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नवजोत सिंह सिद्धू पर बिफरे कैप्टन अमरिंदर सिंह, कहा- मुझे हटाकर बनना चाहते हैं सीएम

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पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह और कांग्रेस नेता नवजोत सिंह सिद्धू की अंदरूनी लड़ाई अब सतह पर आती दिख रही है. अमरिंदर सिंह ने रविवार को पत्रकारों से बातचीत में कहा, ‘सिद्धू मेरी जगह सीएम बनना चाहते हैं.’ इसके साथ ही उन्होंने आरोप लगाया कि ‘सिद्धू कांग्रेस की छवि बिगाड़ रहे हैं, पार्टी को उनके खिलाफ कार्रवाई करनी चाहिए.’

कैप्टन अमरिंदर सिंह ने अपने मंत्री सिद्धू पर निशाना साधते हुए कहा कि अगर वह असली कांग्रेसी होते तो वह अपनी शिकायतों के लिए चुनाव का वक्त नहीं चुनते. पटियाला में मताधिकार का प्रयोग करने जा रहे कैप्टन ने पत्रकारों से बातचीत में सिद्धू को लेकर ये बातें कहीं.

कैप्टन ने कहा कि ‘यह पार्टी हाईकमान पर निर्भर करता है कि वह सिद्धू के खिलाफ क्या कार्रवाई करती है, लेकिन एक पार्टी के तौर पर कांग्रेस को अनुशासनहीनता बर्दाश्त नहीं करनी चाहिए.’ उन्होंने कहा कि मेरी उनसे कोई निजी शिकायत नहीं है, उन्हें मैं बचपन से जानता हूं. संभवतः वह महत्वाकांक्षी हैं और सीएम बनना चाहते हैं.

सिद्धू ने साधा था कैप्टन पर निशाना
वहीं सिद्धू ने शुक्रवार को अमरिंदर सिंह का नाम लिए बिना उन पर जमकर हमला बोला था. उन्होंने कहा कि ‘कुछ लोग कहते हैं, सीटें न मिलीं तो इस्तीफा दे देंगे, लेकिन मैं कहता हूं कि अगर बेअदबी करने वालों पर कार्रवाई नहीं हुई तो मैं इस्तीफा दे दूंगा.’

सिद्धू ने कहा कि ‘कोई कहता है कि अगर सभी 13 सीटें हार गए तो इस्तीफा दे दूंगा, लेकिन मैं उन्हें बताना चाहता हूं कि सिद्धू तो पहले ही राज्यसभा छोड़कर बैठा है और अब बेअदबी करने वालों पर कार्रवाई नहीं हुई तो मैं इस्तीफा दे दूंगा.’

बता दें कि कैप्टन अमरिंदर सिंह ने एक दिन पहले कहा था कि अगर लोकसभा चुनावों में पंजाब में कांग्रेस पार्टी अच्छा प्रदर्शन नहीं करती है तो वह जिम्मेदारी लेते हुए अपने पद से इस्तीफा दे देंगे. अमरिंदर ने कहा था, ‘पार्टी आलाकमान का फैसला है कि लोकसभा चुनावों में पार्टी उम्मीदवारों की जीत या हार का पूरा श्रेय पार्टी के मंत्रियों और विधायकों को जाएगा. मैं इसकी जिम्मेदारी लेने के लिए तैयार हूं. हालांकि मुझे यकीन है कि कांग्रेस पंजाब में सभी लोकसभा सीटों पर जीत हासिल करेगी.’

सिद्धू की पत्नी ने भी कैप्टन पर उठाए थे सवाल
इससे पहले कांग्रेस नेता सिद्धू की पत्नी नवजोत कौर ने आरोप लगाया था कि पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने आशा कुमारी का टिकट कटवाया है. उन्होंने कहा कि ‘सिद्धू से पंजाब में इसलिए प्रचार नहीं कराया जा रहा है क्योंकि कैप्टन अमरिंदर सिंह नहीं चाहते हैं. कैप्टन अमरिंदर सिंह को लग रहा है कि वह 13 की 13 सीटें जीत रहे हैं और पंजाब में नवजोत सिंह सिद्धू की जरूरत नहीं है.  इसलिए नवजोत सिंह सिद्धू वहीं प्रचार कर रहे हैं, जहां पर उनकी जरूरत है.’

नवजोत कौर सिद्धू के बयान का समर्थन करते हुए कहा नवजोत सिंह सिद्धू ने कहा था कि वह कभी झूठ नहीं बोलेंगी.

भोलाराम साहू: सरपंच से MLA तक का सफर, बीजेपी के गढ़ में सेंध लगाने की जुगत

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छत्तीसगढ़ की 11 लोकसभा सीटों में से जिन सीटों पर कांग्रेस ज्यादा मजबूत मानी जा रही है, उनमें राजनांदगांव भी शामिल है. लंबे समय से बीजेपी के कब्जे में रहने वाली इस सीट पर 2019 के आम चुनाव में कांग्रेस के भोलाराम साहू को सेंध लगाने के लिए कांग्रेस ने अपना प्रत्याशी बनाया है. भोलाराम साहू का सीधा मुकाबला बीजेपी के प्रत्याशी संतोष पांडेय से माना जा रहा है.

पूर्व मुख्यमंत्री डॉ रमन सिंह के विधानसभा क्षेत्र और राजनांदगांव लोकसभा चुनाव में पेशे के किसान और दो बार के विधायक भोलाराम साहू पर कांग्रेस पार्टी ने दांव लगाया है. पार्टी ने पिछले विधानसभा चुनाव में टिकट न देकर उन्हें सबसे हाई प्रोफाइल लोकसभा क्षेत्र राजनांदगांव का प्रत्याशी बनाया है. उन्हें जातिगत समीकरण और पार्टी में सक्रियता को देखते हुए चुनावी समर में उतारा है.

सरपंच से लेकर लोकसभा प्रत्याशी तक सफर तय करने वाले भोलाराम साहू किसान परिवार से आते हैं. डोंगरगांव विधानसभा क्षेत्र के ग्राम खुज्जी निवासी भोलाराम साहू शिक्षा-छुरिया के शासकीय स्कूल से 1975 में आठवीं पास हैं. पेशे से कृषक हैं. राजनांदगांव के कांग्रेस नेता और अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के सदस्य रहे स्व. इंदरचंद जैन के संपर्क में आकर राजनीति में भोलाराम ने प्रवेश किया.

शुरू में दो बार विधानसभा चुनाव हारने के बाद तीसरी बार फिर मौका मिला और इसके बाद लगातार दो बार विधानसभा चुनाव जीते. वर्ष 1993 और 1998 में खुज्जी विधानसभा चुनाव में पराजय का सामना करना पड़ा. 2008 और 2013 में दो बार कांग्रेस से खुज्जी विधान सभा क्षेत्र से विधायक रहे. वर्ष 2018 में कांग्रेस ने विधानसभा चुनाव में टिकट नहीं दी. चार विधानसभा चुनाव का अनुभव व इससे पहले अपने गांव में सरपंच रहे हैं.

चुनाव आयोग का निर्देश, शाम को 6.30 के बाद ही दिखाया जाए एग्जिट पोल

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लोकसभा चुनाव का आज सातवां और आखिरी चरण है, देश के 8 राज्यों में 59 सीटों पर लोग अपने मताधिकार का प्रयोग कर रहे हैं। इसके साथ ही आज शाम को आखिरी चरण का मतदान संपन्न होने के साथ तमाम एग्जिट पोल भी सामने आएंगे। लेकिन इन एग्जिट पोल को लेकर चुनाव आयोग ने गाइडलाइन जारी की है। चुनाव आयोग ने अपने अधिकार का इस्तेमाल करते हुए निर्देश दिया है कि तमाम एग्जिट पोल को शाम 6.30 बजे के बाद ही दिखाया जाए।

इससे पहले चुनाव आयोग ने साफ किया था कि लोकसभा चुनाव के दौरान किसी भी माध्यम के जरिए एग्जिट पोल पब्लिश करने पर पूरी तरह से पाबंदी रहेगी। आयोग की ओर से कहा था कि टीवी, पेपर, ऑनलाइन या किसी भी माध्यम के जरिए चुनाव प्रक्रिया के दौरान एग्जिट पोल को पब्लिश नहीं किया जा सकता है। आयोग ने कहा था कि सुबह 7 बजे से शाम 6.30 बजे के बीच एग्जिट पोल को प्रकाशित नहीं किया जा सकता है। दरअसल चुनाव प्रक्रिया के दौरान इन एग्जिट पोल की वजह से मतदाता भ्रमित ना हो इसलिए आयोग ने यह फैसला लिया है।

बता दें कि 2019 के लोकसभा चुनाव के सातवें और अंतिम चरण में आज 8 राज्यों की 59 लोकसभा सीटों पर मतदान हो रहा है। सातवें चरण में जिन लोकसभा सीटों पर वोट डाले जा रहे हैं, उनमें यूपी और पंजाब की सबसे ज्यादा 13-13 लोकसभा सीटें शामिल हैं। इसके अलावा सातवें चरण में पश्चिम बंगाल की 9, बिहार की 8, मध्य प्रदेश की 8, हिमाचल प्रदेश की 4, झारखंड की 3 और चंडीगढ़ लोकसभा सीट शामिल है। 2014 के लोकसभा चुनावों में भाजपा और उसके सहयोगी दलों ने इन 59 सीटों में से 40 सीटों पर जीत हासिल की थी।

जब लू लग जाये तो क्यों न घरेलू तरीका अपनाकर बचा जाएं…

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वैसे तो गर्मी, धूप और लू से बचने के लिए आप कई तरह से सतर्क रहते हैं और इनसे बचने का पूरा प्रयास भी करते हैं। लेकिन इन सभी के बावजूद अगर आपको लू लग जाए, या फिर शरीर में गर्मी अधिक बढ़ जाने पर आप बीमार महसूस करें, तो यह उपाय आपको जरूर आजमाने चाहिए –

इन वजहों से लगती है लू
गर्मी के मौसम में खुले शरीर रहने, नंगे पांव धूप में चलने, तेज गर्मी में घर से खाली पेट और बिना पानी पिए बाहर जाने, कूलर या AC से निकल कर तुरंत धूप में जाने, बाहर धूप से आकर तुरंत ठंडा पानी पीने की वजह से अक्सर लू लगने की समस्या हो जाती है. शारीरिक रूप से कमजोर लोगों, बच्चों, बुजुर्गों, और कम पानी पीने वाले लोगों को अक्सर लू लग जाती है.

लू लगने के लक्षण

* तेज बुखार और सांस लेने में तकलीफ

*उलटी आना और चक्कर आना

*लूज मोशन, सिरदर्द, शरीर टूटना

*बार*बार मुंह सूखना और हाथ*पैरों में कमजोरी आना या निढाल होना, बेहोश होना

* शरीर में गर्मी, खुश्की या थकावट महसूस होना

भारी और बासी खाने से बचें
गर्मी में ज्यादा भारी, गरिष्ठ और बासी भोजन न करें क्योंकि गर्मी में शरीर की जठराग्नि धीमी हो जाती है इसलिए हमारा शरीर भारी खाने को पूरी तरह से पचा नहीं पाता और जरुरत से ज्यादा खाने या भारी खाना खाने से उलटी*दस्त की शिकायत हो सकती है.

कोल्ड ड्रिंक की बजाए ये चीजें पिएं
गर्मी में गला बहुत सूखता है और प्यास भी लगती है. ऐसे में बाजार से खरीद कर कोल्ड ड्रिंक या पैक्ड जूस पीने की बजाए घर की बनी ठंडी चीजों का सेवन करना चाहिए. जैसा आम का पन्ना, बेल का शरबत, खस का ठंडा शरबत, चन्दन गुलाब और फालसा का शरबत, संतरे का जूस या शरबत, ठंडाई, सत्तू का शरबत, दही की लस्सी, छाछ या मट्ठा आदि.

गन्ने का रस – कई गंभीर बीमारियों को खत्म करने में मददगार है ..

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गन्ने का जूस स्वास्थ्य के हिसाब से काफी फायदेमंद होता है। इसमें भारी मात्रा में एंटी ऑक्सीडेंट्स पाए जाते हैं जो हमारे पाचन तंत्र के लिए बहुत महत्वपूर्ण हैं तथा संक्रमण से भी बचने में सहायता करते हैं। गन्ने के जूस में आयरन, मैग्नीशियम, कैल्शियम और कई तरह के इलेक्ट्रोलाइट्स पाए जाते हैं जो शरीर के डिहाइड्रेशन को खत्म करने लिए बेहद जरूरी हैं।

* गन्ने का जूस कई तरह की अन्य गंभीर बीमारियों में भी काफी लाभकारी है। गन्ने का जूस डाइयूटेरिक यानी मूत्रवर्धक होता है। यह शरीर में मूत्र संबंधी क्षेत्रों में संक्रमण होने से बचाता है।

* इसी के साथ यह किडनी में पथरी होने से भी बचाव करता है। किडनी के ठीक तरह से काम करने में भी गन्ने का जूस काफी सहायक होता है।

* वही गन्ने का जूस एक महत्वपूर्ण आयुर्वेदिक औषधि है। यह हमारे लीवर को शक्ति प्रदान करता है।

* पीलिया रोग में गन्ने के जूस का सेवन वरदान साबित होता है। पीलिया में लीवर के ठीक तरह से काम न करने की वजह से शरीर के द्रवों में बिलरुबिन की अधिकता हो जाती है। इस वजह से हमारे शरीर की त्वचा का रंग भी पीला होने लगता है। ऐसे में गन्ने का रस शरीर में प्रोटीन और अन्य पोषक तत्वों की कमी को पूरा करता है जिससे पीलिया से उबरने में मदद मिलती है।

राजनांदगांव : ग्रामीण क्षेत्रों में भी प्लास्टिक कैरी बैग पर प्रतिबंध : ग्राम पंचायतों को इस दिशा में कार्य करने दिशा-निर्देश जारी

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ग्रामीण क्षेत्रों में भी प्लास्टिक कैरी बैग तथा प्लास्टिक वस्तुओं पर प्रतिबंध के संबंध में आम जनता को जानकारी देने के लिए ग्राम पंचायतों के माध्यम से अनेक कार्य किए जाने हैं। कलेक्टर श्री जयप्रकाश मौर्य ने जिले के समस्त अनुविभागीय अधिकारियों राजस्व तथा जनपद पंचायतों के मुख्य कार्यपालन अधिकारियों को पत्र भेजकर सभी कार्यों को 25 मई के पहले पूरे कराने के निर्देश दिए हैं।

    पत्र में राज्य शासन के आवास एवं पर्यावरण विभाग द्वारा प्लास्टिक कैरी बैग एवं अल्प जीवन पीवीसी तथा क्लोरिन युक्त प्लास्टिक, विज्ञापन एवं प्रचार सामग्री तथा खान-पान के लिए इस्तेमाल की जाने वाली प्लास्टिक वस्तुओं पर लगाए गए प्रतिबंध की जानकारी दी गई है। पत्र में यह भी बताया गया है कि छŸाीसगढ़ पंचायत राज अधिनियम की धारा 54 सार्वजनिक स्वास्थ्य, सुविधाएं और सुरक्षा के बाबत ग्राम पंचायतों की शक्तियां (7) पर्यावरणीय नियंत्रण सुनिश्चित करने का प्रावधान प्रतिस्थापित किया गया है। अधिनियम की धारा-49 ग्राम पंचायत के कृत्य (1) स्वच्छता, सफाई और न्यूसेंस का निवारण और उसका उपशमन का प्रावधान प्रतिस्थापित किया गया है।

    पत्र में कहा गया है कि प्राप्त निर्देशानुसार ग्राम पंचायत क्षेत्रों में प्लास्टिक की वस्तुओं पर प्रतिबंध के लिए कार्य किए जाए। सभी ग्राम पंचायतों में प्लास्टिक पर बैन के लिए ग्राम सभाओं में प्रस्ताव पारित किया जाए। ग्राम पंचायतों में प्लास्टिक पर प्रतिबंध के संबंध में नारा लेखन कार्य एक सप्ताह के भीतर पूर्ण करावें। ग्राम पंचायतों में सामाजिक बैठकों का आयोजन कर सभी को प्लास्टिक बैन पर प्रावधानिक धारा 49 के नियमों से परिचित कराया जाए तथा इस धारा के अंतर्गत लगने वाले जुर्माने और सजा से लोगों को अवगत कराया जाए। सभी धार्मिक स्थलों पर प्लास्टिक बैन के संदेशों का प्रसारण करवाया जाए। ग्राम पंचायतों में सार्वजनिक कार्यक्रमों में प्लास्टिक वस्तुओं के उपयोग को पूर्णतः प्रतिबंधित कराया जाए। ग्राम पंचायतों के सभी सार्वजनिक स्थलों जैसे बस स्टैण्ड, बाजार चौक, हाट-बाजार, मेला स्थलों, धार्मिक स्थलों और ग्राम पंचायत भवन में बोर्ड लेखन कर इसका प्रचार-प्रसार किया जाए। ग्राम पंचायतों के सीमा क्षेत्रों में स्थित समस्त पर्यटन स्थलों, सार्वजनिक तालाबों, सार्वजनिक स्थानों, हाट बाजारों, बस स्टैण्डों, शासकीय भवनों, चौपाल आदि स्थानों में प्लास्टिक कैरी बैग, अल्प जीवन पीवीसी, क्लोरिन युक्त प्लास्टिक तथा प्लास्टिक वस्तुओं के उपयोग पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाया जाए। सामाजिक स्तर पर विभिन्न समितियों से समन्वय कर इसका व्यापक प्रचार-प्रसार किया जाए। पत्र में इस कार्य को सर्वाेच्च प्राथमिकता देने तथा 25 मई के पूर्व  सभी कार्यों को अनिवार्य पूर्ण करने तथा पालन प्रतिवेदन प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं।

छत्तीसगढ़ : आवंटन से हटी रोक, अगस्त से बंटेगा अमृत नमक

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नमक बंद किए जाने के फैसले से यू टर्न ले लिया गया है। लोकसभा चुनाव के दौरान उचित मूल्य की दुकानों में नमक आवंटन बंद किए जाने को लेकर सरकार की काफी किरकिरी हुई थी। सरगुजा ही नहीं, यह पूरे प्रदेश में मुद्दा बनने लगा था। इसे भांपते हुए प्रदेश सरकार ने नमक वितरण से रोक हटा ली, लेकिन आचार संहिता लागू होने के कारण नमक की खरीदी नागरिक आपूर्ति निगम नहीं कर पाया है। नियमों के मुताबिक खाद्य विभाग ने जून और जुलाई दो माह का राशन तो आवंटित कर दिया, लेकिन नमक का नहीं किया। अब अगस्त से नमक की खेप कोटे की दुकानों में पहुंचेगी। इसके अलावा सरकार सभी 58 लाख 68 हजार 868 कार्डधारियों को पतला चावल देने की कार्य योजना बना रही है। बता दें कि पिछले चार साल से एपीएल कार्डधारियों को पतला चावल नहीं मिल रहा था। अब इन्हें भी बीपीएल कार्डधारियों के साथ लाभ के दायरे में लाया जाएगा।

नमक के आवंटन से रोक हटा ली गई है, लेकिन चुनाव आचार संहिता के कारण नागरिक आपूर्ति निगम खरीदी नहीं कर पाया है। आचार संहिता खत्म होने के बाद कोटे की दुकानों में पतले चावल की व्यवस्था होगी। इसका लाभ एपीएल और बीपीएल सभी कार्डधारियों को मिलेगा। इसे लागू करने के लिए रणनीति बनाई जाएगी। -कमलप्रीत सिंह, प्रमुख सचिव, खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति निगम

पूर्ण बहुमत के साथ बनेगी सरकार, 2014 के आसपास वाला ही रहेगा परिणाम : रमन सिंह

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छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री और भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने केंद्र में फिर से भाजपा की सरकार बनने का दावा किया है। छत्तीसगढ़ में सीटों की स्थिति को लेकर डॉ. रमन ने कहा कि इस बार भी रिजल्ट 2014 के परिणाम के आसपास ही रहेगा।

रजबंधा मैदान स्थित भाजपा कार्यालय एकात्म परिसर में शनिवार को पत्रकारों से चर्चा में डॉ. रमन ने आम चुनाव में भाजपा को पूर्ण बहुमत का दावा किया। डॉ. रमन पार्टी की एक बैठक में शामिल होने एकात्म परिसर पहुंचे थे।

उन्होंने कहा कि भाजपा अपने दम पर ही केंद्र में सरकार बना लेगी और सहयोगियों के साथ मिलकर मजबूत स्थिति बनेगी। दिल्ली में कई पार्टियों के अभी से हाथ मिलाने के सवाल पर डॉ. रमन ने कहा कि उनको हाथ मिलाते रहना चाहिए, लेकिन भाजपा क्लीयर कट मेजारिटी के साथ केंद्र में सरकार बना रही है।

बैठक के संबंध में जानकारी देते हुए डॉ. रमन ने बताया कि मतगणना की तैयारियों को लेकर यह बैठक की जा रही है। उन्होंने बताया कि कार्यकर्ताओं को पहले ही समझा दिया गया है कि मतगणना की तैयारी कैसे करनी है और कौन-कौन सी सावधानी बरतनी है। बैठक में चुनाव परिणाम के बाद विजय जूलूस को लेकर भी बात करेंगे। चुनाव परिणाम के बाद केंद्र के आदेश पर हमें तुरंत दिल्ली भी जाना होगा।

बिजली कंपनियों में 10 साल से जमे है अफसर, अब तबादलों पर सियासत

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चुनावी माहौल में प्रदेश में बिजली की आंख मिचौली मुद्दा बनी। विपक्षी आए दिन इसको लेकर सरकार पर हमला करते रहे हैं। इस बीच पूर्ववर्ती सरकार के कार्यकाल में बिजली कंपनियों में तबादलों में बड़े पैमाने पर खेल का खुलासा हुआ है।

कंपनी में तबादला नीति को दरकिनार कर मनमाने तरीके से स्थानांतरण आदेश जारी और निरस्त किए गए। इसकी वजह से शहरी क्षेत्रों में स्थित बिजली दफ्तरों में स्वीकृत से कई गुना ज्यादा स्टॉफ भर गए, जबकि ग्रामीण और सुदूर हिस्सों में कर्मियों का टोटा है।

बिजली कंपनियों का यह खेल नियंत्रक महालेखा परीक्षक यानी कैग की ऑडिट रिपोर्ट में उजागर हुआ है। कैग की टीम इस वर्ष मार्च में बिजली ट्रांसमिशन कंपनी का ऑडिट करने पहुंची थी। शहरों में भरमार और ग्रामीण क्षेत्रों में स्टॉफ की कमी पर कैग ने कंपनी प्रबंधन से जवाब तलब किया है।

कैग की इस आपत्ति के बाद कंपनी के अंदर ही घमासान शुरू हो गया है। कर्मचारी संगठनों ने स्थानांतरण नीति का सख्ती से पालन करने की मांग की है। पत्रोपाधी अभियंता संघ के एनआर छीपा का कहना है कि पूर्ववर्ती सरकार के कार्यकाल में इसको लेकर कई बार शिकायत की गई, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई।

पहले तबादला, फिर बिना उचित वजह के ही निरस्त

बिजली कंपनियों में जिनती तेजी से तबादला आदेश जारी होता है, उतनी ही तेजी से उसमें बदलाव या निरस्त भी कर दिया जाता है। तबादला आदेश बदलने या निरस्त करने के लिए उचित वजह भी नहीं देखी जाती है। कैग ने भी अपनी आपत्ति में इस बात का उल्लेख किया है।

अध्यक्ष ने जारी किया कड़ा पत्र

कैग की आपत्तियों को गंभीरता से लेते हुए अध्यक्ष शैलेंद्र शुक्ला ने गहरी नाराजगी जाहिर की है। उन्होंने पांचों बिजली कंपनियों को कड़ा पत्र जारी कर स्थानांतरण नीति 2018 का सख्ती से पालन करने का निर्देश दिया है। अध्यक्ष ने स्वीकृत पदों के अनुस्र्प कर्मचारियों की पदस्थापना और स्थानांतरण सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है।

नीति 2018 से लागू, पालन होगा 2021 से 

बिजली कंपनियों में 2018 में स्थानांतरण नीति लागू की गई। इस नीति के क्लास 1.3 में कहा गया है कि कंपनी के सभी कर्मचारी और अधिकारी को अपनी पूरी सेवा के दौरान कम से कम दो वर्ष सुदूर क्षेत्रों में सेवा देनी होगी।

ऐसा नहीं करने वालों को पदोन्न्ति व उच्च वेतमान के लाभ से वंचित किया जा सकता है। इसमें आगे कहा गया है कि यह व्यवस्था 2021 से लागू की जाएगी। कैग ने इस पर कंपनी प्रबंधन से जवाब मांगा है कि जब नीति 2018 में लागू कर दी गई है तो इस व्यवस्था को लागू करने में 2021 का इंतजार क्यों किया जा रहा है।

डांसिंग स्टाइल को लेकर टाइगर श्रॉफ ने किया ये बड़ा खुलासा

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टाइगर श्रॉफ के डांसिंग स्टाइल के सभी दीवाने हैं. बॉलिवुड में वह ऐक्शन हीरो के साथ डांसिंग स्टार भी माने जाते हैं. उनके फ्री स्टाइल डांस को देखकर लगता है कि वह बचपन से डांस कर रहे हैं. लेकिन उनके डांस का सफर महज छह वर्ष पुराना है. हालांकि इन छह वर्ष में उन्होंने पूरा-पूरा दिन डांस प्रैक्टिस के नाम किया है. टाइगर इन दिनों अपनी फिल्म ‘ को लेकर चर्चा में हैं. धर्मा प्रॉडक्शन की इस फ्रेंचाइजी में कार्य करने को लेकर क्या उनपर कोई प्रेशर था? यह भूमिका पहले की फिल्मों से कितना अलग है? व उनके करियर में माइकल जैक्सन का क्या भूमिका है? स्टार किड होने के क्या फाएदे व नुकसान हैं इंडस्ट्री में? इन सवालों के साथ पिछले दिनों लखनऊ आए टाइगर से हुई एक खास मुलाकात . 
अभी भी शर्मीला ही हूं 
मैंने जब ‘हीरोपंती’ साइन की थी, उस वक्त सोचा था कि मुझे माइकल जैक्सन की तरह डांस करना है . मैं रितिक रोशन के डांस का भी फैन हूं . आज मैं जहां हूं, उसकी वजह माइकल जैक्सन हैं क्योंकि वही मेरी प्रेरणा थे . पहली फिल्म साइन करने से एक वर्ष पहले मैंने डांस सीखना प्रारम्भ किया था . भले लोगों को लगता हो कि मैं बचपन से डांस करता हूं तो ऐसा नहीं है . मेरा महज छह वर्ष का सफर है डांस का . दरअसल, मेरी बॉडी कठोर थी . मैंने डांस करने के लिए बहुत मेहनत की . पूरा दिन प्रैक्टिस करता था . मुझमें जो खराबी थी, वो यह कि मैं बहुत ज्यादा शर्मीला हूं . उस शर्म को समाप्त करने में भी मुझे वक्त लगा . अभी पूरी तरह यह समाप्त तो नहीं हुई लेकिन पहले के मुकाबले अब बहुत ज्यादा खुल गया हूं .