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”CG: प्रदेश में 61 प्रतिशत महिलाएं एनीमिया से पीड़ित, जानिए.. एनीमिया के लक्षण”

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”CG: प्रदेश में 61 प्रतिशत महिलाएं एनीमिया से पीड़ित, जानिए.. एनीमिया के लक्षण”

छत्तीसगढ़ में एनीमिया बीमारी के मरीजों के आंकड़े चौंकाने वाले हैं। राज्य की 61 प्रतिशत से अधिक महिलाएं शरीर में खून की कमी से जूझ रही हैं। वहीं 27 प्रतिशत पुरुष भी एनीमिया के शिकार हैं। यह स्थिति चिंताजनक है। शरीर में हीमोग्लोबिन की कमी से यह बीमारी होती है। जिससे बचाव और इलाज जरूरी है।

प्रदेश में 61 प्रतिशत महिलाएं एनीमिया से पीड़ित

छत्तीसगढ़ में 61 प्रतिशत महिला, 27 प्रतिशत पुरुष एमीनिया से पीड़ित, 51.8 प्रतिशत गर्भवती महिलाएं, 67.2 प्रतिशत 5 साल तक के बच्चे शिकार, हमारे शरीर में हीमोग्लोबिन की कमी से होती है यह खतरनाक बीमारी.

छत्तीसगढ़ में एनीमिया का खतरा लगातार बढ़ता जा रहा है। नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे (एनएफएचएस) की ताजा रिपोर्ट के अनुसार प्रदेश की 61.2 प्रतिशत सामान्य महिलाएं खून की कमी से जूझ रही हैं। वहीं 51.8 प्रतिशत गर्भवती महिलाएं और 67.2 प्रतिशत छह माह से पांच साल तक के बच्चे एनीमिया के शिकार पाए गए हैं। पुरुषों में भी 27प्रतिशत प्रभावित हैं। यह स्थिति बच्चों में कुपोषण और मातृ मृत्यु दर का बड़ा कारण बन रही है।

एनीमिया का सीधा संबंध शरीर में हीमोग्लोबिन की कमी से है। सामान्य रूप से पुरुषों में हीमोग्लोबिन का स्तर 12 से 16 और महिलाओं में 11 से 14 ग्राम होना चाहिए। लेकिन खानपान में आयरन और विटामिन की कमी, मलेरिया के बाद लाल रक्त कणों का नष्ट होना, पेट के कीड़े और परजीवियों से संक्रमण, अल्सर और दूषित पानी के सेवन से खून की कमी तेजी से बढ़ रही है।

हालात से निपटने के लिए स्वास्थ्य विभाग और महिला एवं बाल विकास विभाग मिलकर अभियान चला रहे हैं। जिन मरीजों में हीमोग्लोबिन 11 ग्राम से कम पाया जाता है, उन्हें आयरन की गोलियां दी जा रही हैं। छोटे बच्चों को हर छह माह में कृमि नाशक दवा पिलाई जा रही है।

इसके साथ ही पांच साल तक के बच्चों को द्वि-वार्षिक विटामिन-ए की खुराक दी जा रही है। वर्ष 2015-16 में जहां विटामिन-ए का कवरेज 64.5 प्रतिशत था, वहीं 2019-21 में यह बढ़कर 71.2प्रतिशत हो गया है। वर्ष 2023-24 में लाखों बच्चों को पहली और नौवीं खुराक उपलब्ध कराई गई है।

एनीमिया के लक्षण

  • नाखून और पलकों के अंदर सफेदी
  • लगातार थकान और कमजोरी चक्कर आना
  • बेहोशी सांस फूलना
  • दिल की धड़कन तेज होना
  • त्वचा का पीला या सफेद दिखना

Indian Railways: भारतीय रेलवे की ओर से स्पेशल ट्रेनों का संचालन किया जा रहा है, ऐसा रहेगा ट्रेनों का टाइम टेबल ..

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Indian Railways: भारतीय रेलवे की ओर से स्पेशल ट्रेनों का संचालन किया जा रहा है, ऐसा रहेगा ट्रेनों का टाइम टेबल ..

त्योहारों में यात्रियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए भारतीय रेलवे की ओर से स्पेशल ट्रेनों का संचालन किया जा रहा है। दुर्गा पूजा के दौरान इतवारी और शालीमार के बीच स्पेशल ट्रेन चलाया जाएगा। वहीं दुर्ग से दिल्ली के हजरत निजामुद्दीन तक भी 5 अक्टूबर से स्पेशल ट्रेन का संचालन किया जाएगा।

त्योहारों पर चलाए जाएंगे स्पेशल ट्रेन 

दुर्गा पूजा के लिए शालीमार से इतवारी तक स्पेशल ट्रेन का संचालन, छत्तीसगढ़ के 8 स्टेशनों पर रुकते हुए जाएगी दुर्गा पूजा स्पेशल ट्रेन, 5 अक्टूबर से दुर्ग-निजामुद्दीन के बीच 8 फेरों में स्पेशल ट्रेन चलेगी.

रायपुर : रेलवे प्रशासन ने दुर्गा पूजा के अवसर पर यात्रियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए इतवारी और शालीमार के बीच स्पेशल ट्रेन चलाने का निर्णय लिया है। यह ट्रेन कुल 5 फेरों में चलाई जाएगी। गाड़ी संख्या 08865 (इतवारी-शालीमार पूजा स्पेशल) इतवारी से 27 सितंबर से 1 अक्टूबर तक चलेगी। वहीं गाड़ी संख्या 08866 (शालीमार-इतवारी पूजा स्पेशल) शालीमार से 28 सितंबर से 2 अक्टूबर तक चलेगी।

ऐसा रहेगा ट्रेनों का टाइम टेबल; गाड़ी संख्या 08865 इतवारी-शालीमार पूजा स्पेशल ट्रेन शाम 05:10 बजे इतवारी से निकलकर 7 बजे गोंदिया, रात 08:08 बजे डोंगरगढ़, 08:35 बजे राजनांदगांव, 09:40 बजे दुर्ग, 10:25 बजे रायपुर, 11:20 बजे भाटापारा, 12:35 बजे बिलासपुर, 01:35 बजे चांपा, 02:32 बजे रायगढ़, सुबह 04:05 बजे झारसुगुड़ा, राउरकेला, चक्रधरपुर, टाटानगर, खड़गपुर, सांतरागाछी होते हुए दोपहर 2 बजे शालीमार पहुंचेगी।

“केंद्र सरकार के नए नियम: 20 साल तक मान्य रहेगी पुरानी गाड़ियां, लेकिन रजिस्ट्रेशन फीस के लिए देनी होगी इतनी भारी रकम”

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“केंद्र सरकार के नए नियम: 20 साल तक मान्य रहेगी पुरानी गाड़ियां, लेकिन रजिस्ट्रेशन फीस के लिए देनी होगी इतनी भारी रकम”

केंद्र सरकार ने पुराने वाहनों के रजिस्ट्रेशन के नवीनीकरण (Renewal of Registration) की फीस में बड़ा बदलाव किया है। सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने इस संबंध में नया नोटिफिकेशन जारी कर दिया है।

सरकार का कहना है कि इस फैसले का मकसद 15 साल से ज्यादा पुराने वाहनों के इस्तेमाल को सीमित करना और लोगों को समय पर रजिस्ट्रेशन करवाने के लिए प्रोत्साहित करना है।

अब 20 साल तक किया जा सकेगा रजिस्ट्रेशन पहले नियमों के तहत 15 साल तक पुराने वाहनों का ही रजिस्ट्रेशन नवीनीकरण संभव था। लेकिन अब नए प्रावधान के मुताबिक 20 साल तक पुराने वाहन भी दोबारा रजिस्टर्ड किए जा सकेंगे। हालांकि इसके लिए वाहन मालिकों को ज्यादा फीस देनी होगी।

कितनी होगी नई फीस? नए नियमों में अलग-अलग वाहनों के लिए नवीनीकरण शुल्क तय किया गया है। दरें इस प्रकार हैं (GST अलग से देना होगा) :

इनवैलिड कैरिज – 100 मोटरसाइकिल – 2,000 थ्री-व्हीलर/क्वाड्रिसाइकिल – 5,000 लाइट मोटर व्हीकल (जैसे कार) -10,000 इंपोर्टेड मोटर वाहन (2 या 3 पहिया) – 20,000 इंपोर्टेड मोटर वाहन (4 या अधिक पहिया) – 80,000

अन्य वाहन – 12,000 कितने साल तक चल पाएंगे पुराने वाहन? केंद्र सरकार के नए नियमों के मुताबिक, किसी भी वाहन का रजिस्ट्रेशन पहली बार से अधिकतम 20 साल तक किया जा सकेगा। यानी वाहन मालिक को 15 साल पूरे होने के बाद दोबारा रजिस्ट्रेशन कराना होगा और इसके लिए ऊपर बताई गई भारी फीस देनी होगी।

दिल्ली-NCR को मिली छूट ये नियम पूरे देश में लागू होंगे, लेकिन दिल्ली-NCR को इसमें छूट दी गई है। यहां पहले से ही पुराने वाहनों पर कड़ी पाबंदी लागू है। सरकार का कहना है कि इस कदम से प्रदूषण फैलाने वाले और पुराने वाहनों को धीरे-धीरे सड़कों से हटाया जा सकेगा। इससे पर्यावरण संरक्षण और सड़क सुरक्षा में सुधार की उम्मीद है।

“GST में बड़ा बदलाव: अब घर खरीदना होगा सस्ता, जानिए किसे मिलेगा सबसे ज्यादा फायदा”

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“GST में बड़ा बदलाव: अब घर खरीदना होगा सस्ता, जानिए किसे मिलेगा सबसे ज्यादा फायदा”

अगर आप घर खरीदने की सोच रहे हैं तो आपके लिए अच्छी खबर है। केंद्र सरकार जल्द ही एक नई जीएसटी प्रणाली लाने पर विचार कर रही है, जिससे घर बनाना और खरीदना दोनों ही सस्ते हो सकते हैं।

सरकार का लक्ष्य घर बनाने में इस्तेमाल होने वाले सामानों पर लगने वाले टैक्स को आसान और एक समान बनाना है। अभी घर बनाने में इस्तेमाल होने वाली चीज़ों, जैसे सीमेंट, स्टील, पेंट और टाइल्स पर अलग-अलग जीएसटी दरें लागू होती हैं, जो 18% से 28% तक हैं. इससे निर्माण की लागत काफी बढ़ जाती है, जिसका सीधा बोझ आखिर में घर खरीदने वालों पर पड़ता है।

मध्यम वर्ग को मिलेगा सबसे ज़्यादा फायदा अगर सरकार इन टैक्स दरों को कम और एक समान करती है, तो बिल्डरों की लागत घटेगी और वे इस बचत का फायदा ग्राहकों तक पहुंचा सकते हैं। इसका सबसे बड़ा फायदा मध्यम वर्ग को होगा, जो पहले से ही बढ़ती महंगाई से जूझ रहा है. घर की कुल कीमत कम होने से EMI का बोझ भी हल्का हो सकता है।

किफायती घरों पर भी होगी राहत किफायती घरों पर अभी भी सिर्फ 1% जीएसटी लगता है, इसलिए उनमें सीधे तौर पर कोई बड़ा बदलाव नहीं होगा. हालांकि, अगर ‘इनपुट टैक्स क्रेडिट’ (ITC) का नया नियम लागू होता है, तो बिल्डरों को थोड़ी और राहत मिल सकती है, जिससे इन घरों की कीमतों में भी थोड़ी कमी आ सकती है।

महंगे घरों पर पड़ सकता है उल्टा असर जहां एक तरफ मध्यम वर्ग को फायदा होने की उम्मीद है, वहीं लग्जरी घरों पर इसका उल्टा असर पड़ सकता है. अगर महंगे मैटेरियल जैसे इंपोर्टेड फिटिंग्स और फिनिशिंग आइटम्स को ज़्यादा टैक्स स्लैब में डाल दिया गया, तो इन घरों की कीमतें बढ़ सकती हैं. पिछले कुछ सालों में निर्माण लागत में 40% की बढ़ोतरी हुई है, ऐसे में जीएसटी में यह बदलाव बिल्डरों और ग्राहकों दोनों के लिए एक बड़ी राहत साबित हो सकता है।

“Health Insurance से जुड़ी सामने आई बड़ी खबर… IRDAI के इस फैसले के बाद पॉलिसीधारकों को मिलेगा बड़ा फायदा”

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“Health Insurance से जुड़ी सामने आई बड़ी खबर… IRDAI के इस फैसले के बाद पॉलिसीधारकों को मिलेगा बड़ा फायदा”

स्वास्थ्य बीमा अब सिर्फ एक औपचारिकता नहीं, बल्कि हर घर की ज़रूरत बन चुकी है। मगर पिछले कुछ समय से लगातार बढ़ते प्रीमियम रेट्स ने लाखों बीमाधारकों को परेशानी में डाल दिया है।

खासकर कोविड-19 महामारी के बाद, जब अस्पतालों के खर्च और क्लेम की संख्या में तेज़ी से इज़ाफा हुआ, तब से बीमा कंपनियों ने अपने रेट्स में काफी बढ़ोतरी की है। इस बढ़ते बोझ को देखते हुए, भारतीय बीमा नियामक और विकास प्राधिकरण (IRDAI) अब एक बड़ा सुधार लाने की तैयारी में है।

क्या है नया प्रस्ताव? सूत्रों के मुताबिक, IRDAI जल्द ही एक कंसल्टेशन पेपर जारी करने जा रहा है, जिसमें स्वास्थ्य बीमा प्रीमियम में होने वाली बढ़ोतरी को नियमित और नियंत्रित करने के लिए नए नियमों का सुझाव दिया जाएगा। इस प्रस्ताव का मुख्य उद्देश्य यह है कि बीमा कंपनियाँ मनमाने ढंग से प्रीमियम न बढ़ा सकें और बीमा को हर वर्ग के लिए किफायती बनाया जा सके।

IRDAI की प्राथमिकताएं क्या हैं? मेडिकल इन्फ्लेशन के आधार पर प्रीमियम सीमित करना: IRDAI की योजना है कि प्रीमियम दरों की बढ़ोतरी केवल मेडिकल महंगाई (medical inflation) के हिसाब से ही तय की जाए, ताकि बीमा के दाम संगठित और तर्कसंगत बन सकें।

पूरे पोर्टफोलियो के लिए नियम लागू होंगे: यह बदलाव केवल वरिष्ठ नागरिकों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि हर आयु वर्ग और सभी पॉलिसीधारकों पर समान रूप से लागू होगा।

कंपनियों को खर्च नियंत्रण पर देना होगा ध्यान: IRDAI ने बीमा कंपनियों को यह भी सलाह दी है कि वे अपने संचालन खर्च और अस्पतालों के साथ टाई-अप की दरों को नियंत्रित करें, जिससे प्रीमियम बढ़ाने की ज़रूरत ही न पड़े।

senior citizens को पहले ही मिल चुकी है राहत IRDAI ने जनवरी 2025 में एक आदेश जारी कर यह स्पष्ट कर दिया था कि 60 वर्ष से अधिक आयु वाले बीमाधारकों के प्रीमियम में एक साल में 10% से अधिक की वृद्धि नहीं की जा सकती। यदि किसी कारणवश ज्यादा वृद्धि की ज़रूरत हो, तो बीमा कंपनियों को पहले से अनुमति लेनी होगी। इसके अलावा, पूर्व-निर्धारित बीमारियों की वेटिंग पीरियड भी 4 साल से घटाकर 3 साल कर दी गई थी।

हेल्थ इंश्योरेंस मार्केट की मौजूदा स्थिति ICICI Lombard: कुल प्रीमियम का 30% हिस्सा हेल्थ इंश्योरेंस से New India Insurance: 50% तक निर्भरता Go Digit General Insurance: हेल्थ इंश्योरेंस का योगदान केवल 14% इससे साफ है कि हर बीमा कंपनी की हेल्थ इंश्योरेंस पर निर्भरता अलग है, लेकिन यह सेगमेंट सभी के लिए अहम है।

2025 तक, सामान्य बीमा क्षेत्र की कुल प्रीमियम आय का 40% हिस्सा स्वास्थ्य बीमा से आने की संभावना है, जिससे यह क्षेत्र लगातार विस्तार की ओर है। आपके लिए क्या बदलेगा? अगर आप स्वास्थ्य बीमा खरीदने या उसे रिन्यू कराने की योजना बना रहे हैं, तो IRDAI के ये कदम आपके लिए वरदान साबित हो सकते हैं: -प्रीमियम में अनियंत्रित बढ़ोतरी से राहत -लंबी अवधि में पॉलिसी जारी रखना होगा आसान -पारदर्शिता और उपभोक्ता हितों को मिलेगा प्राथमिकता -हेल्थ इंश्योरेंस कंपनियों की जवाबदेही बढ़ेगी

चुनाव से पहले 50,000 लोगों को देंगे नौकरी और रोजगार… बोधगया में मुख्यमंत्री नीतीश का बड़ा ऐलान”

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चुनाव से पहले 50,000 लोगों को देंगे नौकरी और रोजगार… बोधगया में मुख्यमंत्री नीतीश का बड़ा ऐलान”

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार (Nitish Kumar) ने शुक्रवार को बोधगया में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) के साथ मंच साझा करते हुए युवाओं और जन कल्याण के लिए कई महत्वपूर्ण घोषणाएं कीं।

गया जी में जनसभा को संबोधित करते हुए, मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने घोषणा की कि बिहार में एनडीए सरकार बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध है।

पांच वर्षों में एक करोड़ युवाओं को मिलेगी नौकरी नीतीश कुमार ने कहा, “चुनाव से पहले, हम 50,000 और लोगों को नौकरी और रोजगार प्रदान करेंगे। अगले पांच वर्षों में एक करोड़ युवाओं को नौकरी और रोज़गार दिया जाएगा। हमने हमेशा रोज़गार के लिए काम किया है जबकि अन्य (राजद) ने कुछ नहीं किया।” हाल के फैसलों पर प्रकाश डालते हुए, मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि सामाजिक सुरक्षा पेंशन 400 रुपये से बढ़ाकर 1,100 रुपये प्रति माह कर दी गई है।

उन्होंने आगे कहा कि सरकार समाज के सभी वर्गों- महिलाओं, अल्पसंख्यकों और गरीबों के लिए काम कर रही है। उन्होंने कहा, “पहले बिहार की स्थिति बहुत खराब थी। किसी ने महिलाओं या मुसलमानों के लिए काम नहीं किया था। लेकिन हमने सबके लिए काम किया है।”

“प्रधानमंत्री मोदी ने बिहार के लिए बहुत काम किया” मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने याद दिलाया कि 2018 तक हर घर में बिजली पहुंच गई थी। उन्होंने आगे कहा कि बिहारवासियों को प्रति माह 125 यूनिट बिजली पहले ही मुफ्त दी जा चुकी है। मुख्यमंत्री ने जनभावनाओं का सम्मान करते हुए गया का नाम बदलकर गया जी करने, फल्गु नदी पर रबर डैम और पुल का निर्माण, और बोधगया में एक गेस्ट हाउस और अन्य सुविधाओं के विकास सहित अन्य उपलब्धियों का जिक्र किया मुख्यमंत्री ने केंद्र की एनडीए सरकार की प्रशंसा करते हुए कहा कि इस साल के केंद्रीय बजट में बिहार को एक विशेष पैकेज मिला है और राज्य ने खेलो इंडिया यूथ गेम्स की मेजबानी की है। उन्होंने कहा, “बिहार को केंद्र सरकार का पूरा सहयोग मिल रहा है। प्रधानमंत्री मोदी ने बिहार के लिए बहुत काम किया है।”

“मोदी सरकार का गेमिंग सुधार: युवाओं की सुरक्षा के साथ सुरक्षित और जिम्मेदार डिजिटल भविष्य का निर्माण”

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“मोदी सरकार का गेमिंग सुधार: युवाओं की सुरक्षा के साथ सुरक्षित और जिम्मेदार डिजिटल भविष्य का निर्माण”

एक ऐतिहासिक निर्णय के तहत, लोकसभा और राज्यसभा ने ऑनलाइन गेमिंग संवर्धन एवं विनियमन विधेयक, 2025 को पारित कर दिया है। यह विधेयक मोदी सरकार द्वारा अनियमित ऑनलाइन गेमिंग क्षेत्र में बढ़ती समस्याओं से निपटने के लिए प्रस्तुत किया गया एक परिवर्तनकारी कदम है।

केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव के मार्गदर्शन में, यह कानून ई-स्पोर्ट्स और सामाजिक रूप से लाभकारी खेलों को प्रोत्साहित करते हुए रियल-मनी गेमिंग प्लेटफॉर्म्स पर सख्त नियंत्रण लगाता है, जो युवाओं के लिए बड़ी चिंता का विषय बने हुए थे।

रियल-मनी गेमिंग संकट से निपटने की पहल भारत का ऑनलाइन गेमिंग उद्योग पिछले दशक में तेजी से विकसित हुआ है, जिसका कारण किफायती इंटरनेट, स्मार्टफोन की व्यापक पहुंच और फिनटेक सेक्टर का उभार है। 2024 तक भारत में 50 करोड़ से अधिक गेमर्स होने का अनुमान है, जिससे यह दुनिया का सबसे बड़ा गेमिंग बाजार बन जाएगा। हालांकि, वहीं रियल-मनी गेमिंग प्लेटफॉर्म्स—जैसे फ़ैंटेसी क्रिकेट, पोकर, रम्मी और लॉटरी—ने भी खतरनाक वृद्धि देखी है, जिसके सामाजिक और आर्थिक परिणाम विनाशकारी रहे हैं।

ये प्लेटफ़ॉर्म, जहाँ उपयोगकर्ता त्वरित मुनाफे की उम्मीद में पैसा दांव पर लगाते हैं, युवा वर्ग के बीच एक गंभीर सामाजिक समस्या बन गए हैं। विदेशी क्षेत्रों से संचालित ये प्लेटफ़ॉर्म धोखाधड़ी वाले एल्गोरिदम और व्यसनकारी डिज़ाइन का उपयोग कर खिलाड़ियों को फंसाते हैं। खासकर अर्ध-शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों के युवा इनकी जाल में फंस कर कर्ज़ और मानसिक दबाव का शिकार हो रहे हैं, जिससे हर साल 2,000 से अधिक आत्महत्याएं होने की रिपोर्टें सामने आई हैं।

सिर्फ व्यक्तिगत नुकसान ही नहीं, बल्कि 2023-24 में 4,000 करोड़ रुपये से अधिक के सट्टेबाजी घोटाले भी इन प्लेटफ़ॉर्म्स से जुड़े पाए गए हैं। कई ऐसे प्लेटफ़ॉर्म नियामक नियंत्रण से बाहर हैं, कर चोरी करते हैं और मनी लॉन्ड्रिंग के लिए उपयोग किए जा रहे हैं, जिससे राष्ट्रीय सुरक्षा को गंभीर खतरा है। आतंकवाद के वित्तपोषण से जुड़े लिंक भी चिंता का विषय हैं। असंगत राज्य-स्तरीय कानूनों के कारण समस्याएं और बढ़ गई हैं, जिससे एक केंद्रीय, व्यापक विनियमन की आवश्यकता और भी स्पष्ट हो गई है।

मजबूत विनियमन और संरक्षण का ढाँचा ऑनलाइन गेमिंग संवर्धन एवं विनियमन विधेयक, 2025 नवाचार और सुरक्षा के बीच संतुलन स्थापित करता है। यह कानून पैसे से जुड़े सभी ऑनलाइन खेलों पर पूर्ण प्रतिबंध लगाता है, चाहे वे कौशल आधारित हों या संयोग पर। विशेष रूप से फ़ैंटेसी स्पोर्ट्स, पोकर और रम्मी जैसे प्लेटफ़ॉर्म्स को निशाना बनाया गया है। विधेयक में ऐसे प्लेटफॉर्म्स के विज्ञापन पर भी रोक लगाई गई है, जिनमें मशहूर हस्तियों, एथलीटों और प्रभावशाली लोगों द्वारा प्रचार शामिल है, जो युवा खिलाड़ियों को आकर्षित करते थे।

वित्तीय प्रतिबंध और कड़े दंड विधेयक के तहत बैंकों, वित्तीय संस्थानों और भुगतान माध्यमों को रियल-मनी गेमिंग से जुड़े लेनदेन को रोकना अनिवार्य होगा, जिससे इन प्लेटफ़ॉर्म्स की आर्थिक गतिविधियां ठप्प हो जाएंगी। उल्लंघन करने पर 3 साल तक की जेल और 1 करोड़ रुपये तक का जुर्माना हो सकता है। बार-बार अपराध करने वालों को 5 साल तक की कैद और 2 करोड़ रुपये तक का जुर्माना भुगतना पड़ेगा। कंपनियों के जिम्मेदार अधिकारियों को भी दंड का सामना करना होगा।

राष्ट्रीय ऑनलाइन गेमिंग प्राधिकरण की स्थापना विधेयक के तहत एक राष्ट्रीय ऑनलाइन गेमिंग प्राधिकरण की स्थापना होगी, जिसका प्रारंभिक व्यय 50 करोड़ रुपये और वार्षिक खर्च 20 करोड़ रुपये होगा। यह प्राधिकरण राज्य सरकारों के साथ समन्वय करेगा, दिशानिर्देश जारी करेगा, शिकायतों का निवारण करेगा और खेलों का आयु-आधारित वर्गीकरण सुनिश्चित करेगा। प्राधिकृत अधिकारियों को सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 के तहत बिना वारंट के तलाशी लेने, संपत्ति जब्त करने और गैर-अनुपालन प्लेटफॉर्म ब्लॉक करने का अधिकार होगा, जो भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 के अनुरूप होगा।

ई-स्पोर्ट्स और सोशल गेमिंग को बढ़ावा विधेयक ई-स्पोर्ट्स और सामाजिक रूप से लाभकारी खेलों को बढ़ावा देता है, साथ ही हानिकारक गेमिंग प्रथाओं पर कड़ा नियंत्रण भी करता है। ई-स्पोर्ट्स को वैध प्रतिस्पर्धी खेल के रूप में मान्यता मिली है, और युवा मामले एवं खेल मंत्रालय को प्रशिक्षण अकादमी, दिशानिर्देश तथा प्रोत्साहन योजनाएं संचालित करने का दायित्व दिया गया है।

साथ ही, इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) और सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय (MIB) सामाजिक एवं शैक्षिक खेलों के विकास की देखरेख करेंगे। विधेयक में खिलाड़ियों को अपराधी नहीं बल्कि पीड़ित माना गया है और उपभोक्ता संरक्षण हेतु आयु सत्यापन, व्यय सीमा और शिकायत निवारण व्यवस्था को अनिवार्य किया गया है।

राजस्व से ऊपर युवाओं का कल्याण मोदी सरकार ने आर्थिक लाभ से ऊपर युवाओं के कल्याण को प्राथमिकता दी है। जहां ऑनलाइन गेमिंग क्षेत्र 31,000 करोड़ रुपये का राजस्व, 20,000 करोड़ रुपये का कर और 25,000 करोड़ रुपये का प्रत्यक्ष विदेशी निवेश उत्पन्न करता है, वहीं इसके सामाजिक दुष्परिणाम अत्यंत गंभीर हैं।

भारत के 55 करोड़ गेमर्स में से 60 प्रतिशत 25 वर्ष से कम आयु के हैं, जो रियल-मनी गेमिंग के व्यसनकारी डिज़ाइनों के प्रति विशेष रूप से संवेदनशील हैं। सरकार इस युवा वर्ग को वित्तीय नुकसान, मानसिक स्वास्थ्य संकट और सामाजिक विघटन से बचाने के लिए प्रतिबद्ध है।

यह विधेयक विदेशी प्लेटफ़ॉर्म से जुड़े वित्तीय अपराधों और राष्ट्रीय सुरक्षा के जोखिमों को भी कम करता है, और भारत के डिजिटल नियमों को वैश्विक मानकों के अनुरूप बनाता है। चीन, यूरोप और अमेरिका जैसे देशों ने भी ऑनलाइन गेमिंग पर नियंत्रण लगाया है, और भारत इस दिशा में ज़िम्मेदार डिजिटल शासन का नेतृत्व कर रहा है।

नवाचार और रोजगार के अवसर ई-स्पोर्ट्स और सोशल गेमिंग को प्रोत्साहित करके सरकार नवाचार को बढ़ावा दे रही है, जिससे 2027 तक 2 लाख से अधिक रोजगार सृजित होने और भारत को वैश्विक ई-स्पोर्ट्स केंद्र बनाने की संभावना है। यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उस दृष्टिकोण के अनुरूप है, जिसमें भारत की सांस्कृतिक विरासत को उपयोग में लाकर वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी गेमिंग उत्पाद विकसित किए जाएं।

विपक्ष की आपत्तियां और सरकार का पक्ष विपक्षी नेता कार्ति चिदंबरम और प्रियांक खड़गे सहित कई आलोचक इस प्रतिबंध को व्यापक मानते हुए चिंतित हैं कि इससे उपयोगकर्ता अनियमित विदेशी प्लेटफ़ॉर्म्स की ओर आकर्षित हो सकते हैं, जिससे डेटा चोरी, वित्तीय धोखाधड़ी और कर राजस्व व रोजगार पर नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। हालांकि, सरकार का कहना है कि सामाजिक और मानसिक स्वास्थ्य पर इसके लाभ आर्थिक नुकसानों से कहीं अधिक हैं। विधेयक के सख्त प्रवर्तन तंत्र का उद्देश्य कालाबाज़ारी और धोखाधड़ी पर कड़ा अंकुश लगाना है।

सुरक्षित डिजिटल भारत की ओर एक बड़ा कदम ऑनलाइन गेमिंग संवर्धन एवं विनियमन विधेयक, 2025, भारत के डिजिटल क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित होगा। वास्तविक धन वाले गेमिंग पर कठोर प्रतिबंध, सख्त दंड और ई-स्पोर्ट्स व सोशल गेमिंग के लिए मजबूत पारिस्थितिकी तंत्र स्थापित करके मोदी सरकार ने युवाओं को वित्तीय और मानसिक शोषण से बचाने का एक साहसिक कदम उठाया है।

यह विधेयक सामाजिक स्थिरता और राष्ट्रीय सुरक्षा पर गहरा प्रभाव डालेगा और एक ज़िम्मेदार, नवाचार-प्रधान गेमिंग उद्योग के लिए रास्ता खोलेगा, जिससे भारत का डिजिटल भविष्य सुरक्षित और उज्जवल बनेगा।

रेल यात्रियों की बल्ले-बल्ले! दिवाली-छठ पर चलेंगी 12,000 विशेष ट्रेनें, वापसी टिकट पर 20% छूट”

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रेल यात्रियों की बल्ले-बल्ले! दिवाली-छठ पर चलेंगी 12,000 विशेष ट्रेनें, वापसी टिकट पर 20% छूट”

दीपावली और छठ पूजा के दौरान घर जाने वाले यात्रियों के लिए भारतीय रेलवे ने एक बड़ा ऐलान किया है। रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने घोषणा की है कि इस साल त्योहारों के मौसम में 12,000 से भी ज़्यादा स्पेशल ट्रेनें चलाई जाएंगी।

इसके साथ ही, यात्रियों को उनकी वापसी यात्रा पर 20% की छूट भी मिलेगी, ताकि उन्हें लौटने में कोई परेशानी न हो।

रेल मंत्री ने बिहार के उपमुख्यमंत्री और अन्य वरिष्ठ नेताओं के साथ मिलकर यह फैसला लिया है। उनका कहना है कि इस कदम से लाखों यात्रियों को आसानी से अपने घर आने-जाने में मदद मिलेगी।

क्या हैं खास इंतजाम?

12,000 से ज़्यादा स्पेशल ट्रेनें: ये ट्रेनें 13 से 26 अक्टूबर के बीच आने और 17 नवंबर से 1 दिसंबर के बीच वापसी यात्रा करने वालों के लिए चलाई जाएंगी।

20% छूट: इन ट्रेनों में वापसी की टिकट पर यात्रियों को 20% की छूट मिलेगी, जिससे उनका सफर और भी किफायती हो जाएगा।

नई अमृत भारत एक्सप्रेस: गया से दिल्ली, सहरसा से अमृतसर, छपरा से दिल्ली और मुजफ्फरपुर से हैदराबाद के लिए चार नई अमृत भारत एक्सप्रेस ट्रेनें शुरू की जाएंगी।

नई सर्किट ट्रेन: बौद्ध स्थलों को जोड़ने के लिए एक नई सर्किट ट्रेन भी चलाई जाएगी, जो वैशाली, हाजीपुर, सोनपुर, पटना, राजगीर, गया और कोडरमा जैसे महत्वपूर्ण शहरों से होकर गुज़रेगी।

नए रेल प्रोजेक्ट: बक्सर-लखीसराय रेलखंड को चार लाइनों का बनाया जाएगा और पटना के चारों ओर एक रिंग रेलवे सिस्टम भी विकसित किया जाएगा। इसके अलावा, सुल्तानगंज और देवघर को भी रेल से जोड़ा जाएगा।

 

“अमित शाह ने विपक्ष के उपराष्ट्रपति पद के उम्मीदवार रेड्डी पर नक्सलवाद के समर्थन का आरोप लगाया”

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“अमित शाह ने विपक्ष के उपराष्ट्रपति पद के उम्मीदवार रेड्डी पर नक्सलवाद के समर्थन का आरोप लगाया”

केंद्रीय गृह मंत्री और वरिष्ठ भाजपा नेता अमित शाह ने शुक्रवार को कांग्रेस नीत गठबंधन के उपराष्ट्रपति पद के उम्मीदवार न्यायमूर्ति बी. सुदर्शन रेड्डी पर नक्सलवाद का ‘समर्थन’ करने का आरोप लगाया और कहा कि अगर उन्होंने सलवा जुडूम पर फैसला नहीं सुनाया होता, तो देश में माओवाद 2020 से पहले ही समाप्त हो गया होता।

वह शुक्रवार को मलयाला मनोरमा समूह द्वारा आयोजित मनोरमा न्यूज़ कॉन्क्लेव का उद्घाटन करने के बाद बोल रहे थे। शाह ने कहा कि कांग्रेस द्वारा उपराष्ट्रपति पद के लिए उम्मीदवार चुने जाने से केरल में पार्टी की जीत की संभावना और कम हो गई है।

शर्मनाक घटना! बेटे से जिंदगी की भीख मांगता रहा पिता, संपत्ति के लालच में अंधे बेटे ने बाप के गले में घोंप दी छेनी शाह ने कॉन्क्लेव के तहत प्रश्नोत्तर सत्र के दौरान सलवा जुडूम पर 2011 के उच्चतम न्यायालय के फैसले का हवाला देते हुए कहा, ”सुदर्शन रेड्डी वही व्यक्ति हैं जिन्होंने नक्सलवाद की मदद की। उन्होंने सलवा जुडूम पर फैसला सुनाया। अगर सलवा जुडूम पर फैसला नहीं सुनाया गया होता, तो नक्सली आतंकवाद 2020 तक खत्म हो गया होता। वह वही व्यक्ति हैं जो सलवा जुडूम पर फैसला देने वाली विचारधारा से प्रेरित थे।” दिसंबर 2011 में, उच्चतम न्यायालय के न्यायमूर्ति रेड्डी ने फैसला सुनाया था कि माओवादी विद्रोहियों के खिलाफ लड़ाई में आदिवासी युवाओं को विशेष पुलिस अधिकारियों के रूप में इस्तेमाल करना – चाहे उन्हें ‘कोया कमांडो’ कहा जाए, सलवा जुडूम कहा जाए या किसी अन्य नाम से पुकारा जाए – गैरकानूनी और असंवैधानिक है। उन्होंने यह आदेश भी दिया था इनसे तुरंत हथियार लिए जाएं। शाह ने कहा कि केरल ने नक्सलवाद का दंश झेला है।

गृह मंत्री ने कहा, ”केरल के लोग निश्चित रूप से देखेंगे कि कांग्रेस पार्टी, वामपंथी दलों के दबाव में, एक ऐसे उम्मीदवार को मैदान में उतार रही है जिसने नक्सलवाद का समर्थन किया और उच्चतम न्यायालय जैसे पवित्र मंच का इस्तेमाल किया।” सत्तारूढ़ राजग ने महाराष्ट्र के राज्यपाल सी.पी. राधाकृष्णन को उपराष्ट्रपति पद का उम्मीदवार चुना है, जो राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) की पृष्ठभूमि वाले तमिलनाडु के एक वरिष्ठ भाजपा नेता हैं। गंभीर आपराधिक आरोपों में गिरफ्तारी के बाद 30 दिन तक हिरासत में रहने पर प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्रियों और मंत्रियों को हटाने के प्रस्ताव वाले विधेयक लोकसभा में पेश किए जाने के बारे में पूछे जाने पर शाह ने कहा, ”इस मामले पर और कुछ कहने की जरूरत नहीं है। मैंने संसद में देश की जनता से पूछा है: क्या वे चाहते हैं कि प्रधानमंत्री जेल से सरकार चलाएं? यह कैसी बहस है? यह नैतिकता का सवाल है। अब वे पूछ रहे हैं कि इसे पहले संविधान में क्यों नहीं शामिल किया गया। जब संविधान का मसौदा तैयार किया गया था, तब यह अनुमान नहीं लगाया गया था कि जेल जा चुके लोग निर्वाचित पदों पर बने रहेंगे।”

स्टडी में बड़ा खुलासा: पुरुषों के लिए Silent killer हैं ये बीमारियां, कहीं आप भी तो नहीं कर रहे ये गलतियां? गृह मंत्री ने दिल्ली के मुख्यमंत्री रहते हुए भ्रष्टाचार के आरोपों में अरविंद केजरीवाल की गिरफ्तारी और जेल जाने के बाद उनके इस्तीफा देने से इनकार करने का ज़िक्र किया। शाह ने कहा, ”एक ऐसी घटना हुई थी जहां एक मुख्यमंत्री जेल से सरकार चला रहे थे। तो क्या संविधान में संशोधन होना चाहिए या नहीं? उस समय भी भाजपा की सरकार थी, लेकिन हमें ऐसी स्थिति का सामना नहीं करना पड़ा।” उन्होंने यह भी संकेत दिया कि अगर केजरीवाल ने अपनी गिरफ्तारी के बाद इस्तीफा दे दिया होता, तो यह नया विधेयक पेश नहीं किया जाता। उन्होंने राहुल गांधी पर भी निशाना साधा और दावा किया कि कांग्रेस नेता ने 2013 में मनमोहन सिंह के नेतृत्व वाली संप्रग सरकार द्वारा पेश किए गए एक अध्यादेश को फाड़ दिया था, जिसका उद्देश्य अयोग्य ठहराए गए या किसी अपराध के लिए दोषी ठहराए गए सांसदों और विधायकों को राहत प्रदान करना था। शाह ने कहा, ”उस समय, मनमोहन सिंह द्वारा लालू प्रसाद की मदद के लिए यह अध्यादेश लाया गया था। राहुल गांधी ने नैतिकता के नाम पर कैबिनेट द्वारा अनुमोदित अध्यादेश की प्रति सार्वजनिक रूप से फाड़ दी थी। वही राहुल गांधी अब गांधी मैदान में लालू जी को गले लगाते हुए दिखाई दे रहे हैं।”

‘वोट चोरी’ के आरोप के बारे में, गृह मंत्री ने कहा कि राहुल के कांग्रेस नेतृत्व में शामिल होने के बाद, वे संवैधानिक मामलों को संदेह की दृष्टि से देखते हैं। बिहार में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के संदर्भ में शाह ने कांग्रेस पर इस प्रक्रिया को लेकर अनावश्यक विवाद पैदा करने का आरोप लगाया। उन्होंने दावा किया कि कांग्रेस के पास निर्वाचन क्षेत्र, ज़िला और राज्य स्तर पर आपत्तियां उठाने का अवसर था, लेकिन उसने अब तक एसआईआर पर कोई शिकायत दर्ज नहीं कराई है। अन्य राज्यों में एसआईआर के कार्यान्वयन के बारे में उन्होंने कहा कि यह निर्वाचन आयोग को तय करना है। उन्होंने कहा, ”निर्वाचन आयोग ने पूरे देश में एसआईआर कराने का फैसला किया है। बिहार की मतदाता सूची में ऐसे 22 लाख लोगों के नाम थे जिनकी मृत्यु हो चुकी है। फर्जी वोट डाले जाने की संभावना है। तो क्या उनके नाम हटाए जाने चाहिए या नहीं? यह सामान्य ज्ञान की बात है।”

“एक गांव, दो कुएं, पानी भरने गई महिला, अंदर से आ रही थी बद्बू, फिर कपड़े में लिपटी दिखी ऐसी चीज, निकल गई चीख”

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“एक गांव, दो कुएं, पानी भरने गई महिला, अंदर से आ रही थी बद्बू, फिर कपड़े में लिपटी दिखी ऐसी चीज, निकल गई चीख”

दुर्ग: छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले का खम्हरिया गांव, यहां के गांव वालों पानी के लिए गुजर-बसर गावं के ही दो कुएं से होता है. रविवार की सुबह खम्हरिया गांव की एक महिला कुएं से पानी भरने गई. उसे कुएं से तेज दुर्गंध आई, तो उसने तुरंत गांव वालों को बताया.

गांव वालों ने अमलेश्वर थाना पुलिस को सूचना दी. पुलिस की टीम तुरंत मौके पर पहुंची और गोताखोरों को कुएं में उतारा गया. कुछ देर बाद गोताखोरों ने एक बोरी निकाली. जब बोरी खोली गई तो सबके होश उड़ गए. उसमें एक 10-12 साल के बच्चे का शव था. बच्चे के हाथ-पैर रस्सियों से बंधे थे और शरीर कपड़े में लपेटा हुआ था.

फिर मिला एक और महिला का शव पुलिस अभी इस मामले की जांच कर ही रही थी कि तभी एक और खबर ने सबको चौंका दिया. उसी कुएं से महज 30 मीटर दूर एक दूसरे कुएं में भी एक बोरी होने की सूचना मिली. पुलिस ने तुरंत दूसरा कुआं खंगाला. गोताखोरों ने उस कुएं से भी एक बोरी निकाली. इस बोरी में एक 30-35 साल की महिला का शव था. उसका शव भी उसी तरह बंधा हुआ था, जैसे बच्चे का था. महिला का शव भी कपड़े में लपेटकर बोरी में बंद था और बोरी में पत्थर बंधे थे.

कुएं में मिली औरत और बच्चे की लाश फोरेंसिक टीम कर रही जांच एक के बाद एक दो शव मिलने से गांव में दहशत फैल गई. पुलिस महकमे में भी हड़कंप मच गया. दुर्ग के एसएसपी विजय अग्रवाल खुद मौके पर पहुंचे. उन्होंने बताया कि दोनों शव करीब एक दिन पुराने लग रहे हैं. दोनों को एक ही तरह से बांधकर कुएं में फेंका गया है. यह देखकर लगता है कि दोनों शवों का आपस में कोई न कोई संबंध जरूर है. पुलिस ने तुरंत फोरेंसिक टीम को बुलाया. टीम ने घटनास्थल से सबूत इकट्ठा किए हैं और दोनों शवों की पहचान करने की कोशिश शुरू की गई.