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”धुरवा समाज द्वारा किए गए आत्मीय स्वागत से अभिभूत मुख्यमंत्री श्री साय”

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मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने आज बस्तर जिला मुख्यालय जगदलपुर के वन विद्यालय परिसर में धुरवा समाज के नवनिर्मित भवन का लोकार्पण कर समाज को समर्पित किया। इस दौरान धुरवा समाज द्वारा किए गए आत्मीय स्वागत से अभिभूत मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि धुरवा समाज ने छतड़ी, तुवाल, कोटी और तीरधनुष भेंट कर जो स्नेह सम्मान दिया, वह हमारी गहरी सांस्कृतिक जड़ों का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि समृद्ध जनजातीय संस्कृति और परंपरा ही छत्तीसगढ़ की असली पहचान है।

“भारतीयों के लिए खुशखबरी! ट्रंप ने  H-1B वीजा पर किया नया ऐलान, कहा- 83 लाख रुपए का शुल्क सिर्फ…”

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अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि एच-1बी वीजा के लिए एक लाख अमेरिकी डॉलर का नया शुल्क नये आवेदकों के लिए है और उन्हें इस शुल्क का एकमुश्त भुगतान करना होगा।

यह स्पष्टीकरण अमेरिका में काम कर रहे हज़ारों पेशेवरों के लिए बड़ी राहत की बात है जो इस नए नियम से प्रभावित होने को लेकर चिंतित हैं, इनमें बड़ी संख्या में भारतीय हैं । अमेरिकी नागरिकता एवं आव्रजन सेवा (यूएससीआईएस) ने शनिवार को एक बयान में कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप का नया एच-1बी वीज़ा शुल्क केवल नए आवेदकों पर लागू होगा।

ट्रंप प्रशासन ने यह भी स्पष्ट किया है कि 21 सितंबर की प्रभावी घोषणातिथि से पहले जमा किया गया एच1 बी वीजा आवेदन इससे प्रभावित नहीं होगा। इसके अलावा वर्तमान में अमेरिका से बाहर रहने वाले वीज़ा धारकों को भी देश में दोबारा प्रवेश के लिए शुल्क का भुगतान करने की आवश्यकता नहीं है। व्हाइट हाउस की प्रवक्ता टेलर रोजर्स ने ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया, ”राष्ट्रपति ट्रंप ने अमेरिकी कामगारों को प्राथमिकता देने का वादा किया था और यह समझदारी भरा कदम उसी का परिणाम है। उन्होंने कहा, ”यह उन अमेरिकी व्यवसायों को भी निश्चितता प्रदान करता है जो वास्तव में हमारे महान देश में बेहद कुशल कामगारों को लाना चाहते हैं, लेकिन प्रणाली की गड़बड़ी के कारण उन्हें आगे नहीं आने दिया जा रहा है।”

व्हाइट हाउस के एक अधिकारी ने बताया कि एक लाख अमेरिकी डॉलर का शुल्क एकमुश्त है जो केवल नये आवेदन पर लागू होता है। ”यह केवल नए वीज़ा पर लागू होता है, नवीनीकरण या मौजूदा वीज़ा धारकों पर नहीं…।” यूएससीआईएस निदेशक जोसेफ एडलो ने एक ज्ञापन में कहा कि ट्रंप की ओर से शुक्रवार को जारी की गई घोषणा केवल उन पर लागू होगी जो अब आवेदन करेंगे। यह घोषणा उन लोगों पर लागू नहीं होती है जो “उद्घोषणा की प्रभावी तिथि से पहले दायर किये गये आवेदनों के लाभार्थी हैं, वर्तमान में स्वीकृत आवेदनों के लाभार्थी हैं, या जिनके पास वैध रूप से जारी एच-1बी गैर-आप्रवासी वीज़ा हैं।”

“हरिद्वार में पितृ विसर्जन अमावस्या पर उमड़ा आस्था का सैलाब, हजारों श्रद्धालुओं ने किया पितरों का तर्पण और पिंडदान”

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पितृ विसर्जन अमावस्या के अवसर पर रविवार को हरकी पैड़ी सहित गंगा तटों पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। सुबह से ही हजारों की संख्या में लोगों ने गंगा स्नान कर अपने पितरों के प्रति श्रद्धा व्यक्त की और तर्पण अर्पित किया।

मान्यता है कि पितृ विसर्जन अमावस्या वर्ष की सबसे बड़ी अमावस्या होती है। इसी दिन श्राद्ध पक्ष की पूर्णाहुति होती है और पितरों को विदाई देकर पितृलोक के लिए प्रेषित किया जाता है। हरिद्वार के सतीघाट, राजघाट, शीतला माता घाट, दक्षेश्वर महादेव मंदिर घाट, कुशा घाट, गणेश घाट और विशेष महत्व रखने वाली नारायणी शिला पर श्रद्धालुओं की लंबी कतारें लगी रहीं। श्रद्धालुओं ने विधि-विधान से अपने पितरों का श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान कर मोक्ष की कामना की।

गंगा तट पर दिनभर मंत्रोच्चार, भजन और श्रद्धालुओं की आस्था का अछ्वुत संगम दिखाई दिया। धार्मिक आस्था के इस पर्व को लेकर हरिद्वार में विशेष तैयारियां की गई थीं। पुलिस और प्रशासन की ओर से घाटों पर सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे, ताकि श्रद्धालुओं को किसी भी तरह की असुविधा न हो। धार्मिक मान्यता है कि नारायणी शिला पर पितृ कार्य करने से पूर्वजों को मोक्ष की प्राप्ति होती है। इसी कारण पितृ विसर्जन अमावस्या पर यहां सबसे अधिक भीड़ देखने को मिली।

“जयराम रमेश ने कहा- निकोबार परियोजना पर बुनियादी सवालों के जवाब देने में असमर्थ हैं पर्यावरण मंत्री”

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कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने ग्रेट निकोबार बुनियादी ढांचा परियोजना का विरोध करने के लिए कांग्रेस की आलोचना करने पर पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव पर पलटवार करते हुए रविवार को कहा कि आसन्न ”पारिस्थितिक और मानवीय आपदा” की ओर राष्ट्र का ध्यान आकर्षित करना ”नकारात्मक राजनीति” नहीं है, बल्कि गंभीर चिंता की अभिव्यक्ति है।

रमेश ने कहा कि मंत्री उन बुनियादी सवालों का जवाब देने में असमर्थ हैं, जिन्हें कांग्रेस इस परियोजना के संबंध में बार-बार उठा रही है। रमेश ने ‘एक्स’ पर कहा ” केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने कांग्रेस पर ग्रेट निकोबार मेगा इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजना पर ‘नकारात्मक राजनीति’ करने का आरोप लगाया है। आसन्न पारिस्थितिक और मानवीय आपदा की ओर राष्ट्र का ध्यान आकर्षित करना ‘नकारात्मक राजनीति’ नहीं है। यह गंभीर चिंता की अभिव्यक्ति है।” उन्होंने कहा कि मंत्री उन बुनियादी सवालों का जवाब देने में असमर्थ हैं, जो कांग्रेस बार-बार इस परियोजना के संबंध में उठा रही है।

उन्होंने पूछा कि क्या ग्रेट निकोबार मेगा इंफ्रा परियोजना, जिसके लिए लाखों पेड़ों को हटाने की आवश्यकता है, राष्ट्रीय वन नीति 1988 का उल्लंघन करती है जबकि इस नीति में कहा गया है कि ‘उष्णकटिबंधीय वर्षा/नम वनों, विशेष रूप से अंडमान और निकोबार द्वीप समूह के क्षेत्रों को पूरी तरह से संरक्षित किया जाना चाहिए?” कांग्रेस नेता ने कहा, ”पुराने वनों के लिए प्रतिपूरक वनरोपण हमेशा एक खराब विकल्प होता है वहीं इस परियोजना में वनरोपण की जो योजना है वह हास्यास्पद है। सुदूर हरियाणा में, जहां पारिस्थितिकी तंत्र पूरी तरह से अलग है, वनरोपण को ग्रेट निकोबार के विशिष्ट पुराने वर्षावनों के नुकसान की वास्तविक भरपाई कैसे माना जा सकता है? हरियाणा सरकार ने इस भूमि को वनरोपण के लिए आरक्षित करने के बजाय, खनन के लिए पहले ही 25 प्रतिशत भूमि क्यों मुक्त कर दी है?” उन्होंने पूछा कि निकोबार परियोजना को मंज़ूरी देने से पहले राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग से परामर्श क्यों नहीं किया गया? जयराम रमेश ने कहा, ” इस परियोजना के बारे में ग्रेट निकोबार की जनजातीय परिषद की चिंताओं को क्यों नज़रअंदाज़ किया जा रहा है?

द्वीप समूह की शोम्पेन नीति, जो स्पष्ट रूप से सभी परियोजनाओं में समुदाय की अखंडता को प्राथमिकता देने का आह्वान करती है, की अवहेलना क्यों की जा रही है?” उन्होंने बताया कि इस द्वीप पर लैदरबैक कछुए, मेगापॉड, खारे पानी के मगरमच्छ और समृद्ध प्रवाल तंत्र सहित लुप्तप्राय प्रजातियां मौजूद हैं। कांग्रेस नेता ने प्रश्न किया क्या यह परियोजना इन प्रजातियों को विलुप्ति के कगार पर नहीं ले जाएगी? दरअसल यादव ने पिछले बृहस्पतिवार को ग्रेट निकोबार इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजना का विरोध करने के लिए कांग्रेस पर निशाना साधा था और उस पर भ्रम फैलाने और “नकारात्मक राजनीति” में लिप्त होने का आरोप लगाया था। यहां ‘पब्लिक अफेयर्स फोरम ऑफ इंडिया’ द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम में यादव ने जोर देकर कहा था कि यह विशाल परियोजना राष्ट्रीय सुरक्षा और हिंद महासागर क्षेत्र में रणनीतिक संपर्क के लिए महत्वपूर्ण है। यादव ने यह भी कहा था कि इस परियोजना के लिए ग्रेट निकोबार के केवल 1.78 प्रतिशत वन क्षेत्र का उपयोग किया जाएगा।

“बांग्लादेश में दुर्गा पूजा से पहले हिंदू मंदिरों पर बर्बर हमला! लूट के बाद तोड़ी 7 मूर्तियां, जमालपुर में धार्मिक तनाव बढ़ा”

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बांग्लादेश में दुर्गा पूजा से पहले अल्पसंख्यक हिंदू समुदाय के खिलाफ हमले बढ़ते जा रहे हैं। जमालपुर जिले के सरिशाबारी उपजिला के तऱ्यापारा मंदिर में शनिवार रात एक शख्स ने लूट के बाद सात मूर्तियों को तोड़फोड़ दिया।

यह घटना दुर्गा पूजा से ठीक पहले दूसरी बार सामने आई है।पुलिस ने आरोपी हबीबुर रहमान (35) को गिरफ्तार किया है। सरिशाबारी पुलिस थाना के अधिकारी राशेदुल हसन ने बताया कि पुलिस को सूचना मिलने पर तुरंत घटनास्थल पर भेजा गया।

मंदिर समिति के अध्यक्ष गोएश चंद्र बरमन ने कहा कि रविवार सुबह महालया के दिन मूर्तियों को टूटे हुए देखकर पुलिस को सूचना दी गई और CCTV फुटेज से आरोपी की पहचान की गई।मंदिर और पुलिस के अनुसार, मूर्तियाँ शनिवार रात कलाकारों द्वारा तैयार की गई थीं और उसी रात आरोपी ने मंदिर में घुसकर मूर्तियों के सिर और अन्य हिस्से तोड़ दिए।यह घटना चिंता का विषय है क्योंकि अगस्त 2024 में मुहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार के सत्ता में आने के बाद से हिंदू मंदिरों और अल्पसंख्यकों पर हमलों में वृद्धि देखी गई है।

इस सप्ताह की शुरुआत में कुस्टिया जिले के मिर्पुर उपजिला के श्वरुपदाह पलपारा श्री श्री राधा काली मंदिर में भी मूर्तियों को तोड़ा गया और सुरक्षा कैमरा व मेमोरी कार्ड चोरी हो गए थे। मंदिर समिति के पूर्व सचिव बदाल कुमार डे ने कहा, “पिछले तीन साल से हम दुर्गा पूजा की तैयारी कर रहे हैं। यह घटना हमें डर में डाल गई है।”इससे पहले, बांग्लादेश की अवामी लीग ने अंतरिम सरकार के गृह सलाहकार जहंगीर आलम चौधरी की हिंदू धर्म के खिलाफ विवादित टिप्पणी की निंदा की थी। शेख हसीना की सरकार के सत्ता से हटाए जाने के बाद बांग्लादेश में हिंसा और कानून व्यवस्था की स्थिति बिगड़ गई है।

“नरेंद्र मोदी के बाद इस शख्स को देश का अगला PM बनाना चाहती हैं जनता, सर्वे में आया चौंकाने वाला नाम”

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नरेंद्र मोदी के बाद इस शख्स को देश का अगला PM बनाना चाहती हैं जनता, सर्वे में आया चौंकाने वाला नाम…

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी न सिर्फ भारत बल्कि दुनिया के लोकप्रिय नेताओं में शामिल हैं। लगातार तीसरी बार पीएम बनने वाले मोदी की छवि बेबाक, निडर है। लेकिन सवाल यह उठता है कि..

मोदी के बाद देश का अगला प्रधानमंत्री कौन होगा?

भाजपा में ऐसा कौन है, जो पीएम मोदी की जगह ले सकता है? साल 2029 के लोकसभा चुनाव के बाद प्रधानमंत्री की कुर्सी पर कौन विराजमान होगा? हाल ही में UPUK द्वारा किए गए सर्वे ने जनता से सीधे यह सवाल पूछा और इसके नतीजे चौंकाने वाले सामने आए।

इस सवाल के जवाब के लिए UPUK ने जनता से सर्वे किया और तीन विकल्प दिए:

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ गृहमंत्री अमित शाह केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी पहले नंबर पर आए सीएम योगी सर्वे में सबसे ज्यादा लोग सीएम योगी आदित्यनाथ को मोदी के बाद पीएम के लिए उपयुक्त मानते हैं। 84 प्रतिशत लोगों ने उन्हें सबसे बेस्ट विकल्प बताया। सख्त प्रशासनिक शैली और हिंदुत्व के प्रतीक के रूप में प्रसिद्ध योगी को जनता मोदी का उत्तराधिकारी मान रही है।

अमित शाह को मिला दूसरा स्थान गृहमंत्री अमित शाह को 12 प्रतिशत लोगों ने मोदी के बाद पीएम के लिए सबसे बेस्ट माना। प्रधानमंत्री मोदी के दाहिने हाथ माने जाने वाले शाह की पार्टी पर मजबूत पकड़ और कार्यशैली जनता को भरोसा दिलाती है।

नितिन गडकरी तीसरे स्थान पर केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी को केवल 4 प्रतिशत लोगों ने मोदी के बाद पीएम पद के लिए उपयुक्त माना। उनकी स्वच्छ छवि और प्रभावशाली कार्यप्रणाली उन्हें अलग पहचान देती है, लेकिन इस सूची में वे शीर्ष दो नामों से पीछे हैं।

जनता का भरोसा अभी भी मोदी पर दिलचस्प बात यह है कि सर्वे में 52 प्रतिशत लोगों को लगता है कि पीएम मोदी को ही फिर से पीएम बनना चाहिए।

“Earthquake: इस देश में महसूस किए गए भूकंप के तेज झटके,  7.7 की तीव्रता से डरे लोग”

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इस देश में महसूस किए गए भूकंप के तेज झटके,  7.7 की तीव्रता से डरे लोग

भारत के पड़ोसी देश बांग्लादेश में शुक्रवार को भूकंप के तेज झटके महसूस किए गए। म्यांमार में आए 7.7 तीव्रता के भूकंप के कारण बांग्लादेश की राजधानी ढाका और चटगांव समेत कई हिस्सों में धरती हिल गई।

हालांकि, अभी तक किसी तरह के जान-माल के नुकसान की खबर नहीं है।

कहां था भूकंप का केंद्र? बांग्लादेश मौसम विभाग के मुताबिक, भूकंप दोपहर 12:25 बजे आया। इसका केंद्र म्यांमार के मांडले में बांग्लादेश की सीमा के पास था। अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (USGS) के अनुसार, भूकंप का केंद्र म्यांमार के सागाइंग से 16 किलोमीटर उत्तर-उत्तर-पश्चिम में, 10 किलोमीटर की गहराई पर स्थित था।

मौसम विभाग के अधिकारी मोहम्मद रुबायत कबीर ने बताया कि 7.7 की तीव्रता वाले इस भूकंप को एक बड़ी भूकंपीय घटना माना गया है। ढाका से भूकंप के केंद्र की दूरी लगभग 597 किलोमीटर बताई गई है।

भारत में भी महसूस हुए झटके? भारत का पूर्वोत्तर क्षेत्र, खासकर मेघालय और आसपास के इलाके, भूकंप के लिहाज से बेहद संवेदनशील माने जाते हैं। यहां छोटे-मोटे झटके आना सामान्य है। हालांकि, इस भूकंप के बाद अधिकारियों ने बताया है कि स्थिति नियंत्रण में है और आगे के झटकों पर लगातार नजर रखी जा रही है। अधिकारियों ने नागरिकों को सुरक्षित रहने के लिए भी अलर्ट जारी किया है।

“30 सितंबर तक SIR लागू करने के लिए तैयार रहें राज्य अधिकारी, निर्वाचन आयोग का सख्त निर्देश”

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निर्वाचन आयोग ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के निर्वाचन अधिकारियों को 30 सितंबर तक विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के लिए तैयार रहने को कहा है। आयोग का यह निर्देश इस बात का संकेत है कि अक्टूबर-नवंबर की शुरुआत में मतदाता सूची को दुरुस्त करने का काम शुरू हो सकता है।

अधिकारियों के अनुसार, इस महीने की शुरुआत में राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारियों के एक सम्मेलन में आयोग के शीर्ष अधिकारियों ने उन्हें अगले 10 से 15 दिनों में विशेष गहन पुनरीक्षण के लिए तैयार रहने को कहा था। हालांकि अधिक स्पष्टता के लिए 30 सितंबर की समय सीमा तय की गई थी। राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारियों को निर्देश दिया गया कि वे पिछली एसआईआर के बाद प्रकाशित अपने राज्यों की मतदाता सूची तैयार रखें। कई राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारियों ने अपनी पिछली एसआईआर के बाद प्रकाशित मतदाता सूचियां पहले ही अपनी वेबसाइटों पर डाल दी हैं।

दिल्ली के मुख्य निर्वाचन अधिकारी की वेबसाइट पर 2008 की मतदाता सूची उपलब्ध है, जब राष्ट्रीय राजधानी में अंतिम गहन पुनरीक्षण हुआ था। उत्तराखंड में अंतिम एसआईआर 2006 में हुआ था और उस वर्ष की मतदाता सूची अब राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी की वेबसाइट पर उपलब्ध है। राज्यों में अंतिम एसआईआर ही ‘कट-ऑफ’ तिथि होगी, ठीक उसी तरह जैसे बिहार की 2003 की मतदाता सूची का उपयोग आयोग गहन पुनरीक्षण के लिए कर रहा है। अधिकांश राज्यों में अंतिम एसआईआर 2002 से 2004 के बीच हुआ था और उन्होंने वर्तमान मतदाताओं का मिलान पिछले गहन पुनरीक्षण के अनुसार लगभग पूरा कर लिया है।

आयोग ने कहा कि बिहार के बाद पूरे देश में एसआईआर लागू किया जाएगा। असम, केरल, पुडुचेरी, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव 2026 में होने हैं। इस गहन पुनरीक्षण का मुख्य उद्देश्य विदेशी अवैध प्रवासियों के जन्म स्थान की जांच कर उन्हें बाहर निकालना है। विभिन्न राज्यों में बांग्लादेश और म्यांमा सहित अवैध विदेशी प्रवासियों पर कार्रवाई के मद्देनजर यह कदम महत्वपूर्ण है।

“Gold Rate: नवरात्रि से पहले सोने की कीमतों में आई थोड़ी गिरावट, चांदी की कीमतें बढ़ीं”

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भारतीय शेयर बाजार में तेज़ी देखने को मिली है, वहीं सोने की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई है। सेंसेक्स ने एक सप्ताह में 721.53 अंक की बढ़त हासिल की, लेकिन नवरात्रि से पहले 24 कैरेट सोने के दाम 230 रुपये प्रति 10 ग्राम कम हो गए।

 इसके विपरीत, चांदी की कीमतों में मजबूती देखी गई है। जानिए सोने-चांदी के भाव में इस सप्ताह क्यों रहा उतार-चढ़ाव।

सोने की कीमतों में सुधार भारतीय शेयर बाजार में पिछले सप्ताह तेजी देखने को मिली, जबकि सोने की कीमतों में दबाव रहा। प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स 721.53 अंक यानी 0.88% बढ़कर बंद हुआ। वहीं, नवरात्रि से पहले 24 कैरेट सोने के दाम प्रति 10 ग्राम 230 रुपये घट गए। इसके विपरीत, 1 किलोग्राम चांदी के दाम बढ़े हैं। बुलियन मार्केट में 15 सितंबर को 24 कैरेट गोल्ड की कीमत 1,10,650 रुपये थी, जो 18 सितंबर तक गिरकर 1,09,530 रुपये पर आ गई। हालांकि, सप्ताह के अंत तक सोने की कीमतों में सुधार हुआ और 20 सितंबर को यह 1,10,420 रुपये प्रति 10 ग्राम पर बंद हुई।

bullions.co.in के आंकड़ों के अनुसार, सप्ताह की शुरुआत में सोने की कीमतें स्थिर रहीं। 16 सितंबर को कीमत में हल्की गिरावट आई और 24 कैरेट गोल्ड 1,10,620 रुपये प्रति 10 ग्राम पर रहा। इसके बाद दो दिन लगातार गिरावट आई, 17 और 18 सितंबर को सोने के दाम क्रमशः 1,10,330 और 1,09,530 रुपये तक पहुंच गए। सप्ताह के अंत में कीमतों में थोड़ा सुधार देखा गया।

चांदी की कीमतों में तेजी

चांदी की कीमतों में भी इस सप्ताह उतार-चढ़ाव देखने को मिला। 15 सितंबर को 1 किलोग्राम चांदी 1,29,350 रुपये पर थी, जो 17 सितंबर तक गिरकर 1,26,770 रुपये हो गई। फिर 19 और 20 सितंबर को चांदी की कीमतों में तेजी आई और यह 1,30,040 से 1,30,050 रुपये के बीच पहुंच गई। चांदी की मांग इंडस्ट्री में बढ़ने से इसका प्रदर्शन सोने से बेहतर रहा।

MCX (मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज) में भी सोने की कीमतों में इसी तरह का उतार-चढ़ाव देखा गया। 15 सितंबर को 10 ग्राम 24 कैरेट गोल्ड 1,10,179 रुपये था, जो 18 सितंबर तक गिरकर 1,09,052 रुपये हो गया। इसके बाद 19 सितंबर को कीमत बढ़कर 1,09,847 रुपये तक पहुंच गई। MCX में सोने की कीमतों पर वैश्विक कारक, घरेलू मांग, आयात शुल्क और रुपये की विनिमय दर का प्रभाव पड़ता है। फेस्टिव सीजन से पहले सोने की मांग बढ़ने की उम्मीद के चलते कीमतों को समर्थन मिला है।

“”कल से देश में GST रिफोर्म उत्सव शुरू होगा”, देश को संबोधन करते हुए बोले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी”

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“”कल से देश में GST रिफोर्म उत्सव शुरू होगा”, देश को संबोधन करते हुए बोले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी”

: ‘कल से देश में GST रिफोर्म उत्सव शुरू होगा’, देश को संबोधन करते हुए बोले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी