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मातृत्व को संबल देती प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना

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मां बनना हर स्त्री के जीवन का सबसे बड़ा सुख है, लेकिन इस सुख के साथ अनेक जिम्मेदारियाँ और चुनौतियाँ भी जुड़ी होती हैं। गर्भावस्था के दौरान शारीरिक कमजोरी, घरेलू कार्यों का दबाव और आर्थिक तंगी अक्सर माताओं और शिशुओं के स्वास्थ्य पर असर डालते हैं। इन्हीं कठिनाइयों को ध्यान में रखते हुए केंद्र सरकार ने प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना की शुरुआत की, जो आज प्रदेशभर की गर्भवती माताओं के लिए संबल और वरदान साबित हो रही है।

महासमुंद जिले की हितग्राही महिलाएँ श्रीमती अंशुनी साय, श्रीमती रेखा देवांगन, श्रीमती राजकुमारी निषाद और श्रीमती तबस्सुम खातून का कहना है कि इस योजना से उन्हें न केवल आर्थिक सहयोग मिला, बल्कि अपने और शिशु के स्वास्थ्य का ध्यान रखने की हिम्मत और अवसर भी मिला। योजना की राशि से उन्होंने पौष्टिक आहार लिया और आज मां और बच्चा दोनों स्वस्थ हैं। यही अनुभव वे अन्य गर्भवती महिलाओं के साथ साझा कर उन्हें भी योजना से जुड़ने के लिए प्रेरित कर रही हैं।
महिला एवं बाल विकास विभाग के जिला कार्यक्रम अधिकारी श्री टीकवेंद्र जटवार ने बताया कि इस योजना का उद्देश्य गर्भवती माताओं को पर्याप्त विश्राम और पोषण सुनिश्चित करना है, ताकि जच्चा-बच्चा दोनों स्वस्थ रहें और आने वाली पीढ़ी मजबूत हो।

इस महत्वाकांक्षी योजना के तहत विगत तीन वर्षों में महासमुंद जिले की 19,036 गर्भवती माताओं को 6 करोड़ 32 लाख 84 हजार रुपये की सहायता राशि दी गई है। योजना के अंतर्गत पंजीकरण के बाद गर्भावस्था के सातवें माह में 3,000 रुपये तथा प्रसव के साढ़े तीन माह बाद बच्चे को टीका लगने पर 2,000 रुपये प्रदान किए जाते हैं। वहीं, दूसरी डिलीवरी में यदि बालिका जन्म लेती है तो माताओं को 6,000 रुपये की विशेष प्रोत्साहन राशि दी जाती है, जो बेटियों के जन्म को सम्मान और सुरक्षा प्रदान करती है।

यह योजना केवल आर्थिक सहयोग तक सीमित नहीं है, बल्कि मातृत्व का सम्मान भी है। प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना ने वास्तव में माताओं के जीवन में उम्मीद, पोषण और सुरक्षा का उजियारा भरा है और प्रदेशभर में स्वस्थ एवं सशक्त समाज की नींव मजबूत की है।

भगवान के दरबार में भी सूर्यघर योजना की दस्तक

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बिलासपुर जिले के सरकंडा स्थित संत पीतांबरा पीठाधीश्वर मंदिर आज केवल भक्ति और आस्था का केंद्र नहीं रहा, बल्कि यह सौर ऊर्जा से आत्मनिर्भर बनने की प्रेरक मिसाल भी बन गया है। प्रधानमंत्री सूर्यघर योजना के तहत यहां स्थापित 5 किलोवाट का सोलर पैनल मंदिर परिसर को रोशन करने के साथ-साथ श्रद्धालुओं के मन को भी आलोकित कर रहा है।

कुछ समय पहले तक मंदिर समिति को हर माह तगड़ा बिजली बिल चुकाना पड़ता था। धार्मिक अनुष्ठान, सत्संग और रोजाना हजारों श्रद्धालुओं की आवाजाही के बीच मंदिर परिसर को रोशन रखना एक चुनौती बन चुका था। लेकिन पीएम सूर्यघर योजना ने यह चिंता पूरी तरह मिटा दी। अब मंदिर को रोशन करने के लिए किसी बाहरी बिजली सप्लाई पर निर्भर नहीं रहना पड़ता। सूरज की रोशनी से बनने वाली मुफ्त बिजली से यह दिव्य मंदिर आलोकित हो रहा है।

सुबह जैसे ही सूरज की किरणें मंदिर परिसर की छत पर लगे सोलर पैनल को स्पर्श करती हैं, ऊर्जा संग्रहण होने शुरू हो जाता है। दिनभर की इस ऊर्जा से रात के समय पूरा परिसर जगमगा उठता है। जब श्रद्धालु रात में दीपमालाओं और सौर ऊर्जा से उज्ज्वल वातावरण में दर्शन करते हैं तो उनके चेहरे भी श्रद्धा और संतोष से दमक उठते हैं।

मंदिर के संरक्षक एवं अखिल भारतीय संत समिति धर्म समाज के अध्यक्ष आचार्य डॉ. दिनेश महाराज पीतांबरा पीठाधीश्वर ने बताया कि भारत भ्रमण के दौरान बहुत से स्थानों में उन्होंने सौर पैनल से बिजली बनते देखा और परिसर में इसे लगवाने का निर्णय लिया। वे कहते हैं कि यह केवल एक योजना नहीं, बल्कि एक वरदान है। जिस तरह हमारे मंदिर की रोशनी आज सूरज की किरणों से आलोकित है, उसी प्रकार हर घर और हर स्थल को इससे जुड़ना चाहिए। यह आत्मनिर्भर भारत और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में उठाया गया ऐतिहासिक कदम है।

मंदिर के पास रहने वाले निवासियों ने कहा कि मंदिर में लगे सोलर पैनल को देखकर हमें भी प्रेरणा मिली है। अब हम भी अपने घर पर सूर्य घर योजना से सोलर पैनल लगवाने का विचार कर रहे हैं।

यह मंदिर अब केवल पूजा का स्थान नहीं, बल्कि पर्यावरण संरक्षण और ऊर्जा आत्मनिर्भरता का संदेश देने वाला केंद्र बन गया है। इसकी सफलता ने आसपास के लोगों और संस्थाओं को भी प्रेरित किया है कि वे सूर्यघर योजना से जुड़ें। प्रधानमंत्री सूर्यघर योजना ने यह साबित कर दिया है कि सूरज की रोशनी न केवल घरों की छतों को, बल्कि विश्वास, परंपरा को भी रोशन कर सकती है। बिलासपुर का संत पीठाधीश्वर मंदिर आने वाली पीढ़ियों को यह संदेश देता रहेगा कि जब आस्था और विज्ञान का संगम होता है, तो परिणाम ऊर्जा, उजाला और आत्मनिर्भरता के रूप में सामने आता है।

निर्माण कार्यों में गुणवत्ता का रखें विशेष ध्यान: वित्त मंत्री श्री ओपी चौधरी

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वित्त मंत्री एवं जशपुर जिले के प्रभारी मंत्री श्री ओ.पी. चौधरी की अध्यक्षता में गुरुवार को जिले में निर्माण एजेंसियों की बैठक लेकर विकास कार्यों की विस्तार से समीक्षा की गई। इस बैठक में प्रभारी मंत्री श्री चौधरी ने वित्तीय वर्ष 2024-25 एवं 2025-26 के बजट में स्वीकृत, प्रगतिरत एवं अप्रारम्भ कार्यों की जानकारी सभी विभागों से ली। उन्होंने जशपुर में पीएम जनमन योजनांन्तर्गत किये जा रहे कार्यों की जानकारी लेते हुए इन्हें प्राथमिकता से पूर्ण कराने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि जिले के सुदूर वनांचलों में विकास करना शासन का लक्ष्य है, पीएम जनमन योजना, धरती आबा ग्राम उत्थान योजना द्वारा इन क्षेत्रों का समन्वयित विकास किया जाना है। योजनांन्तर्गत किये जा रहे कार्यों में कार्यों में गुणवत्ता का विशेष ध्यान रखने और कर्मठता के साथ प्रत्येक कार्यों को समय सीमा में पूर्ण करने के निर्देश दिए। उन्होंने जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों को आपस में चर्चा कर समन्यव के साथ काम करने की अपील भी की।

वित्त मंत्री श्री ओपी चौधरी ने जिले में पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए दनगरी जलप्रपात पहुंच मार्ग सहित अन्य आवश्यक निर्माण कार्यों जल्द से जल्द पूरा कराने को कहा। उन्होंने सभी निर्माण कार्य कराने वाले विभागों की समीक्षा कर कहा कि जशपुर एक आदिमजाति बहुल जिला होने के साथ मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय का गृह जिला भी है इसे हमें एक मॉडल के रूप में विकसित करना है। इसके लिए आवश्यक है कि प्रत्येक कार्य को पूर्ण ईमानदारी से गुणवत्तापूर्ण रूप से सम्पन्न कराया जाए। यदि किसी कार्य में गुणवत्ता को लेकर कोई कमी पाई जाती है तो संबंधित अधिकारी के विरूद्ध सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।

प्रभारी मंत्री ने वर्षा ऋतु के अंत के साथ सभी कार्यों को तीव्र गति से संचालित करने के निर्देश दिये। उन्होंने पीएमजीएसवाई, डब्लू आर डी, पीडब्लूडी, आरईएस, सीजीएमएससी, हाउसिंग बोर्ड, नगरीय निकायों आदि विभागों के कार्यों की समीक्षा की। इस अवसर पर जनप्रतिनिधियों द्वारा क्षेत्र की समस्याओं एवं विकास कार्यों के संबंध में जानकारी देते हुए समाधान करने एवं निर्माण कार्यों को पूर्ण कराने को कहा।

मंत्री श्री चौधरी ने कहा कि शासन जशपुर जिले के विकास के लिए प्रतिबद्ध है। जिले में बड़े विकास कार्यों के साथ हमें छोटे विकास कार्यों को भी प्राथमिकता देनी है क्योंकि ये कार्य सीधे ग्रामीण जनता को लाभान्वित कर लोगों में शासन के प्रति विश्वास को प्रबल करते हैं, इन निर्माण कार्यों में गुणवत्तापूर्ण कार्य निष्पादन भी सुनिश्चित करना अनिवार्य है।

जनप्रतिनिधियों द्वारा डिजिटल क्रॉप सर्वे में कुछ ग्रामीणों के रिकॉर्ड में त्रुटि की जानकारी दी गयी, जिस पर उन्होंने तुरंत सुधार करवाने हेतु अधिकारियों को निर्देशित किया। उन्होंने नगरीय निकायों में निर्माण कार्यों की जानकारी लेते हुए नगरों का सौंदर्यीकरण करवाने के निर्देश दिए। इस बैठक में सरगुजा आदिवासी विकास प्राधिकरण की उपाध्यक्ष एवं विधायक पत्थलगांव श्रीमती गोमती साय, विधायक जशपुर श्रीमती रायमुनी भगत, जिला पंचायत अध्यक्ष श्री सालिक साय, नगर पालिका अध्यक्ष श्री अरविंद भगत, जिला पंचायत उपाध्यक्ष श्री शौर्य प्रताप सिंह जूदेव, नगर पालिका उपाध्यक्ष श्री यश प्रताप सिंह जूदेव, कलेक्टर श्री रोहित व्यास, सहायक कलेक्टर श्री अनिकेत अशोक सहित जनप्रतिनिधि एवं विभागीय अधिकारी शामिल थे।

वित्त मंत्री श्री ओ.पी. चौधरी ने पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना के प्रचार-प्रसार रथ को हरी झंडी दिखाकर किया रवाना

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वित्त मंत्री श्री ओ.पी. चौधरी ने आज सर्किट हाउस परिसर में प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना के प्रचार-प्रसार रथ को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। यह रथ जिले के शहरों और गांवों में भ्रमण कर लोगों को योजना की जानकारी देगा और इसके लाभों से अवगत कराएगा। इस अवसर पर विधायक एवं सरगुजा आदिवासी विकास प्राधिकरण की उपाध्यक्ष श्रीमती गोमती साय, विधायक श्रीमती रायमुनी भगत, जिला पंचायत अध्यक्ष श्री सालिक साय, श्री कृष्ण कुमार राय, श्री ओम प्रकाश सिन्हा, कलेक्टर श्री रोहित व्यास, अधीक्षण यंत्री श्री के वी मैथ्यू, कार्यपालन यंत्री जशपुर श्री विनोद पंडित, कार्यपालन यंत्री कुनकुरी श्री एस. पी. मरकाम, कार्यपालन यंत्री परियोजना श्री मकेश्वर साय सहित जनप्रतिनिधिगण और अधिकारी मौजूद रहे।

इस अवसर पर वित्त मंत्री श्री चौधरी ने कहा कि यह योजना उपभोक्ताओं को बिजली उपभोक्ता से ऊर्जा दाता बनने का अवसर प्रदान करती है। इस योजना से न केवल उपभोक्ताओं के बिजली बिल में भारी बचत होगी, बल्कि सौर ऊर्जा के उपयोग से पर्यावरण संरक्षण को भी बढ़ावा मिलेगा।

इस योजना के अंतर्गत 01 से 03 किलोवाट तक रूफटॉप सोलर पैनल स्थापित कर हर महीने 100 से 360 यूनिट तक बिजली उत्पादन किया जा सकता है। प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना के तहत 01 किलोवाट सोलर प्लांट लगाने पर केंद्र सरकार की तरफ से 30 हजार तो राज्य सरकार की तरफ से 15 हजार की सब्सिडी मिलती है। इसी तरह 02 किलोवाट सोलर प्लांट लगाने पर केंद्र सरकार की तरफ से 60 हजार तो राज्य सरकार की तरफ से 30 हजार की सब्सिडी और 03 किलोवाट सोलर प्लांट लगाने पर केंद्र सरकार की तरफ से 78 हजार तो राज्य सरकार की तरफ से 30 हजार की सब्सिडी मिलती है। इस योजना अंतर्गत सोलर प्लांट लगाने वाले उपभोक्ताओं को बैंक के द्वारा 6 प्रतिशत ब्याज दर पर आसान किस्तों में 10 वर्षों के लिए ऋण की सुविधा दी गई है।

पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना का लाभ लेने के लिए उपभोक्ता
https://pmsuryaghar.gov.in
, पीएम सूर्यघर मोबाइल ऐप, सीएसपीडीसीएल वेबसाइट, मोर बिजली ऐप अथवा टोल फ्री नंबर 1912 पर कॉल कर आवेदन कर सकते हैं। इसके अलावा, इच्छुक उपभोक्ता नजदीकी सीएसपीडीसीएल कार्यालय से भी संपर्क कर सकते हैं। सौर प्लांट स्थापना हेतु वेंडर का चयन उपभोक्ता स्वयं ऑनलाइन कर सकते हैं।

राज्यों और केंद्र के बीच समन्वय से होगा योजनाओं का बेहतर क्रियान्वयन: मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े

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महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े ने आज विकसित भारत विषय पर केन्द्रीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता द्वारा आयोजित वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से आयोजित बैठक में कहा कि सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय से जुड़ी योजनाओं के बेहतर क्रियान्वयन के लिए राज्यों और केन्द्र के बीच बेहतर समन्वय जरूरी है।

बैठक में महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती राजवाड़े ने कहा कि छत्तीसगढ़ में समाज के अंतिम पंक्ति तक खड़े व्यक्ति को सामाजिक न्याय की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। राज्य में दिव्यांगजन, वरिष्ठ नागरिकों, अनुसूचित जाति-जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग तथा उभयलिंगी समुदाय के सशक्तिकरण हेतु योजनाओं का विस्तार और प्रभावी क्रियान्वयन किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि “विकसित भारत 2047” की परिकल्पना को साकार करने के लिए राज्यों और केंद्र के बीच बेहतर समन्वय स्थापित हो, जिससे नीति और योजनाओं का लाभ तेजी से जरूरतमंद तक पहुँच सके। उन्होंने कहा कि सामाजिक न्याय केवल संवैधानिक दायित्व ही नहीं बल्कि मानवीय कर्तव्य भी है।

गौरतलब है कि केन्द्रीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री डॉ. वीरेन्द्र कुमार की अध्यक्षता में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से आयोजित बैठक में विकसित भारत 2047 की परिकल्पना को साकार करने हेतु राज्यों से ठोस सुझाव लिए गए तथा सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता से जुड़ी दीर्घकालिक रणनीतियों पर विचार-विमर्श किया गया। इस बैठक में शिक्षा, स्वास्थ्य, सामाजिक सुरक्षा, दिव्यांगजन सशक्तिकरण, नशा मुक्ति, कौशल विकास और समाज के कमजोर वर्गों को मुख्यधारा से जोड़ने जैसे मुद्दों पर गहन चर्चा की गई। इस बैठक में सभी राज्यों के मंत्रियों ने अपने-अपने सुझाव रखे और केंद्र सरकार ने इस दिशा में ठोस नीतियाँ बनाने का आश्वासन दिया।

बस्तर इन्वेस्टर कनेक्ट में 967 करोड़ रुपए से अधिक के निवेश प्रस्ताव, हजारों युवाओं को मिलेगा रोजगार…

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बस्तर आज विकास की स्वर्णिम सुबह का प्रतीक बनकर उभर रहा है। जो क्षेत्र कभी उपेक्षा और अभाव की पहचान से जूझता था, वह अब निवेश, अवसर और रोजगार का नया केंद्र बन रहा है।

यहाँ हर क्षेत्र-उद्योग, शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि और पर्यटन-में समावेशी विकास की गूंज सुनाई दे रही है। यह बदलाव न केवल बस्तर की तस्वीर बदल रहा है, बल्कि पूरे छत्तीसगढ़ के उज्ज्वल भविष्य की गाथा लिख रहा है।

रेल-सड़क परियोजनाओं से आएगा बड़ा बदलाव  बस्तर के विकास को गति देने के लिए सरकार ने ₹5,200 करोड़ की रेल परियोजनाओं को मंजूरी दी है। इनमें रावघाट-जगदलपुर नई रेल लाइन (₹3,513.11 करोड़) और केके रेल लाइन (कोत्तवलसा-किरंदुल) के दोहरीकरण जैसे महत्वपूर्ण कार्य शामिल हैं। ये परियोजनाएँ न केवल बस्तर में यात्रा, पर्यटन और व्यापार को नई दिशा देंगी, बल्कि युवाओं के लिए बड़े पैमाने पर रोज़गार और औद्योगिक अवसर भी सृजित करेंगी। बेहतर रेल कनेक्टिविटी से नक्सलवाद उन्मूलन के प्रयास और मजबूत होंगे तथा बस्तर विश्वसनीय निवेश और समावेशी विकास का केंद्र बनकर उभरेगा।

इसके साथ ही, बस्तर में ₹2300 करोड़ की सड़क विकास परियोजनाएँ भी स्वीकृत की गई हैं। कभी नक्सल प्रभावित क्षेत्र के रूप में जाना जाने वाला यह संभाग अब छत्तीसगढ़ के सबसे विकसित और समृद्ध क्षेत्रों में से एक बनने की राह पर है। राज्य और केंद्र सरकार मिलकर धमतरी-कांकेर-कोंडागांव-जगदलपुर मार्ग का एक वैकल्पिक रास्ता बना रही हैं, जो कांकेर, अंतागढ़, नारायणपुर के अबूझमाड़ होते हुए दंतेवाड़ा के बारसूर और आगे बीजापुर तक पहुँचेगा। इन परियोजनाओं से बस्तर के सभी जिलों तक पहुँचने के लिए कई रास्ते उपलब्ध होंगे, जिससे दूरियाँ कम होंगी और योजनाओं व विकास कार्यों की पहुँच और अधिक प्रभावी होगी। यह आधुनिक सड़क नेटवर्क न केवल आवागमन की सुविधा बढ़ा रहा है, बल्कि सुरक्षा, शिक्षा, स्वास्थ्य और आर्थिक प्रगति के नए द्वार भी खोल रहा है। इस प्रकार, बस्तर अब संघर्ष की भूमि से आगे बढ़कर संपर्क, समृद्धि और सुरक्षा का प्रतीक बन रहा है।

बड़े सार्वजनिक निवेश से बदलता बस्तर बस्तर में एनएमडीसी द्वारा ₹43,000 करोड़ तथा सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल हेतु ₹200 करोड़ का निवेश किया जा रहा है। ये निवेश बस्तर की आधारभूत संरचना को मजबूती प्रदान कर रहे हैं।

निजी निवेश और समावेशी विकास बड़े सार्वजनिक निवेशों के साथ-साथ लगभग ₹1,000 करोड़ का निजी निवेश भी सेवा क्षेत्र और एमएसएमई में किया जा रहा है। यह विविधीकृत विकास रोजगार के अवसरों को बढ़ाएगा और समावेशी व सतत विकास को सुनिश्चित करेगा। कुल मिलाकर लगभग ₹52,000 करोड़ की प्रतिबद्धताओं के साथ बस्तर औद्योगिक और सामाजिक-आर्थिक परिवर्तन का नया केंद्र बन रहा है।

स्वास्थ्य क्षेत्र में क्रांति: बस्तर को मिला पहला 350 बेड का निजी अस्पताल जगदलपुर में पहली बार 350 बेड का मल्टी-स्पेशियलिटी निजी अस्पताल और मेडिकल कॉलेज स्थापित होने जा रहा है। इसके लिए रायपुर स्टोन क्लिनिक प्रा. लि. को “इनविटेशन टू इन्वेस्ट” पत्र जारी किया गया है। 550 करोड़ रुपये के निवेश और 200 रोजगार अवसरों के साथ यह परियोजना बस्तर की स्वास्थ्य सेवाओं को नई ऊँचाई देगी और इसे मेडिकल शिक्षा का केंद्र बनाएगी।

इसके अतिरिक्त, जगदलपुर में 33 करोड़ रुपये के निवेश से एक और मल्टी-स्पेशियलिटी अस्पताल तथा नवभारत इंस्टिट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज द्वारा 85 करोड़ रुपये के निवेश से 200 बेड का मल्टी-सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल स्थापित किया जाएगा। ये पहल न केवल आधुनिक स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार करेंगी, बल्कि सैकड़ों युवाओं को रोजगार भी प्रदान करेंगी।

खाद्य प्रसंस्करण में नई शुरुआत बीजापुर, नारायणपुर, बस्तर और कोंडागांव में आधुनिक राइस मिल और फूड प्रोसेसिंग इकाइयाँ स्थापित की जा रही हैं, जिससे किसानों को बेहतर मूल्य मिलेगा और स्थानीय युवाओं के लिए अनेक रोजगार अवसर सृजित होंगे।

एग्रीटेक और वैल्यू एडिशन नारायणपुर जिले में पार्श्वा एग्रीटेक प्रतिवर्ष 2,400 टन परबॉयल्ड चावल का उत्पादन करेगी। 8 करोड़ रुपये के निवेश और नए रोजगार के साथ यह परियोजना बस्तर की कृषि उपज को वैल्यू एडिशन का नया आधार देगी।

वेलनेस और हॉस्पिटैलिटी सेक्टर में प्रगति जगदलपुर में नमन् क्लब एंड वेलनेस सेंटर 7.65 करोड़ रुपये के निवेश और 30 रोजगार अवसरों के साथ स्थापित हो रहा है। वहीं पर्यटन और हॉस्पिटैलिटी क्षेत्र में एएस बिल्डर्स एंड ट्रेडर्स तथा सेलिब्रेशन रिजॉर्ट्स एंड होटल्स बस्तर की प्राकृतिक सुंदरता और सांस्कृतिक धरोहर को वैश्विक मंच पर प्रदर्शित करेंगे।

डेयरी और कृषि-आधारित उद्योग बस्तर डेयरी फार्म प्रा. लि. 5.62 करोड़ रुपये का निवेश कर दुग्ध उत्पादन और प्रसंस्करण को गति देगा। इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था मजबूत होगी और किसानों की आय में वृद्धि होगी।

निर्माण सामग्री और औद्योगिक विकास पीएस ब्रिक्स और महावीर माइन्स एंड मिनरल्स जैसी कंपनियाँ ईंट और स्टोन क्रशर क्षेत्र में प्रवेश कर रही हैं, जिससे निर्माण गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा और बुनियादी ढांचा सशक्त होगा।

वेयरहाउसिंग, लॉजिस्टिक्स और कोल्ड स्टोरेज कांकेर, भानुप्रतापपुर और कोंडागांव में नए वेयरहाउसिंग केंद्र स्थापित हो रहे हैं। दंतेश्वरी कोल्ड स्टोरेज जैसी परियोजनाएँ किसानों की उपज को लंबे समय तक सुरक्षित रखने, बर्बादी घटाने और लाभ बढ़ाने में मदद करेंगी।

वुड, फर्नीचर और कृषि मशीनरी माँ दंतेश्वरी वेनियर्स और अली फर्नीचर जैसी इकाइयाँ बस्तर की पारंपरिक कारीगरी को आधुनिक बाजारों से जोड़ेंगी।

आधुनिक उद्योगों की एंट्री शंकरा लेटेक्स इंडस्ट्रीज 40 करोड़ रुपये के निवेश से सर्जिकल ग्लव्स निर्माण इकाई स्थापित करेगी, जिससे 150 रोजगार अवसर सृजित होंगे। यह भारत की स्वास्थ्य आत्मनिर्भरता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

पीएमएफएमई योजना के तहत सहयोग पीएमएफएमई योजना अंतर्गत कांकेर, बस्तर और कोंडागांव जिलों के हितग्राहियों को वित्तीय सहायता प्रदान की गई। कांकेर जिले के मुकेश खटवानी (मेसर्स रूद्रा फूड्स एंड बेवरेजेस) को ₹35 लाख, बस्तर जिले की योगिता वानखेडे (मेसर्स माँ गृह उद्योग) को ₹5 लाख तथा कोंडागांव जिले की रागिनी जायसवाल (मेसर्स फिटनेस फ्यूल) को ₹5 लाख एवं ₹9.50 लाख की स्वीकृति मिली। कुल मिलाकर योजना के अंतर्गत ₹49.50 लाख से अधिक की सहायता दी गई।

पीएमईजीपी योजना से सशक्तिकरण पीएमईजीपी योजना अंतर्गत कांकेर जिले के हरीश कोमरा (रेडीमेड गारमेंट्स – ₹9 लाख), सुरेश बघेल (हार्वेस्टर – ₹20 लाख), बस्तर जिले के चंद्रशेखर दास (मेसर्स दीक्षा टेंट हाउस – ₹8.80 लाख) और रेवेन्द्र राणा (मेसर्स राणा मोबाईल रिपेयरिंग – ₹7.50 लाख) को सहायता दी गई। वहीं कोंडागांव जिले के सुरेश कुमार देवांगन (मेसर्स किसान मितान एग्रो) को ट्रैक्टर-ट्रॉली निर्माण हेतु ₹50 लाख का अनुदान स्वीकृत हुआ। इस प्रकार योजना के अंतर्गत ₹94.50 लाख की राशि वितरित की गई।

औद्योगिक नीति से नए अवसर राज्य सरकार की औद्योगिक नीति के तहत स्थायी पूंजी निवेश हेतु भी अनुदान दिया गया। कांकेर जिले की साधना शर्मा (मेसर्स महावीर वेयरहाउस) को वेयरहाउस स्थापना के लिए ₹90 लाख की स्वीकृति मिली। इन पहलों से बस्तर संभाग में उद्यमिता और औद्योगिक विकास को गति मिल रही है और स्थानीय युवाओं व महिलाओं को रोजगार एवं आत्मनिर्भरता के अवसर मिल रहे हैं।

कुल मिलाकर बस्तर में अब तक ₹967 करोड़ से अधिक के निवेश प्रस्ताव आए हैं, जिससे 2100 से अधिक लोगों को प्रत्यक्ष लाभ मिलेगा। स्वास्थ्य, कृषि, खाद्य प्रसंस्करण, डेयरी, पर्यटन, निर्माण और शिक्षा जैसे क्षेत्रों में यह निवेश लहर बस्तर को एक सच्चे “निवेश गंतव्य” के रूप में स्थापित कर रही है।

बस्तर में औद्योगिक विस्तार के अवसर बस्तर में औद्योगिक विकास की अपार संभावनाएँ हैं। स्टील प्लांट के समीप समर्पित सीमेंट प्लांट, मोटर रिपेयर एवं वाइंडिंग, मशीन एवं फैब्रिकेशन शॉप्स, पंप रिपेयर जैसी सहायक इकाइयों को बढ़ावा दिया जा रहा है। साथ ही लोहा और इस्पात उद्योग से जुड़े पिग आयरन, टीएमटी बार, एंगल/चैनल, वायर रॉड्स और ब्राइट बार के उत्पादन की भी बड़ी संभावनाएँ हैं।

मुख्यमंत्री के 20 माह में 100+ दौरे: विश्वास और विकास का संकल्प मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने पिछले 20 महीनों में बस्तर के 100 से अधिक स्थानों का दौरा कर नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में विकास की नई उम्मीद और विश्वास का संचार किया है। “नियद नेल्ला नार” योजना के तहत सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य और संचार सुविधाएँ दूरस्थ इलाकों तक पहुँची हैं।

सुरक्षा शिविरों के 10 किमी दायरे में अब तक 81,090 आधार कार्ड, 49,239 आयुष्मान कार्ड, 5,885 किसान सम्मान निधि लाभ, 2,355 उज्ज्वला कनेक्शन और 98,319 राशन कार्ड जारी किए गए। 21 सड़कों, 635 मोबाइल टॉवर, 18 उचित मूल्य दुकानों और 9 उप-स्वास्थ्य केंद्रों का निर्माण हुआ। अब तक 54 सुरक्षा शिविर स्थापित हुए हैं। पहली बार 28 गाँवों (जैसे जगारगुंडा, पामेड) में बैंक खुले हैं और 50 से अधिक बंद स्कूल फिर से शुरू हुए हैं।

नई पुनर्वास नीति: आत्मसमर्पित नक्सलियों के लिए जीवन की नई राह नई पुनर्वास नीति के तहत आत्मसमर्पित नक्सलियों को मुख्यधारा में लौटने का अवसर दिया जा रहा है। इसमें तीन वर्षों तक ₹10,000 मासिक सहायता, शहरी क्षेत्रों में 4 डिसमिल प्लॉट या ग्रामीण क्षेत्रों में एक हेक्टेयर जमीन दी जाएगी। साथ ही व्यावसायिक प्रशिक्षण, पूर्ण इनामी राशि और सामूहिक आत्मसमर्पण (80% से अधिक) पर दुगुना इनाम तथा नक्सल-मुक्त गाँवों के लिए ₹1 करोड़ तक की विकास योजनाएँ स्वीकृत होंगी। प्रधानमंत्री आवास योजना अंतर्गत 15,000 घर आत्मसमर्पित नक्सलियों और हिंसा प्रभावित परिवारों को मंजूर किए गए हैं।

मोदी की गारंटी: तेंदूपत्ता संग्राहकों को अधिक दर राज्य सरकार ने तेंदूपत्ता खरीदी दर को ₹4,000 से बढ़ाकर ₹5,500 प्रति मानक बोरा कर दिया है। इससे बस्तर के 52 लाख संग्राहक (13 लाख परिवार) सीधे लाभान्वित हो रहे हैं।

कौशल विकास से युवाओं को अवसर मुख्यमंत्री कौशल विकास योजना के तहत 90,273 युवाओं को प्रशिक्षण दिया गया, जिनमें से 39,137 को रोजगार मिला। वर्ष 2024-25 में ही आईटी, ऑटोमोबाइल, कंस्ट्रक्शन और सौर ऊर्जा क्षेत्रों में 3,296 युवाओं को प्रशिक्षण दिया जा रहा है।

नक्सल उन्मूलन में बड़ी सफलता दिसंबर 2023 से अब तक सुरक्षा बलों की आक्रामक रणनीति के परिणामस्वरूप 453 नक्सली मारे गए, 1,611 गिरफ्तार हुए और 1,636 ने आत्मसमर्पण किया। बीते 20 महीनों में 65 से अधिक नए सुरक्षा शिविर स्थापित हुए हैं। सड़क, पुल और मोबाइल नेटवर्क जैसे ढाँचागत विकास ने भी इस प्रक्रिया को मजबूती दी है।

सरकार का लक्ष्य मार्च 2026 तक नक्सल उन्मूलन सुनिश्चित करना है, जिसके साथ-साथ सतत विकास और शांति का मार्ग प्रशस्त होगा।

औद्योगिक नीति 2024-30: बदलाव का सूत्रधार छत्तीसगढ़ औद्योगिक नीति 2024-30 ने बस्तर ही नहीं बल्कि पूरे राज्य में निवेश, नवाचार और रोजगार के नए द्वार खोले हैं। “बस्तर इन्वेस्टर कनेक्ट” संतुलित क्षेत्रीय विकास के प्रति राज्य की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

यह नीति रोजगार सृजन, उद्यमिता संवर्धन और सामुदायिक सशक्तिकरण सुनिश्चित करती है, साथ ही बस्तर की जनजातीय धरोहर और सांस्कृतिक पहचान को भी संरक्षित रखती है। 1,000 करोड़ रुपये से अधिक निवेश या 1,000 से अधिक रोजगार देने वाली परियोजनाओं को विशेष प्रोत्साहन दिए जाएंगे। फार्मा, एग्रो-प्रोसेसिंग, टेक्सटाइल्स, आईटी व डिजिटल टेक, एडवांस इलेक्ट्रॉनिक्स, एयरोस्पेस-डिफेंस और ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स को प्राथमिकता दी गई है।

पर्यटन को उद्योग का दर्जा दिया गया है, जिसमें होटलों, ईको-टूरिज्म, वेलनेस सेंटर, एडवेंचर स्पोर्ट्स और खेल सुविधाओं पर 45% तक सब्सिडी मिलेगी। बस्तर के 88% ब्लॉक ग्रुप-3 श्रेणी में आते हैं, जिससे निवेशकों को अधिकतम लाभ मिलेगा।समावेशिता को नीति का केंद्र बनाया गया है: एससी/एसटी उद्यमियों और नक्सल प्रभावित परिवारों को अतिरिक्त 10% सब्सिडी दी जाएगी। आत्मसमर्पित नक्सलियों को रोजगार देने वाली इकाइयों को 40% वेतन सब्सिडी (5 लाख रुपये प्रतिवर्ष तक, पाँच वर्षों के लिए) प्रदान की जाएगी

मुख्यमंत्री साय ने नेपाल में फंसे छत्तीसगढ़ के पर्यटकों की सुरक्षित वापसी के निर्देश दिए…

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छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने नेपाल में हिंसक विरोध प्रदर्शनों को देखते हुए अधिकारियों को वहां फंसे राज्य के पर्यटकों की सुरक्षित वापसी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। अधिकारियों ने बृहस्पतिवार को यह जानकारी दी।

बुधवार रात एक बयान में साय ने कहा, ”मुझे जानकारी प्राप्त हुई है कि छत्तीसगढ़ के कुछ पर्यटक इस समय नेपाल में हैं। उनकी सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए मैंने संबंधित अधिकारियों को तुरंत आवश्यक कदम उठाने के निर्देश दिए हैं तथा भारत सरकार के अधिकारियों के साथ मिलकर उनकी सकुशल वापसी सुनिश्चित करने के प्रयास किए जा रहे हैं।”

साय ने कहा है, ”इस कठिन समय में हमारी सरकार हर नागरिक की सहायता के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।”

छत्तीसगढ़ में बाढ़ प्रभावित लोगों की मदद के लिए गुजरात से गुरुवार को राहत सामग्री भेजी गई…

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छत्तीसगढ़ में बाढ़ प्रभावित लोगों की मदद के लिए गुजरात से गुरुवार को राहत सामग्री भेजी गई। प्रदेश के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने गांधीनगर स्थित भाजपा मुख्यालय से आवश्यक वस्तुओं से भरे ट्रक को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया।

इस अवसर पर भारतीय जनता पार्टी ने ‘सेवा ही संगठन’ की भावना को चरितार्थ करते हुए यह सुनिश्चित किया कि बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों तक जरूरी मदद समय पर पहुंचे।

इस अवसर पर प्रदेश महामंत्री रजनी पटेल ने मीडिया को संबोधित करते हुए कहा कि 5 ट्रकों के माध्यम से 8 हजार राहत किट छत्तीसगढ़ के बाढ़ पीड़ितों के लिए रवाना किए गए हैं। इन किटों में तेल, चाय, नमक, चावल, दूध पाउडर, मच्छरदानी, बर्तन, प्याज, आलू सहित रोजमर्रा की सभी आवश्यक वस्तुएं शामिल हैं।

उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ के साथ-साथ पंजाब के कुछ हिस्सों में भी जरूरतमंद लोगों के लिए राहत भेजी जा रही है। रेलवे के माध्यम से अरहर दाल, दवाइयां और अन्य जरूरी सामान पंजाब में भेजा गया है।

रजनी पटेल ने कहा कि सेवा ही संगठन का मंत्र केवल नारा नहीं, बल्कि भाजपा की कार्यशैली का मूल है। जब-जब समाज को जरूरत पड़ी है, भाजपा के कार्यकर्ता सबसे पहले सहायता लेकर पहुंचे हैं। चाहे महामारी हो, प्राकृतिक आपदा हो या कोई और संकट- हम समाज के बीच रहकर काम करते हैं।

उन्होंने आगे कहा कि भाजपा कार्यकर्ता प्रभावित क्षेत्रों में लगातार सक्रिय रूप से कार्य कर रहे हैं और सुनिश्चित कर रहे हैं कि राहत सामग्री जरूरतमंदों तक समय पर पहुँचे। संगठन और सरकार के बीच तालमेल के साथ यह राहत कार्य संचालित किया जा रहा है।

इससे पहले, मध्य प्रदेश की सरकार छत्तीसगढ़ की मदद के लिए आगे आई थी।

सीएम मोहन यादव ने बीते दिनों छत्तीसगढ़ को सहायता पहुंचाते हुए एक्स पर एक संदेश में कहा था, “अत्यधिक वर्षा के कारण छत्तीसगढ़ के कई हिस्सों में बाढ़ आई है, जिससे जान-माल का नुकसान हुआ है। एक पड़ोसी राज्य होने के नाते, हर संभव सहायता प्रदान करना हमारी जिम्मेदारी है। इस संबंध में, मध्य प्रदेश सरकार 5 करोड़ रुपये की धनराशि और आवश्यक राहत सामग्री भेज रही है। आपदा की इस घड़ी में, मध्य प्रदेश छत्तीसगढ़ के साथ मजबूती से खड़ा है और ज़रूरत पड़ने पर हर संभव सहयोग प्रदान करेगा।

गोवा के मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत ने भी छत्तीसगढ़ को राहत सामग्री भेजी है। इसके अलावा, उन्होंने पंजाब और छत्तीसगढ़ को पांच-पांच करोड़ रुपए की वित्तीय सहायता भी प्रदान की है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनके मॉरीशस के समकक्ष नवीनचंद्र रामगुलाम दोनों देशों के बीच संबंधों को मजबूत करने पर रणनीति…

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनके मॉरीशस के समकक्ष नवीनचंद्र रामगुलाम ने गुरुवार को उत्तर प्रदेश के वाराणसी में मुलाकात की, जिसमें दोनों देशों के बीच संबंधों को मजबूत करने पर ध्यान केंद्रित किया गया।

मॉरीशस के प्रधानमंत्री नवीनचंद्र रामगुलाम भारत की 8 दिवसीय (9 से 16 सितंबर तक) यात्रा पर हैं और वर्तमान में वाराणसी में हैं। प्रधानमंत्री मोदी गुरुवार की सुबह वाराणसी पहुंचे, जहां उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उनका स्वागत किया। इसके बाद पीएम मोदी ने मॉरीशस के प्रधानमंत्री से मुलाकात की।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने समकक्ष नवीनचंद्र रामगुलाम के साथ संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि संस्कृति और संस्कार, सदियों पहले भारत से मॉरीशस पहुंचे और वहां की जीवन-धारा में रच-बस गए। काशी में मां गंगा के अविरल प्रवाह की तरह भारतीय संस्कृति का सतत प्रवाह मॉरीशस को समृद्ध करता रहा है।

उन्होंने कहा, “आज जब हम मॉरीशस के दोस्तों का स्वागत काशी में कर रहे हैं, यह सिर्फ औपचारिक नहीं, बल्कि एक आत्मिक मिलन है। इसलिए मैं गर्व से कहता हूं कि भारत और मॉरीशस सिर्फ पार्टनर नहीं, बल्कि एक परिवार हैं।”

इससे पहले, मॉरीशस के प्रधानमंत्री ने विदेश सचिव विक्रम मिस्री से भी मुलाकात की और दोनों देशों के बीच बहुआयामी द्विपक्षीय साझेदारी पर चर्चा की।

विदेश मंत्रालय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर लिखा, “विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने गुरुवार को वाराणसी में मॉरीशस के प्रधानमंत्री नवीनचंद्र रामगुलाम से मुलाकात की। बहुआयामी साझेदारी पर चर्चा की और साझा इतिहास, संस्कृति और लोगों के बीच संबंधों पर आधारित भारत-मॉरीशस संवर्धित रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करने की प्रतिबद्धता दोहराई।”

गौरतलब है कि मॉरीशस, हिंद महासागर क्षेत्र में भारत का महत्वपूर्ण साझेदार और निकटवर्ती समुद्री पड़ोसी है, जो भारत के ‘महासागर (म्यूचुअल एंड होलिस्टिक एडवांसमेंट फॉर सिक्योरिटी एंड ग्रोथ एक्रॉस रीजन) विजन और ‘नेबरहुड फर्स्ट’ नीति का प्रमुख हिस्सा है। दोनों देशों के बीच गहरे सहयोग का महत्व न सिर्फ दोनों देशों की जनता की समृद्धि के लिए है, बल्कि ग्लोबल साउथ की सामूहिक आकांक्षाओं के लिए भी महत्वपूर्ण है।

“वोट चोर गद्दी छोड़” प्रदेशव्यापी अभियान के दौरान ऐसा नजारा सामने आया जिसने न केवल कार्यकर्ताओं को चौंकाया बल्कि पूरे राजनीतिक गलियारे में चर्चा छेड़ दी।

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छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी के भीतर जारी मतभेद अब खुले मंच पर दिखाई देने लगे हैं। मंगलवार को बिलासपुर में आयोजित “वोट चोर, गद्दी छोड़” प्रदेशव्यापी अभियान के दौरान ऐसा नजारा सामने आया जिसने न केवल कार्यकर्ताओं को चौंकाया बल्कि पूरे राजनीतिक गलियारे में चर्चा छेड़ दी।

इस कार्यक्रम का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें मंच पर भाषण दे रहे पूर्व मंत्री और आदिवासी नेता अमरजीत भगत से माइक छीने जाने की घटना कैद है।

कार्यक्रम का माहौल और विवाद मंगलवार को कांग्रेस ने भाजपा सरकार के खिलाफ “वोट चोर, गद्दी छोड़” अभियान के तहत राज्यभर में सभाएं आयोजित की थीं। इसी कड़ी में बिलासपुर में भी एक सभा रखी गई। कार्यक्रम में कई बड़े नेता मौजूद थे और मंच से भाजपा सरकार पर जमकर प्रहार किया जा रहा था। इस बीच जब पूर्व मंत्री अमरजीत भगत भाषण दे रहे थे, तभी अचानक मंच संचालन कर रहे नेता ने उनसे माइक छीन लिया।

वीडियो हुआ वायरल यह घटना वहां मौजूद कार्यकर्ताओं और मीडिया के कैमरों में कैद हो गई। वीडियो इंटरनेट मीडिया पर आते ही वायरल होने लगा। वायरल वीडियो में साफ दिख रहा है कि अमरजीत भगत कुछ महत्वपूर्ण बातें कह रहे थे, तभी मंच पर मौजूद एक नेता ने आकर उनका माइक ले लिया। इस दौरान मंच पर बैठे अन्य नेता भी असहज नजर आए।

कांग्रेस के भीतर असहमति की तस्वीर राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि यह घटना प्रदेश कांग्रेस कमेटी के भीतर बढ़ते मतभेदों की ओर इशारा करती है। पिछले कुछ समय से पार्टी नेताओं के बीच रणनीति और नेतृत्व को लेकर असहमति की खबरें आती रही हैं, लेकिन सार्वजनिक मंच पर इस तरह का दृश्य पहली बार सामने आया है। यह न केवल संगठनात्मक अनुशासन पर सवाल खड़े करता है बल्कि कार्यकर्ताओं में भी गलत संदेश जाता है।

विपक्ष के निशाने पर कांग्रेस वीडियो वायरल होते ही विपक्षी दलों ने कांग्रेस पर हमला बोलना शुरू कर दिया है। भाजपा नेताओं ने कहा है कि कांग्रेस अपनी ही अंतर्कलह में उलझी हुई है और जनता की समस्याओं पर ध्यान देने के बजाय आपसी विवाद में समय बर्बाद कर रही है। उनका कहना है कि जब पार्टी मंच पर ही अपने वरिष्ठ नेताओं का सम्मान नहीं कर पा रही है, तो वह प्रदेश की जनता का क्या ख्याल रखेगी।

कांग्रेस नेताओं की सफाई हालांकि कांग्रेस के कुछ नेताओं ने इस घटना को हल्के में लेने की अपील की है। उनका कहना है कि मंच संचालन के दौरान समय प्रबंधन को लेकर ऐसी स्थिति बनी। इसे मतभेद या विवाद के रूप में देखना सही नहीं होगा। मगर राजनीतिक जानकार मानते हैं कि वीडियो का प्रभाव संगठन की एकजुटता की छवि पर जरूर पड़ेगा।

आगे की रणनीति पर निगाहें अब देखना होगा कि कांग्रेस आलाकमान इस घटना को किस नजर से देखता है। क्या वे आंतरिक कलह को सुलझाने के लिए कोई कदम उठाएंगे या इसे केवल एक सामान्य घटना मानकर छोड़ देंगे। फिलहाल इतना तय है कि बिलासपुर की यह सभा प्रदेश कांग्रेस में उभरते मतभेदों की नई मिसाल बन गई है।