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मिलेंगे ये फाएदे, गर्मी में लगाएं खीरा से बना फेस पैक

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गर्मी के मौसम में लोगों का फेस सबसे अधिक प्रभावित होता है. सूरज की हानिकारक किरणों की वजह से स्कीन पर कई प्रकार की समस्याएं होने लगती है जैसे- जलन, खुजली. लोग इन समस्याओं से बचने के लिए कई प्रकार की स्किन केयर प्रोडक्ट्स का प्रयोग करते हैं. लेकिन इन प्रोडक्ट्स में कई हानिकारक केमिकल होते हैं जिनके कारण फेस से जुड़ी समस्याएं कम होने के बजाय व अधिक बढ़ जाती है. ऐसे में आप घर पर उपस्थित चीजों से फेस पैक बना सकते हैं. इन चीजों में कई प्राकृतिक गुण होते हैं जो फेस को महत्वपूर्ण पोषण प्रदान करते हैं, साथ ही सूरज की हानिकारक किरणों से भी बचाते हैं.

खीरा से बना फेस पैक: 
खीरे की स्लाइस लें व उसपर चीनी मिला लें . अब 10-15 मिनट के लिए उसे फ्रिज में ठंडा होने के लिए छोड़ दें . इसके बाद उन स्लाइस को सारे फेस पर रख दें व 20 मिनट के लिए छोड़ दें . फिर ठंडे पानी से चेहरे को धोकर मॉइश्चराइजर लगा लें .

दही व एलोवेरा फेस पैक: 
4 चम्मच एलोवेरा कारागार में 1 चम्मच दही अच्छी तरह मिलाएं व फिर सारे चेहरे पर लगाकर कम से कम 15 मिनट तक छोड़ दें . फिर हल्के गुनगुने पानी से धो लें . चेहरे को अच्छी तरह पोछ लें व मॉइश्चराइजर लगा लें .

टमाटर व शहद फेस पैक: 
टमाटर के रस में 1 चम्मच शहद मिलाएं व फिर उसे चेहरे पर अच्छी तरह लगाकर 20 मिनट के लिए छोड़ दें . फिर धो लें . बेहतर परिणाम के लिए इसका प्रयोग हफ्ते में 2-3 बार जरूर करें .

बेसन, दूध व शहद फेस पैक: 
4 चम्मच बेसन में 1 चम्मच दूध, शहद व पानी मिलाएं . अब इन सब को अच्छी तरह मिलाएं . फिर चेहरे पर लगाकर सूखने के लिए छोड़ दें . सूखने के बाद पानी से धो लें . बेहतर परिणाम के लिए हफ्ते में 3-4 बार इसका प्रयोग करें .

खाना-खजाना : घर पर आसानी से बनाएं राजस्थान की राजकचौड़ी

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कभी-कभी कुछ चटपटा खाने का मन करता है, तो समझ में नहीं आता क्या खाएं. इस उलझन को दूर करने के लिए आज हम लेकर आए हैं राजस्थानी राजकचौड़ी की रेसिपी. यह खाने में मजेदार होती है व इसे बनाना भी खास कठिन नहीं है.

सामग्री

300 ग्राम मोठ अंकुरित

4 उबले हुए आलू

250 ग्राम मैदा

100 ग्राम बेसन

तलने के लिए तेल

स्वादानुसार नमक

1/2 टी स्पून देगी मिर्च

1 टी स्पून गरम मसाला पाउडर

500 ग्राम दही

1/2 कप इमली की चटनी

1/2 कप हरी चटनी

सजाने के लिए

1 कप अनार के दाने

1 कप बीकानेरी भुजिया

2 चम्मच बारीक कटा

हरा धनिया

विधि

सबसे पहले मैदा को पानी से अच्छी तरह से गूंथ लें . इसके बाद बेसन में थोड़ा-सा तेल, देगी मिर्च व नमक डालकर गूंथ लें . अब मैदे की छोटी-छोटी लोइयां बनाएं व उसमें बेसन की छोटी गोली भर कर पूरी के आकार में बेलें . एक कड़ाही में ऑयल गर्म करें व पूरियों को करारा तल लें . मोठ को उबाल कर उसमें नमक, मिर्च, गरम मसाला, उबले हुए आलू मिलाएं व कचौड़ी में भरें, दही में नमक मिलाएं व तैयार राजकचौड़ी के बीच में डालें . ऊपर से मीठी व हरी चटनी डालें . बीकानेरी भुजिया व अनार के दानों से सजाकर परोसें .

गहलोत बोले, मोदी फिर से प्रधानमंत्री नहीं बनेंगे क्योंकि देश में उनके खिलाफ चल रहा है अंडर करंट

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 राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कहा कि नरेन्द्र मोदी फिर से प्रधानमंत्री नहीं बनेंगे क्योंकि देश में उनके खिलाफ अंडर करंट (लोगों के मन में पल रही नाराजगी) चल रहा है। उन्होंने कहा कि मोदी का यह जुमला कि कांग्रेस ने सत्तर साल में क्या किया, उनको डूबो देगा। गहलोत ने बुधवार को मीडिया से बातचीत में कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के खिलाफ अंडर करंट चल रहा है और वह अगले प्रधानमंत्री नहीं बनने वाले हैं।

उन्होंने कहा कि हालांकि मोदी और बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह माहौल बनाने में कोई कसर नहीं छोड रहे है,लेकिन जनता अब समझ गई है। कांग्रेस ने सत्तर साल में क्या किया वाला जुमला उनको डूबो देगा। उन्होने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पर उनके खिलाफ आपत्तिजनक भाषा का प्रयोग करने का आरोप लगया।

उन्होंने कहा कि मुझे इस बात पर आपत्ति है कि जोधपुर में मोदी ने राजस्थान के मुख्यमंत्री पर हमला करते हुए कहा कि मै (गहलोत) पाकिस्तान की भाषा बोल रहा हूं। लोकतंत्र में मोदी को मुख्यमंत्री के खिलाफ इस तरह के आरोप लगाने का कोई अधिकार नहीं है।

गहलोत ने कहा कि मुझे ऐतराज है कि जोधपुर के अंदर आकर के जिस रूप में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने राजस्थान के मुख्यमंत्री पर हमला किया और कहा कि मैं पाकिस्तान की भाषा मैं बोल रहा हूं।.. प्रधानमंत्री को कोई अधिकार नहीं होता है कि आप किसी भी मुख्यमंत्री के बारे में इतनी गंभीर बात कर दो। उन्होंने कहा कि देश की सारी संवेंधानिक संस्थाए बर्बाद हो रही है कोई बोल नहीं पा रही है। लोकतंत्र और संविधान खतरे में है। गहलोत ने कहा कि देश की सारी संवैधानिक संस्थाएं बर्बाद हो गई हैं।

कोई बोल नहीं रहा है। नोटबंदी के बाद रिजर्व बैंक संसद में दो साल तक हिसाब नहीं दे पाई। उन्होंने सवाल किया, कहां जा रहे हैं हम लोग? सीबीआई, आयकर विभाग, ईडी सबका जमककर दुरुपयोग हो रहा है। देश के अंदर हर एक संस्था बर्बाद हो रही है। उन्होंने कहा कि सीबीआई पर पुलिस छापा मार रही है। यह पहली बार हुआ है कि सीबीआई निदेशक के कार्यालय में पुलिस छापा मार रही है। सीबीआई, ईडी, इनकम टैक्स सभी संस्थाओं का दुरूपयोग हो रहा है।

उन्होंने कहा कि अभी मुझे किसी ने एक अच्छा संदेश भेजा है जिसमें कहा गया है कि मच्छर को कपड़े पहनाना, हाथी को गोद में झुलाना और मोदी जी से सच बुलवाना असंभव है। मुख्यमंत्री ने कहा कि आरएसएस और भाजपा का लोकतंत्र में यकीन है ही नहीं। ये लोग लोकतंत्र का मुखौटा पहन कर राजनीति करना चाहते हैं। ये फासिस्ट लोग हैं। राष्ट्रभक्ति की आड़ लेकर व्यक्ति तानाशाह बनता है। उन्होंने कहा कि यह देश तानाशाही की ओर बढ रहा है। अमित शाह और मोदी देश में केवल दो ही चहरे हैं। बाकी भाजपा के छुटभैय्ये है।

प्रियंका गांधी ने बताई वाराणसी से चुनाव न लड़ने के फैसले की वजह

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कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी ने कहा है कि उनकी पार्टी ने उत्तर प्रदेश की कुछ लोकसभा सीटों पर बीजेपी के वोट काटने के लिए उम्मीदवार खड़े किए हैं. उन्होंने कहा, ”मेरी रणनीति काफी साफ है. कांग्रेस उन सीटों पर जीतेगी, जहां हमारे उम्मीदवार मजबूत हैं. जहां भी हमारे उम्मीदवार थोड़े कमजोर हैं, वे बीजेपी का वोट शेयर काटेंगे.”

दरअसल, प्रियंका से पूछा गया था कि क्या यूपी में कांग्रेस के जीतने की संभावनाएं कम हैं.

‘यूपी में बीजेपी को लगेगा बड़ा झटका’

कांग्रेस महासचिव ने कहा कि बीजेपी को यूपी में बड़ा झटका लगने जा रहा है. प्रियंका गांधी ने रायबरेली में मीडिया से बातचीत में कहा,

‘बीजेपी को उत्तर प्रदेश में बड़ा झटका लगेगा. वे बुरी तरह हारेंगे.

गठबंधन के वोट नहीं काट रहे हैं कांग्रेस उम्मीदवार

प्रियंका गांधी से जब पूछा गया कि पूर्वी यूपी में एसपी-बीएसपी मजबूत है, लेकिन कांग्रेस कुछ सीटों पर गठबंधन का वोट काट रही हैं. इस पर प्रियंका ने कहा-

आप तीन सीटें दिखा दीजिए, जहां मेरा उम्मीदवार गठबंधन के वोट काट रहा हो. उन्नाव, बाराबंकी, कानपुर कई सीटे हैं, वहां मेरे उम्मीवदार मजबूत हैं, वो जीतेंगे. एक ऐसा उम्मीदवार दिखा दीजिए जो बीजेपी का वोट नहीं काट रहा हो. मैंने यूपी के नेताओं के साथ मिलकर ऐसे उम्मीदवार दिए हैं, जिससे बीजेपी का वोट कटेगा. या मेरा उम्मीदवार जीतेगा.

वाराणसी से चुनाव न लड़ने के फैसले के पीछे बताई वजह

प्रियंका गांधी ने वाराणसी सीट से पीएम मोदी के खिलाफ चुनाव न लड़ने के पीछे की वजह भी बताई है. प्रियंका ने कहा-

अगर मैं वाराणसी से चुनाव लड़ती तो सिर्फ वाराणसी तक ही सीमित रह जाती, जबकि मेरा काम पार्टी को पूरे पूर्वी उत्तर प्रदेश में मजबूत करने का है.

बता दें, कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी पर पूर्वी उत्तर प्रदेश की जिम्मेदारी है. पूर्वी उत्तर प्रदेश में वह पार्टी प्रत्याशियों के लिए जोर-शोर से प्रचार कर रही हैं.

सपा-बसपा गठबंधन के उम्मीदवार का नामांकन खारिज, तेज बहादुर ने भाजपा और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पर सीधा निशाना साधा

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वाराणसी। लोकसभा चुनाव में वाराणसी संसदीय सीट से सपा-बसपा गठबंधन के उम्मीदवार और बीएसएफ के बर्खास्त जवान तेज बहादुर यादव का नामांकन बुधवार को खारिज हो गया। पहले खुद तेज बहादुर ने और बाद में जिला निर्वाचन अधिकारी ने इसकी पुष्टि की। नामांकन खारिज होने पर तेज बहादुर ने कहा कि वह अपने अधिवक्ता के साथ न्यायालय जायेंगे।

तेज बहादुर का नामांकन रद्द होने की अधिकृत घोषणा न होने से शाम तक इस पर संशय बना रहा। पूरे दिन सोशल मीडिया में इसको लेकर सरगर्मी बढ़ी रही। तेज बहादुर का नामांकन रद्द होने के बाद शालिनी यादव सपा-बसपा गठबंधन की ओर से चुनावी मैदान में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को टक्कर देंगी। पहले निर्दल और बाद में सपा-बसपा गठबंधन के उम्मीदवार के रूप में तेज बहादुर ने सोमवार को जिला निर्वाचन कार्यालय में अपने प्रस्तावकों और पार्टी नेताओं के साथ नामांकन दाखिल किया था। नामांकन पत्र में त्रुटि होने पर तेज बहादुर यादव को चुनाव आयोग ने नोटिस देकर बुधवार को दिन में 11 बजे तक जवाब मांगा था।

नोटिस का जवाब देने के लिए आज पूर्वांह में तेज बहादुर अपने अधिवक्ता और समाजवादी नेताओं के साथ जिला निर्वाचन कार्यालय पहुंचे। अन्दर तेज बहादुर और उनके अधिवक्ता ने अपनी बात रखी। काफी देर तक अधिकृत घोषणा न होने से इस मामले में संशय बना रहा। बाद में तेजबहादुर यादव ने खुद वाराणसी से अपना नामांकन रद्द होने की सूचना मीडिया को दी।

उधर, इस मामले में जिला निर्वाचन अधिकारी की ओर से जारी नोटिस में तेज बहादुर से जवाब दाखिल करने के लिए दिनांक 01-05-2109 लिखी गई जबकि वर्ष 2019 होना चाहिए था। इस त्रुटि को लेकर सोशल मीडिया में खबर चलती देख जिला निर्वाचन अधिकारी ने आनन-फानन में नोटिस का गलती सुधारी और बाद में तेज बहादुर का नामांकन रद्द होने की अधिकृत रूप से पुष्टि की।

नामांकन खारिज होने पर तेज बहादुर ने भाजपा और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पर सीधा निशाना साधा। पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने कहा कि बीएसएफ की तरफ से चुनाव आयोग को उनकी बर्खास्तगी के सम्बन्ध में पत्र दिया जा चुका है। पत्र में बर्खास्तगी का कारण अनुशासनहीनता बताया गया है। तेज बहादुर ने आरोप लगाया कि पीएमओ के इशारे पर नामांकन पत्र में त्रुटि की जानकारी देर से दी गई। तेज बहादुर के समर्थकों ने डीएम पोर्टिको के बाहर जमकर हंगामा किया। उनके हंगामा प्रदर्शन को देख पुलिस ने उन्हें कलेक्ट्रेट परिसर से बाहर कर दिया। इसको लेकर जिला मुख्यालय पर पूरे दिन गहमागहमी बनी रही।

वाराणसी से मोदी के खिलाफ तेज बहादुर की उम्मीदवारी रद्द

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ वाराणसी सीट से सपा प्रत्याशी के तौर पर नामांकन करने वाले बीएसएफ के बर्खास्त सिपाही तेज बहादुर यादव के लोकसभा चुनाव लड़ने के सपने पर पानी फिर गया है।

निर्वाचन अधिकारी द्वारा जारी किए गए दो नोटिसों का जवाब देने बुधवार दोपहर 11 बजे तेज बहादुर यादव अपने वकील के साथ आरओ से मिलने पहुंचे।

जिसके बाद निर्वाचन अधिकारी तेज बहादुर के नामांकन पत्र को खारिज कर दिया। अब शालिनी यादव सपा की तरफ से चुनावी मैदान में मोदी को टक्कर देंगी।

नामांकन पत्र के नोटिस के जवाब देने के दौरान तेज बहादुर के समर्थकों और पुलिस के बीच जमकर नोकझोंक हुई, जिसके बाद पुलिस ने समर्थकों को कचहरी परिसर से बाहर कर दिया।

पीएम मोदी को क्लीन चिट देने पर भड़की कांग्रेस

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 प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को चुनाव आयोग से क्लीन चिट मिलने पर कांग्रेस ने नाराजगी जताई है. कांग्रेस ने कहा कि मॉडल कोड ऑफ कंडक्ट अब मोदी कोड ऑफ कंडक्ट बन गया है. बता दें कि मंगलवार को आयोग ने कहा था कि पीएम ने रैली में भाषण देते हुए आचार संहिता का कोई उल्लंघन नहीं किया था.
आज कांग्रेस के प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने ट्वीट करते हुए चुनाव आयोग पर हमला किया. उन्होंने लिखा, हमलोग काफी दुखी हैं कि आर्टिकल 324 और मॉडल कोड ऑफ कंडक्ट का उल्लंघन करने के बावजूद पीएम को चुनाव आयोग ने छोड़ दिया. मोदी जी और दूसरों के लिए अलग-अलग कानून नहीं हो सकता. अब ये साफ हो गया है कि मॉडल कोड ऑफ कंडक्ट मोदी कोड ऑफ कंडक्ट बन गया है. बता दें कि पीएम मोदी पर महाराष्ट्र के वर्धा में चुनावी रैली के दौरान आचार संहिता उल्लंघन करने का आरोप लगा था. कांग्रेस ने पीएम मोदी की चुनाव आयोग में शिकायत की थी. उनका आरोप था कि पीएम मोदी ने राहुल गांधी के केरल के वायनाड से चुनाव लडऩे पर अपरोक्ष रूप से सवाल उठाए थे. लेकिन आयोग ने पीएम का भाषण को सुनने के बाद उन्हें क्लीन चिट दे दी.
एक अप्रैल को महाराष्ट्र के वर्धा में चुनावी रैली के दौरान पीएम मोदी ने राहुल गांधी का नाम लिए बिना कहा था कि उन्हें वायनाड से चुनाव लडऩे के लिए मजबूर होना पड़ा क्योंकि उस क्षेत्र में अल्पसंख्यकों का दबदबा है. पीएम मोदी ने कहा था, कांग्रेस ने हिंदुओं को बदनाम किया. लोगों ने उन्हें अब सजा देने का मन बना लिया है. उस पार्टी के नेता अब ऐसे क्षेत्रों से ना चुनाव लडऩे के लिए मजबूर हो रहे हैं जहां हिंदुओं की संख्या ज़्यादा है. और इसलिए वो भाग कर के ऐसी जगह जा रहे हैं जहां देश का बहुसंख्यक अल्पसंख्यक है. वो वहां शरण लेने के लिए मजबूर हो गए हैं.

राहुल गांधी बोले- किसानों की आय दोगुुनी कर लाऊंगा ‘अच्छे दिन’

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 कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी ने सीतापुर के बिसवां कस्बे के मेला मैदान में आयोजित जनसभा में भाजपा पर सीधा हमला बोला।

उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधते हुए कहा कि पांच साल पहले चौकीदार 56 इंच की छाती लेकर आया था। दावा किया था कि भ्रष्टाचार की लड़ाई लड़ूंगा, किसानों की आय दुगनी करूंगा, अच्छे दिन लाऊंगा, लेकिन इन 5 वर्षों में जनता ने सच्चाई देख ली है।

राहुल गांधी ने कहा क‍ि नरेंद्र मोदी ने 30000 करोड़ चोरी कर अनिल अंबानी के खाते में डाले। 15 लोगों का 5 लाख 55 हजार करोड़ कर्जा माफ किया। हिंदुस्तान की जनता से झूठे वादे किए। चुनाव में 15 लाख रुपये खाते में डालने की बात की थी, लेकिन उसमें भी गरीबों के साथ धोखा किया। नोटबंदी और गब्बर सिंह टैक्स लगाकर अर्थव्यवस्था को चौपट कर दिया। बोले, मैं नहीं डरता चौकीदार से।

मैंने सवाल किया कि 525 करोड़ का हेलीकॉप्टर 1600 करोड़ में क्यों खरीदा। मैंने 4 सवाल किए, लेकिन वह आंख में आंख तक नहीं मिला पाए। मुझे नरेंद्र मोदी से भ्रष्टाचार पर 15 मिनट डिबेट करनी है। मेरे 15 मिनट के बाद मोदी चेहरा नहीं दिखा पाएंगे।

इतिहास गवाह है कि चुनाव के अंतिम चरण में मंत्रालय में आग लगने के बाद सरकारें बदल गयी

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मोहम्मद ज़ाहिद
दिल्ली के शास्त्री भवन में आग लग गयी। इतिहास गवाह है कि चुनाव के अंतिम चरण में मंत्रालय में आग लगने के बाद सरकारें बदल गयी हैं।

बताईए भारत जैसे शक्तिशाली देश के एक अतिसंवेदनशील और अतिमहत्वपूर्ण बिल्डिंग अग्निशमन जैसी व्यवस्था से वंचित हो यह सोचना भी बेवकूफी है। अर्थात यह आग जानबूझ कर लगाई जाती है।

दरअसल सरकार जाने के आभास मिलने के बाद मंत्रालयों में आग लगने और उस आग में तमाम काड़ा बाड़ा जल कर राख कर दिए जाने का इतिहास रहा है। और वही इतिहास दोहराया जा रहा है।

नरेन्द्र मोदी के भाषण और ऊलजुलूल बयान बता रहे हैं कि वह हताश हो चुके हैं , विशेषकर पश्चिम बंगाल के 40 विधायकों से संपर्क होने का बयान बेहूदा तक था। सोचिएगा कि विरोधी दल के 40 विधायक यदि टूटने को तैय्यार बैठे हों तो कोई मुर्ख नेतृत्व ही होगा जो इसे 1 महीने पहले सार्वजनिक करेगा।

ऐसे ही तमाम मुद्दे जो मोदी-शाह द्वारा उछाले जा रहे हैं वह रंग ना पकड़ कर फुस्स होते जा रहे हैं , चुनाव के चार चरण के बाद भी सांप्रदायिकता और मुस्लिम विरोध का रंग भी गायब है , पाकिस्तान और उसके ज़रिए फैलाई घृणा भी चुनावी परिदृश्य से गायब है।

मुझे नरेन्द्र मोदी 2004 के अटल बिहारी बाजपेयी लग रहे हैं और अमित शाह आज के लाल कृष्ण आडवाणी। चुनाव हारते ही मोदी और अमित शाह के दुर्दिन शुरु हो जाएँगे और इनकी पार्टी के ही इनसे पीड़ित लोगों का इन पर आक्रमण शुरु हो जाएगा।

अगली सरकार इनके विरुद्ध जाँच और फिर कार्यवाही करे , इससे बचने के लिए ही मंत्रालयों में आग की सूचना 23 मई तक और भी आती रहेगी।

बुर्के पर बवाल: दुनिया के वे देश जहां इसके इस्‍तेमाल पर लगी है पाबंदी

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शिवसेना ने पीएम मोदी से कहा है कि जिस तरह उन्‍होंने सर्जिकल स्‍ट्राइक किया, उसी तरह भारत में मुस्लिम महिलाओं में बुर्के के चलन पर पाबंदी लगाने का साहस दिखाएं. दक्षिणपंथी समूह हिन्दू सेना ने गृह मंत्रालय को पत्र लिखकर मांग की है कि आतंकवादी हमलों को रोकने के लिए श्रीलंका की तर्ज पर सार्वजनिक स्थानों और सरकारी तथा निजी संस्थानों में बुर्का, नकाब आदि पर पूर्ण रोक लगाई जाए.

श्रीलंका में सार्वजनिक स्थानों पर मुस्लिम महिलाएं अब नकाब नहीं पहन पाएंगी क्योंकि देश में ईस्टर के दिन हुए बम धमाकों के मद्देनजर राष्ट्रपति मैत्रीपाला सिरिसेना द्वारा घोषित नए नियम सोमवार से प्रभावी हो गए. राष्ट्रपति ने रविवार को नए नियम की घोषणा की थी जिसके तहत चेहरे को ढंकने वाली किसी भी तरह की पोशाक पहनने पर रोक लगा दी गई है. इससे एक हफ्ते पहले श्रीलंका के तीन गिरजाघरों और तीन आलीशान होटलों में हुए सिलसिलेवार धमाकों में 250 से ज्यादा लोग मारे गए थे और 500 से अधिक लोग घायल हुए थे.

बुर्के के संबंध में श्रीलंका की घोषणा और शिवसेना की मांग के साथ ही इस मुद्दे पर सत्‍ता पक्ष और विपक्ष के बीच सियासी बयानबाजी शुरू हो गई है. इस परिप्रेक्ष्‍य में आइए नजर डालते हैं कि किन देशों में बुर्का पहनने पर पाबंदी लगी हुई है?

जहां लगी है पाबंदी
ऑस्ट्रिया, डेनमार्क, फ्रांस, बेल्जियम, तजाकिस्‍तान, लातविया, बुल्‍गारिया, कैमरून, चाड, कांगो-ब्राजाविले, गेबोन, नीदरलैंड्स, चीन, मोरक्‍को, कनाडा का क्‍यूबेक प्रांत और श्रीलंका में बुर्का के इस्‍तेमाल पर पाबंदी अख्तियार की गई है.

बुर्का
बुर्का को ‘चादरी’ भी कहा जाता है. मध्‍य एशिया में इसको ‘परांजा’ भी कहा जाता है. यह एक इस्‍लामिक परंपरा है जिसके मुताबिक महिलाएं सार्वजनिक रूप से अपने शरीर और चेहरे को कवर करती हैं. कई विद्वानों का मानना है कि इस्‍लाम के उदय के पहले से ही अरब महिलाओं और पख्‍तूनों में ये परंपरा पाई जाती रही है.

ऐसा माना जाता है कि बाइजेंटिन साम्राज्‍य के कुछ खास तबकों में इस प्रथा का सबसे पहले चलन था. उसके बाद अरबों ने जब मध्‍य एशिया को जीता तो ये प्रथा मुस्लिम संस्‍कृति का हिस्‍सा बनी. अनेक इस्‍लामिक विद्वानों का मानना है कि चेहरे को ढकना कोई धार्मिक जरूरत नहीं है लेकिन सलाफी आंदोलन से जुड़े कई विद्वानों का मानना है कि अपरिचित मर्दों की उपस्थिति में महिलाओं को इसे धारण करना चाहिए.

बुर्के से ही मिलता-जुलता शब्‍द ‘हिजाब’ है लेकिन इन दोनों के अर्थ थोड़ा भिन्‍न हैं. हिजाब के तहत बाल और गले को तो ढका जाता है लेकिन चेहरे को नहीं ढका जाता.