Home Blog Page 3173

छत्तीसगढ़ :मनरेगा से होगी स्थाई कमाई, सरकार बना रही ऐसा प्लान

0

रायपुर। छत्तीसगढ़ में मनरेगा के माध्यम से सरकार स्थायी आमदनी बढ़ाने वाले कार्यों पर फोकस करेगी। कांग्रेस सरकार गांवों को आर्थिक रूप से मजबूत करने की दिशा में काम कर रही है। इसको देखते हुए पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री टीएस सिंहदेव ने मंगलवार को मंत्रालय में वीडियो कॉन्फ्रेसिंग के जरिए प्रदेश में मनरेगा (महात्मा गांधी ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना) के अंतर्गत संचालित कार्यों की समीक्षा की। उन्होंने मनरेगा में लोगों की स्थायी रूप से आमदनी बढ़ाने वाले कार्यों को प्राथमिकता देने के निर्देश दिए।

उन्होंने कहा कि नरवा, गरूवा, घुरवा और बाड़ी संवर्धन ग्रामीण अर्थव्यवस्था की मजबूती और स्थानीय लोगों को स्थायी रोजगार उपलब्ध कराने शासन की महत्वाकांक्षी योजना है। मनरेगा के तहत ग्राम पंचायतों में शुरू किए गए गौठान एवं चारागाह विकास के कार्यों में तेजी लाने का निर्देश भी दिया।

प्रदेश के हर पंचायत में मनरेगा कार्य शुरू होना चाहिए। प्रदेश में एक भी पंचायत ऐसा नहीं होना चाहिए, जो इस योजना के लाभ से वंचित रहे। मनरेगा के तहत ऐसे कार्यों का चुनाव करें, जिससे परिसंपत्ति निर्माण के साथ ही अधिक से अधिक लोगों को रोजगार मिलें।

आगामी वित्तीय वर्ष के लिए छत्तीसगढ़ में 13 करोड़ रोजगार दिवस की स्वीकृति भारत सरकार से मिली है। इस दौरान एसीएस आरपी मंडल, रीता शांडिल्य, भीम सिंह और जीतेन्द्र शुक्ला भी मौजूद थे।

15 फीसदी गांव में बनने लगे गौठान-चारागाह

अधिकारियों ने बताया कि प्रदेश के 15 प्रतिशत चयनित पंचायतों में गौठान और चारागाह विकास की दिशा में काम शुरू कर दिया गया है। इसके लिए चयनित एक हजार 646 पंचायतों में से 440 पंचायतों में कार्य स्वीकृत कर 130 पंचायतों में काम शुरू भी कर दिया गया है।

के लिए मनरेगा मद से 45 करोड़ 79 लाख और अन्य मदों से एक करोड़ 83 लाख स्र्पये की राशि मंजूर की गई है। सिंहदेव ने मनरेगा मजदूरी भुगतान, ज्योग्राफिकल इनफॉर्मेशन सिस्टम का उपयोग करते हुए एकीकृत कार्ययोजना तैयार करने, प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन (एनआरएम) और मनरेगा के अंतर्गत प्रगतिरत निर्माण कार्यों की भी समीक्षा की।

छत्तीसगढ़ : रमन ने बनवाया शहीद स्मारक, भूपेश सरकार ने उद्घाटन में नहीं बुलाया, सियासत शुरू

0

रायपुर। राजधानी के शहीद स्मारक के उद्घाटन पर सियासत गरम हो गई है। भाजपा ने उद्घाटन समारोह में पूर्व मुख्यमंत्री डॉ रमन सिंह को नहीं बुलाने पर भूपेश सरकार पर निशाना साधा है। पूर्व मंत्री राजेश मूणत ने एक वीडियो जारी करके कहा कि शहीदों के सम्मान की परिकल्पना भाजपा सरकार ने की थी, लेकिन सरकार इस पर राजनीति कर रही है। इस मुद्दे पर राजनीति से उपर उठकर सोचने की जरूरत है।

भाजपा प्रवक्ता सच्चिदानंद उपासने ने कहा कि पूर्व मंत्री राजेश मूणत के कार्यकाल में निर्मित 3डी पिक्चर के माध्यम से क्रांतिकारियों की जीवन के नित्य प्रदर्शन के लिए भव्य डोम से युक्त शहीद स्मारक का लोकार्पण 10 अक्टूबर को होना था,लेकिन चुनाव आचार संहिता के चलते यह कार्यक्रम टल गया।

शहीद स्मारक भवन के नवस्वरूप का बुधवार को प्रदेश सरकार उदघाटन करने जा रही है, इस पर खुशी जाहिर करते हुए प्रवक्ता सच्चिदानंद उपासने ने कहा कि प्रदेश की जनता को मिलने वाली इस सौगात के पीछे शहर को सुन्दर स्वरूप देने की भाजपा सरकार की सोच थी।

साथ ही देश भर के क्रांतिकारियों जिसमें छत्तीसगढ़ के वीर सपूत शहीद वीर नारायण सिंह भी शामिल है, के जीवनी से आम जनता को परिचित कराने का उद्देश्य साकार होने जा रहा है।

भवन की भव्यता एवं उद्देश्य पर उन्होंने कहा कि हर कहीं संकीर्ण मानसिकता का परिचय देने वाली कांग्रेस सरकार आज जिस स्काई वाक पर हल्ला मचा रही है, उसी पर चलते हुए शहर एवं राज्य की जनता शहीद स्मारक के समीप क्रांतिकारी वीर शहीदों के शौर्य से परिचित हो सकती थी। यह विडंबना ही है, कार्यक्रम में पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह को सरकार ने आमंत्रित करना भी उचित नहीं समझा। यह कांग्रेस पार्टी एवं उनके मुख्यमंत्री की संकीर्णता का परिचायक है।

छत्तीसगढ़ में लागू नहीं हो रहा सवर्ण आरक्षण, भाजपा ने घेरा

0

रायपुर। छत्तीसगढ़ में अब भाजपा ने सवर्ण आरक्षण के मुद्दे पर भूपेश सरकार को घेरना शुरू कर दिया है। केंद्र की एनडीए सरकार द्वारा संविधान संशोधन कर पूर्व में घोषित आरक्षण में किसी प्रकार का बदलाव किये बिना गरीब सवर्णों को 10 फीसदी आरक्षण आर्थिक आधार पर देने का निर्णय लिया है। भाजयुमो के पदाधिकारियों ने सांसद रमेश बैस को ज्ञापन सौंपा। इसमें छत्तीसगढ़ में सरकार को 10 फीसदी आरक्षण लागू करने की मांग की। भाजयुमो पदाधिकारियों के ज्ञापन के बाद बैस ने मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को पत्र लिखा है।

बैस ने कहा कि गरीब सवर्णों के लिए बहुत ही आवश्यक है। देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आर्थिक आधार पर गरीब सवर्णों को आरक्षण प्रदान कर देश में एक नई शुरुआत की है, जो मील का पत्थर साबित होगा। छत्तीसगढ़ में कांग्रेस की भूपेश बघेल की सरकार 10 फीसदी गरीब सवर्णों को आरक्षण लागू नहीं कर रही है।

बैस ने कहा कि प्रदेश में भी इसे तत्काल लागू करना चाहिए। सरकार पर निशाना साधते हुए बैस ने कहा कि राजनीतिक रूप से सवर्णों के आरक्षण को रोक कर रखा गया है। इस दौरान भारतीय जनता युवा मोर्चा के प्रदेश पदाधिकारी दीपक बैस, अनुराग पांडे, अनुराग अग्रवाल, सुनील चौधरी, विजय जयसिंघानी, राजेश पांडे, अमित मैसेरी, अकबर अली, सुमित शर्मा, उमेश घोरमोड़े सहित अन्य मौजूद थे।

आरपेशन में सेना लाश गिनने कांग्रेसियों को ले जाए साथ

सांसद रमेश बैस ने सर्जिकल आपरेशन पर कांग्रेस नेताओं पर निशाना साधा है। बैस ने कहा कि अगली बार सेना आपरेशन करे तो कांग्रेस नेताओं को लाश गिनने के लिए साथ लेकर जाए। बैस ने कहा कि आतंकी कब, कहां से आते हैं, किसी को पता नहीं चलता है। सेना ने भी माना है कि हमारी चूक हुई है। राष्ट्र की सुरक्षा जैसे मुद्दे पर राजनीति नहीं होनी चाहिए। कोई सरकार नहीं चाहती कि उसके जवान मारे जाएं। प्रधानमंत्री के इस्तीफे का सवाल ही नहीं उठता है, उन्होंने तुरंत एक्शन लिया है।

राकेश सिंह – लोग चाहते हैं नरेंद्र मोदी ही बनें फिर से प्रधानमंत्री

0

विधानसभा चुनाव में किसी को उम्मीद नहीं थी कि भाजपा की सरकार नहीं बनेगी। सिर्फ तीन सीटों से भाजपा पीछे रह गई लेकिन अब सब कुछ भूलकर कार्यकर्ता पूरे जोश से मैदान में उतर गए हैं। विधानसभा और लोकसभा चुनाव के मुद्दे और मानस भी अलग-अलग होता है। अब ये चुनाव केंद्रीय और राष्ट्रीय मुद्दों पर हो रहा है। देश की जनता यह तय कर चुकी है कि नरेंद्र मोदी का कोई विकल्प नहीं है। वे ही दोबारा प्रधानमंत्री बनें। लोकसभा चुनाव में प्रदेश से भाजपा को बड़ी जीत हासिल होगी। भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष राकेश सिंह ने यह विश्वास जताया है।

मंगलवार को नईदुनिया कार्यालय पहुंचे सिंह ने कहा कि इतने कम समय में किसी भी सरकार के खिलाफ ऐसा विरोधाभासी माहौल बनना संभव नहीं होता, जैसा मध्यप्रदेश की कांग्रेस सरकार के खिलाफ बन रहा है। किसान नाराज हैं क्योंकि कर्जमाफी का वादा पूरा नहीं किया गया। युवा नाराज हैं क्योंकि उन्हें भत्ता देने का वादा पूरा नहीं किया गया। अब 100 दिन में देने का आश्वासन दिया जा रहा है। तबादला उद्योग का रूप ले चुका है। इससे शासकीय अधिकारी और कर्मचारी नाराज हैं।

सबसे बड़ी बात इन्हें कोई फर्क भी नहीं पड़ता। सतना में दो बच्चों का अपहरण कर हत्या कर दी जाती है। मुख्यमंत्री कमलनाथ के चेहरे पर शिकन तक नहीं आती। बच्चों के अपहरण के दौरान कानून-व्यवस्था की बिगड़ती स्थिति के खिलाफ स्थानीय भाजपा नेता आंदोलन करना चाहते थे लेकिन मैंने उन्हें यह कहकर रोक दिया कि कहीं बच्चों के जीवन पर खतरा न पैदा हो जाए। उनके साथ कोई दुर्घटना न हो जाए। बच्चों को तीन दिन तक घर के पास ही रखा गया और पुलिस पता तक नहीं लगा पाई। उसके बाद भी सरकार के कानों पर जूं तक नहीं रेंगती।

जीतने की संभावना देखकर केंद्रीय नेतृत्व तय करेगा टिकट : सिंह ने कहा कि जहां तक लोकसभा की बात है तो टिकटों का वितरण केंद्रीय नेतृत्व सोच समझकर और उम्मीदवारों के जीतने की संभावना देखकर तय करेगा। जहां तक विधानसभा चुनाव की बात है तो यदि टिकटों का वितरण और बेहतर तरीके से करते तो स्थिति और बेहतर हो सकती थी।

किसी का टिकट काटना बेहद कठिन कार्य

विधानसभा चुनाव में उम्मीदवारों का चयन कहीं न कहीं जीत में रोड़ा बना। लोकसभा चुनाव में इसे कैसे बेहतर करेंगे? इस प्रश्न पर भाजपा के प्रदेशाध्यक्ष ने कहा कि जब आप टिकटों के वितरण पर बात करते हैं तो यह बेहद कठिन काम होता है कि किसी का टिकट काटा जाए। व्यवस्था को बदलना भी चुनौती होती है। विधानसभा चुनाव के दौरान टिकट बदले भी गए, पहले से ज्यादा बदले गए। पार्टी का अध्यक्ष होने के नाते मेरा प्रयास भी था कि टिकटों के परिवर्तन और वितरण में मैं कहीं अवरोध न बनूं। मुझे लगता है कि मैंने उस भूमिका का निर्वाह किया।

पूरे उत्साह से जनता के बीच जा रहे’

संगठन में शिथिलता की वजह से विधानसभा चुनाव में नुकसान हुआ, लोकसभा में ऐसा न हो, इसके लिए क्या प्रयास कर रहे हैं? इस सवाल पर सिंह ने कहा कि भाजपा में सभी चीजें एक निश्चित व्यवस्था और क्रम के आधार पर चलती हैं। अध्यक्ष बदलने से भी पूरी व्यवस्था नहीं बदलती। मेरी कोशिश यही रही कि अध्यक्ष बनने के बाद प्रदेश में ज्यादा से ज्यादा दौरे करूं और कार्यकर्ताओं से मिलकर उनके मन की बात जान सकूं। मैंने कार्यकर्ताओं को आक्रामक तरीके से दोबारा मैदान में आने के लिए प्रोत्साहित किया। पहले यह माना जा रहा था कि विधानसभा चुनाव में भाजपा अच्छी सीटें नहीं लाने वाली है, लेकिन तीन सीटें ही कम हुईं। हां कुछ विषयों को ठीक से जनता तक पहुंचा नहीं पाए। लेकिन अब कार्यकर्ता इस मानसिकता में आ गए हैं कि हमें सरकार बनाना ही है। इसलिए कार्यकर्ता पूरे उत्साह से जनता के बीच जा रहे हैं।

बालाकोट में ‘292 चरमपंथियों की मौत’ का सच क्या है?

0

बालाकोट के स्थानीय निवासी अब्दुरबान के मुताबिक़, ये हमला उनके घर से चार किलोमीटर दूर हुआ था

सोशल मीडिया पर एक कथित व्हॉट्सऐप चैट के हवाले से ये दावा किया जा रहा है कि पाकिस्तान के बालाकोट में हुए भारतीय वायु सेना के हमले में 292 चरमपंथियों की मौत हुई थी.

जिन लोगों ने व्हॉट्सऐप ग्रुप्स में और फ़ेसबुक ग्रुप्स में इस कथित बातचीत के स्क्रीनशॉट शेयर किए हैं, उन्होंने दावा किया है कि ये बातचीत उनके किसी भारतीय दोस्त और बालाकोट में रहने वाले ‘डॉक्टर इजाज़’ नाम के किसी शख़्स के बीच हुई है.

अधिकांश लोगों ने इसी दावे के साथ 3 स्क्रीनशॉट शेयर किए हैं.

कुछ लोगों ने ये भी दावा किया है कि ‘जिस शख़्स का नाम स्क्रीनशॉट में दिख रहा है, वो बालाकोट में ही डॉक्टर है और जिस दिन एयर-स्ट्राइक हुई वो घटनास्थल के पास ही मौजूद थे. इसलिए वो मृतकों का सही आंकड़ा बता सकते हैं’.

स्क्रीनशॉट में है क्या?

सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे इस ‘चैट’ पर नज़र डालें तो इसकी शुरुआत कुछ इस तरह से होती है:

पात्र 1: अरे भाई ये क्या है… कल जो एयर स्ट्राइक की है इंडियन आर्मी ने… ये सच्ची ख़बर है है या मीडिया यूं ही दिखा रही है?

पात्र 2: जनाब, एयर फ़ोर्स के कुछ प्लेन घुस गए थे बालाकोट और नज़दीकी एरिया में… पर ये ग़लत है ना एलओसी क्रॉस करना… ख़ैर अल्लाह रहम करे.

पात्र 1: हाँ, कुछ 12 प्लेन गए थे… पर यार पाकिस्तान का जैश-ऐ-मोहम्मद हमला करवाता है तो इंडिया जवाब तो देगा ही ना… और भाई ये बताओ कितने लोग मारे गए?

पात्र 2: भाई… कोई लोकल नहीं मारा गया… जो मारे गए वो चरमपंथी थे… हम ख़ुद इनसे परेशान थे.

इसके बाद की कथित बातचीत का हिस्सा ये है जिसे सोशल मीडिया पर सबसे ज़्यादा बार शेयर किया गया है.

साधारण गपशप में हो रही इस बातचीत का स्क्रीनशॉट, जिसमें कुछ तथ्य और आंकड़े दिए गए हैं.

इस स्क्रीनशॉट में मृतकों की संख्या तक़रीबन उतनी ही बताई गई है जितनी भारत के कुछ मीडिया चैनल अपुष्ट सूचनाओं के आधार पर बताते रहे हैं.

भारतीय जनता पार्टी के अध्यक्ष अमित शाह ने भी रविवार को इस हमले में 250 से ज़्यादा चरमपंथियों के मारे जाने की बात कही थी.

भारतीय वायु सेना प्रमुख बीएस धनोआ ने सोमवार को कहा कि हमले में मारे गए लोगों की संख्या गिनने का काम वायु सेना का नहीं है. वायु सेना को जो लक्ष्य दिए गए थे, वो उन्होंने हिट किए.

भारत सरकार ने आधिकारिक तौर पर इस हमले में मारे गए लोगों की संख्या पर कोई बयान जारी नहीं किया है.

मैसेज – सच या झूठ?

जिस व्हॉट्सऐप मैसेज के आधार पर लोग 292 चरमपंथियों के मारे जाने की बात को सही समझ रहे हैं वो दरअसल एक गढ़ा हुआ फ़ेक मैसेज लगता है क्योंकि सबसे अहम बात ये है कि पाकिस्तान के बालाकोट कस्बे में कोई मेडिकल यूनिवर्सिटी है ही नहीं.

बालाकोट पाकिस्तान के ख़ैबर पख़्तुनख़्वा प्रांत के मानशेरा ज़िले में है. ये कस्बा सिंधु घाटी सभ्यता के चार प्राचीन तटीय इलाक़ों में से एक है और कुनहर नदी के तट पर बसा हुआ है.

पाकिस्तान में पर्यटन के लिए काफ़ी लोकप्रिय बालाकोट देश की राजधानी इस्लामाबाद से क़रीब 160 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है.

पाकिस्तान की मेडिकल व डेंटल काउंसिल के अनुसार बालाकोट कस्बे के लोगों के लिए सबसे नज़दीकी सरकारी मेडिकल कॉलेज एबटाबाद में स्थित है.

भारतीय वायु सेना ने मंगलवार 26 फ़रवरी को जब बालाकोट के पास बम गिराए थे तब वहां पहुँचकर स्थानीय लोगों और प्रत्यक्षदर्शियों से सबसे पहले बात करने वाले बीबीसी के सहयोगी एम ए जर्राल ने भी इस बात की पुष्टि की है.

उन्होंने बताया, “बालाकोट में कोई मेडिकल यूनिवर्सिटी नहीं है. बालाकोट में सिर्फ़ एक ‘बुनियादी हेल्थ यूनिट’ है जिसमें एक डॉक्टर होता है और कुछ स्टाफ़ के लोग होते हैं. यहाँ मरीज़ों को भर्ती करने की सुविधा न के बराबर है.”

जर्राल बताते हैं, “हमले के बाद हमने बालाकोट, मानसेरा और गढ़ी बुल्ला के ‘बुनियादी हेल्थ यूनिट’ जाकर देखे थे, लेकिन वहाँ कोई घायल आदमी हमें नहीं मिला था. ये सभी हेल्थ सेंटर हमले की जगह से क़रीब आधा घंटा की दूरी पर स्थित हैं.”

पाकिस्तान के पंजाब से वास्ता रखने वाले पत्रकार शिराज़ हसन ने ट्विटर पर इस वायरल संदेश का ये कहते हुए मज़ाक उड़ाया है कि पाकिस्तान में ‘आतंकवाद’ और ‘घायलों’ जैसे शब्द इस्तेमाल नहीं किए जाते.

अयोध्या विवाद में मध्यस्थता पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला आज

0

नई दिल्ली। अयोध्या राम जन्मभूमि विवाद मामले में सुप्रीम कोर्ट बुधवार को अहम फैसला सुनाएगा। कोर्ट हिंदू-मुस्लिम पक्षों के बीच आपसी सहमति से मध्यस्थता के जरिए विवाद सुलझाने पर फैसला देगा। कोर्ट तय करेगा कि कौन दोनों पक्षों के बीच सहमति से विवाद सुलझाने में मध्यस्थता करेगा।

अयोध्या राम जन्मभूमि विवाद की सुनवाई कर रही पांच न्यायाधीशों की संविधान पीठ ने गत 26 फरवरी को हिंदू-मुसलमान पक्षों के बीच मध्यस्थ के जरिए आपसी सहमति से विवाद सुलझाने का प्रस्ताव दिया था। कोर्ट ने कहा था कि अगर बातचीत के जरिए विवाद सुलझने की एक फीसदी भी उम्मीद है तो कोशिश होनी चाहिए।

कोर्ट ने अपने प्रस्ताव पर पक्षकारों की राय पूछी थी, जिसमें मुस्लिम पक्ष व निर्मोही अखाड़ा की ओर से सहमति जताई गई थी। रामलला, महंत सुरेश दास और अखिल भारत हिंदू महासभा ने प्रस्ताव से असहमति जताते हुए कोर्ट से ही जल्द फैसला सुनाने का आग्रह किया था। उनका तर्क था कि इस प्रकार के प्रयास पूर्व में भी हो चुके हैं, लेकिन कोई नतीजा नहीं निकला।

इस पर संविधान पीठ का कहना था कि उस समय प्रस्ताव कोर्ट की ओर से नहीं आया होगा। दोनों पक्षों की राय सुनने के बाद कोर्ट ने मध्यस्थ पर फैसला छह मार्च तक के लिए टाल दिया था। पिछली सुनवाई के दौरान कोर्ट ने यह संकेत भी दे दिया था कि मध्यस्थता के नाम पर मामला अनिश्चित काल के लिए नहीं टलेगा।

कोर्ट ने कहा था कि आठ सप्ताह में जब तक पक्षकार मामले से जुड़े दस्तावेजों का अनुवाद जांचेंगे, तब तक मध्यस्थता के जरिये विवाद हल करने की एक कोशिश की जाए। कोर्ट उसके बाद लंबित अपीलों पर सुनवाई करेगा। इलाहाबाद हाई कोर्ट ने 2010 में अयोध्या में राम जन्मभूमि को तीन बराबर हिस्सों में बांटने का आदेश दिया था।

हाई कोर्ट के इस फैसले को रामलला सहित सभी 14 पक्षकारों ने सुप्रीम कोर्ट मे चुनौती दी है। सुप्रीम कोर्ट ने यथास्थिति के आदेश दिए थे। मामले की सुनवाई चीफ जस्टिस रंजन गोगोई, जस्टिस एसए बोबडे, जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़, जस्टिस अशोक भूषण और जस्टिस एस अब्दुल नजीर की पांच सदस्यीय संविधान पीठ कर रही है।

ल्ली के दीनदयाल अंत्योदय भवन में आग, सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय का दफ्तर चपेट में

0

दिल्ली में सीजीओ कॉम्प्लेक्स स्थित दीनदयाल अंत्योदय भवन में भीषण आग लग गई है। सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय का दफ्तर भी आग की चपेट में आ गया है। मौके पर दमकल की 24 गाड़ियां मौजद हैं। आग पर काबू पाने की कोशिश जारी है।

छत्तीसगढ़ : रायपुर आईआईटी के होस्टल में लगी भीषण आग, विद्यार्थियों का सामान जला

0

रायपुर। आईआईटी के होस्टल में मंगलवार को भीषण आग लग गई। इस दौरान अफरातफरा मच गई। आग के कारण होस्‍टल में रह रहे करीब 150 विद्यार्थियों को बाहर निकालना पड़ा।जानकारी के अनुसार रात करीब दस बजे होस्‍टल में आग लगी। खासी मशक्‍कत के बाद आग पर काबू पाया गया। सेजबहार के शासकीय इंजीनियरिंग कॉलेज परिसर में गर्ल्स हॉस्टल है

सूचना पर फायर ब्रिगेड की 2 गाड़ियां मौके पर पहुंच गई थी। बताया जाता है कि जिस समय होस्‍टल में आग लगी तब सभी लड़के और लड़कियां होस्टल में मौजूद थे । पहले फ्लोर के छठ वेविंग में बालक एवं बालिका दोनों रहते हैं ।

हालांकि अभी आप का कारण पता नहीं चल सका है । लेकिन यह माना जा रहा है कि शॉर्ट सर्किट की वजह से आग लगी है। आग से कोई भी जन क्षति नहीं हुई है। आग की वजह से होस्टल में रह रहे छात्र छात्राओं के रूम में रखा सामान जल गया है। आईआईटी का होस्टल गवर्नमेंट इंजीनियरिंग कॉलेज के परिसर में संचालित है।

जिस समय आगे की घटना हुई उस दौरान डेढ़ सौ से ज्यादा छात्र-छात्राएं मौजूद थे। अब प्रबंधन छात्रों और छात्राओं के लिए होस्टल के अन्य हॉल और रूम में दरी बिछाकर रुकने की और सोने की व्यवस्था बना रहा है।

टीचर की घर में गर्दन रेतकर हत्या

0

झारखण्ड में ओरमांझी थाना से महज 500 मीटर की दूरी पर स्थित एक घर में घुसकर अज्ञात अपराधियों ने एक स्कूल शिक्षिका की गर्दन रेतकर हत्या कर दी गई। घटना के समय शिक्षिका अपने घर में अकेली थी। शिक्षिका का नाम प्रियंका कुमारी है और वह सिलदिरी गांव स्थित आदित्य पब्लिक स्कूल में पढ़ाती थी।

सूचना मिलने के बाद डीएसपी चंद्रशेखर आजाद मौके पर पहुंचे और मामले की जानकारी ली। सिल्ली डीएसपी चंद्रशेखर आजाद ने घटना के संबंध में जानकारी देते हुए कहा कि प्रियंका की बड़ी बहन मिनी कुमारी शाम लगभग 6 बजे अपने घर पहुंची तो देखा कि प्रियंका की गर्दन रेती हुई है।

इसके बाद वह शोर मचाने लगी, इसके बाद आस-पास के लोग जमा हो गए और मामले की जानकारी पुलिस को दी। फिलहाल, पुलिस को यह जानकारी नहीं मिल पाई है कि घटना का अंजाम किसने और क्यों दिया।

घटना के बाद पुलिस ने मृतका के मोबाइल को जब्त कर लिया है। पुलिस शिक्षिका के मोबाइल का सीडीआर निकाल रही है और मोबाइल के सहारे अपराधियों तक पहुंचने का प्रयास कर ही है।

हालांकि अभी तक पुलिस को अपराधियों के बारे में कोई अहम जानकारी नहीं मिल पाई है। पुलिस मामले में प्रेम प्रसंग को ध्यान में रखकर जांच कर रही है। घटना के बाद डॉग स्क्वायड और एफएसएल की टीम को भी घटनास्थल पर बुलाया गया।

छत्तीसगढ़ :बुजुर्ग मां हत्या कर दान किया शव

0

रायपुर। निसंतान महिला ने जिसे दत्तक पुत्र बनाकर पाला-पोसा उसी ने संपत्ति के लालच में आकर उसकी गला घोंटकर हत्या कर दी। मामले का खुलासा तब हुआ जब कलयुगी दत्तक पुत्र ने रिश्तेदारों को बिना बताए मृत महिला के शव को पंडित जवाहरलाल नेहरू मेमोरियल मेडिकल कॉलेज को दान कर दिया। परिजनों की शिकायत के बाद पुलिस ने महिला के शव का डाक्टरों की पैनल टीम से पोस्टमार्टम कराया, तब हत्या का खुलासा हुआ। पुलिस ने आरोपित को गिरफ्तार कर लिया है।

पुलिस अधिकारियों ने बताया कि रायपुर पुरानी बस्ती के प्रोफेसर कॉलोनी सेक्टर दो परशुरामनगर निवासी हेमप्रभा बोस (68) आयकर विभाग से रिटायर्ड हुई थीं। उन्होंने डेढ़ साल की उम्र से ही आरोपित सुदीप बोस पुत्र अविंद विश्वास (वर्तमान में 23 वर्ष) को दत्तक पुत्र बनाकर घर में रख लिया।

हेमप्रभा नौकरी से रिटायर्ड होने के बाद अक्सर बीमार रहने लगी थीं। सुदीप कोई काम-धाम न कर आवारागर्दी करता था। दत्तक पुत्र की हरकतों को लेकर हेमप्रभा अक्सर टोका-टाकी करती थीं, यह सुदीप को नागवार गुजरता था। वह हमेशा बुजुर्ग मां के साथ मारपीट भी करता था।

25 फरवरी रात 10 बजे उसने गुस्से में आकर हेमप्रभा बोस की गला घोंटकर हत्या कर दी। हत्या की बात को छुपाने और सामान्य मौत बताकर सुदीप हेमप्रभा की लाश को रामकृष्ण केयर अस्पताल ले गया। जहां डाक्टरों ने उसे जांच उपरांत मृत घोषित कर दिया।

चूंकि मृतका ने पहले से ही अपनी मौत के बाद शव को मेडिकल कॉलेज को दान देने की इच्छा जताते हुए इसकी पूरी प्रक्रिया कर ली थी, लिहाजा सुदीप ने बिना रिश्तेदारों को बताए हेमप्रभा के शव को दूसरे दिन मेडिकल कॉलेज को दान कर दिया।

संदेह होने पर रिश्तेदारों ने की थी शिकायत

कांकेर जिले के माकड़ी निवासी जगदीश चंद्र बोस (58) को जब बहन हेमप्रभा बोस की मौत हो जाने और शव को सुदीप द्वारा मेडिकल कॉलेज को दान करने की जानकारी मिली तो उन्होंने संदेह जताते हुए पुलिस अफसरों से इसकी शिकायत की।

अफसरों के निर्देश पर शव का पोस्टमार्टम आंबेडकर अस्पताल के डाक्टरों की पैनल टीम ने की, जिसमें गला दबाकर हत्या करने की पुष्टि हुई। पुलिस ने सुदीप बोस को गिरफ्तार कर उससे कड़ाई से पूछताछ की तो उसने संपत्ति के लालच में हत्या करना स्वीकार कर लिया। पुलिस ने मामले में धारा 302, 201 के तहत अपराध कायम कर लिया है।