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किसानों के सामने PepsiCo झुकी, कोर्ट केस लेना पड़ा वापस

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बढ़ते दबाव का सामना कर रही खाद्य और पेय पदार्थ कंपनी पेप्सिको (PepsiCo) ने कहा है कि उसने गुजरात के नौ आलू किसानों (Potato farmers) के खिलाफ दायर किया मुकदमा वापस ले लिया। पेप्सिको (PepsiCo) ने किसानों पर आलू की एक खास विविधता वाली फसल को लगाने का आरोप लगाया था जिसे कंपनी ने रजिस्टर्ड करवा रखा है।

क्या कहा पेप्सिको (PepsiCo) ने

कंपनी ने एक बयान में कहा, “किसानों (farmers) के हितों की रक्षा के लिए, पेप्सिको इंडिया (PepsiCo india) को अपनी पंजीकृत विविधता की रक्षा के लिए न्यायिक सहारा लेने के लिए मजबूर होना पड़ा था। शुरू से ही पेप्सिको (PepsiCo)ने किसानों (farmers) को एक मैत्रीपूर्ण समाधान देने की पेशकश की थी। सरकार के साथ चर्चा के बाद, कंपनी ने किसानों के खिलाफ मामलों को वापस लेने पर सहमति व्यक्त की है..।”

ये था मामला

पेप्सिको (PepsiCo) ने उत्तरी गुजरात के साबरकांठा और अरावली जिलों के नौ किसानों (Potato farmers) पर एफ 2027 या एफसी 5 किस्म के आलू उगाने का मुकदमा दायर किया था, जिसके लिए उन्होंने प्लांट वेरायटी प्रोटेक्शन (PVP) अधिकारों का दावा किया है। कंपनी ने आलू की विविधता और किसान अधिकार (पीपीवीएफआर) अधिनियम, 2001 के तहत आलू की किस्म पर पीवीपी अधिकार प्राप्त किया है और किसान बीज विविधता पर अपने अधिकारों का उल्लंघन कर रहे हैं।

भारत में पेटीएम का ई-कॉमर्स सपना चकनाचूर

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महज दो साल पहले ही पेटीएम के संस्थापक व सीईओ विजय शेखर शर्मा ने भारत में पैर पसार रहे ई-कॉमर्स के क्षेत्र में अपनी पारी की शुरुआत की थी।

वह चीन की ई-कॉमर्स कंपनी अलीबाबा के मॉडल से प्रेरित थे, हालांकि इस क्षेत्र में अमेजन और फ्लिपकार्ट (अब वालमार्ट के स्वामित्व में) का पहले से ही दबदबा बना हुआ था।

शर्मा के मन में इस बात का थोड़ा मलाल जरूर रहा कि उनको हार्वर्ड विश्वविद्यालय में पढ़ाई करने का मौका नहीं मिला। उन्होंने ई-कॉमर्स कारोबार को पेटीएम मॉल के नाम से एक अलग अस्तित्व प्रदान किया।

वह इस बात से आश्वस्त थे कि स्मार्टफोन का इस्तेमाल करने वालों की बढ़ती आबादी का उनको फायदा मिलेगा। नई कंपनी की शुरुआत मूल कंपनी पेटीएम-वन97 कम्युनिकेशंस लिमिटेड की ही हिस्सेदारी से हुई और कंपनी ने सैफ पार्टनर्स व जैक मा की कंपनी अलीबाबा ग्रुप होल्डिंग लिमिटेड से 20 करोड़ डॉलर की रकम जुटाई।

पेटीएम मॉल ने अलीबाबा, सॉफ्टबैंक और सैफ पार्टनर्स से 65 करोड़ डॉलर की रकम जुटाई।

ऑनलाइन-टू-ऑफलाइन बाजार की पुरोधा कंपनी अलीबाबा को जल्द ही मालूम हो गया कि ग्राहकों को लुभाने के लिए कैशबैक एक अल्पकालीन रणनीति है और इससे शर्मा को पेटीएम मॉल को भारत के उभरते ई-कॉमर्स बाजार में तीसरी बड़ी ताकत बनने में मदद नहीं मिलने वाली है। भारत का ई-कॉमर्स बाजार जो 2017 में 24 अरब डॉलर का था वह 2021 में 84 अरब डॉलर का बनने वाला है।

वित्त वर्ष 2018 में पेटीएम मॉल का घाटा बढ़ गया और कंपनी को करीब 1,800 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ।

फोरेस्टर रिसर्च के अनुसार, पेटीएम की बाजार हिस्सेदारी 2018 में पिछले साल से घटकर करीब आधी रह गई। मतलब 2017 में जहां कंपनी की बाजार हिस्सेदारी 5.6 फीसदी थी वह 2018 में घटकर तीन फीसदी रह गई।

हालांकि शर्मा फिर भी आशावादी हैं और भारी स्पर्धा के बावजूद पेटीएम मॉल चलाना चाहते हैं जबकि विश्लेषक इसे आखिरी दौर में देख रहे हैं और उनका मानना है कि शर्मा को अब डिजिटल भुगतान बाजार पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए जिस पर अलीबाबा का हमेशा जोर रहा है।

इस संबंध में पेटीएम से संपर्क करने की कई बार कोशिश की गई। ईमेल और फोन के अलावा वन97 कम्युनिकेशंस लिमिटेड के नोएडा सेक्टर-5 स्थित दफ्तर का व्यक्तिगत तौर पर दौरा करने के बाद भी कंपनी की ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं मिल पाई।

साइबर मीडिया रिसर्च के प्रमुख व सीनियर वाइस प्रेसिडेंट थॉमस जॉर्ज के अनुसार, पेटीएम के सामने इस समय कई चुनौतियां हैं।

जॉर्ज ने आईएएनएस से बातचीत में कहा, ‘बाजार हिस्सेदारी के मामले में ई-कॉमर्स क्षेत्र की दो बड़ी कंपनियों के मुकाबले पेटीएम काफी पीछे है। इस क्षेत्र की शीर्ष कंपनियों की हिस्सेदारी जहां 30 फीसदी से ऊपर है वहां पेटीएम की हिस्सेदारी एकल अंक में है। साथ ही, बाजार की अग्रणी कंपनियों के सेवा मानक भी काफी प्रशंसनीय हैं।’

वहीं, पेटीएम वस्तुओं का स्टॉक करने व डिलीवरी करने में निवेश नहीं कर रही है।

जॉर्ज ने कहा, ‘पेटीएम मॉल का मुख्य काम पेमेंट वालेट कस्टमर बेस है, जिसमें अपेक्षित बढ़ोतरी नहीं हो रही है।’

पेटीएम पेमेंट बैंक का नजरिया भी जांच के घेरे में है।

बच्चों के ‘ऐंटी मोदी’ नारे, प्रियंका गांधी को नोटिस

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हाल ही में एक वीडियोवायरल हुए था, जिसमें देखा गया था कि कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी के सामने छोटे-छोटे बच्चे नारेबाजी कर रहे थे और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बारे में आपत्तिजनक शब्द कह रहे थे।

अब इसी मामले में राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने प्रियंका गांधी को नोटिस भेजा है। बता दें कि इस विडियो में बच्चे ‘चौकीदार चोर है’ का नारा भी लगा रहे थे।

इस मामले में राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने चुनाव आयोग को सूचित किया और इस मामले में बच्चों के अधिकारों का उल्लंघन हुआ है या नहीं इसकी जांच के लिए बच्चों की जानकारी मांगी गई है।

बुर्के के साथ घूंघट पर भी लगे बैनः जावेद अख्तर

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मशहूर गीतकार जावेद अख्तर ने गुरुवार को कहा कि देश में बुर्का पहनने पर प्रतिबंध लगाने पर उन्‍हें कोई आपत्ति नहीं है, लेकिन केंद्र सरकार राजस्थान में 6 मई को होने वाले लोकसभा सीटों के लिए मतदान से पहले घूंघट प्रथा पर भी प्रतिबंध लगाए। हालांकि शुक्रवार को उन्‍होंने अपने बयान पर सफाई दी और कहा कि कुछ लोग उनके बयान को तोड़-मरोड़कर पेश कर रहे हैं।

नक्सली हमले को लेकर यूपी में हाई अलर्ट, इंडो-नेपाल बॉर्डर पर विशेष नजर

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महाराष्ट्र (Maharashtra) के गढ़चिरोली (Gadchiroli) में बुधवार को आईईडी ब्लास्ट में 15 जवान शहीद हो गए थे। इस घटना को देखते हुए सुरक्षा की दृष्टि से उत्तर प्रदेश में भी हाई अलर्ट जारी कर दिया है। इसके तहत यूपी के नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में पुलिस अलर्ट पर है। आईबी के इनपुट के आधार पर मिर्जापुर, सोनभद्र और भारत-नेपाल बॉर्डर पर विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश दिए गये हैं।

लोकसभा चुनाव चल रहे हैं, ऐसे में महाराष्ट्र में बीते दिन हुए नक्सली हमले के बाद सुरक्षा एजेंसियां सतर्क हो गयी है और यूपी में हाई अलर्ट जारी कर दिया गया है। बता दें कि 19 मई को तीनों जिलों में आखिरी चरण का मतदान भी होना है। इसी कड़ी में उत्तर प्रदेश में ख़ास कर नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में भी सुरक्षा एजेंसियां एलर्ट पर हैं और प्रदेश के कुछ ख़ास क्षेत्रों व जिलों में ख़ास निगरानी कर रही हैं।

इसमें वाराणसी जोन के अंतर्गत आने वाले सोनभद्र, मिर्जापुर, लखीमपुर खीरी, भारत नेपाल बॉर्डर पर विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश दिए गये हैं। चूंकि इन तीनों जिलों में 19 मई को लोकसभा चुनाव के आखिरी चरण का मतदान भी होना है, इसलिए यहां केंद्रीय बलों व पुलिस की सक्रियता बढ़ाने को कहा गया है। वहीं पुलिस विभाग के डीजी लॉ एंड ऑर्डर आंनद कुमार और आईजी लॉ एंड ऑर्डर प्रवीण कुमार खुद सुरक्षा व्यवस्था को लेकर निगरानी कर रहे हैं।

बुधवार का हमला गढ़चिरोली में 2009 के बाद से सबसे बड़ा नक्सली हमला है। 2009 में अलग-अलग नक्सली हमले में 51 सुरक्षाकर्मी शहीद हुए थे। उस साल ग्यारापत्ती के नजदीक हमले में 15, लहेरी में 19 और हेट्टिगोटा में 16 सुरक्षाकर्मी शहीद हुए थे।

जम्‍मू कश्‍मीर: शोपियां में हिजबुल का टॉप कमांडर ढेर, एनकाउंटर जारी

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शोपियां। जम्‍मू कश्‍मीर के शोपियां में इस समय आतंकियों और सुरक्षाबलों के बीच मुठभेड़ जारी है। दक्षिण कश्‍मीर के तहत आने वाले शोपियां के अदखेरा इलाके में स्थित इमाम साहिब में आतंकियों के साथ एनकाउंटर में हिजबुल मुजाहिद्दीन के टॉप कमांडर तारिक मौलवी के ढेर होने की खबरें हैं। शुक्रवार सुबह शुरू हुए इस एनकाउंटर में अभी दो से तीन आतंकियों के फंसे होने की जानकारी है। दोनों तरफ से लगातार फायरिंग जारी है और सेना इसका तगड़ा जवाब दे रही है। साल 2016 में जब हिजबुल कमांडर बुरहान वानी को मारा गया था, उस समय से ही शोपियां में हिंसा का दौर जारी है।

छह मई को होनी है वोटिंग

शोपियां और पड़ोस के पुलवामा में छह मई को वोटिंग होनी है।शोपियां, अनंतनाग लोकसभा सीट के तहत आता हैं। यहां पर अगले एक माह तक के लिए धारा 144 लागू कर दी गई है। नए आदेशों में अब बिना डीएम या फिर ड्यूटी मजिस्‍ट्रेट के आदेश के बिना कोई भी सभा नहीं हो सकेगी। प्रशासन का कहना है कि तीन मई से यह नियम लागू हो गए हैं और सुरक्षा व्‍यवस्‍था की वजह से एक माह तक जारी रहेंगे। आदेश में कहा गया है, ‘सेना, पुलिस या फिर पब्लिक सर्वेंट जो ड्यूटी पर होंगे, उनके अलावा किसी को भी हथियार लेकर चलने या फिर रखने की मंजूरी नहीं होगी।’ वहीं भाषणों के लिए लाउडस्‍पीकर के प्रयोग को भी प्रतिबंधित कर दिया गया है।

लाउडस्‍पीकर के लिए अब किसी को डीएम की मंजूरी लेनी होगी। पिछले हफ्ते अनंतनाग में सुरक्षाबलों ने हिजबुल के दो आतंकियों को ढेर किया था। इन आतंकियों की पहचान 25 वर्षीय सफदर अमीन भट और बुरहान अहमद गनी के तौर पर हुई थी। भट सिर्फ नौंवी कक्षा तक पढ़ा था और मई 2017 में हिजबुल का हिस्‍सा बना था। गनी को सैफुल्‍ला के नाम से भी जानते थे, वह फिजियोथैरिपी में ग्रेजुएशन की पढ़ाई कर रहा था। जून 2018 से वह संगठन का हिस्‍सा था।

चोरों की जेब से छीनकर करोड़ों गरीबों को ‘न्याय’ देंगे: राहुल गांधी

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कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने गुरूवार को एक बार फिर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पर पूंजीपतियों के हित में काम करनेका आरोप लगाते हुए कहा कि मालिक जनता है, मोदी नहीं।

उन्होंने ऐलान किया कि केन्द्र में यदि कांग्रेस की सरकार बनी तो ‘चोरों’ की जेब से छीनकर पांच करोड़ गरीब परिवारों को वह ‘न्याय’ योजना के तहत 72 हजार रुपए प्रति वर्ष देगी।

राहुल गांधी ने आज खूंटी से कांग्रेस उम्मीदवार कालीचरण मुंडा केपक्ष में रैली को संबोधित करते हुए यह बात कही।

कांग्रेस अध्यक्ष ने आरोप लगाया, ”मोदी सरकार ने अपने पांच वर्ष के कार्यकाल में 15 पूंजीपतियों की जेब में 5 लाख 55 हजार करोड़ रुपए डाल दिए,लेकिन केन्द्र में उनकी सरकार बनी तो ऐसा नहीं होने दिया जाएगा। उल्टेइन चोरों की जेब से सरकार का दिया गया पैसा छीनकर पांच करोड़ गरीबपरिवारों के पच्चीस करोड़ लोगों में पांच वर्ष में कुल 3 लाख 60 हजारकरोड़ रुपए सीधे खाते में दिए जाएंगे।”

ओडिशा: पुरी जिले के तटों पर टकराया ‘फानी’, चल रहीं तेज हवाएं

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चक्रवातीय तूफान ‘फानी’ पुरी (ओडिशा) के तटों पर टकरा चुका है. मौसम विभाग ने बताया है कि यह तूफान ओडिशा के बाद पश्चिम बंगाल की तरफ बढ़ेगा.

फानी के खतरे को ध्यान में रखते हुए ओडिशा में करीब 10 लाख लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचा दिया गया है. बीती आधी रात से ही भुवनेश्वर से सभी उड़ानें रद्द कर दी गई हैं. वहीं रेलवे ने 200 से ज्यादा ट्रेन रद्द कर दी हैं. इसके अलावा कोलकाता एयरपोर्ट भी शुक्रवार सुबह 9:30 बजे से शनिवार शाम 6 बजे तक बंद रहेगा.

‘फानी’ के प्रभावों से निपटने की तैयारी

चक्रवाती तूफान ‘फानी’ को ध्यान में रखते हुए इंडियन कोस्ट गार्ड ने आपदा राहत की 34 टीमें तैनात कीं.

इस स्मार्टफोन में 12 जीबी रैम दी गई है, जानिये इसका नाम

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स्मार्टफोन बनाने वाली कंपनी नूबिया के बारे अधिकत्तर लोग नही जानते है क्योंकि अभी इस कंपनी का भारत में ज्यादा वर्चस नही है पर इतना जरूर बता दे कि यह कंपनी दमदार स्मार्टफोन उतारती हैं। इस कंपनी के फोन्स की खास विशेषताएं होती है कि इसके फोन की रैम दमदार दि जाती हैं। आपको जानकारी के लिए बता दे कि नूबिया चाइना की बहुत लोकप्रिय स्मार्टफोन बनाने वाली कंपनी हैं।

आज हम जिस स्मार्टफोन की बात कर रहे है उसका नाम Nubia Red Magic 3 हैं। यह फोन खास तौर पर गेमिंग के दीवानों के लिए बनाया गया हैं। इसमें 5000 एमएएच की बैटरी दी गई हैं। फोन को गति देने के लिए इसमें स्नैपड्रैगन 855 प्रोसेसर हैं। कंपनी ने इस फोन के कई वेरिएंट पेश किए है।

कहा जाता है कि इस स्मार्टफोन को दस मिनट के चार्ज करने पर एक घंटे का गेमिंग प्ले मिल सकता हैं। इस फोन में कुलिंग टेक्नोलॉजी भी दी गई है। चीन में इस फोन की शुरूआती कीमत लगभग 30,000 रूपये के आस पास हैं। भारत में इसको अभी तक नही उतारा गया हैं।

इस फोन के फ्रंट में सेल्फी लेने के लिए एक 16 मेगापिक्सल का कैमरा दिया गया है वही इस फोन में फोटो ग्राफी के लिए रियर में एक 48 मेगापिक्सल का कैमरा दिया गया हैं। इस फोन का स्टोरेज के आधार पर तीन वेरिएंट में पेश किया गया है जो कि 6 जीबी, 8 जीबी व 12 जीबी रैम दि गई हैं। फोन में फिंगर प्रिंट सेंसर भी दिया गया हैं। इसमें 6.65 इंच की फुल एचडी प्लस एमोलेड डिस्प्ले दी गई हैं।

छत्तीसगढ़ : दम तोड़ रही है शासन की जन औषधि केन्द्र योजना

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सभी स्वास्थ्य केन्द्रों में आम जनता को सस्ती दवा उपलब्ध कराने के लिए जिला अस्पताल सहित सभी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में जन औषधि केंद्र खोले गए हैं। किन्तु आज भी इसका लाभ जिलेवासियों को नहीं मिल पा रहा है, क्योंकि इन केंद्रों में हमेशा दवाइयों की कमी बनी रहती हैं। वहीं इन केंद्रों को चलाने वाले संचालकों का कहना है कि डिपो में ही स्टॉक कम है, जिस कारण जितनी दवाइयों की मांग की जाती हैं उस हिसाब से दवाइयां उपलब्ध नहीं हो पा रहा है। वहीं जिला अस्पताल बैकुण्ठपुर में लगभग 1 महीने में काफी दिनों तक जन औषधि केंद्र बंद रहता है, कभी कभार ही जन औषधि केन्द्र को खोला जाता है किन्तु अभी भी दवाइयों का जो स्टॉक होना चाहिए वह नहीं है। यही हाल सामुदायिक स्वास्थ केंद्र मनेन्द्रगढ़, पटना, जनकपुर और खड़गवां में संचालित जन औषधि केंद्रों का भी है। चूंकि प्रधानमंत्री जन औषधि केन्द्र योजनाओं के तहत सरकार द्वारा महंगें दामों वाले जेनेरिक दवाओं को घटे दाम पर आमजनों तक मुहैया कराना है। लेकिन हकीकत कुछ और ही बयान कर रही है। इन सभी जगहों में खुले जन औषधि केन्द्रों के लाभ से आमजन अब भी वंचित है।

सरकार दावा तो बहुत करती है लेकिन सरकारी नुमाइंदों के चलते आमजनों को कई शासकीय योजनाओं का लाभ नहीं मिल पाता। वहीं कई सामुदायिक स्वास्थ केन्द्र में संचालित जन औषधि केन्द्र 24 घन्टे खुले नहीं रहते, रात में मरीजों को दवाई के लिए न जाने कहां-कहां भटकना पड़ता है। जिससे जिला अस्पताल में ही खुले जन औषधि केंद्र में अव्यवस्था हावी है। वही अधिकारी किसी भी अव्यवस्था से इंकार कर रहे जब कि जिला अस्पताल में उपलब्ध जन ओषधि केंद्र में दवाइयों के न होने व लगातार बंद रहने से दूर दराज से आये गरीब मरीजों को विवश होकर निजी मेडिकल स्टोर में उपलब्ध महंगी दवाइयों को खरीदना पड़ता है, जिससे शासन द्वारा जिला अस्पताल में उपलब्ध जन औषधि केंद्र जिस उद्देश्य से खोला गया था अब दम तोड़ती नजर आ रही हैं।

शासन द्वारा शासकीय अस्पताल में उपलब्ध डाक्टरों को जेनरिक दवा लिखने के निर्देश पूर्व में दिए गए थे, किंतु जन औषधि केंद्र में दवा उपलब्ध न होने के कारण डॉक्टरों द्वारा विवश होकर बाहर से दवा लिखना पढ़ता है, जिससे मरीजों के जेब में अतिरिक्त बोझ पड़ता है। इस मामले में मुख्य चिकित्सा व स्वास्थ्य अधिकारी कोरिया आर शर्मा का कहना है कि शासन से मिले दिशा-निर्देश के अनुसार जिला अस्पताल सहित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में जन औषधि केंद्र का संचालन किया जा रहा है। जहां डाक्टरों को भी जेनरिक दवा लिखने के सख्त निर्देश दिया गया हैं। वहीं दुकान संचालकों को सभी दवा रखने को कहा गया हैं, यदि किसी केंद्र में दवा नहीं है तो जानकारी लेकर सभी केंद्रों में दवाइयां उपलब्ध कराया जाएगा, ताकि कम दर में सभी को अच्छी दवा उपलब्ध हो सके।