Home Blog Page 3220

लोकसभा चुनाव 2019: छत्तीसगढ़ में मोदी-राहुल नहीं, सीएम और पूर्व सीएम के बीच है मुकाबला!

0

देश में लोकसभा चुनाव नरेन्द्र मोदी सरकार के कामकाज और कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी के चुनावी वादों पर लड़ा जा रहा है. इन दावों और वादों को लेकर दोनों ही दलों की तरफ से आरोप और प्रत्यारोप का दौर शुरू हो चुका है. देशभर में चुनाव भले ही भाजपा की ओर से पीएम नरेन्द्र मोदी और कांग्रेस की ओर से राहुल गांधी को चेहरा बनाकर लड़ा जा रहा हो, लेकिन हाल ही में विधानसभा चुनाव से गुजरे छत्तीसगढ़ में स्थितियां अलग हैं.

छत्तीसगढ़ में लोकसभा चुनाव में राष्ट्रीय मुद्दों के साथ ही मुख्यमंत्री भूपेश बघेल बनाम पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह भी रहेगा. वजह स्पष्ट है कि छत्तीसगढ़ में कांग्रेस का चेहरा मुख्यमंत्री व प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष भूपेश बघेल हैं तो भाजपा का चेहरा पूर्व सीएम और संगठन के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष डॉ. रमन सिंह हैं. विधानसभा चुनाव में इन्हीं दोनों के बीच मुकाबला था. एक वजह ये भी कि इन्हीं दो नेताओं के नेतृत्व और रणनीति पर कांग्रेस-भाजपा ने विधानसभा चुनाव लड़ा. अब लोकसभा चुनाव में यही दोनों चेहरे आमने-सामने हैं, भले ही ये दोनों ही प्रत्याशी नहीं हैं. दोनों नेताओं पर दबाव है कि वे अपने दल को अधिक से अधिक लोकसभा सीटों पर जीत दिलाएं.

डॉ. रमन सिंह साल 2003 से लगातार 15 वर्षों तक छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री रहे. इस कारण प्रदेश में भाजपा का वही चेहरा थे. पार्टी ने 2018 का विधानसभा चुनाव भी उन्हीं के चेहरे पर लड़ा. डॉ. रमन के साथ ही 2018 के चुनाव में 12 मंत्री चुनाव मैदान में थे. डॉ. सिंह के अलावा मंत्री बृजमोहन अग्रवाल, पुन्नूलाल मोहले और अजय चंद्राकर को ही जीत मिल सकी. अन्य सभी मंत्रियों को हार का सामना करना पड़ा.

File Photo.

विधानसभा चुनाव में भाजपा की करारी हार की जिम्मेदारी खुद डॉ. रमन सिंह ने ली. जबकि राजनीतिक गलियारों में चर्चा रही कि जनता की नाराजागी डॉ. रमन सिंह से नहीं बल्कि सरकार के हिस्सा रहे मंत्री व दूसरे नेताओं से थी. शायद यही कारण था कि करारी हार के बाद भी भाजपा आलाकमान ने डॉ. रमन सिंह को संगठन का राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बना दिया. वहीं दूसरी तरफ विधानसभा चुनाव 2018 में 90 में से 68 सीटें कांग्रेस की झोली में आने का श्रेय जिन चुनिंदा नेताओं को दिया गया, उनमें प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष भूपेश बघेल का नाम सबसे आगे था, जिन्हें संगठन ने मुख्यमंत्री का ताज भी पहनाया.

भाजपा के प्रवक्ता केदार गुप्ता का कहना है कि राष्ट्रीय स्तर पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के चेहरे के साथ ही केन्द्र सरकार द्वारा पिछले पांच साल में किए गए जनहित व राष्ट्रहित के कार्यों को लेकर ही हम लोकसभा चुनाव में उतर रहे हैं, लेकिन प्रदेश में इनके साथ ही डॉ. रमन सिंह की भूमिका भी काफी अहम है. प्रदेश संगठन का वे प्रमुख चेहरा हैं. वहीं कांग्रेस प्रवक्ता विकास तिवारी का कहना है कि देश में मोदी सरकार के 60 महीनों के काम पर छत्तीसगढ़ के भूपेश सरकार का 60 दिन का काम ही भारी है. निश्चिततौर लोकसभा चुनाव में राष्ट्रीय नेतृत्व के साथ ही मुख्यमंत्री भूपेश बघेल छत्तीसगढ़ में कांग्रेस का प्रमुख चेहरा हैं.

देश के सौ से अधिक फिल्मकारों ने की भाजपा को वोट न देने की अपील

0

देशभभर के लगभग 100 से अधिक फिल्म निर्माताओं ने लोगों से अपील की है कि आगामी लोकसभा चुनाव में भाजपा को वोट न दें. उनका मानना है कि भाजपा के शासन में धुव्रीकरण और नफरत की राजनीति में बढ़ोतरी हुई है.

खबर के मुताबिक भारत के 100 से अधिक फिल्म निर्माता, जिनमें अधिकांश स्वतंत्र फिल्म निर्माता हैं, लोकतंत्र बचाओ मंच के तहत एकजुट हुए हैं. उन्होंने लोगों से भाजपा को वोट न देने की अपील की है.

इनमें आनंद पटवर्धन, एसएस शशिधरन, सुदेवन, दीपा धनराज, गुरविंदर सिंह, पुष्पेंद्र सिंह, कबीर सिंह चौधरी, अंजलि मोंटेइरो, प्रवीण मोरछले देवाशीष मखीजा और उत्सव के निर्देशक और संपादक बीना पॉप जैसे नामी फिल्मकार भी शामिल हैं.

उन्होंने अपना यह बयान शुक्रवार को आर्टिस्ट यूनाइट इंडिया डॉट कॉम वेबसाइट पर डाला गया है.

इनका मानना है कि भाजपा नेतृत्व वाली एनडीए के शासनकाल में धुव्रीकरण और घृणा की राजनीति में बढ़ोतरी हुई है. दलितों, मुसलमान और किसानों को हाशिए पर धकेल दिया गया है. सांस्कृतिक और वैज्ञानिक संस्थानों को लगातार कमजोर किया जा रहा है और सेंसरशिप में बढ़ोत्तरी हुई है. इसके अलावा और भी अन्य कारण हैं.

फिल्म निर्माताओं का मानना है कि आगामी लोकसभा चुनाव में समझदारी से मतदान नहीं करेंगे तो फासीवाद हमें मुश्किल में डाल देगा.

साथ ही उन्होंने आरोप लगाया है कि 2014 में भाजपा सत्ता में आने के बाद से देश का धार्मिक रूप से धुव्रीकरण किया किया जा रहा है और सरकार अपने वादों को पूरा करने में पूरी तरह से विफल रही है.

उनका आरोप है कि मॉब लिंचिंग (भीड़ द्वारा हत्या) और गोरक्षा के नाम पर देश को सांप्रदायिकता के आधार पर बांटा जा रहा है.

बयान में कहा गया है कि भाजपा देशभक्ति को तुरुप के इक्के की तरह इस्तेमाल कर रही है. कोई भी व्यक्ति या संस्था सरकार के प्रति थोड़ी सी भी असहमति जताता है तो उसे राष्ट्र विरोधी या देशद्रोही करार दिया जाता है.

उन्होंने ये भी आरोप लगाया है कि भाजपा देशभक्ति को अपना वोट बैंक बढ़ाने के लिए इस्तेमाल कर रहा है. साथ ही सशस्त्र बलों को अपनी रणनीति में शामिल करके राष्ट्र को युद्ध में उलझाने की कोशिश कर रहा है.

सैलरी जानकार उड़ जाएंगे आपके होश, मुंबई के इस युवक को गूगल में मिली नौकरी

0

कई बार फन या यूं कहे शौक के लिए किए गए कार्य भी व्यक्ति की किस्मत चमका देते हैं। कुछ इसी तरह का ही करिश्मा मुंबई के एक 21 वर्ष के युवक अब्दुल्ला खान के साथ हुआ। भले ही वो आईआईटी में दाखिले के लिए प्रवेश परीक्षा पास न कर पाए हों, किन्तु गूगल में उनको जो सैलरी पैकेज ऑफर किया गया है, उसका ख्वाब हर आईआईटियन देखता है।

इस सप्ताह खान को गूगल के लंदन ऑफिस में जॉब की पेशकश मिली है। गूगल में उनका सैलरी पैकेज 1.2 करोड़ रुपये है। यह सैलरी पैकेज शहर के गैर आईआईटी इंजिनियरिंग कॉलेज से ग्रैजुएट हुए व्यक्ति को मिलने वाले पैकेज से लगभग 30 गुना अधिक है। आमतौर पर ऐसे छात्रों को 4 लाख रुपये वार्षिक का पैकेज मिलता है। श्री एल. आर. तिवारी इंजिनियरिंग कॉलेज, मीरा रोड के विद्यार्थी अब्दुल्ला खान को गूगल ने इंटरव्यू के लिए बुलाया गया था। उनकी प्रोफाइल एक ऐसी साइट पर थी जो प्रोग्रामिंग से जुड़ी प्रतियोगिता का आयोजन करती है। उस साइट पर उपलब्ध अब्दुल्ला खान की प्रोफाइल गूगल के रिक्रूटर्स को पसंद आ गई और कंपनी ने उनका ऑनलाइन इंटरव्यू ले लिया। इसके बाद खान को इस माह के शुरू में गूगल के लंदन स्थित दफ्तर में फाइनल स्क्रीनिंग के लिए आने के लिए कहा गया। खान की पढ़ाई की बात करें तो उन्होंने सऊदी अरब में प्रारंभिक शिक्षा ली और 12वीं के बाद वे मुंबई आ गए थे।

अब्दुल्ला खान के पैकेज में से 54.5 लाख रुपये वार्षिक तो उनकी बेसिक सैलरी है। इसके साथ थी 15 फीसदी बोनस और चार वर्षों तक के लिए 58.9 लाख रुपये के मूल्य का स्टॉक ऑप्शन शामिल है। फिलहाल वह बीई (कंप्यूटर साइंस) के फाइनल इयर का छात्र हैं। वह सितंबर में गूगल की साइट रिलायबिलिटी इंजिनियरिंग टीम का हिस्सा बनेंगे।

छत्तीसगढ़ : शराबमाफियों पर नहीं हुई कार्रवाई, विधायक ने भेजा सीएम को इस्तीफा

0

भोपाल। धरमपूरी विधानसभा क्षेत्र के विधायक पांचीलाल मेडा ने मुख्यमंत्री कमलानाथ को अपना इस्तीफा भेजा है। इसकी वजह शराब माफिया पर कार्रवाई नहीं होना बताया जा रहा है। विधायक ने सीएम कमलनाथ को लिखित में इस्तीफा भेजते हुए पत्र में लिखा है कि शराब दुकान के ठेकेदार द्वारा जाति सूचक शब्दों का प्रयोग किया गया और मेरे खिलाफ षड़यंत्र रचा गया जिससे मैं आहत हूं। पूरे मामले में पर शिकायत के बाद भी जिला पंचायत का सहयोग प्राप्त नहीं हुआ। वहीं मेरे एवं मेरी पार्टी के कार्यकर्ताओं के खिलाफ रिपोर्ट लिखी गई। इस घटना से मैं मानसिक रूप से आहत हूं। विधायक ने लिखा है कि यहीं कारण है कि विधायक पद से इस्तीफा स्वीकार करें अथवा दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करें।

छत्तीसगढ़ में जीपीएस लगी हुई गाड़ियों का होगा फिटनेस, आरटीओ ने जारी किया निर्देश

0

रायपुर। प्रदेश में अब जिन गाड़ियों में जीपीएस सिस्टम नहीं लगी है उन गाड़ियों का 1 अप्रैल से फिटनेंस परीक्षण नहीं होगी। इससे यह साफ जाहिर होता है कि अब वह गाड़ियां शहर में नहीं चलेगी। क्योंकि आरटीओ और ट्रैफिक पुलिस बगैर जीपीएस वाली गाड़ियों की जांच कर उन पर कार्रवाई करेंगे। बता दें कि परिवहन विभाग ने नया नियम लागू किया है। इस नियम के तहत 1 अप्रैल से बिना जीपीएस लगी हुई गाड़ियों में फिटनेस नहीं होगा। इसके लिए कार्यालय परिवहन आयुक्त छत्तीसगढ़ ने सभी क्षेत्रीय, अति क्षेत्रीय एवं जिला परिवहन अधिकारियों को दिशा-निर्देश जारी किया है। भारत सरकार सड़क परिवहन विभाग ने अधिसूचना जारी की है जिसमें केंद्र शासन द्वारा सभी सार्वजनिक सेवा यान में वहीकल लोकेशन ट्रैकिंग डिवाईस और आपातकालीन बटन के अनुकूलन या फिटनेस के संबंध में मानकों को अधिसूचित करने के लिए दिशा निर्देश जारी किए हैं।

डॉ. रमन सिंह बिलासपुर जिले के कार्यकर्ता सम्मेलन में होंगे शामिल

0

रायपुर। भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष डॉ. रमन सिंह शुक्रवार दोपहर बिलासपुर जिले के बेलतरा में होने वाले कार्यकर्त्ता सम्मेलन में शामिल होंगे। इस सम्मेलन में भाजपा नेता सच्चिदानंद उपासने, विधानसभा नेता प्रतिपक्ष धरमलाल कौशिक, प्रदेश अध्यक्ष विक्रम उसेंडी, प्रदेश संगठन महामंत्री पवन साय, पूर्व विधानसभा अध्यक्ष गौरीशंकर अग्रवाल भी शामिल होंगे। बता दें कि भारतीय जनता पार्टी की ओर से लगातार कार्यकर्ता सम्मेलन कर लोकसभा चुनाव की तैयारी और कार्यकर्ताओं के बीच जाकर वरिष्ठ नेता लोकसभा चुनाव को लेकर मार्ग दर्शन दिया जा रहा है। केंद्र में एक बार फिर देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की सरकार बनाने के लिए प्रचार-प्रसार किया जा रहा है।  इसी कड़ी में आज बिलासपुर जिले के बेलतरा विधानसभर क्षेत्र के रमतिला में आहूत कार्यकर्ता सम्मेलन में शामिल होंगे। नेता प्रतिपक्ष कौशिक भी सुबह इस सम्मेलन में हिस्सा लेने सड़क मार्ग से रमतिला पहुंचेंगे। कौशिक यहां से दोपहर को प्रस्थान कर मस्तूरी जाएंगे जहां वे दो बजे से आयोजित कार्यकर्ता सम्मेलन में भाग लेंगे। प्रदेश अध्यक्ष उसेंडी कल हेलीकाप्टर से प्रस्थान कर सक्ती विधानसभा स्तरीय कार्यकर्ता सम्मेलन में हिस्सा लेंगे जो दोपहर बाराद्वार में होगा। इसके बाद उसेंडी दोपहर ढाई बजे चंद्रपुर विधानसभा के डभरा पहुंचेंगे और वहां विधानसभा स्तरीय कार्यकर्ता सम्मेलन में शामिल होंगे। उसेंडी के साथ प्रदेश संगठन महामंत्री पवन साय, पूर्व विस अध्यक्ष गौरीशंकर अग्रवाल और प्रदेश प्रवक्ता सच्चिदानंद उपासने भी जाएंगे।

छत्तीसगढ़ : भाजपा के पूर्व विधायक बागी होकर निर्दलीय चुनाव लड़ने का किया ऐलान, नामांकन फार्म भी खरीदा

0

रायपुर। भारतीय जनता पार्टी के पूर्व विधायक बागी होकर निर्दलीय चुनाव लड़ने का ऐलान किया, साथ ही उन्होंने नामांकन फार्म भी खरीद लिया है। इससे भाजपा के लिए मुशकिल बढ़ने की संभावना है, क्योंकि भाजपा के नेताओं में आपसी टकराव नजर आ रहा है। 
बता दें कि भाजपा ने लोकसभा चुनाव की टिकट को लेकर वितरण किया गया है। इससे भाजपा नेताओं के बीच फूट होने लगी है। क्योंकि जांजगीर लोकसभा से निर्मल सिन्हा को टिकट नहीं मिलने से वे नाराज हो चुके हैं और अब वे निर्दलीय फार्म भरकर चुनाव लड़ने का ऐलान भी कर दिया है। निर्मल सिन्हा के बागी तेवर से पार्टी में हड़कंप मच गया है। निर्मल सिन्हा, पूर्व विधायक हैं और अंत्यावसायी वित्त विकास निगम के अध्यक्ष रह चुके हैं। उनकी संगठन में अच्छी पैंठ हैं। इसके अलावा वे आरएसएस से जुड़े हुए हैं। उन्होंने इस लोकसभा क्षेत्र से टिकट की दावेदारी की थी। नामांकन के पहले दिन निर्मल सिन्हा के नामांकन फार्म खरीदने को उनकी नाराजगी के तौर पर देखा जा रहा है। इस तरह कांग्रेस को भाजपा पर एक बार फिर जुबानी वार करने का मौका मिल गया है। फिलहाल इस मामले में भाजपा संगठन के नेताओं की कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

छत्तीसगढ़ : भाजपा को संदेह, कहीं सांठगांठ के तहत तो नहीं छोड़ा ‘नक्सली’ नक्का राव

0

रायपुर। नेता प्रतिपक्ष धरमलाल कौशिक ने कांग्रेस से सवाल पूछा कि कहीं लोकसभा चुनाव के मद्देनजर किसी सांठगांठ के चलते तो नक्का राव की जमानत का रास्ता आसान तो नहीं किया गया? यह अत्यंत संवेदनशील मसला था और पुलिस ने नक्का राव को नक्सली बताते हुए उससे नक्सली साहित्य समेत अन्य आपत्तिजनक सामग्रियों की बरामदगी का दावा किया था।

पुलिस प्रधानमंत्री की हत्या के षड्यंत्र में शामिल लोगों के संपर्क में रहने वाले माओवादी के खिलाफ निर्धारित समय में चालान पेश नहीं कर पाई। कौशिक ने जानना चाहा कि क्या इसमें प्रदेश सरकार की मिलीभगत है?

कांग्रेस और नक्सली सांठगांठ के चलते ही तो पुलिस ने चालान पेश करने में कहीं देर नहीं कर दी? कांग्रेस के नक्सलियों के साथ रिश्तों से देश वाकिफ है।

Madhya Pradesh: इस्तीफा देने पहुंचे कांग्रेस विधायक को खींच ले गए मंत्री

0



भोपाल। धरमपुरी से कांग्रेस विधायक पांचीलाल मेंढा ने अपना इस्तीफा मुख्यमंत्री कमलनाथ देने भोपाल पहुंचे। वे अपने क्षेत्र में शराब माफिया पर कार्रवाई नहीं होने से दुखी हैं। विधायक का कहना है कि स्कूल के पास बनीं दो शराब दुकानों को हटाने के लिए मैंने अपने कार्यकर्ताओं के साथ बैठक की थी। इसके बाद उन्होंने इसकी शिकायत प्रशासनिक अधिकारियों को भी की थी। इसके बाद भी उन पर कार्रवाई नहीं है। विधायक का कहना है‍ कि शराब दुकान तो नहीं हटी पर शराब माफिया ने मेरे कार्यकर्ताओं के साथ अभद्रता की है। उन्होंने अतिरिक्त आबकारी अधिकारी राधेश्याम राय को हटाने की मांग की है।

सुबह प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान मंत्री प्रद्युमन सिंह तोमर वहां पहुंचे और विधायक मेंढा को मीडिया के सामने ही अपने साथ में खींचकर ले गए। इस दौरान उन्होंने विधायक को मीडिया से बात भी नहीं करने दी और कहने लगे कि हम साथ में सीएम कमलनाथ जी से मिलने के लिए जाएंगे। मेंढा मेरे मित्र हैं और मैं उन्हें अपने साथ ले जाऊंगा। मंत्री विधायक को ले गए फिर बंद कमरे में उनके साथ चर्चा की।



ओडिशा में बोले पीएम मोदी- तय करें निर्णय लेने वाली सरकार चाहिए या नारे वाली

0

कोरापुट। प्रधानमंत्री अपने चुनावी दौरे पर आज फिर से तीन राज्यों में सभाओं को संबोधित करेंगे। इसकी शुरुआत उन्होंने ओडिशा के कोरापुट से ही है। यहां उन्होंने अपनी एक चुनावी रैली को संबोधित करते हुए राज्य सरकार और विपक्षी दलों पर जमकर निशाना साधा। साथ ही अंतरिक्ष में भारत के मिशन शक्ति की सफलता के लिए ओडिशा के लोगों को बधाई भी दी। उन्होंने यह भी कहा कि जनता को तय करना है कि उन्हें निर्णय लेने वाली सरकार चाहिए या फिर केवल नारे देने वाली।

प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि आप सभी जनता जर्नादन का आशीर्वाद लेने के लिए आपका ये चौकीदार आपके बीच आया है। 2014 में जब उड़ीसा आया था तो कहा था पूरी ईमानदारी से, पूरी निष्ठा से आपकी सेवा करने में, मैं कोई कसर नहीं छोडूंगा, आपके प्रधानसेवक के तौर पर आपकी सेवा में मैंने कोई कसर नहीं छोड़ी है। इन पांच वर्षों में आपने मेरा साथ दिया है , मुझे दिशा दिखाई है। विरोधियों के अनेकों वार के सामने मुझे सुरक्षा दी है। इसके लिए मैं आपका बहुत बहुत आभारी हूं।

प्रधानमंत्री ने कहा कि दो दिन पहले ही, ओडिशा एक ऐसी ऐतिहासिक उपलब्धि का गवाह बना है, जिसने पूरी दुनिया को भारत के सामर्थ्य से परिचित कराया है। भारत अब अंतरिक्ष में भी चौकीदारी करने में सक्षम है। मतदान के दिन जब आप पोलिंग बूथ जाएंगे तो एक स्पष्ट मन बनाकर जाइएगा।

आपको ये तय करना है कि आतंक के ठिकानों में घुसकर मारने वाली सरकार चाहिए,या फिर घबराकर बैठ जाने वाली सरकार। आपको ये तय करना है कि निर्णय करने वाली सरकार चाहिए या सिर्फ नारे देने वाली सरकार। आपको तय करना है कि जो सरकारें नक्सली हिंसा पर काबू नहीं पा सकतीं, जो उसके आगे कमजोर नजर आती हैं, उन्हें क्या सज़ा देनी है।

पीएम आगे बोले कि 2019 का चुनाव सिर्फ एक सांसद और विधायक का चुनाव नहीं है। ये चुनाव केंद्र और राज्य में विकास का डबल इंजन लगाने वाली भारतीय जनता पार्टी की सरकारों के चुनाव का समय है। ये आने वाले 5 वर्षों में नए ओडिशा और नए भारत के निर्माण का चुनाव है। ओडिशा मजबूत तभी बनेगा जब यहां का आदिवासी, यहां का किसान, यहां का नौजवान, आगे बढ़ेगा। जब यहां और केंद्र में, दोनों ही जगहों पर भारतीय जनता पार्टी की सरकार होगी।

राज्य की पटनायक सरकार पर निशाना साधते हुए बोले बीते 7 दशकों में जिन्होंने यहां सरकारें चलाई हैं, उन्होंने ओडिशा को गरीबी और भुखमरी के अलावा क्या दिया? गरीबों और आदिवासियों के नाम पर योजनाएं बनती हैं लेकिन बिचौलिए और दलाल उसका फायदा लूट ले जाते हैं, और असली लाभार्थी हाथ मलता रह जाता है। कोरापुट में तो ऐसी घटनाएं भी देश ने देखी हैं कि इलाज के तो मिला ही नहीं बल्कि मृत्यु के बाद भी अपमानित होना पड़ा है। आपका ये चौकीदार ऐसी व्यवस्थाओं को बदलने के लिए दिन-रात काम कर रहा है।

पीएम आगे बोले कि यहां की सरकार ने आयुष्मान भारत योजना के लाभ से भी अभी तक ओडिशा की जनता को दूर रखा है। जो खेल इन्होने आपके स्वास्थ्य के साथ किया, वही खेल ये किसानों के साथ भी कर रहे है। आज तक इन्होने यहां ‘पीएम किसान सम्मान निधि’ योजना लागू नहीं की है। जिस कारण यहां के एक भी किसान को अभी तक इस योजना का लाभ नहीं मिल पाया है। पीएम किसान सम्मान निधि के तहत देश के जिन 12 करोड़ किसानों को हम सीधी मदद बैंक खाते में दे रहे हैं उनमें से एक भी ओडिशा का किसान नहीं है, क्योंकि यहां की सरकार किसानों के सामने दीवार बनकर खड़ी हो गई है।