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“द्विपक्षीय व्यापार समझौते पर होगी सार्थक चर्चा. पीयूष गोयल ..”

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यूएस ट्रेड प्रतिनिधि जेमिसन ग्रीर के सोमवार भारत आने पर केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि आपका और अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर एवं प्रतिनिधिमंडल का भारत के वाणिज्य विभाग में स्वागत है। आगामी चर्चा में द्विपक्षीय व्यापार समझौते पर सार्थक बातचीत होने की उम्मीद है।

यूएस ट्रेड प्रतिनिधि जेमिसन ग्रीर के सोमवार भारत आने पर केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि आपका और अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर एवं प्रतिनिधिमंडल का भारत के वाणिज्य विभाग में स्वागत है। आगामी चर्चा में द्विपक्षीय व्यापार समझौते पर सार्थक बातचीत होने की उम्मीद है।

केंद्रीय मंत्री गोयल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर अमेरिकी राजदूत गोर की पोस्ट को कोट करते हुए लिखा, “यूएस ट्रेड प्रतिनिधि जेमिसन ग्रीर और भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर एवं प्रतिनिधि मंडल का भारत के वाणिज्य विभाग में स्वागत है। भारत-अमेरिका के बीच आगामी चर्चा में द्विपक्षीय व्यापार समझौते पर सार्थक बातचीत होने की उम्मीद है।”

वहीं, गोर ने लिखा कि आज नई दिल्ली में केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल और यूएस ट्रेड प्रतिनिधि जेमिसन ग्रीर के साथ मिलकर अच्छा लगा। अमेरिका और भारत के बीच ट्रेड डील को अंतिम रूप देने पर बातचीत जारी है।

इससे पहले एक पोस्ट में ग्रीर का भारत में स्वागत करते हुए गोर ने लिखा था कि अपने महत्वाकांक्षी व्यापार एजेंडे को आगे बढ़ाते हुए आपका यहां स्वागत है। हम एक मजबूत द्विपक्षीय व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहे हैं, जिससे दोनों देशों के लिए नए आर्थिक अवसर खुलेंगे और अमेरिका-भारत आर्थिक साझेदारी और भी मजबूत होगी।

इससे पहले सोमवार को गोर ने कहा था कि अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि ग्रीर नई दिल्ली में केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल के साथ कई दौर की बैठकें करेंगे। इन बैठकों का उद्देश्य अगले महीने लागू होने वाली महत्वपूर्ण टैरिफ समयसीमा से पहले व्यापार समझौते को आगे बढ़ाना है।

ग्रीर की पीयूष गोयल के साथ बातचीत ऐसे समय में हो रही है जब दोनों देश प्रस्तावित द्विपक्षीय व्यापार समझौते के पहले चरण के ढांचे को अगले महीने की महत्वपूर्ण टैरिफ समयसीमा से पहले अंतिम रूप देने की कोशिश कर रहे हैं।

मंत्रिस्तरीय स्तर की यह बैठक भारत और अमेरिका के बीच चल रही अंतरिम व्यापार समझौते की बातचीत का हिस्सा है। माना जा रहा है कि यह अंतरिम समझौता भविष्य में व्यापक द्विपक्षीय व्यापार समझौते का रास्ता तैयार करेगा।

” बॉलीवुड अभिनेता टाइगर श्रॉफ ने बागेश्वर बाबा से मुलाकात” समाजसेवा और जनकल्याण से जुड़े मुद्दों पर बातचीत..”

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मुंबई के सनातन मठ में उस समय लोगों की नजरें टिक गईं जब बॉलीवुड अभिनेता टाइगर श्रॉफ ने बागेश्वर बाबा से मुलाकात की। बताया जा रहा है कि इस मुलाकात के दौरान समाजसेवा और जनकल्याण से जुड़े मुद्दों पर बातचीत हुई।

मुंबई के सनातन मठ में उस समय लोगों की नजरें टिक गईं जब बॉलीवुड अभिनेता टाइगर श्रॉफ ने बागेश्वर बाबा से मुलाकात की। बताया जा रहा है कि इस मुलाकात के दौरान समाजसेवा और जनकल्याण से जुड़े मुद्दों पर बातचीत हुई।

इस दौरान बागेश्वर बाबा द्वारा चलाए जा रहे विभिन्न जनसेवा कार्यों की जानकारी टाइगर श्रॉफ को दी गई। इनमें गरीब बेटियों के लिए प्रस्तावित कैंसर अस्पताल का निर्माण और बागेश्वर धाम में चल रही मां अन्नपूर्णा प्रसादम रसोई भंडारे जैसी सेवाओं के बारे में विस्तार से बताया गया। टाइगर श्रॉफ ने इन सभी कार्यों के बारे में ध्यान से सुना और खुले दिल से सराहना की।

मुलाकात के आखिर में अभिनेता ने बागेश्वर बाबा को अंगवस्त्र भेंट किया और उनका आशीर्वाद भी प्राप्त किया।

इसी दौरान एक और दिलचस्प पहलू भी सामने आया, जब अभिनेता के एक साथी ने बागेश्वर बाबा को बताया कि वह बालाजी पर एक फिल्म बनाने की योजना पर विचार कर रहे हैं। हालांकि इस को लेकर अभी कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है।

वहीं, अगर टाइगर श्रॉफ के फिल्मी करियर की बात करें तो उन्होंने अपने अभिनय की शुरुआत साल 2014 में फिल्म ‘हीरोपंती’ से की थी। इस फिल्म में उनके साथ कृति सेनन नजर आई थीं और यह फिल्म बॉक्स ऑफिस पर सफल रही थी। इसके बाद, उन्होंने ‘बागी’ (2016) में दमदार एक्शन के साथ दर्शकों का ध्यान खींचा, जिसमें श्रद्धा कपूर उनके साथ नजर आई थीं।

2018 में आई ‘बागी 2’ उनके करियर की बड़ी हिट फिल्मों में से एक साबित हुई। इसके बाद 2019 में रिलीज हुई ‘वॉर’ टाइगर श्रॉफ के करियर की सबसे बड़ी ब्लॉकबस्टर मानी जाती है, इसमें उनके साथ ऋतिक रोशन नजर आए थे। इसके अलावा, उन्होंने ‘मुन्ना माइकल’, ‘ए फ्लाइंग जट्ट’, ‘स्टूडेंट ऑफ द ईयर 2’, ‘गणपत’, और ‘बड़े मियां छोटे मियां’ जैसी फिल्मों में भी काम किया।

“आर्टिफिशियल इटेलिजेंस (एआई) वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम की ‘एनुअल न्यू चैंपियंस मीटिंग में बयान एक्सपर्ट्स ..”

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आर्टिफिशियल इटेलिजेंस (एआई) को उत्पादकता बढ़ाने के अलावा चिंतन, रचनात्मकता और अधिक गहन मानवीय अनुभवों के लिए स्थान बनाने में मदद करनी चाहिए। यह बयान एक्सपर्ट्स ने मंगलवार को यहां चल रही वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम की ‘एनुअल न्यू चैंपियंस मीटिंग’ या ‘समर दावोस’ में दिया।

आर्टिफिशियल इटेलिजेंस (एआई) को उत्पादकता बढ़ाने के अलावा चिंतन, रचनात्मकता और अधिक गहन मानवीय अनुभवों के लिए स्थान बनाने में मदद करनी चाहिए। यह बयान एक्सपर्ट्स ने मंगलवार को यहां चल रही वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम की ‘एनुअल न्यू चैंपियंस मीटिंग’ या ‘समर दावोस’ में दिया।

समाचार एजेंसी आईएएनएस से ​​बात करते हुए, कला, न्यूरोसाइंस और एआई के मेल को दिखाते हुए, रिसर्चर्स और क्यूरेटर्स ने बताया कि कैसे ब्रेन-सेंसिंग की नई तकनीकें इंसानों और मशीनों के बीच ज्यादा सहानुभूतिपूर्ण और व्यक्तिगत बातचीत को संभव बना रही हैं।

बेंगलुरु साइंस गैलरी की डायरेक्टर जाह्नवी फाल्के ने कहा कि आर्टिस्ट इमैनुएल गोलाब् ने साइंस गैलरी मेलबर्न के साथ मिलकर जो इंस्टॉलेशन तैयार किया है, वह दिखाता है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस इंसानी दिमाग से मिलने वाले सिग्नल्स को कैसे समझ सकता है।

फाल्के ने कहा, “हम साइंस गैलरी इंटरनेशनल नेटवर्क से हैं और यह साइंस गैलरी मेलबर्न में मेरे साथियों की बनाई एक प्रदर्शनी है।”

उन्होंने आगे कहा, “इस मूर्ति के पीछे का आइडिया यह है कि यह आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के सिद्धांतों पर काम करता है। विजिटर अपने माथे पर चश्मे जैसा एक डिवाइस पहनते हैं, जो दिमाग से निकलने वाली ईईजी एक्टिविटी और इलेक्ट्रिकल सिग्नल को डिटेक्ट करता है। इसके बाद रोबोट उस चीज पर प्रतिक्रिया देता है जो व्यक्ति के दिमाग के अंदर चल रही होती है।”

उन्होंने कहा कि यह प्रोजेक्ट दिखाता है कि कैसे एआई सिर्फ काम की तेजी और प्रोडक्टिविटी पर ध्यान देने के बजाय, अधिक सार्थक और इंसानों पर केंद्रित अनुभव बना सकता है।

जानकारों के मुताबिक, दिमाग की संवेदनाओं और न्यूरल एक्टिविटी को समझने से इंटेलिजेंट सिस्टम लोगों के साथ अधिक व्यक्तिगत और सहानुभूतिपूर्ण तरीके से प्रतिक्रिया कर सकते हैं। ऐसी तकनीकें दिखाती हैं कि कैसे एआई इंसानी भावनाओं और मशीनों के बीच की दूरी को कम कर सकता है।

साइंस गैलरी मेलबर्न से जुड़े रिसर्चर रयान जेफरीज ने “डूइंग नथिंग विद एआई” नाम के इंस्टॉलेशन को एक इंटरैक्टिव आर्टवर्क बताया, जो कला और विज्ञान को एक साथ लाता है।

जेफरीज ने कहा, “यह आर्टिस्ट इमैनुएल गोलाब् का ‘डूइंग नथिंग विद एआई’ नाम का एक इंटरैक्टिव आर्टवर्क है। इसमें एक ईईजी हेडसेट का इस्तेमाल होता है जो दिमाग के अंदर होने वाली इलेक्ट्रिकल एक्टिविटी को पकड़ता है और उसे एक बड़े रोबोटिक से जोड़ता है, जो उस एक्टिविटी के हिसाब से हिलता-डुलता है।”

उन्होंने बताया कि इस आर्टवर्क का मुख्य मकसद विजिटर्स को रुकने और अपने विचारों की गति धीमी करने के लिए प्रोत्साहित करना है, ताकि वे एक इंटेलिजेंट मशीन के साथ बातचीत करते हुए अपनी मानसिक स्थिति पर विचार कर सकें।

 ” अदाणी मुंद्रा एयरपोर्ट ने पहली नियमित उड़ान सेवा शुरू करने की घोषणा ” मुंबई और गोवा के लिए सीधी हवाई सेवा शुरू…”

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गुजरात के कच्छ क्षेत्र की आर्थिक संभावनाओं को नई ऊंचाई देने के उद्देश्य से अदाणी मुंद्रा एयरपोर्ट ने मंगलवार को अपनी पहली नियमित उड़ान सेवा शुरू करने की घोषणा की। इसके तहत मुंबई और गोवा के लिए सीधी हवाई सेवा शुरू की गई है।

गुजरात के कच्छ क्षेत्र की आर्थिक संभावनाओं को नई ऊंचाई देने के उद्देश्य से अदाणी मुंद्रा एयरपोर्ट ने मंगलवार को अपनी पहली नियमित उड़ान सेवा शुरू करने की घोषणा की। इसके तहत मुंबई और गोवा के लिए सीधी हवाई सेवा शुरू की गई है।

स्टार एयर के साथ रणनीतिक साझेदारी के तहत शुरू की गई यह हवाई कनेक्टिविटी कच्छ को एक पूर्ण रूप से एकीकृत मल्टी-मॉडल लॉजिस्टिक्स और बिजनेस हब में बदलने की दिशा में अहम कदम मानी जा रही है।

मंगलवार से शुरू हुई स्टार एयर की आठ नई उड़ान सेवाएं अत्याधुनिक टर्मिनल से संचालित होंगी, जिससे व्यापार, उद्योग, लॉजिस्टिक्स और पर्यटन के लिए यात्रा का समय काफी कम होगा और देश के सबसे बड़े बंदरगाह मुंद्रा की आर्थिक गतिविधियों को और गति मिलेगी।

स्टार एयर मुंद्रा को मुंबई और गोवा के अलावा हिंडन, सूरत, बेलगावी, बेंगलुरु, कोल्हापुर और नांदेड़ जैसे शहरों से भी जोड़ेगी।

इस प्रमुख एयरपोर्ट का उद्घाटन अदाणी एयरपोर्ट होल्डिंग्स लिमिटेड (एएएचएल) के निदेशक जीत अदाणी ने किया।

इस एयरपोर्ट के जरिए अदाणी ग्रुप अपने बंदरगाह और विमानन कारोबार के बीच मजबूत तालमेल स्थापित कर सकेगा। कंपनी का मानना है कि यह एयरपोर्ट कच्छ के व्यापार, उद्योग और पर्यटन क्षेत्र के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

कंपनी के अनुसार, मुंद्रा एयरपोर्ट को भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखकर विकसित किया गया है।

यहां 1,900 मीटर लंबा रनवे बनाया गया है, जो विभिन्न प्रकार के यात्री और कार्गो विमानों के संचालन में सक्षम है। इसके अलावा, आधुनिक टर्मिनल में विशाल पार्किंग क्षेत्र, कई चेक-इन काउंटर, आरामदायक लाउंज और फुल-सर्विस फूड कोर्ट जैसी सुविधाएं उपलब्ध हैं।

एयरपोर्ट को दिव्यांगजन अनुकूल भी बनाया गया है। यहां व्हीलचेयर सुविधा और यात्रियों के लिए विशेष ड्रॉप-ऑफ जोन की व्यवस्था की गई है।

यह हवाई संपर्क भारत के सबसे बड़े निजी बंदरगाह मुंद्रा पोर्ट और देश के सबसे बड़े अधिसूचित एवं संचालित बहु-उत्पाद मुंद्रा एसईजेड, जो भारत की आयात-निर्यात गतिविधि का मुख्य केंद्र है, की आर्थिक गतिविधियों को और मजबूत करेगा।

यह नई कनेक्टिविटी व्यापारिक माल की आवाजाही को अधिक तेज और प्रभावी बनाएगी तथा राष्ट्रीय और वैश्विक आपूर्ति शृंखलाओं के साथ बेहतर तालमेल स्थापित करने में मदद करेगी।

यह पहल अदाणी ग्रुप के उन अनुभवों का लाभ उठाएगी, जो वह देश के आठ प्रमुख अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डों – नवी मुंबई, मुंबई, अहमदाबाद, जयपुर, लखनऊ, तिरुवनंतपुरम, मंगलुरु और गुवाहाटी – के संचालन के जरिए हासिल कर चुका है।

” श्री माता वैष्णो देवी यात्रा ने इस साल एक अहम उपलब्धि” 22 जून तक कुल 50.70 लाख श्रद्धालुओं ने माता वैष्णो देवी के दरबार में हाजिरी” 

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श्री माता वैष्णो देवी यात्रा ने इस साल एक अहम उपलब्धि हासिल की है। 22 जून तक पवित्र गुफा मंदिर में दर्शन करने वाले श्रद्धालुओं की संख्या 50 लाख के आंकड़े को पार कर गई है। 22 जून तक कुल 50.70 लाख श्रद्धालुओं ने माता वैष्णो देवी के दरबार में हाजिरी लगाई है।

श्री माता वैष्णो देवी यात्रा ने इस साल एक अहम उपलब्धि हासिल की है। 22 जून तक पवित्र गुफा मंदिर में दर्शन करने वाले श्रद्धालुओं की संख्या 50 लाख के आंकड़े को पार कर गई है। 22 जून तक कुल 50.70 लाख श्रद्धालुओं ने माता वैष्णो देवी के दरबार में हाजिरी लगाई है।

यह उपलब्धि पिछले वर्ष की तुलना में और भी अधिक महत्वपूर्ण मानी जा रही है। वर्ष 2025 की इसी अवधि में लगभग 39.84 लाख श्रद्धालुओं ने दर्शन किए थे। इस प्रकार यात्रा में 10.86 लाख श्रद्धालुओं की उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। श्रद्धालुओं की संख्या में यह बढ़ोतरी देश और विदेश से आने वाले भक्तों की माता वैष्णो देवी के प्रति अटूट आस्था और श्रद्धा को दर्शाती है।

यात्रा में लगातार बढ़ रही श्रद्धालुओं की संख्या यह भी संकेत देती है कि श्रद्धालुओं का श्री माता वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड द्वारा की गई व्यवस्थाओं पर भरोसा मजबूत हुआ है। साथ ही, यात्रा प्रबंधन से जुड़े सभी हितधारकों के समन्वित प्रयासों का भी इसमें महत्वपूर्ण योगदान रहा है।

जम्मू-कश्मीर केंद्र शासित प्रदेश के उपराज्यपाल एवं श्राइन बोर्ड के अध्यक्ष मनोज सिन्हा के नेतृत्व में श्रद्धालुओं को सुरक्षित, सुगम और सुविधाजनक यात्रा उपलब्ध कराने के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए गए हैं। श्राइन बोर्ड ने आधारभूत ढांचे के विकास, आवास सुविधाओं के विस्तार, स्वच्छता व्यवस्था, भीड़ प्रबंधन प्रणाली, स्वास्थ्य सेवाओं, बैटरी कार संचालन, रोपवे सेवाओं, आपदा प्रबंधन तैयारियों तथा डिजिटल सुविधाओं में लगातार सुधार किया है। इन पहलों से श्रद्धालुओं की सुविधा और सेवा वितरण की गुणवत्ता में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।

इस साल अब तक 50 लाख श्रद्धालुओं का आंकड़ा पार होना भक्तों के बीच यात्रा के प्रति बढ़ते उत्साह का संकेत माना जा रहा है। साथ ही, यह उपलब्धि वर्ष के शेष महीनों में भी यात्रा की निरंतर प्रगति और अधिक संख्या में श्रद्धालुओं के आगमन की सकारात्मक संभावनाओं को दर्शाती है।

” (आरबीआई)” बैंकिंग सिस्टम में अस्थायी तरलता बढ़ाने के लिए 1.41 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा डाले।”

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भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने मंगलवार को सात दिन की वेरिएबल रेट रेपो (वीआरआर) नीलामी के जरिए बैंकिंग सिस्टम में अस्थायी तरलता बढ़ाने के लिए 1.41 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा डाले।

भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने मंगलवार को सात दिन की वेरिएबल रेट रेपो (वीआरआर) नीलामी के जरिए बैंकिंग सिस्टम में अस्थायी तरलता बढ़ाने के लिए 1.41 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा डाले।

आरबीआई की ओर से जारी आंकड़ों के मुताबिक, सिस्टम में फंड 5.26 प्रतिशत की कट-ऑफ दर और वेटेड एवरेज दर पर डाले गए।

यह कदम तब उठाया गया जब बैंकिंग सिस्टम में तरलता, 21 जून को 30,685.11 करोड़ रुपये के अधिशेष से घटकर 22 जून को 19,971.89 करोड़ रुपये के घाटे में बदल गई।

जानकारों का कहना है कि गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स (जीएसटी) भुगतान के कारण बैंकों से पैसे बाहर जाने से सिस्टम में तरलता कम हो गई।

तरलता में कमी की वजह से ओवरनाइट मनी मार्केट रेट्स पर दबाव बढ़ गया है। वेटेड एवरेज कॉल मनी रेट 5.43 प्रतिशत पर ट्रेड कर रहा है, जो आरबीआई के रेपो रेट से 0.18 प्रतिशत अधिक है।

अगर जीएसटी के भुगतान जैसे कारणों से बैंकिंग लिक्विडिटी बहुत ज्यादा कम हो जाती है, तो शॉर्ट-टर्म मनी मार्केट रेट्स (जैसे वेटेड एवरेज कॉल मनी रेट) आरबीआई के स्टैंडर्ड रेपो रेट से ऊपर जा सकते हैं।

तरलता डालकर आरबीआई यह पक्का करता है कि शॉर्ट-टर्म फंडिंग का दबाव कम हो और बिना किसी आर्थिक मंदी के फाइनेंशियल सिस्टम में क्रेडिट का फ्लो आसानी से चलता रहे।

आरबीआई टैक्स पेमेंट, एडवांस टैक्स पेमेंट या मौसम के हिसाब से क्रेडिट की मांग की वजह से होने वाली शॉर्ट-टर्म कमी को मैनेज करने के लिए बैंकिंग सिस्टम में समय-समय पर कुछ समय के लिए और लंबे समय के लिए लिक्विडिटी डालता रहता है। केंद्रीय बैंक यह काम अलग-अलग मॉनेटरी टूल्स और मार्केट ऑपरेशन्स के जरिए करता है।

आरबीआई बैंकिंग सिस्टम में काफी मात्रा में कुछ समय के लिए लिक्विडिटी डालने के लिए अकसर वीआआर नीलामी करता है, जिसमें 3-दिन या 7-दिन की अवधि शामिल होती है।

जब लिक्विडिटी कम हो जाती है, तो बैंक आरबीआई से सीधे फंड उधार लेने के लिए सही सरकारी सिक्योरिटीज गिरवी रखते हैं, जिससे उन्हें तुरंत राहत मिलती है।

सिस्टम में लंबे समय के लिए लिक्विडिटी डालने के लिए, आरबीआई सेकेंडरी मार्केट से सरकारी सिक्योरिटीज खरीदता है। इससे बैंकिंग सिस्टम में हमेशा के लिए कैश आ जाता है, जिससे बैंक आसानी से अपनी कैश रिजर्व रेश्यो (सीआरआर) की जरूरतों को पूरा कर पाते हैं।

हिमालय में सुरंग परियोजना की खबर से पाकिस्तान बेचैन, क्या भारत-पाक के बीच होगा नया ‘बंटवारा’?

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8.7 किलोमीटर लंबा चिनाब-ब्यास टनल लिंक प्रोजेक्ट, जो हिमालय के ऊंचे और खतरनाक इलाकों से होकर गुजरता है, इसका मकसद चिनाब नदी के अतिरिक्त पानी को सीधे हिमाचल प्रदेश के ब्यास बेसिन में मोड़ना है।

भारतीय इंजीनियरिंग का एक शानदार नमूना माने जाने वाले इस प्रोजेक्ट ने सीमा पार चिंता पैदा कर दी है। इससे यह चिंता बढ़ गई है कि यह प्रोजेक्ट 1960 की ऐतिहासिक सिंधु जल संधि (IWT) का उल्लंघन करता है। भारत ने IWT पर अपनी रणनीति में काफी बदलाव किया है।

विशेषज्ञों का मानना ​​है कि पानी के बंटवारे पर भविष्य की बातचीत को राष्ट्रीय सुरक्षा और संप्रभुता जैसे अहम मुद्दों से अलग नहीं किया जा सकता।

यह भारत के ‘ज़ीरो-टॉलरेंस’ (सख्त रुख) वाले रवैये का संकेत है, जिसका मतलब है कि आतंकवाद को बढ़ावा देने वाले किसी भी देश को गंभीर और ठोस नतीजों का सामना करना पड़ेगा। अब गेंद पाकिस्तान के पाले में है।

IWT: भारत के कदम से पाकिस्तान हिला

पाकिस्तान ने तुरंत प्रतिक्रिया दी, हालांकि कूटनीतिक सावधानी के साथ। उसने इस कदम को न केवल सिंधु जल संधि (IWT) का उल्लंघन बताया, बल्कि वियना कन्वेंशन ऑन द लॉ ऑफ़ ट्रीटीज़ और अंतरराष्ट्रीय जल कानून के व्यापक ढांचे का भी गंभीर उल्लंघन करार दिया। पाकिस्तान के विदेश कार्यालय के प्रवक्ता ताहिर अंद्राबी ने कहा, “भारत ने इन प्रोजेक्ट्स के बारे में आधिकारिक तौर पर कोई जानकारी नहीं दी है और न ही इस संबंध में कोई बातचीत की है।”

अप्रैल 2025 में पहलगाम में हुए दुखद आतंकवादी हमले के बाद भारत के IWT को निलंबित करने के ऐतिहासिक फैसले के बाद बेसिन के बीच बड़े पैमाने पर पानी के ट्रांसफर का मुद्दा सामने आया है। कौन सी नदियां किसे आवंटित की गई थीं?

IWT ने बेसिन को दो हिस्सों में बांटा था: तीन पश्चिमी नदियां (झेलम, चिनाब और सिंधु) पाकिस्तान को आवंटित की गई थीं, जबकि तीन पूर्वी नदियां (रावी, ब्यास और सतलुज) भारत को आवंटित की गई थीं।

आम धारणा यह है कि भारत ने पश्चिमी नदियों पर अपने अधिकार छोड़ दिए हैं, लेकिन यह पूरी तरह सच नहीं है। पश्चिमी नदियों पर भारत के अधिकारों का अभी तक पूरी तरह से इस्तेमाल नहीं किया गया है। इन अधिकारों में गैर-उपयोग, रन-ऑफ-रिवर हाइड्रोइलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट्स, सीमित सिंचाई और सीमित जल भंडारण शामिल हैं।

भारत अब सुधार करना चाहता है: विशेषज्ञ

“तकनीकी रूप से संधि में कुछ भी गलत नहीं था। दशकों तक, भारत ने संधि के तहत अपने अधिकारों की बहुत सीमित व्याख्या अपनाई – ऐसे अधिकार जिन्होंने वास्तव में भारत को पश्चिमी नदियों पर काफी अधिकार दिए थे।” भारत प्रस्तावित चिनाब-ब्यास लिंक प्रोजेक्ट के ज़रिए ठीक यही हासिल करना चाहता है।

इसका मकसद संधि के तहत मिले अधिकारों का ज़्यादा से ज़्यादा फ़ायदा उठाना है। इसके लिए, चिनाब सिस्टम के पानी का कुछ हिस्सा ब्यास बेसिन की तरफ़ मोड़ा जाएगा, जिससे भारत में पानी जमा करने, पनबिजली बनाने और पानी का बेहतर इस्तेमाल करने में मदद मिलेगी।

एक बेसिन से दूसरे बेसिन में पानी का ट्रांसफर

उत्तम कुमार सिन्हा ने बताया कि पश्चिमी नदियों के मामले में भारत पर लगाई गई पाबंदियों में से एक थी पानी के “इंटर-बेसिन ट्रांसफर” (एक बेसिन से दूसरे बेसिन में पानी ले जाना) पर रोक। चिनाब-ब्यास लिंक प्रोजेक्ट ठीक यही करता है।

सिन्हा ने कहा, “यह असल में पानी का इंटर-बेसिन ट्रांसफर ही है। लेकिन याद रखें, हालात बदल गए हैं; हम यह तब कर रहे हैं जब संधि को [जैसा सोचा गया था] वैसा लागू नहीं किया जा रहा है, है ना?” सिंधु जल संधि: दरारें पहले ही दिख रही थीं

यह पहली बार नहीं है जब भारतीय नीति-निर्माताओं के मन में सिंधु जल संधि (IWT) को रोकने का विचार आया है। हर आतंकी घटना या तनाव बढ़ने के साथ यह बहस फिर शुरू हो जाती है। 2016 के उरी हमले के बाद, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत का रुख़ साफ़ करते हुए कहा था, “खून और पानी एक साथ नहीं बह सकते।” फिर भी, ये दोनों ही चीज़ें दोनों देशों के रिश्तों को तय करती रही हैं।

पिछले दशक में सिंधु का पानी रोकने की मांगें तेज़ हुई हैं: एक्सपर्ट्स

पाकिस्तान में भारत के पूर्व हाई कमिश्नर अजय बिसारिया ने कहा कि पिछले दशक में संधि को रोकने की मांगें निश्चित रूप से तेज़ हुई हैं। बिसारिया ने कहा, “2016 के उरी हमले के बाद, नीतिगत रुख़ ‘आतंकवाद के साथ कोई बातचीत नहीं’ का हो गया। 2019 के पुलवामा हमले के बाद, एक और बात जोड़ी गई: ‘आतंकवाद के साथ कोई व्यापार नहीं’। आख़िरकार, 2025 में, जब दूसरे नीतिगत उपाय बेअसर साबित हुए, तो रुख़ बदलकर ‘आतंकवाद के लिए कोई पानी नहीं’ हो गया।”

IWT: भारत ने पाकिस्तान को संदेश भेजा

भारत के नज़रिए से, इस स्थिति के लिए सिर्फ़ पाकिस्तान ज़िम्मेदार है। जब दूसरे नीतिगत विकल्प खत्म हो रहे हों, तो IWT को कुछ समय के लिए रोकने का फ़ैसला दबाव बनाने की एक चाल की तरह काम करता है। यह यह पक्का करने का एक तरीका है कि पाकिस्तान को आतंकवाद की कीमत चुकानी पड़े। भारत पाकिस्तान को यह दिखा रहा है कि ‘ऑपरेशन सिंदूर’ जैसे जवाबी कदम ही एकमात्र खतरा नहीं हैं; बल्कि पाकिस्तान के लिए IWT को हमेशा के लिए खोने का भी खतरा है।

अगर आतंकवाद रुकता है तो संधि फिर से शुरू हो सकती है: एक्सपर्ट
बिसारिया ने कहा, “अगर आतंकवाद खत्म हो जाता है, तो संधि को फिर से शुरू किया जा सकता है। यही यहां का राजनीतिक संदेश है।” भारत की सीमाओं के बाहर भी चिंताएं और धमकियां साफ तौर पर जाहिर की गई हैं।

अगस्त 2025 में अमेरिका में पाकिस्तानी समुदाय को संबोधित करते हुए, पाकिस्तान के सेना प्रमुख, फील्ड मार्शल आसिम मुनीर ने कहा, “सिंधु नदी भारतीयों की पारिवारिक संपत्ति नहीं है, और हमारे पास मिसाइलों की कोई कमी नहीं है।” सिंधु नदी के दोनों ओर तनाव और अनिश्चितता का माहौल है।

आज़ादी के तुरंत बाद जल्दबाजी में बंटवारा

आज़ादी के बमुश्किल एक साल बाद ही, भारत और पाकिस्तान एक नए विवाद में उलझ गए। यह टकराव इलाके के नुकसान से कहीं ज़्यादा बुनियादी मुद्दे पर केंद्रित था—यह पानी का मामला था। अपनी मुख्य कॉलोनी से अंग्रेजों के जाने के बाद, सिंधु नदी प्रणाली का बंटवारा उसी जल्दबाजी और दूरदर्शिता की कमी के साथ किया गया, जैसे जल्दबाजी में रेडक्लिफ लाइन खींची गई थी; न तो सामान्य समझ और न ही भौगोलिक वास्तविकताओं का ध्यान रखा गया।

हालांकि ज़्यादातर नहरें पाकिस्तान के हिस्से में आईं, लेकिन दो प्रमुख नहरों—अपर बारी दोआब नहर और दीपालपुर नहर—के हेडवर्क्स (पानी के बहाव को नियंत्रित करने वाले मुख्य ढांचे) भारत के इलाके में ही रह गए।

1948 की कड़वी कहानी: पाकिस्तान को सबक याद है

अप्रैल 1948 में तनाव तब चरम पर पहुंच गया जब पूर्वी पंजाब सरकार ने पश्चिमी पंजाब में बहने वाली इन दो नहरों में पानी की आपूर्ति अस्थायी रूप से रोक दी। हालांकि कई दौर की बातचीत के बाद आपूर्ति बहाल कर दी गई, लेकिन नुकसान पहले ही हो चुका था।

इस घटना ने इस्लामाबाद में गहरी चिंता पैदा कर दी और निचले तटवर्ती राज्य (lower riparian state) के तौर पर उसकी चिंताओं और कमजोरियों को बढ़ा दिया।

” विकसित भारत 2047 के संकल्प को साकार करने के लिए राष्ट्र निर्माण में पूरी निष्ठा और समर्पण के साथ योगदान देने का आह्वान” पीएम मोदी”

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) 2024 बैच के 183 अधिकारी प्रशिक्षुओं से संवाद करते हुए उन्हें विकसित भारत 2047 के संकल्प को साकार करने के लिए राष्ट्र निर्माण में पूरी निष्ठा और समर्पण के साथ योगदान देने का आह्वान किया।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) 2024 बैच के 183 अधिकारी प्रशिक्षुओं से संवाद करते हुए उन्हें विकसित भारत 2047 के संकल्प को साकार करने के लिए राष्ट्र निर्माण में पूरी निष्ठा और समर्पण के साथ योगदान देने का आह्वान किया।

सेवा तीर्थ में आयोजित कार्यक्रम में प्रधानमंत्री ने कहा कि दो वर्षों के फील्ड अनुभव और प्रशासनिक प्रशिक्षण के बाद युवा अधिकारी ऐसे महत्वपूर्ण चरण में पहुंचे हैं, जहां उनके फैसले न केवल उनके करियर बल्कि करोड़ों नागरिकों के भविष्य को भी प्रभावित करेंगे।

उन्होंने कहा कि लोकसेवा की वास्तविक परीक्षा ईमानदारी, संवेदनशीलता और प्रतिबद्धता के साथ वास्तविक परिस्थितियों का सामना करने में है। प्रधानमंत्री ने अधिकारियों से नवाचार, उद्देश्यपूर्ण कार्यशैली और नागरिक-केंद्रित शासन के माध्यम से राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाने की अपील की।

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि प्रशासनिक फाइलों को केवल कागजी प्रक्रिया न समझें, बल्कि यह याद रखें कि हर फाइल के पीछे लाखों लोगों की आकांक्षाएं, समस्याएं और जीवन जुड़े होते हैं। उन्होंने “नागरिक देवो भव” का मंत्र देते हुए अधिकारियों से हर निर्णय के केंद्र में नागरिकों को रखने और शासन को संवेदनशील, जवाबदेह तथा समावेशी बनाने का आग्रह किया।

उन्होंने कहा कि बड़े विकासात्मक लक्ष्यों को विभागीय सीमाओं में रहकर हासिल नहीं किया जा सकता। इसके लिए विभिन्न मंत्रालयों और विभागों के बीच बेहतर समन्वय आवश्यक है, जिससे स्थायी और प्रभावी परिणाम सुनिश्चित किए जा सकें।

प्रधानमंत्री ने विकसित भारत 2047 के विजन का उल्लेख करते हुए कहा कि आने वाले वर्षों में प्रत्येक नीति और प्रशासनिक निर्णय देश को विकसित राष्ट्र बनाने की दिशा में योगदान देने वाला होना चाहिए। उन्होंने आत्मनिर्भर भारत, मेक इन इंडिया, विनिर्माण क्षेत्र के विस्तार, ऊर्जा सुरक्षा और युवाओं के लिए रोजगार एवं अवसर सृजन को वर्तमान समय की प्रमुख प्राथमिकताएं बताया।

उन्होंने कहा कि पिछले एक दशक में शासन व्यवस्था प्रक्रिया-आधारित मॉडल से परिणाम-आधारित मॉडल की ओर बढ़ी है। डिजिटल गवर्नेंस, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) और तकनीक की मदद से सेवा वितरण अधिक पारदर्शी और सुगम हुआ है।

डेटा आधारित प्रशासन पर जोर देते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि आंकड़ों को केवल संख्या के रूप में नहीं देखना चाहिए, बल्कि उन्हें करोड़ों लोगों के जीवन, चुनौतियों और आकांक्षाओं का प्रतिबिंब मानना चाहिए। उन्होंने अधिकारियों से नियमित रूप से यह मूल्यांकन करने को कहा कि सरकारी नीतियां जमीनी स्तर पर अपेक्षित परिणाम दे रही हैं या नहीं।

प्रधानमंत्री ने कहा कि अधिकारियों को अपने पद या अधिकार से नहीं, बल्कि अपने कार्यों के ठोस और मापनीय परिणामों से संतुष्टि प्राप्त करनी चाहिए।

उन्होंने राष्ट्र निर्माण में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी का भी उल्लेख किया और बताया कि वर्तमान बैच में 40 प्रतिशत से अधिक अधिकारी महिलाएं हैं।

इस अवसर पर केंद्रीय राज्य मंत्री (कार्मिक) डॉ. जितेंद्र सिंह, प्रधानमंत्री के प्रधान सचिव पी.के. मिश्रा, प्रधान सचिव-2 शक्तिकांत दास, कैबिनेट सचिव टी.वी. सोमनाथन, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (डीओपीटी) की सचिव रचना शाह, एलबीएसएनएए के निदेशक श्रीराम तरणिकांति सहित कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

 

“8वें वेतन आयोग के तहत महंगाई भत्ते और राहत की गणना में सुधार की आवश्यकता पर चर्चा”

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8वें वेतन आयोग के तहत महंगाई भत्ते और राहत की गणना में सुधार की आवश्यकता पर चर्चा हो रही है। अखिल भारतीय रक्षा कर्मचारी संघ (AIDEF) ने महंगाई के सूचकांक की विधि पर पुनर्विचार करने की मांग की है। संघ का कहना है कि वर्तमान प्रणाली सरकारी कर्मचारियों और पेंशनरों के वास्तविक खर्चों को सही तरीके से नहीं दर्शाती। इसके अलावा, पेंशनरों की स्वास्थ्य देखभाल से संबंधित खर्चों में वृद्धि और खाद्य कीमतों में बदलाव पर भी चिंता जताई गई है। AIDEF ने कर्मचारियों के लिए एक विशेष जीवन यापन सूचकांक बनाने का सुझाव दिया है।

महंगाई भत्ते की गणना पर नई बहस

8वें वेतन आयोग का अपडेट: महंगाई भत्ते (DA) और महंगाई राहत (DR) की गणना के तरीके पर बहस ने एक नया मोड़ लिया है। अखिल भारतीय रक्षा कर्मचारी संघ (AIDEF) ने 8वें वेतन आयोग से आग्रह किया है कि वह महंगाई के सूचकांक की गणना के तरीके पर पुनर्विचार करे। संघ का कहना है कि वर्तमान विधि सरकारी कर्मचारियों और पेंशनरों के सामने आने वाले वित्तीय दबावों को सही तरीके से नहीं दर्शाती। AIDEF के अनुसार, उपभोग के पैटर्न में बदलाव और आवश्यक वस्तुओं की बढ़ती कीमतों ने आधिकारिक महंगाई माप और परिवारों द्वारा उठाए गए वास्तविक खर्चों के बीच एक अंतर पैदा कर दिया है। वर्तमान में, DA और DR में संशोधन औसत 12 महीने के अखिल भारतीय उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (AICPI-IW) पर आधारित हैं। यह सूचकांक केंद्रीय सरकारी कर्मचारियों और पेंशनरों को महंगाई के लिए मुआवजा देने और उनकी क्रय शक्ति को बनाए रखने के लिए बनाया गया है।

हालांकि, AIDEF का कहना है कि वर्तमान ढांचे में सीमाएँ हैं। संघ का मानना है कि सूचकांक में विभिन्न व्यय श्रेणियों को दिए गए वजन से कई परिवारों द्वारा अनुभव की गई महंगाई का सही चित्रण नहीं होता, खासकर निम्न आय वाले परिवारों के लिए।

संशोधित CPI बास्केट पर सवाल

संघ ने यह भी बताया कि सूचकांक में खाद्य और पेय पदार्थों का हिस्सा समय के साथ घटा है। 2012 में खाद्य और पेय पदार्थों का CPI बास्केट में हिस्सा 45.86 प्रतिशत था, जबकि संशोधित 2022-23 बास्केट में यह घटकर 36.75 प्रतिशत हो गया है।

साथ ही, स्वास्थ्य देखभाल, आवास, परिवहन, संचार और डिजिटल सेवाओं जैसी श्रेणियों पर अधिक जोर दिया गया है। AIDEF का कहना है कि ये समायोजन DA और DR के लिए महंगाई मापने के दौरान खाद्य कीमतों में तेज वृद्धि के प्रभाव को कम कर सकते हैं।

पेंशनरों की चुनौतियाँ

AIDEF ने पेंशनरों के सामने आने वाली कठिनाइयों पर भी ध्यान आकर्षित किया है, जो अक्सर अपनी आय का एक बड़ा हिस्सा चिकित्सा और देखभाल की जरूरतों पर खर्च करते हैं। संघ ने बताया कि स्वास्थ्य बीमा, दवाइयाँ, उपचार और देखभाल सेवाओं से संबंधित खर्च सामान्य महंगाई की प्रवृत्तियों की तुलना में तेजी से बढ़ सकते हैं। ऐसे मामलों में, मौजूदा सूचकांक के आधार पर समय-समय पर DR संशोधन क्रय शक्ति में कमी के खिलाफ पर्याप्त सुरक्षा प्रदान नहीं कर सकते।

संघ का सुझाव: कर्मचारी-विशिष्ट जीवन यापन सूचकांक

इन चिंताओं को दूर करने के लिए, AIDEF ने कर्मचारियों और पेंशनरों के लिए एक विशेष जीवन यापन सूचकांक बनाने की सिफारिश की है। यह प्रस्तावित उपाय वास्तविक व्यय पैटर्न को बेहतर तरीके से दर्शाने और बदलते उपभोग के रुझानों को ध्यान में रखने का प्रयास करेगा। संघ ने भविष्य में फिटमेंट फैक्टर निर्धारित करते समय वृद्ध देखभाल खर्चों और अन्य आवश्यक लागतों को अधिक मान्यता देने की भी मांग की है।

छात्रों के लिए क्रेडिट कार्ड की बढ़ती लोकप्रियता एक नई वित्तीय प्रवृत्ति…

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छात्रों के लिए क्रेडिट कार्ड की बढ़ती लोकप्रियता एक नई वित्तीय प्रवृत्ति को दर्शाती है। बैंक और फिनटेक कंपनियां युवा पीढ़ी को आकर्षित करने के लिए विशेष ऑफर और सरल पात्रता मानदंड पेश कर रही हैं। हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि छात्रों को समझदारी से खर्च करने की आवश्यकता है ताकि वे कर्ज के जाल में न फंसें। इस लेख में हम छात्रों के लिए क्रेडिट कार्ड के फायदे और जोखिमों पर चर्चा करेंगे, जिससे युवा सही वित्तीय निर्णय ले सकें।

छात्रों के लिए क्रेडिट कार्ड की बढ़ती लोकप्रियता

क्रेडिट कार्ड अब केवल वेतनभोगियों या उद्यमियों के लिए एक लोकप्रिय वित्तीय उपकरण नहीं रह गए हैं; बल्कि, छात्रों के लिए भी ये तेजी से लोकप्रिय हो रहे हैं। बैंक और फिनटेक कंपनियां छात्रों के लिए विशेष क्रेडिट कार्ड पेश कर रही हैं, जो कम क्रेडिट लिमिट के साथ-साथ रिवॉर्ड और कैशबैक ऑफर प्रदान करते हैं। ये कंपनियां युवा पीढ़ी को आकर्षित करने के लिए सरल पात्रता मानदंड भी पेश कर रही हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि जबकि ये कार्ड युवा लोगों को बिलों का भुगतान करने का एक साधन प्रदान करते हैं, उन्हें सलाह दी जाती है कि वे क्रेडिट कार्ड का उपयोग समझदारी से करें ताकि वे कर्ज के जाल में न फंसें।

बैंक छात्रों के क्रेडिट कार्ड सेगमेंट को अपने ग्राहकों को जल्दी जोड़ने के लिए देख रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि ऋणदाता युवा पीढ़ी को कम लिमिट, एफडी-समर्थित और प्रारंभिक स्तर के क्रेडिट उत्पादों के माध्यम से लक्षित कर रहे हैं। वास्तव में, विश्लेषकों का मानना है कि ICICI बैंक, IDFC फर्स्ट बैंक और अन्य कुछ ऋणदाता पात्रता मानदंड को सरल बना रहे हैं, जैसे कि आय आवश्यकताओं को कम करना और डिजिटलाइजेशन को बढ़ावा देना। कुछ मामलों में, वे क्रेडिट इतिहास की आवश्यकता या जॉइनिंग फीस को समाप्त कर रहे हैं और युवा ग्राहकों को आकर्षित करने के लिए महत्वपूर्ण कैशबैक योजनाएं पेश कर रहे हैं।

हालांकि, छात्रों के लिए क्रेडिट कार्ड सेगमेंट का विस्तार बैंकों के लिए रणनीतिक और दीर्घकालिक विकास का परिणाम हो सकता है, लेकिन कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि यह छात्रों के लिए अत्यधिक खर्च करने और सीमित

ज्ञान के कारण कर्ज के जाल में फंसने का बड़ा जोखिम पैदा कर सकता है। इसलिए, यह महत्वपूर्ण है कि जागरूकता बढ़े ताकि युवा लोग समझदारी से निर्णय ले सकें और क्रेडिट कार्ड का उपयोग वित्तीय उपकरण के रूप में करें। उन्हें यह भी पता होना चाहिए कि विभिन्न बैंकों और फिनटेक कंपनियों द्वारा पेश किए जा रहे लाभ और हानियों के बारे में जागरूक रहना आवश्यक है। वित्तीय समावेशन और जागरूकता महत्वपूर्ण है, लेकिन यह युवा ग्राहकों के लिए दीर्घकालिक चिंताओं की कीमत पर नहीं आनी चाहिए।