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Swachh Sarvekshan Award 2019: इंदौर तीसरी बार बना स्वच्छ शहर, जानिए लिस्ट में किन-किन शहरों के हैं नाम

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नई दिल्ली। इंदौर एक बार फिर देश का सबसे स्वच्छ शहर बन गया है और इसी के साथ उसने स्वच्छता की हैट्रिक लगा ली है। बुधवार को राष्ट्रपति भवन में आयोजित एक विशेष कार्यक्रम में देश के सबसे स्वच्छ शहरों की लिस्ट जारी की गई। इस लिस्ट में इंदौर के बाद दूसरे नंबर पर चंडीगढ़ का अंबिकापुर दूसरे नंबर पर रहा वहीं कर्नाटक के मैसूर को तीसरा स्थान मिला है। चौथे नंबर पर जहां उज्जैन है वहीं पांचवें नंबर पर राजधानी दिल्ली का नाम है।

10 लाख से ज्यादा की आबादी वाले शहरों में अहमदाबाद का नाम पहले नंबर पर है वहीं रायपुर का नाम तेजी से बढ़ने वाले शहर की लिस्ट में पहले नंबर पर है। तीन लाख से ज्यादा और 10 लाख से कम आबादी वाले शहरों में उज्जैन का नाम सबसे उपर है वहीं 1-3 लाख की आबादी वाले शहरों में राजधानी दिल्ली टॉप पर है।

देश के सबसे स्वच्छ शहरों की लिस्ट

1. इंदौर, मध्यप्रदेश

2. अंबिकापुर, चंडीगढ़

3. मैसूर, कर्नाटक

4. उज्जैन, मध्यप्रदेश

5. नई दिल्ली

6. अहमदाबाद, गुजरात

7. नवी मुंबई, महाराष्ट्र

8. तिरुपति

9. राजकोट, गुजरात

10. देवास, मध्यप्रदेश

राष्ट्रपति भवन में राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की मौजूदगी में सर्वे में अग्रणी रहे चुनिंदा शहरों के प्रतिनिधियों को पुरस्कृत किया गया। इसके बाद विजेता शहरों को राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने बधाई दी।

4237 शहरों में हुआ सर्वे

इस बार शहरी विकास मंत्रालय ने देश के 4237 शहरों में स्वच्छता सर्वे किया है। इतने शहरों में टॉप-10 शहर का चयन मंत्रालय के लिए भी बड़ी चुनौती रही। सर्वे 5000 अंकों का है। 31 जनवरी 2019 को सर्वे प्रक्रिया पूरी हुई। इसमें 64 लाख लोगों के फीडबैक लिए गए और सोशल मीडिया के जरिए चार करोड़ लोगों को जोड़ा गया।ये बॉक्स हटा सकते हैं।

सुप्रीम कोर्ट ने फैसला रखा सुरक्षित अयोध्या केस में

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अयोध्या केस में मध्यस्थता होगी या नहीं? इस पर सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रख लिया है। चीफ जस्टिस रंजन गोगोई ने कहा है कि वह जल्द ही इस पर अपना फैसला देंगे। फिलहाल उन्होंने सभी पक्षों से मध्यस्थता के लिए कुछ मध्यस्थों के लिए नाम मांगे हैं।

छत्तीसगढ़ : बाल-बाल बचा बेटा, कर्ज के बोझ तले दबे पति-पत्नी ने लगाई फांसी

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रायपुर। बीरगांव के वार्ड नंबर 25 में मंगलवार की रात  कर्ज के बोझ तले दबे एक पति-पत्नी ने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। वहीं पुत्र ने भी फांसी लगा ली थी लेकिन वह बच गया। घटना की सूचना पर मौके में पहुंची उरला पुलिस ने मर्ग कायम कर शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। वहीं मामले को जांच में लिया है।

क्या है पूरा मामला :

पुलिस सूत्रों ने बताया कि वार्ड नंबर 15 बीरगांव निवासी मोहन साहू (45) अपनी पत्नी राधाबाई साहू (35) व 18 वर्षीय पुत्र के साथ रहता था। मोहन साहू नड्डा मुरकू बनाकर बेचने का काम करता था। बताया जाता है कि 4 माह पहले मोहन साहू ने मुरकू बनाने के लिए लोन लेकर साढ़े 4 लाख की मशीन खरीदी थी। वहीं घर का खर्च चलाने के लिए 2-3 लोगों से उधार पैसा लिया था और पटा नहीं पा रहा था। जिससे अधिक कर्ज होने से परेशान मोहन साहू ने अपने परिवार के साथ मिलकर आत्महत्या करने की योजना बनाई। योजनानुसार मोहन साहू और उसकी पत्नी राधा बाई व पुत्र रात्रि 2 बजे अलग-अलग कमरे में गए और नायलोन की रस्सी से फांसी लगा ली। इससे पति-पत्नी की मौत हो गई। वहीं पुत्र के गले में लगी रस्सी का फंदा छूट गया और उसका पैर जमीन पर टिक गया, जिससे वह बच गया। इसके बाद पुत्र ने इसकी जानकारी आसपास के लोगों को दी। घटना की सूचना पर मौके में पहुंची उरला पुलिस ने मर्ग कायम कर शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है।

ओडिशा की सत्ता की रेस में कौन किस पर पड़ेगा भारी

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आम तौर पर ओडिशा में चुनाव परिणाम को राष्ट्रीय स्तर पर उतनी तवज्जो नहीं दी जाती है जितनी इस बार दी जा रही है.

इसके दो प्रमुख कारण हैं. एक तो यह कि ओडिशा उन तीन राज्यों में से एक है जहाँ लोकसभा और विधानसभा चुनाव एक साथ हो रहे हैं.

दूसरा यह कि राष्ट्रीय स्तर पर चुनावी परिणामों को लेकर अनिश्चितता के बीच सभी प्रमुख पार्टियों और राजनैतिक प्रेक्षकों की निगाहें इस बात पर टिकी हुईं हैं कि किसी दल या गठबंधन को पूर्ण बहुमत न मिलने की स्थति में अगली सरकार के गठन में बीजू जनता दल (बीजेडी) सुप्रीमो और ओडिशा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक की क्या भूमिका रहेगी और वो किसके पक्ष में जाएंगे.

हालाँकि, यह सारी अटकलबाज़ी इस धारणा के आधार पर टिकी हुई हैं कि नवीन पटनायक पिछले दोनों चुनावों की तरह इस बार भी दोनों राष्ट्रीय दलों भाजपा और कांग्रेस को मात दे सकते हैं. ऐसे में राज्य की 21 लोकसभा सीटों में से ज्यादातर सीटों पर कब्ज़ा उनका हो सकता है. (पिछली बार उनकी पार्टी को 21 में 20 सीटें मिलीं थीं. एक सीट भाजपा के खाते में गई थी.)

लेकिन, लगातार 19 साल से सत्ता में रहने के बाद भी क्या सचमुच चुनाव जीतना नवीन पटनायक लिए उतना आसान होगा या उन्हें एंटी-इंकम्बेंसी का खामियाज़ा भुगतना पड़ेगा?

इस सवाल पर बीजेडी प्रवक्ता सस्मित पात्रा का जवाब बेहद दिलचस्प था. वो कहते हैं, “पूरे भारत में बीजू जनता दल शायद इकलौती ऐसी पार्टी है जो न केवल लगातार चार बार चुनाव जीती है, बल्कि उसने हर बार अपनी सीटों की संख्या में बढ़ोतरी की है. यहाँ एंटी-इंकम्बेंसी नहीं प्रो-इन्कम्बेंसी काम करती है .”

लेकिन, इस प्रश्न पर वरिष्ठ पत्रकार और राजनीतिक प्रेक्षक आशुतोष मिश्रा की राय कुछ अलग है. वह कहते हैं, “यह सच है कि नवीन पटनायक की लोकप्रियता में कोई ख़ास कमी नहीं आई है लेकिन यह भी सच है कि उनके मंत्री, विधायक और पार्टी के अन्य कार्यकर्ताओं में से कईयों की छवि बिगड़ी है. इसलिए इस बार चुनाव में अगर एंटी-इंकम्बेंसी कुछ हद तक काम कर जाए तो मुझे आश्चर्य नहीं होगा.”

नवीन पटनायक के सामने चुनौतियां

एंटी-इंकम्बेंसी के अलावा नवीन पटनायक को इस बार कुछ अन्य चुनौतियों का भी सामना करना पड़ेगा जिनमें प्रमुख है 2014 के मुक़ाबले राज्य में दोनों प्रमुख दलों भाजपा और कांग्रेस की बेहतर स्थिति.

पिछले चुनाव में ओडिशा उन चुनिन्दा राज्यों में से एक था जहाँ देश के बाकी हिस्सों में चल रही मोदी आंधी का कोई असर नहीं पड़ा. लेकिन, इस बार वैसी स्थति नहीं है. 2014 की तुलना में राज्य में मोदी और भाजपा दोनों के प्रति जनसमर्थन बढ़ा है.

आशुतोष मिश्रा मानते हैं कि पुलवामा में चरमपंथी हमले और उसके बाद बालाकोट में हवाई हमले के बाद राजनीतिक हवा का रुख़ कुछ हद तक भाजपा और मोदी के पक्ष में बदला है और कम से कम लोकसभा चुनाव में इसका असर देखने को मिल सकता है.

क्या वाकई इन घटनाओं का फायदा भाजपा को मिलेगा, इस सवाल के जवाब में केंद्रीय पेट्रोलियम और उद्यमिता विकास मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान कहते हैं, “मैं इन घटनाओं को राजनीति से जोड़कर नहीं देखना चाहता. मोदी जी के नेतृत्व में हमारी सरकार ने ओडिशा में जो काम किए हैं हम उसी के दमखम पर लड़ेंगे.”

धर्मेन्द्र प्रधान ने कहा, “आप जानते हैं कि मोदी जी ने सत्ता में आने के बाद से ही पूर्वी भारत के विकास पर विशेष ध्यान दिया है और इसी के तहत ओडिशा को अपनी हर कल्याणकारी योजना की प्रयोगशाला बनाया है, जिसका फायदा यहाँ के लोगों को मिल रहा है.”

“इसलिए मैं मानता हूँ कि ओडिशा की जनता मोदी जी के साथ चट्टान की तरह खड़ी है और लोकसभा और विधानसभा दोनों चुनावों में हमें उनका भरपूर समर्थन मिलेगा.”

कांग्रेस भी जोश में

उधर कांग्रेस भी प्रदेश में वर्षों से निर्जीव पड़े अपनी पार्टी संगठन में जान फूंकने की कोशिश में जी-जान से जुट गई है. जब से पूर्व मंत्री निरंजन पटनायक ने प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष के रूप में कार्यभार संभाला है तब से पार्टी योजनाबद्ध तरीके से और लगातार अपनी स्थिति में सुधार ला रही है. पार्टी को हमेशा से पीछे खींचने वाली गुटबाज़ी अब नहीं के बराबर है.

जब पूर्व केंद्रीय मंत्री और पार्टी के वरिष्ठ नेता श्रीकांत जेना ने लगातार पीसीसी अध्यक्ष की तीखी आलोचना की तो उन्हें पार्टी से निकालकर कांग्रेस अध्यक्ष ने यह स्पष्ट कर दिया कि वे न केवल निरंजन पटनायक के पीछे खड़े हैं बल्कि गुटबाज़ी और पार्टी विरोधी काम को अब बिल्कुल बर्दाश्त नहीं करेंगे .

हाल ही में राजस्थान, मध्य प्रदेश और पड़ोसी राज्य छत्तीसगढ़ में जीत के बाद ओडिशा कांग्रेस का मनोबल और पार्टी कार्यकर्ताओं का उत्साह अब बुलंदियों पर है. पार्टी यह मानकर चल रही है कि इन तीनों राज्यों की तरह ओडिशा में भी उसे एंटी-इंकम्बेंसी का लाभ मिलेगा.

यही कारण है कि भाजपा की तरह कांग्रेस भी इस बार चुनाव में ओडिशा को काफी अहमियत दे रही है. पिछले एक महीने में राहुल गाँधी दो बार ओडिशा का दौरा कर चुके हैं और अगली 8 और 13 तारीख को फिर आ रहे हैं. साथ ही ख़बर य भी है कि प्रियंका गाँधी को भी चुनाव प्रचार के लिए ओडिशा लाने की कोशिशें चल रही है

बीजेडी और बीजेपी के बीच गठबंधन का संदेह

निरंजन पटनायक मानते हैं कि इस बार कांग्रेस, बीजेडी और बीजेपी दोनों को ही कड़ी चुनौती देगी और राज्य में अपनी खोई हुई साख दोबारा हासिल करेगी.

वे कहते हैं, “ओडिशा की जनता अब यह समझ चुकी है कि बीजेडी और बीजेपी के बीच गठबंधन है और चुनाव के बाद दोनों एक बार फिर एक दूसरे का साथ निभाएँगे, जैसा कि वे 2014 के चुनाव के बाद से करते आए हैं. वे समझ चुके हैं कि बीजेडी को दिया गया हर वोट दरअसल बीजेपी के खाते में जाएगा. इसलिए मुझे पूरा विश्वास है की इस बार जनता हमारी पार्टी पर आस्था दिखाएगी.”

वैसे बीजेडी और बीजेपी दोनों किसी तरह के गठबंधन के आरोप का खंडन कर रहे हैं. लेकिन लोगों के मन में बनी इस धारणा को तोड़ना उनके लिए आसान नहीं होगा. और अगर सचमुच ऐसा हुआ तो कांग्रेस को इसका फायदा जरूर मिलेगा.

अगर इन सारी चुनौतयों के बावजूद नवीन पटनायक इस बार भी अपना दबदबा बनाए रखते हैं तो न केवल वे लगातार चार चुनाव जीतकर अपने ही कीर्तिमान को तोड़कर एक नया रिकॉर्ड बनाएंगे बल्कि भारत की राजनीति में अपने लिए एक विशेष स्थान भी बना पाएंगे.

छत्तीसगढ़ : Swachh Survekshan 2019 : बेस्ट परफॉर्मिंग स्टेट बना छत्तीसगढ़

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रायपुर। स्वच्छता सर्वेक्षण के परिणामों में छत्तीसगढ़ को बेस्ट परफॉर्मिंग स्टेट चुना गया है। दिल्ली के विज्ञान भवन में राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के मुख्य आतिथ्य ने इसकी घोषणा की गई। इसके अलावा मप्र के इंदौर शहर को लगातार तीसरी बार नंबर-1 शहर रहा।

देश के 4237 शहरों में हुआ सर्वे

शहरी विकास मंत्रालय ने 4237 शहरों में सर्वे किया है। इतने शहरों में टॉप-10 शहर का चयन मंत्रालय के लिए भी बड़ी चुनौती रही। सर्वे 5000 अंकों का है।

Swachh Survekshan 2019 : इंदौर ने लगाई हैट्रिक, फिर बना देश का सबसे स्वच्छ शहर

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इंदौर। स्वच्छता सर्वेक्षण के परिणामों में इंदौर को तीसरी बार देश का सबसे स्वच्छ शहर घोषित किया गया है। दिल्ली के विज्ञान भवन में राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने इंदौर की महापौर मालिनी गौड, नेता प्रतिपक्ष फौजिया अलीम और नगरीय प्रशासन मंत्री जयवर्धन सिंह को यह पुरस्कार सौपा। इंदौर को समारोह में तीन अवार्ड मिलना तय माना गया था। इनमें एक अवार्ड रैंकिंग, दूसरा फाइव स्टार रेटिंग और तीसरा अवार्ड इनोवेटिव श्रेणी के आयोजन (सैयदना की वाअज) के लिए दिया गया।

सर्वे के लिए जनवरी में आई दिल्ली की टीम सप्ताह भर रुकी थी

जनवरी में सर्वे के लिए दिल्ली से आई टीम ने भी सर्वे के लिए लंबा समय लिया था। सप्ताह भर टीम ने इंदौर डेरा डाला व बारीकी से सफाई का जायजा लिया। बावजूद व्यवस्था चाक-चौबंद रही और सफाईकर्मियों ने देर रात तक सफाई की।

देश के 4237 शहरों में हुआ सर्वे

शहरी विकास मंत्रालय ने 4237 शहरों में सर्वे किया है। इतने शहरों में टॉप-10 शहर का चयन मंत्रालय के लिए भी बड़ी चुनौती रही। सर्वे 5000 अंकों का है।

छत्तीसगढ़ : अडानी को खदान देने कराई फर्जी ग्राम सभा, कलेक्टर बोले-फर्जी कैसे, दस्तखत हैं

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रायपुर। यह मामला तब उठा जब बीते शनिवार को किरंदुल से 11 किलोमीटर दूर बचेली तक पैदल मार्च कर आदिवासी अपनी शिकायत एसडीओ को सौंपने आए। दंतेवाड़ा जिले के बचेली और किरंदुल में राष्ट्रीय खनिज विकास निगम की दो परियोजनाएं बीते 60 सालों से चल रही हैं। हाल के वर्षों में बैलाडीला पहाड़ों में छिपे उच्च क्वालिटी के लौह अयस्क को निजी कंपनियों को सौंपने के लिए कई एमओयू किए गए हैं।

आदिवासी निजी कंपनियों को लोहा नहीं देना चाहते, इसी बात का विरोध है। आरोप है कि किरंदुल के हिरोली में अडानी को जो खदान दी गई है उसके लिए तो ग्राम सभा ही नहीं कराई गई। एनएमडीसी को जो पुरानी सहमति मिली थी उसी के आधार पर खदान अडानी को सौंप दी गई। जबकि आलनार में आरती स्पंज को जो खदान दी गई है उसमें फर्जी ग्राम सभा कराई गई है।

लोगों के विरोध के बाद भी ग्राम सभा की सहमति लिख दी जाती है। आदिवासियों ने सर्व आदिवासी समाज के बैनर तले रैली निकाली। इसके बाद थोड़ी हलचल हुई लेकिन मामले की जांच नहीं की गई। कलेक्टर टोपेश्वर वर्मा कह रहे हैं कि ग्राम सभा फर्जी कैसे होगी। सभी के दस्तखत उसमें हैं। जबकि ग्रामीणों का कहना है कि कई लोगों के फर्जी अंगूठे लगाए गए। पढ़े लिखे बच्चों की गैर मौजूदगी में उनके बुजुर्ग मां-बाप से अंगूठा लगवाया गया।

यह है मामल

हिरोली में 706 हेक्टेयर 13 नंबर खदान की लीज एनएमडीसी को दी गई है। 2010 में हुए इस अधिग्रहण में फर्जी ग्राम सभा कराने का आरोप है। बाद में एनएमडीसी ने सीएमडीसी (छत्तीसगढ़ मिनरल डवलपमेंट कार्पोरेशन) से अनुबंध कर लिया। फिर सीएमडीसी ने अपना काम टेंडर के जरिए अडानी को सौंप दिया। 23 जनवरी 2019 को ग्रामीणों ने एक और ग्राम सभा की और अडानी की परियोजना के खिलाफ प्रस्ताव पारित किया।

फिर भी वहां काम शुरू हो चुका है। वहीं आलनार गांव में 31.55 हेक्टेयर भूमि आरती स्पंज रायपुर को दी गई है। इसका भी ग्राम सभा विरोध कर रही है। ग्रामीणों ने तो इस इलाके में जितनी भी ग्राम सभा हुई है सभी को फर्जी बताया है। इसमें जिंदल, एस्सार भी शामिल हैं।

क्या कहते हैं ग्रामीण

इस खदान से प्रभावित गुमियापाल के मंगल कुंजाम कहते हैं कि जब पूरा गांव विरोध में है तब कैसे ग्राम सभा सफल हो जाती है। 28 फरवरी को कोड़नार में एनएमडीसी की पहले से चल रही 11 सी खदान के नवीनीकरण को लेकर ग्राम सभा हुई। इसमें भी विरोध किया गया लेकिन सुनवाई नहीं हुई।

को सफल मान लिया गया। मंगल ने कहा कि हिरोली में पांच सौ की आबादी वाले गांव में सिर्फ 106 लोगों के हस्ताक्षर ग्राम सभा के प्रस्ताव में हैं। इनमें से ज्यादातर ने अंगूठा लगाया है। इसकी जांच होनी चाहिए।

ज्ञापन मिलेगा तो जांच करूंगा

कलेक्टर टोपेश्वर वर्मा ने कहा कि अभी मुझे आदिवासियों को ज्ञापन नहीं मिला है। मिलेगा तो जांच करूंगा। उन्होंने कहा कि वैसे मैंने सारे दस्तावेज मंगाकर देखे हैं। ग्रामीणों ने दस्तखत किया है तो फर्जी कैसे होगा। हम तो सारे लोगों को बुलाकर ही ग्राम सभा कराते हैं। सबके सामने दस्तखत लिए गए हैं। अभी 28 फरवरी को कोड़ेनार में सबके सामने दस्तखत हुआ, ये लोग उसको भी फर्जी बोल रहे हैं। हम जहां भी ग्राम सभा कराने जाते हैं गांव के लोगों से ज्यादा बाहर के लोगों की भीड़ जुट जाती है और शोरगुल करने लगती है।

मेरे पास शिकायत भेजो तो देखूं

मंत्री कवासी लखमा ने विधानसभा में कहा था-अडानी को नहीं घुसने देंगे। इसके बाद ही आदिवासी सड़कों पर उतरे हैं। हालांकि लखमा को इस बारे में जानकारी नहीं है। बोले-मेरे पास शिकायत आई तो जांच कराऊंगा।

मोदी सरकार में रोजगार को लेकर एक और शर्मनाक रिकॉर्ड, ढाई साल में उच्चतम स्तर पर पहुंचा बेरोजगारी दर

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2014 लोकसभा चुनाव के दौरान वादा किया था कि अगर उनकी सरकार बनी तो हर साल 2 करोड़ लोगों को रोजगार दिया जाएगा। अब जबकि उनका कार्यकाल अब खत्म होने को है। ऐसे में उनसे लोग रोजगार को लेकर सवाल पूछ रहे हैं। इस बीच सेंटर फॉर मॉनिटरिंग इंडियन इकोनॉमी (सीएमआईई) की तरफ से जारी आंकड़ों के मुताबिक फरवरी 2019 में बेरोजगारी दर 7.2 फीसदी तक पहुंच गई। यह सितंबर 2016 के बाद की उच्‍चतम दर है, फरवरी 2018 में बेरोजगारी दर 5.9 प्रतिशत रही थी। सीएमआईई ने यह आंकड़ा मंगलवार को जारी किया।

रॉयटर्स से बातचीत में मुंबई के थिंक-टैंक के प्रमुख महेश व्‍यास ने कहा कि रोजगार की तालश करने वालों की संख्‍या में गिरावट के बावजूद बेरोजगारी दर में बढ़ोतरी हुई है। उन्‍होंने इसके लिए श्रम बल भागीदारी दर में अनुमानित गिरावट का हवाला दिया। उन्होंने कहा कि फरवरी 2019 में देश के 4 करोड़ लोगों के पास रोजगार होने का अनुमान है, जबकि साल भार पहले यही आंकड़ा 4.06 करोड़ था।

गौरतलब है कि सीएमआईई के आंकड़े देश भर के लाखों घरों के सर्वेक्षण पर आधारित हैं। कई अर्थशास्त्रियों द्वारा इन आंकड़ों को सरकार द्वारा जारी किए जाने वाले बेरोजगारी के आंकड़ों की तुलना में अधिक विश्वसनीय माना जाता है। अब ऐसे में मई में संभावित आम चुनाव से पहले बेरोजगारी दर में ऐसी वृद्धि पीएम मोदी के लिए चिंता का सबब बनने वाली है।

इससे पहले सेंटर फॉर इंडियन इकॉनोमी (सीएमआईई) ने कहा था कि 2017 के शुरुआती 4 महीनों में 15 लाख नौकरियां खत्म हो गई है। यानी नोटबंदी की सीधी मार लाखों लोगों के रोजगार पर पड़ी थी। सीएमआईई का सर्वे बताता था कि शहरी इलाकों में बेरोजगारी की दर 7.8 प्रतिशत थी जो ग्रामीण इलाकों से भी ज्यादा है। देहाती इलाके में सर्वे के मुताबिक 5.3 प्रतिशत बेरोजगारी दर दिखी थी। शहरी इलाकों में 15 से 29 वर्ष के पुरुषों के बीच बेरोजगारी दर 18.7 प्रतिशत रही थी जबकि 2011-12 में यह आंकड़ा 8.1 प्रतिशत था। शहरी इलाकों में महिलाओं के बीच 2017-18 के दौरान 27.2 प्रतिशत बेरोजगारी दर्ज की गई थी।

हाल ही में मोदी सरकार पर बेरोजगारी के आंकड़े को छुपाने का भी आरोप लग चुका हैं। इतका ही नहीं मोदी सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए नेशनल स्टेटिस्किल कमीशन के दो अधिकारियों ने अपना इस्तीफा तक दे दिया था। जिस सरकारी आंकड़े को उन्होंने छुपाने कोशिश की थी वो आंकड़े ने खुलासा किया था कि देश में बेरोजगारी 45 साल के उच्चतम स्तर को छूते हुए 6.1 फीसदी पर पहुंच चुकी है। यह आकंड़ा नेशनल सैंपल सर्वे ऑफिस के पीरियोडिक लेबर फोर्स सर्वे से सामने आया था। एक रिपोर्ट में कहा गया था कि यही वह रिपोर्ट जिसे लेकर विवाद है और जिसे लेकर नेशनल स्टेटिस्किल कमीशन यानी एनएससी के चेयरमैन समेत दो सदस्यों ने इस्तीफा दे दिया था। इन लोगों का आरोप था कि सरकार ने इस रिपोर्ट को छिपाकर रखा है और सार्वजनिक करने में आनाकानी कर रही है।

Pakistan को बड़ा झटका, US अब 5 साल की जगह बस 3 महीने के लिए देगा वीजा

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वॉशिंगटन। अमेरिका ने पाकिस्तानी नागरिकों को जारी किए जाने वाले वीजा की अवधि पांच साल से घटाकर तीन महीने कर दी गई है। यह घोषणा पाकिस्तानी पत्रकारों पर भी लागू होगी और उन्हें भी तीन महीने के लिए ही वीजा जारी किया जाएगा। यह जानकारी अमेरिकी दूतावास के प्रवक्ता ने दी।

उन्होंने बताया कि इसके साथ ही अमेरिकी सरकार ने पाकिस्तानियों के लिए वीजा आवेदन शुल्क भी बढ़ाकर 160 डॉलर (11,298 रुपए) से बढ़ाकर 192 डॉलर (13,577 रुपए) कर दिया है। अमेरिकी दूतावास के प्रवक्ता ने बताया कि ताजा कदम पाकिस्तानी सरकार की वीजा नीति और शुल्क में संशोधन के जवाब में किया गया था।

प्रवक्ता ने कहा कि इस्लामाबाद ने अमेरिकी नागरिकों के लिए वीजा अवधि कम कर दी थी और वीजा के शुल्क को पहले ही बढ़ा दिया था। हालांकि, सरकारी अधिकारियों को वीजा जारी करने के मामले में अमेरिकी प्रशासन उनकी कार्य अवधि को देखेगा।

इससे पहले पिछले साल मई में पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय ने पाकिस्तानी राजनयिकों पर अमेरिकी प्रतिबंधों के लागू होने के एक दिन बाद अमेरिकी राजनयिकों पर भी वैसे ही प्रतिबंध लगा दिए थे। यह कदम राजनयिकों पर ’पारस्परिक’ यात्रा प्रतिबंधों के तहत उठाया गया था।

अमेरिकी सरकार ने 11 मई 2018 को पाकिस्तानी अधिकारियों को सूचित किया था कि वाशिंगटन दूतावास और वाणिज्य दूतावास के राजनयिकों को पूर्व अनुमति के बिना अपनी तैनाती की जगह से 40 किलोमीटर से अधिक की यात्रा करने से रोक दिया जाएगा।

जैफ बेजोस दुनिया में सबसे अमीर, टॉप-20 में मुकेश अंबानी अकेले भारतीय

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नई दिल्ली। फॉर्ब्स ने दुनिया के सबसे धनी लोगों की लिस्ट जारी कर दी है। अमेजन कंपनी के मालिक जैफ बेजोस दुनिया के सबसे धनी शख्स हैं। वहीं टॉप-20 में मुकेश अंबानी अकेले भारतीय हैं। टॉप-20 में केवल दो महिलाएं हैं। ये हैं – फ्रेंकोइस बेटनकोर्ट और एलिस वाल्टन। एलिस क्रिस्टल ब्रिज म्युजियम ऑफ अमेरिकन आर्ट की चेयनमैन हैं। देखें लिस्ट-

1. जैफ बेजोस

2. बिल गेट्स

3. वॉरेन बफेट

4. बर्नार्ड अरनॉल्ट एंड फैमिली

5. कर्लोस स्लिम हेलु एंड फैमिली

6. अमेंकियो ऑर्टेगा

7. लैरी एलिसन

8. मार्क जकरबर्ग

9. माइकल ब्लूमबर्ग

10. लैरी पेज

11. चार्ल्स कोच

12. डेविड कोच

13. मुकेश अंबानी

14. सेर्गी ब्रिन