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Chhattisgarh : CM के सामने लिस्ट छोटी करने की चुनौती, कांग्रेस में बंपर दावेदार

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रायपुर। छत्तीसगढ़ में विधानसभा चुनाव की जीत ने कांग्रेस में लोकसभा चुनाव के दावेदारों की लंबी लाइन कर दी है। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष और प्रदेश चुनाव समिति के अध्यक्ष भी हैं, इसलिए उन पर न केवल सूची छोटी कराने की जिम्मेदारी है, बल्कि उन पर अधिक से अधिक सीटों पर पार्टी को जिताने का जिम्मा भी है। पूरा खेल प्रत्याशी चयन पर ही टिका होगा। यह बात उन्हें पता है, इसलिए सूची छोटी करना, बघेल के लिए बड़ी चुनौती है।

हर सीट पर 17 से 20 दावेदार

विधानसभा चुनाव में बम्पर जीत से नेताओं को लग रहा है कि प्रदेश में कांग्रेस की लहर है। चुनाव में टिकट किसे भी दे दिया जाए, वह जीत जाएगा। यही वजह है कि हर लोकसभा सीट से 17 से 20 दावेदारों का नाम सामने आ गया है। दूसरी तरफ, पार्टी के वरिष्ठ नेता सभी 11 लोकसभा सीटों पर जीत का दावा तो कर रहे हैं, लेकिन उन्हें यह भी पता है कि लोकसभा चुनाव की परिस्थितियां विधानसभा चुनाव से अलग होती हैं। छत्तीसगढ़ बनने के बाद यहां हुए तीन लोकसभा चुनाव में कांग्रेस को हर बार केवल एक-एक सीट से संतुष्ट होना पड़ा है।

संतुष्ट करना बड़ी चुनौती

11 सीटों के लिए केवल एक-एक नाम तय करना बड़ी चुनौती है। नाम फाइन करने के लिए न केवल मंत्रियों, विधायकों, जिलाध्यक्षों और जिला प्रभारियों को संतुष्ट करना होगा, बल्कि बाकी दावेदारों को भी समझाना होगा, ताकि सूची आने के बाद दिक्कत न हो। मुख्यमंत्री के पास सूची छोटी करने के लिए समय भी कम है। प्रदेश प्रभारी पीएल पुनिया ने उनके समेत चुनाव समिति के सदस्यों को सात मार्च को दिल्ली बुलाया है। पुनिया पहले समिति के अध्यक्ष व सदस्यों से स्क्रूटनी वाली सूची मांगेगे। उसके बाद ही वे आगे चर्चा शुरू करेंगे।

छत्तीसगढ़ : Whatsapp को बनाया जरिया, 6 माह में ही 200 को मिली नौकरी

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रायपुर। बेरोजगारी देश की बड़ी समस्या है। सरकारें, शासन- प्रशासन, संस्थाएं, संगठन सभी इसके लिए काम कर रही हैं, लेकिन सारे प्रयास नाकाफी हैं। ऐसे में एक सामान्य नौकरी करने वाले रायपुर निवासी देवेंद्र पटेल ने सराहनीय पहल की है।

एक वाट्सएप ग्रुप बनाकर वह उसका उपयोग जॉब प्लेसमेंट के मंच के रूप में कर रहे हैं। खास बात यह कि इस ग्रुप में शामिल युवा एक-दूसरे के लिए नौकरी तलाशते हैं और ग्रुप के जरिए सूचित करते हैं।

सरकारी हो या निजी, हर प्रकार की नौकरियों की जानकारी ग्रुप में लगातार अपडेट होती रहती है। इतना ही नहीं, प्रतियोगी परीक्षाओं से जुड़ी ढेरों जानकारियां भी होती हैं। इस ग्रुप को बने अभी छह महीने ही हुए हैं। इस बीच करीब दो सौ युवाओं को इसके जरिए नौकरी मिल चुकी है।

आज जब हम आए दिन बेरोजगारी के चलते युवाओं द्वारा आत्मघाती कदम उठाने की खबरें पढ़ते व सुनते हैं, ऐसे में यह मामूली आंकड़े भी देवेंद्र की पहल को सलाम करने को कहते हैं। रायपुर के देवेंद्र साधारण परिवार से हैं।

पिता मिलापराम पटेल मजदूरी करके उन्हें किसी तरह पढ़ाया। कला में स्नातक करने के बाद देवेंद्र नौकरी तलाशने लगे, ताकि घर में कुछ मदद कर सकें, लेकिन निराशा ही हाथ लगती रही। इसी दौरान उन्हें एक विभाग में संविदाकर्मी की नौकरी मिल गई। इस कठिन संघर्ष ने देवेंद्र को उनके जैसे और युवाओं के लिए कुछ करने को प्रेरित किया। यहीं से उनके वाट्सएप ग्रुप की नींव डली।

आज उनके ग्रुप में सैकड़ों युवा जुड़े हुए हैं। चैनल सिस्टम के चलते यह ग्रुप तेजी से बढ़ रहा है। देवेंद्र बताते हैं कि इसमें कई विशेषज्ञों को भी जोड़ा गया है, जो लगातार मार्गदर्शन करते रहते हैं। नौकरी से जुड़ी सूचनाएं प्रसारित करते रहते हैं। गृहणियों भी उनके ग्रुप से जुड़ी हैं, जिनके लिए रोजगार के रास्ते में मिल रहे हैं।

इस तरह मिल रही मदद 

– वेब पोर्टेल, रोजगार समाचार के ई-पेपर और उसके लिंक वाट्सएप में भेजते हैं, जिसके जरिए सोश्ाल साइट्स से मिलती है जानकारी। य सरकार द्वारा अखबारों में जारी किए गए विज्ञापनों की कतरन और तिथिवार परीक्षाओं के आयोजनों व नतीजों की पूरी जानकारी समय पर उपलब्ध रहती है।

– जिला रोजगार में पंजीयन की प्रक्रिया, प्लेसमेंट कैंप आयोजन की जानकारियां, शिक्षा-परीक्षा संबंधी काउंसिलिंग-कार्यशाला आदि हमेशा अपडेट होता रहता है।

– आवश्यक परीक्षाओं में फार्मूले सभी विषयों में दक्ष लोगों द्वारा आदानप्रदान। संबंधित विभागों-मंचों की फोन डायरेक्टरी भी इस ग्रुप में उपलब्ध है।

– खुद के लिए लंबे समय से रोजगार की तलाश करते हुए औरों के दर्द को समझा। अच्छी शिक्षा और मेहनतकश होने के बावजूद मायूस होकर बहुतों को लौटते देखा। यहीं से यह सोच आई कि कुछ किया जाए। बूंद-बूंद से ही घड़ा भरता है। आज मेरे ग्रुप से जुड़ा हर कोई एक-दूसरे की चिंता करता है। यह छोटी उपलब्धि नहीं है। – देवेंद्र पटेल

Chhattisgarh : अब स्कूलों का स्कोर कार्ड और अफसरों का बनेगा जॉब चार्ट

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रायपुर। छत्तीसगढ़ के स्कूलों का अब स्कोर कार्ड बनेगा। स्कोर कार्ड बच्चों के लर्निंग आउटकम के आधार पर ही निर्धारित किया जाएगा। शिक्षकों का नवाचार, पढ़ाने का तरीका, बच्चों की बेहतर उपस्थिति आदि स्कूलों के स्कोर कार्ड को बढ़ाएंगे। इसके अलावा राज्य के सभी प्रशासनिक और शैक्षणिक पदों में बैठे अधिकारियों के लिए जॉब चार्ट तैयार किया जाएगा। इसके बाद उनके कामों की समीक्षा होगी।

हर अधिकारी के लिए तय होगा कि कौन सा काम कितने दिन में पूरा होना चाहिए। अभी जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालयों में देखा जाए तो मान्यता देने की प्रक्रिया में ही देरी की जाती है। ऐसे में अब विभाग सबकी जिम्मेदारी तय करने जा रहा है।

राज्य के समग्र शिक्षा अभियान, एससीईआरटी, संभागीय कार्यालयों समेत अन्य विभागों में अभी अफसरों को मनमानी काम दिए गए हैं। किसी एक अधिकारी के पास कई प्रभार हैं तो किसी अधिकारी के पास दिनभर में एक भी फाइल बढ़ाने का काम ही नहीं है।

ऐसे में स्कूल शिक्षा विभाग ने हर अधिकारी के लिए जॉब चार्ट बनाने का निर्णय लिया है। स्कूल शिक्षा के प्रमुख सचिव गौरव द्विवेदी ने जॉब चार्ट निर्धारित करने के लिए निर्देश दिए हैं। गौरतलब है कि शिक्षा संहिता में जॉब चार्ट का प्रावधान था लेकिन पिछली सरकार में इसका पालन नहीं हो पा रहा था । वर्तमान सरकार अब जॉब चार्ट के आधार पर अधिकारियों से काम लेगी।

प्रमुख सचिव ने यह दिया निर्देश- राज्य में शालाओं के सतत आंकलन और सुधार के लिए यह आवश्यक है कि विभिन्न सूचकांकों के आधार पर प्रत्येक शालाओं की मात्रात्मक एवं गुणात्मक जानकारी तैयार की जा सकेगी। जिसमें शालाओं की वस्तुनिष्ठ समीक्षा हो सकेगी। उन्हें सतत सुधार की ओर प्रेरित किया जा सकेगा। प्रमुख सचिव ने स्कोर कार्ड के सूचकांकों की समीक्षा का स्कोर कार्ड का प्रस्ताव बनाने के लिए कहा है।

शिक्षकों के लिए बनेगी नई अवार्ड नीति- प्रदेश में शिक्षकों के लिए अब पुराने ढर्रे की बजाय नए सिरे से नए मापदंडों के आधार पर उन्हें अवार्ड दिया जाएगा। शालाओं के आंकलन के बाद जो शिक्षक बेहतर नवाचार से शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ाने के लिए काम करेगा उसे ही अवार्ड मिल सकेगा।

गठित होगा आंकलन सेल- स्कूल शिक्षा विभाग ने राज्य में आंकलन सेल गठित करने के लिए राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (एससीईआरटी) में सेंटर स्थापित किए हैं। राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद, समग्र शिक्षा से आंकलन कार्य से जुड़े अधिकारी, शिक्षण प्रशिक्षण संस्थाओं से आंकलन प्रकोष्ठ प्रभारी और सामग्री निर्माण प्रकोष्ठ प्रभारी, निजी शिक्षा कॉलेजों और विद्यालयों से प्रतिनिधि आदि की कमेटी बनाई जाएगी।

उपस्थिति को देखेगी शाला प्रबंधन समिति- स्कूलों में बच्चों की कितनी उपस्थिति है। समुदाय के माध्यम से एक बार कक्षा का आयोजन कराकर शैक्षणिक विकास की जानकारी दी जाएगी।

छत्तीसगढ़ : महेंद्र कर्मा के बेटे को डिप्टी कलेक्टर बनाने पर विवाद, OP ने उठाए चार सवाल

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रायपुर। झीरम कांड में मारे गए बस्तर टाइगर महेंद्र कर्मा के बेटे आशीष कर्मा को डिप्टी कलेक्टर बनाने पर छत्तीसगढ़ की राजनीति में उबाल आ गया है। पूर्व कलेक्टर और भाजपा नेता ओपी चौधरी ने सोशल मीडिया पर चार सवाल किये हैं। चौधरी ने कहा, मैं महेन्द्र कर्मा का बहुत सम्मान करता हूं। कर्मा के बाद उनके परिवार से विधायक रहे, नगर पंचायत अध्यक्ष हैं, जिला पंचायत में भी प्रतिनिधित्व है, लोकसभा में भी उनके परिवार से चुनाव लड़ा गया। यह सब अपनी जगह है, लेकिन अब उनके एक पुत्र को कांग्रेस सरकार ने सीधा डिप्टी कलेक्टर बना दिया।

कई लोग आरोप लगा रहे हैं कि कर्मा परिवार को लोकसभा की टिकट की दावेदारी से रोकने के लिए कांग्रेस ने तुष्टिकरण का यह कदम उठाया है। चौधरी ने कहा, यदि कर्मा होते तो शायद वो अपने बेटे को काबिलियत के आधार पर कलेक्टर या डिप्टी कलेक्टर बनाना पसंद करते न कि तुष्टिकरण की राजनीति के तहत।

बेहतर होता कि कांग्रेस की सरकार तुष्टिकरण की राजनीति करके लाखों युवाओं के साथ अन्याय करने के बजाय कर्मा के परिवार की आर्थिक सुरक्षा हेतु अनुकंपा का कोई अन्य उपाय करती। चौधरी ने कहा कि इस परिवेश में मेरे मन में कुछ सवाल उठ रहे हैं, जिन्हें सार्वजनिक करना अपना धर्म समझता हूं।

इस बार सीजी पीएससी परीक्षा में डिप्टी कलेक्टर के लिए सामान्य वर्ग का एक, एसटी के लिए दो और एससी-ओबीसी के लिए शून्य पद हैं। डिप्टी कलेक्टर के सिर्फ तीन पद हैं, ऐसे में कांग्रेस सरकार का तुष्टिकरण का कदम छत्तीसगढ़ के युवाओं के साथ अन्याय नहीं है?

क्या सरकार अन्याय नहीं कर रही

चौधरी ने पूछा-छत्तीसगढ़ के उन लाखों युवाओं के साथ क्या यह अन्याय नहीं है? जो युवा सालों से प्रदेश के सर्वोच्च प्रशासनिक पद को अपनी योग्यता से प्राप्त करने की कोशिश कर रहे हैं? क्या झीरम कांड के अन्य शहीदों के परिवारों को सरकार के तुष्टिकरण के निर्णय से पीड़ा नही हुई होगी? हजारों जांबाज जवान, नक्सलियों से सीधे लड़ते हुए शहीद हुए हैं। उनके परिवारों को दर्द नहीं हो रहा होगा?

बस्तर के सभी दलों के सामान्य जनप्रतिनिधित्व और आम आदिवासी भाई- बहन हर रोज माओवादी हिंसा से प्रभावित हो रहे हैं। दंतेवाड़ा के एजुकेशन सिटी के आस्था गुरुकुल में नक्सल हिंसा से अनाथ हुए सैकड़ों आदिवासी बच्चे अपने बेहतर भविष्य के लिये पढ़ाई कर रहे हैं। क्या इन सब लोगों के साथ कांग्रेस सरकार का यह निर्णय अन्याय नहीं है?

शहीद कर्मा परिवार को सरकार ने दिया सम्मान, सवाल न उठाए विपक्ष 

पंचायत व ग्रामीण विकास मंत्री टीएस सिंहदेव ने कहा है कि शहीद महेंद्र कर्मा के सुपुत्र आशीष कर्मा को डिप्टी कलेक्टर का पद देकर सरकार ने कर्मा परिवार को सम्मान देने की कोशिश की है। विपक्ष को इस पर आपत्ति नहीं होनी चाहिए। अंबिकापुर में पत्रकारों से चर्चा करते हुए सिंहदेव ने कहा कि जो विपक्ष मीसा बंदियों को पेंशन सुविधा का लाभ देने का निर्णय ले सकती है उसे कम से कम शहीद के परिवार को सम्मान देने लिए गए निर्णय पर आपत्ति नहीं जताई जानी चाहिए।

विंग कमांडर अभिनंदन को मानद उपाधि देने की तैयारी, दीक्षांत समारोह में करेंगे सम्मानित

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 देवी अहिल्या विश्वविद्यालय भारतीय वायुसेना के विंग कमांडर अभिनंदन वर्तमान का सम्मान करेगा। इसके लिए उन्हें मानद उपाधि देने का विचार किया जा रहा है। अगली कार्यपरिषद बैठक में विश्वविद्यालय प्रशासन यह प्रस्ताव रखेगा। इसके लिए कुलपति ने सहमति जता दी है। विश्वविद्यालय ने इसकी तैयारियां शुरू कर दी हैं।

तीन दिन पाकिस्तानी फौज के कब्जे में रहने के बाद अभिनंदन की घर वापसी पर हर कोई खुश है। शनिवार को युवक कांग्रेस के छात्रनेता अभिजीत पांडे, लकी वर्मा और आयुष अग्रवाल ने अभिनंदन को मानद उपाधि देने की मांग रखी। इस मुद्दे पर वे कुलपति डॉ. नरेंद्र धाकड़ से मिले। कुलपति ने तत्काल मानद उपाधि देने का प्रस्ताव तैयार करने के अधिकारियों को निर्देश दिए। कार्यपरिषद सदस्य अलोक डावर ने भी उपाधि को लेकर मौखिक सहमति दी है।

कुलपति का कहना है कि कार्यपरिषद में प्रस्ताव रखकर सदस्यों की मंजूरी लेंगे। फिर दीक्षांत समारोह में उपाधि से सम्मानित किया जाएगा। यह पूरे शहर के लिए गौरव की बात होगी। वैसेे भी सैनिकों के लिए देशवासियों के मन में भरपूर सम्मान है।

कोलकाता- नसबंदी के दौरान इस शहर के कुत्ते में मिले कैंसर के लक्षण

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कोलकाता में दमदम नगर पालिका के दक्षिण दमदम इलाके में चल रही कुत्तों की नसबंदी प्रक्रिया के दौरान एक कुत्ते में कैंसर के लक्षण की पहचान की गई। नगर पालिका सूत्रों की मानें तो इलाके में एक मादा कुत्ता कैंसर से संक्रमित है।

इससे लोगों में खासी चिंता है। पीड़ित कुत्तों के नख व दांतों की हरकतों से इसकी पहचान की जा सकती है। इलाके में जिस तरह से इस बीमारी ने दस्तक दी है, वो अपने आप में चिंता का विषय है।

गंभीर रूप से पीड़ित कुत्ते अगर आम लोगों को काटते हैं तो इसका बुरा प्रभाव पड़ने के साथ बीमारी के फैलने की भी आशंका अधिक होती है। जहां तक इलाके में संक्रमित कुत्तों की बात है तो यहां के कुत्तों की हरकतों में एकदम बदलाव देखा जा रहा है।

अगर कोई आक्रामक कुत्ता सामने आ जाए तो भागें नहीं और न ही उस पर चिल्लाएं। आप सीधे खड़े रहें, हाथों को मोड़कर सीने पर रख लें और कुत्ते की बजाय कहीं ओर देखें। आप बिलकुल नहीं घबराएं, कुत्ते को आपके चारों ओर सूंघने दें। ऐसा करने से कुत्ते की दिलचस्पी आपमें खत्म हो जाएगी और वह चला जाएगा।

आक्रामक कुत्ते पहचान यह है कि उसकी नाक सिकुड़ी हुई होती है, जिससे उसके दांत दिखने लगते हैं। गर्दन के पीछे के उसके लंबे बाल खड़े हो जाते हैं। लंबी रीढ़ की हड्डी दिखती है। उसके कान पीछे की ओर मुड़े होते हैं। वह गुर्राता है या गुर्रा सकता है।

छत्तीसगढ़ : ‘नमो अगेन” के नारे के साथ 90 विधानसभा में निकली बाइक रैली, रमन सिंह ने दिखाई हरी झंडी

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विजय संकल्प मोटर सायकल रैली निकालकर भाजपा ने लोकसभा चुनाव का शंखनाद किया। पूर्व मुख्यमंत्री व भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने भाजपा कार्यालय एकात्म परिसर में रैली को झंडी दिखाकर रवाना किया। नमो अगेन के नारे के साथ सभी 90 विधानसभा में एक साथ बाइक रैली निकाली गई।

रायपुर पश्चिम विधानसभा क्षेत्र में रैली डीडीनगर गोल चौक से प्रारंभ होकर भारत माता चौक गुढ़ियारी में सम्पन्न हुई। सैकड़ों कार्यकर्ताओं के साथ पूर्व मंत्री राजेश मूणत ने रैली की अगुवाई की। दक्षिण विधानसभा क्षेत्र में कार्यकर्ताओं के जोश और उत्साह के साथ बुढ़ापारा से बुढ़ीमाता चौक होते हुए सिविल लाइन तक रैली का आयोजन किया गया। रैली में प्रमुख रूप से दक्षिण विधानसभा क्षेत्र के विधायक बृजमोहन अग्रवाल, सुनील सोनी और बड़ी संख्या में कार्यकर्ता शामिल हुए। रायपुर ग्रामीण विधानसभा की पचपेड़ी नाका से देवपुरी तक एवं भनपुरी से बिरगांव तक रैली निकली। इसमें सधिादानंद उपासने, राजीव कुमार अग्रवाल शामिल हुए।

भाजपा कार्यालय एकात्म परिसर में उत्तर विधानसभा क्षेत्र की रैली को डॉ. रमन सिंह ने झंडी दिखाकर रवाना किया। रैली की अगुवाई सांसद रमेश बैस ने की। रैली में श्रीचंद सुन्दरानी, संजय श्रीवास्तव एवं छगनलाल मूंदड़ा उपस्थित थे। एकात्म परिसर से प्रारंभ होकर यह रैली जेल रोड चौक, फाफाडीह चौक, स्टेशन चौक, तेलघानी नाका, राठौर चौक, तात्यापारा चौक होते हुए फूलचौक, जयस्तंभ चौक, कचहरी चौक, बस स्टैंड, लोधीपारा चौक, अशोका टॉवर चौक से भगतसिंह चौक, गौरव पथ होते हुए मरीन ड्राईव में सम्पन्न् हुई। सांसद रमेश बैस ने कहा कि भाजपा कार्यकर्ता को इस बात का फर्क नहीं पड़ता कि वह सत्तापक्ष में है या विपक्ष में। जनता के लिए कार्य करना अंत्योदय के सिद्धांत पर चलना, जनहित के साथ देशहित को सर्वोपरि रखना ही भाजपा कार्यकर्ताओं की पहचान है। विजय संकल्प मोटर सायकल रैली में लोकेश कावड़िया, अशोक पांडेय, राजेश पांडेय, अकबर अली, उमेश घोड़मोड़े, फनीन्द्र तिवारी, आकाश तिवारी, रायपुर ग्रामीण से राहुल ठाकुर, भोला साहू सहित अन्य मौजूद थे।

विकास और सुरक्षा के लिए मोदी सरकार जरूरी

बृजमोहन अग्रवाल अपनी एक्टिवा लेकर निकले, उनके पीछे भाजपा अनुसूचित जन जाति मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष रामविचार नेताम बैठे थे। अग्रवाल ने कहा प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में भारत सफलता के शिखर की ओर बढ़ रहा है। राष्ट्र में सुशासन, विकास और सुरक्षा के लिए मोदी की सरकार जरूरी है। नेताम ने कहा कि देश के गांव, गरीब और किसानों की चिंता इमानदारी के साथ किसी ने की है तो वह मोदी हैं।

छत्तीसगढ़ : चिटफंड कंपनी के 50 हजार निवेशकों के करोड़ों रुपये फंसे

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पीएसीएल चिटफंड कंपनी के निवेशकों की राशि लौटाने के लिए जिला पंचायत सहित जनपद पंचायतों में ऑनलाइन दावा प्राप्त करने के लिए केंद्र स्थापित किए गए हैं। यहां निवेशकों के आवेदनों को बेवसाइट पर अपलोड करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। शनिवार को सॉफ्टवेयर का सर्वर दिन भर डाउन रहा। ऐसे में एक भी दावा-आपत्ति के प्रमाण पत्र स्कैन करने के बाद डाउनलोड नहीं किया जा सका।

जिले में 50 हजार से अधिक चिटफंड कंपनी के निवेशकों के करोड़ों रुपये फंसे हैं। इसे दिलाने के लिए अब शासन स्तर पर कवायद शुरू कर दी गई है। प्रक्रिया तो शुरू हो गई, लेकिन सॉफ्टवेयर में पेंच फंस गया। हालांकि निवेशक 30 अप्रैल से ऑनलाइन आवेदन कर सकेंगे। एक भी आवेदन ऑनलाइन नहीं होने की सूचना अधिकारियों को दे दी गई है, लेकिन सर्वर डाउन का तोड़ नहीं निकाला जा सका है।

दावा-प्रकरण जुटाने के लिए जिला और जनपद पंचायत स्तर पर अधिकारियों की नियुक्ति की गई है। अधिकारियों ने रास्ता निकाला है कि दिन में निवेशकों के दस्तावेजों की कोडिंग की जाएगी। निवेशकों से लिए दावे दस्तावेजों को रात में डाउनलोड किया जाएगा। वेबसाइट पर आवेदन लोड हो रहे हैं। ऐसे में दावे के आवेदन अपलोड नहीं हो पा रहे हैं। https//www.sedipaclrefund.com इस पर दस्तावेज डाउलोड किए जाएंगे।

‘दस्तावेज नहीं हो रहे डाउनलोड’

रायपुर जिले के ग्रामीण अंचल और शहर से पहुंचे निवेशक गिरीवर साहू सहित अन्य निवेशकों की पीड़ा थी कि सुबह 10 बजे से लेकर शाम पांच बजे तक वे केंद्र पर थे। कम्प्यूटर आपरेटर ने काफी प्रयास किया, लेकिन सर्वर डाउन रहा। इसके चलते दावा के सभी प्रमाण पत्र की कॉपी स्कैन के बाद वेबसाइट पर अपलोड नहीं हो पाए।

जनपद पंचायत स्तर भी हैं केंद्र

जिले के धरसींवा, अभनपुर, तिल्दा जनपद पंचायत स्तर पर भी केंद्र बनाए गए हैं। वहां भी ऑनलाइन में दावा प्रमाण पत्र डाउनलोड नहीं हो पाए हैं। इसके साथ ही इन केंद्रों में कम्प्यूटर तकनीकी अधिकारियों की भी नियुक्ति की गई है। लेकिन वे भी वेबसाइट के सॉफ्टवेयर में सुधार नहीं कर पाए हैं।

सुविधा के लिए अधिकारियों के मोबाइल नंबर भी जारी

जिला स्तर पर डिप्टी कलेक्टर डॉ. अनुप्रिया मिश्रा (मो. 9174791194) को नोडल अधिकारी, ई-जिला प्रबंधक लोक सेवा केंद्र कीर्ति शर्मा (मो. 7000669050) को तकनीकी अधिकारी नियुक्त किया गया है। इसी तरह जनपद स्तर पर नोडल अधिकारी मुख्य कार्यपालन अधिकारी धरसींवा (मो. 9754924488), प्रोग्रामर पावनी मिश्रा (मो. 9425558880), अधिकारी मुख्य कार्यपालन अधिकारी तिल्दा (मो. 9977582508), प्रोग्रामर स्वाति वर्मा (मो. 9754624198), नोडल अधिकारी मुख्य कार्यपालन अधिकारी अभनपुर (मो. 9926158481), प्रोग्रामर प्रभात कुमार सिंह (मो. 9584756101) और नोडल अधिकारी मुख्य कार्यपालन अधिकारी आरंग (मो. 9893920256), प्रोग्रामर धमेन्द्र नायक (मो. 9926558085) को नियुक्त किया गया है।

सभी देश में दावा के आवेदन लोड किए जा रहे हैं। इस वजह से वेबसाइट में दिक्कत है। इसके लिए मुख्य नोडल अधिकारियों को जानकारी दी गई है। निवेशकों के दस्तावेजों को रात में डाउनलोड कराएंगे। च्वाइस सेंटरों की भी मदद ली जाएगी। -डॉक्टर अनुप्रिया मिश्रा, नोडल अधिकारी, डिप्टी कलेक्टर

छत्तीसगढ़ : झाड़ी में जीवित मिला नवजात बालक, आंबेडकर में भर्ती

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धरसींवा थाना क्षेत्र के ग्राम सोंडरा में शुक्रवार को दोपहर झाड़ी में एक नवजात शिशु पड़ा मिला। लोगों की सूचना पर मौके पर पहुंची पुलिस ने पंचायत के सरपंच संतोष साहू की मदद से नवजात को धरसींवा अस्पताल में भर्ती कराया। बाद में उसे आंबेडकर अस्पताल रेफर कर दिया गया। पुलिस ने नवजात को फेंकने के मामले में अज्ञात व्यक्ति के खिलाफ अपराध कायम कर लिया है।

पुलिस के मुताबिक फोन से सूचना मिली थी कि ग्राम सोंडरा के बाहर नवजात शिशु (लड़का) झाड़ी में पड़ा है। गांव की श्रीमती नीलम गायकवाड, श्रीमती नगेशर निषाद एवं गेंदलाल साहू के सहयोग से उसे शासकीय अस्पताल धरसींवा में भर्ती कराया गया। बाद में डाक्टरों की सलाह पर नवजात को आंबेडकर अस्पताल रेफर कर दिया गया।

4 लाख रुपये में शुरू करें साबुन की फैक्‍ट्री, हर महीने 50 हजार तक हो सकती है कमाई

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साबुन की डिमांड बड़े शहरों से लेकर छोटे शहरों, कस्बों और गांवों में बनी हुई है. ऐसे में यह काम आपके लिए काफी फायदेमंद साबित हो सकता है. सिर्फ 4 लाख रुपये में साबुन बनाने की फैक्ट्री शुरू की जा सकती है. इसके अलावा आपको 80 फीसदी तक लोन भी मिल सकता है. मुद्रा योजना के तहत न केवल लोन मिलना आसान है, बल्कि बिजनेस का पूरा प्रोजेक्ट भी तैयार किया जा सकता है. कुल 7 महीने में आप इसकी औपचारिकताएं पूरी कर प्रोडक्शन शुरू कर सकते हैं.

80% तक मि‍ल सकता है लोन- इस तरह के बि‍जनेस को करने में आपको काफी आसानी होगी, क्‍योंकि पहली बात तो ये कि इसकी पूरी डि‍टेल रि‍पोर्ट आपको खुद सरकार मुहैया कराती है. इसमें बिजनेस से जुड़े हर पहलू को शामिल किया गया है. इसके अलावा आपको 80 फीसदी तक लोन भी मि‍ल सकता है. लोन के लि‍ए आपको प्रोजेक्‍ट रिपोर्ट तैयार करने की जरूरत भी नहीं है, क्‍योंकि वह तो सरकार ने पहले ही बना रखी है, आप उसी को यूज कर सकते हैं.

7 महीने में लग जाएगा सेटअप- कुल सात महीने में आप इसकी सारी औपचारि‍कताएं पूरी कर प्रोडक्‍शन शुरू कर सकते हैं. मुद्रा स्‍कीम की प्रोजेक्‍ट प्रोफाइल रिपोर्ट के मुताबिक आप एक साल में करीब 4 लाख कि‍लो का प्रोडक्‍शन कर सकेंगे, जि‍सकी कुल वैल्‍यू करीब 47 लाख होगी. खर्च और अन्‍य देनदारि‍यां देने के बाद आपको 6 लाख रुपए सालाना प्रॉफि‍ट होगा.

1 लाख रुपए में आ जाती हैं मशीनें और उपकरण- इस यूनि‍ट को लगाने के लि‍ए आपको कुल 750 स्‍क्‍वायर फुट के एरि‍या की जरूरत होगी. इसमें 500 स्‍क्‍वायर फीट कवर्ड और बाकी का अनकवर्ड होगा. इसमें मशीनों सहि‍त कुल 8 उपकरण लगेंगे. मशीनों और उन्‍हें लगाने की लागत महज 1 लाख रुपए होगी.

कुल खर्च में आपको कि‍तना देना होगा- इस पूरे सेटअप को लगाने में कुल 15,30,000 रुपए का खर्च आएगा. इसमें जगह, मशीनरी, तीन महीने की वर्किंग कैपिटल शामि‍ल है. इसमें से आपको केवल 3,82,000 रुपए खर्च करने होंगे, क्‍योंकि बाकी का लोन आप बैंकों से ले सकते हैं.

सरकार ऐसे करेगी मदद- बिजनेस शुरू करने के लिए आपको अपने पास से 4.23 लाख रुपये दिखाना जरूरी है. वर्किंग कैपिटल लोन: 9 लाख रुपये, टर्म लोन: 3.65 लाख रुपये, कुल खर्च: 16.88 लाख रुपये. इसके लिए प्रधानमंत्री मुद्रा योजना के तहत आप किसी भी बैंक में अप्लाई कर सकते हैं. इसके लिए आपको एक फॉर्म भरना होगा, जिसमें ये डिटेल देनी होगी… नाम, पता, बिजनेस शुरू करने का एड्रेस, एजुकेशन, मौजूदा इनकम और कि‍तना लोन चाहिए. इसमें किसी तरह की प्रोसेसिंग फीस या गारंटी फीस भी नहीं देनी होती.

यहां मिलेगी प्रोजेक्‍ट रि‍पोर्ट- अगर आप इस बि‍जनेस को शुरू करना चाहते हैं तो आपको इसके बारे में पूरी जानकारी http://www.mudra.org.in/ पर मि‍ल जाएगी.