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बच्चों की उम्र घटा रहा प्रदूषण,1 साल में ली 12 लाख भारतीयों की जान

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देश में एयर पॉल्यूशन सबसे ज्यादा लोगों को मौत की नींद सुला रहा है. 2017 में इनडोर और आउटडोर पॉल्यूशन से भारत में 12 लाख लोगों की मौत हो गई. पॉल्यूशन पर एक नई ग्लोबल स्टडी ‘स्टेट ऑफ ग्लोबल एयर 2019’ की रिपोर्ट यह बात कही गई है. रिपोर्ट के मुताबिक दक्षिण एशिया दुनिया का सबसे प्रदूषित इलाका है.

दक्षिण एशिया में प्रदूषण की मार सबसे ज्यादा

“State of Global Air 2019” रिपोर्ट के मुताबिक मौजूदा प्रदूषण का मौजूदा लेवल बना रहा तो यह औसत दक्षिण एशियाई बच्चे की जिंदगी ढाई साल तक घटा देगा. इसमें कहा गया है कि भारत में वायु प्रदूषण से मौतों की संख्या स्मोकिंग से होने वाली मौतों से ज्यादा है. देश में यह तीसरा बड़ा हेल्थ रिस्क है.रिपोर्ट में कहा गया है कि लंबे वक्त तक आउटडोर और इनडोर पॉल्यूशन के संपर्क में रहने से 2017 में स्ट्रोक, डाइबिटीज, हार्ट अटैक, फेफड़े के कैंसर और इससे जुड़ी दूसरी बीमारियों से 50 लाख लोगों की मौत हुई है.

पहली बार टाइप टु डाइबिटीज पॉल्यूशन हेल्थ रिस्क में शामिल

पहली बार, टाइप टु डाइबिटीज को भी एयर पॉल्यूशन के बड़े हेल्थ रिस्क में शामिल किया गया है. दक्षिण एशिया के देशों- बांग्लादेश, भारत, नेपाल और पाकिस्तान में 15 लाख लोगों की मौत एयर पॉल्यूशन से पैदा वजहों से हुई है.

स्टडी के मुताबिक दुनिया भर में सड़क हादसों, मलेरिया, कुपोषण, शराब और शारीरिक निष्क्रियता की तुलना में वायु प्रदूषण से ज्यादा लोग मरते हैं.मौजूदा प्रदूषण स्तर के दौरान अगर कोई बच्चा पैदा होता है तो वह अपनी उम्र पूरी करने से 20 महीने पहले मर सकता है. 2017 में दुनिया भर की आधी आबादी यानी 3.9 अरब लोग घरेलू एयर पॉल्यूशन के शिकार थे.

स्टडी के मुताबिक घरों में इस्तेमाल होने वाले ठोस ईंधन, कंस्ट्रक्शन से पैदा होने वाली धूल, कोयले से चलने वाले बिजली प्लांट, ईंध भट्ठों, वाहन यातायात, डीजल से चलने वाले उपकरण वायु प्रदूषण के अहम स्त्रोत हैं.

चुनाव 2019: सिद्धू की पत्नी को कांग्रेस ने नहीं दिया टिकट, बोलीं- पार्टी के फैसले का सम्मान करती हूं

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लोकसभा चुनाव 2019 (Lok Sabha Elections 2019) के लिए राजनीतिक दलों की ओर से लगातार प्रत्याशियों की घोषणा की जा रही है. उम्मीदवारों की घोषणा में कई बड़े नेताओं के लोकसभा टिकट काटे गए हैं. इसी क्रम में कांग्रेस ने चंडीगढ़ से पूर्व केंद्रीय मंत्री पवन कुमार बंसल को उम्मीदवार बनाने का ऐलान किया है. बंसल को टिकट मिलने से पूर्व विधायक नवजोत कौर सिद्धू की निराशा छिप नहीं रही है. दरअसल, पार्टी की ओर से उम्मीदवार उतारने से पहले ही उन्होंने जनसभाएं शुरू कर दी थीं. नवजोत कौर सिद्धू पंजाब सरकार में मंत्री और पूर्व क्रिकेटर नवजोत सिंह सिद्धू की पत्नी हैं. दरअसल, पार्टी की ओर से उम्मीदवार उतारने से पहले ही उन्होंने जनसभाएं शुरू कर दी थीं. नवजोत कौर सिद्धू पंजाब सरकार में मंत्री और पूर्व क्रिकेटर नवजोत सिंह सिद्धू की पत्नी हैं.

नवजोत कौर ने पीटीआई-भाषा से बुधवार को कहा, “मुझे खुशी होती अगर वे उस महिला का सम्मान करते जो अपने व्यक्तिगत कार्यों को दिखाने का प्रयास कर रही है.” कौर ने कहा कि उन्होंने खुद को राजनीति के प्रति समर्पित करने के लिए स्त्री रोग विशेषज्ञ का अपना पेशा भी छोड़ दिया. उनसे पूछा गया था कि क्या वह पार्टी के फैसले से निराश हैं. नवजोत कौर ने कांग्रेस का गढ़ मानी जाने वाली पूर्व केंद्रीय मंत्री मनीष तिवारी की चंडीगढ़ लोकसभा सीट से चुनाव लड़ने के लिए दावेदारी पेश की थी. इस सीट पर 2014 में भाजपा उम्मीदवार किरण खेर को जीत हासिल हुई थी. बंसल को 2014 चुनाव में 70,000 वोटों से हार मिली थी.

वहीं, न्यूज एजेंसी एएनआई को दिए अपने बयान में उन्होंने कहा कि पवन कुमार बंसल एक वरिष्ठ नेता है. मैं पार्टी के निर्णय का सम्मान करती हूं और बंसल को जिताने के लिए काम करूंगी. उन्होंने कहा कि मेरा विजन था कि मैं क्षेत्र में युवाओं के लिए कार्य करूं. उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि अगर कांग्रेस उन्हें भटिंडा या संगरूर संसदीय क्षेत्र से टिकट देती हैं तो वह चुनाव नहीं लड़ेंगी. उन्होंने कहा कि मेरा घर अमृतसर और चंडीगढ़ है. मैं किसी और जगह से चुनाव नहीं लड़ूंगी.

भाजपा ने रायपुर में केन्द्रीय कार्यालय का किया उद्घाटन

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रायपुर। भारतीय जनता पार्टी के रायपुर लोकसभा के केन्द्रीय कार्यालय का लोकार्पण बुधवार को पार्टी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष व प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री डॉ रमन सिंह ने किया। इस अवसर पर डॉ रमन सिंह ने कहा कि आज रायपुर लोकसभा प्रत्याशी सुनील सोनी के नामांकन दाखिल के दौरान पार्टी के नौ विधानसभा क्षेत्रों के कार्यकर्ताओं ने शामिल होकर भारतीय जनता पार्टी को जीत दिलाने की घोषणा की है। भाजपा को पूरा विश्वास है कि देश में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी होंगे और रायपुर लोकसभा के सांसद सुनील सोनी होंगे। 

कार्यालय लोकार्पण अवसर पर विधायक बृजमोहन अग्रवाल, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष विक्रम उसेंडी, नेता प्रतिपक्ष धरमलाल कौशिक, रमेश बैस, राज्यसभा सांसद गोपाल व्यास, भूषणलाल जांगड़े, गौरीशंकर अग्रवाल, भाटापारा विधायक शिवरतन शर्मा, राजेश मूणत, चंद्रशेखर साहू, रजनी ताई उपासने, देवजी भाई पटेल, सच्चिदानंद उपासने, मोतीलाल साहू, श्रीचंद सुंदरानी, संजय ढीढ़ी, नवीन मारकंडे, लक्ष्मी बघेल, अशोक बजाज, नंदे साहू, जिला भाजपा अध्यक्ष राजीव अग्रवाल, गुलाब टिकरिया, सुरेंद्र टिकरिया, सुभाष तिवारी, संजय श्रीवास्तव, निगम सभापति प्रफुल्ल विश्वकर्मा, छगन मूंदड़ा समेत अन्य नेता शामिल थे।

सीएम भूपेश बघेल बुधवार शाम सोशल मीडिया पर रहेंगे लाइव

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सीएम भूपेश बघेल फेसबुक और ट्विटर पर बधुवार शाम को आम जनता के सवालों का जवाब देंगे। वे आज सोशल मीडिया पर लाइव रहेंगे, यह जानकारी उन्होंनें ट्विटल पर दी। उन्होंने लिखा कि सभी को सवाल पूछने का अधिकार है। हमारे संविधान ने हमें यह अधिकार दिया है। मैं किसी सवाल से नहीं भागता। इसलिए मैं सोशल मीडिया में आपके सवालों का जवाब देने के लिए उपस्थित रहूंगा। 

छत्तीसगढ़ : बसपा ने रायपुर, बिलासपुर और कोरबा से उतार प्रत्याशी

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बहुजन समाज पार्टी (बसपा) ने छत्तीसगढ़ की 11 लोकसभा सीट पर अपनी पार्टी के उम्मीदवारों को उतार दिया है। रायपुर बिलासपुर और कोरबा सीट खाली थी, जिसमें आज अपने उम्मदवारों को मैंदान में उतार कर लोकसभा चुनाव लड़ाने की तैयारी कर ली है। 

बता दें कि बसपा ने रायपुर से खिलेश्वर साहू, बिलासपुर से उत्तम दास गुरू गोसाई और कोरबा से परमीत सिंह को लोकसभा चुनाव के लिए प्रत्याशी घोषित की है। बसपा के प्रदेश अध्यक्ष हेमंत पोयाम ने बताया कि बसपा सुप्रीमों मायावती के निर्देशानुसार बुधवार को छत्तीसगढ़ के तीन लोकसभा क्षेत्र रायपुर, बिलासपुर और कोरबा से प्रत्याशी उतार कर लोकसभा चुनाव लड़ा रहे हैं।

बसपा ने रायपुर, बिलासपुर और कोरबा से उतार प्रत्याशी 

क्या है भारत का देशद्रोह कानून? जिसे कांग्रेस ने अपने घोषणापत्र में खत्म करने का किया वादा

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भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने लोकसभा चुनाव के लिए घोषणा पत्र जारी कर दिया है. लोकसभा चुनाव 2019 के लिए घोषणा पत्र में सेना का आधुनिकीकरण, राइट टू फ्री हेल्थकेयर, प्रदूषण के मुद्दे पर भी कांग्रेस ने वादा किया है कि वह इस पर काम करेगी. कांग्रेस ने वादा किया है कि अगर उसकी सरकार बनी तो राजद्रोह की धारा को भी खत्म कर दिया जाएगा.

इसके बाद आई बीजेपी की प्रतिक्रिया में कांग्रेस के चुनावी घोषणा पत्र को वित्तमंत्री अरुण जेटली ने देश को तोड़ने वाला वादा करार दिया है. अरुण जेटली ने कहा कि कांग्रेस का घोषणा पत्र देश की एकता के लिए किसी बड़े खतरे से कम नहीं है. कांग्रेस ने जो वादे जनता से किए हैं वो कभी पूरे नहीं किए जा सकते.

हालांकि बहुत पहले से ही भारत के राजद्रोह कानून की आलोचना होती रही है. इसका कारण यह है कि ये कानून ना केवल बहुत पुराना है बल्कि इससे अंग्रेज बागी हिंदुस्तानियों को कुचलने का कुचक्र रचते थे. इन तमाम बातों के बीच जानिए, क्या कहता है भारत में देशद्रोह का कानून-

ये है देशद्रोह का कानून

आईपीसी की धारा 124ए के तहत लिखित या मौखिक शब्दों, चिन्हों, प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष तौर पर नफरत फैलाने या असंतोष जाहिर करने पर देशद्रोह का मामला दर्ज किया जा सकता है. इस धारा के तहत केस दर्ज होने पर दोषी को तीन साल से उम्रकैद की सजा हो सकती है. साल 1962 में सुप्रीम कोर्ट ने भी देशद्रोह की इसी परिभाषा पर हामी भरी. कुछ खास धाराओं के लागू होने पर गुट बनाकर आपस में बात करना भी आपको सरकार के विरोध में खड़ा सकता है और आप संदिग्ध माने जा सकते हैं.

अंग्रेजों ने बनाई थी व्यवस्था

सेडीशन लॉ यानी देशद्रोह कानून भारत में एक औपनिवेशिक व्यवस्था है. साल 1860 में अंग्रेजी हुकूमत ने इस नियम का मसौदा तैयार किया. दस सालों बाद 1870 में इसे भारतीय कानून संहिता (आईपीसी) की धारा 124ए की शक्ल दी गई. देशद्रोह की ये धारा इसलिए बनाई गई ताकि हुकूमत के खिलाफ जाने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जा सके. बागियों को तुरंत जेल में डाला जाने लगा. साल 1898 में लॉर्ड मैकॉले दंड संहिता के तहत देशद्रोह का मतलब था, ऐसा कोई भी काम जिससे सरकार के खिलाफ असंतोष जाहिर होता हो.

हालांकि 1942 में भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान इस परिभाषा में बदलाव किया गया. अब नए कानून के तहत सिर्फ सरकार के खिलाफ असंतोष जाहिर करने को देशद्रोह नहीं माना जा सकता बल्कि उसी स्थिति में इसे देशद्रोह माना जाएगा जब इस असंतोष में हिंसा भड़काने और कानून व्यवस्था को बिगाड़ने की भी अपील शामिल हो.

इस मामले ने बदला नजरिया
देशद्रोह कानून के मामले में बिहार के केदारनाथ सिंह का मामला काफी अहम रहा. 1962 में बिहार सरकार ने इनपर देशद्रोही भाषण देने के मामले में केस दर्ज किया. इसपर हाईकोर्ट ने रोक लगा दी. राज्य सरकार मामला लेकर सुप्रीम कोर्ट पहुंची, जहां कोर्ट ने कहा कि देशद्रोह के मामले में ऐसे भाषणों पर तभी सजा हो सकती है जब इससे किसी भी तरह की हिंसा हो या असंतोष बढ़े.

बोलने की आजादी का हनन
हाल के दिनों में देशद्रोह के बढ़ते मामलों के बीच इस कानून की फिर से समीक्षा की मांग उठने लगी है. मानवाधिकार पर काम करने वाली संस्थाओं का कहना है कि एक ओर तो संविधान में अभिव्यक्ति की आजादी है तो दूसरी ओर देशद्रोह का कानून है जो पहली आजादी को रोकता है. सरकार इस कानून की आड़ में अभिव्यक्ति पर रोक लगा रही है. सिर्फ जेएनयू के छात्र ही इस कानून के लपेटे में नहीं, समय-समय पर लोगों पर ये धारा लगती रही है.

जब गांधीजी पर लगा देशद्रोह का आरोप
साल 1870 से लागू इस कानून की सबसे पहली गाज महात्मा गांधी पर गिरी. एक साप्ताहिक मैगजीन में गांधीजी ने यंग इंडिया नामक आर्टिकल लिखा था, जिसे ब्रिटिश हुकूमत ने अपने खिलाफ माना.

2007 में बिनायक सेन पर नक्सल विचारधारा को फैलाने के आरोप में देशद्रोह का मामला दर्ज कर आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई थी, लेकिन सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर जमानत मिल गई.

2010 में अरुंधति रॉय और हुर्रियत नेता सैयद अली शाह गिलानी पर कश्मीर-माओवादियों के पक्ष में एक बयान देने की वजह से देशद्रोह के तहत मुकदमा दर्ज किया गया था.

2012 में कार्टूनिस्ट असीम त्रिवेदी को भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन के समय साइट पर संविधान से जुड़ी तस्वीरें पोस्ट करने की वजह से इसी आरोप में गिरफ्तार में किया गया था, बाद में उनके ऊपर से देशद्रोह का आरोप हटा लिया गया.

2012 में तमिलनाडु सरकार ने तमिलनाडु के कुडनकुलम में परमाणु प्‍लांट का विरोध करने वाले हजारों ग्रामीणों पर देशद्रोह की धाराएं लगाई थीं.

गुजरात में पाटीदारों के लिए आरक्षण की मांग करते हुए हिंसक आंदोलन शुरू करने वाले हार्दिक पटेल को भी अक्टूबर 2015 में गुजरात पुलिस की ओर से देशद्रोह के मामले के तहत गिरफ्तार किया गया था.

देश में हैं कितने मामले
एनसीआरबी के आंकड़ों के अनुसार 2014 में देशद्रोह के 47 मामले दर्ज किए गए जिसमें 72 फीसदी मामले सिर्फ बिहार-झारखंड में दर्ज है. झारखंड में 18 और बिहार में 16 मामलों के अलावा जहां तक अन्य राज्यों की बात है तो केरल में 5 और उड़ीसा-पश्चिम बंगाल में 2-2 मामले दर्ज है. आंध्र प्रदेश, असम, हिमाचल प्रदेश और छत्तीसगढ़ में एक-एक मामला दर्ज हैं.

दुनियाभर के स्टूडेंट्स बोलते रहे हैं
साल 1965 में अमेरिका-वियतनाम के युद्ध के दौरान जब अमेरिका की मिशिगन यूनिवर्सिटी के छात्रों और शिक्षकों ने विश्वविद्यालय कैंपस में लड़ाई के खिलाफ नारे लगाए तो इनके खिलाफ देशद्रोह का मामला तो दूर बल्कि कोई कार्रवाई भी नहीं हुई. फिर 1965 से 1973 के बीच पूरे अमेरिका के विश्वविद्यालयों में वियतनाम युद्ध के खिलाफ विरोध प्रदर्शन होने लगे. इस दौरान पढ़नेवालों ने अमेरिकी झंडे भी जलाए, लेकिन किसी पर देशद्रोह का मुकदमा नहीं किया गया.

ऐसे ही साल 1933 में ब्रिटेन के ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय के साथ-साथ कई अन्य विश्वविद्यालय के छात्रसंघों ने जब एक प्रस्ताव पारित कर शपथ ली कि वो किसी भी हाल में अपने देश या उसके राजा के लिए नहीं लड़ेंगे तो इसकी न सिर्फ कड़ी प्रतिक्रिया हुई बल्कि छात्रों को कायर तक कहा गया. इस मामले में भी किसी को देशद्रोह के मामले में गिरफ्तार नहीं किया गया. वहीं चीन की अलग कहानी है. 1989 में चीन के सरकार ने अपने खिलाफ आवाज उठाने वाले छात्रों के आंदोलन को कुचलने के लिए सड़कों पर सेना के टैंक उतार दिए. छात्र राजनैतिक और आर्थिक सुधारों की मांग कर रहे थे, जिसने बाद में जन-आंदोलन का रूप ले लिया. इतिहास में इसे तियानानमेन चौक नरसंहार के तौर पर भी जाना जाता है.

सीएम भूपेश बघेल का ट्वीट- जिनका दामाद है कई दिनों से फरार, बताओ कौन है वो ऐसा ‘चौकीदार’?

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लोकसभा चुनाव 2019 के लिए प्रचार-प्रसार के साथ ही मतदाताओं को अपनी ओर आकर्षित करने का हर प्रयास राजनीतिक दल कर रहे हैं. छत्तीसगढ़ में भी चुनावी सरगर्मी तेज है और आरोप प्रत्यारोप का दौर है. भाजपा के मैं भी चौकीदार अभियान को लेकर छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कटाक्ष करते हुए ट्वीट किया है. साथ ही उन्होंने ट्वीट के मध्यम से पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह पर निशाना साधा है.

मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के ट्वीट के बाद छत्तीसगढ़ के सियासत में हलचल मच गई है. सीएम भूपेश बघेल ने ट्वीट कर लिखा—जिनकी मैडम का नाम नान घोटाले मेें आता, जिनके पुत्र ने खोल रखा हो विदेश में खाता, जिनका दामाद है कई दिनों से फरार, बताओ जरा कौन है वो ऐसा ‘चौकीदार’?

छत्तीसगढ़ में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी बालोद, भाटापारा और कोरबा में करेंगे आमसभा

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छत्तीसगढ़ की 11 लोकसभा सीटों पर जीत के लिए भाजपा और कांग्रेस पूरा दमखम लगा रही है. भाजपा इस बार भी पीएम नरेन्द्र मोदी को ही चेहरा बनाकर चुनावी मैदान में उतर रही है. छत्तीसगढ़ में की सीटों पर जीत के लिए पीएम नरेन्द्र मोदी की आमसभा का शेड्यूल तय किया गया है. अब तक के तय शेड्यूल के अनुसार पीएम मोदी तीन सभाओं को संबोधित करेंगे.

तय शेड्यूल के अनुसार इस चुनाव में पीएम नरेन्द्र मोदी की छत्तीसगढ़ में पहली आमसभा 6 अप्रैल को बालोद में आयोजित है. बालोद में पीएम की आमसभा को लेकर तैयारियां भी लगभग पूरी कर ली गई है. पीएम मोदी की सभा में ज्यादा से ज्यादा लोगों को लाने की कवायद भाजपा के संगठन के पदाधिकारी और कार्यकर्ता कर रहे हैं. इसके साथ ही अन्य तैयारियां भी पूरी कर ली गई हैं. बालोद कांकेर संसदीय क्षेत्र का हिस्सा है.

6 अप्रैल को बालोद में आमसभा के बाद पीएम मोदी 15 अप्रैल को फिर से छत्तीसगढ़ प्रवास पर होंगे. 15 अप्रैल को मोदी छत्तीसगढ़ में दो सभाएं करेंगे. पहली सभा रायपुर संसदीय क्षेत्र के भाटापारा में होगी. इसके बाद दूसरी सभा कोरबा में आयोजित है. इन दोनों आमसभाओं को लेकर भी तैयारी शुरू कर दी है. बता दें कि प्रदेश में तीन चरणों में मतदान होने हैं. पहले चरण में 11 अप्रैल को बस्तर, दूसरे चरण में 18 अप्रैल को कांकेर, राजनांदगांव और महासमुंद इसके बाद तीसरे चरण में 23 अप्रैल को बची सात अन्य सीटों पर वोटिंग होगी.

ये है चैत्र नवरात्रि में कलश स्थापना का सही नियम और शुभ मुहूर्त

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आपको बता दें,कि वैसे तो नवरात्रि का पर्व साल में दो बार आता हैं,मगर चैत्र की नवरात्रि बहुत ही विशेष मानी जाती हैं इस पर्व में देवी शक्ति के नौर रूपों की उपासना का यह खास पर्व माना जाता हैं वही यह भी कहा जाता हैं,कि इस नवरात्रि में अगर आप देवी को प्रसन्न कर लेते हैं तो आपकी हर इच्छा जल्द ही पूर्ण हो जाती हैं।

वही इस साल चैत्र नवरात्रि 6 अप्रैल से आरम्भ हो रही हैं जो 14 अप्रैल को समाप्त हो जायेंगी। वही यह इस साल पूरे नौ दिनों तक रहने वाली हैं। वही नवरात्रि के इन नौ दिनों में देवी भक्त मां को प्रसन्न करने के लिए हर प्रयास करते हैं। वही इनके नौ स्वरूपों की पूजा अर्चना भी करते हैं।

वही नवरात्रि के पर्व में कलश स्थापना का विशेष महत्व होता हैं,वही नवरात्रि में मां दुर्गा की कृपा को पाने के लिए कलश की स्थापना उचित मुहूर्त में ही करनी चाहिए। बता दें,कि इस बार कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त सिर्फ 4 घंटे 10 मिनट तक ही रहेगा। कलश स्थापना मुहूर्त सुबह 06 बजकर 09 मिनट से लेकर 10 बजकर 21 मिनट तक रहेगा। वही कलश स्थापना का यह मुहूर्त इसलिए भी बहुत शुभ माना जा रहा हैं क्योंकि इस समय द्विस्वभाव मीन लग्न होगा।

जानिए कलश स्थाना से जुड़े खास नियम— 
बता दें,कि कलश स्थापना हमेशा ही शुभ मुहूर्त में करनी चाहिए। वही कलश की स्थापना करने के लिए पूजन स्थल से अलग एक पाटे पर लाल रंग या फिर सफेद रंग का कपड़ा बिछाएं इसपर अक्षत से अष्टदल बनाकर इस पर जल से भरा कलश स्थापित करें। वही कलश का मुंह खुला ना रखें। उसे किसी चीज से ढक देना उचित होता हैं।

भोपाल में भाजपा का 30 साल पुराना गढ़ ढहाने के लिए बनाई यह रणनीति, ‘दिग्गी’ का वॉर रूम तैयार

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 लोकसभा चुनाव 2019 (Lok Sabha Election 2019) में मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में कांग्रेस के दिग्गज नेता दिग्विजय सिंह की प्रतिष्ठा दांव पर लगी हुई है, क्योंकि 30 साल से बीजेपी के अभेद दुर्ग में तब्दील हो चुकी भोपाल लोकसभा सीट को फतह करने के लिए कांग्रेस ने दिग्विजय को यहां से मैदान में उतारा है।

ऐसे में कांग्रेस प्रत्याशी दिग्विजय सिंह (Digvijay Singh) ने अपनी चाणक्य निति से भाजपा को मात देने के लिए स्पेशल वॉर रूम बनाया है। जहाँ से वे हर मोर्चे पर रणनीति बनाएंगे। भोपाल लोकसभा सीट जीतना दिग्विजय सिंह के लिए साख का सवाल बन गया है। अपनी जीत को सुनिश्चित करने के लिए दिग्गी ने पूरी ताकत झोंक दी है। हर दांव लगाया जा रहा है।

संसदीय क्षेत्र भोपाल में चुनावी जमावट के लिए ही दिग्विजय सिंह का वॉर रूम भी बनकर तैयार है। इस वॉर रूम से हर पोलिंग बूथ को मजबूत करने के साथ कार्यकर्ताओं को चार्ज भी किया जा रहा है। राजधानी भोपाल के मिंटो हॉल के ठीक सामने एक प्राइवेट कॉलेज की बिल्डिंग है, जिसमें दिग्विजय सिंह ने अपना चुनावी वॉर रूम तैयार किया है। इस वॉर रूम में आईटी सेल, सोशल मीडिया और मीडिया सेल बनाई गई है।

दिग्विजय सिंह जल्द करेंगे वॉर रूम का उद्घाटन

वहीं से पूरे लोकसभा चुनाव की व्यवस्थाओं की मॉनिटिरंग का काम किया जा रहा है। इसी वॉर रूम का जल्द दिग्विजय सिंह औपचारिक उद्घाटन करेंगे। दिग्विजय सिंह की टीम का कहना है कि वॉर रूम से भोपाल से लेकर सीहोर की आठों विधानसभा सीटों की चुनावी व्यवस्था की मॉनिटरिंग की जाएगी। दिग्विजय सिंह खुद हर कार्यकर्ता से संपर्क कर रहे हैं। इसी वॉर रूम से चुनाव की पल-पल की प्लानिंग और रणनीति भी तैयार हो रही है।

सियासी मायने में सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण

वहीं बीजेपी दिग्विजय सिंह को अपने लिए कोई बड़ी चुनौती नहीं मान रही है। कुल मिलाकर ये है कि आम चुनाव 2019 में दिग्विजय सिंह के लिए सियासी मायने में सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण है। यही वजह है कि दिग्गी ने अपनी राजगढ़, भोपाल और सीहोर की टीम के साथ एड़ी चोटी का जोर लगा दिया है।