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“Jio का बड़ा धमाका! सिर्फ 36 दिन वाला सस्ता रिचार्ज प्लान आया, रोज मिले”

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रिलायंस जियो ने अपने यूज़र्स को खुश करने के लिए एक नया और किफायती रिचार्ज प्लान पेश किया है. यह प्लान लिमिटेड टाइम फेस्टिव ऑफर के तहत लाया गया है और उन ग्राहकों के लिए खास है जो महीने और तीन महीने के रिचार्ज के बीच का बेहतर विकल्प ढूंढ रहे हैं.

450 रुपये की कीमत वाला यह प्लान 36 दिनों की वैलिडिटी के साथ डेटा, कॉलिंग और डिजिटल बेनिफिट्स का शानदार कॉम्बिनेशन देता है.

डेटा और कॉलिंग का पूरा फायदा

जियो के इस 450 रुपये वाले रिचार्ज प्लान में यूज़र्स को रोज़ाना 2GB हाई-स्पीड 4G डेटा मिलता है. पूरे 36 दिनों में कुल 72GB डेटा का फायदा उठाया जा सकता है. इसके अलावा जिन ग्राहकों के पास 5G सपोर्टेड डिवाइस है, वे जियो के ट्रू 5G प्रोग्राम के तहत अनलिमिटेड 5G डेटा का आनंद ले सकते हैं.

कॉलिंग की बात करें तो प्लान में किसी भी नेटवर्क पर अनलिमिटेड वॉयस कॉलिंग दी जा रही है. साथ ही हर दिन 100 फ्री SMS की सुविधा भी मिलती है जिससे यह प्लान डेली यूज़ के लिए काफी संतुलित बन जाता है.

AI क्लाउड स्टोरेज और प्रीमियम सब्सक्रिप्शन

इस रिचार्ज की एक खास बात इसका AI और क्लाउड से जुड़ा फायदा है. जियो इस प्लान के साथ JioAICloud का फ्री एक्सेस दे रहा है जिसमें 50GB तक का क्लाउड स्टोरेज शामिल है. इसका इस्तेमाल फोटो, वीडियो और जरूरी डॉक्यूमेंट्स को सुरक्षित रखने के लिए किया जा सकता है.

इतना ही नहीं, 18 साल या उससे ज्यादा उम्र के यूज़र्स को Google Gemini का 18 महीने का प्रो प्लान भी मुफ्त दिया जा रहा है जिसकी कीमत हजारों रुपये बताई जा रही है. हालांकि, इस AI बेनिफिट को जारी रखने के लिए यूज़र को 349 रुपये या उससे ऊपर के अनलिमिटेड 5G प्लान पर लगातार बने रहना होगा.

OTT और एंटरटेनमेंट का डोज

मनोरंजन के शौकीनों के लिए भी यह प्लान किसी तोहफे से कम नहीं है. इसमें JioTV का एक्सेस मिलता है जिससे लाइव टीवी और कई चैनल देखे जा सकते हैं. साथ ही 3 महीने का JioHotstar Mobile/TV सब्सक्रिप्शन भी शामिल है.

ध्यान देने वाली बात यह है कि दूसरे और तीसरे महीने का JioHotstar फायदा बनाए रखने के लिए यूज़र्स को अपने मौजूदा प्लान के खत्म होने के 48 घंटे के अंदर रिचार्ज करना होगा. इसके अलावा जियो नए JioHome ब्रॉडबैंड कनेक्शन पर दो महीने का फ्री ट्रायल भी दे रहा है.

Airtel का रिचार्ज प्लान

एयरटेल के पास अभी 180 या 200 दिनों की वैलिडिटी वाला प्लान नहीं है. कंपनी 3599 रुपये में एनुअल प्लान पेश करती है जिसमें 365 दिनों की वैलिडिटी के साथ अनलिमिटेड कॉल, रोजाना 100 SMS, रोजाना 2GB + अनलिमिटेड 5G डेटा दिया जा रहा है. इसके अलावा रिचार्ज प्लान में यूजर्स को फ्री स्पैम अलर्ट, परप्लेक्सिटी प्रो एआई का सब्सक्रिप्शन फ्री दिया जा रहा है.

भारत में लॉन्च से पहले स्टारलिंक को मिली बड़ी मंजूरी

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अमेरिकी अरबपति एलन मस्क की कंपनी स्टारलिंक भारत में अपनी सैटेलाइट इंटरनेट सर्विस लॉन्च करने की तैयारी कर रही है. अब इस कंपनी को बड़ी मंजूरी मिली है, जिसके बाद यह अपने नेटवर्क में मौजूद सैटेलाइट की संख्या बढ़ाकर डबल कर सकती है.

यूएस फेडरल कम्यूनिकेशन कमीशन (FCC) ने कंपनी की 7,500 सेकंड जनरेशन सैटेलाइट डिप्लॉय करने की मांग को मान लिया है. इसके साथ ही कंपनी के नेटवर्क में कुल सैटेलाइट की संख्या 15,000 हो जाएगी.

कंपनी को एक साथ कई फायदे

FCC ने कंपनी को न सिर्फ सैटेलाइट की संख्या बढ़ाने की हरी झंडी दी है बल्कि अब वह 5 फ्रीक्वैंसी और वेव्स पर भी ऑपरेट कर कर सकेगी, जिन पर पहले पाबंदी लगी हुई थी. FCC के प्रमुख ब्रेंडन कार ने कहा कि यह मंजूरी नेक्स्ट जनरेशन सर्विसेस के लिए गेम चेंजर साबित होगी. नए सैटेलाइट की वजह से कंपनी शानदार सैटेलाइट ब्रॉडबैंड कैपेबिलिटी डिलीवर कर पाएगी. बता दें कि मस्क की कंपनी को कुल 30,000 सैटेलाइट लॉन्च करने हैं, जिसमें से 15,000 के लिए उसे मंजूरी मिल चुकी है. FCC की शर्तों के मुताबिकक, कंपनी को सेकंड जनरेशन के सैटेलाइट्स में से आधे दिसंबर, 2028 तक ऑपरेशनल बनाने होंगे और बाकियों के लिए उसके पास दिसंबर, 2031 तक का समय है.

भारत के लिए इसमें क्या फायदा?

स्टारलिंक को भारत में सर्विस लॉन्च करने के लिए प्रोविजनल लाइसेंस मिल चुका है और ट्रायल चल रहे हैं. अब कंपनी को नए सैटेलाइट लॉन्च करने की मंजूरी मिली है, जिससे कनेक्टिविटी को बड़ा बूस्ट मिलेगा और इसका फायदा भारत समेत दुनियाभर के उन सभी देशों में मिलेगा, जहां पर स्टारलिंक की सर्विसेस मौजूद हैं. स्टारलिंक की सीनियर टीम भारत सरकार के साथ चर्चा कर रही है और माना जा रहा है कि अगले कुछ महीनों में भारत में स्टारलिंक की सैटेलाइट सर्विस लॉन्च हो जाएगी.

“‘गर्व है मैं हिंदू हूं, हमने किसी को गुलाम नहीं बनाया’, राष्ट्रीय युवा”

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उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बड़ा बयान दिया है. उन्होंने हिन्दू धर्म की महानता बताते हुए कहा कि हमने कभी किसी को ग़ुलाम नहीं बनाया और हमेशा मानवता के कल्याण का मार्ग अपनाया है.

हमने कभी किसी भीर अपनी बात को नहीं थोपा, जबकि हमारे पास बल था..बुद्धि थी लेकिन, हमने कभी इसका दुरुपयोग नहीं किया.

सीएम योगी आदित्यनाथ लखनऊ में स्वामी विवेकानंद जी की जयंती पर ‘राष्ट्रीय युवा दिवस’ पर आयोजित विशेष कार्यक्रम में शामिल हुए. इस दौरान उन्होंने कहा कि स्वामी विवेकानंद को याद करते हुए कहा कि उन्होंने भारत की सनातन संस्कृति, आध्यात्मिक चेतना को वैश्विक मंच पर अपनी बौद्धिक प्रतिभा से परिचित कराने में बड़ी भूमिका का निर्वाहन किया था.

सनातन ने दिखाया कल्याण का मार्ग

विवेकानंद ने कहा था कि सनातन धर्म ने सदैव मानवता के कल्याण का मार्ग दिखाया और गर्व से कहा कि मैं हिन्दू हूं. वो उस भारत का प्रतिनिधित्व करते थे, जो उस समय सुप्त चेतना के कारण आत्मबोध खो चुका था. मुट्ठी भर विदेशी आक्रांता आकर भारत को गुलाम बनाने में सफल हो चुके थे. भारत चंद लोगों द्वारा लूटा जा रहा था. उस कालखंड में उन्होंने भारत को जागरूक करने में भूमिका निभाई.

‘हमने किसी को ग़ुलाम नहीं बनाया’

शिकागो की धर्मसभा में स्वामी विवेकानंद ने कहा था मैं भारत की परंपरा से आया हूं जिसने सदैव मानव कल्याण का मार्ग दिखाया है. हमने किसी पर जबरन अपनी बात नही थोपी. भारत ने विपत्ति के समय दुनिया की शक्तियों को शरण दी. उन्होंने कहा था “मैं गर्व से कहता हूँ मैं हिंदू हूँ.” हमने किसी को गुलाम नहीं बनाया और मानवता के कल्याण का महान मार्ग अपनाया है. हमने अपनी बात किसी पर नहीं थोपा है. हमारे पास बल था बुद्धि थी पर हमने उसका दुरुपयोग नहीं किया है.

भारत पर टिकी दुनिया की नजर

आज दुनिया में जो उथल पुथल मची हुई है हर देश की आवाज आ रही है, मोदी जी कुछ करिये.. ये भारत के सामर्थ्य के प्रति दुनिया का विश्वास है, उस विश्वास का प्रतीक भारत का युवा है. अंतिम पायदान पर बैठे हुए व्यक्ति का विश्वास शासन के प्रति जब मजबूत होता है, तो योजनाएं तेजी के साथ आगे बढ़ती हुई दिखाई देती हैं.

हमारा लक्ष्य है कि हर पंचायत में एक मैदान हो. मोदी जी कहते हैं कि खेलोगे तो खिलोगे. जिससे हमारे युवा नशे से दूर होते हैं. नशे से युवा को दूर रखना है और नशे के कारोबारियों को क्रश करना है. इसमें आप भागीदारी करिए. नशा युवाओं को बर्बाद कर देता है.

India-Germany Relations: भारत ने जर्मनी से कर ली 8 अरब डॉलर की डील

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जर्मनी भारत के लिए प्रोजेक्ट 75 (I) के तहत 6 अत्याधुनिक स्टील्थ पारंपरिक पनडुब्बियों के निर्माण में सहयोग करेगा. इसके लिए मुंबई स्थित मझगांव डॉकयार्ड लिमिटेड (MDL) और जर्मनी की जानी-मानी रक्षा कंपनी थिसेन क्रुप मरीन सिस्टम्स (TKMS) के बीच पहले ही अहम समझौता हो चुका है.

करीब 8 बिलियन डॉलर (लगभग 72 हजार करोड़ रुपये) की इस मेगा डील को भारतीय नौसेना के इतिहास की सबसे बड़ी पनडुब्बी परियोजनाओं में से एक माना जा रहा है. इन पनडुब्बियों की सबसे बड़ी खासियत इनमें इस्तेमाल होने वाली एयर इंडिपेंडेंट प्रोपल्शन (AIP) तकनीक होगी, जिससे ये लंबे समय तक बिना सतह पर आए समुद्र के भीतर ऑपरेशन को अंजाम दे सकेंगी.

यही एडवांस AIP तकनीक इस परियोजना के लंबे समय तक अटके रहने की मुख्य वजह रही. भारतीय नौसेना ऐसी पनडुब्बियां चाहती थी, जो ज्यादा स्टील्थ हों, कम शोर करें और दुश्मन की नजर से लंबे समय तक बची रहें. अब तकनीकी अड़चनों के सुलझने के बाद संकेत मिल रहे हैं कि जल्द ही इस डील को लेकर आधिकारिक घोषणा की जा सकती है.

मेक इन इंडिया को मिलेगा बढ़ावा

इन 6 पनडुब्बियों का निर्माण भारत में ही मझगांव डॉकयार्ड में किया जाएगा, जिससे मेक इन इंडिया और आत्मनिर्भर भारत अभियान को बड़ा प्रोत्साहन मिलेगा. जर्मनी की तकनीकी विशेषज्ञता और भारत की निर्माण क्षमता का यह मेल भारतीय नौसेना को रणनीतिक बढ़त दिलाने में अहम भूमिका निभाएगा.

समुद्री सुरक्षा में भारत की मजबूती

विशेषज्ञों का मानना है कि इन स्टील्थ सबमरीन के शामिल होने से हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की समुद्री निगरानी, प्रतिरोधक क्षमता और रणनीतिक संतुलन और मजबूत होगा. बढ़ती वैश्विक चुनौतियों के बीच यह प्रोजेक्ट भारत के डिफेंस सिस्टम को पहले से ज्यादा मजबूत करने में मदद करेगा.

AIP तकनीक का मतलब क्या होता है?

AIP का पूरा नाम है एयर इंडिपेंडेंट प्रोपल्शन है. यह ऐसी आधुनिक तकनीक है, जो गैर-परमाणु पनडुब्बियों को बिना हवा लिए लंबे समय तक समुद्र के भीतर रहने की क्षमता देती है. डीजल-इलेक्ट्रिक पनडुब्बियों को कुछ समय बाद बैटरी चार्ज करने के लिए सतह पर आना पड़ता है या स्नॉर्कल का इस्तेमाल करना होता है. इसी दौरान उनके दुश्मन की नजर में आने का खतरा सबसे ज्यादा होता है. AIP तकनीक इस कमजोरी को काफी हद तक खत्म कर देती है.

AIP पनडुब्बियां इतनी खतरनाक क्यों मानी जाती हैं?

AIP सिस्टम से लैस पनडुब्बियां हफ्तों तक पानी के नीचे छिपी रह सकती हैं. इस दौरान वे दुश्मन की गतिविधियों पर नजर रख सकती हैं और सही मौके पर अचानक हमला कर सकती हैं. चूंकि ये पनडुब्बियां बहुत कम शोर पैदा करती हैं, इसलिए दुश्मन के सोनार और निगरानी सिस्टम के लिए इन्हें ट्रैक करना काफी कठिन हो जाता है. आधुनिक नौसैनिक युद्ध में यही चुपचाप हमला करने की क्षमता इन्हें बेहद घातक बनाती है.

AIP लैस पनडुब्बियां में लगने वाले हथियार

IQPC की रिपोर्ट के मुताबिक AIP तकनीक से लैस पनडुब्बियां केवल लंबे समय तक पानी के नीचे छिपी रहने के लिए ही नहीं जानी जातीं, बल्कि इनमें लगे पारंपरिक हथियार इन्हें बेहद खतरनाक बना देते हैं. AIP पनडुब्बियों का मुख्य हथियार टॉरपीडो होता है. आमतौर पर इनमें भारी वजन वाले 533 मिमी कैलिबर के टॉरपीडो लगाए जाते हैं. इनका इस्तेमाल दुश्मन की पनडुब्बियों और बड़े सतह के युद्धपोतों को निशाना बनाने के लिए किया जाता है.

आधुनिक टॉरपीडो अत्यधिक सटीक होते हैं और पानी के भीतर तेज़ी से लक्ष्य तक पहुंचकर भारी नुकसान पहुंचा सकते हैं. इसके अलावा इसमें एंटी-शिप मिसाइलें, जमीन पर हमला करने वाली क्रूज़ मिसाइलें, समुद्री माइन का इस्तेमाल किया जाता है.

क्या ईरान और अमेरिका के बीच तनाव से भारत की बढ़ सकती हैं मुश्किलें?

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अमेरिका और ईरान के बीच संघर्ष इस वक्त चरम पर है. बताया जा रहा है कि मध्य-पूर्व के इस देश में लोग अयातुल्ला अली खामेनेई के नेतृत्व वाली सरकार के खिलाफ सड़कों पर उतरे हुए हैं.

इतने बड़े पैमाने पर सरकार विरोधी प्रदर्शन बीते 47 साल के इतिहास में पहले भी नहीं देखा गया है. ईरान में 28 दिसंबर को अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रियाल की कीमत गिरने और बढ़ती महंगाई को लेकर लोग सड़कों पर हैं.

अब सवाल यह आता है कि क्या ईरान में फैली इस आग की लपटें भारत को भी अपनी चपेट में लेगी? क्या ईरान में इस अशांति का असर भारत पर भी पड़ेगा? यह सवाल इसलिए दिमाग में आ रहा है क्योंकि भारत रणनीतिक और व्यापारिक दृष्टिकोण से ईरान से जुड़ा हुआ है. आइए इसे थोड़ा और डिटेल में समझते हैं.

भारत के लिए क्या है चिंता की बात?

ईरान की बिगड़ती जा रही हालत और अमेरिका के साथ बढ़ता तनाव भारत के लिए इसलिए चिंताजनक है क्योंकि भारत सेंट्रल एशिया, रूस और यूरोप तक अपनी पहुंच बढ़ाने पर फोकस करते हुए कई सारे प्रोजेक्ट्स में भारी पैसा लगा रखा है. इनमें सबसे अहम ईरान के दक्षिण-पूर्वी तट पर स्थित चाबहार बंदरगाह है. यह एक ऐसी परियोजना है, जिस पर भारत लाखों डॉलर खर्च किए हैं. इसी बंदरगाह के जरिए भारत पाकिस्तान को बाईपास करते हुए अफगानिस्तान और मिडिल ईस्ट के देशों तक सीधे पहुंच पाता है.

क्यों अहम है चाबहार पोर्ट?

चाबहार पोर्ट इंटरनेशनल नॉर्थ-साउथ ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर का भी एक अहम हिस्सा है. सात हजार किलोमीटर से ज्यादा लंबा यह कॉरिडोर जहाज, रेल और सड़क मार्गों का एक नेटवर्क है, , जो भारत को ईरान के साथ-साथ अफगानिस्तान, अजरबैजान, अर्मीनिया, रूस, मिडिल ईस्ट और यूरोप से कनेक्ट करता है. इससे INSTC स्वेज नहर वाले रूट के मुकाबले छोटा है, जिससे माल की ढुलाई में समय और लागत दोनों कम आता है. इससे दुनिया के कई देशों से भारत का कारोबार बढ़ता है, जिससे भारत की इकोनॉमी मजबूत होती है.

भारत और ईरान के बीच कारोबार

कॉमर्स डिपार्टमेंट की डेटा के मुताबिक, भारत और ईरान के बीच बड़े पैमाने पर कारोबार होता है. कारोबारी साल 2024-25 में यह लगभग 1.68 बिलियन अमेरिकी डॉलर तक पहुंच गया. इसमें से भारत ने 1.24 बिलियन डॉलर के सामान का एक्सपोर्ट किया. जबकि इम्पोर्ट महज 0.44 बिलियन डॉलर का ही किया. ईरान में तनाव बढ़ने से चाबहार बंदरगाह के बीच व्यापारिक गतिविधियां कम हो जाएंगी, जिससे INSTC के जरिए होने वाले कारोबार पर भी असर पड़ने की संभावना है.

SBI ATM Charges: एसबीआई ने बढ़ाए ATM ट्रांजेक्शन चार्ज, जानें!

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देश के सबसे बड़े सरकारी बैंक स्टेट बैंक ऑफ इंडिया ने ATM ट्रांजेक्शन चार्जेज में बदलाव किया है. यह बदलाव 1 दिसंबर 2025 से ये बदलाव लागू हो गए हैं. इन बदलावों का सीधा असर सेविंग्स और सैलरी अकाउंट धारकों पर पड़ेगा जो दूसरे बैंकों के एटीएम का इस्तेमाल करते हैं.

हालांकि कुछ अकाउंट और ट्रांजेक्शन पर कोई बदलाव नहीं किया गया है. वहीं इन बदलावों को लेकर बैंक का कहना है कि इंटरचेंज फीस बढ़ने के बाद एटीएम सर्विस चार्ज की समीक्षा की गई, जिसके चलते यह फैसला लिया गया है. फरवरी 2025 के बाद यह पहली बार है जब SBI ने ATM चार्ज में बढ़ोतरी की है. ऐसे में चलिए अब आपको बताते हैं कि SBI के एटीएम ट्रांजेक्शन चार्ज में बदलाव के बाद अब आपको कितना एक्स्ट्रा चार्ज देना होगा.

नॉन SBI ATM पर ट्रांजेक्शन अब होंगे महंगे

SBI की नई व्यवस्था के तहत SBI ग्राहक अगर दूसरे बैंकों के एटीएम से तय फ्री लिमिट के बाद कैश निकालते हैं, तो अब उन्हें प्रति ट्रांजेक्शन 23 रुपये प्लस GST देना होगा. वहीं पहले यह फीस 21 रुपये प्लस GST था. इसके अलावा बैलेंस चेक या मिनी स्टेटमेंट जैसे नॉन फाइनेंशियल ट्रांजेक्शन पर अब 11 रुपये प्लस GST देना होगा, जो पहले 10 रुपये प्लस GST था. SBI ने यह भी साफ किया है कि रेगुलर सेविंग्स अकाउंट होल्डर्स के लिए नॉन SBI ATM पर मिलने वाली फ्री ट्रांजेक्शन लिमिट में कोई बदलाव नहीं किया गया है. ग्राहक पहले की तरह हर महीने दूसरे बैंकों के एटीएम से 5 फ्री ट्रांजेक्शन कर सकते हैं, जिसमें फाइनेंशियल और नॉन फाइनेंशियल दोनों शामिल हैं. वहीं इस लिमिट के बाद ही नए चार्ज लागू होंगे.

सैलरी अकाउंट धारकों के लिए भी बदले नियम

सैलरी पैकेज सेविंग्स अकाउंट रखने वाले ग्राहकों के लिए नियमों में बड़ा बदलाव किया गया है. पहले जहां दूसरे बैंकों के ATM पर अनलिमिटेड फ्री ट्रांजेक्शन की सुविधा मिलती थी, अब यह सीमा घटाकर 10 फ्री ट्रांजेक्शन प्रति माह कर दी गई है. वहीं फ्री लिमिट खत्म होने के बाद सैलरी अकाउंट धारकों को भी कैश विड्रॉल पर 23 रुपये प्लस GST और नॉन फाइनेंशियल ट्रांजेक्शन पर 11 रुपये प्लस GST देना होगा.

किन खातों पर नहीं पड़ेगा असर?

SBI के अनुसार कुछ कैटेगरी के ग्राहकों पर इस बढ़ोतरी का कोई असर नहीं होगा.

बेसिक सेविंग्स बैंक डिपॉजिट अकाउंट के चार्ज में कोई बदलाव नहीं किया गया है.

SBI डेबिट कार्ड से SBI के अपने ATM पर ट्रांजेक्शन पूरी तरह फ्री रहेंगे.

SBI ATM से कार्डलेस कैश विड्रॉल पहले की तरह अनलिमिटेड और फ्री रहेगा.

इसके अलावा किसान क्रेडिट कार्ड अकाउंट भी इस बदलाव से बाहर रखे गए हैं.

“‘भारत जैसा कोई नहीं, पीएम मोदी-ट्रंप की दोस्ती रियल’, सर्जियो गोर ने किया बड़ा ऐलान’

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भारत में अमेरिकी राजदूत का पद संभालने के बाद सर्जियो गोर ने भारत-अमेरिका रणनीतिक साझेदारी को लेकर बड़ा बयान दिया है. इसके अलावा उन्होंने कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की दोस्ती का भी जिक्र किया.

सर्जियो गोर ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की दोस्ती का जिक्र करते हुए कहा कि ट्रंप और मोदी की दोस्ती रियल है. गोर ने पीएम मोदी को ट्रंप का ‘Dear Friend’ बताया और कहा कि दोनों नेताओं के बीच आपसी विश्वास और सम्मान है.

सर्जियो गोर ने किया बड़ा ऐलान

उन्होंने कहा कि अमेरिका के नेतृत्व वाली नई वैश्विक पहल पैक्ससिलिका (Pax Silica) में भारत को पूर्ण सदस्य के रूप में शामिल होने के लिए अगले महीने आमंत्रित किया जाएगा. इस घोषणा को दोनों देशों के बीच तकनीक, सप्लाई चेन और रणनीतिक सहयोग के लिहाज से बेहद अहम माना जा रहा है.

सर्जियो गोर ने बताया कि पैक्ससिलिका अमेरिका द्वारा पिछले महीने शुरू की गई एक नई रणनीतिक पहल है. इसका उद्देश्य महत्वपूर्ण खनिजों, ऊर्जा इनपुट, एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग, सेमीकंडक्टर, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) डेवलपमेंट और लॉजिस्टिक्स से जुड़ी एक सुरक्षित, समृद्ध और इनोवेशन-आधारित सिलिकॉन सप्लाई चेन तैयार करना है. उन्होंने बताया कि इस पहल में पहले ही जापान, दक्षिण कोरिया, यूनाइटेड किंगडम और इजरायल शामिल हो चुके हैं और अब भारत को भी इस समूह का पूर्ण सदस्य बनाने की प्रक्रिया शुरू की जा रही है.

अमेरिका छूट गया पीछे! दुनियाभर में सबसे तेज AI अपनाने वाला देश बना भारत

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थॉटवर्क्स की रिपोर्ट के अनुसार, भारत अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस मॉडल अपनाने के मामले में पूरी दुनिया में सबसे आगे निकल चुका है. खास तौर पर बड़े लैंग्वेज मॉडल यानी LLM का इस्तेमाल भारत में सबसे तेज़ी से बढ़ा है.

ChatGPT, Gemini और Perplexity जैसे पॉपुलर AI ऐप्स के सबसे ज्यादा मंथली और डेली एक्टिव यूज़र्स अब भारत में हैं जिससे देश की मजबूत मौजूदगी साफ नजर आती है.

सस्ते डेटा और बड़ी आबादी बना रही है भारत को AI हब

BofA की रिपोर्ट के मुताबिक, भारत की यह तेज बढ़त किसी एक वजह से नहीं बल्कि कई बड़े फैक्टर्स के मेल से संभव हुई है. भारत के पास दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी ऑनलाइन आबादी है जहां 70 से 75 करोड़ लोग मोबाइल इंटरनेट का इस्तेमाल करते हैं. इसके साथ ही सस्ते डेटा प्लान्स ने AI टूल्स तक पहुंच को बेहद आसान बना दिया है. आज भारत में यूज़र्स सिर्फ करीब दो डॉलर खर्च करके महीने में 20 से 30GB तक डेटा इस्तेमाल कर पा रहे हैं जो कई देशों के मुकाबले बहुत सस्ता है.

युवा आबादी और टेक्नोलॉजी के लिए तैयार भारत

भारत की इंटरनेट यूज़र आबादी का बड़ा हिस्सा युवा है. रिपोर्ट के अनुसार, 60 प्रतिशत से ज्यादा इंटरनेट यूज़र्स की उम्र 35 साल से कम है. इनमें से काफी लोग अंग्रेज़ी समझते और बोलते हैं जिससे वे नए डिजिटल टूल्स और AI ऐप्स को तेजी से अपनाते हैं. यही वजह है कि भारत में AI सिर्फ एक्सपेरिमेंट तक सीमित नहीं है, बल्कि रोजमर्रा की ज़िंदगी और काम का हिस्सा बनता जा रहा है.

टेलीकॉम कंपनियों से मिल रहा AI को बढ़ावा

AI को लोकप्रिय बनाने में टेलीकॉम कंपनियों की भूमिका भी अहम बताई गई है. BofA की रिपोर्ट में कहा गया है कि Jio और Bharti Airtel जैसी कंपनियां अपने ग्राहकों को Gemini और Perplexity जैसे AI ऐप्स के पेड वर्ज़न का फ्री सब्सक्रिप्शन दे रही हैं. इससे यूज़र्स को बिना ज्यादा खर्च किए एडवांस AI टूल्स इस्तेमाल करने का मौका मिल रहा है जबकि AI कंपनियों और टेलीकॉम ऑपरेटर्स दोनों को अपने-अपने फायदे मिल रहे हैं.

पढ़ाई और कामकाज में AI से बढ़ रही क्षमता

भारत में यूज़र्स AI टूल्स का इस्तेमाल सिर्फ मनोरंजन के लिए नहीं, बल्कि पढ़ाई, स्किल डेवलपमेंट और प्रोडक्टिविटी बढ़ाने के लिए कर रहे हैं. अलग-अलग भारतीय भाषाओं में AI मॉडल उपलब्ध होने से भाषा की बाधा भी कम हो रही है. BofA इसे AI का डेमोक्रेटाइजेशन यानी हर वर्ग तक तकनीक की पहुंच बढ़ने की प्रक्रिया मानता है.

Agentic AI के लिए भारत बन सकता है टेस्टिंग ग्राउंड

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि आने वाले समय में भारत अगली पीढ़ी की AI टेक्नोलॉजी, यानी एजेंटिक AI के लिए एक बड़ा टेस्टिंग प्लेटफॉर्म बन सकता है. इस तरह के AI सिस्टम खुद से सोचने, योजना बनाने और काम को अंजाम देने में सक्षम होते हैं. भारत की विशाल और विविध यूज़र बेस के चलते इन तकनीकों को रियल वर्ल्ड कंडीशन्स में परखना आसान होगा, इससे पहले कि इन्हें वैश्विक स्तर पर लॉन्च किया जाए.

भारतीय कंपनियों के साथ बढ़ सकती है ग्लोबल साझेदारी

BofA का मानना है कि भविष्य में ग्लोबल AI कंपनियां भारतीय फर्म्स के साथ मिलकर सर्विस और फुलफिलमेंट मॉडल पर काम कर सकती हैं. यह मॉडल कुछ हद तक वैसा ही हो सकता है जैसा अमेरिका में AI एजेंट्स ट्रैवल प्लेटफॉर्म्स के साथ मिलकर काम कर रहे हैं. कुल मिलाकर, रिपोर्ट यह संकेत देती है कि AI की अगली बड़ी कहानी भारत से निकल सकती है.

The Raja Saab Worldwide BO: ‘द राजा साब’ ने दुनियाभर में किया बॉक्स ऑफिस कलेक्शन

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प्रभास की ‘द राजा साब’ थिएटर में लगी है. फिल्म को क्रिटिक्स की तरफ से अच्छे रिव्यू नहीं मिले हैं. इसी के साथ बॉक्स ऑफिस पर भी फिल्म खास अच्छा परफॉर्म नहीं कर रही है. 400 करोड़ के बजट में बनी इस फिल्म ने अभी तक 200 करोड़ का भी आंकड़ा पार नहीं किया है.

हालांकि, घटती कमाई के बीच फिल्म ने दो तेलुगू फिल्मों को पीछे छोड़ दिया है.

आइए जानते हैं फिल्म ने 3 दिनों में दुनियाभर में कितनी कमाई कर ली है.

द राजा साब का बॉक्स ऑफिस कलेक्शन

द राजा साब ने ओपनिंग डे पर दुनियाभर में 100 करोड़ की कमाई की. शनिवार को फिल्म की कमाई में 51 परसेंट की कमी देखने को मिली. रविवार को भी घरेलू बॉक्स ऑफिस पर फिल्म की कमाई में 20 परसेंट गिरावट आई है. रविवार तक फिल्म ने घरेलू बॉक्स ऑफिस पर नेट 109 करोड़ और 130 करोड़ का ग्रॉस कलेक्शन कर लिया है.

दुनियाभर में द राजा साब ने की इतनी कमाई

हिंदुस्तान टाइम्स की खबर के मुताबिक, फिल्म ने तीन दिन में 158 करोड़ का ग्रॉस कलेक्शन क्या है. इसी के साथ फिल्म ने अखांडा 2 और मिराई का रिकॉर्ड तोड़ दिया है. अखांडा 2 ने 128 करोड़ का लाइफटाइम कलेक्शन किया था. वहीं मिराई ने 150 करोड़ का कलेक्शन किया था. हालांकि, ट्रेड एनालिस्ट का मानना है कि फिल्म जिस हिसाब से कमाई कर रही है, ऐसे में 400 करोड़ का बजट निकाल पाना भी मुश्किल लग रहा है. हालांकि, 14 जनवरी को मकर संक्रांति की छुट्टी है, इस हॉलिडे का फायदा फिल्म को मिलने की उम्मीदें हैं.

फिल्म को Maruthi ने डायरेक्ट किया है. फिल्म में प्रभास लीड रोल में हैं. प्रभास के अलावा इस फिल्म में संजय दत्त, निधि अग्रवाल, मालविका मोहनन, रिद्धि कुमार, बोमन ईरानी, जरीना वहाब जैसे स्टार्स हैं. मालूम हो कि द राजा साब को लेकर प्रभास के फैंस में काफी क्रेज था. प्रभास की एंट्री पर फैंस ने थिएटर में आरती की और पटाखे जलाए थे.

अगर बैंक डूब जाए तो ग्राहकों को कितना मिलता है पैसा, क्या है RBI का नियम?

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आमतौर पर लोग अपने पैसों को और अपनी बचत को बैंक अकाउंट में ही जमा कराते हैं. इसके अलावा अपनी सेविंग्स को भी लोग बैंक एफडी और आरडी में भी निवेश करते हैं. लेकिन सोचिए कि आपको पता चले कि जिस बैंक में आपकी सालों की मेहनत की कमाई जमा है, वह बैंक दिवालिया हो गया है.

ऐसे में लोगों का सबसे पहला यही उठता है कि आपका पैसा सुरक्षित रहेगा या नहीं. इस डर को लेकर भारतीय रिजर्व बैंक और उसकी सब्सिडियरी संस्था डिपॉजिट इंश्योरेंस एंड क्रेडिट गारंटी कॉरपोरेशन की ओर से दी गई जरूरी जानकारी काम आती है. ऐसे में चलिए अब आपको बताते हैं कि अगर बैंक डूब जाए तो ग्राहकों को कितना पैसा मिलता है और RBI का नियम क्या है?

बैंक डूब जाने पर क्या है RBI का नियम?

RBI और DICGC के आंकड़ों के अनुसार मार्च 2025 तक देश के करीब 97.6 प्रतिशत बैंक खाते बीमा कवर के दायरे में आते हैं. यानी अगर कोई बैंक डूब भी जाता है, तो ज्यादातर खाताधारकों को उनकी जमा राशि वापस मिलने की गारंटी रहती है. RBI के नियमों के अनुसार DICGC हर जमाकर्ता को एक बैंक में अधिकतम 5 लाख रुपये तक का बीमा कवर देता है. इसमें सेविंग अकाउंट, फिक्स्ड डिपॉजिट, रिकरिंग डिपॉजिट और करंट अकाउंट शामिल होते हैं. इसके अलावा आपको बता दें कि बीमा कवर की यह सीमा प्रति जमाकर्ता और प्रति बैंक के आधार पर भी तय होती है. 5 लाख से ज्यादा राशि पर बैंक की दिवालियापन प्रक्रिया लागू होती है. इसमें बैंक की संपत्ति बेचकर अन्य जमाकर्ताओं को पैसा लौटाने की कोशिश की जाती है, लेकिन इसमें समय लग सकता है.

छोटे जमाकर्ता सुरक्षित, बड़े अमाउंट पर खतरा

RBI के नियमों के अनुसार भले ही खातों की संख्या के हिसाब से 97.6 प्रतिशत अकाउंट इंश्योर्ड है, लेकिन कुल जमा रकम में से केवल करीब 41.5 प्रतिशत पैसा ही बीमा कवर के तहत आता है. अगर इसे आसान शब्दों में समझे तो छोटे जमाकर्ताओं का पैसा काफी हद तक सुरक्षित है, लेकिन जिन खातों में बड़ी रकम जमा होती है, उनका एक बड़ा हिस्सा खतरे में रहता है.

बैंक डूबने पर पैसा कहां से मिलता है?

अगर कोई बैंक अपने जमाकर्ताओं का पैसा लौटाने की स्थिति में नहीं होता तो RBI उस पर मोरेटोरियम लगा सकता है या उसे किसी दूसरे बैंक में मर्ज कर सकता है. वहीं पूरी तरह रास्ता बंद होने पर बैंक को दिवालिया भी घोषित किया जाता है. ऐसी कंडीशन में DICGC अपने बीमा फंड से जमाकर्ताओं को अधिकतम 5 लाख रुपये तक की रकम लौटाता है. यह फंड बैंकों से लिए जाने वाले इंश्योरेंस प्रीमियम से तैयार किया जाता है.