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Lok Sabha Elections 2019 से पहले ही ढाई करोड़ रुपये की अवैध शराब पकड़ाई

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भोपाल। लोकसभा चुनाव को पारदर्शिता और निष्पक्षता के साथ कराने के लिए चुनाव आयोग के रडार पर अवैध शराब आ गई है। इस पर अंकुश लगाने के लिए आबकारी, परिवहन और पुलिस का अमला मैदान में उतारा गया है। एक जनवरी से 28 फरवरी 2019 तक ढाई करोड़ रुपए की अवैध शराब पकड़ी जा चुकी है।

13 हजार से ज्यादा मामले दर्ज किए गए हैं तो 83 हजार लीटर अवैध शराब की जब्ती बनाई गई है। मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी वीएल कांताराव ने मैदानी अमले से दो टूक कह दिया है कि किसी भी सूरत में अवैध शराब की बिक्री नहीं होनी चाहिए। इसके लिए सख्ती के साथ कार्रवाई की जाए।

लोकसभा चुनाव की आचार संहिता लागू होने से पहले चुनाव आयोग ने मैदानी तैयारियां शुरू कर दी थीं। इसके मद्देनजर सबसे पहले अवैध शराब और मादक पदार्थों के अवैध कारोबार पर नकेल कसने की शुरुआत की गई। एक जनवरी से 28 फरवरी 2019 तक आबकारी अधिनियम के तहत कार्रवाई करते हुए 83 हजार 69 लीटर अवैध देसी, विदेशी शराब के साथ बीयर जब्त की गई। इसका बाजार मूल्य ढाई करोड़ रुपए होता है।

इसी तरह तीन करोड़ रुपए की 10 लाख 43 हजार 702 किलोग्राम लाहन जब्त की गई। आठ हजार 213 व्यक्तियों के खिलाफ 13 हजार 32 प्रकरण दर्ज हो चुके हैं। अवैध शराब के परिवहन में लगे 88 लाख रुपए कीमत के 120 वाहन भी जब्त किए गए हैं।

कहां कितनी जब्त हुई अवैध शराब

जिला–मात्रा (बल्क लीटर में)

ग्वालियर– 8605

दतिया — 6329

इंदौर– 4985

निवाड़ी– 3535

सतना — 2808

छिंदवाड़ा– 2154

होशंगाबाद– 2128

टीकमगढ़– 2093

बड़वानी — 2103

देवास — 2059

रतलाम– 1819

बुरहानपुर– 1694

खंडवा– 1628

खरगोन– 1628

जबलपुर– 1248

भोपाल– 391

फांसी पर लटकी मिली युवक की लाश इंदौर रेलवे स्टेशन में

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इंदौर। रेलवे स्टेशन के प्लेटफॉर्म नंबर चार के सीएनडब्ल्यू केबिन को जैसे ही कर्मचारियों ने खोला तो उनके होश उड़ गए। केबिन के अंदर एक युवक की लाश फांसी पर लटकी मिली। कर्मचारियों ने घटना की सूचना पुलिस को दी, जिसके बाद जीआरपी भी मौके पर पहुंची। शव को नीचे उताराया गया है, युवक की पहचान करण निवासी पामाखेड़ी, सागर के रूप में हुई है। फिलहाल वह अपनी बहन के पास पीथमपुर में रहता था। उसके पास से मिले सुसाइड नोट में युवक ने बहन से माफी मांगी है। बताया जा रहा है कि उसने चुन्नी पर लटककर फांसी लगाई थी।

नीरव मोदी मामले में मोदी सरकार ने बोला झूठ? ब्रिटेन ने गिरफ्तारी के लिए मांगे थे दस्तावेज, सरकार ने नहीं दिए

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पीएनबी घोटाले के मुख्य आरोपी और भगोड़ा हीरा व्यापारी नीरव मोदी को लेकर एक और खुलासा हुआ है। एनडीटीवी के एक रिपोर्ट के मुताबिक, ब्रिटेन ने नीरव मोदी को गिरफ्तार करने के लिए कागजात मांगे थे, लेकिन मोदी सरकार की ओर से किसी तरह का जवाब नहीं दिया गया। ब्रिटेन की तरफ से यह भी पेशकश की गई थी वह नीरव मोदी के खिलाफ कार्रवाई में मदद करने के लिए अपनी एक टीम भारत भेज सकता है। लेकिन इस पर भारत की ओर से जवाब नहीं मिला। हालांकि इसके उलट मोदी सरकार की ओर से यह कहा गया है कि नीरव के खिलाफ मुकदमा चलाने और उसे प्रत्यर्पित करने के प्रयासों में भारत की ओर से कोई देरी नहीं की गई है।

एनडीटीवी के मुताबिक, लंदन स्थित गंभीर अपराध कार्यालय (एसएफओ) से पता चला है कि फरवरी 2018 में ब्रिटेन ने म्युचुअल लीगल असिस्टेंस ट्रीटी के तहत पहली बार भारत को अलर्ट भेजा था। ऐसा नीरव मोदी और उनके परिवार के सदस्यों के खिलाफ पीएनबी घोटाले में पहली बार आपराधिक मामला दर्ज होने के तुरंत बाद किया गया था। भगोड़े नीरव मोदी को लेकर यह रिपोर्ट ऐसे समय में सामने आई हैं जब हाल ही में लंदन की सड़कों पर आराम से घुमता हुआ दिखाई दिया था।

इस बीच भारत में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने नीरव मोदी के खिलाफ मनी लांड्रिंग रोधी कानून के तहत एक अनुपूरक आरोप पत्र दायर किया है। खबरों की माने तो बीते शुक्रवार को दायर किया गया है।

ब्रिटेन के एक समाचार पत्र ने नीरव मोदी के लंदन के वेस्ट एंड इलाके में 80 लाख पौंड के आलीशान अपार्टमेंट में रहने और नए सिरे से हीरा कारोबार शुरू करने की जानकारी दी है। अखबार की इस रिपोर्ट के दो दिन बाद यह नया घटनाक्रम हुआ है।

‘मसूद अजहर जी’ पर योगी ने राहुल को घेरा

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लखनऊ। कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी पर तंज कसते हुए उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि वह सिर्फ उतना ही बोलते हैं, जितना रटाया जाता है।

योगी आदित्यनाथ ने राहुल को निशाने पर लेते हुए यूपी में समाजवादी पार्टी (एसपी)-बहुजन समाज पार्टी (बीएसपी) के गठबंधन को भ्रष्ट बताया।

बता दें कि केंद्रीय मंत्री स्मृति इरानी ने कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी का एक वीडियोशेयर किया था, जिसमें वह जैश-ए-मोहम्मद (JeM) चीफ को ‘मसूद अजहर जी’ कहते हुए दिखाई दे रहे हैं।

सतना रेप केसः दोषियों को बिना पेरोल काटनी होगी 25 साल की कैद, सुप्रीम कोर्ट ने दिया आदेश

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सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि दोषी को कोई छूट नही मिलेगी और 25 साल से पहले वह जेल से रिहा नहीं हो सकता. सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में मामले को रेयरेस्ट ऑफ द रेयर नहीं माना है.

नई दिल्ली : मध्यप्रदेश के सतन में साल 2015 में हुए पांच साल की बच्ची से बलात्कार और हत्या मामले में आज सुनवाई हुई. सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में दोषी को राहत दी है. सुप्रीम कोर्ट ने मौत की सजा को पलटते हुए 25 साल की सजा सुनाई है. मंगलवार को हुई सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि दोषी को कोई छूट नही मिलेगी और 25 साल से पहले वह जेल से रिहा नहीं हो सकता. सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में मामले को रेयरेस्ट ऑफ द रेयर नहीं माना है.

क्या है पूरा मामला
बता दें कि 2015 में मध्यप्रदेश के सतना जिले में 23 फरवरी, 2015 को बच्‍ची का भाई उसे स्कूल पहुंचाने जा रहा था, तभी रास्ते में गांव के ही मैजिक चालक सचिन सिंगरहा ने उसे रोककर बहन को गाड़ी में बैठाया था और कहा था वह उसे स्कूल छोड़कर आएगा, लेकिन जब देर रात बच्ची नहीं लौटी तो परिजनों ने पुलिस में मामला दर्ज कराया.

पुलिस के अनुसार, पूछताछ के दौरान आरोपी मैजिक चालक ने पहले तो पुलिस को गुमराह करने का प्रयास किया, लेकिन बाद में वह टूट गया और पूरी घटना का खुलासा कर दिया. आरोपी ने पुलिस को बताया था कि उसके वाहन में बच्ची अकेली थी, जिसे देखकर उसकी हवस जाग गई और उसने सुनसान इलाके में ले जाकर पहले बच्ची के साथ रेप किया, और फिर गला घोंटकर उसकी हत्या कर दी, तथा शव को नहर के किनारे एक कुएं में फेंक दिया, जहां से बाद में पुलिस ने शव को बरामद किया.

बिन ब्याही युवती YouTube पर देख खुद का प्रसव करने लगी, दोनों की मौत

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गोरखपुर। गोरखपुर कैंट क्षेत्र में किराये के बंद कमरे में प्रसव के दौरान युवती के मृत पाए जाने की घटना को लेकर पुलिस भी हैरान है। युवती के परिवारीजन रविवार देर रात गोरखपुर पहुंचे। पुलिस ने उनसे युवती के बारे में काफी पूछताछ की लेकिन किसी भी सवाल का उन्होंने जवाब नहीं दिया। कमरे में युवती के शव के पास ही नवजात का भी शव मिला था। पुलिस का कहना है कि युवती की शादी नहीं हुई थी, लेकिन वह गर्भवती थी।

मकान मालिक के मुताबिक चार दिन पहले ही उसने तीसरी मंजिल पर किराये का कमरा लिया था। इस वजह से उसके बारे में किसी को कोई खास जानकारी नहीं है। बस इतना पता है कि मूलरूप से वह बहराइच, उप्र जिले की रहने वाली थी।

रविवार सुबह से ही उसका कमरा अंदर से बंद था। मकान मालिक को उसकी मौत होने की जानकारी दोपहर बाद हुई। बंद दरवाजे के नीचे से बाहर तक पसरा खून देखने के बाद मकान मालिक ने बाहर से कई बार आवाज दी लेकिन अंदर से कोई प्रतिक्रिया नहीं हुई। बाद में उन्होंने इसकी सूचना पुलिस को दी।

कुंडी तोड़कर पुलिस कमरे में पहुंची तो अंदर युवती और नवजात का शव मिला। फर्श पर खून पसरा हुआ था। पुलिस का मानना है कि प्रसव के दौरान अधिक रक्त स्त्राव होने की वजह से और जन्म के बाद उचित उपचार न मिल पाने से नवजात की मौत हुई है। क्षेत्राधिकारी कैंट ने बताया कि युवती की शादी नहीं हुई थी। वह अकेले रह रही थी।

छत्तीसगढ़ : अफवाह निकली SI व शिक्षक की हत्या, नक्सलियों ने किया रिहा, ये थी साजिश

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दंतेवाड़ा। अरनपुर थाना इलाके से सब इंस्पेक्टर ललित कश्यप और अतिथि शिक्षक जयसिंह कुरेटी अपहरण के बाद एक हत्या की खबर अफवाह साबित हुई। एएसपी सूरज परिहार ने बताया कि नक्सलियों ने आज सुबह 5ः00 बजे सुरक्षित छोड़ दिया।

बताया जा रहा है कि लगभग 40 से 50 ग्रामीणों की मदद से सब इंस्पेक्टर ललित कश्यप और अतिथि शिक्षक जयसिंह कुरेटी को छुड़ाया गया। फिलहाल सब इंस्पेक्टर और शिक्षक कहां है। इसकी जानकारी अधिकारी नहीं दे रहे हैं।

इतना जरूर कहा जा रहा है कि दोनों सुरक्षित हैं और शाम तक सब क्लियर हो जाएगा। कहा जा रहा है कि हत्या की अफवाह नक्सलियों ने फैलाई थी, ताकि पुलिस की टीम पहुंचे और नक्सलियों के एम्बुश में फंस जाए, जिससे नक्सली बड़ी घटना को अंजाम दे सकें।

छत्तीसगढ़ : शिक्षक ने किया स्कूली छात्रा से छेड़छाड़

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राजनांदगांव । जिले में एक स्कूली छात्रा के साथ फिर छेड़छाड़ का मामला सामने आया है। मिली जानकारी के मुताबिक राजनांदगांव जिले के ही बिरेझर गांव में एक स्कूल शिक्षक द्वारा स्कूली छात्राओं के साथ छेड़छाड़ की शिकायत लगातार मिल रही थी।

मंगलवार को भी जब ऐसा ही एक मामला सामने आया तो स्कूल शिक्षा विभाग में हड़कंप मच गया। ग्राम बिरेझर के प्रायमरी स्कूल में चौथी कक्षा की छात्रा से सहायक शिक्षक नवीन कुमार मलिआर्य ने छेड़छाड़ की।

जब इस बात की जानकारी ग्रामीणों को मिली तो उन्होंने स्कूल को घेर लिया और जमकर हंगामा किया। सोमनी पुलिस ने पीड़ित बच्ची का भी बयान दर्ज कर लिया है और आरोपी शिक्षक को गिरफ्तार कर लिया है।

 

Shajapur: टक्कर से लोडिंग जीप के हो गए ये हाल

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शाजापुर। एबी रोड पर डिपो के सामने मंगलवार सुबह 9 बजे जेसीबी लेकर जा रहे एक ट्राले ने लोडिंग जीप को टक्कर मार दी। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि जीप के परखच्चे उड़ गए। जीप में सवार दो युवक गंभीर रूप से घायल हो गए। जिन्हें इलाज के लिए जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है। दुर्घटना के बाद एबी रोड पर जाम लग गया। यातायात पुलिस ने मौके पर पहुंचकर जाम को खुलवाया। घटना में दो बाइक भी ट्राले की चपेट में आ गई थी।

छत्तीसगढ़ : बदल रही है कांग्रेस, जिसे नहीं देख पाए राजनीतिक विश्लेषक

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कांग्रेस सोशल जस्टिस और ओबीसी की ओर करवट ले रही है. अगर आप कांग्रेस को गौर से देख रहे हैं तो ये आपको आसानी ने नजर आ जाएगा. लेकिन राजनीतिक विश्लेषकों को ये बदलाव नजर नहीं आया, क्योंकि ये बेहद चुपचाप हुआ है. सबसे पहले इन बिंदुओं पर विचार करें.

1- कांग्रेस ने अपने इतिहास में पहली बार ओबीसी डिपार्टमेंट बनाया है, इसका उद्घाटन स्वयं कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने किया. इस डिपार्टमेंट के अध्यक्ष कांग्रेस के सांसद रहे ताम्रध्वज साहू हैं, जो अब छत्तीसगढ़ सरकार में मंत्री भी हैं.

2- कांग्रेस की इस समय जिन राज्यों में सरकार है उनमें से पुद्दुचेरी, राजस्थान और छत्तीसगढ़ में ओबीसी के मुख्यमंत्री हैं. पंजाब में जाट मुख्यमंत्री हैं. मध्य प्रदेश में खत्री मुख्यमंत्री हैं, लेकिन मध्य प्रदेश कैबिनेट में 10 मंत्री ओबीसी हैं. जबकि सिर्फ दो मंत्री ब्राह्मण हैं. कर्नाटक में भी इससे पहले ओबीसी के सिद्धारमैया मुख्यमंत्री थे. कर्नाटक के कांग्रेस समर्थित मुख्यमंत्री भी ओबीसी हैं.

3- मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ ने घोषणा की है कि राज्य में जो ओबीसी आरक्षण अब तक 14 परसेंट था, उसे बढ़ाकर 27 परसेंट किया जाएगा और इसे अध्यादेश लाकर लागू भी कर दिया.

4- कांग्रेस के नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया ने पिछले दिनों ये बयान दिया कि वे कुर्मी जाति के हैं. कांग्रेस में इसकी होड़ लगी हुई है.

5- कांग्रेस का 2019 का घोषणा पत्र बनाने के क्रम में जिन मसलों पर अलग अलग उपसमितियां विचार कर रही हैं, उनमें से एक उपसमिति ओबीसी मामलों की भी है.

6- जब कोर्ट ने यूनिवर्सिटी में टीचर पदों पर नियुक्ति के लिए अब तक लागू रोस्टर को निरस्त करने का फैसला किया तो राहुल गांधी ने ट्वीट करके लिखा कि कांग्रेस एससी-एसटी-ओबीसी आरक्षण के पक्ष में है और पुराना रोस्टर बहाल होना चाहिए.

7- रोस्टर मुद्दे पर 5 मार्च को हुए भारत बंद का कांग्रेस एससी सेल, युवा कांग्रेस और एनएसयूआई ने समर्थन किया.

8- कांग्रेस ने एक ओबीसी केशव चंद यादव को यूथ कांग्रेस का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाया है.

9- राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण राज्य उत्तर प्रदेश में कांग्रेस ओबीसी जातियों के तीन दलों- महान दल, निषाद पार्टी और अपना दल के किसी एक हिस्से के साथ तालमेल करने जा रही है.

कांग्रेस का बेशक अब तक क्लेम रहा है कि देश के हर तबके की पार्टी है, लेकिन व्यवहार में इसका नेतृत्व हमेशा से सामाजिक इलीट के हाथ में रहा है. प्रतीक के तौर पर बेशक इसका अध्यक्ष किसी भी जाति से हो लेकिन इसकी अपनी सत्ता संरचना हमेशा से सवर्ण हिंदू पुरुषों की तरफ झुकी रही है. इस संरचना के साथ कांग्रेस अलग अलग सामाजिक-धार्मिक-जातीय समूहों को जोड़कर सत्ता का समीकरण बनाती रही है.

आजादी के समय तो तमाम समूह इससे जुड़े थे, लेकिन जब प्रतियोगी राजनीति शुरू हुई तो किसान और पिछड़ी जातियां तथा राजा-महाराजाओं का एक समूह इससे अलग हो गया. पिछड़ों का बड़ा हिस्सा क्षेत्रीय दलों और समाजवादी विचारधारा वाली पार्टियों के साथ चला गया. उसी समय कांग्रेस ने ब्राह्मणों के नेतृत्व में दलितों और मुसलमानों को जोड़कर एक समीकरण बनाया, जो लंबे समय तक असरदार था. कांशीराम के बहुजन आंदोलन के बाद उत्तर प्रदेश में दलितों ने अपना नया ठिकाना खोज लिया, तो बाबरी मस्जिद गिराए जाने के बाद मुसलमानों का कांग्रेस पर से भरोसा टूटा और वे तमाम तरह के विकल्प आजमाने लगे. लेकिन इस दौर में भी कांग्रेस का ब्राह्मण और सवर्ण कोर बचा रहा.

इसमें सबसे बड़ी दरार बीजेपी ने डाली है. राम मंदिर आंदोलन और हिंदुत्व के सवाल पर अक्रामक राजनीति करके बीजेपी ने कांग्रेस के इस सवर्ण ब्राह्मण केंद्रित कोर को तोड़ लिया है. इन वोटों की सबसे बड़ी दावेदार अब बीजेपी है. कांग्रेस ने इसी बीच 1993 में मंडल कमीशन की सिफारिश को मानते हुए केंद्र सरकार की नौकरियों में 27 परसेंट ओबीसी आरक्षण लागू कर दिया. 2006 में ओबीसी आरक्षण केंद्र सरकार के शिक्षा संस्थानों में लग गया. इससे कांग्रेस से जुड़े सवर्ण छिटक गए.

कांग्रेस की समस्या यह है कि सवर्ण और उसमें भी मुख्य रूप से ब्राह्मण उसे वोट नहीं देते लेकिन पार्टी वही चला रहे हैं. अब अगर कांग्रेस चाहे कि ब्राह्मण उसके पास लौट आए, तो ये आसान नहीं है. बीजेपी ने 10 प्रतिशत सवर्ण आरक्षण देकर सवर्णों को और मजबूती से जोड़ लिया है. वह एससी-एसटी-ओबीसी हितों के खिलाफ जितना काम करती है, उसका सवर्ण वोट और मजबूत होता है. भाजपा ये इसलिए कर पा रही है क्योंकि हिंदुत्व या सीमा पर तनाव का मुद्दा उठाकर वो एससी-एसटी-ओबीसी के एक हिस्से को जाति से ऊपर लाकर अपने साथ जोड़ लेती है.

इसके अलावा बीजेपी ने 90 के दशक में सोशल इंजीनियरिंग करके राज्यों की कमान ज्यादातर ओबीसी नेताओं को सौंप दी. हालांकि पार्टी संगठन पर आरएसएस और ब्राह्मण नेताओं का कंट्रोल वहां बना हुआ है. अब तो उसने एक ऐसे आदमी को प्रधानमंत्री बना दिया है, जो बार-बार ये दावा करते हैं कि वो पिछड़ी जाति के हैं.

कांग्रेस का रास्ता कठिन है. वह बीजेपी जितनी अक्रामक सांप्रदायिक राजनीति अब कर नहीं पा रही है. लेकिन सामाजिक न्याय की ओर उसका आना भी आसान नहीं है. अगर वो इन वंचित जातियों के लिए काम करती भी है तो उसके पास वो पार्टी ढांचा नहीं है, जो इन जातियों को कांग्रेस से जोड़े. वे इन जातियों का भला तो फिर भी कर पाएगी, लेकिन उनकी पार्टी नहीं बन पाएगी. कांग्रेस के पास इन जातियों से पर्याप्त और कद्दावर नेता नहीं हैं. कांग्रेस अगर अपने मौजूदा नेताओं से कहती है कि ऐसा नेताओं को पार्टी में लेकर आएं, तो वे ऐसा होने नहीं देंगे.