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अमेरिका ने 638 बार रची थी साजिश फिदेल कास्त्रो को मारने की

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क्यूबा (Cuba) के पूर्व राष्ट्रपति फिदेल कास्त्रो (Fidel Castro) को मारने की 638 बार साजिश रची गई. लेकिन उन्होंने हर बार मौत को चकमा दे दिया. वो पूरी जिंदगी अमेरिका को ललकारते रहे…

क्यूबा (Cuba) के पूर्व राष्ट्रपति फिदेल कास्त्रो (Fidel Castro) ने एक बार कहा था कि अगर किसी शख्स की हत्या की कोशिश करने का कोई ओलंपिक मुकाबला होता तो वो इसमें गोल्ड मेडल जीतते. फिदेल कास्त्रो को मारने के लिए 638 साजिशें रची गईं. लेकिन हर बार फिदेल कास्त्रो खुद को बचाने में सफल रहे. फिदेल कास्त्रों की हत्या की 638 साजिशों का आंकड़ा भी आधिकारिक है, कोशिशें शायद इससे भी ज्यादा हुई हों. उन्हें मारने के लिए, जहरीले सिगार, जहरीले पेन और विस्फोटक वाली सिगरेट तक के तरीके आजमाए गए. इनमें से ज़्यादातर साजिशें अमेरिकी खुफिया एजेंसी CIA ने रची थीं. इन साजिशों में क्यूबा से भागकर अमेरिका में बसे फिदेल कास्त्रो के विरोधी भी शामिल थे. अपनी 80वीं सालगिरह पर फिदेल कास्त्रो ने कहा था कि अस्सी की उम्र में बहुत खुश हूं. मैंने कभी ये नहीं सोचा था. दुनिया के सबसे ताकतवर देश के बगल में हूं. जो मुझे हर रोज मारने के नए प्लान बनाते हैं.

गर्लफ्रेंड ने भी रची थी मारने की साजिश

फिदेल कास्त्रो को मारने की साजिश में उनकी एक गर्लफ्रेंड भी शामिल रहीं. कास्त्रो को मारने के लिए जहरीले कोल्ड क्रीम का जार उनतक पहुंचाना था. कास्त्रो की पूर्व गर्लफ्रेंड मारिटा लॉरेंज इस साजिश के लिए राजी हो गई थी. लेकिन कहते हैं कि इसकी भनक फिदेल कास्त्रो को लग गई. उन्होंने अपनी पूर्व प्रेमिका मारिटा को पिस्टल देकर कहा कि वो उन्हें गोली मार दे. जाहिर है मारिटा ने ऐसा नहीं किया.

फिदेल कास्त्रो का लोहा पूरी दुनिया मानती थी. उनका जन्म 13 अगस्त 1926 को क्यूबा में हुआ था. क्यूबा के राष्ट्रपति फुल्गेन्सियो बतिस्ता अमेरिका के कट्टर समर्थक थे. उनपर अमेरिकी हितों की रक्षा के लिए क्यूबा की जनता के साथ अनदेखी के आरोप लगे. क्यूबा में भ्रष्टाचार और अत्याचार चरम पर थी. 1952 की क्यूबा क्रांति से पहले कास्त्रो तानाशाह राष्ट्रपति फुल्गेन्सियो बतिस्ता के विरुद्ध चुनाव लड़े. लेकिन साजिश के तहत उन्हें हार का सामना करना पड़ा. लोग वोटिंग करने से पहले ही वोटिंग खत्म करा दी गई.

क्यूबा के हालात बिगड़ते गए और जनता का सत्ता के खिलाफ गुस्सा बढ़ता गया. 26 जुलाई 1953 को फिदेल कास्त्रो ने क्रांति का बिगुल फूंक दिया. करीब 100 साथियों के साथ सैंटियागो डी क्यूबा में उन्होंने एक सैनिक बैरक पर हमला किया. लेकिन यह हमला नाकाम रहा. उन्‍हें 15 साल की सजा हुई और साथियों के साथ जेल में डाल दिया गया. दो साल बाद 1955 में एक समझौते के तहत उन्हें रिहा किया गया.

जेल से छूटकर वो मैक्सिको चले गए. मैक्सिको में फिदेल और उनके भाई राउल कास्त्रो ने चेग्‍वेरा के साथ बतिस्‍ता शासन के खिलाफ गुरिल्‍ला युद्ध की शुरुआत की. फिदेल के क्रांतिकारी विचारों और आदर्शों को क्यूबा की जनता का भरपूर समर्थन मिला. 1959 में उन्‍होंने राष्ट्रपति फुल्गेन्सियो बतिस्ता का तख्ता पलटकर उसे खदेड़ दिया और सत्ता पर नियंत्रण हासिल कर लिया.

फिदेल कास्त्रो दुनिया के ऐसे तीसरे शख्स हैं, जिन्होंने किसी देश पर सबसे लंबे वक्त तक राज किया. उन्होंने 1959 में क्यूबा की सत्ता संभाली थी और 2008 तक वो लगातार शासन करते रहे.
अपनी पूरी जिंदगी फिदेल कास्त्रो ने दुनिया के सबसे ताकतवर देश अमेरिका को चुनौती दी. उन्होंने अमेरिकी राष्ट्रपतियों का मजाक उड़ाया.

फिदेल कास्त्रो को लेकर कई दिलचस्प तथ्य दुनिया में फैले हैं. हालांकि उनमें से कई अमेरिकी प्रोपेगैंडा के तहत फैलाए गए हैं. कहते हैं उनका किरदार रूमानियत भरा था लकिन उन्होंने करीब आधी सदी तक क्यूबा पर बेहद सख्ती से राज किया.

फिदेल कास्त्रो ने क्यूबा की अर्थव्यवस्था को बाकी दुनिया के लिए कभी नहीं खोला. देश में सख्ती से राशन का सिस्टम लागू था. क्यूबा में रहकर वहां की किसी चीज़ की बुराई करने का सवाल ही नहीं था. क्यूबा को अमेरिकी प्रतिबंध का सामना करना पड़ा. हालांकि बंदिशों के बावजूद क्यूबा के लोग खुश रहे.

फिदेल कास्त्रो अपनी जिंदगी के आखिरी दिनों में अपनी जवानी का साया भर रह गए थे. 2008 में उन्होंने क्यूबा की सत्ता अपने भाई राउल कास्त्रो को सौंप दी. 25 नवंबर 2016 को 90 साल की उम्र में उनका स्वाभाविक निधन हुआ.

2022 कॉमनवेल्थ खेलों में शामिल हुआ क्रिकेट, 8 टीमें खेलेंगी टी-20 मुकाबले

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2022 में होने वाले बर्मिंघम राष्ट्रमंडल खेलों में क्रिकेट को भी आखिरकार शामिल कर लिया गया है। एक ऐतिहासिक फैसले के तहत अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट काउंसिल और कॉमनवेल्थ गेम्स फेडरेशन ने एलान करते हुए कहा कि बर्मिंघम में 2022 में होने वाले कॉमनवेल्थ खेलों में महिला टी-20 क्रिकेट को भी शामिल कर लिया गया है। कॉमनवेल्थ खेलों में कुल आठ अंतरराष्ट्रीय टीमें भाग लेंगी। इस दौरान सभी मैच एजबेस्टन क्रिकेट ग्राउंड पर खेले जाएंगे। 

1998 के बाद ये पहली बार होगा जब क्रिकेट को कॉमनवेल्थ खेलों में शामिल किया गया है। उस वक्त कुआलालंपुर में खेले गए मुकाबले में दक्षिण अफ्रीका की टीम ने 50 ओवर के क्रिकेट में गोल्ड मेडल जीता था। उस दौरान जैक्स कैलिस, रिकी पोंटिंग और सचिन तेंदुलकर जैसे दिग्गजों ने भी भाग लिया था।

घर बैठे करती है ऐशइन राशि की लड़कियों को मिलता है सबसे अमीर पति

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दुनिया की हर लड़की अपने होने वाले जीवनसाथी को लेकर कई सारे सपने देखती हैं, वही लड़कियां यह भी सोचती हैं कि उन्हें बहुत ही अमीर पति मिलें जिससे की उनका पूरा जीवन हमेशा सुख शांति और बिना किसी आर्थिक परेशानी के उनका जीवन गुजर जायें वही कुछ लड़कियां इस मामले में बहुत ही लकी मानी जाती हैं क्योंकि उन्हें सबसे अमीन हस्बैंड मिलता हैं और वो सारी जिंदगी ऐश करती हैं। तो आज हम आपको कुछ ऐसी ही राशियों की लड़कियों के बारे में बताने जा हैं, जो अपने ससुराल में न पैसों के दम पर महारानियों की तरह राज करती हैं और अपनी शादीशुदा जिंदगी का आनंद भी लेती हैं।

मेष राशि की लड़कियां- 
आपको बता दें, कि इन राशियों की लड़कियों को अपने पति से प्यार के साथ साथ पैसा भी बेशूमान मिलता हैं। इनका पति केयरिंग नेचर का माना जाता हैं और अपनी पत्नी की हर छोटी से छोटी इच्छा को पूरा करता हैं वही उनका सम्मान भी खूब करता हैं। यही वजह हैं, कि मेष राशि की लड़कियां अपने ससुराल में राज करती हैं।

मिथुन राशि की लड़कियां- 
बता दें,कि इस राशि की लड़कियों के पति भी अपनी पत्नी की भावनाओं का सम्मान करते हैं, और पैसों से मालामाल भी होते हें। यही वजह हैं, कि उनके हर सपने को भी पूरा करते हैं। वही इस राशि की लड़कियां हमेशा ही अपने ससुराल में रानी की तरह राज करती हैं। वही ये अपनी पत्नी के प्रति हमेशा ही वफादा रहते हैं और उन्हें कभी भी धोखा नहीं देते हैं।

लड़के सावधान: इन 3 नाम वाली लड़कियो के नाक पर रहता है गुस्सा

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कई लड़कियों को बात-बात पर गुस्सा होने की आदत होती है। हर व्यक्ति का स्वभाव दूसरे व्यक्ति के स्वभाव से बहुत अलग होता है। यही सबसे बड़ी वजह है कि कुछ लोगों को गुस्सा जल्दी आता है वहीँ कुछ लोगों को गुस्सा बहुत देर से आता है या गुस्सा आता ही नहीं। खासकर लड़कों के मुकाबले लड़कियों को हर छोटी-छोटी बातों पर गुस्सा आ जाता है। और कुछ लड़कियों को तो गुस्सा हमेशा नाक पर रहता है। आज हम आपको ऐसे 3 नाम वाली लड़कियों के बारे में बताने वाले है जो कि छोटी-छोटी बात पर गुस्सा आ जाता है।

B अक्षर से शुरू होने वाली लड़कियां: इस नाम इस अक्षर से शरू होने वाली लड़कियों को गुस्सा बहुत जल्दी आता है। वो किसी का गुस्सा भी किसी पर उतार देती हैं. बहुत बार गुस्से में इस अक्षर की लड़कियों से गलतियां भी हो जाती है जिसकी वजह से आने वाले समय में उन्हें बहुत पछतावा भी होता है। लेकिन इस अक्षर की लड़कियों का दिल बहुत ज्यादा साफ होता है।

P अक्षर से शुरू होने वाली लड़कियां: P नाम से शुरू होने वाली लड़कियां बड़बोली होने के साथ-साथ हुत ज्यादा गुस्सैल भी होती हैं। इस अक्षर के नाम वाली लड़कियों में वैसे तो बहुत ज्यादा दिमाग होता है, लेकिन बहुत बार अकेला रहने की वजह से इनका बीपी बढ़ जाता है और इन्हें गुस्सा आने लगता है। कहा जाता है कि इस अक्षर वाली लड़कियां कभी भी अपनी समस्या नहीं छुपा पाती जिसकी वजह से इन्हें गुस्सा बहुत जल्दी आता है।

R अक्षर से शुरू होने वाली लड़कियां: जिन लड़कियों के नाम का पहला अक्षर R से शुरू होता है वो दिखने में बहुत ज्यादा खूबसूरत होती है। इनकी सबसे बड़ी कमजोरी इनका गुस्सा ही है लेकिन अपने गुस्से के साथ ही यह प्यार जताना भी अच्छी तरह से जानती हैं। और खूबसूरत होने के साथ-साथ इन लड़कियों में दिमाग भी बहुत ज्यादा होता है। इस अक्षर की लड़कियां दिल की सच्ची और बहुत इमानदार होती है, लेकिन आपको जानकर आश्चर्य होगा कि इतनी खूबियों के अलावा इन लड़कियों को गुस्सा भी बहुत जल्दी आता है।

सिरफिरे आशिक ने शादी से इनकार करने पर की प्रेमिका की निर्मम हत्या, फिर..

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छत्तीसगढ़ (Chhattisgarh) के दुर्ग जिले में युवती की हत्या (Murder) के बाद आत्महत्या का प्रयास का एक सनसनीखेज मामला सामने आया है. आरोप है कि यहां शादी करने का भूत एक सिरफिरे आशिक को ऐसा चढ़ा कि युवती द्वारा शादी के लिए मना करने पर उसकी चाकू से रेतकर हत्या कर दी. इसके बाद खुद को भी मारने का प्रयास किया. इस पूरे मामले में पुलिस ने जांच शुरू कर दी है.

घटना दुर्ग (Durg) जिले के उतई थाना क्षेत्र के अंतर्गत बजरंगपारा की है. पकड़े जाने के भय से प्रेमी ने खुद के गले में चाकू मारकर घायल कर लिया. अभी युवक की हालत नाजुक बताई जा रही है, जिसका इलाज रायपुर (Raipu) के मेकाहारा अस्पताल में किया जा रहा है. पुलिस के मुताबिक आरोपी युवक रुपेश चक्रधारी अपनी कथित प्रेमिका से मिलने के लिए उसके घर गया था. इसी दौरान युवती के भाइयों ने आरोपी युवक को घर में देख लिया. पकड़े जाने के भय से आरोपी ने युवती के गले में चाकू अड़ाकर उसे कमरे में बंधक बना लिया और अंदर से दरवाजा बंद कर लिया.

शादी का बना रहा था दबाव
पुलिस (Police) से मिली जानकारी के मुताबिक आरोपी युवक युवती पर शादी का दबाव बना रहा था. जानकारी मिलने पर पुलिस युवती के घर पहुंची जहां, दरवाजा तोड़कर अंदर घुसने पर दिल दहला देने वाली घटना का खुलासा हुआ. काफी गंभीर अवस्था में युवती को अस्पताल ले जाया गया, जहां उसकी मौत हो गई. वहीं गंभीर रूप से घायल युवक का इलाज रायपुर स्थित मेकाहारा में किया जा रहा है.


दुर्ग ग्रामीण के एएसपी लखन पटले ने बताया कि शुरुआती जांच में जो तथ्य सामने आए हैं, उसके मुताबिक युवक और मृतका एक दूसरे से प्यार करते थे, लेकिन सामाजिक भय के कारण परिवार इनकी शादी नहीं करवा रहे थे और यही वजह रही कि आज एक की मौत हो चुकी है. युवक जिंदगी और मौत की जंग लड़ रहा है. पुलिस ने अपराध (Crime) दर्ज कर जांच शुरू कर दी है.

छत्तीसगढ़ के शहीदों को कॉमिक्स से जानेंगे स्कूली बच्चे, सरकार ने की ये तैयारी

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छत्तीसगढ़ (Chhattisgarh) की महान विभूतियों की जीवनी अब स्कूली छात्रों को कॉमिक्स (Comix) के अंदाज़ में पढ़ने को मिलेंगी. छत्तीसगढ़ सरकार के पाठ्यपुस्तक निगम (Textbook corporation) ने प्रदेश के 40 महापुरुषों और शहीदों की जीवनी को कार्टून बेस्ड किताबों (Cartoon based book) में तैयार किया है. इन कॉमिक्स का प्रकाशन किया जा चुका है. कॉमिक्स को स्कूलों की सिलेबेस में शामिल किताबों की सूची में रखा जाएगा. छत्तीसगढ़ में महापुरुषों और शहीदों की कहानी बच्चों को उन्ही के अंदाज़ में पढ़ाई जाएंगी. कॉमिक्स में महान विभूतियों की जीवनी पाठ्यपुस्तक निगम ने तैयार की है. इसमें गुरु घासीदास, शहीद वीरनारायण सिंह, गुण्डाधुर, दाऊ मंदराजी, महाराजा चक्रधर, पंडित सुंदरलाल शर्मा जैसे महापुरुषों की कहानी हैं तो वहीं शहीद कौशल यादव और नक्सलियों से लोहा लेते हुए शहीद होने वाले विनोद चौबे की जीवनी भी बतायी गयी है. इसके अलावा अविभाजित मध्यप्रदेश के पहले मुख्यमंत्री पंडित रविशंकर शुक्ल और श्यामाचरण शुक्ल जैसे कुशल राजनीतिज्ञों की जीवनी प्रदेश के स्कूली छात्र अब कॉमिक्स के जरिए पढ़ेंगे.

इनकी पहल पर कवायद
छत्तीसगढ़ पाठ्यपुस्तक निगम के महाप्रबंधक डॉ. अशोक चतुर्वेदी ने बताया कि राजीव गांधी शिक्षा मिशन की पहल पर पाठ्यपुस्तक निगम ने 40 महापुरुषों और विभूतियों की कहानी को कॉमिक्स के रूप में संजोया है. ये कॉमिक्स सरकारी स्कूलों की लाइब्रेरी के अलावा रायपुर की सेंट्रल लाइब्रेरी और दूसरे जिलों के वाचनालयों में भी भेजी जा रही हैं. जिससे की प्राइवेट स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चे भी प्रदेश के नामचीन चेहरों को जान सकें. बच्चे कॉमिक्स पढ़ने में ज्यादा रुचि रखते हैं. ऐसे में बच्चे सचित्र जीवनी के जरिए प्रदेश की विभूतियों को जान पायेंगे. पाठ्यपुस्तक निगम ने इसके लिए करीब डेढ़ से दो लाख पुस्तकों की छपायी की है. 

क्या छत्तीसगढ़ में “Soft Hindutva” कार्ड खेलने की कोशिश कर रही है कांग्रेस?

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केन्द्र सरकार द्वारा कश्मीर (Kashmir) से धारा 370 हटाए जाने के बाद साम्प्रदायिक ध्रुवीकरण से अछूते माने जाने वाले छत्तीसगढ़में भी कांग्रेस का सॉफ्ट हिन्दुत्व (Soft Hindutva) देखने को मिल रहा है. प्रदेश के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल खुद कांग्रेस (Congress) के इस एजेंडे को आगे बढ़ाते हुए दिखाई दे रहे हैं. मालूम हो कि सोमवार को हजारों शिवभक्तों के साथ हाथों में कांवड़ थामे सूबे के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल (CM Bhupesh Baghel), गृहमंत्री ताम्रध्वज साहू के साथ कांग्रेसी विधायक और महापौर मंदिर तक दौड़ लगाते हुए नज़र आए. कश्मीर से धारा 370 (Articel-370) हटाए जाने के बाद जिस तरह बीजेपी (BJP) के पक्ष में माहौल बनता दिखाई दे रहा है, उसके बाद कांग्रेस(Congress) में इसे लेकर खलबली मची हुई है.

कश्मीर से हटाए जाने के बाद से देश के बीजेपी (BJP) के पक्ष में माहौल बनता दिख रहा है. ऐसे में कांग्रेस छत्तीसगढ़ में सॉफ्ट हिन्दुत्व के एजेंडे को लेकर आगे बढ़ने की कोशिश कर रही है. मालूम हो कि 12 अगस्त को सावन का आखरी सोमवार और बकरीद का त्यौहार एक साथ पड़ा. ऐसे में कांग्रेस के किसी भी नेता की तस्वीर मुस्लिम बहुल इलाके में बधाई देते हुए दिखाई ही नहीं दी. जबकि मुख्यमंत्री समेत कांग्रेस के तमाम आला नेताओं की कांवड़ थामकर बोल-बम के जयकारे लगाने वाली तस्वीरें ज्यादा प्रचारित की गई. सूबे के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल भी मंत्रियों के साथ सावन सोमवार के आखिरी दिन कांवर लेकर अपने मंत्रियों के साथ झांकी में शामिल हुए.

कांग्रेस नहीं लेना चाहती रिस्क:

बात अगल पिछले साल के ईद की करें तो कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष रहते हुए भूपेश बघेल खुद ईद की बधाई देने मुस्लिम बहुल इलाकों में पहुंचे थे. लेकिन जानकारों का मानना है कि धारा 370 हटाने के बाद बीजेपी के पक्ष में पूरे देश में माहौल बना है. ऐसे में प्रदेश की सत्ता में काबिज कांग्रेस छत्तीसगढ़ में इससे कोई नुकसान नहीं चाहती. इसलिए सॉफ्ट हिन्दुत्व का एजेंडा छत्तीसगढ़ में भी खड़ा करने की कोशिश की जा रही है.

इसके पीछे एक और कारण ये भी है कि बीजेपी इस बात पर लगातार विवाद पैदा करने की कोशिश करती है, कि कांग्रेस मुस्लिम परस्त पार्टी है. कई बार बीजेपी के प्रवक्ता इसे लेकर कांग्रेस पर आरोप भी लगाते रहे है. लेकिन कांग्रेस हर बार इस वार से बचने की कोशिश करती रही है. लेकिन इस बार बीजेपी-कांग्रेस नेताओं की इस कांवड़ यात्रा को जहां 370 का असर बताते हुए मुस्लिमों के पक्ष में बयानबाजी कर रही है वहीं कांग्रेस इस मामले में बीजेपी पर राजनीति का आरोप लगा रही है.

बीजेपी-कांग्रेस ने कही ये बात:

इस पूरे मामले में कांग्रेस के वरिष्ठ विधायक सत्यनारायण शर्मा का कहना है कि ये हमारी आस्था का केंद्र है. सावन का महीना वैसे भी पवित्र महीना माना जाता है, शंकर की आराधना की जाती है. इसमे हिन्दुत्व वाली कोई बात नहीं है. बीजेपी केवल बेवजह राजनीति कर रही है. वहीं बीजेपी प्रवक्ता गौरीशंकर श्रीवास का कहना है कि कांवर उठाकर चलना कोई गलत बात नहीं है. असल बात ये है कि हर ईद में टोपी लगाकर भूपेश बघेल मुस्लिम भाईयों को बधाई देने जाते थे, लेकिन इस बार वो नहीं गए. इससे साफ तौर पर दिख रहा है कि कांग्रेस सॉफ्ट हिन्दुत्व की ओर बढ़ रही है. अब मुस्लिम समाज की अनदेखी हो रही है. केवल उन्हे वोट बैंक समझा गया है.

अफ्रीकी फुटबॉल खिलाड़ी का शव रेल की पटरी पर मिला…

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छत्तीसगढ़ (Chhattisgarh) के जांजगीर चांपा (, Janjgir Champa) जिले में पुलिस (Police) ने रेल की पटरी (Rail tracks) से अफ्रीका (Africa) के आइवरी कोस्ट (Ivory Coast) देश के निवासी फुटबॉल खिलाड़ी (Football Player) का शव बरामद किया है. आशंका जताई जा रही है कि ट्रेन से गिरने से अफ्रीकन खिलाड़ी की मौत हुई है.

ग्रामीणों की सूचना पर जब बाराद्वार पुलिस मौके पर पहुंची तो टुकड़ों में रेलवे ट्रैक पर अफ्रीकन खिलाड़ी का शव मिला. पुलिस ने अफ्रीकन खिलाड़ी के शव को कब्जे में लेकर डीप फ्रीजर में रखकर उसके परिजनों के आने का इंतजार किया जा रहा है.

उड्डयन बेहार (एसडीओपी चांपा अनुविभाग) ने बताया कि जिले के बाराद्वार रेलवे स्टेशन के करीब पुलिस ने इस महीने की नौ तारीख को आइवरी कोस्ट निवासी फुटबॉल खिलाड़ी डायमंड अबुबकर का शव बरामद किया है.

मिली जानकारी के मुताबिक, अबुबकर को इस साल जुलाई महीने में भारत में फुटबॉल खेलने आने के लिए वीज़ा जारी किया गया था. पुलिस को अनुमान है कि अबुबकर इस महीने की आठ तारीख को मुंबई आया था और वह रेल से कलकत्ता के लिए रवाना हुआ था. पुलिस अधिकारी ने बताया कि अभी तक यह जानकारी नहीं मिली है कि वह किस रेलगाड़ी में सफर कर रहा था.

पुलिस रेल विभाग से संपर्क में है कि क्या मुंबई से हावड़ा पहुंचने वाली रेलगाड़ी से कोई लावारिस बैग मिला है. अभी तक इस संबंध में कोई जानकारी नहीं मिली है. उन्होंने बताया कि पुलिस ने अबुबकर के मोबाइल फोन से दिल्ली में उसके मित्रों से बात की थी और उसके भाई को भी घटना की जानकारी दी गई है. कोई भी अभी तक शव लेने नहीं पहुंचा है. शव को बाराद्वार के शवगृह में रखा गया है.

भूपेश बघेल : कैबिनेट की अहम बैठक, आज हो सकते हैं ये बड़े फैसले..

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छत्तीसगढ़ (Chhattisgarh) की भूपेश बघेल (Bhupesh Baghel) सरकार की कैबिनेट की अहम बैठक सीएम हाउस (CM House) रायपुर में मंगलवार की शाम को होगी. बैठक में कई अहम निर्णय हो सकते हैं. मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की अध्यक्षता में होने वाली इस बैठक में अनुसूचित जाति वर्ग को आबादी के अनुपात में आरक्षण (Reservation) दिए जाने संबंधी प्रस्ताव पर भी मुहर लग सकती है. इसके अलावा अन्य अहम निर्णय लिया जा सकता है.

भूपेश कैबिनेट (Bhupesh Cabinet) की बैठक में नगरीय चुनाव (Local Body Election) को देखते हुए संपत्ति कर हाफ करने का निर्णय भी होने की संभावना है. कैबिनेट में राजस्व विभाग के जुड़े कुछ महत्वपूर्ण फैसले लिए जा सकते हैं. साथ ही प्रदेश में वर्षा और खरीफ फसलों की स्थिति पर भी समीक्षा की जाएगी. प्रदेश के दर्जन भर जिलों की 65 तहसीलों में अभी भी औसत से 75 फीसदी कम बारिश हुई है. ऐसे में यदि फसल (Corp) को नुकसान पहुंचता है तो उससे निपटने के लिए किसानों को राहत देने से संबंधित फैसला कैबिनेट की बैठक में लिया जा सकता है.

राशनकार्ड को लेकर भी चर्चा
भूपेश कैबिनेट की बैठक में आज राशन कार्ड नवीनीकरण की प्रगति पर भी चर्चा होगी. मुख्यमंत्री स्वतंत्रता दिवस पर कुछ महत्वपूर्ण घोषणाएं कर सकते हैं. इस पर भी कैबिनेट में चर्चा हो सकती है. बता दें कि इससे पहले की कैबिनेट बैठक में आदिवासी बाहुल्य इलाकों में हर परिवार को गुड़ बांटने, प्रदेश में खनन नीति, किसानों को बीज उपलब्ध कराने सहित अन्य अहम निर्णय हुए थे. बताया जा रहा है कि इस कैबिनेट की बैठक में प्रदेश में सुरक्षा व्यवस्था और नकरीय निकाय और पंचायत चुनाव के मद्देनजर अहम निर्णय लिए जा सकते हैं.

जम्मू-कश्मीर: सुप्रीम कोर्ट का दखल देने से इनकार , कहा- मामला संवेदनशील, सरकार को वक्त मिलना चाहिए…

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जम्मू-कश्मीर (Jammu Kashmir) को स्पेशल स्टेटस देने वाले संविधान के आर्टिकल 370 (Article 370) हटाने के बाद तनाव का माहौल है. इसके बाद सरकार ने राज्य में तमाम तरह के बैन लगा रखे हैं. सरकार द्वारा लगाए गए प्रतिबंधों को हटाने को लेकर दायर याचिकाओं पर मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई. कोर्ट ने इन प्रतिबंधों को हटाने से इनकार कर दिया है. शीर्ष अदालत का कहना है कि मामला संवेदनशील है. सरकार को कुछ और वक्त मिलना चाहिए. मामले की अगली सुनवाई अब दो हफ्ते बाद होगी.

बता दें कि जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन बिल पास होने के बाद से सरकार ने ऐहतिहातन पूरे जम्मू और श्रीनगर में सेक्शन 144 लगा रखी है. कश्मीर घाटी में भी सुरक्षा बढ़ा दी गई है. सरकार ने कई इलाकों में मोबाइल फोन कनेक्शन और इंटरनेट पर रोक लगा रखी है.

इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने अटॉर्नी जनरल से पूछा कि घाटी में ऐसा कब तक चलेगा. इस पर अटॉर्नी जनरल ने कहा कि जैसी ही स्थिति सामान्य होगी सारी पाबंदियां खत्म हो जाएगी. हम कोशिश कर रहे हैं कि लोगों को कम से कम असुविधा हो. 1999 से हिंसा के कारण अब तक घाटी में 44000 लोग मारे गए हैं.

याचिका में मांग

सुप्रीम कोर्ट में इस मामले को लेकर कई याचिकाएं दर्ज थी.. इनमें से एक याचिका कांग्रेस नेता तहसीन पूनावाला ने दायर की थी. उन्होंने घाटी से कर्फ़्यू हटाने के साथ फ़ोन, इंटरनेट, न्यूज़ चैनल पर लगी सभी पाबंदियों को हटाने की मांग की थी. पूनावाला ने जम्मू-कश्मीर के हालात की वस्तुस्थिति का पता लगाने के लिए एक न्यायिक आयोग के गठन का अनुरोध भी किया था. कश्मीर टाइम्स की संपादिका अनुराधा भसीन ने भी मीडिया की आजादी को बहाल करने और नज़रबंद नेताओं की रिहाई के लिए दायर की थी. नेशनल कॉन्फ्रेस के दो सांसद अकबर लोन और हसनैन मसूदी के अलावा एक वकील ने भी याचिका दायर करके अनुच्छेद 370 के संशोधनों और नए राज्य के गठन को चुनौती दी थी.