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आइये जानते है, चेहरे की झाइयां कम करने के उपाय

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पिगमेंटेशन या झाइयां त्वचा पर पड़ने वाले काले धब्बों को कहते हैं। इसे हाइपरपिगमेंटेशन भी कहा जाता है। इसे आप घरेलू उपायों से भी दूर कर सकते हैं।चेहरे की झाइयां कम करने के उपाय।

काम का टेंशन, भागदौड़ भरी जिंदगी, तनाव, प्रदूषण आदि का असर सबसे पहले हमारी त्वचा पर दिखाई देने लगता है। त्वचा की ठीक ढंग से देख-रेख न करने से पिगमेंटेशन यानी चेहरे पर झाइयां होने की समस्या कम उम्र में ही नजर आने लगता है। झाइयों की समस्या इतनी जिद्दी होती है कि जल्दी स्किन से जाती नहीं है। ऐसे में आपको कुछ खास उपायों से इसे हटाने की कोशिश करनी होगी।

क्या है पिगमेंटेशन यानी झाइयां

पिगमेंटेशन या झाइयां त्वचा पर पड़ने वाले काले धब्बों को कहते हैं। इसे हाइपरपिगमेंटेशन भी कहा जाता है। किसी के चेहरे पर इसके निशान छोटे होते हैं, तो किसी के काफी बड़े। वैसे, ये हानिकारक नहीं होता है, लेकिन कुछ मामलों में यह मेडिकल समस्या के लक्षण भी हो सकते हैं। इससे त्वचा अस्वस्थ दिखाई देती है।

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हाइपरपिगमेंटेशन के कारण
धूप में अधिक देर तक घूमना-फिरना।
त्वचा का किसी कारणवश क्षतिग्रस्त होना।
शरीर में हार्मोनल बदलावों का होना।
अनुवांशिक।
एलर्जी।

झाइयों को इन घरेलू उपायों से हटाएं

कच्चा आलू – एक कच्चे आलू को आधा काट लें। कटे हुए हिस्से पर कुछ बूंद पानी की डालें। आलू को सर्कुलर मोशन में अपने चेहरे पर रगड़ें। 10 मिनट छोड़ने के बाद गुनगुने पानी से चेहरे को धो लें। एक महीने तक इसे दिन में दो से तीन बार चेहरे पर लगाएं। झाइयां दूर हो जाएंगी। आलू झाइयों और काले धब्बों को दूर करने के लिए काफी प्रभावशाली होता है। इसमें कैटकोलेस एंजाइम होता है, जो मेलानोसाइट्स को नियंत्रित करते हैं।

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नींबू- एक नींबू का रस कटोरी में निकालें। इसमें शहद मिलाएं। इसे चेहरे पर लगाएं। 15 मिनट लगा रहने दें। अब गुनगुने पानी से चेहरा धो लें। इसे तब तक लगाएं, जब तक की झाइयां कम न हो जाएं। दिन में दो बार लगाएं। नींबू के रस में ब्लीचिंग के प्राकृतिक गुण होते हैं। शहद मॉइस्चराइजर का काम करता है। ये दोनों ही गुण झाइयों का इलाज कर सकते हैं।

प्याज- प्याज को टुकड़ों में काट लें। प्याज के टुकड़े को झाइयों वाले भाग पर रगड़ें। 15 मिनट तक चेहरे पर लगा रहने के बाद गुनगुने पानी से चेहरा धो लें। प्याज का रस भी चेहरे पर लगाने से लाभ होगा। जब चेहरा साफ ना दिखने लगे, तब तक यह उपाय ट्राई करती रहें। इसे दिन में दो बार लगाने से लाभ होता है। प्याज में विटामिन-सी और एंटीऑक्सीडेंट गुण पाए जाते हैं, जो पिगमेंटेशन दूर करने में मदद करते हैं।

जानिए, मूंग स्प्राउट्स चाट बनाने की रेसिपी

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आवश्यक सामग्री
2 कप स्प्राउटेड हरी मूंग
1 प्याज, बारीक काट लें
1 टमाटर, बारीक काट लें
1-2 हरी मिर्च, बारीक काट लें
1/4 टीस्पून लाल मिर्च पाउडर
1 टीस्पून चाट मसाला
1 टीस्पून नींबू का रस
1 बड़ी आलू, उबली-छोटे टुकड़ों में कटी
1 टेबलस्पून बारीक कटी धनियापत्ती
स्वादानुसार काला नमक/सादा नमक
3 टेबलस्पून बारीक सेंव
5-6 चाट पपड़ी
स्टीमर
1 कप पानी

विधि

– स्टीमर में एक कप पानी डालकर स्प्राउटेड मूंग को स्टीम कर लें, आप चाहें तो मूंग को उबाल भी सकते हैं।

– इसके बाद मूंग को एक बड़े कटोरे में निकाल लें। अगर उबाले हैं तो इसका पानी अच्छी तरह निथार लें। इसके बाद मूंग में नींबू का रस, सेंव और पापड़ी छोड़कर सारी चीजें डालकर अच्छी तरह मिला लें।

– फिर इसमें नींबू का रस डालें और अच्छी तरह मिला लें, मूंग स्प्राउट को अलग-अलग प्लेट पर निकालें, इन पर पापड़ी, सेव डालकर खाएं-खिलाएं।

विडिओ : नोटबंदी के एक साल बाद स्विस बैंक में 7000 करोड़ रुपए हुए जमा, यह देश का सबसे बड़ा घोटाला: कांग्रेस

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नोटबंदी को लेकर कांग्रेस ने मोदी सरकार पर हमला बोला है। कांग्रेस नेता कपिल सिब्बल ने कहा, “नोटबंदी दुनिया का सबसे बड़ा घोटाला है। मोदी ने कहा था कि नोटबंदी का उद्देश्य कैशलेस बनाना है। आरबीआई के डेटा के मुताबिक, 2014 में 7.8 लाख करोड़ रुपए मूल्य का कैश सर्कुलेशन था, 2018 में यह 18.5 लाख करोड़ रुपए हो गया। नोटबंदी से तुरन्त पहले यह 17.97 लाख करोड़ रुपए था, जो वर्तमान में 21.42 लाख करोड़ रुपए है। नोटबंदी के बाद कैश सर्कुलेशन बढ़ा है।”

उन्होंने आगे कहा, “जो दावा था पीएम मोदी का हम कैशलैस सोसायटी की ओर जा रहे है। उसके उलट हो रहा है। पीएम मोदी जो फेक नोट की बात करते थे उसका खात्मा नहीं हुआ। नोटबंदी से भ्रष्टाचार, आतंकवाद और काला धन का खात्मा नहीं हुआ। नोटबंदी के एक साल बाद ज्यूरिख में स्विस बैंक खातों में 7000 करोड़ रुपए जमा हुआ है। मोदी सरकार ने काला धन लाने की बात की थी, जबकि यह बढ़ रहा है।”

रूस की लड़की ने भारत आकर हिंदुस्तानी लड़के से हिंदू रीति रिवाजों से की शादी

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मध्य प्रदेश में खजुराहो के रहने वाला अंजुल सिंह राजावत रूस के माॅस्को में रहकर होटल कारोबार चलाता है। उसकी 7 साल पहले ऑनलाइन साइट्स के जरिए वहां की श्वेतालाना नाम की लड़की से दोस्ती हुई। यह दोस्ती धीरे- धीरे गहरी होती गई और फिर प्यार में बदल गई।

दोनों ने आपस में शादी करने का फैसला लिया। 4 साल पहले रूस में ही दोनों ने कोर्ट में शादी कर ली। शादी करने के बाद दोनों वहां साथ- साथ रह रहे हैं।

कुछ दिनों पहले अंजुल श्वेतालाना और उसके परिजनों को साथ लेकर खजुराहो आया। यहां की संस्कृति सभ्यता से प्रभावित श्वेतालाना ने खजुराहो में हिंदू रीति-रिवाज से शादी करने की बात उसके सामने रखी।

अंजुल ने बताया कि श्वेतालाना के प्रस्ताव को मानते हुए बुधवार का दिन मुकर्रर किया गया और खजुराहो के बघराजन मंदिर में हिंदू रीति-रिवाज से विवाह किया।

‘फानी तूफान’ : मौसम विभाग ने जारी किया अलर्ट, छत्तीसगढ़ के कुछ हिस्सों में चल सकती है आंधी

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चक्रवाती तूफान फान का असर शनिवारो को भी छत्तीसगढ़ पर दिख सकता है. मौसम विभाग की मानें तो सूबे के कई इलाकों में फानी की वजह से तेज आंधी-तूफान हो सकती है. फानी को लेकर मौसम विभाग ने अलर्ट जारी कर दिया है. मौसम विभाग की मानें तो कुछ इलाकों में बिजली गिरने की भी संभवनाएं है. फानी के कारण कुछ जिलों में बारिश भी हो सकती है. मौसम वैज्ञानिक पीएल देवांगन का कहना है कि फानी तूफान अपने साथ नमी लेकर आया था, जिसका प्रभाव अभी भी छत्तीसगढ़ पर है. इस वजह से तापमान में तीन से चार डिग्री की कमी आई थी. वहीं मध्यप्रदेश और महाराष्ट्र के इलाकों में लू चल रही है. ये गर्म हवाएं अभी छत्तीसगढ़ की तरफ आ रही है. इस लिहाज से मंगलवार या बुधवार तक प्रदेश में लू चलने की संभावनाएं बन रही है. अभी तापमान में मिला-जुला असर है, लेकिन रविवार तक तापमान में बढ़ोतरी हो सकती है.

मौसम वैज्ञानिक पीएल देवांगन का कहना है कि फानी तूफान बंगाल तक पहुंच गया है. फिलहाल ये तूफान थोड़ा कमजोर हो गया है. अब ये तूफान और कमजोर होता जाएगा. छत्तीसगढ़ की इस तूफान का प्रभाव लगभग खत्म हो गया है लेकिन फिर भी इस तूफान के कारण शनिवार शाम तक छत्तीसगढ़ के कुछ इलाकों में हल्की बारिश हो सकती है. वहीं कुछ इलाकों में 50 किलो प्रति घंटे या उससे अधिक की गति से हवाएं चल सकती है. बता दें कि शुक्रवार शाम को राजधानी रायपुर में फानी तूफान का असर देखने को मिला था. रायपुर सहित राज्य के कई जिलों में तेज आंधी की वजह से काफी नुकसान हुआ था.

हर आरोप की जांच कराने को हूं तैयार : राहुल

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कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने कहा है कि उनके खिलाफ लगाए जा रहे भ्रष्टाचार के आरोप राजनीति से प्रेरित और निराधार हैं और वह इन सब मामलों की जांच कराने के लिए तैयार हैं। गांधी ने कांग्रेस मुख्यालय में शनिवार को आयोजित संवाददाता सम्मेलन में कहा कि वह संस्थानों को बचाने की लड़ाई लड़ रहे हैं और उनके खिलाफ बेबुनियाद आरोप लगाए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि इन आरोपों की सत्यता सबके सामने आए इसलिए वह सारे आरोपों की जांच कराने को तैयार हैं। उन्होंने कहा ‘कोई भी जांच कराइये मैं तैयार हूं। जो भी जांच करना चाहते हैं कीजिए। जांच कराने में मुझे किसी तरह की दिक्कत नहीं है लेकिन आपको राफेल की भी जांच करानी होगी।’ कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि उनके खिलाफ जो आरोप लगाए जा रहे हैं वह सब सार्वजनिक हैं। इन मामलों में जो भी जांच और जो भी कार्रवाई करना चाहते हैं इसके लिए वह तैयार हैं लेकिन राफेल की जांच भी जरूरी है। प्रधानंत्री को भ्रष्टाचार, बेरोजगारी, किसानों और गरीबों के मुद्दे पर चर्चा करने की चुनौती देते हुए उन्होंने कहा कि इन मुद्दों पर पीएम मोदी उनके सामने टिक नहीं पाएंगे। हाल में मीडिया में आई खबरों के अनुसार ब्रिटिश कंपनी बैकोप्स लिमिटेड में राहुल गांधी के पार्टनर यूलरिक मैकनाइट को संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन सरकार के समय एक रक्षा सौदे में आॅफसेट अनुबंध मिला था।

छत्तीसगढ़ : कांकेर जिले में करेंसी की कमी दूर करने शासन का आर.बी.आई. को पत्र

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राज्य शासन द्वारा भारतीय रिजर्व बैंक को पत्र लिखकर कांकेर जिले, विशेषकर पखांजूर क्षेत्र के बैंको में करेंसी की कमी दूर करने शीघ्र कार्यवाई का अनुरोध किया गया है।
छत्तीसगढ़ शासन वित्त विभाग के सचिव श्री कमलप्रीत सिंह ने भारतीय रिजर्व बैंक के महाप्रबंधक श्री एस.के. वर्मा को जारी पत्र में कहा है कि पिछले कुछ दिनों से कांकेर जिले के पखांजूर क्षेत्र की बैंक शाखाओं में मुद्रा की भारी कमी है। इस करेंसी संकट से स्थानीय लोगों को लेन-देन में कठिनाई हो रही है। इससे सरकारी योजनाओं से संबंधित भुगतानों, जैसे सामाजिक सुरक्षा पेंशन और मनरेगा मजदूरी का लाभ लाभार्थियों तक पहूंचाना भी प्रभावित हो रहा है।
पत्र में कहा गया है कि चरम वाम पंथ प्रभावित क्षेत्रों के लिए सड़क मार्ग से कैश की आवाजाही पर भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा प्रतिबंध लगाए गए हैं। कैश का परिवहन केवल    आर.बी.आई. की देखरेख में वायुमार्ग द्वारा किया जाता है। श्री कमलप्रीत सिंह ने राज्य के संवेदनशील विशेषकर पखांजूर में नगदी की स्थिति की समीक्षा करने और पर्याप्त मुद्रा की उपलब्धता सुनिश्चित करने हेतु तत्काल कदम उठाने का अनुरोध रिजर्व बैंक से किया है।
उन्होंने कहा है कि इस कार्य के लिए राज्य सरकार हर संभव आर.बी.आई का सहयोग एवं समन्वय करने तत्पर है।

देवरहा बाबा ने दिया था कांग्रेस को पंजा चुनाव निशान

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रामदेव बाबा, श्री श्री रविशंकर और दूसरे साधु-साध्वियों के पहले भी बहुत से बाबा हुए हैं. उन बाबाओं के भी राजनीतिक सरोकार रहे. ऐसे संतों बाबाओं में सबसे पहले नाम आता है धर्मसंघ बनारस के करपात्री जी महाराज का. बहुत समय तक राजनीति को प्रभावित करने वाले इस दिग्गज संत ने तो अपनी राजनीतिक पार्टी भी बना ली थी. इसी क्रम में देवरिया जिले के देवरहा बाबा का भी नाम आता है.

देवरहा बाबा का बहुत सम्मान था
कांग्रेस पार्टी को हाथ का पंजा देवरहा बाबा ने दिया था. देवरहा बाबा गोरखपुर के पास देवरिया जिले के थे. एक जाने-माने संत. एक ऐसे संत जो समाज के मेलों में आते तो थे, लेकिन भीड़ में नहीं रहते थे. उनके बारे में तरह-तरह की कहानियां प्रचलित थीं. कोई कहता था कि वो उन्हें पचास साल से देख रहा है, तो कोई उन्हें सौ साल से उपर का बताता था. जो भी हो उनको लेकर कोई विवाद कभी सामने नहीं आया. हर तरफ से उनके लिए सम्मान ही मिलता रहा.

पंजे से पहले कांग्रेस का चुनाव निशान गाय-बछड़ा था. आपातकाल के दौरान विपक्षी नेताओं को जेलों में भरा जा रहा था. माना जा रहा था कि इंदिरा गांधी के बेटे संजय गांधी प्रधानमंत्री के नाम पर फैसले ले रहे थे. विपक्षी दलों ने इसका खूब प्रचार किया. यहां तक कि कांग्रेस के चुनाव निशान को भी लपेटे में ले लिया गया. वरिष्ठ पत्रकार कमलेश त्रिपाठी बताते हैं – “उस समय राजनीति में सक्रिय रहने वाले बताते हैं कि गाय-बछड़े को इंदिरा और संजय का ही प्रतीक बता कर प्रचार किया जा रहा था.”

इंदिरा गांधी को संतो-साध्वियों से मिलना अच्छा लगता था. मां आनंद मयी के साथ फाइल फोटो
खैर आपातकाल के बाद 1977 में हुए चुनाव में इंदिरा गांधी पराजित हुईं. जनता पार्टी जीती. इंदिरा गांधी परेशान थीं. उसी दौर में उन्होंने तीन दिन का इलाहाबाद प्रवास किया. इलाहाबाद में गंगा तट पर देवरहा बाबा आए हुए थे. वहां किसी ने उनके दर्शन करने की इंदिरा गांधी को सलाह दी.

गंगा में रहते थे बाबा
बाबा गंगा किनारे या कहा जाय गंगा में ही रहते थे. गंगा के किनारे वाले हिस्से में बांस की ऊंची मचान बनती थी. बाबा उसी पर बैठे रहते थे. सुबह शाम लोग वहीं जमा हो जाते थे. बाबा अपने पैर लटका देते और श्रद्धालु पैरों से माथा छुआ कर उनके आशीर्वाद लेते थे. हालांकि अगर कोई वीआईपी जाता था तो बाबा कुछ समय भी उसे देते थे. मैंने खुद भी अपने बचपन में बाबा से किसी की कुछ बातचीत सुनी थी.

बाबा के आश्रम की फोटो भी छपी थी
आम तौर पर गले में रुद्राक्ष की माला पहनने वाली इंदिरा जी भी वहां गईं. कहा जाता है कि बाबा ने एंकात में उनसे कुछ बातें कीं. उसके बाद इंदिरा गांधी देवरिया उनके आश्रम भी गईं. जानकार बताते हैं–“वहीं बाबा ने अभय मुद्रा में हाथ उठाकर आशीर्वाद देते हुए कहा था, यही तुम्हारा कल्याण करेगा.” श्री त्रिपाठी याद करते हैं- “हम लोगों ने उस तसवीर को देखा ता जिसमें इंदिरा गांधी मइल आश्रम में गईं थीं.”

आसान था पंजे से प्रचार
वैसे बाबा भोजपुरी बोलते थे और संस्कृत के याद हो जाने लायक मंत्रों का उच्चारण करते थे. जाहिर है इंदिरा जी को उनके कहे का मतलब बताया गया होगा. जानकारों के मुताबिक आपातकाल के दौरान विरोधियों के प्रचार को रोकने के लिए इंदिरा गांधी गाय-बछड़े का चुनाव निशान बदलना ही चाहती थीं. लिहाजा उन्हें भी हाथ का पंजा जमा.

1978 में चुनाव निशान बदल गया. इस पंजे में खास बात ये थी कि इसे दिखाने के लिए किसी को कुछ लेकर जाने चलने की जरूरत नहीं थी. बस पंजा दिखा दिया. जबकि गाय-बछड़ा निशान दिखाना आसान नहीं था. इस निशान को बनाने के लिए कटी हुई स्टेंसिल का प्रयोग करना पड़ता था. जरुरत पड़ी तो तुरंत पंजा छाप दिया. इस तरह से दो बैलों की जोड़ी से शुरु हुआ कांग्रेस का चुनाव चिह्न पंजा हो गया. कुछ लोग पंजे का संबंध शंकराचार्य चंद्रशेखरेंद्र सरस्वती के आशीर्वाद से जोड़ते हैं, लेकिन हिंदी भाषी इलाके में इसे देवरहा बाबा की ही देन माना जाता है.

ये हैं दुनिया के 8 ऐसे आविष्कार, जो सबसे पहले भारत में हुए!

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आज हम आपको दुनिया के 8 ऐसे आविष्कारों के बारे में बताने जा रहे हैं, जो सबसे पहले भारत में हुए थे। ये भारत द्वारा दुनिया को दी गई कई ऐसी खोजें हैं, जिन्हें अगर भारत ने नहीं खोजा होता तो शायद उनके बारे में कोई नहीं जान पाता।

8. जीरो

भारत ही वो देश है, जिसने दुनिया को जीरो की वैल्यू से अवगत करवाया। इसका आविष्कार ब्रह्मगुप्त ने किया था। जिस शब्द को सबसे पहले आर्यभट ने इस्तेमाल में लिया था, जो कि एक बहुत ही बड़े गणितज्ञ थे। सोचिए अगर भारत ने दुनिया को जीरो नहीं दिया होता तो क्या हम पृथ्वी से चांद तक की दूरी का पता लगा पाते? क्या हम कभी कंप्यूटर को चला पाते, जो केवल बाइनरी नंबर यानी 0 और 1 की ही गिनती को समझता है।

7. सर्जरी

क्या आप जानते हैं कि आज से 2500 साल पहले सुश्रुत संहिता ने आयुर्वेद की उन सभी खोजों को पूरा कर लिया था, जिसकी मदद से आज डॉक्टर्स आपके शरीर की सर्जरी कर पाते हैं और उसी कारण से सुश्रुत संहिता को फादर ऑफ सर्जरी के नाम से भी जाना जाता है।

6. युएसबी

युएसबी का पूरा नाम यूनिवर्सल सीरियल बस है। क्या आप जानते हैं कि जिस युएसबी पोर्ट को आप अपने कंप्यूटर या फिर लैपटॉप में इस्तेमाल करते हैं, उस युएसबी पोर्ट को इंडियन कंप्यूटर इंजीनियर ने डिजाइन किया था। जिसकी मदद से मानो कंप्यूटर की दुनिया आसान-सी हो गई, क्योंकि कंप्यूटर से तेजी से काम करवाने और उसे कमांड देने, डेटा को ट्रांसफर करने जैसे इन सभी कामों में युएसबी को अभी तक कोई पीछे नहीं छोड़ पाया है।

5. सांप-सीढ़ी

आपने बचपन में सांप-सीढ़ी वाले इस गेम को तो बहुत खेला होगा, लेकिन क्या आप जानते हैं कि सांप-सीढ़ी वाले इस गेम को सबसे पहले भारत में ही खेला गया था। जिसे यहां उस समय मोक्षपट के नाम से बुलाया जाता था। आपको बता दें कि इसके अलावा चेस गेम की शुरुआत भी भारत से ही हुई थी।

4. डायमंड माइन

क्या आप जानते हैं कि दुनिया को सबसे पहले हीरा भारत ने ही दिया था। जहां ब्राजील में 18वीं सदी में हीरे की खदान को खोजा गया था, वहां भारत ने उससे 5 हजार साल पहले ही हीरे को खोज लिया था।

3. चांद पर पानी

चांद पर भी पानी मौजूद है। इस बात का सबसे पहले पता भारत की स्पेस एजेंसी इसरो द्वारा लगाया गया था और कुछ ऐसी तसवीरें दुनिया को दिखाई गई थी, जिसे देख सारी दुनिया चौंक गई थी।

2. स्याही

जहां आज पूरी दुनिया स्याही का इस्तेमाल कर अपने शब्दों को लिख पाती है तो आपको बता दें कि दुनिया को सबसे पहले स्याही के इस्तेमाल से भारत ने ही रूबरू करवाया था। जिसे पहली बार दक्षिण भारत में चौथी सदी के दौरान इस्तेमाल में लिया गया था।

1. बटन

यह एक ऐसी छोटी-सी चीज है, जिसे हम अपनी शर्ट को बंद करने के लिए या फिर कई तरह के कपड़ों में इस्तेमाल में लेते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि दुनिया में सबसे पहले बटन कहाँ इस्तेमाल किया गया था? अगर नहीं, तो चलिए हम आपको बता दें कि दुनिया में सबसे पहले बटन मोहन-जोदाड़ो के समय में इस्तेमाल में लिया गया था, जो भारत में ही हुआ था।

क्यों दे रहे हैं डॉक्टर्स सेंधा नमक को सेवन करने की सलाह क्यों हैं होता है इसका व्रत में इस्तेमाल

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ज़्यादातर जब भी कोई व्रत करता है तो वह खाने सेंधे नमक का इस्तेमाल करता है । सेंधा नमक जिसकों कई लोग रोक साल्ट के नाम से भी जानते हैं । यह नमक सिर्फ व्रत ही नही बल्कि आज हर डॉक्टर सभी को इसी का सेवन करने की सलाह देते हैं । पर क्या कभी आपने सोचा है ऐसा क्यों है ?

आज हम आपको बताने जा रहे हैं की क्यों ? सेंधे नमक का सेवन करना चाहिए और क्यों सभी डॉक्टर्स आज के समय में सेंधा नमक खाने की ही हमको सलाह दे रहे हैं ? ऐसा क्या है जिसके कारण सेंधा नमक इतनी ज्यादा डिमांड है । आइये जानते हैं क्या है इसमें खास ?

सेंधा नमक सबसे शुद्ध होता है। इसे बनाने के लिए किसी भी तरह के कैमिकल्स का इस्तेमाल नहीं किया जाता है इसलिए व्रत में सिर्फ सेंधा नमक ही खाया जाता है। यह न केवल कम खारा होता है बल्कि इसमें आयोडीन की मात्रा भी नहीं पाई जाती।

आयुर्वेद के अनुसार, रोजाना इसका सेवन शरीर को कई बीमारियों से दूर रखता है। सेंधा नमक में साधारण नमक की अपेक्षा सोडियम की मात्रा कम होती है और पोटेशियम और मैग्नीशियम की मात्रा अधिक होती है। ऐसे में इससे आप दिल ही नहीं बल्कि अन्य बीमारियों से भी बचे रहते हैं।

1 गिलास गर्म पानी में सेंधा नमक मिलाकर पीने से मेटाबॉलिक रेट और पाचन तंत्र बेहतर होता है। मेटाबॉलिक रेट बढ़ने से वेट कंट्रोल रहता है और बॉडी में जमा फैट धीरे-धीरे निकलता जाता है।

इससे कोलेस्ट्रॉल भी कंट्रोल में रहता है, जिससे हार्ट अटैक का खतरा कम होता है। इसके अलावा रोजाना इसका सेवन आपको दिल की बीमारियों से भी दूर रखता है।

नमक वाला पानी पीने से खाना आसानी से पच जाता है। यह मुंह में लार वाली ग्रंथी को सक्रिय करने में मदद करता है जिससे खाने के पचने की प्रक्र‍िया बेहतर होती है।

इसमें कुछ ऐसे तत्व पाए जाते हैं, जिससे सेरोटोनिन और मेलाटोनिन हार्मोन्स बैलेंस रहते हैं। इससे स्ट्रेस दूर होता है और दिमाग को तनाव से लड़ने की ताकत भी मिलती है।