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जिला समाचार बेमेतरा : पॉच अलग-अलग प्रकरणों में 5 लाख 75 हजार रूपए की आर्थिक सहायता राशि जारी

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कलेक्टर श्री महादेव कावरे ने बेमेतरा जिले में सर्पदंश और चार अलग-अलग सड़क दुर्घटना में हुई  आकस्मिक मृत्यु पर मृत पक्षकारों को राजस्व पुस्तक परीपत्र 6-4 के तहत 5 लाख 75 हजार रूपए की आर्थिक सहायता राशि स्वीकृत की है। स्वीकृत राशि में एक लाख 75 हजार रूपए सड़क दुर्घटना में हुई मृत्यु पर सहायता राशि शामिल है। बेरला विकासखण्ड के ग्राम पंचायत बहेरा की रेखा गायकवाड की सर्पदंश से मृत्यु होने पर 4 लाख रूपए की आर्थिक सहायता राशि जारी की गई है। इसी तरह उमरिया निवासी श्री पिताम्बर साहू एवं तीन अन्य पुत्र-पुत्री एवं नातिन की सड़क दुर्घटना होने पर 75 हजार रूपए कोहकाबोड़ निवासी श्री पारस वर्मा , पिपरिया निवासी मिथुन राम वर्मा, तिरियाभाठ निवासी श्री अंजोर दास की सड़क दुर्घटना में मृत्यु होने पर और कठिया निवासी पुनीत बाई की सड़क दुर्घटना में मृत्यु होने पर उनके निकटतम पिड़ित पक्षकारों को 25-25 हजार रूपये कुल एक लाख 75 हजार रूपए की आर्थिक सहायता राशि जारी की गई है।

जिला समाचार गरियाबंद : अधिकारी, जनता की समस्या सुने और समाधान भी करें – कलेक्टर : कलेक्टर ने की समय-सीमा प्रकरणों की समीक्षा

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कलेक्टर श्री श्याम धावड़े ने कहा कि अधिकारी अपने संवेदनशीलता का परिचय देते हुए आम जनता की समस्याएं सुने और प्राथमिकता के साथ उसका समाधान करना भी सुनिश्चित करें। उन्होंने कहा कि लोगों को उनकी छोटी-छोटी समस्याओं के लिए आफिसों का चक्कर लगाना न पड़े। बेहतर हो कि अधिकारी स्वयं जनता के पास पहुंचकर उनकी समस्याएं से अवगत हो और उसका निराकरण करें। श्री धावड़े आज अधिकारियों की समय-सीमा प्रकरणों की समीक्षा बैठक में उक्त बातें कही। उन्होंने कहा कि श्रम विभाग द्वारा संचालित प्रधानमंत्री श्रमयोगी मानधन पेंशन योजना का जिले में बेहतर ढंग से क्रियान्वयन हो। कलेक्टर ने श्रम पदाधिकारी को जरूरतमंद सभी पात्र हितग्राही से आवेदन प्राप्त कर उक्त पेंशन योजना से लाभान्वित कराने कहा। इसी प्रकार जिले के पीएसीएल निवेशकों के ऑनलाईन आवेदन फार्म भरवाने जनपद पंचयतों में प्रोग्रामरों एवं डाटा एन्ट्री ऑपरेटरों की व्यवस्था के साथ ही आवेदकों से आवेदन भरवाने की पहल किया जाए, साथ ही इसका व्यापक प्रचार-प्रसार भी सुनिश्चित किया जाए। कलेक्टर ने जिले में मिशन अंत्योदय की समीक्षा करते हुए चयनित गांवों में विभागीय योजनाओं के क्रियान्वयन में प्रगति लाने के निर्देश संबंधित विभाग के अधिकारियों को दिये। वन अधिकार पट्टा हेतु हितग्राही चयन व सत्यापन के लिए संबंधित एसडीएम, जनपद सीईओ और वन विभाग संयुक्त रूप से कार्यवाही सुनिश्चित करें। उन्होंने अभियान के बेहतर पहल के लिए जिले के सभी विकासखण्ड में 10-10 मास्टर ट्रेनर्स नियुक्त कर प्रशिक्षण आयोजित करने की बातें भी कही। कलेक्टर ने कहा कि शासन की प्राथमिता वाले इस अभियान में यह सुनिश्चित किया जाए कि जिले के वास्तविक पात्र हितग्राहियों को भी वन अधिकार पट्टा मिले। कलेक्टर ने शासन की नरवा, गरवा, घुरूवा और बाड़ी की परिकल्पना को जिले में बेहतर क्रियान्वयन के लिए विकासखण्डवार मनरेगा के तहत स्वीकृत कार्यो की समीक्षा की, साथ ही पूर्व के लंबित मजदूरी भुगतान आगामी 20 मार्च तक शत् प्रतिशत पूर्ण कर लेने जनपद सीईओ को निर्देशित किया। उन्होंने कहा कि लोक सेवा गारंटी के तहत विभागों को अधिसूचित सेवाएं लंबित न रखें। जिले के ग्राम सुपेबेड़ा में प्रभावितों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं के लिए यहां पर स्वास्थ्य श्वििर आयोजन के साथ ही शिविर से लाभान्वित होने लोगों को प्रोत्साहित किया जाए। कलेक्टर ने कहा कि विभागों में अनुकम्पा नियुक्ति के प्रकरण लंबित न रखे, प्राथमिकता के क्रम में आवेदकों की नियुक्ति करें। बैठक में अवगत कराया गया कि जिस विभाग में अधिकारी-कर्मचारियों का ईपिक नंबर गलत है, ऐसे अधिकारियों की जानकारी संबंधित विभाग प्रमुख को दी गई है, वे कलेक्ट्रेट स्थित एनआईसी से संपर्क कर इसमें सुधार कराये। आगामी 10 मार्च से पल्स पोलियो अभियान संचालित किया जायेगा। प्रथम दिवस निर्धारित स्वास्थ्य केन्द्र में शून्य से पांच वर्ष के बच्चों को पोलियो की खुराक पिलाई जायेगी। इसके अलावा 11 एवं 12 मार्च को स्वास्थ्य अमलों द्वारा डोर टू डोर पहुंचकर छुटे हुए बच्चों को पोलियो की खुराक पिलायेंगे। बैठक में अधिकारियों को संभाग आयुक्त द्वारा प्रेषित पत्रों के संबंध में  की गई विभागीय कार्यवाही की जानकारी से कलेक्टर को अवगत कराने कहा गया। बैठक में वनों को दावानल से बचाने, वन्यप्राणियों के संरक्षण और वन औषधियों के संवर्धन हेतु सभी विभागीय अधिकारियों को आवश्यक पहल करने कहा गया। कहीं भी वनों में आग लगने की घटना, वन्यप्राणियों के शिकार और पेड़ों के अवैध कटाई आदि की सूचना तत्काल वन विभाग के अधिकारियों को देने कहा गया। बैठक में वनमण्डलाधिकारी श्री जे.आर. भगत, अपर कलेक्टर श्री के.के. बेहार, जिला पंचायत सीईओ श्री आर.के. खुटे, संयुक्त कलेक्टर श्री जे.आर. चौरसिया व श्री अमृत लाल ध्रुव, सभी एसडीएम, जनपद सीईओ एवं समस्त विभाग के अधिकारी उपस्थित थे।

जिला समाचार गरियाबंद : जिला स्तरीय जनसमस्या निवारण शिविर 8 मार्च को मैनपुर में

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जिले की आम जनताओं की समस्याओं को सुनने, समझने और त्वरित निराकरण के उद्देश्य से शुक्रवार, 08 मार्च को विकासखण्ड मुख्यालय मैनपुर में जिला स्तरीय जनसमस्या निवारण शिविर आयोजित किया गया है। कलेक्टर श्री श्याम धावड़े के मार्ग दर्शन में आयोजित इस शिविर में समस्त विभाग के अधिकारी उपस्थित रहेंगे और विभाग से संबंधित लोगों से प्राप्त आवेदनों का मौंके पर निराकरण करेंगे। कलेक्टर श्री धावड़े ने समस्त जिला प्रमुख अधिकारियों को शिविर के निर्धारित समय प्रातः 10.30 बजे उपस्थिति सुनिश्चित करने कहा है।

जिला समाचार : गरियाबंद : जिला स्तरीय अभिसरण समिति की बैठक सम्पन्न : 08 से 22 मार्च तक पोषण पखवाड़ा का आयोजन

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जिले में कुपोषण के स्तर में व्यापक कमी लाने पोषण अभियान का संचालन किया जा रहा है। 08 मार्च 2019 को पोषण अभियान की प्रथम वर्षगांठ मनाये जाने हेतु 08 से 22 मार्च तक जिले में पोषण पखवाड़ा आयोजित किया जायेगा। जिला स्तरीय अभिसरण समिति के अध्यक्ष कलेक्टर श्री श्याम धावड़े की अध्यक्षता में आज कलेक्टोरेट सभा कक्ष में आयोजित समिति की बैठक में पोषण पखवाड़ा के दौरान आयोजित गतिविधियों की रूपरेखा पर विस्तारपूर्वक चर्चा की गई। इस दौरान समिति से संबंधित अधिकारियों को समन्वय के साथ जिले में महिला एवं बाल विकास द्वारा आयोजित पोषण पखवाड़ा को सफल बनाने आवश्यक सहयोग करने कहा गया। पोषण पखवाड़ा में आयोजित होने वाले विभिन्न गतिविधियों के संबंध में महिला एवं बाल विकास विभाग के जिला कार्यक्रम अधिकारी श्रीमती जगरानी एक्का ने अवगत कराया कि 8 मार्च 2019 को पोषण मेला का आयोजन, 09 मार्च को पोषण पखवाड़ा के संबंध में पंचायत में ग्राम सभा का आयोजन, 10 मार्च को सायकल रैली व पोषण रैली, 11 मार्च को स्कूल आधारित गतिविधियां और एनिमिया शिविर का आयोजन, 12 मार्च को किशोरी बालिकाओं हेतु जागरूकता अभियान व पोषण संबंधी संयुक्त बैठक का आयोजन, 13 मार्च को सायकल व पोषण रैली, 14 मार्च को युवा समूह की बैठक व पोषण पदयात्रा, 15 मार्च को किशोरी बालिकाओं हेतु जागरूकता शिविर व पोषण संबंधी संयुक्त बैठक का आयोजन, 16 मार्च को कृषक समूह की बैठक और हॉट-बाजार गतिविधि आयोजित किया जायेगा। इसी प्रकार 17 मार्च को प्रभात फेरी व पोषण पदयात्रा, 18 मार्च को युवा समूह की बैठक व स्कूूल आधारित गतिविधियां, 19 मार्च को कृषक समूह की बैठक व हाट-बाजार गतिविधियां, 20 मार्च को एनिमिया शिविर और किशोरी बालिकाओं हेतु जागरूकता अभियान, 21 मार्च को सायकल व पोषण रैली तथा 22 मार्च को पोषण पखवाड़ा के समीक्षा हेतु पंचायत स्तर पर बैठक का आयोजन किया जायेगा। इसके अलावा पोषण पखवाड़ा के दौरान गृह भेंट, स्व सहायता समूह की बैठक, मीडिया कैम्पेन, नुक्कड़ नाटक और सामुदायिक रेडियो का आयोजन भी किया जायेगा। बैठक में जिला पंचायत सीईओ श्री आर.के. खुटे, जिला कार्यक्रम अधिकारी श्रीमती जगरानी एक्का और समिति से संबंधित विभाग के जिला प्रमुख अधिकारी उपस्थित थे।

जिला समाचार : धमतरी : एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालय में कक्षा छठवीं में प्रवेश हेतु चयन परीक्षा 31 मार्च को

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एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालय में कक्षा छठवीं में प्रवेश के लिए आगामी 31 मार्च को सुबह 10.30 से दोपहर 12.30 बजे तक जिला स्तर पर चयन परीक्षा का आयोजन किया जाएगा। इस परीक्षा में शामिल होने के इच्छुक विद्यार्थियों से आगामी 18 मार्च तक आवेदन मंगाए गए हैं। सहायक आयुक्त, आदिवासी विकास विभाग ने बताया कि विद्यार्थी को कक्षा पांचवीं में 50 प्रतिशत अंक के साथ उत्तीर्ण होना और वह अनुसूचित जनजाति वर्ग एवं राज्य का निवासी होना अनिवार्य है। विद्यार्थी आवेदन पत्र पूरी तरह से भरकर संबंधित स्कूल में नियत तिथि तक जमा कर सकते हैं। आवेदन पत्र का नमूना कलेक्टोरेट के कक्ष क्रमांक 82 स्थित सहायक आयुक्त, आदिवासी विकास विभाग के कार्यालय अथवा संबंधित विकासखण्ड शिक्षा अधिकारी कार्यालय से प्राप्त किया जा सकता है। बताया गया है कि नियत समय के बाद मिले आवेदनों पर विचार नहीं किया जाएगा। इस संबंध में अधिक जानकारी के लिए सहायक आयुक्त, आदिवासी विकास विभाग से सम्पर्क किया जा सकता है।

रक्षा संस्थानों में लगती बड़ी सेंध शुभ संकेत नहीं है

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नई दिल्ली। रक्षा सामग्री निर्माण और भंडार की दृष्टि से जबलपुर (मप्र) देश का प्रमुख केंद्र है। बोफोर्स के स्वदेशी और उससे कहीं उन्नत संस्करण धनुष तोप के जीसीएफ (गन कैरिज फैक्टरी) में निर्माण की वजह से इसका नाम चमका। लेकिन दो साल पहले धनुष में मेड इन जर्मनी के स्थान पर मेड इन चाइना पार्ट्‌स लगने का मामला भी सुर्खियों में रहा। वहीं, केंद्रीय आयुध डिपो से (सीओडी) से 100 एके-47 गायब हो गईं। दोनों ही मामले अब तक अनसुलझे हैं।

किसने मारा खटुआ को

सैन्य प्रतिष्ठिानों में, जहां कहा जाता है कि परिंदा भी पर नहीं मार सकता, वहां धनुष जैसे अहम प्रोजेक्ट में आसानी से जर्मनी के स्थान पर चीनी बेयरिंग की सप्लाई भी हो गई और खरीदी, भंडारण, सप्लाई, फिटिंग, -क्वालिटी कंट्रोल से लेकर परीक्षण तक की तमाम प्रक्रियाओं में लंबे समय तक इसका पता भी नहीं चला। यदि सैन्य परीक्षण के दौरान धनुष के बैरल में विस्फोट नहीं होता तो शायद यह मामला भी दब जाता।

इससे ज्यादा चौंकाने वाली बात है कि सीबीआई के रडार पर आए बेयरिंग टेंडर का ऑर्डर जारी करने वाले जीसीएफ के जेडब्ल्यूएम एससी खटुआ 17 जनवरी को लापता हो जाते हैं और 5 जनवरी को उनका शव मिलता है। पीएम रिपोर्ट हत्या की ओर इशारा करती है लेकिन पुलिस के हाथ 10 दिन बाद भी खाली हैं।

में सहयोग नहीं कर रहे रक्षा संस्थान

इसके अलावा पिछले साल बिहार के मुंगेर में पुलिस ने दो तस्करों से एके-47 बरामद की। इसके बाद उन्होंने केंद्रीय आयुध भंडार गृह के आर्मरर पुरुषोत्तम रजक की जानकारी दी। पुरुषोत्तम ने उगला कि उसने 6 सालों में 100 से ज्यादा एके-47 राइफलें सीओडी से चुराई हैं और तस्करों को बेची हैं। इस घटना ने सीबीआई, आईबी, मिलिट्री इंटेलीजेंस के भी कान खड़े कर दिए।

पुलिस का आरोप है सीओडी जांच में सहयोग नहीं कर रही है, अभी तक उसने एके-47 का रिकार्ड भी पुलिस से साझा नहीं किया है। यानी इस सेंधमारी की जड़ें कहीं अधिक गहरी हैं, जो पुलिस जांच को नतीजे तक नहीं पहुंचने देना चाह रही हैं। ये दोनों घटनाएं भारतीय रक्षा संस्थानों के लिए सीधी चेतावनी हैं।

चौंकाता है अनसुलझा चीनी बेयरिंग घोटाला

2012 में जीसीएफ में धनुष तोप बनाने में शुरुआती सफलता मिली तो ऑर्डनेंस फैक्ट्री बोर्ड (ओएफबी) ने 2013 में तोप के लिए 4 वायर रेस रोलर बेयरिंग की खरीदी को मंजूरी मिली। इसकी फाइल तत्कालीन जीएम एसपी यादव, एजीएम आलोक प्रसाद और प्रॉविजन सेक्शन में पदस्थ जेडब्ल्यूएम एससी खटुआ के हस्ताक्षर से आगे बढ़ी। मेड इन जर्मनी बेयरिंग लगाने के लिए 37 लाख रुपये का टेंडर रहा। यह ठेका दिल्ली की सिंद्ध सेल्स प्रालि को मिला। हालांकि, डिलीवरी देने से पहले 2014 में 4 के स्थान पर 6 बेयरिंग की आपूर्ति का ठेका 57 लाख में इसी कंपनी को दे दिया गया।

इसके बाद कंपनी ने माल की आपूर्ति कर दी। बेयरिंग को फिट करके फैक्टरी से 2015 में धनुष के 3 प्रोटोटाइप सैन्य परीक्षण के लिए भी रवाना कर दिए गए। कुछ परीक्षणों के बाद पोखरण फायरिंग रेंज में एक प्रोटोटाइप के बैरल में विस्फोट हो गया। इसके बाद ओएफबी को धनुष में चीनी बेयरिंग लगाने की शिकायत मिली और 2017 में सीबीआई ने दिल्ली की कंपनी के खिलाफ धोखाधड़ी का मामला दर्ज कर लिया। इसके बाद रक्षा मंत्रालय ने संस्थान को ब्लैक लिस्ट कर लिया। इस मामले में अभी तक जांच ही चल रही है।

डराता है 100 एके-47 का चोरी होना

केंद्रीय आयुध भंडार गृह में 2012 से 2018 के बीच 100 से ज्यादा एक-47 राइफलें चोरी हो गईं और किसी को पता ही नहीं चला। सुरक्षा संस्थान के कर्मचारियों के साथ मिलकर रिटायर्ड आर्मरर ही इस काम को अंजाम देता रहा। चोरी का यह सिलसिला चलता रहता यदि बिहार पुलिस मुंगेर में एके-47 राइफल के साथ दो हथियार तस्करों को गिरफ्तार नहीं करती। इस मामले में भी बिहार-यूपी पुलिस ने ही 20 से ज्यादा एके-47 राइफलें जब्त की हैं जबकि पूरे मामले में सीओडी प्रबंधन अभी भी चुप्पी साधे बैठा हुआ है।

दोनों मामलों में खाली हाथ पुलिस

जबलपुर पुलिस के एसपी अमित कुमार सिंह ने बताया कि जीसीएफ के जेडब्ल्यूएम रहे एससी खटुआ की हत्या मामले में आरोपितों तक पहुंचने के लिए पुलिस साक्ष्य जुटा रही है। आशंका है कि गुमशुदगी के आसपास ही हत्या को अंजाम देकर शव फेंक दिया गया था। जीसीएफ प्रबंधन से कुछ जानकारियां मांगी गई हैं। आरोपित जल्द पुलिस की गिरफ्त में होंगे।

एसपी ने कहा, सीओडी से एके-47 राइफलों के पार्ट्‌स की चोरी के बाद उससे राइफलें तैयार कर बिहार में नक्सलियों को बेची गईं। क्राइम ब्रांच को जांच की जिम्मेदारी सौंपी गई है। जांच टीम ने सीओडी प्रबंधन से स्टॉक का ब्योरा मांगा है ताकि पता लगाया जा सके कि कितनी राइफलों की चोरी हुई है, लेकिन जानकारी अभी तक नहीं मिली है।

एनएच ने बाइपास के लिए की मार्किंग, एनएचएआई ने कहा हम बनाएंगे

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हाल ही में स्टेट हाइवे से नेशनल हाइवे 552 का दर्जा पाने वाली एमएस रोड पर राज्य शासन की एजेंसी नेशनल हाइवे(एनएच) बाइपास बनाने जा रही थी। इसके लिए एनएच ने जमीन अधिग्रहण की मार्किंग भी शुरू करवाई थी। लेकिन बाद में एनएच को नेशनल हाइवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (एनएचएआई) ने बताया कि बहुत जल्द यहां से 6 लेन हाइवे बनाया जाएगा। इसके बाद एनएच ने इस बाईपास को न बनाने का निर्णय लिया है।

ज्ञात हो सबलगढ़ से मुरैना तक एमएस रोड स्टेट हाइवे और अंबाह से भिंड तक स्टेट हाइवे को जोड़कर नेशनल हाइवे 552 घोषित किया गया था। इस प्रोजेक्ट की कमान राज्य शासन की एजेंसी एनएच को सौंपी गई है। एनएच ने मुरैना गांव से हाइवे पर अंबाह बाईपास तिराहे तक और अंबाह बाईपास तिराहे से अंबाह रोड तक स्थित बाईपास वाली जगह पर फोर लेन बाईपास बनाने की योजना बनाई थी। इसके लिए एनएच ने हाल ही में जमीन अधिग्रहण के लिए यहां मार्किंग की। इस दौरान एनएचएआई से हुई बातचीत में एनएच को पता चला कि मुरैना गांव से निबी तक 6 लेन हाइवे बनने जा रहा है। ऐसे में एक ही हाइवे को दो लोग नहीं बना सकते थे। जिसके चलते एनएच ने अपना प्लान वापस ले लिया।

अब अंबाह बाईपास को ही बनाएगा एनएचः मुरैना गांव से हाइवे तक का बाईपास एनएचएआई द्वारा बनाए जाने के चलते अब मुरैना में एनएच द्वारा अंबाह बाईपास को ही फोर लेन बनाया जाएगा। इससे बाईपास की लागत कम हो जाएगी। इससे सबसे बड़ा लाभ शहर के लोगों को होगा। क्योंकि वर्तमान में अंबाह बाईपास की हालब बेहद खराब है। इस बाईपास के बनने के बाद शहरी क्षेत्र की एमएस रोड एनएच-552 से डिलीट हो जाएगी। इसके बाद शहर की सड़क पीडब्ल्यूडी या किसी दूसरी स्थानीय एजेंसी के सुपुर्द हो जाएगी।

तो एक ही हाइवे से गुजरेगा ट्रैफिक

एनएचएआई द्वारा मुरैना गांव से निबी तक बनाए जा रहे 6 लेन हाइवे से एक सड़क अंबाह पाई पास तक पहुंचेगी। यानि मुरैना गांव से अंबाह बाईपास एप्रोच रोड तक का सफर एनएच-552 के वाहन एनएच-3 पर करेंगे। यह दोनों हाइवे इस मामूली दूरी में एक हो जाएंगे। यह अपने आप में नया प्रयोग भी होगा।

जहां जरूरत वहां अधिग्रहणइस मामले में एनएचएआई साफ कर चुकी है कि मुरैना गांव से निबी तक 6 लेन हाइवे बनाने के लिए उन्हें जमीन अधिगृहित करनी होगी,लेकिन एनएच भी फोर लेन बाईपास के लिए मौजूदा जगह के कम पड़ने पर जमीन अधिग्रहित कर सकता है। लेकिर बताया जा रहा है कि मुरैना बाईपास पर कुछ जगहों केा छोड़कर इसके लिए पर्याप्त स्थान है।

मई तक आतंकी संगठनों के खिलाफ FATF के तहत कार्रवाई न की तो पाक पर लगेगी पाबंदी, वित्‍त सचिव ने दी चेतावनी

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इस्‍लामाबाद। पाकिस्तान सरकार पर आतंकवादी संगठनों के खिलाफ कार्रवाई के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर दबाव बढ़ता जा रहा है। खुद पाकिस्तान के वित्त सचिव आरिफ मोहम्मद खान ने अपनी सरकार को आगाह किया है कि वित्तीय कार्रवाई कार्यबल (एफएटीएफ) की आर्थिक पाबंदी से बचने के लिए प्रतिबंधित संगठनों के खिलाफ मई तक कार्रवाई करनी होगी।

पेरिस स्थित एफएटीएफ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आतंकवादी संगठनों के वित्त पोषण पर नजर रखने वाला संगठन है। पिछले साल संगठन ने पाकिस्तान को संदिग्ध देशों की सूची (ग्रे लिस्ट) से बाहर निकलने के लिए 40 सिफारिशों के साथ अपनी रिपोर्ट को अंतिम रूप दिया। पाकिस्तान को आतंकवादियों को वित्त पोषण पर अंकुश लगाने में नकाम रहने को लेकर इस सूची में रखा गया है।

आरिफ खान लोक लेखा समिति (पीएसी) की उप-समिति की बैठक में भाग लेने के बाद संवाददाताओं से बातचीत कर रहे थे। अखबार डॉन ने वित्त सचिव के हवाले से कहा है कि देश को एफएटीएफ की सिफारिशों के अनुसार प्रतिबंधित संगठनों के खिलाफ कार्रवाई करनी है। खान ने आशंका जताई कि अगर पाकिस्तान एफएटीएफ सिफारिशों की उपेक्षा करता है और उसे लागू नहीं करता है तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है।

उन्होंने कहा कि पाकिस्तान को एफएटीएफ की सिफारिशों को लागू करने के लिए कदम उठाने होंगे। पाकिस्तान की कार्य योजना की हाल की बैठकों में समीक्षा करने वाला एफएटीएफ का अंतरराष्ट्रीय सहयोग समीक्षा समूह (आईसीआरजी) जनवरी 2019 के लिए निर्धारित लक्ष्यों के मामले में प्रगति से संतुष्ट नहीं था।

मनी लांड्रिंग निरोधक तथा आतंकवादियों के वित्त पोषण पर लगाम लगाने के मामले में सुधार के बावजूद समूह ने असंतोष जताया। रिपोर्ट के मुताबिक इसीलिए एफएटीएफ ने पाकिस्तान से कार्य योजना पर अमल करने को कहा है। एफएटीएफ पाकिस्तान के मामले में प्रगति की जून 2019 में समीक्षा करेगा।

Chhattisgarh : दूर होगी आर्थिक तंगी, विकास के गांधीवादी मॉडल को अपना रही छत्तीसगढ़ सरकार

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रायपुर। छत्तीसगढ़ राज्य में हाल ही में सत्ता परिवर्तन हुआ है। 15 वर्षों के भाजपा के कार्यकाल के बाद अब कांग्रेस की सरकार यहां बनी है। दोनों सरकारों की विकास को लेकर नीतियां काफी अलग रही हैं। विपक्ष में रहते कांग्रेस ने जिन बातों को विरोध किया, अब सरकार में आने के बाद कांग्रेस ने उन नीतियों और योजनाओं को ही बंद कर दिया। नई सरकार ने पुरानी सरकार की विभिन्न विकास की योजनाओं पर पूर्ण वीराम लगा दिया, इसके साथ ही अपनी नीति से राज्य के विकास के प्रयास शुरू किए हैं।

राज्य सरकार की आर्थिक स्थिति इस वक्त ठीक नहीं है। पुराने डैमेज कंट्रोल के लिए राजकोष से बड़ी राशि का उपयोग किया गया है। किसानों की कर्जमाफी सहित कई बड़े आर्थिक फैसले सरकार ने लिए हैं। इससे 10 हजार करोड़ का आर्थिक भार सरकार पर आया है।

इसके बाद इस खर्च की पूर्ति के लिए राज्य सरकार पिछले दो महीनों में केंद्रीय रिजर्व बैंक से अब तक 6 बार कर्ज ले चुकी है। करीब तीन महीने में सरकार ने 7 हजार करोड़ से अधिक के बांड बेचे हैं। अब सरकार इन सब से उबरने के लिए आर्थिक विकास के गांधीवादी मॉडल को अपना रही है। नरवा, गरुआ, घुरवा और बारी का कंसप्ट वास्तव में पूरी तरह ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर आधारित गांधी जी के विचारों पर टिका है।

क्या है नरवा, गरुआ, घुरवा और बारी कंसप्ट

कृषि और पशुपालन हमारी ग्रामीण संस्कृति का अटूट हिस्सा है। जीवन की निरंतरता प्राकृतिक संसाधनों के प्रबंधन और संरक्षण पर निर्भर करती है। ये संसाधन प्रतिदिन हमारे जीवन को प्रभावित करते हैं। राज्य की नई कांग्रेस सरकार का मत यह है कि प्राकृतिक संसाधनों के विवेकपूर्ण उपयोग से ही कृषि और ग्रामीण विकास को प्रोत्साहित किया जा सकता है।

नरवा, गरुआ, घुरवा और बारी गांवों को सुदृढ़, स्वावलंबी व संपन्न बनाने का देशी फार्मूला है। इसी अवधारणा को साकार करने के लिए छत्तीसगढ़ की नई सरकार ने ग्रामीण क्षेत्रों में विद्यमान संसाधनों के समुचित संरक्षण व सदुपयोग के लिए काम करना शुरू किया है।

वास्तव में ये चार चिन्हारी ही हमारी कृषि संस्कृति एवं अर्थव्यवस्था की निशानी भी हैं। इस योजना से जलस्त्रोतों का सरंक्षण-सवर्धन, पशुधन प्रबंधन व उन्नयन, चरागाहों का विकास और जैविक खाद व बायोगैस इकाइयों की स्थापना होगी। इसी के माध्यम से ग्रामीण स्तर पर दो लाख से ज्यादा रोजगार श्रृजन का लक्ष्य सरकार ने तय किया है। इस योजना के अंतर्गत होने वाले कार्यों को मनरेगा से जोड़ा जाएगा।

गांधीवादी अर्थव्यवस्था का ऐसा है मॉडल

महात्मा गांधी ने अपनी ग्रामीण अर्थव्यवस्था की संकल्पना में कहा था कि भारत गांवों को देश है और गांवों के विकास से ही शहरों और पूरे देश का विकास होगा। गांधीजी के आर्थिक दर्शन पर आधारित गांधीवादी योजना श्रीमन्नारायण ने अप्रैल 1944 में प्रस्तुत की थी।

इस योजना को शुरूआती दौर की पंचवर्षीय योजनाओं में भी शामिल किया गया था। गांधी जी का मानना था कि गांवों में खेती का विकास, पशुपालन, ग्रामीण संसाधनों से रोजगार और इसी के आधार पर आर्थिक विकास किया जा सकता है। गांधी जी का यह आर्थिक दर्शन काफी व्यापक है।

इस समय विकास के लिए यही रास्ता

छत्तीसगढ़ राज्य एक विकसित होता राज्य है। इसमें एक तरफ आर्थिक विकास की बड़ी संभावनाएं हैं जो दूसरी तरफ सामाजिक विकास की कई चुनौतियां भी हैं। बड़ी तादात में प्राकृतिक संसाधनों से परिपूर्ण छत्तीसगढ़ राज्य में संसाधनों के व्यापक उपयोग के जरिए तेज विकास की नीति पिछली सरकार ने अपनाई थी, लेकिन इसकी वजह से टाटा के भूमिअधिग्रहण की वजह से स्थानीय लोगों के विस्थापन, किसानों की आर्थिक स्थिति का खराब होना। गांवों में विकास का कजोर होना जैसे कारक पैदा हुए। इस समय राज्य सरकार राज्य के विकास के लिए आर्थिक रूप से कोई बड़ी योजना नहीं ला सकती, और ऐसे में गांधीवादी आर्थिक विकास मॉडल ही राज्य सरकार के लिए सबसे बेहतर विकल्प है।

कर्ज लेने की मजबूरी के साथ आर्थिक विकास की चुनौती

अर्थशास्त्री डॉ. हुनमंत यादव कहते हैं कि बजट की व्यवस्था के लिए सरकार के पास बांड बेचने के अलावा कोई विकल्प नहीं है। जीएसटी लागू होने के बाद से राज्य सरकारों के पास टैक्स का विकल्प ज्यादा नहीं बचा है। पेट्रोल जैसी कुछ वस्तुएं हैं जिन पर राज्य टैक्स लगा सकता है, लेकिन इसका सीधा असर जनता पर पड़ेगा।

ऐसे में सरकार इससे बचती है। तीन महीने पुरानी कांग्रेस सरकार अपने इस छोटे कार्यकाल में अब तक सात हजार करोड़ से अधिक का बांड बेच चुकी है। छह बार में लिए गए इस कर्ज के लिए सरकार औसत आठ फीसद ब्याज भरेगी और दो से लेकर छह वर्ष में चुकाएगी। इस अवधी में राज्य सरकार को आर्थिक विकास की ऐसी नीति का सहारा लेना होगा, जिससे अर्थव्यवथा को तेज नहीं, बल्कि संतुलित विकास का रास्ता मिले।

अयोध्या विवादः हिंदू महासभा बातचीत के लिए तैयार, SC को दिए 3 नाम

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राजनीतिक रूप से संवेदनशील अयोध्या में राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद भूमि विवाद मामले में मध्यस्थता को लेकर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई जारी है.

सुनवाई के दौरान जस्टिस एसए बोबड़े ने कहा है कि ये मामला जमीन से नहीं, बल्कि भावनाओं से जुड़ा हुआ है. इसलिए इसका हल आपसी सहमति से ही निकलना चाहिए. उन्होंने कहा कि मध्यस्था को गोपनीय रखना चाहिए, क्योंकि इससे जुड़ी बातें बाहर आने पर विवाद की स्थिति पैदा हो सकती है.

बोबड़े ने कहा, “अतीत में जो हुआ उस पर हमारा कोई कंट्रोल नहीं है, किसने आक्रमण किया, कौन राजा था, मंदिर था या मस्जिद थी. इस बारे में हम कुछ नहीं कर सकते. हमें मौजूदा विवाद के बारे में पता है…और हम केवल विवाद को सुलझाने को लेकर चिंतित हैं.”

हिंदू महासभा ने मध्यस्थता के लिए दिए नाम

हिंदू महासभा की तरफ से सुप्रीम कोर्ट में मध्यस्थता के लिए तीन नाम दिए गए हैं. इन तीन नामों में पूर्व सीजेआई दीपक मिश्रा, जस्टिस एके पटनायक और जस्टिस जेएस खेहर का नाम शामिल है. हिंदू महासभा की तरफ से कहा गया है कि वो बातचीत के लिए तैयार हैं.

चीफ जस्टिस ने कहा- मध्यस्थता के लिए नाम सुझाएं पक्ष

चीफ जस्टिस रंजन गोगोई ने इस मामले के पक्षकारों से मध्यस्थता करने वालों के नामों का सुझाव देने को कहा है. उन्होंने कहा कि वह इस मामले में जल्द से जल्द फैसला सुनाना चाहते हैं.