्ड डिपॉजिट स्कीम के अंतर्गत, ब्याज, गोल्ड मुद्रा में गणना की जाती है और रुपये के बराबर में भुगतान किया जाता है.

सोने के दाम बढ़ने पर मिलेगा ज्यादा फायदा
जब आपकी सोना जमा योजना परिपक्व होती है, तो आप मौजूदा दरों पर रिडीम करते हैं, जिसका मतलब है कि सोने की कीमतों में इजाफा हुआ है, तो आप लाभ हासिल कर सकते हैं. आप इसे लॉकर में रखे सोने की कीमत से तुलना करें आपको यहां पर डिपॉजिट स्‍कीम में ब्‍याज मिलेगा लेकिन लॉकर में रखे सोने पर नहीं मिलेगा.

टैक्‍स में छूट
अगर आपके पास कमाई से ज्‍यादा का सोना है तो आपको इसके लिए संपत्ति कर के तहत टैक्‍स भरना पड़ेगा. हालांकि, एसबीआई गोल्ड डिपॉज़िट योजनाओं पर कोई संपत्ति कर, पूंजीगत लाभ कर या आयकर देय नहीं है. यानी कि आपको टैक्‍स में छूट मिल जाएगी.

बच जाती है लॉकर की फीस 
लॉकर की फीस और चोरी की कोई टेंशन नहीं आपको अपने सोने और आभूषणों को स्टोर करने के लिए लॉकर की लागतों के बारे में चिंता करने की आवश्यकता नहीं है और चोरी की कोई चिंता भी नहीं है. जारी किए गए प्रमाण पत्र अत्यंत सुरक्षित होते हैं.

तीनों बच्चों, पत्नी और मां के साथ इस इवेंट में दिखे मुकेश अंबानी, छोटे बेटे की गर्लफ्रेंड भी आई नजर

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मुकेश अंबानी पूरे परिवार के साथ रिलायंस इंडस्ट्री लिमिटेड की वार्षिक आम बैठक (एजीएम) में पहुंचे। इस बैठक के दौरान मुकेश अंबानी ने कंपनी से जुड़े कई अहम ऐलान किए। मुकेश अंबानी के साथ पत्नी नीता अंबानी, मां कोकिलाबेन ने कैमरे के सामने पोज दिए।

एजीएम में मुकेश और नीता के तीनों बच्चे ईशा अंबानी, आकाश अंबानी और अनंत अंबानी भी मौजूद रहे। आकाश अंबानी के साथ उनकी पत्नी श्लोका मेहता भी दिखीं।

ईशा अंबानी ने इस दौरान हाई हील्स के साथ फ्लोरल ड्रेस पहनी हुई थी। वहीं उन्होंनै लाइट मेकअप कर रखा था। ईशा अंबानी अपनी शादी के वक्त चर्चा में रही थीं। बीते साल 12 दिसंबर को ईशा अंबानी ने पीरामल समूह के चेयरमैन अजय पीरामल के बेटे आनंद पीरामल संग सात फेरे लिए थे।

आकाश अंबानी और श्लोका एक दूसरे का हाथ पकड़े हुए पहुंचे। ईशा अंबानी के बाद आकाश अंबानी शादी के बंधन में बंधे थे। इसी साल 9 मार्च में श्लोका मेहता के साथ शाही अंदाज में शादी की। जिसके बाद ये कपल रोमांस का नया चेहरा बनकर उभरा है। पब्लिकली जब भी ये दोनों सेलिब्रिटीज साथ में दिखते हैं सभी का ध्यान अपनी ओर खींचने में कामयाब रहते हैं। 

ये भी

मुकेश अंबानी के छोटे बेटे अनंत अंबानी गर्लफ्रेंड राधिका मर्चेंट के साथ देखे गए। राधिका ने हल्का नीला रंग का कुर्ता और सफेद दुपट्टा कैरी किया। आकाश अंबानी की शादी में राधिका मर्चेंट ने खूब सुर्खियां बटोरी थीं। राधिका की तस्वीरें और वीडियोज सोशल मीडिया पर देखते ही देखते वायरल हुए थे।

सांप ने किया महिला का जीना हराम जाने इस बारे में

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भारतवर्ष एक धर्मिक और मान्यताओं का देश है। जहाँ हर घटना को किसी न किसी मान्यता और अंधविस्वास से जोड़ दी जाती है। ऐसी ही एक घटना सामने आयी है, उत्तराखंड की रहने वाली एक महिला का कहना है कि वह जहां-जहां भी जाती है, एक सांप उसके पीछे पड़ जाता है।

# यह महिला इस घटना का शिकार एक बार नही बार बार हो रही है वह जब भी बाहर अकेली जाती है सांप उसके पीछे पड़ जाते है। इसलिये घर के लोग महिला को अकेला छोड़ने से भी डरने लगे है। यह महिला पांच बार सांप के डंस का शिकार हो चुकी है। लेकिन पांच बार ही उसकी जान बच गई।

# इस महिला का नाम संगीता है। इस महिला को सांप के डसने के पीछे भी एक राज है, वो यह कि इसके ससुर ने घर में घुसे एक सांप को मार दिया था, बस इसके बाद से ही सांप संगीता के पीछे पड़ने लगे है और उसे अपने डंस का शिकार बनाते है। जब कोई अन्य इंसान है तो संगीता को सांप नही सताते है अकेली रहने पर ही सांप उसे सताते है, इसलिये घर के लोगों का हर वक्त संगीता के साथ होना जरूरी सा हो गया है।

जानिए क्यों 40 हजार रुपए के पार जा सकती है सोने की कीमत

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देश में आज वायदा बाजार में सोना 38,525 रुपए प्रति दस ग्राम के भाव पर पहुंच गया। MCX पर अक्टूबर के सोना वायदा ने 0.70% की छलांग लगाई। फिजिकल बाजार की बात करें तो सोना 37,025 रुपए प्रति दस ग्राम की कीमत पर है। सर्राफा बाजार के कारोबारियों के मुताबिक, दिवाली आने तक सोने की कीमत 40 हजार रुपए चले जाने की संभावना है।

ट्रेड वॉर के चलते वैश्विक स्तर पर सोने के बढ़ते दाम और कमजोर होते रुपए के कारण देश में सोने का दाम लगातार बढ़ रहा है। सर्राफा बाजार के कारोबारी पवन झलानी के मुताबिक, सोने की कीमत में जिस तरह से तेजी आ रही है, उसके हिसाब से दिवाली तक सोने के 40 हजार के पार जा सकता है।

यानी दिवाली के समय सोने के आभूषण या सोने का सिक्का खरीदने के लिए आपको ज्यादा कीमत चुकानी पड़ सकती है। वैश्विक बाजार में स्पॉट गोल्ड 0.6 फीसदी की बढ़त के साथ 1,505 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गया है।

MP : रेत माफिया हो रहा बेलगाम, चल रहा है ऐसा काम

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नदावन गांव की नदी से किया जा रहा रेत के अवैध उत्खनन पर क्षेत्रीय अधिकारी मौन साधे हुए हैं। रेत के अवैध उत्खनन के खिलाफ अधिकारियों द्वारा कार्रवाई नहीं किए जाने के कारण रेत माफिया बेखौफ होकर नदी में अवैध उत्खनन कर रहे हैं। स्थानीय अधिकारियों के अलावा जिला मुख्यालय के अधिकारी भी रेत के अवैध उत्खनन पर रोक नहीं लगा रहे हैं।

जबकि रेत के अवैध उत्खनन और परिवहन को रोकने के लिए जिला प्रशासन द्वारा संयुक्त टीम गठित की गई थी। टीम में शामिल अधिकारियों को रेत के अवैध उत्खनन, भंडारण और परिहवन के खिलाफ कार्रवाई किए जाने के लिए निर्देश दिए गए थे। लेकिन संयुक्त टीम में शामिल अधिकारियों द्वारा रेत के अवैध उत्खनन, भंडारण के खिलाफ कार्रवाई नहीं की जा रही है। नदी में जेसीबी के माध्यम से रेत का अवैध उत्खनन किया जा रहा है और नदी की रेत को सड़क पर ही भंडारित कर रखा जाता है।

Independence Day 2019: चंद्रशेखर आजाद के वंशज कर रहे हैं ये काम

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चंद्रशेखर आजाद एक ऐसा नाम है जो भारत के स्वतंत्रता संग्राम के एक पूरे युग का प्रतिनिधित्व करता है। इन्हीं चंद्रशेखर आजाद के वंशज उत्तरप्रदेश की राजधानी लखनऊ में एक इलेक्ट्रिक की दुकान चलाकर अपना जीवन गुजर-बसर कर रहे हैं। लेकिन परिवार के लोगों में देशभक्ति का वह जज्बा आज भी बरकरार है जिसके बल पर आजाद ने इस देश को आजादी दिलाई थी। चंद्रशेखर आजाद की भूमिका को आगे बढ़ा रहे उनके वंशज अमित आजाद (36 वर्ष) का कहना है कि वे गुजर-बसर के लिए मोटर बाइंडिंग और घरों में लाइटिंग करने का काम करते हैं। लेकिन जैसे ही समय मिलता है, वे युवाओं को देश के लिए प्रेरित करने के मिशन पर निकल पड़ते हैं।इसी को उन्होंने अपने जीवन का लक्ष्य बना लिया है।चंद्रशेखर आजाद के चाचा रामभरोसे तिवारी के बेटे महावीर तिवारी के पुत्र सुजीत आजाद तिवारी और उनके (सुजीत आजाद तिवारी) के पुत्र अमित आजाद का कहना है कि उन्होंने कभी कोई सरकारी सहायता नहीं ली। वे कोई सरकारी सुविधा नहीं चाहते। क्रांतिकारियों के परिवार को मिलने वाली सरकारी पेंशन दिए जाने की पेशकश उनके परिवार को की गई थी जिसे ससम्मान परिवार ने इनकार कर दिया। अमित आजाद ने कहा कि वे अपना कर्तव्य पूरा करना चाहते हैं, अधिकारों की बात उनके लिए दूसरे नंबर की चीज है।

इस बात की है चिंता आजादी के 71 साल बीत जाने के बाद देश के सामने सबसे बड़ी चुनौती क्या है, यह पूछे जाने पर अमित आजाद ने कहा कि किसी भी राष्ट्र की सबसे मजबूत चीज उसकी संस्कृति और उसके संस्कार होते हैं। वे यह देखकर बेहद दुखी हैं कि आज के युवाओं की एक बड़ी संख्या नशे की गिरफ्त में है। उन्होंने कहा कि हमारे ऊपर सांस्कृतिक हमला किया जा रहा है। छोटे-छोटे शहरों में हुक्का बार खुल रहे हैं, शराब का सेवन फैशन बनता जा रहा है। छोटे-छोटे बच्चे और युवतियां नशे की गिरफ्त में हैं। इससे बचना दूसरे स्वतंत्रता संग्राम की लड़ाई के रुप में लिया जाना चाहिए।

अमित आजाद ने अमर उजाला को बताया कि आजादी की लड़ाई के दिनों में क्रांतिकारी सचींद्र नाथ सान्याल और चंद्रशेखर आजाद ने हिंदुस्तान रिपब्लिकन आर्मी बनाई थी। इसी संस्था की प्रेरणा से उन्होंने ऐतिहासिक अनुसंधान संस्थान (हिस्टोरिकल रिसर्च एसोसिएशन) संस्था बनाई है जिसके माध्यम से वे देश के युवाओं को नशे से दूर रहने और देशभक्ति के लिए क्या करना है, इसका संदेश दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि मेरे लिए कई राजनीतिक दलों से चुनाव लड़ने का प्रस्ताव मिला था, लेकिन उन्होंने सबको सविनय इनकार कर दिया। उन्होंने कहा कि वे देश की सेवा करना चाहते हैं और इसके लिए युवाओं को प्रेरित करना सबसे आवश्यक समझते हैं।

सालभर की बेटी ने अचानक ही मां के एक ब्रेस्ट का दूध पीना कर दिया बंद, महिला ने जब डॉक्टर को दिखाया तो उड़ गए होश

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इंग्लैंड की रहने वाली एक महिला की एक साल की बेटी ने अचानक से एक ब्रेस्ट से दूध पीना बंद कर दिया। महिला को शक हुआ तो उसने डॉक्टर को दिखाया। डॉक्टर को दिखाने के बाद उसको पता चला कि उसको कैंसर की बीमारी है तो उसके होश उड़ गए। इसके बाद महिला ने अपनी बेटी को अपनी जान बचाने का श्रेय दिया।

हम आपको जिस महिला के बता रहे हैं वह इंग्लैंड की हल शहर में रहने वाली 40 साल की नर्स क्लेयर ग्रेनविले और उनकी छोटी बेटी मटिल्डा की है। पिछले साल अप्रैल के महीने में 13 महीने की मटिल्डा ने अचानक से अपनी मां के एक ब्रेस्ट से दूध पीना बंद कर दिया।

बेटी ने केवल एक ब्रेस्ट से दूध पीना बंद किया था। इस बात का क्लेयर को बहुत अजीब लगा। इसके बाद उसने डॉक्टर को दिखाया। डॉक्टर ने कुछ टेस्ट करने के बाद पता चला कि महिला को ब्रेस्ट कैंसर है। क्लेयर के लेफ्ट निप्पल के बिल्कुल पीछे 10 सेंटीमीटर का ट्यूमर निकला, जो कैंसर का रूप ले चुका था। डॉक्टरों ने ऑपरेशन करके उसके लेफ्ट ब्रेस्ट को हटा दिया। साथ ही कीमोथेरेपी और रेडियोथैरेपी से उसको ठीक कर दिया। कुछ महीनों तक इलाज के बाद में महिला पूरी तरह से स्वस्थ हो गई।

बेटी को देती है जान बचाने का श्रेय

क्लेयर ने बताया कि मेरी जिंदगी पर आ रहे खतरे को मेरी बेटी ने शायद पहले ही पहचान लिया था। इसी वजह से उसने मेरे लेफ्ट ब्रेस्ट से दूध पीना बंद कर दिया। अगर वह ऐसा ना करती तो शायद कभी मुझे इस बीमारी के बारे में पता ही नहीं चलता। डॉक्टरों ने ऑपरेशन करके महिला का लेफ्ट ब्रेस्ट बाहर निकाल दिया और साथ ही कीमोथेरेपी और रेडियोथैरेपी की मदद से उसका ट्रीटमेंट हुआ।

जनवरी 2019 में ट्रीटमेंट खत्म हो गया और वह पूरी तरह से स्वस्थ हो गई। महिला ने कहा अगर मैंने मटिल्डा की बात नहीं मानी होती तो शायद मेरे इलाज को बहुत देर हो सकती थी और जब तक मुझे पता चलता तो कैंसर फैल चुका होता। जब वह बड़ी होगी तो मैं उसे बताऊंगी कि कैसे उसने मेरी जान बचाई।

शोध में हुआ बड़ा खुलासा, इस वजह से खराब हो रहा 33 फीसदी लोगों का लिवर

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जंक फूड और शराब के अधिक सेवन से ही नहीं बल्कि फलों-सब्जियों की पैदावार बढ़ाने के लिए कीटनाशक का प्रयोग, घरों-कारों के लेड युक्त रंग भी देश में नौ से 33 फीसदी लोगों का लिवरखराब कर रहे हैं। लोग नॉन -अल्कोहलिक फैटी लिवर नएएफएलडी) जैसी बीमारी की चपेट में आ रहे हैं। पैक्ड फूड की पैकेजिंग और बीयर में लेड भी बीमारी बढ़ा रहा है।

यह शोध आईआईटी मंडी के वैज्ञानिकों ने भारतीय वैज्ञानिक एवं औद्योगिक शोध परिषद (सीएसआईआर) भारतीय विषय विज्ञान शोध संस्थान लखनऊ और रसायन एवं जीव विज्ञान विभाग-जामिया हमदर्द, नई दिल्ली के शोधार्थियों के सहयोग से किया। इसे हाल में एक प्रतिष्ठित पीयर-रिव्यू जरनल एफ ईबीएस लेटर्स में प्रकाशित किया है।

शोधकर्ताओं ने किया ये दावा

दावा किया कि आईआईटी मंडी के शोधकर्ताओं ने पहली बार इस प्रक्रिया को सामने रखा है। इससे लेड पीबी 2 प्लस साल्ट की वजह से लिवर में चर्बी बढ़ रही है। इस खोज के बाद अब नॉन-अल्कोहलिक फैटीलिवर बीमारी के लिए दवा भी ईजाद की जा सकेगी।

एनएएफएलडी का संबंध मेटाबॉलिक ग्रुप की बीमारियों माटोपा और डायबिटीज आदि से है। इसमें लिवर है। हाल के शोधों में देखा गया कि पतले लोग भी मेटाबॉलिकली मोटे और नॉन-अल्कोहलिक फैटी लिवरडिजीज से ग्रस्त हो सकते हैं।

वास्तविक प्रक्रिया का अब पता चला

स्कूल ऑफ बेसिक साइंसेज आईआईटी मंडी के असिस्टेंट प्रोफेसर एवं शोधकर्ता टीम के सदस्य डॉ. प्रोसेनजीत मोंडल ने बताया कि लेड और फैटी लीवर रोग के बीच संबंध हमें पहले से ज्ञात है पर वास्तविक प्रक्रिया का अब तक पता नहीं था।

इसकी वजह से लेड से फैटी लीवर की समस्या बढ़ती है। लेड नामक यह मेटल (शीशा) पर्यावरण के विषैला होने का गंभीर संकट पैदा करता है। इससे चर्बी बनने और लिवरमें जमा होने पर नियंत्रण नहीं रह पाता है।

चुहिया पर किया प्रशिक्षण

शोधकर्ताओं ने चुहिया में एडेनोवायरस से डीएनए सेगमेंट (प्लाज्मीड) इंजेक्ट किया। ये लेड के प्रभाव को रोकता है। इससे सोरसीन सक्रिय हुआ और परिणामस्वरूप फैटी लिवर डिजीज बढ़ना रुक गया।

फैटीलिवर की बीमारी डे नोवो लाइपोजेनेसिस (डीएनएल) पर नियंत्रण के अभाव में होती है। यह रक्त प्रवाह में मौजूद कार्बोहाइड्रेट के फैट में बदल जाने की जटिल प्रक्रिया है। डीएनएल के नियंत्रण में अभाव से ज्यादा चर्बी बनती है जो लीवर और अन्य अंदरूनी अंगों में जमा हो जाती है जिसे विसेरल फैट कहते हैं।

रिजर्वेशन फुल, वेटिंग टिकट भी मुश्किल, कई ट्रेनों में 20 अगस्त तक सीट नहीं

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ज्यादातर ट्रेनों में 20 अगस्त तक रिजर्वेशन नहीं मिल रहा है। कुछ ट्रेनों में तो 25 अगस्त के बाद भी कई श्रेणियों में लंबी वेटिंग है। बकरीद और रक्षाबंधन के कारण भी यात्रियों का दबाव है। महाराष्ट्र की बाढ़ के कारण भी लंबी दूरी की कई ट्रेनें निरस्त हैं या रूट बदलकर चलाई जा रही हैं। ट्रेनों में मई-जून के अलावा त्योहारी सीजन में रिजर्वेशन मिल पाना मुश्किल होता है। लेकिन इस दफा अगस्त में भी ज्यादातर ट्रेनों में मारामारी के हालात बने हुए हैं। आगरा से भोपाल रूट पर जाने वाली ट्रेनों को या आगरा से पुणे और राजस्थान रूट की ट्रेनों में भी कमोबेश यही हालात हैं। यात्रियों के लिए तत्काल कोटा भी ऊंट के मुंह में जीरा जैसा है।

 यह है वेटिंग की स्थिति 

तमिलनाडु एक्सप्रेस में 15 से 20 अगस्त तक स्लीपर में 135 से 81 तक वेटिंग है। यही हाल वातानुकूलित कोचों में हैं। किसी में रिगरेट तो किसी में लंबी वेटिंग है। पंजाब मेल में स्लीपर क्लास में 15 से 20 तक लंबी वेटिंग है। अन्य श्रेणियों में भी कन्फर्म टिकट नहीं है।

केरला एक्सप्रेस में 15 अगस्त को स्लीपर की वेटिंग 97 है। 18 अगस्त को 110 वेटिंग है। गोवा एक्सप्रेस, गोंडवाना एक्सप्रेस, तेलंगाना एक्सप्रेस, राजधानी एक्सप्रेस, मंगला एक्सप्रेस, जीटी एक्सप्रेस, भोपाल एक्सप्रेस में ज्यादातर श्रेणियों में सीट नहीं हैं। 

बंगलूरू जाने वाली कर्नाटका एक्सप्रेस में भी वेटिंग 200 तक पहुंच गई है। आगरा होकर पुणे जाने वाली झेलम एक्सप्रेस में 15 से 21 अगस्त तक वेटिंग है। मरुधर एक्सप्रेस, अजमेर सियालदाह, निजामुद्दीन जबलपुर आदि में भी सीट नहीं है।

आगरा के जीवनी मंडी निवासी दीपक गुप्ता ने बताया कि उनका बेटा बंगलूरू में इंजीनियरिंग कर रहा है। उसके पास वहां जाने के लिए आरक्षण कराने की कोशिश की मगर कर्नाटका एक्सप्रेस में आरक्षण नहीं मिल सका। अब उसे यहां बुला रहे हैं।

मधु नगर की डेनिस सिल्वेरा ने बताया कि मुंबई जाने वाली ट्रेनों में आरक्षण मिलना मुश्किल हो गया है। तत्काल कोटे के लिए भी मारामारी है। एजेंटों का दखल रहता है। आम लोगों को इस कारण भी परेशानी हो रही है।

अंडे और मांस जैसी चीजों को भूल जाओगे इतना प्रोटीन है इस सस्ती सी चीज में, जाने इसके लाभ

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जब भी प्रोटीन वाली चीजों की बात अति है तो मांस और अंडे जैसी चीजों का नाम लिया जाता है, लेकिन ये दोनों चीजें काफी महंगी होती हैं, जिससे हर कोई इनका सेवन नही कर पाता है और शाकाहारी लोगों के लिए इनका सेवन कर पाना मुमकिन नही हो पाता है, इसीलिए आज हम आपको बेहद सस्ती सी चीज के बारे में बताने जा रहे हैं जिसमे बहुत प्रोटीन पाया जाता है।

हम जिस चीज की बात कर रहे हैं उसका नाम है खेसारी की दाल, इस दाल का नाम शायद काफी कम लोगों ने ही सुना होगा, ये दाल भी अरहर की दाल जैसी ही दिखती है, इस दाल में ढेर सारा प्रोटीन होता है, आज हम आपको खेसारी दाल के बेहतरीन फायदों के बारे में बताने जा रहे हैं।

खेसारी दाल कफ पित्त को कम करने वाली, शक्ति बढ़ाने वाली, भूख बढ़ाने वाली, हड्डियों को मजबूत बनाने वाली, दर्द, थकान, सूजन, जलन को कम करने वाली, दिल के रोगों से बचाने वाली और बवासीर जैसी समस्या से छुटकारा दिलाने वाली होती है।

इसके बीजों की दाल बनाकर खायी जाती है, आयुर्वेद में खेसारी के पत्ते, बीज और तेल का उपयोग दवा के रूप में किया जाता है, इसके सेवन से आँखों से संबंधित परेशानियाँ दूर रहती हैं, भुने हुए खेसारी बीज को सेवन करने से पेप्टिक अल्सर के दर्द से राहत मिलती है, इसके नियमित सेवन से शरीर में प्रोटीन की कमी दूर होती है।