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छत्तीसगढ़ : बस्तर संभाग में 20 साल से नहीं जीत पाई है कांग्रेस

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रायपुर। छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग में लोकसभा की दो ही सीटें हैं पर इसका व्यापक महत्व है। ये सीटें आदिवासियों के लिए रिजर्व हैं। बस्तर कांग्रेस और भाजपा दोनों ही दलों के लिए कितना महत्वपूर्ण है इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि विधानसभा चुनाव हो या लोकसभा, हर बार दोनों ही प्रमुख पार्टियां अपने चुनाव अभियान का आगाज यहीं से करती रही हैं।

विधानसभा चुनाव में तो भाजपा और कांग्रेस के राष्ट्रीय नेताओं ने डेरा ही डाल दिया था। हालांकि नतीजे कांग्रेस के पक्ष में आए। विधानसभा की 12 में से 11 सीटें कांग्रेस जीत गई। अब प्रदेश में कांगे्रस की सरकार है इसलिए बस्तर की दोनों लोकसभा सीटें प्रतिष्ठा का सवाल बन गई हैं।

बस्तर संभाग कभी कांग्रेस का अविजित गढ़ माना जाता था। अब हाल यह है कि पिछले बीस साल से यहां की एक भी सीट कांग्रेस नहीं जीत पाई है। छत्तीसगढ़ के अलग राज्य बनने के बाद हुए तीनों लोकसभा चुनाव में भाजपा ही यहां से जीती है। इससे पहले 1999 के चुनाव में भी भाजपा का ही परचम लहराया। 1996 के चुनाव में बस्तर की सीट पर कांग्रेस नेता महेंंद्र कर्मा निर्दलीय के रूप में जीते थे लेकिन कांग्रेस तब भी पीछे ही रही।

बस्तर से लखमा और कांकेर से मनोज के नाम की चर्चा

कांकेर सीट से लगातार जीतने वाले अरविंद नेताम इंदिरा गांधी की सरकार में केंद्रीय मंत्री भी रहे। उनके दल बदलने के बाद यहां कांग्रेस कमजोर हुई। अरविंद नेताम भी राजनीतिक रूप से हाशिए पर पहुंच गए। अब नेताम फिर से कांग्रेस में हैं और यह संभावना भी उभर रही है कि शायद उन्हें फिर से कांकेर से उतारा जाए।

वैसे पार्टी में अंदरखाने यह चर्चा जोर पकड़ रही है कि राज्य सरकार के मंत्री कवासी लखमा बस्तर और कांकेर से विधायक मनोज मंडावी को मैदान में उतारा जाएगा। फिलहाल यह तो तय नहीं है कि कौन चुनाव लड़ेगा लेकिन इतना तय है कि इस बार कांग्रेस बस्तर की सीटों पर आरपार की लड़ाई के मूड में है।

बलीराम के बाद बेटे ने संभाली बस्तर की विरासत

बस्तर संसदीय क्षेत्र से भाजपा के बलीराम कश्यप लगातार जीत दर्ज करते रहे। उनकी मृत्यु के बाद 2011 में हुए उपचुनाव में उनके पुत्र दिनेश कश्यप सांसद चुने गए। 2014 के चुनाव में दिनेश कश्यप एक बार फिर कांग्रेस के कवासी लखमा को हराकर संसद पहुंचे। कांकेर में भी ऐसी ही स्थिति रही है। कांकेर से सोहन पोटाई लगातार सांसद रहे। पिछले चुनाव में सोहन पोटाई की जगह विक्रम उसेंडी को भाजपा ने टिकट दिया। वे भी जीत गए।

कांग्रेस के दिग्गज हारते रहे

बलीराम कश्यप और उनके बेटे दिनेश कश्यप के खिलाफ बस्तर सीट से महेंद्र कर्मा, उनके बेटे दीपक कर्मा, वर्तमान सरकार में मंत्री कवासी लखमा, मध्यप्रदेश सरकार में मंत्री रहे पूर्व सांसद मानकूराम सोढ़ी के बेटे शंकर सोढ़ी जैसे कांग्रेसी दिग्गज हारते रहे हैं। कांकेर से पिछला चुनाव प्रदेश महिला कांग्रेस की अध्यक्ष फूलोदेवी नेताम हार चुकी हैं।

विधानसभा में आगे रहे तब भी हारे

कांग्रेस बस्तर की 12 विधानसभा सीटों में जब आगे रही तब भी लोकसभा हारती रही। 1999 में कांग्रेस ने बस्तर की 11 विधानसभा सीटें जीती थीं, 2003 में 03 सीट, 2008 में एक सीट, 2013 में आठ सीट जीती फिर भी लोकसभा चुनाव हारी। इस बार कांग्रेस ने 11 सीटें जीती हैं। उम्मीद इसलिए ज्यादा है क्योंकि प्रदेश में कांग्रेस की सरकार है।

अब नहीं तो कब

कांग्रेस इस बार बस्तर की सीटों को हर हाल में जीतने की तैयारी कर रही है। आदिवासी नेता कवासी लखमा को सरकार ने मंत्री बनाकर बस्तर के छह जिलों का प्रभार सौंपा है। निर्दलीय लोकसभा जीत चुके दिग्गज कांग्रेस नेता महेंद्र कर्मा के बेटे को एक दिन पहले ही सरकार ने अनुकंपा नियुक्ति देकर डिप्टी कलेक्टर बनाया है, इसे भी राजनीतिक कदम ही माना जा रहा है।

लखमा लगातार बस्तर का दौरा कर रहे हैं। जगह-जगह संकल्प शिविर का आयोजन किया जा रहा है। बीजापुर के विधायक विक्रम मंडावी ने कहा-पार्टी की क्या रणनीति से यह तो नहीं बताया गया है लेकिन हमसे कहा गया है कि पूरा ध्यान अपने क्षेत्र में दो। पार्टी नेता कह रहे हैं कि अब नहीं जीते तो कब जीतोगे।

ग्लोबल कंज्यूमर कॉन्फिडेंस सर्वे में भारत शीर्ष पर

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सिंगापुर। ग्लोबल कंज्यूमर कॉन्फिडेंस सर्वे में भारत शीर्ष पर है। यह जानकारी ताजा कॉन्फ्रेंस बोर्ड ग्लोबल कंज्यूमर कॉन्फिडेंस सर्वे में सामने आई है, जिसे नेलसन के सहयोग से किया गया है। इंटरनेट पर किए गए सर्वे में एशिया-पैसेफिक, यूरोप, लैटिन अमेरिका, मध्यपूर्व, अफ्रीका और उत्तरी अमेरिका के 64 देशों को 32 हजार से अधिक उपभोक्ताओं ने मतदान किया था।

साल 2018 की चौथी तिमाही में भारत का कंज्यूमर कॉन्फिडेंस इंडेक्स (CCI) स्कोर 133 था, जबकि फिलीपीन्स का स्कोर 131 और इंडोनेशिया का स्कोर 127 था। तीसरी तिमाही से भारत ने अपना पहला स्थान कायम रखा है, जब उसने इंडेक्स में 130 का स्कोर हासिल किया था, जबकि 126 समान अंकों के साथ फिलीपीन्स और इंडोनेशिया चौ थे स्थान पर थे।

दक्षिण कोरिया को लेकर दुनिया में सबसे अधिक निराशावादी उपभोक्ता हैं। वहां के लोग बढ़ती महंगाई, कम वेतन वृद्धि, कमजोर शेयर बाजार, बेरोजगारी और वैश्विक व्यापार अनिश्चितताओं को लेकर चिंतित हैं। इस दौरान ग्लोबल कंज्यूमर कॉन्फिडेंस इंडेक्स साल 2018 के चौथी तिमाही में एक अंक की बढ़ोतरी होकर यह 107 अंक हो गई, जो कि 14 साल में सबसे ज्यादा है।

कॉन्फ्रेंस बोर्ड CCI द्वारा मापे गए मुख्य संकेतक में नौकरी की संभावनाओं और 12 महीनों में व्यक्तिगत वित्त के स्वास्थ्य और खर्च करने का इरादा शामिल किया गया था। वैश्विक स्तर पर नौकरी की संभावनाओं और व्यक्तिगत आय की स्थित के बारे में उपभोक्ताओं की धारणा सकारात्मक बनी हुई है। मगर, तेल की बढ़ी हुई कीमतों के कारण मुद्रास्फीति के दबाव पैदा होने, वैश्विक व्यापार के संबंध में अनिश्चितता, मुद्रा के गिरने और उधार लेने पर बढ़ती ब्याज दरों की वजह से खर्च के प्रति उपभोक्ता की भावना कम आशावादी बनी हुई हैं।

उत्तरी अमेरिका इस मामले में अपवाद है, जहां कंज्यूमर कॉन्फिडेंस वर्षों से अपने उच्चतम स्तर पर है। मगर, विकसित अर्थव्यवस्थाएं आमतौर पर इस मामले में कम आशावादी हैं। CCI जहां 100 अंकों को सकारात्मक मानता है। यूरोपीय उपभोक्ता 90 अंकों से नीचे के औसत स्कोर के साथ कम से कम आशावादी हैं। वहीं, उनके एशियाई और उत्तरी अमेरिकी समकक्षों ने अधिक उत्साहित होने का रुझान दिया। लैटिन अमेरिका, मध्य पूर्व और अफ्रीका में उपभोक्ता सावधानीपूर्वक आशावादी हैं, लेकिन सभी क्षेत्रों में पिछले वर्ष में कंज्यूमर कॉन्फिडेंस में सुधार देखा गया है।

सर्वे से पता चलता है कि एशिया-प्रशांत में CCI तीन अंक बढ़कर 117 हो गया है। चीन, भारत, इंडोनेशिया और जापान जैसे प्रमुख बाजारों में सुधार हुआ है। हालांकि, एशिया-प्रशांत के लिए CCI आमतौर पर अच्छा है। मगर, ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड, सिंगापुर और हांगकांग जैसे अधिक परिपक्व अर्थव्यवस्था में लोग अपने खर्च के बारे में अधिक सतर्क हैं। इन देशों में कंज्यूमर बिजनेस के लिए अच्छे अवसर हैं।

इमरान बोले Nobel Peace Prize की बात पर मैं लायक नहीं, उसे दो जो कश्मीर…

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इस्लामाबाद। भारतीय वायुसेना पायलट अभिनंदन वर्तमान को बिना शर्त भारत लौटाने के इमरान खान के फैसले के बाद पाकिस्तान में मांग उठी है कि इसके लिए प्रधानमंत्री को शांति का नोबल पुरस्कार दिया जाना चाहिए। पाकिस्तान मीडिया और खासतौर पर सोशल मीडिया में यह मुद्दा बीते दिनों से चल रहा है। इमरान ने पहली बार इस पर प्रतिक्रिया दी है।

इमरान ने अपनी ट्वीट में कहा है – मैं इस लायक नहीं। यह सम्मान तो उसे दिया जाना चाहिए जो कश्मीरी लोगों की इच्छाओं के मुताबिक कश्मीर मुद्दे को हल कर दे और उपमहाद्वीप में शांति और विकास की राह आसान करे।

मालूम हो, पुलवामा आतंकी हमले के बाद पैदा हुए हालात को देखते हुए इमरान खान दो बार कह चुके हैं कि वे युद्ध नहीं चाहते। बकौल इमरान, युद्ध शुरू करना आसान है, लेकिन यह कैसे खत्म होगा, यह किसी के हाथ में नहीं है।

पुलवामा हमले के बाद अपने दो वीडियो संदेशों में पाकिस्तानी पीएम ने भारत से आतंकवाद समेत हर मुद्दे पर बातचीत शुरू करने की पेशकश की थी। इसके बाद उन्होंने अपनी संसद में भाषण देते हुए फिर वार्ता की पेशकश की। इसके अलावा पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह मेहमूद कुरैशी ने भी कहा है कि भारत को तनाव की राह छोड़कर बातचीत के लिए आगे आना चाहिए।

बताते चलें कि विंग कमांडर को 27 फरवरी को उस वक्त गिरफ्तार किया गया था, जब पाकिस्तान के एफ-16 विमान को मार गिराने के बाद उनके मिग-21 विमान पर मिसाइल लगने की वजह से वह क्रैश होकर पाकिस्तानी कब्जे वाले इलाके में चला गया था। इमरान खान ने शांति की दुहाई देते हुए अभिनंदन को रिहा करने का फैसला किया था।

Balakot Air Strike: शाह का दावा- मारे गए 250 से ज्यादा आतंकी, कांग्रेस ने फिर उठाए सवाल

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नई दिल्ली। कांग्रेस लगातार मांग कर रही है कि सरकार पीओके में हुई एयर स्ट्राइक के सबूत दे। इस बीच, भाजपा अध्यक्ष राजनाथ सिंह ने दावा किया है कि भारतीय वायुसेना के इस हमले में 250 से ज्यादा आतंकी मारे गए हैं।

हालांकि सेना ने मरने वाले आतंकियों का आंकड़ा नहीं बताया है, लेकिन पहले कहा गया था कि करीब 325 आतंकी ढेर हुए हैं। सेना कह चुकी है कि उसके पास इस एयर स्ट्राइक के सबूत हैं, लेकिन उन्हें जारी करना या न करना, सरकार तय करेगी।

कांग्रेस ने उठाए सवाल

कांग्रेस प्रवक्‍ता मनीष तिवारी ने पूछा कि एयर वाइस मार्शल आरजीके कपूर ने कहा है कि यह कहना अभी जल्‍दबाजी होगी कि आतंकी कैंप पर हुई एयर स्‍ट्राइक में कितने आतंकी मारे गए हैं। लेकिन भाजपा अध्‍यक्ष अमित शाह ने दावा किया है कि एयर स्‍ट्राइक में 250 आतंकी मारे गए हैं। क्‍या यह एयर स्‍ट्राइक को लेकर राजनीति नहीं की जा रही है?

केजरीवाल ने किया ऐसा कमेंट

शाह के इस बयान के बाद दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने ट्विट किया। उन्होंने पूछा- क्या अमित शाह के मुताबिक़ सेना झूठ बोल रही है? सेना ने साफ़ साफ़ कहा है कि कोई मरा या नहीं मरा या कितने मरे, ये नहीं कहा जा सकता। अपने चुनावी फ़ायदे के लिए क्या अमित शाह और भाजपा सेना को झूठा बोल रहे हैं? देश को सेना पर भरोसा है। क्या अमित शाह और भाजपा को सेना पर भरोसा नहीं?

छत्तीसगढ़ : पानी में नशीला पदार्थ मिलाकर महिला सफाई कर्मी से दुष्कर्म

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बिलासपुर।

निजी अस्पताल में देर रात ड्यूटी के दौरान महिला सफाई कर्मी से दुष्कर्म का मामला सामने आया है। सिरगिट्टी निवासी महिला ने मामले में तारबाहर पुलिस में रिपोर्ट दर्ज कराई है। इसमें कहा है कि शनिवार की रात उनकी नाइट शिफ्ट में ड्यूटी थी। रात तीन बजे वह स्टाफ रूम चली गई और गिलास में रखा पानी पीकर सो गई। सुबह उठने के बाद वह घर चली गई। घर पहुंचने पर उसे प्राइवेट पार्ट से खून बहने का पता चला। तब उसे अपने साथ दुष्कर्म होने का अहसास हुआ। उसने पुलिस को पानी में नशीला पदार्थ मिलाकार बेहोश करने की आशंका जताई है। तारबहार पुलिस ने अज्ञात आरोपित के खिलाफ दुष्कर्म का मामला दर्ज किया है।

छत्तीसगढ़ : घुमंतू बच्चे दिखें, तो पुलिस को फोटो-वीडियो करें Whatsapp

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रायपुर। राज्य में गुमशुदा बच्चों की खोजबीन के लिए छत्तीसगढ़ पुलिस द्वारा चलाये जा रहे अभियान ऑपरेशन मुस्कान की सफलता के लिये पुलिस विभाग ने आम नागरिकों से सहयोग की अपील की गई है।

हर बच्चे के चेहरे पे मुस्कान लाना और उन्हें सुरक्षित रूप से उनके माता-पिता (अभिभावकों) तक पहुंचाना ऑपरेशन मुस्कान का मुख्य उद्देश्य है। इस अभियान की सफलता जन भागीदारी से ही संभव है।

पुलिस मुख्यालय अपराध अनुसंधान विभाग की ओर से जारी अपील में किसी होटल, ढाबा अथवा किसी व्यापारिक संस्थान में बच्चों द्वारा मजदूरी किये जाने, रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड जैसे सार्वजनिक स्थानों पर बाल भिक्षावृत्ति में संलिप्त बच्चों के देखे जाने तथा खेल के मैदानों, सुनसान इलाकों में बच्चों द्वारा नशीली वस्तुओं का सेवन करने करने की सूचना दें।

संदिग्ध रूप से रेल और बसों में बच्चों के यात्रा करने या किसी स्थान पर अंजान रूप से बच्चों को घूमते पाये जाने पर राज्य का कोई भी व्यक्ति बच्चे का फोटो खींचकर या विडियो क्लिप बनाकर राज्य पुलिस द्वारा जारी फोन एवं वाट्सएप नंबर-9479190446 पर स्थान का नाम एवं लोकेशन/पता सहित सूचित कर सकते हैं। फोटो एवं वीडियो क्लिप बनाकर भेजने वाले का नाम एवं मोबाइल नंबर गोपनीय रखा जायेगा। उन्हें किसी भी प्रकार का पक्षकार नहीं बनाया जायेगा।

Chhattisgarh : CM के सामने लिस्ट छोटी करने की चुनौती, कांग्रेस में बंपर दावेदार

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रायपुर। छत्तीसगढ़ में विधानसभा चुनाव की जीत ने कांग्रेस में लोकसभा चुनाव के दावेदारों की लंबी लाइन कर दी है। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष और प्रदेश चुनाव समिति के अध्यक्ष भी हैं, इसलिए उन पर न केवल सूची छोटी कराने की जिम्मेदारी है, बल्कि उन पर अधिक से अधिक सीटों पर पार्टी को जिताने का जिम्मा भी है। पूरा खेल प्रत्याशी चयन पर ही टिका होगा। यह बात उन्हें पता है, इसलिए सूची छोटी करना, बघेल के लिए बड़ी चुनौती है।

हर सीट पर 17 से 20 दावेदार

विधानसभा चुनाव में बम्पर जीत से नेताओं को लग रहा है कि प्रदेश में कांग्रेस की लहर है। चुनाव में टिकट किसे भी दे दिया जाए, वह जीत जाएगा। यही वजह है कि हर लोकसभा सीट से 17 से 20 दावेदारों का नाम सामने आ गया है। दूसरी तरफ, पार्टी के वरिष्ठ नेता सभी 11 लोकसभा सीटों पर जीत का दावा तो कर रहे हैं, लेकिन उन्हें यह भी पता है कि लोकसभा चुनाव की परिस्थितियां विधानसभा चुनाव से अलग होती हैं। छत्तीसगढ़ बनने के बाद यहां हुए तीन लोकसभा चुनाव में कांग्रेस को हर बार केवल एक-एक सीट से संतुष्ट होना पड़ा है।

संतुष्ट करना बड़ी चुनौती

11 सीटों के लिए केवल एक-एक नाम तय करना बड़ी चुनौती है। नाम फाइन करने के लिए न केवल मंत्रियों, विधायकों, जिलाध्यक्षों और जिला प्रभारियों को संतुष्ट करना होगा, बल्कि बाकी दावेदारों को भी समझाना होगा, ताकि सूची आने के बाद दिक्कत न हो। मुख्यमंत्री के पास सूची छोटी करने के लिए समय भी कम है। प्रदेश प्रभारी पीएल पुनिया ने उनके समेत चुनाव समिति के सदस्यों को सात मार्च को दिल्ली बुलाया है। पुनिया पहले समिति के अध्यक्ष व सदस्यों से स्क्रूटनी वाली सूची मांगेगे। उसके बाद ही वे आगे चर्चा शुरू करेंगे।

छत्तीसगढ़ : Whatsapp को बनाया जरिया, 6 माह में ही 200 को मिली नौकरी

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रायपुर। बेरोजगारी देश की बड़ी समस्या है। सरकारें, शासन- प्रशासन, संस्थाएं, संगठन सभी इसके लिए काम कर रही हैं, लेकिन सारे प्रयास नाकाफी हैं। ऐसे में एक सामान्य नौकरी करने वाले रायपुर निवासी देवेंद्र पटेल ने सराहनीय पहल की है।

एक वाट्सएप ग्रुप बनाकर वह उसका उपयोग जॉब प्लेसमेंट के मंच के रूप में कर रहे हैं। खास बात यह कि इस ग्रुप में शामिल युवा एक-दूसरे के लिए नौकरी तलाशते हैं और ग्रुप के जरिए सूचित करते हैं।

सरकारी हो या निजी, हर प्रकार की नौकरियों की जानकारी ग्रुप में लगातार अपडेट होती रहती है। इतना ही नहीं, प्रतियोगी परीक्षाओं से जुड़ी ढेरों जानकारियां भी होती हैं। इस ग्रुप को बने अभी छह महीने ही हुए हैं। इस बीच करीब दो सौ युवाओं को इसके जरिए नौकरी मिल चुकी है।

आज जब हम आए दिन बेरोजगारी के चलते युवाओं द्वारा आत्मघाती कदम उठाने की खबरें पढ़ते व सुनते हैं, ऐसे में यह मामूली आंकड़े भी देवेंद्र की पहल को सलाम करने को कहते हैं। रायपुर के देवेंद्र साधारण परिवार से हैं।

पिता मिलापराम पटेल मजदूरी करके उन्हें किसी तरह पढ़ाया। कला में स्नातक करने के बाद देवेंद्र नौकरी तलाशने लगे, ताकि घर में कुछ मदद कर सकें, लेकिन निराशा ही हाथ लगती रही। इसी दौरान उन्हें एक विभाग में संविदाकर्मी की नौकरी मिल गई। इस कठिन संघर्ष ने देवेंद्र को उनके जैसे और युवाओं के लिए कुछ करने को प्रेरित किया। यहीं से उनके वाट्सएप ग्रुप की नींव डली।

आज उनके ग्रुप में सैकड़ों युवा जुड़े हुए हैं। चैनल सिस्टम के चलते यह ग्रुप तेजी से बढ़ रहा है। देवेंद्र बताते हैं कि इसमें कई विशेषज्ञों को भी जोड़ा गया है, जो लगातार मार्गदर्शन करते रहते हैं। नौकरी से जुड़ी सूचनाएं प्रसारित करते रहते हैं। गृहणियों भी उनके ग्रुप से जुड़ी हैं, जिनके लिए रोजगार के रास्ते में मिल रहे हैं।

इस तरह मिल रही मदद 

– वेब पोर्टेल, रोजगार समाचार के ई-पेपर और उसके लिंक वाट्सएप में भेजते हैं, जिसके जरिए सोश्ाल साइट्स से मिलती है जानकारी। य सरकार द्वारा अखबारों में जारी किए गए विज्ञापनों की कतरन और तिथिवार परीक्षाओं के आयोजनों व नतीजों की पूरी जानकारी समय पर उपलब्ध रहती है।

– जिला रोजगार में पंजीयन की प्रक्रिया, प्लेसमेंट कैंप आयोजन की जानकारियां, शिक्षा-परीक्षा संबंधी काउंसिलिंग-कार्यशाला आदि हमेशा अपडेट होता रहता है।

– आवश्यक परीक्षाओं में फार्मूले सभी विषयों में दक्ष लोगों द्वारा आदानप्रदान। संबंधित विभागों-मंचों की फोन डायरेक्टरी भी इस ग्रुप में उपलब्ध है।

– खुद के लिए लंबे समय से रोजगार की तलाश करते हुए औरों के दर्द को समझा। अच्छी शिक्षा और मेहनतकश होने के बावजूद मायूस होकर बहुतों को लौटते देखा। यहीं से यह सोच आई कि कुछ किया जाए। बूंद-बूंद से ही घड़ा भरता है। आज मेरे ग्रुप से जुड़ा हर कोई एक-दूसरे की चिंता करता है। यह छोटी उपलब्धि नहीं है। – देवेंद्र पटेल

Chhattisgarh : अब स्कूलों का स्कोर कार्ड और अफसरों का बनेगा जॉब चार्ट

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रायपुर। छत्तीसगढ़ के स्कूलों का अब स्कोर कार्ड बनेगा। स्कोर कार्ड बच्चों के लर्निंग आउटकम के आधार पर ही निर्धारित किया जाएगा। शिक्षकों का नवाचार, पढ़ाने का तरीका, बच्चों की बेहतर उपस्थिति आदि स्कूलों के स्कोर कार्ड को बढ़ाएंगे। इसके अलावा राज्य के सभी प्रशासनिक और शैक्षणिक पदों में बैठे अधिकारियों के लिए जॉब चार्ट तैयार किया जाएगा। इसके बाद उनके कामों की समीक्षा होगी।

हर अधिकारी के लिए तय होगा कि कौन सा काम कितने दिन में पूरा होना चाहिए। अभी जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालयों में देखा जाए तो मान्यता देने की प्रक्रिया में ही देरी की जाती है। ऐसे में अब विभाग सबकी जिम्मेदारी तय करने जा रहा है।

राज्य के समग्र शिक्षा अभियान, एससीईआरटी, संभागीय कार्यालयों समेत अन्य विभागों में अभी अफसरों को मनमानी काम दिए गए हैं। किसी एक अधिकारी के पास कई प्रभार हैं तो किसी अधिकारी के पास दिनभर में एक भी फाइल बढ़ाने का काम ही नहीं है।

ऐसे में स्कूल शिक्षा विभाग ने हर अधिकारी के लिए जॉब चार्ट बनाने का निर्णय लिया है। स्कूल शिक्षा के प्रमुख सचिव गौरव द्विवेदी ने जॉब चार्ट निर्धारित करने के लिए निर्देश दिए हैं। गौरतलब है कि शिक्षा संहिता में जॉब चार्ट का प्रावधान था लेकिन पिछली सरकार में इसका पालन नहीं हो पा रहा था । वर्तमान सरकार अब जॉब चार्ट के आधार पर अधिकारियों से काम लेगी।

प्रमुख सचिव ने यह दिया निर्देश- राज्य में शालाओं के सतत आंकलन और सुधार के लिए यह आवश्यक है कि विभिन्न सूचकांकों के आधार पर प्रत्येक शालाओं की मात्रात्मक एवं गुणात्मक जानकारी तैयार की जा सकेगी। जिसमें शालाओं की वस्तुनिष्ठ समीक्षा हो सकेगी। उन्हें सतत सुधार की ओर प्रेरित किया जा सकेगा। प्रमुख सचिव ने स्कोर कार्ड के सूचकांकों की समीक्षा का स्कोर कार्ड का प्रस्ताव बनाने के लिए कहा है।

शिक्षकों के लिए बनेगी नई अवार्ड नीति- प्रदेश में शिक्षकों के लिए अब पुराने ढर्रे की बजाय नए सिरे से नए मापदंडों के आधार पर उन्हें अवार्ड दिया जाएगा। शालाओं के आंकलन के बाद जो शिक्षक बेहतर नवाचार से शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ाने के लिए काम करेगा उसे ही अवार्ड मिल सकेगा।

गठित होगा आंकलन सेल- स्कूल शिक्षा विभाग ने राज्य में आंकलन सेल गठित करने के लिए राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (एससीईआरटी) में सेंटर स्थापित किए हैं। राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद, समग्र शिक्षा से आंकलन कार्य से जुड़े अधिकारी, शिक्षण प्रशिक्षण संस्थाओं से आंकलन प्रकोष्ठ प्रभारी और सामग्री निर्माण प्रकोष्ठ प्रभारी, निजी शिक्षा कॉलेजों और विद्यालयों से प्रतिनिधि आदि की कमेटी बनाई जाएगी।

उपस्थिति को देखेगी शाला प्रबंधन समिति- स्कूलों में बच्चों की कितनी उपस्थिति है। समुदाय के माध्यम से एक बार कक्षा का आयोजन कराकर शैक्षणिक विकास की जानकारी दी जाएगी।

छत्तीसगढ़ : महेंद्र कर्मा के बेटे को डिप्टी कलेक्टर बनाने पर विवाद, OP ने उठाए चार सवाल

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रायपुर। झीरम कांड में मारे गए बस्तर टाइगर महेंद्र कर्मा के बेटे आशीष कर्मा को डिप्टी कलेक्टर बनाने पर छत्तीसगढ़ की राजनीति में उबाल आ गया है। पूर्व कलेक्टर और भाजपा नेता ओपी चौधरी ने सोशल मीडिया पर चार सवाल किये हैं। चौधरी ने कहा, मैं महेन्द्र कर्मा का बहुत सम्मान करता हूं। कर्मा के बाद उनके परिवार से विधायक रहे, नगर पंचायत अध्यक्ष हैं, जिला पंचायत में भी प्रतिनिधित्व है, लोकसभा में भी उनके परिवार से चुनाव लड़ा गया। यह सब अपनी जगह है, लेकिन अब उनके एक पुत्र को कांग्रेस सरकार ने सीधा डिप्टी कलेक्टर बना दिया।

कई लोग आरोप लगा रहे हैं कि कर्मा परिवार को लोकसभा की टिकट की दावेदारी से रोकने के लिए कांग्रेस ने तुष्टिकरण का यह कदम उठाया है। चौधरी ने कहा, यदि कर्मा होते तो शायद वो अपने बेटे को काबिलियत के आधार पर कलेक्टर या डिप्टी कलेक्टर बनाना पसंद करते न कि तुष्टिकरण की राजनीति के तहत।

बेहतर होता कि कांग्रेस की सरकार तुष्टिकरण की राजनीति करके लाखों युवाओं के साथ अन्याय करने के बजाय कर्मा के परिवार की आर्थिक सुरक्षा हेतु अनुकंपा का कोई अन्य उपाय करती। चौधरी ने कहा कि इस परिवेश में मेरे मन में कुछ सवाल उठ रहे हैं, जिन्हें सार्वजनिक करना अपना धर्म समझता हूं।

इस बार सीजी पीएससी परीक्षा में डिप्टी कलेक्टर के लिए सामान्य वर्ग का एक, एसटी के लिए दो और एससी-ओबीसी के लिए शून्य पद हैं। डिप्टी कलेक्टर के सिर्फ तीन पद हैं, ऐसे में कांग्रेस सरकार का तुष्टिकरण का कदम छत्तीसगढ़ के युवाओं के साथ अन्याय नहीं है?

क्या सरकार अन्याय नहीं कर रही

चौधरी ने पूछा-छत्तीसगढ़ के उन लाखों युवाओं के साथ क्या यह अन्याय नहीं है? जो युवा सालों से प्रदेश के सर्वोच्च प्रशासनिक पद को अपनी योग्यता से प्राप्त करने की कोशिश कर रहे हैं? क्या झीरम कांड के अन्य शहीदों के परिवारों को सरकार के तुष्टिकरण के निर्णय से पीड़ा नही हुई होगी? हजारों जांबाज जवान, नक्सलियों से सीधे लड़ते हुए शहीद हुए हैं। उनके परिवारों को दर्द नहीं हो रहा होगा?

बस्तर के सभी दलों के सामान्य जनप्रतिनिधित्व और आम आदिवासी भाई- बहन हर रोज माओवादी हिंसा से प्रभावित हो रहे हैं। दंतेवाड़ा के एजुकेशन सिटी के आस्था गुरुकुल में नक्सल हिंसा से अनाथ हुए सैकड़ों आदिवासी बच्चे अपने बेहतर भविष्य के लिये पढ़ाई कर रहे हैं। क्या इन सब लोगों के साथ कांग्रेस सरकार का यह निर्णय अन्याय नहीं है?

शहीद कर्मा परिवार को सरकार ने दिया सम्मान, सवाल न उठाए विपक्ष 

पंचायत व ग्रामीण विकास मंत्री टीएस सिंहदेव ने कहा है कि शहीद महेंद्र कर्मा के सुपुत्र आशीष कर्मा को डिप्टी कलेक्टर का पद देकर सरकार ने कर्मा परिवार को सम्मान देने की कोशिश की है। विपक्ष को इस पर आपत्ति नहीं होनी चाहिए। अंबिकापुर में पत्रकारों से चर्चा करते हुए सिंहदेव ने कहा कि जो विपक्ष मीसा बंदियों को पेंशन सुविधा का लाभ देने का निर्णय ले सकती है उसे कम से कम शहीद के परिवार को सम्मान देने लिए गए निर्णय पर आपत्ति नहीं जताई जानी चाहिए।